स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़

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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>क्या आप भी ‘ज़ात’ देख किसी पर ‘एहसान’ करते हैं? Yes or No!!!???

>

मैं वैसे तो आजकल अंतरजाल पर न के बराबर आ पाता हूँ क्यूंकि एक बहुत ही ज़रूरी काम से अत्यधिक व्यस्त हूँ. लेकिन मुझे आज सुबह एक कहानी याद आयी जिसे मेरे पिता जी ने मुझसे बचपन में सुनाई थी. दर-असल वह कहानी नहीं थी वह एक नसीहत थी जो पिता जी मुझे देना चाहते थे. हक़ीक़त यही थी कि मैं उस कहानी अथवा नसीहत को उस वक़्त समझ नहीं पाया था बल्कि वक़्त के साथ-साथ जीवन की व्यावहारिकता ने मुझे सब समझा दिया!

उन्होंने जो कहानी मुझे सुनाई वह आपको बताता हूँ:-

एक बार एक बकरी किसी जगह फंस गयी थी और बहुत परेशान थी तभी वहां एक शेर आ गया. उस शेर को देखकर बकरी घबरा गयी और समझ गयी कि एक तो मैं मुसीबत में मुब्तिला हूँ, मुझे एक रक्षक की ज़रुरत थी लेकिन यह तो भक्षक आ गया! लेकिन शेर जब बकरी के नज़दीक पहुंचा तो उसने बकरी से कहा कि – बहन ! मैं तुम्हारी मदद करने आया हूँ. और इस तरह से उस शेर ने उस बकरी को उस जगह से निकाल लिया और अपनी पीठ पर बैठा कर उचित स्थान पर पहुंचा दिया.

इस पूरे घटनाक्रम को दूर बैठी एक चील देख रही थी उस चील को बहुत ज़्यादा आश्चर्य हुआ. वह सोचने लगी कि एक शेर जिसे उस बकरी को खा जाना चाहिए वह उसे खाने के बजाये उसकी मदद की! वह बकरी के पास पहुंची और शेर के द्वारा की गयी मदद का कारण जानना चाहा. बकरी ने कहा- उस शेर ने मेरी मदद इसलिए की क्यूंकि एक बार उसकी शेरनी ढूधमुहें बच्चे को छोड़ कर मर गयी थी और मैंने उस के बच्चे को ढूध पिलाया था!!! उस शेर को मेरा वह एहसान याद था जिसके बदले उसने मेरी आज जान बचाई.

चील को यह सब देख और सुन कर बड़ा अजीब लगा लेकिन वह इस घटनाक्रम से बहुत प्रभावित हुई और उसने भी अब यह सोच लिया कि वह भी ऐसा ही अब करेगी…

एक बार एक खेत में नहर का बाँध टूट जाने से उसमें पानी आ गया और उसमें से बहुत से चूहे बिलों में से निकल निकल कर अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे थे। ऊँची जगह पर बैठी चील यह सब देख रही थी उसे उन चूहों पर बहुत दया आई और वह अपनी चोंच में उन्हें दबा कर ऊँची जगह पर ले आई। इस तरह से चील ने उन मरते हुए चूहों की मदद की लेकिन वे चूहे पानी में पूरी तरह भीग चुके थे, और काँप रहे थे यह देख चील ने उन्हें अपने दोनों पंखों के अन्दर ले लिया और उन्हें गर्मी देने लगी. कुछ देर में ही चूहे ठण्ड से निजात पा चुके थे. अब वह अपने स्वभावानुसार अन्दर ही अन्दर उस चील के पंख को काटने लगे और कुछ ही देर में उन्होंने उस चील को पंखहीन कर दिया.
फ़लस्वरूप चील अब उड़ने लायक़ भी नहीं रही और वहां से किसी तरह अपनी जान बचा कर उस बकरी के पास गयी और सारा माजरा सुनाया और उससे पूछा कि तुमने उस शेर पर एहसान किया था जिसके बदले में उसने तुम्हारी जान बचाई थी लेकिन मैंने उन चूहों की जान बचाई तो वे तो मेरी ही जान के दुश्मन बन गए!!!???

एहसान भी ज़ात देख कर की जाती हैबकरी का जवाब था.

Filed under: स्वच्छ सन्देश

6 Responses

  1. >भाई हम तो कहानी समझ रहे हैं, पर ऐसे इशारों को यहां कौन समझेगा?

  2. >भाई हम तो कहानी समझ रहे हैं, पर ऐसे इशारों को यहां कौन समझेगा?

  3. >सही लिखा सलीम भाई, इशारा समझ गये हैं, खैर छोड़ो आप भी किन लोगो को समझने लगे

  4. sahespuriya says:

    >सही लिखा सलीम भाई, इशारा समझ गये हैं, खैर छोड़ो आप भी किन लोगो को समझने लगे

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