स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़

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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>देश जिनमें अधिकतम मुसलमान रहते हैं !!! (मुसलमान जनसंख्या)

>

मैं पिछले कई हफ़्तों से इंटरनेट और ब्लोगिंग से थोड़ा दूर-दूर सा था. लेकिन कहते हैं न नशा किसी भी चीज़ का हो वह कभी ख़त्म नहीं होता है, शायेद अंत तक ! और नशे पर लाख अपनी व्यस्तताओं के चलते उस पर थोड़ा बहुत क़ाबू पा लें, लाख चाहे आप अपनी इन्द्रियों पर अंकुश लगा लें, वह कुछ समय उपरान्त परिवर्तन की बयार में आपके समीप आ खड़ा होता है. बस कुछ इसी तरह का नशा है, ब्लोगिंग का !! कहते हैं न “दूरियां इस क़दर हुई कि फ़ासले मिट से गए” दूरियां जितनी ख़त्म हुई हैं, दरअसल उतनी ही बढ़ी भी हैं।
तो आज मैं आपको कुछ बेहद सामान्य लेकिन बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी देना चाहता हूँ. मैं आपक्को बताऊंगा कि दुनियां के किस देश में अधिकतम मुसलमान रहते हैं. ये तो सभी जानते हैं कि दुनियां में किसी भी अरब देश से ज़्यादा यानि सबसे ज़्यादा मुसलमान इंडोनेशिया में रहते हैं जिनकी तादात है: 19,52,72,000 (उन्नीस करोड़ बावन लाख बहत्तर हज़ार)
आईये टॉप 10 देश के बारे में जान लें जहाँ सर्वाधिक मुस्लिम रहते हैं:  
पाकिस्तान 16,08,29,450
भारत 15,45,00,000
बंग्लादेश 12,96,81,509
तुर्की 7,27,50,000
मिस्र 6,95,60,000
ईरान 6,88,05,000
नाइजीरिया 6,57,50,000
चीन 3,91,11,000
इथियोपिया 3,60,32,160
आपने ये आंकड़े देखे ! आपको कुछ समझ आया, अगर नहीं तो मैं बता दूं कि अगर भारतपाकिस्तान और बांग्लादेश जुदा न होते तो आज सबसे ज़्यादा मुस्लिम हिन्दोस्तान में ही होते अर्थात भारत ही दुनियां का वह देश होता जहाँ सर्वाधिक मुस्लिम जनसँख्या होती!!!
आंकड़ों को अगर और विस्तृत रूप से देखें तो पाएंगे कि भारत पकिस्तान और बांग्लादेश की कुल जनसँख्या लगभग 44 करोड़ से ज़्यादा होती है!!!
हाज़िर होऊंगा कुछ इसी तरह की जानकारी के साथ… तब तक के लिए
अल्लाह हाफिज़ !!!
— सलीम ख़ान  
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Filed under: स्वच्छ सन्देश

30 Responses

  1. Anonymous कहते हैं:

    >अगर भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जुदा न होते तो आज सबसे ज़्यादा मुस्लिम हिन्दोस्तान में ही होते अर्थात भारत ही दुनियां का वह देश होता जहाँ सर्वाधिक मुस्लिम जनसँख्या होती

  2. Anonymous कहते हैं:

    >अगर भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जुदा न होते तो आज सबसे ज़्यादा मुस्लिम हिन्दोस्तान में ही होते अर्थात भारत ही दुनियां का वह देश होता जहाँ सर्वाधिक मुस्लिम जनसँख्या होती

  3. संजय बेंगाणी कहते हैं:

    >तब भारत, भारत नहीं होता.

  4. संजय बेंगाणी कहते हैं:

    >तब भारत, भारत नहीं होता.

  5. Tarkeshwar Giri कहते हैं:

    >salemm bahi shyad apki jankari galat hai, sabse jyada mushlaman Hindustan Main rahte hai. Aur Shanti purvak rahte hai.

  6. Tarkeshwar Giri कहते हैं:

    >salemm bahi shyad apki jankari galat hai, sabse jyada mushlaman Hindustan Main rahte hai. Aur Shanti purvak rahte hai.

  7. Mohammed Umar Kairanvi कहते हैं:

    >बहुत अच्‍छी जानकारी, आप आ ही जाओ, आपकी इधर कमी खलती है, मैंने इस विषय पर ढंडा तो लगता है इण्‍डोनेशिया में इस समय सबसे अधिक मुसलमान हैं, और अधिक जानकारी के लिये देखेंदुनिया का हर चौथा इन्सान- मुसलमान Every Fourth Person of This World is following ISLAM !Direct linkhttp://hamarianjuman.blogspot.com/2009/10/every-fourth-person-of-this-world-is.html

  8. Mohammed Umar Kairanvi कहते हैं:

    >बहुत अच्‍छी जानकारी, आप आ ही जाओ, आपकी इधर कमी खलती है, मैंने इस विषय पर ढंडा तो लगता है इण्‍डोनेशिया में इस समय सबसे अधिक मुसलमान हैं, और अधिक जानकारी के लिये देखेंदुनिया का हर चौथा इन्सान- मुसलमान Every Fourth Person of This World is following ISLAM !Direct linkhttp://hamarianjuman.blogspot.com/2009/10/every-fourth-person-of-this-world-is.html

  9. rohit कहते हैं:

    >तब भारत में औरते महफूज़ नहीं होती और डुरेक्स और कामसूत्र का विज्ञापन नहीं होता स्कूल की जगह मदरसे होते. जगह जगह दंगे होते जैसे आज़ादी के पहले हुए. हाँ भारत का रक्षा खर्च जरुर बच जाता और अमेरिका सर खुजाता की अपने हथियार कहाँ खपाए , ब्लोगिंग के लिए एक सेसर बोर्ड जैसी संस्था होती

  10. rohit कहते हैं:

    >तब भारत में औरते महफूज़ नहीं होती और डुरेक्स और कामसूत्र का विज्ञापन नहीं होता स्कूल की जगह मदरसे होते. जगह जगह दंगे होते जैसे आज़ादी के पहले हुए. हाँ भारत का रक्षा खर्च जरुर बच जाता और अमेरिका सर खुजाता की अपने हथियार कहाँ खपाए , ब्लोगिंग के लिए एक सेसर बोर्ड जैसी संस्था होती

  11. Khursheed कहते हैं:

    >तब भारत में औरतों के नग्न स्वरुप की पूजा नहीं होती और न ही उनका बाज़ारीकरण होता बल्कि उनकी हिफाज़त होती, वैसी जैसी होनी चाहिए. तब पुरुष मात्र दिखावे के लिए उन्हें माता नहीं मानते बल्कि दिल से उन्हें वही दर्ज़ा देते जिसकी वह असल हक़दार है यानि नारी के नारीत्व की रक्षा.

  12. Khursheed कहते हैं:

    >तब भारत में औरतों के नग्न स्वरुप की पूजा नहीं होती और न ही उनका बाज़ारीकरण होता बल्कि उनकी हिफाज़त होती, वैसी जैसी होनी चाहिए. तब पुरुष मात्र दिखावे के लिए उन्हें माता नहीं मानते बल्कि दिल से उन्हें वही दर्ज़ा देते जिसकी वह असल हक़दार है यानि नारी के नारीत्व की रक्षा.

  13. rohit कहते हैं:

    >@ खुर्शीद भाईजान जरा पाकिस्तान की महिलाओ को देख लो कराची में बहुत ऐसी पार्टी होती है जहाँ लड़किया खुले आम शराब सिगरेट पीती है कम कपडे तो पहनती ही है वोह भी तो इस्लामिक देश है औरतो को खुले आम मार दिया जाता है बलात्कार किये जाते है वहां भी औरतो का बाजारी करण होता है और अगर माता के साथ ऐसा किया जाता है तो भाई इस्लाम महान है.

  14. rohit कहते हैं:

    >@ खुर्शीद भाईजान जरा पाकिस्तान की महिलाओ को देख लो कराची में बहुत ऐसी पार्टी होती है जहाँ लड़किया खुले आम शराब सिगरेट पीती है कम कपडे तो पहनती ही है वोह भी तो इस्लामिक देश है औरतो को खुले आम मार दिया जाता है बलात्कार किये जाते है वहां भी औरतो का बाजारी करण होता है और अगर माता के साथ ऐसा किया जाता है तो भाई इस्लाम महान है.

  15. dhiru singh {धीरू सिंह} कहते हैं:

    >nice . kitana accha hota agsr ek hote . koshish kijiye ek ho jaaye to sab siyapa hi mit jaaye

  16. dhiru singh {धीरू सिंह} कहते हैं:

    >nice . kitana accha hota agsr ek hote . koshish kijiye ek ho jaaye to sab siyapa hi mit jaaye

  17. शहरोज़ कहते हैं:

    >भाई सलीम साहब अगर आप रूस से अलग हुए छह मुल्कों की आबादी भी शामिल कर लेते तो संजय बेगानी साहब क्या कहते!!संजय बेगानी जैसे लोगों को कभी भी अच्छी चीज़ भली नहीं लगती और सभी बीमारी की जड़ में मुसलमान और इस्लाम ही नज़र आता है.अभी सतीश जी के यहाँ भी कुछ इसी अंदाज़ में इनका कमेन्ट देखा.ऐसे लोग जब पत्रकारिता में हो तो देश की गंगा-जमनी संस्कृति के बारे में आप सोच सकते हैं.मेरा हमेशा मानना रहा है कि ऐसे प्रतिक्रियावादी ही अल्पसंख्यक, दलित और नारी विरोधी होते हैं.विवेकानद ने कभी कहा था कि जब साम्प्रदायिकता अपने चरम पर होती है तो वो उसे ही भूल जाती है जिनसे उसने खून-पानी प्राप्त किया था.और लोग न जाने क्यों ऐसे लोगों को खून-पानी मुहैय्या कराते रहते हैं. बाल ठाकरे या फिलहाल पाकिस्तानी हुक्मरानों की मिसाल लें:ठाकरे परिवार जब तक मुसलामानों को गलिया रहे थे तो हिन्दू-सम्राट रहे.लेकिन जब ही वो बिहारियों के विरुद्ध हुए सभी आग-बगुला हो उठे!!ऐसा ही पाकिस्तानी हुक्मरान जब आतंकवादियों को अपने लिए इस्तेमाल करने के लिए पोसते रहे तो वो जिहादी कहलाये लेकिन जब उनहोंने लाहौर और करांची में बम फोड़ना शुरू किया तो वो आतंकवादी हो गए!!

  18. शहरोज़ कहते हैं:

    >भाई सलीम साहब अगर आप रूस से अलग हुए छह मुल्कों की आबादी भी शामिल कर लेते तो संजय बेगानी साहब क्या कहते!!संजय बेगानी जैसे लोगों को कभी भी अच्छी चीज़ भली नहीं लगती और सभी बीमारी की जड़ में मुसलमान और इस्लाम ही नज़र आता है.अभी सतीश जी के यहाँ भी कुछ इसी अंदाज़ में इनका कमेन्ट देखा.ऐसे लोग जब पत्रकारिता में हो तो देश की गंगा-जमनी संस्कृति के बारे में आप सोच सकते हैं.मेरा हमेशा मानना रहा है कि ऐसे प्रतिक्रियावादी ही अल्पसंख्यक, दलित और नारी विरोधी होते हैं.विवेकानद ने कभी कहा था कि जब साम्प्रदायिकता अपने चरम पर होती है तो वो उसे ही भूल जाती है जिनसे उसने खून-पानी प्राप्त किया था.और लोग न जाने क्यों ऐसे लोगों को खून-पानी मुहैय्या कराते रहते हैं. बाल ठाकरे या फिलहाल पाकिस्तानी हुक्मरानों की मिसाल लें:ठाकरे परिवार जब तक मुसलामानों को गलिया रहे थे तो हिन्दू-सम्राट रहे.लेकिन जब ही वो बिहारियों के विरुद्ध हुए सभी आग-बगुला हो उठे!!ऐसा ही पाकिस्तानी हुक्मरान जब आतंकवादियों को अपने लिए इस्तेमाल करने के लिए पोसते रहे तो वो जिहादी कहलाये लेकिन जब उनहोंने लाहौर और करांची में बम फोड़ना शुरू किया तो वो आतंकवादी हो गए!!

  19. ई-गुरु राजीव कहते हैं:

    >यार टिप्पणीकारों आप लोग भी बात को कहाँ से कहाँ खींच ले जाते हो !! यह गलत बात है, लेखक जो कह रहा है उसकी बात का सही तरीके से उत्तर दें.हम सभी एक थे और एक हैं. (दिल से) ये सीमाएं तो जिन्ना और नेहरू ने खींची थी और राष्ट्र को विभाजित कर दिया.

  20. E-Guru Rajeev कहते हैं:

    >यार टिप्पणीकारों आप लोग भी बात को कहाँ से कहाँ खींच ले जाते हो !! यह गलत बात है, लेखक जो कह रहा है उसकी बात का सही तरीके से उत्तर दें.हम सभी एक थे और एक हैं. (दिल से) ये सीमाएं तो जिन्ना और नेहरू ने खींची थी और राष्ट्र को विभाजित कर दिया.

  21. शहरोज़ कहते हैं:

    >गुरु राजिव भाई हम भी तो यही चाहते हैं.आपस में प्रेम करो देश-प्रेमियों!!वो न चाहें तो क्या करे कोई!!उनके मर्ज़ की दवा करे कोई !

  22. शहरोज़ कहते हैं:

    >गुरु राजिव भाई हम भी तो यही चाहते हैं.आपस में प्रेम करो देश-प्रेमियों!!वो न चाहें तो क्या करे कोई!!उनके मर्ज़ की दवा करे कोई !

  23. राजीव तनेजा कहते हैं:

    >जानकारी के लिए धन्यवाद

  24. राजीव तनेजा कहते हैं:

    >जानकारी के लिए धन्यवाद

  25. talib د عا ؤ ں کا طا لب कहते हैं:

    >चिश्ती से जिस ज़मीन प पैगामे-हक़ सुनायानानक ने जिस चमन में वहदत का गीत गाया!माशा-अल्लाह !! क्या बात होती जब हम एक होते!!भाई चमन तो वही है, सियासत ने बाँट दिया .और इस गन्दगी से पैदा हुए बेगानी साहब जैसे लोग आज भी !!! न जाने क्यों शहरोज़ मियाँ को इनकी बात बुरी लगी.मैं तो अब इन्हें पहचान चूका हूँ.आप तो क़ाबिल इंसान हैं चीज़ों को और बेहतर ढंग से रखने की कोशिश कीजिये.आवाज़ जभी अंजुमन में गूंजेगी!!

  26. talib د عا ؤ ں کا طا لب कहते हैं:

    >चिश्ती से जिस ज़मीन प पैगामे-हक़ सुनायानानक ने जिस चमन में वहदत का गीत गाया!माशा-अल्लाह !! क्या बात होती जब हम एक होते!!भाई चमन तो वही है, सियासत ने बाँट दिया .और इस गन्दगी से पैदा हुए बेगानी साहब जैसे लोग आज भी !!! न जाने क्यों शहरोज़ मियाँ को इनकी बात बुरी लगी.मैं तो अब इन्हें पहचान चूका हूँ.आप तो क़ाबिल इंसान हैं चीज़ों को और बेहतर ढंग से रखने की कोशिश कीजिये.आवाज़ जभी अंजुमन में गूंजेगी!!

  27. >अरे नहीं यारआप लोग भी ना असली बात पार तो ध्यान ही नहीं दे रहे हो , तब मुस्लिमों की आबादी ४४ नहीं ४४० करोड़ होती क्यूंकि तब तो भारत तालिबानी देश होता और यहाँ पर famly pllaning anumati ही nahee होती तो हो jati ना jansankhya ..अरे नहीं muslim sankhya ४४० karoduar haan phir ना तो film होती ना redio ना mausiki और ना ही computer kyun की wo तो islam me allowed ही नहीं hai ना और agar hai भी तो भी jinhe TV pasand नहीं wo computer kyun chalne deteपर sabse badi baat is blog ko likhne wale तो kadhor saza milti kyun की unki तो badi si dadhi hai ही नहींyaad hai afganistan ?

  28. >अरे नहीं यारआप लोग भी ना असली बात पार तो ध्यान ही नहीं दे रहे हो , तब मुस्लिमों की आबादी ४४ नहीं ४४० करोड़ होती क्यूंकि तब तो भारत तालिबानी देश होता और यहाँ पर famly pllaning anumati ही nahee होती तो हो jati ना jansankhya ..अरे नहीं muslim sankhya ४४० karoduar haan phir ना तो film होती ना redio ना mausiki और ना ही computer kyun की wo तो islam me allowed ही नहीं hai ना और agar hai भी तो भी jinhe TV pasand नहीं wo computer kyun chalne deteपर sabse badi baat is blog ko likhne wale तो kadhor saza milti kyun की unki तो badi si dadhi hai ही नहींyaad hai afganistan ?

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