स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़

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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>मोहल्ला (ब्लॉग) अभी भी मेरी टी.आर.पी. के टुकड़े खा रहा है (Mohalla, Avinash ban Saleem since last 6 months)

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जी हाँ, सही सुना आपने! मुद्दे की बात करने से पहले मैं कुछ उसूलों और अधिकारों की बात कहना चाहता हूँ. हम सब भारत देश में रहते हैं और भारत देश का संविधान यह हमें पूरी तरह से आज़ादी देता है कि हम किसी भी धर्म को मान सकते हैं, उसे स्वीकार सकते हैं और उसका प्रचार-प्रसार भी कर सकते हैं. धर्म सम्बंधित आज़ादी हमारे मौलिक अधिकारों में से एक है
अविनाश बाबू के ब्लॉग यानि मोहल्ला को मैंने इसी वर्ष जून के महीने में ज्वाइन किया था. और केवल मेरी दो ही पोस्ट के बाद ही उस कुंठित व्यक्ति ने मुझे बैन कर दिया. जानना चाहेंगे मेरी उन दो पोस्टों में ऐया कुछ भी नहीं था जो किसी समाज या धर्म के खिलाफ हो, बल्कि एक सुधारात्मक लेख लिखा था मैंने.
अब देखिये मोहल्ला के फ्रंट पृष्ठ पर किस तरह का नोटिस बोर्ड लगा रहा है इस अल्लाह के बन्दे ने.
यह नोटिस नया नहीं है, यह पिछले 6महीने से यहीं पर लगा है. अब देखिये ३ महीने यानि जून, जुलाई और अगस्त में इसके ब्लॉग की पोस्टों (लेखों) में हुआ इज़ाफा. (May-11, June-95, July-132, Aug-118 )
तो इससे ये साबित हुआ कि जैसे ही इसने यानि अविनाश ने मुझे यानि सलीम खान को मोहल्ला से बाहर किया, इसका सीधा फ़ायेदा इसको मिल गया. वैसे ये फंडा कोई नया नहीं है, पूरी मीडिया ही मुसलामानों और इस्लाम को लगातार इसी तरह बदनाम कर रही है. आपने मेरे वो दो पोस्ट ज़रूर देख लिए होंगे और अब स्वयं विश्लेषित कीजिये कि आखिर उन पोस्ट में ऐसा कुछ था जो अविनाश की नफ़रत इस क़दर भड़की कि आज तीन महीने हो गए शांत नहीं हो पाई.
हालाँकि मोहल्ला अगर कम्युनल या धार्मिक या सांप्रदायिक लेखों के खिलाफ़ वाकए है तो यह बात भी सर्वथा झूठ ही है क्यूंकि अगर आप मोहल्ला के लेखों का गहन अध्ययन करेंगे तो कई ऐसी पोस्ट आपको मिल जायेंगी जो सांप्रदायिक ही हैं और भड़काऊ भी (जबकि मेरे लेख सुधारात्मक ही होते हैं).

नीचे चटका लगा कर आप मोहल्ला के चंद साम्प्रदायिक लेखों का अध्ययन ही कर लें.(Please see the communal post of mohalla)

अविनाश के मुखौटे को उतारने के लिए यह एक ही सवाल काफ़ी है कि आपने अपने ब्लॉग का नाम रखा है मोहल्ला और ऊपर से स्वतंत्र आमंत्रण का लिंक भी दे रखा है, और अगर कोई धार्मिक या सुधारात्मक लेख लिखता है तो उस पर आप उसे बैन कर रहे हो. यानि दोगलेपन की हद !

हाँ! ये हो सकता है कि आप मेरे लेख पर स्वस्थ बहस कर लो, मगर इतना तो बूता है नहीं और न ही इतना उसके पास वक़्त है क्यूंकि वह तो व्यस्त है मोहल्ला LIVE में, मोहल्ला लाइव में व्यस्तता के कारण मोहल्ला को प्रापर वक़्त ना सकने की वजह से उसने ये शिगूफा छोडा और चैन से अपना काम करता रहा.

हालाँकि मैंने उस …ने से यह रेकुएस्ट भी करी कि भई, मेरी आई डी बहाल कर दे, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया, क्यूँ करता उसे जो मेरे टुकड़े खाने थे; टी आर पी के…
एक जनाब ‘फसादी‘ ने तो मोहल्ला के मुखिया के इस क़दम के खिलाफ़ अपील भी कि (यहाँ चटका लगा कर देख लें) लेकिन उस ज़ालिम ने तब पर भी कोई क़दम नहीं उठाया. अगर आप गूगल पर सर्च करेंगे (सलीम मोहल्ला) तो आपको पहले पहल ही यह पोस्ट मिल जायेगी कि बन्दा कितना कुंठित है.
अगर आप गूगल में यह (क्या सलीम खान को मोहल्ले से) सर्च करेंगे तो पाएंगे कि फसादी ने क्या अपील की थी.
अगर आप गूगल में (मेरी आई डी) या (मेरी आई डी बहाल की जाये) टाईप करके सर्च करेंगे तो आपको सच्चाई का पता लग जायेगा.,…..

मैं आपको गूगल की सेवा लेने के लिए इस इस लिए कह रहा हूँ क्यूंकि उसने मेरी तमाम पोस्ट डिलीट कर रखी हैं. गूगल पे तो आपको केवल अवशेष ही मिलंगे; सुबूत बतौर.

धर्म मोहब्बत सिखाता है, नफ़रत नहीं. लेकिन अविनाश जैसे मरदूद को यह समझ नहीं आएगा.

लेख ख़त्म करने से पहले मैं अविनाश बाबू को चेतावनी देता हूँ कि उस गलीज़ ब्लॉग से वह नोटिस हटा लें और भविष्य में ऐसी नीच हरक़त बंद कर दें. अंत में: मोहल्ला के अविनाश के खिलाफ मैं सलीम खान पुनः स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़ की तरफ़ से दुसरी चेतावनी देता हूँ कि वह चस्पा की गयी नोटिस शीघ्र ही हटा दें अन्यथा मुझे कानूनी कार्यवाही के बाध्य होना पड़ेगा.

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Filed under: मोहल्ला

>मोहल्ला (ब्लॉग) मेरी टी.आर.पी. के टुकड़े खा रहा है: सलीम खान (Mohalla, Avinash ban Saleem since last 3 months for growing TRP)

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जी हाँ, सही सुना आपने! मुद्दे की बात करने से पहले मैं कुछ उसूलों और अधिकारों की बात कहना चाहता हूँ. हम सब भारत देश में रहते हैं और भारत देश का संविधान यह हमें पूरी तरह से आज़ादी देता है कि हम किसी भी धर्म को मान सकते हैं, उसे स्वीकार सकते हैं और उसका प्रचार-प्रसार भी कर सकते हैं. धर्म सम्बंधित आज़ादी हमारे मौलिक अधिकारों में से एक है.
अविनाश बाबू के ब्लॉग यानि मोहल्ला को मैंने इसी वर्ष जून के महीने में ज्वाइन किया था. और केवल मेरी दो ही पोस्ट के बाद ही उस कुंठित व्यक्ति ने मुझे बैन कर दिया. जानना चाहेंगे मेरी उन दो पोस्टों में ऐया कुछ भी नहीं था जो किसी समाज या धर्म के खिलाफ हो, बल्कि एक सुधारात्मक लेख लिखा था मैंने.
अब देखिये मोहल्ला के फ्रंट पृष्ठ पर किस तरह का नोटिस बोर्ड लगा रहा है इस अल्लाह के बन्दे ने.

यह नोटिस नया नहीं है, यह पिछले तीन महीने से यहीं पर लगा है. अब देखिये पिछले तीन महीने यानि जून, जुलाई और अगस्त में इसके ब्लॉग की पोस्टों (लेखों) में हुआ इज़ाफा. (May-11, June-95, July-132, Aug-118 )
तो इससे ये साबित हुआ कि जैसे ही इसने यानि अविनाश ने मुझे यानि सलीम खान को मोहल्ला से बाहर किया, इसका सीधा फ़ायेदा इसको मिल गया. वैसे ये फंडा कोई नया नहीं है, पूरी मीडिया ही मुसलामानों और इस्लाम को लगातार इसी तरह बदनाम कर रही है. आपने मेरे वो दो पोस्ट ज़रूर देख लिए होंगे और अब स्वयं विश्लेषित कीजिये कि आखिर उन पोस्ट में ऐसा कुछ था जो अविनाश की नफ़रत इस क़दर भड़की कि आज तीन महीने हो गए शांत नहीं हो पाई.

 
हालाँकि मोहल्ला अगर कम्युनल या धार्मिक या सांप्रदायिक लेखों के खिलाफ़ वाकए है तो यह बात भी सर्वथा झूठ ही है क्यूंकि अगर आप मोहल्ला के लेखों का गहन अध्ययन करेंगे तो कई ऐसी पोस्ट आपको मिल जायेंगी जो सांप्रदायिक ही हैं और भड़काऊ भी (जबकि मेरे लेख सुधारात्मक ही होते हैं).

नीचे चटका लगा कर आप मोहल्ला के चंद साम्प्रदायिक लेखों का अध्ययन ही कर लें.(Please see the communal post of mohalla)

अविनाश के मुखौटे को उतारने के लिए यह एक ही सवाल काफ़ी है कि आपने अपने ब्लॉग का नाम रखा है मोहल्ला और ऊपर से स्वतंत्र आमंत्रण का लिंक भी दे रखा है, और अगर कोई धार्मिक या सुधारात्मक लेख लिखता है तो उस पर आप उसे बैन कर रहे हो. यानि दोगलेपन की हद !

हाँ! ये हो सकता है कि आप मेरे लेख पर स्वस्थ बहस कर लो, मगर इतना तो बूता है नहीं और न ही इतना उसके पास वक़्त है क्यूंकि वह तो व्यस्त है मोहल्ला LIVE में, मोहल्ला लाइव में व्यस्तता के कारण मोहल्ला को प्रापर वक़्त ना सकने की वजह से उसने ये शिगूफा छोडा और चैन से अपना काम करता रहा.

हालाँकि मैंने उस …ने से यह रेकुएस्ट भी करी कि भई, मेरी आई डी बहाल कर दे, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया, क्यूँ करता उसे जो मेरे टुकड़े खाने थे; टी आर पी के…

एक जनाब ‘फसादी‘ ने तो मोहल्ला के मुखिया के इस क़दम के खिलाफ़ अपील भी कि (यहाँ चटका लगा कर देख लें) लेकिन उस ज़ालिम ने तब पर भी कोई क़दम नहीं उठाया. अगर आप गूगल पर सर्च करेंगे (सलीम मोहल्ला) तो आपको पहले पहल ही यह पोस्ट मिल जायेगी कि बन्दा कितना कुंठित है.

अगर आप गूगल में यह (क्या सलीम खान को मोहल्ले से) सर्च करेंगे तो पाएंगे कि फसादी ने क्या अपील की थी.

अगर आप गूगल में (मेरी आई डी) या (मेरी आई डी बहाल की जाये) टाईप करके सर्च करेंगे तो आपको सच्चाई का पता लग जायेगा.,…..



मैं आपको गूगल की सेवा लेने के लिए इस इस लिए कह रहा हूँ क्यूंकि उसने मेरी तमाम पोस्ट डिलीट कर रखी हैं. गूगल पे तो आपको केवल अवशेष ही मिलंगे; सुबूत बतौर.

धर्म मोहब्बत सिखाता है, नफ़रत नहीं. लेकिन अविनाश जैसे मरदूद को यह समझ नहीं आएगा.

लेख ख़त्म करने से पहले मैं अविनाश बाबू को चेतावनी देता हूँ कि उस गलीज़ ब्लॉग से वह नोटिस हटा लें और भविष्य में ऐसी नीच हरक़त बंद कर दें.

Filed under: मोहल्ला

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