स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़

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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>मांसाहार क्यूँ जायज़ है? आलोचकों को मेरा जवाब! (Non-veg is permmited, reply to critics)

>पिछले दिनों मैंने एक लेख लिखा जिसका मज़मून था “मांसाहार क्यूँ जायज़ है?” मैंने उस लेख में यह बताने की कोशिश की कि “मांसाहार का ज़िक्र केवल कुरआन में ही नहीं बल्कि हिन्दू धर्म की किताबों में भी है और बाइबल और दूसरी दीगर मज़हबों की किताबों में भी है” लेकिन लेख में पाठकगणों के द्वारा कुछ सवाल भी पूछे गए जिसका जवाब मैंने टिपण्णी के मध्यम से देने की पूरी कोशिश की और बकिया मैं इस पोस्ट के माध्यम से यह सिद्ध करूँगा कि “मांसाहार क्यूँ जायज़ है”


विमर्श को आगे बढ़ाने से पहले मैं जैसा कि हमेशा अपना एक बात कहना चाहता हूँ तो इस लेख का सन्देश यह है-

मांसाहार और शाकाहार किसी बहस का मुद्दा नहीं है, ना ही यह किसी धर्म विशेष की जागीर है और ना ही यह मानने और मनवाने का विषय है| कुल मिला कर इन्सान का जिस्म इस क़ाबिल है कि वह सब्जियां भी खा सकता है और माँस भी, तो जिसको जो अच्छा लगे खाए | इससे न तो पर्यावरण प्रेमियों को ऐतराज़ होना चाहिए, ना ही इससे जानवरों का अधिकार हनन होगा | अगर आपको मासं पसंद है तो माँस खाईए और अगर आपको सब्जियां पसंद हों तो सब्जियां | आप दोनों को खाने के लिए अनुकूल हैं

आलोचकों ने कई तर्क रखे और आरोप भी मैं उन सभी तर्कों और आरोपों का मैं बिन्दुवार जवाब देता हूँ-

उनका पहला कथन/तर्क या आरोप था कि मैंने मांसाहार को धर्म से जोड़ कर बताया है:

मैं आपसे यह बता दूँ कि धर्म से मैंने जोड़ कर नहीं बताया है यह पहले से ही वेदों, कुरान, मनुस्मृति और महाभारत वगैरह में लिखा है. और यह सत्य है. ऐसा मुझे नहीं लगता कि मैंने यह गलत किया क्यूँ कि एक हमारा हिंदुस्तान ही तो है जहाँ धर्म को इतनी अहमियत दी जाती है. यही वजह थी कि मुझे अपनी बात सार्थक तरीके से कहने के लिए उन महान और मान्य ग्रन्थों का हवाला देना पड़ा अगर मैं सिर्फ यह कहता कि यह मेरा ओपिनियन है तो मेरी बात का असर बिलकुल भी नहीं होता. अगर आपको किसी इस तरह के मुद्दों पर कुछ कहना हो तो आप भी उन सभी हवालों (सार्थक, सत्य और मान्य) का ज़िक्र करना ना भूलें, क्यूंकि हो सकता है कि आपके विचार भले ही आपको सही लग रहें हों, और वह पूर्णतया ग़लत और निरर्थक हों | क्या यह बात सही नहीं है कि मांसाहार और शाकाहार के मुद्दे को हमारे हिंदुस्तान में धर्म की नज़र से देखा जाता? बिल्कुल -सही है, इसे धर्म विशेष से जोड़ कर ही देखा जाता है| इसी वजह से मुझे अपनी बात में उन किताबों के महत्वपूर्ण उद्वरण का उल्लेख करना पड़ा| अंतत मैं आपसे और आप सबसे यह कहना चाहूँगा कि (मेरा मानना यह है कि) मांसाहार और शाकाहार को धर्म के नज़र से नहीं देखना चाहिए.

अगला आरोप था कि मांसाहार मनुष्य के स्वाभाव में आक्रामकता पैदा करता है?

दूसरा तर्क यह है कि मांसाहार मनुष्य के स्वाभाव में आक्रामकता पैदा करता है. चलिए ठीक है, मैं आपकी बात से हद दर्ज़े तक सहमत हूँ कि जो हम खाते है उसका हमारे स्वाभाव पर सीधा प्रभाव पड़ता है| यही वजह है कि हम लोग उन जानवरों को खाते है जो शांतिप्रिय हों – जैसे मुर्गी, बकरी, भेंड आदि. और इन जानवरों का व्यवहार कैसा होता है? यह शांतप्रिय होते हैं जनाब| हम इसी वजह से उन जानवरों को नहीं खाते जो आक्रामक होते है जैसे- शेर, चिता, कुत्ता और सुवर आदि.
नबी हज़रत मोहमम्द सल्ल० ने साफ़ तौर पर कहा है, इस तरह के जानवर तुम पर हराम (prohibited) हैं| हम शांतिप्रिय हैं, इसीलिए हम उन्ही जानवरों को खाते है जो शांतिप्रिय हैं. We are peace loving people, therefore we want to have animals which are peaceful.

अब मैं बहस को आगे बढ़ाता हूँ, मुआफ कीजियेगा. अब मैं वकील की तरह बोलूँगा क्यूंकि बात तर्क की है तो आगे बढ़ना भी ज़रूरी है- आप लोग पेड़-पौधों को खाते हैं, इसीलिए आप पेड़-पौधों की तरह व्यवहार करते हैं. that is, suppression of the senses… a lower species. मैं जानता हूँ कि यह गलत है | मैं सिर्फ एक वकील की तरह व्यवहार कर रहा हूँ| मुझे शर्म महसूस हो रही है इस तरह से लिखकर. यह सत्य नहीं हैं कि अगर आप पेड़-पौधों को खायेगे तो नींम श्रेणी की प्रजाति में गिने जायेंगे या जड़वत हैं| लेकिन जैसा आपने आर्गुमेंट्स दिया उसका यह जवाब था. मुझे मुआफ करें, I really apologize…अगर आप शाकाहारियों का दिल दुखा हो. यह वैज्ञानिक रूप से सत्य नहीं है, यह केवल तर्क था.

बुद्धिजीवियों में शाकाहारियों का प्रतिशत ज़्यादा है:

कुछ लोग यह तक भी देतें हैं कि महात्मा गाँधी सरीखे लोग शाकाहारी थे! मैं महात्मा गाँधी की बहुत इज्ज़त करता हूँ क्यूंकि भारत के लिए उन्होंने बहुत कुछ किया और इंसानियत के लिए भी. लेकिन क्यूंकि महात्मा गाँधी अहिंसावादी थे, शांतिप्रिय थे, यहाँ यह दर्शाने के लिए लिखा गया कि शाकाहार आपको शांतिप्रिय बनाता है.

तो सुनिए आज आप दुनिया के सबसे बड़े नोबेल पुरस्कार (शांति हेतु) का विश्लेषण करें तो पाएंगे उनमें से ज्यादातर, बल्कि सभी मांसाहारी थे. मसलन-मनेक्चंग बेगन- मांसाहारी, यासीर अराफात-मांसाहारी, अनवर सादात-मांसाहारी, मदर टेरेसा- मांसाहारी, आपने पढ़ा मदर टेरेसा मांसाहारी थीं.

अब आपसे एक बहुत ही महत्वपूर्ण सवाल जिसका आप जवाब दीजिये! अभी तक के इतिहास में मनुष्य में कौन सा ऐसा व्यक्ति या व्यक्तित्व था जो मशहूर था- सबसे ज्यादा लोगों को मारने के लिए- क्या आप गेस कर सकते है????

….. हिटलर , अडोल्फ़ हिटलर, उसने छह मिलियन यहूदियों को मारा था | क्या वह मांसाहारी था या शाकाहारी?…………शाकाहारी.

खैर! अब आगे आप कहेंगे कि – अडोल्फ़ हिटलर शाकाहारियों के नाम पर धब्बा था और वह एक अपवाद था. वह कभी कभी माँस भी खाता था| आपको यह भी अंतरजाल पर सर्च करने पर मिलेगा कि उसे जब गैस की समस्या होती थी, तब ही वह सब्जियां खाता था. मैं आपको फ्रेंक्ली एक बात बता दूँ कि वैज्ञानिक रूप से अडोल्फ़ हिटलर का छह मिलियन यहूदियों को मारने का सम्बन्ध उसके खानपान से बिल्कुल भी नहीं है और ना ही मैं यह कह रहा हूँ कि वह शाकाहारी था या मांसाहारी था. मैं यह जानने में बिल्कुल भी इंटररेस्टेड नहीं हूँ कि वह क्या खाता था क्यूँ कि इस बात में कोई वज़न नहीं है| मेरा मानना यह है कि अडोल्फ़ हिटलर द्वारा ऐसा करने का कारन कुछ और है जो कि पूर्णतया अमानवीय है और यह वह नहीं जो उनका खानपान है. मैं एक रिसर्च के बारे में बताता हूँ- अमेरिका में कुछ शाकाहारी और मांसाहारी विद्यार्थियों पर शोध किया गया तो पाया गया कि मांसाहारी विद्यार्थी ज़्यादा शांतिप्रिय और सोशल थे और शाकाहारी कम, यानि शाकाहारी ज़्यादा उग्र थे और मांसाहारी कम | लेकिन यह एक रिसर्च था- यह कोई वैज्ञानिक तथ्य नहीं. मैं इसे बिल्कुल भी यह साबित करने के लिए नहीं बता रहा हूँ कि मांसाहारी शांतिप्रिय होते हैं | चूँकि यह एक बहस है, मुझे यह लिखने पर मजबूर होना पड़ रहा है और आपने जो भी आरोप लगाये वह या तो तर्क थे या रिसर्च, वह कोई वज्ञानिक तथ्य नहीं थे.

कुछ लोग यह भी कहते हैं कि शाकाहारियों ने अपनी काबिलियत और बुद्धि का लोहा मनवा लिया है. मैं आपको बता दूं बहुत से ऐसे भारतीय भी है जो बहुत बुद्दिमान थे और भारत के लिए उन्होंने बहुत कुछ किया है लेकिन वे सब मांसाहारी. आपका कहने का मतलब यह था कि शाकाहारी ज़्यादा बुद्धिजीवी होते है, आपने नाम भी गिनवाए जैसे जार्ज बर्नाड- जो सौ साल जिया. मैं आपको कुछ नाम और बताता हूँ जो शाकाहारी थे और बहुत बड़े बुद्धिजीवी भी- अलबर्ट आइंस्टाइन, इसाक न्यूटन. ठीक है…!

आपको मैं एक बात और बता दूं कि यह भी सत्य ही है कि मांसाहारी जानवर ज़्यादा बुद्धिमान होते हैं बनिस्बत शाकाहारी जीव के | लेकिन मैं इसे भी बहस का हिस्सा नहीं बनाऊंगा कि मांसाहार आपको बुद्धिमान बनाता है क्यूंकि यह सब बातें हम इंसानों पर लागू नहीं हो सकती हैं | खानपान का इन्सान पर फर्क पड़ता है या आपके खानपान पर असर नहीं डालता है, यह एक तर्क है ………. तर्क से सत्य पर कोई फर्क नहीं पड़ता.

आगे मैं आपसे एक पूछता हूँ क्या आप ‘यदुनाथ सिंह नायक’ के नाम से वाकिफ हैं, नहीं मालूम मैं बताता हूँ |यदुनाथ सिंह नायक एक शाकाहारी थे और सेना में कार्यरत थे | वह कुश्तीबाज़ थे और उन्होंने विश्व चैम्पियनशिप में दो मांसाहारी कुश्तीबाजों को धुल चटा दी थी| तब तो आपको लगेगा कि शाकाहार से इन्सान ज़्यादा ताक़तवर बनाता है| मैं आपको बता दूँ कि कुश्तीबाजी के विश्व चैम्पियंज़ में शाकाहारी भी हैं और मांसाहारी भी | बात को आगे बढाते हैं- अगर आप पुरे विश्व के लिहाज़ से अगर कम्पेयर करेंगे तो आप को पता है सबसे ज़्यादा कुश्तीबाजी में कौन मशहूर है- मांसाहारी!

बोडी बिल्डिंग में कौन सबसे ज़्यादा मशहूर है——अर्नाल्ड श्वार्ज्नेगेर | तेरह बार अर्नाल्ड ने विश्व विजेता का खिताब जीता था और सात बार मि. ओलंपिया और पांच बार मि. यूनिवर्स और एक बार मि. वर्ल्ड | आपको पता है- वह क्या था ??? वह शाकाहारी था या माँसाहारी ??? माँसाहारी !!! बोक्सेर- मोहमम्द अली – माँसाहारी ! कैसियस क्ले- माँसाहारी ! माइक टायसन- माँसाहारी !

कुछ ब्लॉग मित्रों ने यह पूछा था कि चिकन और मटन के साथ चावल और रोटी क्यूँ इस्तेमाल की जाती है?

अब इसका मैं क्या जवाब दूँ| मैं आपसे पूछूँ कि आप खाना खाने पर पानी क्यूँ पीते हैं? तो आप क्या जवाब देंगे | पानी शाकाहारी है या माँसाहारी !!!?

अब मैं निम्न तथ्यों के साथ अपनी बातें ख़त्म करना चाहता हूँ: 1 – दुनिया में कोई भी मुख्य धर्म ऐसा नहीं हैं जिसमें सामान्य रूप से मांसाहार पर पाबन्दी लगाई हो या हराम (prohibited) करार दिया हो.
2 – क्या आप भोजन मुहैया करा सकते थे वहाँ जहाँ एस्किमोज़ रहते हैं (आर्कटिक में) और आजकल अगर आप ऐसा करेंगे भी तो क्या यह खर्चीला नहीं होगा?
3 – अगर सभी जीव/जीवन पवित्र है पाक है तो पौधों को क्यूँ मारा जाता है जबकि उनमें भी जीवन होता है.
4 – अगर सभी जीव/जीवन पवित्र है पाक है तो पौधों को क्यूँ मारा जाता है जबकि उनको भी दर्द होता है.
5 – अगर मैं यह मान भी लूं कि उनमें जानवरों के मुक़ाबले कुछ इन्द्रियां कम होती है या दो इन्द्रियां कम होती हैं इसलिए उनको मारना और खाना जानवरों के मुक़ाबले छोटा अपराध है| मेरे हिसाब से यह तर्कहीन है.
6 -इन्सान के पास उस प्रकार के दंत हैं जो शाक के साथ साथ माँस भी खा/चबा सकता है.
7 – और ऐसा पाचन तंत्र जो शाक के साथ साथ माँस भी पचा सके. मैं इस को वैज्ञानिक रूप से सिद्ध भी कर सकता हूँ | मैं इसे सिद्ध कर सकता हूँ.
8 – आदि मानव मांसाहारी थे इसलिए आप यह नहीं कह सकते कि यह प्रतिबंधित है मनुष्य के लिए | मनुष्य में तो आदि मानव भी आते है ना.
9 – जो आप खाते हैं उससे आपके स्वभाव पर असर पड़ता है – यह कहना ‘मांसाहार आपको आक्रामक बनता है’ का कोई भी वैज्ञानिक आधार नहीं है.
10 – यह तर्क देना कि शाकाहार भोजन आपको शक्तिशाली बनाता है, शांतिप्रिय बनाता है, बुद्धिमान बनाता है आदि मनगढ़ंत बातें है.
11 – शाकाहार भोजन सस्ता होता है, मैं इसको अभी खारिज कर सकता हूँ, हाँ यह हो सकता है कि भारत में यह सस्ता हो. मगर पाश्चात्य देशो में यह बहुत कि खर्चीला है खासकर ताज़ा शाक.
12 – अगर जानवरों को खाना छोड़ दें तो इनकी संख्या कितनी बढ़ सकती, अंदाजा है इसका आपको.
13 –कहीं भी किसी भी मेडिकल बुक में यह नहीं लिखा है और ना ही एक वाक्य ही जिससे यह निर्देश मिलता हो कि मांसाहार को बंद कर देना चाहिए.
14 – और ना ही इस दुनिया के किसी भी देश की सरकार ने मांसाहार को सरकारी कानून से प्रतिबंधित किया है.

उम्मीद करता हूँ कि यह लेख आपकी मांसाहार के प्रति उठ रही जिज्ञासाओं को शांत कर देगा… ईश्वर हम सबको सत्य की खोज का प्यासा बनाये !

सलीम खान

Filed under: माँसाहार, माँसाहार या शाकाहार

14 Responses

  1. pryas says:

    >सलीम साहिब,आप कुंए के मेंढक की तरह हो. जो केवल अपनी बात को सच समझ कर बाकि दुनिया को नकारता है. आप भी कुंए के मेंढक की तरह केवल इस्लाम का बिगुल बजा रहे हैं. अरे मुर्ख आदमी, कभी मुस्लमानों की अपनी कौम की भलाई, उनका सामाजिक स्तर आदि विषयों पर भी विचार कर. अगर हम हिंदू रामायण, गीता और पुराणों का गुणगान ही करते रहते तो हम तुम्हारी तरह ही भूखे मर रहे होते. तुम हाय कुरान-हाय कुरान का राग अलापना और मुसलमानों को भडकाना बंद करो और अपनी कौम की भलाई के लिये कुछ करो.वैसे तुम जैसे मुर्खों को समझाने का कोई फायदा नहीं.तुम्हारे फालतू और बकवास लेखों का जवाब नीचे पढ लो.1इस दुनिया को कुछ-कुछ,जानने लगा हूँ.आतंकवाद का चेहरा अब,पहचानने लगा हूँ.**********2धर्म निरपेक्षता के बिगुल,हम बजाते रहे हैं.घर के चिरागों से,घर जलाते रहे हैं.**********3जिनको पाला था हमने,कभी भाई बनके.वो सभी आस्तीन के,साँप निकले.**********4मैं भाई समझ कर जिसे,प्यार करता रहा.वो छुप कर पीछे से,वार करता रहा.**********

  2. pryas says:

    >सलीम साहिब,आप कुंए के मेंढक की तरह हो. जो केवल अपनी बात को सच समझ कर बाकि दुनिया को नकारता है. आप भी कुंए के मेंढक की तरह केवल इस्लाम का बिगुल बजा रहे हैं. अरे मुर्ख आदमी, कभी मुस्लमानों की अपनी कौम की भलाई, उनका सामाजिक स्तर आदि विषयों पर भी विचार कर. अगर हम हिंदू रामायण, गीता और पुराणों का गुणगान ही करते रहते तो हम तुम्हारी तरह ही भूखे मर रहे होते. तुम हाय कुरान-हाय कुरान का राग अलापना और मुसलमानों को भडकाना बंद करो और अपनी कौम की भलाई के लिये कुछ करो.वैसे तुम जैसे मुर्खों को समझाने का कोई फायदा नहीं.तुम्हारे फालतू और बकवास लेखों का जवाब नीचे पढ लो.1इस दुनिया को कुछ-कुछ,जानने लगा हूँ.आतंकवाद का चेहरा अब,पहचानने लगा हूँ.**********2धर्म निरपेक्षता के बिगुल,हम बजाते रहे हैं.घर के चिरागों से,घर जलाते रहे हैं.**********3जिनको पाला था हमने,कभी भाई बनके.वो सभी आस्तीन के,साँप निकले.**********4मैं भाई समझ कर जिसे,प्यार करता रहा.वो छुप कर पीछे से,वार करता रहा.**********

  3. >यह नास्तिक हिन्दुओं, बौद्धों और जैनों से बढ़कर शाकाहारी है, यानि की 'वीगन' है, जो दूध-शहद या इनसे बनी चीज़ों सभी परहेज रखता है. और तुम्हारी खटिया खड़ी किये हुए है. डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भी शाकाहारी हैं. प्लेटो, सुकरात, अरस्तु, पाइथागोरस, प्लूटार्क जैसे दार्शनिक शाकाहारी थे, जिनका लोहा दुनिया मानती है.लिओनार्दो द विन्ची शाकाहारी थे. लिंकन शाकाहारी थे. बाकि शकाहरिओं की लिस्ट यहाँ देख, और विचार कर http://www.happycow.net/famous_vegetarians.htmlऔर तुम अपने हिन्दू होने की गवाही देने वाली पोस्ट में जिन स्वामी विवेकानंद की फोटो लगते हो वे भी शाकाहारी थे.

  4. >यह नास्तिक हिन्दुओं, बौद्धों और जैनों से बढ़कर शाकाहारी है, यानि की 'वीगन' है, जो दूध-शहद या इनसे बनी चीज़ों सभी परहेज रखता है. और तुम्हारी खटिया खड़ी किये हुए है. डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भी शाकाहारी हैं. प्लेटो, सुकरात, अरस्तु, पाइथागोरस, प्लूटार्क जैसे दार्शनिक शाकाहारी थे, जिनका लोहा दुनिया मानती है.लिओनार्दो द विन्ची शाकाहारी थे. लिंकन शाकाहारी थे. बाकि शकाहरिओं की लिस्ट यहाँ देख, और विचार कर http://www.happycow.net/famous_vegetarians.htmlऔर तुम अपने हिन्दू होने की गवाही देने वाली पोस्ट में जिन स्वामी विवेकानंद की फोटो लगते हो वे भी शाकाहारी थे.

  5. >"हम इसी वजह से उन जानवरों को नहीं खाते जो आक्रामक होते है जैसे- शेर, चिता, कुत्ता और सुवर आदि"हमें तो आज पता चला कि "सूअर" आक्रामक होता है…गधे से शान्त शायद कोई जीव नहीं होता होगा.. तो फिर आप गधे का माँस क्यूं नहीं खाते ?मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि आप बेफालतू की बकवास लिख लिख कर अपनी ओर इस्लाम की मिट्टी पलीद करवाने पर क्यूं तुले हुए हैं ?

  6. >"हम इसी वजह से उन जानवरों को नहीं खाते जो आक्रामक होते है जैसे- शेर, चिता, कुत्ता और सुवर आदि"हमें तो आज पता चला कि "सूअर" आक्रामक होता है…गधे से शान्त शायद कोई जीव नहीं होता होगा.. तो फिर आप गधे का माँस क्यूं नहीं खाते ?मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि आप बेफालतू की बकवास लिख लिख कर अपनी ओर इस्लाम की मिट्टी पलीद करवाने पर क्यूं तुले हुए हैं ?

  7. kulu says:

    >अगर सभी जीव/जीवन पवित्र है पाक है तो पौधों को क्यूँ मारा जाता है जबकि उनको भी दर्द होता है. jab tum pad se fal todata ho to kya unhe bhi mar deta ho. nahi Ishi parkar kya tum ganhu ya chawwal ki fasl ko pakne se pahle hi kaat deto ho kya. paki hui gahu or chawwal ki fasal me jevan nahi hota haui. agar tum koi hara pad katata ho to ushme jeevan hota hai.

  8. kulu says:

    >अगर सभी जीव/जीवन पवित्र है पाक है तो पौधों को क्यूँ मारा जाता है जबकि उनको भी दर्द होता है. jab tum pad se fal todata ho to kya unhe bhi mar deta ho. nahi Ishi parkar kya tum ganhu ya chawwal ki fasl ko pakne se pahle hi kaat deto ho kya. paki hui gahu or chawwal ki fasal me jevan nahi hota haui. agar tum koi hara pad katata ho to ushme jeevan hota hai.

  9. rohit says:

    >बधाई बधाई बधाई सुरेश भाऊ उम्दा सोच और सभी भाइयो को रोहित की बधाई . भाई बधाई की तो बात ही है हम लोगो के सम्मिलित प्रयास से सलीम भाई भी हिंदू धर्म को स्वीकार कर लिए है अब वो अल्लाह को छोड़कर ईश्वार का नाम ले रहे है अरे मैं झूठ नही बोल रहा हूँ भाऊ आप उनकी इसी पोस्ट की आखरी लाइन देखिएजहाँ वो ईश्वार से प्रार्थना कर रहा है.सलीम चूतिए कॉपी पेस्ट के लिए भी अकल की ज़रूरत पढ़ती है जो तुझमे नही है

  10. rohit says:

    >बधाई बधाई बधाई सुरेश भाऊ उम्दा सोच और सभी भाइयो को रोहित की बधाई . भाई बधाई की तो बात ही है हम लोगो के सम्मिलित प्रयास से सलीम भाई भी हिंदू धर्म को स्वीकार कर लिए है अब वो अल्लाह को छोड़कर ईश्वार का नाम ले रहे है अरे मैं झूठ नही बोल रहा हूँ भाऊ आप उनकी इसी पोस्ट की आखरी लाइन देखिएजहाँ वो ईश्वार से प्रार्थना कर रहा है.सलीम चूतिए कॉपी पेस्ट के लिए भी अकल की ज़रूरत पढ़ती है जो तुझमे नही है

  11. >टिप्पणियाँ , आलोचनाएँ और सराहनाएं लेखक को और अधिक लिखने के लिए प्रोत्साहित करती है, इसलिए लेख पढने पर आपको कैसा लगा यह ज़रूर टिपण्णी करें.धन्यवाद.सलीम खान (संरक्षक, स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़)

  12. >टिप्पणियाँ , आलोचनाएँ और सराहनाएं लेखक को और अधिक लिखने के लिए प्रोत्साहित करती है, इसलिए लेख पढने पर आपको कैसा लगा यह ज़रूर टिपण्णी करें.धन्यवाद.सलीम खान (संरक्षक, स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़)

  13. >यह तो प्रमाणित हो चुका है कि जब एक पशु का वध kiya जा रहा होता है तो उसमे उत्तेजनात्मक होरमोंस का प्रवाह बढ़ जाता है और यह उसे खाने वाले को भी प्रभावित करता है .

  14. >यह तो प्रमाणित हो चुका है कि जब एक पशु का वध kiya जा रहा होता है तो उसमे उत्तेजनात्मक होरमोंस का प्रवाह बढ़ जाता है और यह उसे खाने वाले को भी प्रभावित करता है .

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