स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़

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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>वेद और कुरआन – कितने दूर कितने पास Similarities between Ved and Qur’an – Part 1

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दीपावली के अवसर पर आपके सबके लिए यह नया लेख जिसका मज़मून है “वेद और कुरआन – कितने दूर कितने पास“. यह लेख एक धारावाहिक (नशिस्त) के अंदाज़ में होगी जिसके हर नशिस्त में हम यह साबित करते जायेंगे की वेद और कुरआन वेद और कुरआन कितने पास-पास हैं.
इस की शुरुआत मैं जमाते इस्लामी हिंद द्वारा जयपुर में आयोजित कार्यक्रम “कुरआन सबके लिए” अभियान के तहत आयोजित कुरआन कॉन्फ्रेन्स में कानपुर के स्वामी लक्ष्मी शंकराचार्य जी के उदघोष से करना चाहता हूँ जिसमें स्वामी जी ने यह उदघोष किया कि वेद और कुरआन की लगभग सभी शिक्षाएं समान ही हैं और हमें समानता की नाव पर सवार होकर हिन्दोस्तान ही नहीं पुरे विश्व को एकसूत्र में पिरो सकते है और सत्यमार्गी बन अपना कल्याण कर सकते है, मानवजाति का कल्याण कर सकते हैं. स्वामी लक्ष्मी शंकराचार्य जी ने कहा कि वेद और कुरआन एक हैं. दोनों में ही इंसानियत और भाईचारे की बात कही गई है. दोनों में ही ईश्वर को अजन्मा, अविनाशी व निराकार कहा गया है. स्वामी ने कहा कि वेद, उपनिषद व गीता की तरह कुरआन में भी बहुदेववाद का घोर विरोध किया गया है.
आज ईश्वर (अल्लाह) को मानते तो सब हैं परन्तु पहचानते बहुत कम लोग हैं. हम सभी जानते हैं कि ईश्वर एक ही है तो फ़िर यह प्रॉब्लम क्यूँ? सभी कहते हैं कि सभी का ईश्वर एक ही है लेकिन…. ये लेकिन कहाँ से आ रहा है? इसके जवाब के लिए हमें अपने सिर जोड़ कर बैठना पड़ेगा. आईये ! सर जोड़ कर बैठे. अपने लिए! इस संसार के लिए!! ईश्वर के लिए!!! यदि धर्म से विश्व की आग ठंडी करनी है तो पहले धर्मों की लडाई शांत करें. संसार में जितने भी आज धर्म हैं वह किसी न किसी रूप में एक अंतिम सत्ता की बडाई में विश्वाश रखते हैं. अल्लाह, लॉर्ड, ईश्वर या परमब्रह्म के नाम से एक सर्वशक्तिमान की मान्यता ही से हर धर्मं शुरू होता है.
हिन्दुओं से पूछिये– “क्या ईश्वर या परमब्रह्म केवल हिन्दुओं का है?” वे कहेंगे- “नहीं सबका है!” मुसलमान से पूछिये – “क्या अल्लाह केवल मुसलमान का है?” वे कहेंगे- “नहीं सबका है!” यही सवाल ईसाई या यहूदी से पूछने पर भी समान उत्तर ही  मिलेगा.
वेद और कुरआन का धर्म एक ही है:
एक ईश्वर ने जो धर्म स्थापित किया था उसमें आगे चल कर अनेक कमियां आ गयीं. अतः उसी प्राचीन, शास्वत, सनातन धर्म को स्थापित करने के लिए मनु (हज़रत नूह अलैहिस्सलाम) को भेजा  जिन्होंने धर्म ग्रन्थ (संभवतः) वेद संसार को दिए. फ़िर उसी ईश्वर की इच्छापूर्ति के लिए हज़रत मुसा अलैहिस्सलाम धर्म ग्रंथ “तौरेत” के साथ आये. हज़रत मुहम्मद (ईश्वर की उन पर शान्ति हो) ने कुरआन के साथ उसी सन्देश, उसी धर्म को स्थापित करने आये.
एक ईश्वर की इच्छा प्रत्येक युग के मनुष्यों के लिए भिन्न नहीं हो सकती. मूल मान्यताएं एक ही होंगी. फ़िर यह कैसे हुआ कि आदि काल में मनु (हज़रत नूह अलैहिस्सलाम) ने मनुष्यों को हिन्दू धर्म सिखाया, हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने हजारों साल बाद आकर उन्हें यहूदी बना दिया, हजरत ईसा अलैहिस्सलाम ने उन्हें ईसाई बना दिया और अंत में हज़रत मुहम्मद (ईश्वर की उन पर शान्ति हो) ने उन्हें मुसलमान बनाने को कहा. ऐसा हो ही नहीं सकता. यह अतार्किक सा है.
हम से अवश्य ही भारी भूल हुई है, कहीं न कहीं हम ऐसी भूल में फंस चुके है जिससे उबरना अब बेहद ज़रूरी हो गया है. हमारे लिए, मानवता के लिए, इस संसार के लिए, ईश्वर के लिए! यदि यह सभी ईशदूत, यह सभी ऋषिगण सच्चे थे और अवश्य ही सच्चे थे, उनके अपने जीवन इसके साक्षी हैं, उनके लाये हुए ईश्वरीय ग्रन्थ इसके गवाह हैं तो उन सभी ने एक ही धर्म की  शिक्षा दी होगी…
क्रमशः
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वेद और कुरआन – कितने दूर कितने पास” के इस भाग में बस इतना ही, अगली नशिस्त में यह जानने की कोशिश करेंगे कि आखिर फ़िर इतना मतभेद क्यूँ???
-सलीम खान

Filed under: वेद और कुरआन

10 Responses

  1. >बहुत ही बढिया आलेख…ऐसे प्रेम और भाईचारे से सम्बन्धित लेख आप निरंतर लिखते रहें

  2. >बहुत ही बढिया आलेख…ऐसे प्रेम और भाईचारे से सम्बन्धित लेख आप निरंतर लिखते रहें

  3. बवाल says:

    >वेद और क़ुर‍आन तो मियाँ पहले से ही पास-पास हैं। हाँ मगर उनकी शिक्षाओं पर (बिना अक्ल) अमल करने वाले लोग हैं दूर दूर! है कि नहीं ? आपकी इस बात से हम भी इत्तिफ़ाक रखते है के (मनू-नूह-नोहा) तीनों एक ही पात्र हैं क्योंकि कहानी भी एक ही है। तो क्यों ना हम सब भी अब एक …………….खै़र हटाइए, हम ज़प्ते-ग़मे-ज़बाँबंद।फ़ीअमानिल्लाह!

  4. बवाल says:

    >वेद और क़ुर‍आन तो मियाँ पहले से ही पास-पास हैं। हाँ मगर उनकी शिक्षाओं पर (बिना अक्ल) अमल करने वाले लोग हैं दूर दूर! है कि नहीं ? आपकी इस बात से हम भी इत्तिफ़ाक रखते है के (मनू-नूह-नोहा) तीनों एक ही पात्र हैं क्योंकि कहानी भी एक ही है। तो क्यों ना हम सब भी अब एक …………….खै़र हटाइए, हम ज़प्ते-ग़मे-ज़बाँबंद।फ़ीअमानिल्लाह!

  5. a.u. says:

    >मेरी दुआएं आप के साथ हैं । A.U.SIDDIQUI

  6. A.U.SIDDIQUI says:

    >मेरी दुआएं आप के साथ हैं । A.U.SIDDIQUI

  7. >@राजीव जी, बवाल जी, जीशन भाई और सिद्दीकी साहब आपका शुक्रिया

  8. >@राजीव जी, बवाल जी, जीशन भाई और सिद्दीकी साहब आपका शुक्रिया

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