स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़

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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>स्वाइन-फ्लू: Its an American mistake which the world is now facing…

>मुझे कुछ दिन पहले एक ईमेल प्राप्त हुआ जिसे मेरे मित्र खुर्शीद ने भेजा था और जिसे उनको उनके मित्र जनाब फैसल मालिक (Mobile:-+91-9873937056) जो कि पेशे से इंजिनियर हैं, ने भेजा था. मैंने सोचा क्यूँ न देश-हित में इसे एक सन्देश बना दिया जाये. मैं खुर्शीद जी और फैसल जी का शुक्र गुजार हूँ…

देखिये, जैसा कि हम सभी जानते हैं कि सुवर दुनिया का सबसे गन्दा, घिनौना, और बेशर्म जानवर है. इसे ईश्वर ने केवल गन्दगी साफ़ करने के लिए ही बनाया ही और उसका स्थान जो होना चाहिए वही रहता तो शायेद आज दुनिया भर में स्वाइन फ्लू जैसी बीमारी न फ़ैल पति और सैकडों लोगों की जाने बच सकती थी.

ख़ैर , आप स्वयं देखिये और विश्लेषित कीजिये…..
















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>सूअर सबसे निर्लज्ज और बेशर्म जानवर है

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“इस धरती पर सूअर सबसे निर्लज्ज और बेशर्म जानवर है केवल यही एक ऐसा जानवर है जो अपने साथियों को बुलाता है कि वे आयें और उसकी मादा के साथ यौन इच्छा को पूरी करें अमेरिका में प्रायः लोग सूअर का माँस खाते है परिणामस्वरुप ऐसा कई बार होता है कि ये लोग डांस पार्टी के बाद आपस में अपनी बीवियों की अदला बदली करते हैं अर्थात एक व्यक्ति दुसरे व्यक्ति से कहता है कि मेरी पत्नी के साथ तुम रात गुज़ारो और मैं तुम्हारी पत्नी के साथ रात गुज़ारुन्गा (फिर वे व्यावहारिक रूप से ऐसा करते है) अगर आप सूअर का माँस खायेंगे तो सूअर की सी आदतें आपके अन्दर पैदा होंगी हम भारतवासी अमेरिकियों को बहुत विकसित और साफ़ सुथरा समझते हैं वे जो कुछ करते हैं हम भारतवासी भी उसे कुछ वर्षों बाद करने लगते हैं Island पत्रिका में प्रकाशित लेख के अनुसार पत्नियों की अदला बदली की यह प्रथा मुंबई में उच्च और सामान्य वर्ग के लोगों में आम हो चुकी है

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>सूअर का माँस खाना क्यूँ मना है? Why Pork is prohibited?

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(आओ उस बात की तरफ जो हममे और तुममे यकसां (समान) हैं)

इस बार थोडा अलग मगर वास्तविकता के बेहद करीब, यह लेख आप ज़रूर पढ़े, मेरा निवेदन है कि आप ज़रूर पढें और पढने से ज्यादा समझें क्यूँकि केवल पढने से ज़रूरी है उसको पढ़ कर समझना | लेकिन होता क्या है कुछ लोग अगर उनके मतलब का लेख नहीं होता है तो उसे या तो पढ़ते ही नहीं हैं और अगर पढ़ते भी हैं तो बिना जाने बूझे अनाप शनाप कमेंट्स कर देते हैं | उदहारण स्वरुप अगर किसी ने लिखा कि मांसाहार खाना जायज़ है| तो उसके फलस्वरूप उस विषय के विरोध में बहुत कुछ अनाप शनाप बातें लिख डालते है | अपनी बातें बेतुके तर्कों से भर कर सिद्ध कर देतें हैं, मगर वहीँ कुछ लोग अपनी बात सही ढंग से लिखते हैं | मैं मानता हूँ कि मुझे अभी पूर्ण जानकारी हर एक विषय में नहीं है और मैं अभी लेखन में और ब्लॉग में नया और शिशु मात्र हूँ, मगर मुझे इतना पता है कि मैं जो लिखता हूँ वो सत्य है ! अब आप ज़रूर उद्वेलित होंगे कि वाह सलीम बाबू ! आप जो भी लिखते हैं वो सत्य है और बाकी सब झूठ| तो जनाब मेरा हमेशा की तरह एक ही जवाब मैं जो भी लिखता हूँ वो इसलिए सत्य है क्यूंकि मैं केवल वेदों, पुराण, भविष्य पुराण और कुरआन, हदीश और बाइबल आदि में दिए गए विषयों की व्याख्या करता हूँ.


ख़ैर ! मैं बात कर रहा था सूअर का माँस खाना क्यूँ मना है?

मैं इस विषय पर बिन्दुवार आपको सम्बंधित धर्म ग्रन्थों का हवाला देते हुए समझाने का प्रयास करूँगा कि सूअर का माँस खाना क्यूँ हराम (निषेध) है?

कुरआन में सूअर का माँस का निषेध :

हम सबको पता है कि सूअर का माँस मुख्य रूप से इस्लाम में बिल्कुल ही मना (हराम, निषेध) है | कुरआन में कम से कम चार जगहों पर सूअर के माँस के प्रयोग को हराम और निषेध ठहराया गया है | हवाले के लिए देखें कुरआन की आयतें 2:173, 5:3, 6:145 & 16:115

पवित्र कुरआन की निम्न आयत इस बात को स्पष्ट करने को काफी है सूअर का माँस क्यूँ हराम किया गया है:

तुम्हारे लिए (खाना) हराम (निषेध) किया गया मुर्दार, खून, सूअर का माँस और वह खाना जिस पर अल्लाह के अलावा किसी और का नाम लिया गया हो ” – कुरआन 5:3

बाइबल में सूअर का माँस का निषेध:

ईसाईयों को यह बात उनके धार्मिक ग्रन्थ के हवाले से समझाई जा सकती है कि सूअर माँस हराम है | बाइबल में सूअर के माँस के निषेध का उल्लेख लैव्य व्यवस्था (Book of Leviticus) में हुआ है-

सूअर जो चिरे अर्थात फटे खुर का होता है, परन्तु पागुर नहीं करता इसलिए वह तुम्हारे लिए अशुद्ध है” “इनके माँस में से कुछ ना खाना और उनकी लोथ को छूना भी नहीं, ये तुम्हारे लिए अशुद्ध हैं” -लैव्य व्यवस्था (11/7-8)

इसी प्रकार बाइबल के व्यवस्था विवरण (Book of Deuteronomy) में भी सूअर के माँस के निषेध का उल्लेख किया गया है-

फिर सूअर जो चिरे खुर का होता है, परन्तु पागुर नहीं करता, इस कारण वह तुम्हारे लिए अशुद्ध है| तुम ना तो इनका माँस खाना और ना ही इनकी लोथ को छूना” – व्यवस्था विवरण (14/8)

सूअर का माँस बहुत से रोगों का कारण है:

ईसाईयों के अलावा जो अन्य गैर-मुस्लिम, हिन्दू या नास्तिक लोग है वे सूअर के माँस के हराम होने के सम्बन्ध में बुद्धि, तर्क और विज्ञानं के हवालों से ही संतुष्ट हो सकते हैं. सूअर के माँस से कम से कम सत्तर विभिन्न रोग जन्म लेते हैं. किसी व्यक्ति के शरीर में विभिन्न प्रकार के कीड़े (Helminthes) हो सकते हैं, जैसे गोलाकार कीड़े, नुकीले कीड़े, फीता क्रीमी आदि. सबसे ज्यादा घातक कीड़ा Taenia Solium है जिसे आम लोग फीताकार कीड़ा (Tapworm) कहते हैं. यह कीड़ा बहुत लम्बा होता है और आंतों में रहता है| इसके अंडे खून में सम्मिलित होकर शरीर के लगभग सभी अंगों तक पहुँच जाते हैं. अगर यह कीड़ा दिमाग में चला गया तो इन्सान की स्मरणशक्ति ख़त्म हो जाती है. अगर वह दिल में प्रवेश कर जाये तो इन्सान की ह्रदय गति रुक जाने का ख़तरा हो जाता है. अगर यह कीड़ा आँखों में पहुँच जाये तो इन्सान की देखने की क्षमता समाप्त कर देता है| अगर यह जिगर में में पहुँच जाये तो बहुत भारी क्षति पहुँचाता है. इस प्रकार यह कीड़ा शरीर के अंगों को क्षति पहुँचाने की क्षमता रखता है| एक दूसरा कीड़ा Trichura Tichurasis है.

सूअर के माँस के बारे में यह भ्रम है कि अगर उसे अच्छी तरह पका लिया जाये उसके भीतर पनप रहे उपरोक्त कीडों के अंडे नष्ट हो जाते हैं| अमेरिका में किये गए एक चिकित्सीय शोध में यह बात सामने आयी है कि चौबीस व्यक्तियों में से जो लोग Trichura Tichurasis के शिकार थे, उनमें से 22 लोगों ने सूअर के माँस को अच्छी तरह से पकाया था | इससे मालूम हुआ कि सामान्य ताप में सूअर का माँस पकाने से भी यह घातक अंडे समाप्त नहीं होते ना ही नष्ट हो पाते हैं.

सूअर के माँस में मोटापा पैदा करने वाले वाले तत्व पाए जाते हैं:

सूअर के माँस में पुट्ठों को मज़बूत करने वाले तत्व बहुत कम पाए जाते हैं, इसके विपरीत मोटापे को पैदा करने वाले तत्व बहुत ज्यादा पाए जातें हैं | मोटापा पैदा करने वाले ये तत्व खून की नाणीयों में दाखिल हो जाते हैं और हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) और हार्ट अटैक (दिल के दौरे) का कारण बनते हैं| इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं कि पचास प्रतिशत से अधिक अमेरिकी लोग हाईपरटेंशन (अत्यंत मानसिक तनाव) के शिकार हैं और इसका मुख्य कारण है कि यह लोग सूअर का माँस प्रयोग करते हैं.

कुछ लोग यह तर्क प्रस्तुत करते है कि सूअर का पालन पोषण अत्यंत साफ़ सुथरे ढंग से और स्वास्थ्य सुरक्षा को दृष्टि में रखते हुए अनुकूल माहौल में किया जाता है| यह बात ठीक है कि स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अनुकूल और स्वच्छ वातावरण में सूअरों को एक साथ उनके बाड़े में रखा जाता है| आप चाहे उन्हें स्वच्छ रखने की कितनी भी कोशिश करें परन्तु वास्तविकता यह है कि प्राकृतिक रूप से उनके अन्दर गन्दगी पसंदी मौजूद रहती है| इसलिए वे अपने शरीर और अन्य सूअरों के शरीर से निकली गन्दगी का सेवन करने से भी नहीं चूकते.

सूअर संसार का सबसे गन्दा और घिनौना जानवर है: सूअर ज़मीन पर पाए जाने वाला सबसे गन्दा और घिनौना जानवर है | वह जानवरों और इन्सान के बदन से निकलने वाली गन्दगी का सेवन करके जीता और पलता-बढ़ता है| इस जानवर को खुदा ने गंदगियों को साफ़ करने के उद्देश्य से पैदा किया है| गाँव और देहातों में जहाँ लोगों के लिए आधुनिक शौचालय नहीं है और लोग इस कारणवश खुले वातावरण (खेत, जंगल आदि) में शौच करते हैं, अधिकतर यह जानवर सूअर ही इन गंदगियों को साफ़ करता है.

सूअर सबसे निर्लज्ज और बेशर्म जानवर है:

इस धरती पर सूअर सबसे निर्लज्ज और बेशर्म जानवर है| केवल यही एक ऐसा जानवर है जो अपने साथियों को बुलाता है कि वे आयें और उसकी मादा के साथ यौन इच्छा को पूरी करें| अमेरिका में प्रायः लोग सूअर का माँस खाते है परिणामस्वरुप ऐसा कई बार होता है कि ये लोग डांस पार्टी के बाद आपस में अपनी बीवियों की अदला बदली करते हैं अर्थात एक व्यक्ति दुसरे व्यक्ति से कहता है कि मेरी पत्नी के साथ तुम रात गुज़ारो और मैं तुम्हारी पत्नी के साथ रात गुज़ारुन्गा (फिर वे व्यावहारिक रूप से ऐसा करते है)| अगर आप सूअर का माँस खायेंगे तो सूअर की सी आदतें आपके अन्दर पैदा होंगी. हम भारतवासी अमेरिकियों को बहुत विकसित और साफ़ सुथरा समझते हैं | वे जो कुछ करते हैं हम भारतवासी भी उसे कुछ वर्षों बाद करने लगते हैं| Island पत्रिका में प्रकाशित लेख के अनुसार मुंबई में भी पत्नियों की अदला बदली की यह प्रथा उच्च और सामान्य वर्ग के लोगों में आम हो चुकी है.

आपकी टिप्पणियों का स्वागत है!
सलीम खान

Filed under: माँसाहार, माँसाहार या शाकाहार, शाकाहार, सुअर, सुवर

>सूअर का माँस खाना क्यूँ मना है?

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“इस बार थोडा अलग मगर वास्तविकता के बेहद करीब, यह लेख आप ज़रूर पढ़े, मेरा निवेदन है कि आप ज़रूर पढें और पढने से ज्यादा समझें क्यूँकि केवल पढने से ज़रूरी है उसको पढ़ कर समझना | लेकिन होता क्या है कुछ लोग अगर उनके मतलब का लेख नहीं होता है तो उसे या तो पढ़ते ही नहीं हैं और अगर पढ़ते भी हैं तो बिना जाने बूझे अनाप शनाप कमेंट्स कर देते हैं | उदहारण स्वरुप अगर किसी ने लिखा कि मांसाहार खाना जायज़ है| तो उसके फलस्वरूप उस विषय के विरोध में बहुत कुछ अनाप शनाप बातें लिख डालते है | अपनी बातें बेतुके तर्कों से भर कर सिद्ध कर देतें हैं, मगर वहीँ कुछ लोग अपनी बात सही ढंग से लिखते हैं | मैं मानता हूँ कि मुझे अभी पूर्ण जानकारी हर एक विषय में नहीं है और मैं अभी लेखन में और ब्लॉग में नया और शिशु मात्र हूँ, मगर मुझे इतना पता है कि मैं जो लिखता हूँ वो सत्य है ! अब आप ज़रूर उद्वेलित होंगे कि वाह सलीम बाबू ! आप जो भी लिखते हैं वो सत्य है और बाकी सब झूठ| तो जनाब मेरा हमेशा की तरह एक ही जवाब मैं जो भी लिखता हूँ वो इसलिए सत्य है क्यूंकि मैं केवल वेदों, पुराण, भविष्य पुराण और कुरान, हदीश और बाइबल आदि में दिए गए विषयों की व्याख्या करता हूँ |”

खैर ! मैं बात कर रहा था सूअर का माँस खाना क्यूँ मना है?  


मैं इस विषय पर बिन्दुवार आपको सम्बंधित धर्म ग्रन्थों का हवाला देते हुए समझाने का प्रयास करूँगा कि सूअर का माँस खाना क्यूँ हराम (निषेध) है?

कुरान में सूअर का माँस का निषेध : 
हम सबको पता है कि सूअर का माँस मुख्य रूप से इस्लाम में बिल्कुल ही मना (हराम, निषेध) है | कुरान में कम से कम चार जगहों पर सूअर के माँस के प्रयोग को हराम और निषेध ठहराया गया है | हवाले के लिए देखें कुरान की आयतें 2:173, 5:3, 6:145 aur 16:115  
पवित्र कुरान की निम्न आयत इस बात को स्पष्ट करने को काफी है सूअर का माँस क्यूँ हराम किया गया है: “तुम्हारे लिए (खाना) हराम (निषेध) किया गया मुर्दार, खून, सूअर का माँस और वह जानवर जिस पर अल्लाह के अलावा किसी और का नाम लिया गया हो ” – कुरान 5:3
बाइबल में सूअर का माँस का निषेध:
ईसाईयों को यह बात उनके धार्मिक ग्रन्थ के हवाले से समझाई जा सकती है कि सूअर माँस हराम है | बाइबल में सूअर के माँस के निषेध का उल्लेख लैव्य व्यवस्था (Book of Leviticus) में हुआ है-

“सूअर जो चिरे अर्थात फटे खुर का होता है, परन्तु पागुर नहीं करता इसलिए वह तुम्हारे लिए अशुद्ध है” “इनके माँस में से कुछ ना खाना और उनकी लोथ को छूना भी नहीं, ये तुम्हारे लिए अशुद्ध हैं|” -लैव्य व्यवस्था (11/7-8) 
इसी प्रकार बाइबल के व्यवस्था विवरण (Book of Deuteronomy) में भी सूअर के माँस के निषेध का उल्लेख किया गया है- “फिर सूअर जो चिरे खुर का होता है, परन्तु पागुर नहीं करता, इस कारण वह तुम्हारे लिए अशुद्ध है| तुम ना तो इनका माँस खाना और ना ही इनकी लोथ को छूना |”
व्यवस्था विवरण (14/8)  

सूअर का माँस बहुत से रोगों का कारण है:

ईसाईयों के अलावा जो अन्य गैर-मुस्लिम, हिन्दू या नास्तिक लोग है वे सूअर के माँस के हराम होने के सम्बन्ध में बुद्धि, तर्क और विज्ञानं के हवालों से ही संतुष्ट हो सकते हैं| सूअर के माँस से कम से कम सत्तर विभिन्न रोग जन्म लेते हैं| किसी व्यक्ति के शरीर में विभिन्न प्रकार के कीड़े (Helminthes) हो सकते हैं, जैसे गोलाकार कीड़े, नुकीले कीड़े, फीता क्रीमी आदि | सबसे ज्यादा घातक कीड़ा Taenia Solium है जिसे आम लोग फीताकार कीड़ा (Tapworm) कहते हैं | यह कीड़ा बहुत लम्बा होता है और आंतों में रहता है| इसके अंडे खून में सम्मिलित होकर शरीर के लगभग सभी अंगों तक पहुँच जाते हैं| अगर यह कीड़ा दिमाग में चला गया तो इन्सान की स्मरणशक्ति ख़त्म हो जाती है | अगर वह दिल में प्रवेश कर जाये तो इन्सान की ह्रदय गति रुक जाने का ख़तरा हो जाता है| अगर यह कीड़ा आँखों में पहुँच जाये तो इन्सान की देखने की क्षमता समाप्त कर देता है| अगर यह जिगर में में पहुँच जाये तो बहुत भारी क्षति पहुँचाता है| इस प्रकार यह कीड़ा शरीर के अंगों को क्षति पहुँचाने की क्षमता रखता है| एक दूसरा कीड़ा Trichura Tichurasis है| 
सूअर के माँस के बारे में यह भ्रम है कि अगर उसे अच्छी तरह पका लिया जाये उसके भीतर पनप रहे उपरोक्त कीडों के अंडे नष्ट हो जाते हैं| अमेरिका में किये गए एक चिकित्सीय शोध में यह बात सामने आयी है कि चौबीस व्यक्तियों में से जो लोग Trichura Tichurasis के शिकार थे, उनमें से 22 लोगों ने सूअर के माँस को अच्छी तरह से पकाया था | इससे मालूम हुआ कि सामान्य ताप में सूअर का माँस पकाने से भी यह घातक अंडे समाप्त नहीं होते ना ही नष्ट हो पाते हैं|  

सूअर के माँस में मोटापा पैदा करने वाले वाले तत्व पाए जाते हैं:

सूअर के माँस में पुट्ठों को मज़बूत करने वाले तत्व बहुत कम पाए जाते हैं, इसके विपरीत मोटापे को पैदा करने वाले तत्व बहुत ज्यादा पाए जातें हैं | मोटापा पैदा करने वाले ये तत्व खून की नाणीयों में दाखिल हो जाते हैं और हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) और हार्ट अटैक (दिल के दौरे) का कारण बनते हैं| इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं कि पचास प्रतिशत से अधिक अमेरिकी लोग हाईपरटेंशन (अत्यंत मानसिक तनाव) के शिकार हैं और इसका मुख्य कारण है कि यह लोग सूअर का माँस प्रयोग करते हैं|

कुछ लोग यह तर्क प्रस्तुत करते है कि ऑस्ट्रेलिया में सूअर का पालन पोषण अत्यंत साफ़ सुथरे ढंग से और स्वास्थ्य सुरक्षा को दृष्टि में रखते हुए अनुकूल माहौल में किया जाता है| यह बात ठीक है कि स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अनुकूल और स्वच्छ वातावरण में सूअरों को एक साथ उनके बाड़े में रखा जाता है| आप चाहे उन्हें स्वच्छ रखने की कितनी भी कोशिश करें परन्तु वास्तविकता यह है कि प्राकृतिक रूप से उनके अन्दर गन्दगी पसंदी मौजूद रहती है| इसलिए वे अपने शरीर और अन्य सूअरों के शरीर से निकली गन्दगी का सेवन करने से भी नहीं चूकते| सूअर संसार का सबसे गन्दा और घिनौना जानवर है: सूअर ज़मीन पर पाए जाने वाला सबसे गन्दा और घिनौना जानवर है | वह जानवरों और इन्सान के बदन से निकलने वाली गन्दगी का सेवन करके जीता और पलता-बढ़ता है| इस जानवर को खुदा ने गंदगियों को साफ़ करने के उद्देश्य से पैदा किया है| गाँव और देहातों में जहाँ लोगों के लिए आधुनिक शौचालय नहीं है और लोग इस कारणवश खुले वातावरण (खेत, जंगल आदि) में शौच करते हैं, अधिकतर यह जानवर सूअर ही इन गंदगियों को साफ़ करता है|


सूअर सबसे निर्लज्ज और बेशर्म जानवर है:

“इस धरती पर सूअर सबसे निर्लज्ज और बेशर्म जानवर है| केवल यही एक ऐसा जानवर है जो अपने साथियों को बुलाता है कि वे आयें और उसकी मादा के साथ यौन इच्छा को पूरी करें| अमेरिका में प्रायः लोग सूअर का माँस खाते है परिणामस्वरुप ऐसा कई बार होता है कि ये लोग डांस पार्टी के बाद आपस में अपनी बीवियों की अदला बदली करते हैं अर्थात एक व्यक्ति दुसरे व्यक्ति से कहता है कि मेरी पत्नी के साथ तुम रात गुज़ारो और मैं तुम्हारी पत्नी के साथ रात गुज़ारुन्गा (फिर वे व्याव्कारिक रूप से ऐसा करते है)| अगर आप सूअर का माँस खायेंगे तो सूअर की सी आदतें आपके अन्दर पैदा होंगी | हम भारतवासी अमेरिकियों को बहुत विकसित और साफ़ सुथरा समझते हैं | वे जो कुछ करते हैं हम भारतवासी भी उसे कुछ वर्षों बाद करने लगते हैं| Island पत्रिका में प्रकाशित लेख के अनुसार पत्नियों की अदला बदली की यह प्रथा उच्च और सामान्य वर्ग के लोगों में आम हो चुकी है|”

अब आप ही बताईये और सोचिये आखिर क्यूँ इसे निषेध किया गया है ? यह जानवर सबसे गन्दा क्यूँ है? आपकी टिप्पणियों का स्वागत है!

सलीम खान स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़, लखनऊ व पीलीभीत, उत्तर प्रदेश

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