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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>वह पहला भिखारी तो मैं ही था: सलीम ख़ान (A Short Story by Saleem Khan)

>

एक व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ भोजन करने बैठा उसके सामने पूरी भूनी हुई मुर्गी थी, उसी समय एक भिकारी द्वार पर आकर कुछ माँगने लगा, उसने दरवाज़ा खोला और भिकारी को डाँट कर भगा दिया।
अल्लाह का करना ऐसा हुआ कि कुछ ही दिनों में वह व्यक्ति भी निर्धन हो गया, सारी सम्पत्ती जाती रही यहाँ तक कि उसने अपनी पत्नी को तलाक़ भी दे दिया, उस महिला ने किसी दूसरे व्यक्ति से विवाह कर लिया। एक दिन जब अपने दूसरे पति के साथ जलपान हेतु बैठी तो उसी समय एक भिकारी दरवाज़े पर आ गया। दोनों के सामने पूरी भूनी हुई मर्ग़ी थी, भिकारी की आवाज़ सुनते ही पति ने पत्नी से कहा : द्वार खोलो और यह मुर्गी उस भिखारी को दे दो !
पत्नी भिकारी को भुनी मुर्गी देने के लिए जब द्वार पर आई तो यह देख कर आश्चर्यचकित रह गई कि भिकारी कोई दूसरा नहीं बल्कि उसी का पहला पति है ( जिसने भिकारी को डाँट कर भगाया था) मुर्गी उसे दे दिया और रोती हुई अपने पति के पास लौटी.
 जब पति ने रोने का कारण पूछा तो बोली : वह भिकारी मेरा पहला पति था, फिर उसने सारी घटना सुनाई कि किस प्रकार उसके पति ने एक भिकारी को डाँट कर भगा दिया उसके तुरन्त बाद उसकी सारी संपत्ति जाती रही यहाँ तक कि उसने हमें तलाक़ दे दिया, और मैंने आप से विवाह कर लिया.
पति ने कहा:

वह पहला भिखारी तो मैं ही था

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19 Responses

  1. >संदेश देती कहानी।सादर श्यामल सुमन09955373288www.manoramsuman.blogspot.com

  2. >सलीम भाई उस पहले भिखारी ने ऎसा क्या किया जो वह धनवान हो गया . और एक बात अगर बुरा ना माने तो पाक कुरआन के उपर सोनिया गांधी अच्छी नही लग रही .

  3. >संदेश देती कहानी।सादर श्यामल सुमन09955373288www.manoramsuman.blogspot.com

  4. >सलीम भाई उस पहले भिखारी ने ऎसा क्या किया जो वह धनवान हो गया . और एक बात अगर बुरा ना माने तो पाक कुरआन के उपर सोनिया गांधी अच्छी नही लग रही .

  5. >अच्छी कहानी . धीरू जी की बात से सहमत

  6. >अच्छी कहानी . धीरू जी की बात से सहमत

  7. >सब कर्मों की माया है….सुन्दर सन्देशपरक कथा….धन्यवाद्!

  8. >सब कर्मों की माया है….सुन्दर सन्देशपरक कथा….धन्यवाद्!

  9. रचना says:

    >achcha kiya jo aap ne format badal liyaa ab congress mae aagaey haen to kissa goi to chalaegi vasae bhuni murgi prayaavaran ki drishti sahii nahin haen

  10. रचना says:

    >achcha kiya jo aap ne format badal liyaa ab congress mae aagaey haen to kissa goi to chalaegi vasae bhuni murgi prayaavaran ki drishti sahii nahin haen

  11. >बेटा तूझे जब विज्ञान की बातें करनी थीं, तो ज्ञान की बातें कर रहा है, जल्‍द दिखा अपना विज्ञान का जलवा, हम बेचैन हैं वैज्ञानिक सलीम लखनवी को पढने के लिए, उससे भी अधिक बेचेन हैं उस बात के लिए जो मेरी पहली इच्‍छा है उमदा सोच के बाद अब तुम्‍हारा ब्‍यान पढने की, ताकि हम समझ सकें अवध की तहजीब अभी सलामत है कि नही, उसी से जुडी है हमारी दूसरी इच्‍छा अर्थात अवध देखने की, हमें भिखारी समझ के पहली इच्‍छा पूरी करदो, दूसरी की हमें कोई जल्‍दी नहीं, वरना होसकता है कलको उपरोक्‍त कहानी की तरह तुम भी हमारी तरह अपनी इच्‍छा की भीक माँगो

  12. >बेटा तूझे जब विज्ञान की बातें करनी थीं, तो ज्ञान की बातें कर रहा है, जल्‍द दिखा अपना विज्ञान का जलवा, हम बेचैन हैं वैज्ञानिक सलीम लखनवी को पढने के लिए, उससे भी अधिक बेचेन हैं उस बात के लिए जो मेरी पहली इच्‍छा है उमदा सोच के बाद अब तुम्‍हारा ब्‍यान पढने की, ताकि हम समझ सकें अवध की तहजीब अभी सलामत है कि नही, उसी से जुडी है हमारी दूसरी इच्‍छा अर्थात अवध देखने की, हमें भिखारी समझ के पहली इच्‍छा पूरी करदो, दूसरी की हमें कोई जल्‍दी नहीं, वरना होसकता है कलको उपरोक्‍त कहानी की तरह तुम भी हमारी तरह अपनी इच्‍छा की भीक माँगो

  13. >…सलीम खान साहब,आपको पुन: सक्रिय देखना अच्छा लगा।कहानी हालांकि पसंद नहीं आई, भीख देने वाले हैं इसलिये अच्छे भले लोग भी भिखारी बने घूमते हैं जैसे इस कहानी के दोनों पुरूष पात्र।एक सभ्य और स्वाभिमानी समाज में 'भीख' के लिये कोई जगह नहीं होनी चाहिये… हाँ, समाज सामूहिक रूप से अंडरप्रिविलेज्ड लोगों का विशेष ध्यान रख सकता है। पर भीख देने को ग्लोरिफाई करना… माफ करना भाई… मुझे तो जमा नहीं…

  14. >…सलीम खान साहब,आपको पुन: सक्रिय देखना अच्छा लगा।कहानी हालांकि पसंद नहीं आई, भीख देने वाले हैं इसलिये अच्छे भले लोग भी भिखारी बने घूमते हैं जैसे इस कहानी के दोनों पुरूष पात्र।एक सभ्य और स्वाभिमानी समाज में 'भीख' के लिये कोई जगह नहीं होनी चाहिये… हाँ, समाज सामूहिक रूप से अंडरप्रिविलेज्ड लोगों का विशेष ध्यान रख सकता है। पर भीख देने को ग्लोरिफाई करना… माफ करना भाई… मुझे तो जमा नहीं…

  15. >भई हम तो भीख देने के सख्त खिलाफ़ हैं और देने वालों को भी दो-चार सुना देते हैं, जो भीख मांगते हैं वे कोई काम नहीं करना चाहते हैं, रुपये हम देना चाहते हैं परंतु उससे किसी काम करने के बाद जैसे कि एक भिखारी आया था एक दिन वो भीख मांगने लगा तो हमने उससे कहा कि भई भीख क्यों मांगते हो कुछ काम करो, बोला हमें कोई काम नहीं देता मैंने कहा चलो तुम मेरा बगीचा साफ़ करो, खरपतवार उखाड़ दो मैं तुम्हें रुपये दे दूँगा, बस उसकी बकबक शुरु, क्योंकि मेहनत करने में तो इनकी नानी मरती है। भीख को इस तरह जायज ठहराना ठीक नहीं..

  16. >भई हम तो भीख देने के सख्त खिलाफ़ हैं और देने वालों को भी दो-चार सुना देते हैं, जो भीख मांगते हैं वे कोई काम नहीं करना चाहते हैं, रुपये हम देना चाहते हैं परंतु उससे किसी काम करने के बाद जैसे कि एक भिखारी आया था एक दिन वो भीख मांगने लगा तो हमने उससे कहा कि भई भीख क्यों मांगते हो कुछ काम करो, बोला हमें कोई काम नहीं देता मैंने कहा चलो तुम मेरा बगीचा साफ़ करो, खरपतवार उखाड़ दो मैं तुम्हें रुपये दे दूँगा, बस उसकी बकबक शुरु, क्योंकि मेहनत करने में तो इनकी नानी मरती है। भीख को इस तरह जायज ठहराना ठीक नहीं..

  17. >दार्शनिक लोगों, यहाँ भीख लेने देने की बात नहीं हो रही, लगता हैं आपने कहानी ढंग से पढ़ी नहीं. इसका एक मात्र उद्देश्य है कि अगर ईश्वर ने आपको आर्थिक रूप से समर्थ बनाया है तो आपको किसी ग़रीब की मदद भी कर देनी चाहिए !!! नहीं तो हो सकता है जिस ईश्वर ने आपको दिया वह कल को आपसे छीन भी ले… बस इत्ती सी बात है…सलीम खान

  18. >दार्शनिक लोगों, यहाँ भीख लेने देने की बात नहीं हो रही, लगता हैं आपने कहानी ढंग से पढ़ी नहीं. इसका एक मात्र उद्देश्य है कि अगर ईश्वर ने आपको आर्थिक रूप से समर्थ बनाया है तो आपको किसी ग़रीब की मदद भी कर देनी चाहिए !!! नहीं तो हो सकता है जिस ईश्वर ने आपको दिया वह कल को आपसे छीन भी ले… बस इत्ती सी बात है…सलीम खान

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