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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>वेद और कुरआन – कितने दूर कितने पास Similarities between Ved and Qur’an – Part 2

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आखिर फ़िर इतना मतभेद क्यूँ???


फिर यह इतनी भारी भूल कैसे हुई कैसे आखिर? इतने सारे धर्म, सबकी अलग अलग मान्यताएं, यह कैसे हुआ? इसका कारण है, अपने अपने मान्य ग्रन्थों से धर्म को समझ पाना!

मुसलमान केवल 1400 साल पूरानी क़ौम है, पर इन डेढ़ हज़ार सालों में उनमें यह बिगाड़ पैदा हो गया कि वह कुरआन पढ़ते तो हैं मगर उसका अर्थ नहीं जानते हैं. कितने ही मुसलमान हैं जिनको कुरआन ज़ुबानी याद है, कितने ही मुसलमान है जो रोज़ कुरआन पढ़ते हैं, पढ़ते हैं, मगर समझ कर नहीं पढ़ते हैं ! और कितने ही मुसलमान हैं जिनके घर में कुरआन सादर कपडे में लिप्त हुआ तो रखा है मगर वह इसे पढ़ते नहीं है और वैसे भी बिना समझे पढना, पढने के बराबर ही है. वे कुरआन को इतनी इज्ज़तअतिइज्ज़तदे देते हैं कि उसका मकसद ही फ़ौत (ज़ाया) हो जाता है.

उधर हिन्दू सबसे पुरी धार्मिक क़ौम है, कभी उनमें भी यही बिगाड़ आया होगा कि वे वेद पढ़ते तो होंगे मगर उसका अर्थ नहीं जानते होंगे. एक वक़्त ऐसा भी आया होगा कि जब वेद केवल उनके घर की शोभा बढ़ने के काबिल ही रह गए होंगे. उनका पाठ भी बंद हो गया होगा और आज हजारों साल बाद आलम यह है कि करोणों हिन्दू संसार में आते हैं और वेदों के एक बार भी दर्शन करे बगैर ही इस दुनिया से चले जाते हैं. प्रत्येक हिन्दू देववाणी केवल वेद को ही मानता है. रामायण और महाभारत वह स्वयं ऋषियों और मुनियों की कृति कहता है, परन्तु उनके घर में ये पुस्तकें तो होती हैं मगर वेद नहीं होते हैं

यही कारण है कि धर्म को देवकृत धर्म ग्रन्थों से प्राप्त करने से इतने बहुत से धर्म बन गए.

वेद और कुरआन एक दुसरे की पुष्टि करते हैं:

यदि ऐसा न हुआ होता तो सारी मानवजाति आज एक धर्म पर होती क्यूंकि सारे धर्म ग्रन्थ एक दुसरे की पुष्टि करते हैं उदहारण में मैं ईश्वर के पहले और अंतिम ग्रन्थ को पेश करना चाहता हूँ अर्थत वेद और कुरआन को.

कुरआन सभी देव-कृत धर्म ग्रन्थों में सबसे अंत में आया. अपने से पहले सारे ग्रन्थों की पुष्टि करते हुए आया. एक मुसलमान पर उन सभी पिछले ग्रन्थों पे आस्था और यकीन रखना ज़रूरी है. अन्यथा कुरआन के अध्याय 2 के श्लोक संख्या 285 के अनुसार वह मुसलमान नहीं हो सकता. कुरआन कहता है कि–

और हमने सत्य के साथ (ऐ मुहम्मद सल्ल०) तुम पर किताब (कुरआन) उतारी जो इससे पहले आने वाले सभी ग्रन्थों की पुष्टि करती है और उन पर निगराँ है… (कुरआन- अध्याय 5 श्लोक संख्या 48)

आज तक कुरआन के विद्वानों ने यह न सोचा कि जिस आदि ग्रन्थ के बारे में बताया गया है वह कौन है? उन्होंने तो यह भी विचार नहीं किया कि संसार में मात्र एक ही ऐसी क़ौम है जो आदि ग्रन्थ रखने का दावा करती है उन्होंने वेदों को इस दृष्टि से देखने का प्रयत्न ही नहीं किया कि कुरआन के बताये हुए यह ही तो नहीं!? वह यह हमेशा से समझते चले आ रहे हैं कि जिन आदिग्रन्थों का ज़िक्र कुरआन में है वह अब इस संसार में कभी थे और अब उनका कोई अस्तित्व नहीं है। हालाँकि उनका सोचन भी एक हद तक जायज़ है.

हिन्दू मुसलमानों से भी अधिक बड़े अपराधी है।


हिन्दू मुसलमानों से भी अधिक बड़े अपराधी है क्यूंकि उन्होंने कभी मुसलामानों को यह नहीं बताया कि तुम्हारे कुरआन में वर्णित ग्रंह हमारे पास है। वह यह वेद ही तो है. और सच बात यह है कि वे बताते भी कैसे! वह तो स्वयं वेदों पूर्णतया कट चुके हैं. ख़ैर ! कुरआन वेदों की पुष्टि करता है और वेद उसके बारे में क्या कहते हैं? स्वयं देख ले–

“उर्ध्व मुख वाली अरणी (ज्ञान) पर नीचे मुख वाली अरणी (ज्ञान) को रखो तत्काल गर्भ वाली अरे में कामनाओं की वर्षा करने वाली “अग्नि” को प्रकट किया” (ऋग्वेद- अध्याय ३ हिम संख्या २९ श्लोक संख्या ३)

इस प्रकार हमने देखा कि यह दोनों ग्रन्थ – प्रथम ग्रन्थ (वेद) और अंतिम ग्रन्थ (कुरआन) एक दुसरे की पुष्टि कर रहे हैं.

यही समाधान है:

निष्कर्ष यह निकलता है कि यह समस्त ईश्वरीय ग्रन्थ जिनके एक सिरे पर वेद है दुसरे सिरे पर कुरआन; एक ही धर्म को लेकर आये थे। यह पूरा एक क्रम है। इन सभी में आस्था रखनी सभी के लिए अति आवश्यक है। इनकी सहायता से ही हम सत्य सनातन धर्म को समझा जा सकता है, जो ईश्वर की इच्छा है और जो हमेशा से चला आ रहा है; सत्य धर्म है.

अब संसार का धर्म एक होगा, घृणायें समाप्त हों जाएँगी। यही समाधान है.

तो आईये ! आईये उस सनातन धर्म की खोज करे जो वेदों है और जो कुरआन में है.

(अगले अंक में पढ़े: वेदों का ईशदूत कौन था और मनु (हज़रत नूह अलैहि०) की कहानी सभी धर्म की पुस्तकों में समान है)

:::चलते-चलते:::

“आ गैरियत के परदे एक बार फ़िर मिटा दें, बिछड़े को फ़िर मिला दें, नक्से मिटा दें.
सुनी पड़ी हुई है मुद्दत से दिल की बस्ती, आ इक नया शिवाला इस देश में बना दें.”

Filed under: वेद और कुरआन

4 Responses

  1. >अच्‍छी पोस्‍ट पर बधाई, सभी धर्म पुस्‍तकों में मनु कथा समान नहीं, केवल 3 धर्मों इसाई,यहूदी, मूसलमान जिनके god एक है या यूं कहें कि जिन्‍हें अल्‍लाह ने किताबें दी थी, जिनमें अंतिम संदेष्‍टा पर विवाद है की किताबों में यह कथा मिलती जुलती हैं, चोथे धर्म हिन्‍दू पर यह नई और लाजवाब करदेने वाली खोज है, कहने का मतलब यह था कि सभी धर्म से अगर आपका तात्‍पर्य बडे धर्म से था तो ठीक है, पिछली कडी दूसरी तरफ ध्‍यान बांटकर बर्बाद की गई, इस दफा खबरदार रहिये, उधर के लिये मैं हूं आप इधर ध्‍यान दिजिये,

  2. >शुक्रिया उमर भाई, और सभी धर्म से मेरा मुराद सभी बड़े धर्म ही है.

  3. safat alam says:

    >सलीम भाई ! ज़रूरत है कि लोगों को यह अनुभव कराया जाए कि आप अपनी वैदिक शिक्षाओं से कोसों दूर हो चुके हैं यदि वेदों की शिक्षाओं का पालन शुरू कर दें तो सब इस्लाम को गले लगालेंगे।

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