स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़

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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>’हिंदू’ शब्द की परिभाषा

>

भारत वर्ष में रह कर अगर हम कहें की हिंदू शब्द की परिभाषा क्या हो सकती है? हिंदू शब्द के उद्भव का इतिहास क्या है? आख़िर क्या है हिंदू? तो यह एक अजीब सा सवाल होगा
लेकिन यह एक सवाल ही है कि जिस हिन्दू शब्द का इस्तेमाल वर्तमान में जिस अर्थ के लिए किया जा रहा है क्या वह सही है ?
मैंने पीस टीवी पर डॉ ज़ाकिर नाइक का एक स्पीच देखा, उन्होंने किस तरह से हिंदू शब्द की व्याख्या की मुझे कुछ कुछ समझ में आ गया मगर पुरी संतुष्टि के लिए मैंने अंतरजाल पर कई वेबसाइट पर इस शब्द को खोजा तो पाया हाँ डॉ ज़ाकिर नाइक वाकई सही कह रहे हैं. हिंदू शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई, कब हुई और किसके द्वारा हुई? इन सवालों के जवाब में ही हिंदू शब्द की परिभाषा निहित है
यह बहुत ही मजेदार बात होगी अगर आप ये जानेंगे कि हिंदू शब्द न ही द्रविडियन न ही संस्कृत भाषा का शब्द है. इस तरह से यह हिन्दी भाषा का शब्द तो बिल्कुल भी नही हुआ. मैं आप को बता दूँ यह शब्द हमारे भारतवर्ष में 17वीं शताब्दी तक इस्तेमाल में नही था. अगर हम वास्तविक रूप से हिंदू शब्द की परिभाषा करें तो कह सकते है कि भारतीय (उपमहाद्वीप) में रहने वाले सभी हिंदू है चाहे वो किसी धर्म के हों. हिंदू शब्द धर्म निरपेक्ष शब्द है यह किसी धर्म से सम्बंधित नही है बल्कि यह एक भौगोलिक शब्द है. हिंदू शब्द संस्कृत भाषा के शब्द सिन्धु का ग़लत उच्चारण का नतीजा है जो कई हज़ार साल पहले पर्सियन वालों ने इस्तेमाल किया था. उनके उच्चारण में ‘स’ अक्षर का उच्चारण ‘ह’ होता था

हाँ….मैं, सलीम खान हिन्दू हूँ !!!
हिंदू शब्द अपने आप में एक भौगोलिक पहचान लिए हुए है, यह सिन्धु नदी के पार रहने वाले लोगों के लिए इस्तेमाल किया गया था या शायेद इन्दुस नदी से घिरे स्थल पर रहने वालों के लिए इस्तेमाल किया गया था। बहुत से इतिहासविद्दों का मानना है कि ‘हिंदू’ शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम अरब्स द्वारा प्रयोग किया गया था मगर कुछ इतिहासविद्दों का यह भी मानना है कि यह पारसी थे जिन्होंने हिमालय के उत्तर पश्चिम रस्ते से भारत में आकर वहां के बाशिंदों के लिए इस्तेमाल किया था।

धर्म और ग्रन्थ के शब्दकोष के वोल्यूम # 6,सन्दर्भ # 699 के अनुसार हिंदू शब्द का प्रादुर्भाव/प्रयोग भारतीय साहित्य या ग्रन्थों में मुसलमानों के भारत आने के बाद हुआ था

भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘द डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया’ में पेज नम्बर 74 और 75 पर लिखा है कि “the word Hindu can be earliest traced to a source a tantrik in 8th century and it was used initially to describe the people, it was never used to describe religion…” पंडित जवाहरलाल नेहरू के मुताबिक हिंदू शब्द तो बहुत बाद में प्रयोग में लाया गया। हिन्दुज्म शब्द कि उत्पत्ति हिंदू शब्द से हुई और यह शब्द सर्वप्रथम 19वीं सदी में अंग्रेज़ी साहित्कारों द्वारा यहाँ के बाशिंदों के धार्मिक विश्वास हेतु प्रयोग में लाया गया।

नई शब्दकोष ब्रिटानिका के अनुसार, जिसके वोल्यूम# 20 सन्दर्भ # 581 में लिखा है कि भारत के बाशिंदों के धार्मिक विश्वास हेतु (ईसाई, जो धर्म परिवर्तन करके बने को छोड़ कर) हिन्दुज्म शब्द सर्वप्रथम अंग्रेज़ी साहित्यकारों द्वारा सन् 1830 में इस्ल्तेमल किया गया था

इसी कारण भारत के कई विद्वानों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि हिन्दुज्म शब्द के इस्तेमाल को धर्म के लिए प्रयोग करने के बजाये इसे सनातन या वैदिक धर्म कहना चाहिए. स्वामी विवेकानंद जैसे महान व्यक्ति का कहना है कि “यह वेदंटिस्ट धर्म” होना चाहिए.

इस प्रकार भारतवर्ष में रहने वाले सभी बाशिंदे हिन्दू हैं, भौगोलिक रूप से! चाहे वो मैं हूँ या कोई अन्य.

विवेकानन्द

Filed under: स्वच्छ सन्देश

11 Responses

  1. >हां सलीम भाई , गर्व से कहो हम हिन्दू है !

  2. >हां सलीम भाई , गर्व से कहो हम हिन्दू है !

  3. >अच्छा लेख लिखा आपने सलीम खान !शुभकामनायें !

  4. >अच्छा लेख लिखा आपने सलीम खान !शुभकामनायें !

  5. >HINDU shabd ko agar ARABIC men dekhen to iska root word "IND" hoga, jiska arth hai "PAS".arab ke log HIND se muhabbat karte the isiliye woh apni betiyon ke naam HINDA rakhte the jabke irani aryan logo ki dictionary men hindu ka arth Ghulam aur Chor bataya gaya hai. MAIN KHUD "HINDU" HUN AUR MAIN TO MANUWADI BHI HUN.ved PURAN GEETA AADI KI ACHHI AUR SACHCHI BATON MEN MERI AASTHA HAI. Lekin agar main aur aap hindu hain aur hamen apne liye iss word se koi chid ya nafrat nahin hai to kya jo pehle se khud hindu kehte aa rahe hain , kya woh bhi itni hi aasani se khud ko MUSLIM keh sakte hain/ jabke iska arth bhi clear hai – eshwar ke prati apni ichhaon ko samarpit karne wala. Har baat men humen kattarta ka ilzam dene wale kya hamari sadbhawna aur prem ko bhi kabhi samajh payene?

  6. >HINDU shabd ko agar ARABIC men dekhen to iska root word "IND" hoga, jiska arth hai "PAS".arab ke log HIND se muhabbat karte the isiliye woh apni betiyon ke naam HINDA rakhte the jabke irani aryan logo ki dictionary men hindu ka arth Ghulam aur Chor bataya gaya hai. MAIN KHUD "HINDU" HUN AUR MAIN TO MANUWADI BHI HUN.ved PURAN GEETA AADI KI ACHHI AUR SACHCHI BATON MEN MERI AASTHA HAI. Lekin agar main aur aap hindu hain aur hamen apne liye iss word se koi chid ya nafrat nahin hai to kya jo pehle se khud hindu kehte aa rahe hain , kya woh bhi itni hi aasani se khud ko MUSLIM keh sakte hain/ jabke iska arth bhi clear hai – eshwar ke prati apni ichhaon ko samarpit karne wala. Har baat men humen kattarta ka ilzam dene wale kya hamari sadbhawna aur prem ko bhi kabhi samajh payene?

  7. >@DR ANWAR JAMAL JI,आप ऐसा क्यूँ कह रहे हैं "Har baat men humen kattarta ka ilzam dene wale kya hamari sadbhawna aur prem ko bhi kabhi samajh payene?"प्रस्तुत लेख और सन्दर्भों से मैं पहले से वाकिफ हूँ. सिन्धु नदी के पार वाले हिन्दू हैं… "सिंधुस्तान/हिन्दुस्तान" है. हिंदिया/इंडिया है. यानी भारत वर्ष या भारतीय उपमहाद्वीप में रहने वाले सभी "हिन्दू" हैं.ठीक इसी प्रकार अरबी जबान में.. प्रकृति के नियमो को मानने वाले "मुस्लिम' हैं. यानी दुनिया के सभी बाशिंदे "मुस्लिम" हैं. हम सभी पहले मुस्लिम हैं. सभी इंसान, सभी पशु पक्षी, पेड़ पौधे क्योंकि सभी प्रकृति के नियमों को मानते हैं और उसी अनुसार जीवन जीते हैं. इसके बाद ही कोई हिन्दू है या अफ्रीकन है या अँगरेज़(इंग्लिश) है या लैटिन अमरीकी है.Particular RELIGION, Christianity, Hinduism, Islaam, Buddhism इत्यादि किसी समुदाय के लिए प्रयुक्त होने वाला संज्ञा है.धर्म इन सबसे अलग है ऊपर है. धर्म की व्याख्या बिना ज्ञान के संभव नहीं है. पूर्व में कुछ मनीषियों ने ऋषि महर्षियों ने कुछ पैगम्बरों ने अपने अपने ज्ञान, विवेक, अनुभव और दर्शन से अलग अलग भाषाओं में धर्म की व्याख्या की है. और इस धर्म को मानव जीवन में नियामक बनाया है. और समस्या यही है की अलग अलग पंथों(विभिन्न अनुसरंकर्ताओं) द्वारा स्वयं को श्रेष्ट साबित करने की बार बार कोशिश की गयी है. भारतवर्षमें सनातन धर्म प्राचीन काल से कहता आया है "सर्वधर्म समभाव..", "वसुधैव कुटुम्बकम "कट्टरता का मतलब – किसी अन्य प्राणी/इंसानों की आस्था को समझे बगैर अपनी प्रथाओं की अंधी गुलामी करना है. यदि मैं नास्तिक हूँ और कोई आस्तिक मुझे इश्वर/God में विश्वाश करने के लिए आग्रह या जबरदस्ती करेगा तो वो भी कट्टर ही कहलायेगा. इस प्रक्रिया में यदि मानव मात्र का थोडा भी अहित हुआ तो सामने वाला (जबरन प्रचार करनेवाला व्यक्ति) इंसानियत का अपराधी होगा. हिन्दू(हिन्दुस्तानी) संस्कृति, अपनी पुरातन संस्कृति, अपने लोक-व्यवहार संस्कृति की रक्षा करना प्रत्येक हिन्दुस्तानी का दायित्व है. कुछ लोग इसे हिन्दू(धर्म) में कट्टरता समझते हैं. यही अज्ञान है. विजय दशमी मनाना "सच्चाई की बुराई पर जीत का विश्वास दिलाना" हमारे(भारत में) लोक संस्कृति का अंग है. मैं रोज़े रखता हूँ क्योंकि रमजान का महिना बहुत पवित्र होता है मन में इंसानियत का जज्बा भरता है. लोग गरीबों में खैरात बांटते हैं. मैं भी बांटना चाहता हूँ. क्योंकि यह दरिद्र के लिए दान की परंपरा हमारे लोक संस्कृति का अंग है. पुरातन भारतीय परंपरा है.मुझे कुरआन या गीता बांचने की कतई जरुरत नहीं है यदि मैं इंसानियत समझता हूँ. जो इंसान होता है वो सभी धर्म या धर्मग्रंथों का मर्म समझता है. हाँ लेकिन सबसे पहले हमें अपने देश की परम्परा और संस्कृति की रक्षा जरुर करनी चाहिए. ठीक उसी प्रकार जैसे सरहद की रक्षा करते हैं.अतः: हम सभी मुसलमान (सृष्टि-विधान-पालक) हैं. और गर्व इस बात का है की हम हिन्दू (हिन्दुस्तानी) हैं.सस्नेहसुलभ

  8. >@DR ANWAR JAMAL JI,आप ऐसा क्यूँ कह रहे हैं "Har baat men humen kattarta ka ilzam dene wale kya hamari sadbhawna aur prem ko bhi kabhi samajh payene?"प्रस्तुत लेख और सन्दर्भों से मैं पहले से वाकिफ हूँ. सिन्धु नदी के पार वाले हिन्दू हैं… "सिंधुस्तान/हिन्दुस्तान" है. हिंदिया/इंडिया है. यानी भारत वर्ष या भारतीय उपमहाद्वीप में रहने वाले सभी "हिन्दू" हैं.ठीक इसी प्रकार अरबी जबान में.. प्रकृति के नियमो को मानने वाले "मुस्लिम' हैं. यानी दुनिया के सभी बाशिंदे "मुस्लिम" हैं. हम सभी पहले मुस्लिम हैं. सभी इंसान, सभी पशु पक्षी, पेड़ पौधे क्योंकि सभी प्रकृति के नियमों को मानते हैं और उसी अनुसार जीवन जीते हैं. इसके बाद ही कोई हिन्दू है या अफ्रीकन है या अँगरेज़(इंग्लिश) है या लैटिन अमरीकी है.Particular RELIGION, Christianity, Hinduism, Islaam, Buddhism इत्यादि किसी समुदाय के लिए प्रयुक्त होने वाला संज्ञा है.धर्म इन सबसे अलग है ऊपर है. धर्म की व्याख्या बिना ज्ञान के संभव नहीं है. पूर्व में कुछ मनीषियों ने ऋषि महर्षियों ने कुछ पैगम्बरों ने अपने अपने ज्ञान, विवेक, अनुभव और दर्शन से अलग अलग भाषाओं में धर्म की व्याख्या की है. और इस धर्म को मानव जीवन में नियामक बनाया है. और समस्या यही है की अलग अलग पंथों(विभिन्न अनुसरंकर्ताओं) द्वारा स्वयं को श्रेष्ट साबित करने की बार बार कोशिश की गयी है. भारतवर्षमें सनातन धर्म प्राचीन काल से कहता आया है "सर्वधर्म समभाव..", "वसुधैव कुटुम्बकम "कट्टरता का मतलब – किसी अन्य प्राणी/इंसानों की आस्था को समझे बगैर अपनी प्रथाओं की अंधी गुलामी करना है. यदि मैं नास्तिक हूँ और कोई आस्तिक मुझे इश्वर/God में विश्वाश करने के लिए आग्रह या जबरदस्ती करेगा तो वो भी कट्टर ही कहलायेगा. इस प्रक्रिया में यदि मानव मात्र का थोडा भी अहित हुआ तो सामने वाला (जबरन प्रचार करनेवाला व्यक्ति) इंसानियत का अपराधी होगा. हिन्दू(हिन्दुस्तानी) संस्कृति, अपनी पुरातन संस्कृति, अपने लोक-व्यवहार संस्कृति की रक्षा करना प्रत्येक हिन्दुस्तानी का दायित्व है. कुछ लोग इसे हिन्दू(धर्म) में कट्टरता समझते हैं. यही अज्ञान है. विजय दशमी मनाना "सच्चाई की बुराई पर जीत का विश्वास दिलाना" हमारे(भारत में) लोक संस्कृति का अंग है. मैं रोज़े रखता हूँ क्योंकि रमजान का महिना बहुत पवित्र होता है मन में इंसानियत का जज्बा भरता है. लोग गरीबों में खैरात बांटते हैं. मैं भी बांटना चाहता हूँ. क्योंकि यह दरिद्र के लिए दान की परंपरा हमारे लोक संस्कृति का अंग है. पुरातन भारतीय परंपरा है.मुझे कुरआन या गीता बांचने की कतई जरुरत नहीं है यदि मैं इंसानियत समझता हूँ. जो इंसान होता है वो सभी धर्म या धर्मग्रंथों का मर्म समझता है. हाँ लेकिन सबसे पहले हमें अपने देश की परम्परा और संस्कृति की रक्षा जरुर करनी चाहिए. ठीक उसी प्रकार जैसे सरहद की रक्षा करते हैं.अतः: हम सभी मुसलमान (सृष्टि-विधान-पालक) हैं. और गर्व इस बात का है की हम हिन्दू (हिन्दुस्तानी) हैं.सस्नेहसुलभ

  9. >जमाल अरबी में तो तू हिन्दू का अर्थ गलत लिख ही नहीं सकता.क्योकि पैगम्बर मोहम्मद की बीवी खदीजा के पहले पति से प्राप्त पुत्र का नाम हिंद था.अर्थात मोहम्मद साहब के सोतेले बेटे का नाम हिंद हुआ, तथा उनकी ढेरों पत्नियों में भी एक पत्नी का नाम भी हिन्दू था. अरब के लोग हिंद से प्यार ही नहीं बल्कि हिंदुस्तान की पूजा करते थे. बुद्धिहीन जमाल एक बात सुन कि मुसलमान लूटेरों ने इर्श्यावश हिन्दू का अर्थ काला व चोर बताया .लेकिन हिन्दू शब्द का अर्थ फारसी में "लड़कियों का दिल चुराने वाला प्रेमी".जिसे कुछ तेरे जैसे बुद्धिहीनो ने चोर लिख दिया.दूसरा अर्थ है लड़कियों के गाल पर सुन्दरता का प्रतीक काला तिल.जिसको मोहम्मद कि ओलाद केवल काला लिखती है.और अब सुन मुस्लिम का अर्थ,तो तुझे बताऊँ कि मुस्लिम का अर्थ गद्दार होता है अर्थार्त "जो अपने मित्र को शत्रु को सोंप दे".तेरे मोहमद ने भी इस शब्द से शुरू में परहेज करना चाहा था किन्तु बाद में चालाकी से इसका अर्थ बदल दिया जो कि यह है —–_"वह जो अपने व्यक्तित्व को अल्लाह को समर्पित कर दे."तो अब बता कि तू गद्दार है कि नहीं.

  10. >जमाल अरबी में तो तू हिन्दू का अर्थ गलत लिख ही नहीं सकता.क्योकि पैगम्बर मोहम्मद की बीवी खदीजा के पहले पति से प्राप्त पुत्र का नाम हिंद था.अर्थात मोहम्मद साहब के सोतेले बेटे का नाम हिंद हुआ, तथा उनकी ढेरों पत्नियों में भी एक पत्नी का नाम भी हिन्दू था. अरब के लोग हिंद से प्यार ही नहीं बल्कि हिंदुस्तान की पूजा करते थे. बुद्धिहीन जमाल एक बात सुन कि मुसलमान लूटेरों ने इर्श्यावश हिन्दू का अर्थ काला व चोर बताया .लेकिन हिन्दू शब्द का अर्थ फारसी में "लड़कियों का दिल चुराने वाला प्रेमी".जिसे कुछ तेरे जैसे बुद्धिहीनो ने चोर लिख दिया.दूसरा अर्थ है लड़कियों के गाल पर सुन्दरता का प्रतीक काला तिल.जिसको मोहम्मद कि ओलाद केवल काला लिखती है.और अब सुन मुस्लिम का अर्थ,तो तुझे बताऊँ कि मुस्लिम का अर्थ गद्दार होता है अर्थार्त "जो अपने मित्र को शत्रु को सोंप दे".तेरे मोहमद ने भी इस शब्द से शुरू में परहेज करना चाहा था किन्तु बाद में चालाकी से इसका अर्थ बदल दिया जो कि यह है —–_"वह जो अपने व्यक्तित्व को अल्लाह को समर्पित कर दे."तो अब बता कि तू गद्दार है कि नहीं.

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