स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़

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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>हिन्दू धर्म के अनैतिक नियम और भारतीय संविधान की कसौटी Hindu religious law and Indian constitution

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पिछली कुछ पोस्ट्स में मैंने वह झलक पेश की जो हिन्दुत्व का स्रोत है। अब मैं आर एस एस के प्रचारक बलराज मधोक और उनकी विचारधारा के वाहक से कुछ सवाल पूछना चाहते कि इंसानियत और सामाजिक आधार पर जो तथ्य व इतिहास हम हिन्दू धर्म में पहले से सीखते आ रहे हैं क्या हमारे वर्तमान समय में व्यावहारिक हैं? और क्या वह भारतीय संविधान की कसौटी पर खरे उतारते हैं? आखिर क्या वजह थी क्या मजबूरी थी कि भारतीय संविधान में “हिन्दू ला” को परिभाषित किया गया?? मैं उन बातों पर भी प्रकाश डालना चाहता हूँ जिस की आख्या भी हिन्दू लेखकों के कलम से प्रस्तुत की गई है, इस के हवाले से हम ‘‘बलराज मधोक’’ जी से कहना चाहेंगे कि अगर यह ही हिन्दुत्व है तो हमारा तो इसे दूर से ही सलाम है, स्वयं आप भी इस पर खुले आम अमल नहीं कर सकते यह केवल पुराने समय की बात थी, जो समय के साथ इतिहास का हिस्सा बन चुकी, अब जो चलने वाली व्यवस्था है वह केवल और केवल इस्लामी व्यवस्था है
स्वंय आप उसी व्यवस्था में जी रहे हैं।
उदाहरण के बतोर भारतीय कानून की नजर मे ब्राह्मण और शूद्र एक समान हैं.
आज विधवा को सति नहीं किया जा सकता, या तो उस की दूसरी शादी कर दी जाए वरन राज्य उसे विधवा पेंशन दे
नियोग से बच्चा पैदा नहीं किया जा सकता (यह राज्य की दृष्टि मे चाहे अपराध न हो अपितु समाज की दृष्टि में अवश्‍य अपराध है)
ऐसे ही शिक्षा केवल ब्राह्मण के लिए नहीं है बल्कि सब के लिए है ।अब कोई शम्बूक (शूद्र) शिक्षा प्राप्ति और जप-तप करने के कारण मारा नहीं जा सकता.
भ्रुण हत्या पर प्रतिबन्ध
जन्म से पहले लिंग पता करने पर प्रतिबन्ध
दहेज लेने देने पर प्रतिबन्ध
यह सब इस्लामी कानून हैं ।
खास बात यह भी है कि इन में से अधिक तर हिन्दू धर्म के विपरीत हैं, इन चीजों के विपरीत हिन्दू धर्म में स्पष्‍ट आदेश है, जैसा कि वर्ण व्यवस्था, सती या नियोग आदि, और हिदू धर्म के पर्वतक उसका नमूना पेश करते हैं, दहेज को ही लीजिए, चाहे उसका स्पष्‍ट आदेश न हो परन्तु मर्यादा पुरूषोत्तम राम के विवाह में देखये, राजा जनक ने उन्हें किस कदर भारी संख्या मे दहेज दिया था ।यह एक नमूना था उन आदेशों/आदर्शों का जिनका सम्बन्ध कानून से है, इस के अतिरिक्त कुछ बातें वह है जिन का सम्बन्ध नैतिकता से है, इस्लाम क्यों कि मुकम्मल निजाम-ए-हयात (जीवन जीने कि सम्पूर्ण पद्धति) है अतः इस्लाम ने नैतिकता के आधार पर भी बहुत से नियम पेश किये हैं।
उदाहरण के तौर पर एक मशहूर हदीस है कि

अगर तुम कहीं जुल्म (अन्याय) होता देखो और तुम उसे रोकने की शक्ति रखते हो तो शक्ति का प्रदर्शन करके उसे रोक दो । और अगर अपने अन्दर उसे रोकने की शक्ति नहीं पाते बल्कि ज़ुबान से अन्याय को अन्याय कह सकते हो। तो जुबान से जुल्म को जुल्म कहो इस समय तुम्हारा चुप रहना पाप है। और अगर इतनी भी शक्ति नहीं है तो दिल से बुराई को बुराई समझो, और उससे अलग हो जाओ, यह ईमान का आखिरी दर्जा है अर्थात किसी भी स्थिति में अन्याय का समर्थन जायज़ नहीं है।

इसकी तुलना महाभारत के युद्ध में भगवान श्री कृष्‍ण के किरदार से किजिए, जिस युद्ध में वह अर्जुन के सार्थी बनकर उन्हें अधर्म के विरूद्ध युद्ध करने के उपदेश दे रहे थे उसी युद्ध में उन्होंने अपनी सम्पूर्ण सैनिक शक्ति दूसरे पक्ष को दे रखी थी । एक दूसरा उदाहरण देखिये, राजा दशरथ ने अपनी एक पत्नी को दिये गये दो वचनों के कारण अपने पुत्र श्री राम को घर से निकाल दिया था, ऐसी स्थिति में इस्लामी कानून यह है कि वह वचन जिस में किसी की हकतलफी होती है वह सिरे से खारीज है उस पर अमल नहीं किया जाएगा यहां तक कि अगर कोई भूल-चूक में भी किसी ऐसे कार्य के करने की कसम खा बैठे तो इस्लामी नियम के अनुसार वह कार्य नहीं किया जाएगा साथ ही कसम के झूठा होने के कारण कसम का कफ्फारा (एक प्रकार का दंड ) देना अनिवार्य होगा
ख्याल रहे कि भारतीय कानून भी कुछ ऐसा ही है, यही कारण है कि अगर कोई अपने बेटे को इसलिए घर से निकाल दे कि उस ने किसी को यह वचन दिया था तो उसका वचन जाए भाड़ में, भारतीय न्यायालय और सरकार उसे ऐसा करने की अनुमति नही दे सकती
अतः श्री बलराज मधोक जी और उनके वैचारिक समर्थकों से निवेदन है कि इस्लामी व्यवस्था का अधिकांश हिस्सा समय चक्र के आहनी पंजे ने बलपूर्वक आप से मनवा दिया है अब आप ज़िद छोडें, और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए निष्‍पक्ष होकर इस्लामी व्यवस्था के बाकी बचे हिस्से का अघ्ययन करेंअब जो कुछ बचा है वह कुछ अधिक नहीं, अपितु बहुत मामूली सा है और वह क्या है, उसे पवित्र कुरआन कि भाषा में मुलाहिज़ा …फरमाइये

‘हे ईशवरीय ग्रन्थ रखने वालों आओ एक ऐसी बात की ओर जिसे हमारे और तुम्हारे बीच समान मान्यता हासिल है वह यह कि हम एक ईश्‍वर के अतिरिक्त किसी अन्य को न पूजें और ना ही उसके साथ किसी को सा़झी ठहराएं और न परस्पर हममें से कोई एक दूसरे को एक ईश्‍वर से हटकर पालनहार बनाये ’’। (सूरत आल-ए-इमरान 64)

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16 Responses

  1. >जिसकी जितनी अकल उतने तक की सोच !मार काट वालो को कैसे समझाऊ समझ नहीं आ रहा खोपडी ही जिसकी उलटी है सब काम भी उल्टे करता है !कहता है दो कौमों को पास ला रहा है ,आज तक इस्लाम के प्रति जो सम्मान हमारे दिल में था, ये और इसके दोस्त मिल कर सब धो डाल रहे है !ये ग़दर फिल्म के अमरीश पूरी सा सैडिस्ट मालुम पड़ता है जो पाकिस्ता ज़िंदाबाद सुनकर संतुस्ट नहीं है और हिन्दुस्तान मुर्दाबाद सुनना चाहता है फलस्वरूप उसे खूब लात पड़ती है !

  2. >जिसकी जितनी अकल उतने तक की सोच !मार काट वालो को कैसे समझाऊ समझ नहीं आ रहा खोपडी ही जिसकी उलटी है सब काम भी उल्टे करता है !कहता है दो कौमों को पास ला रहा है ,आज तक इस्लाम के प्रति जो सम्मान हमारे दिल में था, ये और इसके दोस्त मिल कर सब धो डाल रहे है !ये ग़दर फिल्म के अमरीश पूरी सा सैडिस्ट मालुम पड़ता है जो पाकिस्ता ज़िंदाबाद सुनकर संतुस्ट नहीं है और हिन्दुस्तान मुर्दाबाद सुनना चाहता है फलस्वरूप उसे खूब लात पड़ती है !

  3. >सारी दुनिया के बुद्धिजीवियों का ध्रुव (अटल) मत है कि इस्लामी कानून शैतानों को नियंत्रित करने के लिये सबसे प्रभावशाली हैं।

  4. >सारी दुनिया के बुद्धिजीवियों का ध्रुव (अटल) मत है कि इस्लामी कानून शैतानों को नियंत्रित करने के लिये सबसे प्रभावशाली हैं।

  5. बवाल says:

    >एक बात तो तय है मियाँ, के आप जैसा किताबी मुसलमान हमने अपने इस्लाम के सफ़र में आज तक नहीं देखा। कुछ बातें आप अच्छी भी कर रहे हैं मगर लहजे के मामले में सिवा उस पर पानी फेरने के और कुछ भी नहीं कर रहे हैं। यह आप पर है कि आग में कूदने या अलाव कूदिए।खै़र हमने सुना है उलटे घड़े पर पानी ठहरता नहीं है शायद, इसलिए मेहनत से फ़ायदा ?

  6. बवाल says:

    >एक बात तो तय है मियाँ, के आप जैसा किताबी मुसलमान हमने अपने इस्लाम के सफ़र में आज तक नहीं देखा। कुछ बातें आप अच्छी भी कर रहे हैं मगर लहजे के मामले में सिवा उस पर पानी फेरने के और कुछ भी नहीं कर रहे हैं। यह आप पर है कि आग में कूदने या अलाव कूदिए।खै़र हमने सुना है उलटे घड़े पर पानी ठहरता नहीं है शायद, इसलिए मेहनत से फ़ायदा ?

  7. >assalamalekum salim bahiaapke lekhe padhe aapne kafi acchie baatein likhi hai.lekin aap udeshaye se bhatahk gaye hai."हिन्दोस्तान की दो बड़ी क़ौम को एक ही छत के नीचे लाने का प्रयास"aap lagataar hindu dharam ki aalochnaye kar rahe hai.ye sab jante hai (main bhee) ki hindu dharam mein lakh kamiya hai.sanatan dharm ka vastvik swroop nasht ho chuka hai.pande pujariyo ne sab apne labh ke niyam bana dale."ye chiz aab islam mein bhee aa gaye hai." logo ne apne fayde ke liye masail bana dale"meri aapse gujarish hai ki aap kevel is baat par likhe jo hindu bhaiyon ke dil mein musalmano ki liye galatfamihyan hai. mussalmano ki jo badnami (atankwaad ki wajah se) ho rahi hai, musalmano par jo jaydtiya ho rahi hai(encopunters etc)unhe door karne ki koshaish kare.alochnatmak lekh likh kar aap upna blogging ka udeshya poora nahi kar payenge.

  8. >assalamalekum salim bahiaapke lekhe padhe aapne kafi acchie baatein likhi hai.lekin aap udeshaye se bhatahk gaye hai."हिन्दोस्तान की दो बड़ी क़ौम को एक ही छत के नीचे लाने का प्रयास"aap lagataar hindu dharam ki aalochnaye kar rahe hai.ye sab jante hai (main bhee) ki hindu dharam mein lakh kamiya hai.sanatan dharm ka vastvik swroop nasht ho chuka hai.pande pujariyo ne sab apne labh ke niyam bana dale."ye chiz aab islam mein bhee aa gaye hai." logo ne apne fayde ke liye masail bana dale"meri aapse gujarish hai ki aap kevel is baat par likhe jo hindu bhaiyon ke dil mein musalmano ki liye galatfamihyan hai. mussalmano ki jo badnami (atankwaad ki wajah se) ho rahi hai, musalmano par jo jaydtiya ho rahi hai(encopunters etc)unhe door karne ki koshaish kare.alochnatmak lekh likh kar aap upna blogging ka udeshya poora nahi kar payenge.

  9. >इस देश ने मुसलमानों को जो सहूलियत दे रक्खी है और कहा है ? शरियत पे चलना चाहते हो तो यहाँ भी चोरी पकडे जाने पर मुसलमान का हाथ काट देना लागू कराने के लिए संघर्ष करो और बहुमत दो !

  10. >इस देश ने मुसलमानों को जो सहूलियत दे रक्खी है और कहा है ? शरियत पे चलना चाहते हो तो यहाँ भी चोरी पकडे जाने पर मुसलमान का हाथ काट देना लागू कराने के लिए संघर्ष करो और बहुमत दो !

  11. >अति सुन्‍दर, तुम विषय सूची की पोस्‍ट पर किताब का कमेंटस कर आये, वहां घटिया सोच का कमेंटस पढ आओ, में भी ऊपर नहीं पढ रहा किया लिखा, कमेंटस कर रहा हूं, अवधिया चाचा जो कभी अवध ना गया

  12. >अति सुन्‍दर, तुम विषय सूची की पोस्‍ट पर किताब का कमेंटस कर आये, वहां घटिया सोच का कमेंटस पढ आओ, में भी ऊपर नहीं पढ रहा किया लिखा, कमेंटस कर रहा हूं, अवधिया चाचा जो कभी अवध ना गया

  13. Anonymous says:

    >aaj ke vartman swaroop me islam sahit sabhee SANGATHIT dharmon ka nash hee insan aur inshaniyat ko bacha payega .aapkee baten bakwas hain .mool mudda har insan ke liye ROTEE KAPADA MAKAN SIKXCHHA SWASHTHY NYAY AUR SAMMAN HAIN .BAS.

  14. Anonymous says:

    >aaj ke vartman swaroop me islam sahit sabhee SANGATHIT dharmon ka nash hee insan aur inshaniyat ko bacha payega .aapkee baten bakwas hain .mool mudda har insan ke liye ROTEE KAPADA MAKAN SIKXCHHA SWASHTHY NYAY AUR SAMMAN HAIN .BAS.

  15. Anonymous says:

    >मर्यादा पुरूषोत्तम राम के विवाह में देखये, राजा जनक ने उन्हें किस कदर भारी संख्या मे दहेज दिया था lakin janak ne dahej nahi diya tha. wo to uphaar diya jaata tha jo Baad me dahej partha ben gayi.विधवा को सति नहीं किया जा सकता sati partha ka janam baad ma huwa tha Jab Muslimo Ne bhart par attack kiya tha. Muslim sanik sitriya ka ballatkar karta tha jis karan unhai sati hona padata tha.शिक्षा केवल ब्राह्मण के लिए नहीं है बल्कि सब के लिए है vedic kal me jiski Ruchi padane mai hoti thi wo pandit tha aur jo yudh karne mai Ruchi lata tha wo chatriya aur jo busness karta tha veshy aur jo kuch nahi janta tha wo bhuddiheen tha usha shudra kaha jaata tha

  16. Anonymous says:

    >मर्यादा पुरूषोत्तम राम के विवाह में देखये, राजा जनक ने उन्हें किस कदर भारी संख्या मे दहेज दिया था lakin janak ne dahej nahi diya tha. wo to uphaar diya jaata tha jo Baad me dahej partha ben gayi.विधवा को सति नहीं किया जा सकता sati partha ka janam baad ma huwa tha Jab Muslimo Ne bhart par attack kiya tha. Muslim sanik sitriya ka ballatkar karta tha jis karan unhai sati hona padata tha.शिक्षा केवल ब्राह्मण के लिए नहीं है बल्कि सब के लिए है vedic kal me jiski Ruchi padane mai hoti thi wo pandit tha aur jo yudh karne mai Ruchi lata tha wo chatriya aur jo busness karta tha veshy aur jo kuch nahi janta tha wo bhuddiheen tha usha shudra kaha jaata tha

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