स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़

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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>आजकल "मुहँनोचवा" क्यूँ नहीं दिखते लोगों को! where is Muhnochwa nowadays! -सलीम ख़ान

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हाँ भाई! क्या हुआ आजकल मुहँनोचवा क्यूँ नहीं दिखते हैं? आज कल रातों में लोगों को नोचते खसोटते क्यूँ नहीं दिखते? कहाँ गए वे मुहँनोचवा? ये तो कोई बात नहीं हुई उस ज़माने में तो रोज़ न रोज़ इन मुहँनोचवा का ज़िक्र आये दिन अख़बारों में और टीवी पर पढ़ने-देखने को मिल जाता था.
आप लोग भी भूल गए उस मुहँनोचवा को! बड़ी गलत बात है. अब देखिये न उनके (मुहँनोचवा के) दिल पर क्या बीतती होगी! क्या आपने उन्हें तलाशने की ज़रा सी भी कोशिश नहीं की? क्या आपको नहीं लगता है कि कम से कम एक बार तो उनका ज़िक्र अपने होंटो से उन मुहँनोचवा का कर लेते !!! और  इसका एक भाई पूर्वी दिल्ली में भी खूब चर्चित रहा था कम से कम उसका तो ख़्याल कर लेते !!!
मुहँनोचवा मीडिया क्रिएशन हैं, और कुछ नहीं !!!
जी हाँ, मुहँनोचवा की असलियत सिर्फ़ और सिर्फ़ इतनी है कि वह मीडिया क्रिएशन ही है बस और कुछ भी नहीं!!! दर-असल मीडिया में वो ताक़त है जो दिन को रात और रात को दिन बना देता है और इस हद तक कि लोग वह मानने भी लगते हैं. मीडिया में वो ताक़त है जो रातों-रात हीरो को विलेन और विलेन को हीरो बना देती है. कहना अतिश्योक्ति न होगी कि मीडिया ही है जो समाज में चाहे तो रातों-रात जनता में जागरूकता का इन्कलाब ला सकती है और चाहे तो रातों-रात जनता में नफ़रत का सैलाब ला सकती है!
आप सबसे यही गुज़ारिश है कि मीडिया के द्वारा निर्मित अफ़वाहों पर ध्यान न देकर सच्चाई की  तस्दीक कर लें, अगर ऐसा हो गया तो फ़िर न ही कोई मुहँनोचवा आएगा, ना ही समाज में कोई नकारात्मक अफ़वाह ही अपने पैर पसार पायेगी!!!
-सलीम ख़ान 

Filed under: स्वच्छ सन्देश

18 Responses

  1. >हमेशा अफ्वाओं से सावधान रहने की जरुरत है.अंधी दौर या सुनी सुनाई किसी का अनुसरण खड्डे में गिराती है.

  2. >हमेशा अफ्वाओं से सावधान रहने की जरुरत है.अंधी दौर या सुनी सुनाई किसी का अनुसरण खड्डे में गिराती है.

  3. >जनोपयोगी और सटीक संदेश देने के लिये आभारप्रणाम स्वीकार करें

  4. >जनोपयोगी और सटीक संदेश देने के लिये आभारप्रणाम स्वीकार करें

  5. >आपको नए साल (हिजरी 1431) की मुबारकबाद !!!

  6. >आपको नए साल (हिजरी 1431) की मुबारकबाद !!!

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