स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़

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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>गौमाता के आदर व सम्मान का क्या यह मतलब है!

>उनका मानना है कि माता तीन हैं एक जननी माता, एक धरती माता और एक गौ माता. वह हज़रत मुहम्मद साहब सल्ल0 की एक हदीस का हवाला देते हुए कहते हैं कि जिस प्रकार माँ के पैरों तले जन्नत है। ऐसे ही धरती माता भी स्‍वर्ग के समान है। अतः हमें उसकी वन्दना करने में कोई संकोच नही होना चाहिए, इसी प्रकार हमें गौ माता का भी आदर और सम्मान करना चाहिये। क्योंकि हमें उस से दूध और मूत्र मिलता है। दूध हम पीते हैं तो उसके मूत्र से औषधियाँ बनायी जाती हैं।

एक बार मैंने उनसे पूछा कि आज आप जिस धरती माता की वन्दना करने को कह रहे हैं। आपकी आस्था के अनुसार कल मरनोपरान्त आप का पुनः जन्म अगर पाकिस्तान के तालिबान (अफ़गानिस्तान) में हो गया तो आप हमारी इसी धरती के विरूद्व आतंकवादी घटनाओं में तो सम्मिलित न होंगे?

अपने उत्तर मे उन्होंने मुझसे पलट कर प्रश्‍न किया कि अगर आप अमेरिका में पैदा हो गये तो?

अब मेरा जवाब था कि मेरे धर्म के अनुसार, मैं अगर अपने देश में ही मरता हूं तो कल कयामत में यहीं से दोबारा उठाया जाऊंगा

मेरा दूसरा प्रश्‍न यह था कि गौमाता के आदर व सम्मान का क्या यह मतलब है कि उसके मूत्र का सेवन किया जाये?उन्होंने कहा कि मैडिकली साइन्टीफिक शेध में यह बात सिद्ध हो गयी है कि उसका मूत्र कई बीमारियों में लाभकारी है। मैं ने कहा कि अगर मूत्र में ही लाभ तलाश करना है तो जननी माता जिस ने नौ महीने आप को अपनी कोख में रखकर पाला है इस बात की ज्यादा पात्र है कि उस के मूत्र के लाभ तलाश किये जायें

मगर अफसोस कि इन अन्याइयों ने कभी अपनी जन्मदाई माता के मूत्र पर साइन्टीफिक शोद्ध की आवशयकता न समझी, दूसरी ओर उन्हे गाय के मूत्र का साइन्टीफिक लाभ तो दिखाई दिया परन्तु मैडिकल साइन्स का यह निश्‍कर्ष नज़र न आया कि मूत्र में किसी भी जानदार के बदन की तमाम गन्दगियाँ सम्मिलित होती हैं। हर उचित मस्तिष्‍क का व्यक्ति पेशाब करने के बाद अपने हाथों को धोना चाहता है और कभी किसी ने अपने पेशाब को टेस्ट न कराया कि शायद उसमे भी कुछ लाभकारी तत्व विराजमान हों।

मैं कल एक अखबार पढ़ रहा था जिसमें पूरी सृष्टि के सभी ईश्वर और देवता और भगवान् का वास गाय में दर्शाया गया था और गाय के गुदा में पूरी सृष्टि अथवा सारे तीर्थ होते हैं और मूत्र में गंगा जल…!!!

यही आपकी संस्कृति है और इस के बदले आप हमारे सर से इस्लाम का भूत उतारना चाहते हैं। तो यकीन जानये कि इस में आपको कामयाबी नहीं मिलेगी, क्योंकि कहाँ एक जानवर के मूत्र का सेवन और कहाँ मुहम्मद सल्ल. की हदीस के यह शब्द, कि पेशाब की छीटों से बचो!!!

Some Sources: Mohammad Umar Kairanvi

Filed under: गौमाता

लेख सन्दर्भ

सलीम खान