स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़

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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>सलीम ख़ान तुम ‘जेहादी’ लगते हो, अपनी दाढ़ी -मूंछ मुंडवा लो !

>

हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम
वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता ||
जी हाँ, कुछ ऐसी ही कैफ़ियत हुई जब मुझे ये शब्द अपने बचपन के दोस्त के मुहं से सुना कि सलीम “तुम अपनी दाढ़ी मुंडवा लो क्यूंकि ऐसे में तुम जेहादी लगते हो” !
पिछले बरस तक मैं क्लीन शेव रहता था और पिछले कुछ महीने से मैंने दाढ़ी और मूंछे रख ली हैं. ब्लोगर बन्धुवों को बताने की आवश्यकता नहीं है क्यूंकि मैंने वह फ़ोटो अपनी प्रोफ़ाइल में कई महीनों से लगा रखी है.
दरअसल मैं आप सबको बता दूं कि पिछले हफ़्ते मैं अपने गाँव गया हुआ था. वहा गन्ने की खेती का काम करवाना था. मैं जब भी अपने गाँव जाता हूँ, अपने दोस्त “साहब सिंह” से सबसे पहले मिलता हूँ. हम दोनों जब मैं गाँव में होता हूँ तो ज़्यादातर साथ ही अपना वक़्त गुज़ारते हैं. और उसके मुहं से यह शब्द सुन कर मुझे बहुत आश्चर्य हुआ कि भारत के नॉन-मुस्लिम्स के ज़ेहन में किस क़दर भरा जा चुका है कि मुसलमान द्वारा किया जा रहा कोई भी अनिवार्य या गैर अनिवार्य धार्मिक कृत्य भी लोगों को नकारात्मक सोचने पर मजबूर कर रहा है. आखिर इसकी वजह क्या है? क्यूँ एक आम हिन्दू या नॉन-मुस्लिम इस तरह के कुत्सित विचार को अपने ज़ेहन में पाल रखा है जो सत्य के बिलकुल भी क़रीब नहीं है.
मैंने उससे पूछा -साहब, यह बताओ कि तुम्हें इस तरह का विचार कैसे आया कि दाढ़ी जेहादी ही बढ़ाते हैं??? और जेहाद का मतलब तुम्हे पता है क्या होता है ??? क्या दाढ़ी आशा राम बापू के नहीं है??? क्या दाढ़ी बाबा रामदेव के ने नहीं बढ़ा रखी है??? क्या आपके घर में यह पोस्टर (मैंने एक पोस्टर को इंगित करते हुए पूछा) में शिव जी के दाढ़ी नहीं है???
वह सकते में आ गया दर असल वह इस तरह के सवालों की बौछार से घबरा गया. वह और उसी जैसे अन्य सामान्य हिन्दू अपने मोहल्ले में आपस में ही सामान्य से और आधारविहीन तर्कों को पूछकर खुश होते रहते हैं और उन्हें मुझ जैसा कोई नहीं मिलता??? घबराईये नहीं, मैंने अपने दोस्त से सिर्फ सवाल ही पूछा था!!! और वह उत्तर विहीन हो गया!!!
फिर मैंने उसे सबसे पहले तो जेहाद का अर्थ बताया (पाठकगण  यहाँ पर चटका लगा कर जेहाद का अर्थ व परिभाषा जान सकते हैं और यह भी जान सकते हैं कि जेहाद का आदेश केवल कुर-आन में ही नहीं बल्कि भागवत गीता में भी लिखा है) फिर मुस्लिम को दाढ़ी क्यूँ रखना चाहिए यह बताया जो कि इस प्रकार है:
पहले मैं आपको बता दूं कि दाढ़ी रखने के बारे में कई तरह की मान्यताये है और उसके मुताल्लिक़ अलग अलग तरह के फतवे !!
आमतौर से इस्लाम ने किसी काम को करने अथवा नहीं करने की दृष्टि से पाँच भागों में बांटा है
(1) फ़र्ज़ अर्थात अनिवार्य(2) मुस्तहब अर्थात पसन्दीदा (3) मुबाह अर्थात जिसकी अनुमति हो (4) मकरूह अर्थात घृणित, नापसन्दीदा (5) ‘हराम अर्थात निषेध
वक़्त की कमीं के चलते कुल मिला कर दाढ़ी के लिए जो निर्देश हैं वह इस तरह हैं कि कोई मुसलमान अगर दाढ़ी नहीं रखता तो वह मकरूह है अर्थात न ही दाढ़ी न रखने की इजाज़त है और न ही दाढ़ी मुंडाना हराम है.
और चूंकि दाढ़ी हमारे प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद (सल्ल०) रखते थे और वह पसंद भी करते थे इसलिए हम बतौर सुन्नत (वह कार्य करना जो रसूल (सल्ल०) किया करते थे) दाढ़ी मुंडाते नहीं हैं और हम मुसलमानों को चाहिए कि दाढ़ी रखे…
क्या आपको मैं जेहादी लगता हूँ????? सोच समझ के जवाब दीजिएगा????

Filed under: स्वच्छ सन्देश

26 Responses

  1. >आपको यह भी बता दूं कि चेहरे की खूबसूरती या चेहरे के हिसाब से कोई अपनी दाढ़ी को कांट-छांट (दुरुस्त)कर सकता है और मूंछों के मुताल्लिक यह आदेश है कि यह नहीं रखनी चाहिए बल्कि मूंछो को मुंडा देना चाहिए और दाढ़ी रखना चाहिए…मैंने तो दोनों रखीं है !!!

  2. >आपको यह भी बता दूं कि चेहरे की खूबसूरती या चेहरे के हिसाब से कोई अपनी दाढ़ी को कांट-छांट (दुरुस्त)कर सकता है और मूंछों के मुताल्लिक यह आदेश है कि यह नहीं रखनी चाहिए बल्कि मूंछो को मुंडा देना चाहिए और दाढ़ी रखना चाहिए…मैंने तो दोनों रखीं है !!!

  3. >to aap ek sachhe musalman hain hi nahi kyunki aapne muchhen rakhi hui hainkyun? sahi kaha na?

  4. >to aap ek sachhe musalman hain hi nahi kyunki aapne muchhen rakhi hui hainkyun? sahi kaha na?

  5. amitabh says:

    >mamla..insaani he, so insaano ke upar hi aashrit rahna jyada saarthak he…/jaankaari kaafi he..jo gyaan ke liye jaroori he. dhnyavaad

  6. amitabh says:

    >mamla..insaani he, so insaano ke upar hi aashrit rahna jyada saarthak he…/jaankaari kaafi he..jo gyaan ke liye jaroori he. dhnyavaad

  7. >@ankitshayed tumne mera lekh theek se nahin padha hai. aur main aapko bata doon ki ek musalmaan sachcha musalmaan ho sakta agar wah clean shave main hain, aur ek musalman sachcha musalmaan ho sakta hai agar wag shuddh shakahari hai…

  8. >@ankitshayed tumne mera lekh theek se nahin padha hai. aur main aapko bata doon ki ek musalmaan sachcha musalmaan ho sakta agar wah clean shave main hain, aur ek musalman sachcha musalmaan ho sakta hai agar wag shuddh shakahari hai…

  9. Anonymous says:

    >saleem tum apne aapko sachcha muslman kahte aur munchhe bhi rakhe ho achchha ek baat batao tum gyani ho ya vigyani?

  10. Anonymous says:

    >saleem tum apne aapko sachcha muslman kahte aur munchhe bhi rakhe ho achchha ek baat batao tum gyani ho ya vigyani?

  11. >तो फिर तालिबान दाढ़ी ना रखने वालों को जेल क्यों भेज देते थे ?और अगर सच में दाढ़ी बनवाना अपराध नहीं है तो क्या जानबूझकर कुछ मुस्लिमों द्वारा अपने निजी फायदे के इस्लाम की गलत छवि बनाना उअर गलत जानकारी देने की अनुमति है या उसके लिए ही कोई दंड विधान है आपके कुरआन में ?

  12. >तो फिर तालिबान दाढ़ी ना रखने वालों को जेल क्यों भेज देते थे ?और अगर सच में दाढ़ी बनवाना अपराध नहीं है तो क्या जानबूझकर कुछ मुस्लिमों द्वारा अपने निजी फायदे के इस्लाम की गलत छवि बनाना उअर गलत जानकारी देने की अनुमति है या उसके लिए ही कोई दंड विधान है आपके कुरआन में ?

  13. >Saleem Saheb, Pahle to aap apni New Photo lagaye fir batate hain ki aap kaise lagte ho

  14. >Saleem Saheb, Pahle to aap apni New Photo lagaye fir batate hain ki aap kaise lagte ho

  15. >मौजूं सवाल से मुठभेड़ करती पोस्ट!!इस कड़ी में ही इसे भी अवश्य पढ़ेंदेख लीजिएऔर हाँ मूंछ रखना मना नहीं है!!हाँ! पस्त रख सकते हैं.यानी इतनी न रखो कि कुछ खाते या पीते समय उसका बाल बार-बार मुंह में aataa रहे.

  16. >मौजूं सवाल से मुठभेड़ करती पोस्ट!!इस कड़ी में ही इसे भी अवश्य पढ़ेंदेख लीजिएऔर हाँ मूंछ रखना मना नहीं है!!हाँ! पस्त रख सकते हैं.यानी इतनी न रखो कि कुछ खाते या पीते समय उसका बाल बार-बार मुंह में aataa रहे.

  17. Anonymous says:

    >मुसीबत यह है की लोग उलटी चाल चलते हैं. पहले जेहाद ए अकबर से खुद को रूहानी तौर पर मजबूत कर लेना चाहिए, और खुद में इतनी नेकी लानी चाहिए की हमें हर इन्सान अल्लाह का बंदा लगे. फिर नंबर आता है जेहाद ए असगर का, पर जिसने जेहाद ए असगर से खुद को पक्का नहीं किया वह मुनकिन है की अल्लाह के पैगाम को तोड़ मरोड़ कर गलत पेश करे, islam के नाम पर तालिबान जैसे जुल्म पर उतर आये, और दीन की बदनामी का सबब बने.

  18. Anonymous says:

    >मुसीबत यह है की लोग उलटी चाल चलते हैं. पहले जेहाद ए अकबर से खुद को रूहानी तौर पर मजबूत कर लेना चाहिए, और खुद में इतनी नेकी लानी चाहिए की हमें हर इन्सान अल्लाह का बंदा लगे. फिर नंबर आता है जेहाद ए असगर का, पर जिसने जेहाद ए असगर से खुद को पक्का नहीं किया वह मुनकिन है की अल्लाह के पैगाम को तोड़ मरोड़ कर गलत पेश करे, islam के नाम पर तालिबान जैसे जुल्म पर उतर आये, और दीन की बदनामी का सबब बने.

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