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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>आरएसएस RSS के भूतपूर्व प्रचारक ‘बलराज मधोक’ की पुस्तक झूठी व मनगढ़ंत

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भारतीय हिन्दुत्ववादी संगठन आर.एस.एस. के भूतपूर्व प्रचारक ‘‘बलराज मधोक’’ की पुस्तक ‘‘विश्‍वव्‍यापी मुस्लिम समस्याएं’’ पढ़ने का अवसर प्राप्त हुआ, पूरी किताब झूठ, बोहतान और मन घडन्त आरोपों पर आधारित है। मिसाल के तौर पर मधोक जी ने अपनी पुस्तक के पेज नं 15 पर कुछ इस्लामी इस्तलाहात मुजाहिद, शहीद व ‘गाजी’ की परिभाषा करते हुए अपनी ओर से ‘गाजी’ की मन घड़न्त ‘‘परिभाषा’’ इन शब्दों में की है –
‘‘जिस ने अपने हाथ से कम से कम एक काफिर को खत्म किया है, ऐसे मुसलमान को गाजी कहा जाता है।’’ – पृष्‍ठ न. १५
ख्याल रहे कि यह निराधार परिभाषा मधोक जी की है। इस्लाम या मुसलमान से इसका कोई सम्बन्ध नहीं ।
मधोक जी ने अपनी पुस्तक में अनेक स्थानों पर लिखा है कि जहाँ भी इस्लामी राज्य स्थापित हुआ वहाँ की गैर मुस्लिम जनता के सामने दो में से एक विकल्प चुनना अनिवार्य था, इस्लाम या मौत – पृष्‍ठ न. 16,२२
अफसोस कि मधोक जी ने यह लिखते हुए इतना न सोचा कि भारत में कई शताब्दियों तक इस्लामी राज्य कायम रहा । परन्तु मधोक जी फिर भी बच गये, बल्कि दो में से एक विकल्प देने वाले अल्प संख्यक रह गये और मधोक जी ….
बलराज मधोक जी को इतिहास का कितना ज्ञान है इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि वह अपनी पुस्तक के पृष्‍ठ नं 34 पर लिखते हैं कि सोमनाथ के मन्दिर पर मुसलमान आकर्मणकारियों द्वारा बनाई गई मस्जिद को हटा कर सरदार पटेल ने पुनः मन्दिर बनवाया
सब जानते है कि सोमनाथ के मन्दिर पर कभी मस्जिद नहीं रही, परन्तु नफरत के पुजारी नफरत का करोबार करने के लिए इतिहास को बदलने की नाकाम कोशिश करते रहते हैं।
मधोक जी कितने बड़े ज्ञानी हैं, और वह अपने समय के हालात से कितनी वाकफियत रखते हैं इस का अन्दाज़ा इस बात से कीजिए कि सन 2003 में वह अपनी उक्त पुस्तक में लिखते हैं कि इस समय संसार में छोटे बडे़ चालीस इस्लामी देश हैं – पृष्‍ठ ३९
ज़ाहिर है कि या तो उन्हें गिनती नहीं आती या उनका भौगोलिक ज्ञान कमज़ोर है, अगर वह संसार का मानचित्र उठा कर इस्लामी देशों की गिनती करते तो यह संख्या उनकी बताई संख्या से दस /पन्द्रह अंक ऊपर जाती ।जिस व्यक्ति के ज्ञान की यह स्थिति हो उसकी कृति को महत्व देना उस पर विचार व्यक्त करना अपना समय नष्‍ट करने के सिवा कुछ नहीं, परन्तु मधोक जी ने मुसलमानों के भारतीयकरण करने के सम्बन्ध में लिखा है –
‘उसके लिए एक रास्ता तो यह है कि इस्लाम का भूत उतार कर उन्हें पुनः अपने मूल हिन्दू परिवार में लौटने के लिए प्रेरित किया जाये।’’- पृष्‍ठ ४९
इस प्रकार के आग्रह मधोक जैसे विचार रखने वाले कुछ अन्य लोगों की ओर से भी समय समय पर आते रहते हैं, आर.एस.एस. के ही एक अन्य प्रचारक हरिद्वार के डा. अनुप गौड ने अपने द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘‘क्या हिन्दुत्व का सूर्य डूब जायेगा’’ प्रकाशित 2006 में मुसलमानों का आहवान करते हुए लिखा है कि
‘‘ इस पुस्तक के माध्यम से मैं आहवान करता हूँ कि वह अपने स्वधर्म में लौट आयें ’’ पृश्ठ-78 ।
उक्त विद्वानगण के इस प्रकार के विचार, सोचने वाला दिमाग रखने वाले मनुष्‍य को मजबूर करते हैं कि मुस्लमानों को जिस धर्म में लौटाने के लिये उक्त विद्वानगण इतने बेताब दिखाई पड़ते हैं, उसको समझा जाए और इस्लाम का भूत उतार कर मधोक जी जिस धर्म का भूत चढ़ाना चाहते हैं इस्लाम से उसका तुलनात्मक अध्ययन किया जाए। तो आइये इस परीपेक्ष में इस्लाम और हिन्दू धर्म का एक सरसरी तुलनात्मक अध्ययन करते हैं।

धर्मों का आधार पूजनीय ईश्‍वर होता है, इसी कारण जिन समाजों में ईश्‍वर की कल्पना नहीं, उन्हें नास्तिक कहा जाता है। इसलिए बेहतर होगा कि बात ‘पूजनीय ईश्‍वर’ से ही शुरू की जाय, यहाँ यह पुष्टि करना भी अनिवार्य है कि हमने ज्ञान का आधार धर्म ग्रन्थों को बनाया है, क्योंकि व्यक्ति विशेष, क्या कह रहा है इसका कोई महत्व नहीं, महत्व धर्म ग्रन्थों का होता है क्योंकि व्यक्ति विशेष की करनी, कथनी में अन्तर हो सकता है या वह बात कह कर बदल भी सकता है जबकि ग्रन्थ बदला नहीं करते ।”

इस्लाम में पूजनीय केवल एक ईश्‍वर की ज़ात है, जो कि सर्वशक्तिमान है, सब का पालनहार और सब का स्वामी है, जिसका न कोई साझी है, नही कोई उस जैसा है, इस सम्बन्ध में जब हम हिन्दू धर्मग्रन्थों का अध्ययन करते हैं तो कहीं एक ईश्‍वर की बात मिलती है, कही तीन की, तो कहीं तैंतीस करोड़ देवी देवताओं की और कहीं यह भी कि दुनिया की हर वस्तु ईश्‍वर है।

साभार: मोहम्मद उमर कैरानवी

Filed under: आर एस एस झूठा

4 Responses

  1. >कमाल करते हो भई, तुम्‍हारे इस अंदाज पे ही तो दुनिया फिदा है, कितने खूबसूरत तरीके से बात रखी है, लाजवाबजिसका साभार किया है उसका उसके ब्लाग से लिंक बनाओ, और वहां उस पोस्‍ट पर अब तीन गुणा मेटर और डाल दिया उसे आप देखना भी मत वर्ना पता नहीं कैसे प्रयोग करोगे, महत्‍वपूर्ण चिटठों में islaminhindi.blogspot.com नहीं है, पता नहीं यह रूत्‍बा कब नसीब होगा,

  2. >सलीम खान जी नया रूप दिखा आपका , हत्प्रभ्कारी ,अन्ततोगत्वा यह तो सिद्ध कर ही दिया आपने की एक मुस्लिम अन्य धर्मो का अपमान एवं निरादर करने में ही आनंद पाता है | जहाँ तक कई वर्षों के इस्लामिक शासन के बाद भी हिन्दुओं के बचें रहने के का प्रश्न है तो यह तो यह छत्रपति शिवाजी , महाराणा प्रताप और गुरु गोविन्द सिंह जैसे वीरों के ररण संभव हुआ है तथा इस देश की हिन्दू जनता ने भी वर्षों तक अपने प्राणों की बलि देकर अपने धर्म की रक्षा की है अर्थात हिन्दू बच इस लिए गए क्योंकी मुगलों की तलवारे पहले थक गई थीं और फिर कुंद हो गई थीं अन्यथा आप ही बताइए की मध्यकाल में मंदिरों को अपने आप को अखाडों में क्यों परिवर्तित करना पड़ा?और हाँ यह सन्देश स्वक्ष किसी भी दृष्टी से नहीं है

  3. Anonymous says:

    >jo hindu bhartiya mhadweep mein bache ve veeron ki santan hai jinhone islam ka pratikar kiya aur hndutva ke liye lade mare.. lekin agar dekha jaye to islam kabool karne wale bhi kam nahi hai.. bharat, pakistan aur bangladesh, do ki pahle bharat ka hisaa the unko mila diya jaye to kareeb 50 karod muslman banaye gaye.. jo ki poore mahadweep ki abadi ka kareeb 40 pratishat hai.. inte jyada muslman to baki ki duniya mein bhi mila kar nahi hain.. isliye tumhara ye kahna ki yahan jabran dharm parivartan nahi hua sarasar galat hai.. tumhare purkhon ne bhi dar ke hi islam kabool kiya hoga saleem khan..

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