स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़

Icon

सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>साम्प्रदायिकता के विरोध में ब्लॉग लेखन से एक सप्ताह की ख़ामोशी

>

मन बीते शुक्रवार से ही बहुत अशांत था. बीते कुछ महीने से और खास कर पिछले पंद्रह दिनों से हिंदी ब्लॉग जगत में जो दबंगई (साम्प्रदायिक) चल रही है, उससे मन क्षुब्द होता जा रहा था. आज रविवार की सुबह से ही तालमटोल कीसी कैफ़ियत हो रही थी. सुबह जब ब्लोगवाणी और चिट्ठाजगत खोला तो देखा किहक़ बातपर सलीम भाई ने जो बातें कहीं और समझाईं उसे भी ये साम्प्रदायिकता के सदस्यगण नकारात्मक ले गए. मैंने वहां कमेन्ट भी किया कि शयेद एक हफ्ते तक ब्लॉग पर नहीं सकूँगा. लेकिन तीसरे पहर आते आते मेरे ह्रदय में यह विचार अब पुख्ता हो गया कि बस ! अब और नहीं !! अब और नहीं सह सकता !!!


अक्सर मैं हिन्दोस्तान की दो बड़ी क़ौम की समानता पर ही अपना विषय रख लेख लिखता हूँ और कभी कभार कुछ कमियों को दूर करने वाले लेख जो हमारे भारतीय समाज में हैं। लेकिन मैं जब से लिख रहा हूँ तब से मैं देख रहा हूँ कि ब्लॉग जगत का एक ख़ास मानसिकता वाला तबका लगातार मेरे खिलाफ़ नकारात्मक प्रचार कर रहा है। क्या यह ग़लत नहीं है, आप केवल इसलिए विरोध करते हैं क्यूंकि मैं वो नहीं हूँ जो आप हैं.

मैं साम्प्रदायिकता के सदस्यों से अपील करता हूँ कि प्लीज़ आप अपने पूर्वाग्रह से बाहर आयें. हम सब एक है ज़रा गौर करें, आपनी वास्तविकता को पहचाने, हम सब वाकई एक ही हैं. हम सब एक ही मालिक के बन्दे हैं, सबका मालिक एक ही है. यह मैं लिखता आया हूँ और लिखता आऊंगा, चाहे जो हो जाये

मैं
देख रहा हूँ कि कई ब्लॉग लगातार नकारात्मक लेख लिख कर मुझे और इस्लाम को बदनाम कर रहें है जबकि उन्हें खुद नहीं पता कि वह मेरा विरोध किस मुद्दे पर कर रहें है. हाँ ! उन्हें विरोध करने की जो आदत है वह केवल वही है कि सामने वाला कौन है, कौन है सामने वाला!?

मेरे पास कई फ़ोन आये कुछ लोगों ने मुझसे कहा कि आप अपने लेख का विषय बदल दीजिये। मैं उनसे एक ही बात पूछी कि आपको मेरे लेख में कौन सी ऐसी बात लगी जो सही नहीं है. तो वह तालमटोल गए

दरअसल बात यह है भारत ही नहीं पुरे विश्व में साम्प्रदायिकता के सदस्यों ने जो इस्लाम और मुसलमान को बदनाम करने की जो शर्मनाक साजिश चल रही है उसका माध्यम यह मीडिया है. मीडिया के कई प्रकार है. आज के ज़माने में ब्लॉग भी इसका एक हिस्सा बन चुका है. जो आवाज़ इस्लाम के सपोर्ट में उठती है वह यह मीडिया दिखाता ही नहीं है और मुस्लिम समाज के गलत लोगों को इतना बाधा चढा कर पेश करता करता है कि एक इस्लाम ही है जो दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा है, जबकि सच्चाई यह है कि एक इस्लाम की ही शिक्षाएं ही हैं जिसको अपना कर दुनिया को सभी खतरों से निजात पाई जा सकती हैं.

मेरे पास अभी वक़्त कम है, वरना इस विषय पर और लिखता लेकिन फिलवक्त तो मन बहुत अशांत है। चलते चलते मैं उन ब्लोग्स के पोस्ट्स के लिंक्स यहाँ दर्शा रहा हूँ जो बहुत ही बेहयाई से अपने लेख को ज़हरीला बना कर पेश कर रहें हैं.

======
http://mahashakti.bharatuday.in/2009/10/blog-post_10.html
http://sureshchiplunkar.blogspot.com
<a class="transl_class" id="531" href="http://varun-jaiswal.blogspot.कॉम/”>http://varun-jaiswal.blogspot.कॉम/ (हाँ ज्ञानदत्त जी यह चिरकुट ( डॉ जाकिर नाइक ) पोस्ट बरबाद करने लायक तो है ..!! मेरे पिछले लेख पर श्री ज्ञानदत्त पाण्डेय … Mon, 03 Aug 2009 22:34:00 GMT
शाकाहार बनाम मांसाहार की चर्चा और सलीम खान( डॉ जाकिर नाइक ) के कुतर्कों को मेरा विस्तृत जवाब !! * मित्रों आप सभी इस मामले के सभी पक्षों … Mon, 03 Aug 2009 00:53:00 GMT )
http://dhankedeshme.blogspot.com/
http://indianwomanhasarrived.blogspot.com/2009/10/blog-post_07.html
http://mohalla.blogspot.com/2009/06/blog-post_4455.html
http://mohalla.blogspot.com/2009/06/blog-post_3640.html
http://limestone0km.blogspot.com/
http://janokti.blogspot.com/
http://sanskaardhani.blogspot.com/2009/10/blog-post_04.html
=========
तो अब से एक हफ्ते तक ब्लॉग से अलविदा ! इस उम्मीद से कि लौट कर कुछ अच्छा ही होगा. भाई लोग तब तक संभल चुके होंगे. भूल चूक मुआफ़!!!

चलते चलते एक रेकुएस्ट है


आओ उस बात की तरफ जो हममें और तुममें यकसां हैं

आप सबका
सलीम खान
संयोजक (हमारी अन्जुमन: विश्व का प्रथम एवमं एकमात्र हिंदी इस्लामी सामुदायिक ब्लॉग)
संरक्षक (स्वच्छ सन्देश:हिन्दोस्तान की आवाज़)
संपर्क:
सलीमएलकेओ@जीमेल.कॉम
स्वच्छसन्देश@जीमेल.कॉम
हमारीअन्जुमन@जीमेल.कॉम

Filed under: Uncategorized

9 Responses

  1. >तो फिर मैं भी अब कोई लेख नहीं लिखूंगा आज से, सलीम भाई आपकी खामोशी जायज़ है मगर दिलासा यह अच्छी है कि आप एक हफ्ते बाद आ जायेंगे वरना हम तो घर ही गए थे. आप ब्लॉग जगत की शान बन चुकें हैं, यह सब जानते हैं कि आपमें बहुत ऊर्जा है. देखतें हैं क्या होता है?

  2. >ठीक है तुम्हारा फैसला. उम्मीद है कुछ नया होगा तुम्हारे लौट आने के बाद.

  3. Anonymous says:

    >एक सप्ताह क्यों? परमानेंट हो जाओ तो थोड़ी स्वच्छता ब्लागिंग जगत में आ जायेगी

  4. >सलीम भाई!मैं इस्लाम के बारे में अपनी जानकारी को स्तरीय नहीं कह सकता। लेकिन इतना जरूर है कि मेरे शहर के काज़ी हबीबुल्ला साहब मेरे पिताजी के विद्यार्थी थे और विद्यालय में अध्यापक भी। वे संस्कृत और उर्दू दोनों पढ़ाते थे। मेरे घर के पास नगर का सबसे बड़ा मंदिर और उस की पीठ से लगी मस्जिद है, उसी मस्जिद में वे नमाज पढ़ने आया करते थे। मुझे उन्हों ने ही संस्कृत पढ़ाई। उन से इस्लाम के बारे में जाना और उस के बाद अपने दिवंगत मित्र शरीफ मोहम्मद जी और अब इस्हाक मोहम्मद से भी। यह जानने का सिलसिला चलता रहता है। हम उसी गंगा-जमुनी संस्कृति में जीना चाहते हैं। लेकिन यहाँ आप का यह कहना कि "पूरे विश्व में साम्प्रदायिकता के सदस्यों ने जो इस्लाम और मुसलमान को बदनाम करने की जो शर्मनाक साजिश चल रही है उसका माध्यम यह मीडिया है। मीडिया के कई प्रकार है। आज के ज़माने में ब्लॉग भी इसका एक हिस्सा बन चुका है। जो आवाज़ इस्लाम के सपोर्ट में उठती है वह यह मीडिया दिखाता ही नहीं है और मुस्लिम समाज के गलत लोगों को इतना बढ़ा चढा कर पेश करता करता है कि एक इस्लाम ही है जो दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा है।" गले नहीं उतरी। मीडिया आतंकवाद को बुरा कहता है और दुनिया के लिए खतरा भी। यह तथ्य की बात है कि दुनिया का अधिकतर आतंकवाद इस्लाम को अपनी ढाल बनाए हुए है और दुनिया भर के मुसलमान उन आतंकवादियों के विरुद्ध खुल कर सामने नहीं आए हैं। इस से इस्लाम के मानने वालों के मन में आतंकवादियों के प्रति सहानुभूति और पक्षधरता दिखाई देती है। जब भी इस्लाम को अपनी आड़ बनाए हुए आतंकवादियों के विरुद्ध लिखा जाता है तो इस्लाम के मानने वालों के मन में बैठी इस पक्षधरता को लगता है कि उन के विरुद्ध लिखा जा रहा है। हालांकि यह भी सही है कि इस अवसर का लाभ उठा कर सांप्रदायिक लोगों ने इस्लाम की आलोचना के मुहँ खोल दिए हैं। दूसरी बात यह भी है कि दुनिया भर में इस्लाम के मानने वाले बहुसंख्यक हैं। उन में कितने हैं जो इस्लाम की शिक्षाओं को सही तौर पर मानते हैं? क्या उन्होने इस्लाम को सही तौर पर अपनाया है? सही तो यह है कि किसी भी धर्म को मानने वालों का एक बहुत ही कम प्रतिशत, मेरे विचार में पाँच प्रतिशत से भी कम, उसे सही तौर पर अपना पाता है। क्या इस्लाम के मानने वाले भूत,प्रेत और जिन जैसे अंधविश्वासों को नहीं मानते। क्या वे ताजिए और मजारों की पूजा नहीं करते? क्या वे चोरियाँ और डाके नहीं डालते? क्या वे सभी अमन और शांति की मूर्ति हैं। ऐसा किसी धर्म के मानने वालों में नही है। आज जरूरत है तो हर धर्म को उस के मानने वालों में प्रचार की आवश्यकता है। मैं तो समझता हूँ कि धर्मानुकूल आचरण करने के प्रचार की वहीं सब से अधिक आवश्यकता है। जारी …..

  5. >सलीम भाई!आगे आप कहते हैं…."जबकि सच्चाई यह है कि एक इस्लाम की ही शिक्षाएं ही हैं जिसको अपना कर दुनिया को सभी खतरों से निजात पाई जा सकती हैं" यह आप का सोच हो सकता है लेकिन बहुत से लोगों का सोच नहीं है। वह हो भी नहीं सकता क्यों कि बहुत से आतंकवादियों और अमन के शत्रु इस्लाम की आड़ लिए हुए हैं। इस कारण से आप की यह सोच लोगों को सही नहीं लगती अपितु एक गर्वोक्ति लगती है। जब कोई गर्वोक्ति ले कर किसी के बीच जाएगा तो उसे सम्मान नहीं मिलेगा उस की बात को कोई सुनना भी नहीं चाहेगा। किसी भी बात को तर्कों के जरिए भले ही साबित कर दिया जाए लेकिन मनवाया नहीं जा सकता। उसे केवल व्यवहार के जरिए ही लोगों से मनवाया जा सकता है। सिद्धांत जब तक व्यवहार में नहीं आते किसी काम के नहीं हैं। जो गर्वोक्ति आप ने अपने धर्म के बारे में की है वही गर्वोक्ति हिंदू, सिख, ईसाई अपने धर्मों के बारे में कर सकते हैं और वे भी कर सकते हैं जो किसी धर्म को नहीं मानते।यदि आप को लगता है कि मीडिया इस्लाम के विरुद्ध दुष्प्रचार कर रहा है। उन घटनाओँ और रिपोर्टों को अधिक सामने ला रहा है जो इस्लाम के विरुद्ध जाती हैं। तो उस का जवाब मीडिया पर हमला करना कदापि नहीं हो सकता। उस का जवाब यह भी नहीं हो सकता कि फलाँ फलाँ ने इस्लाम स्वीकार कर लिया। उस का जवाब केवल यही हो सकता है कि उन घटनाओं की रिपोर्टों को सामने लाया जाए जिन से लगता हो कि इस्लाम को मानने वाले आतंकवाद और अमानवीयता के विरुद्ध हैं, वे लोगों को सोचने की आजादी देते हैं, वे लोगों की मदद करते हैं, वे इस्लाम को न मानने वालों पर इस लिए जुल्म नहीं करते कि वे इस्लाम को नहीं मानते, बल्कि वे किसी पर जुल्म नहीं करते और इस्लाम को मानने वाले जहाँ बहुमत में हैं वहाँ दूसरे विश्वासों वालों को अपने विश्वासों को मानने की पूरी आजादी है। मैं मानता हूँ कि सलीम भाई यह सब आप के बस का नहीं है। भारत के सारे मुसलमान चाहें और यह करना चाहें, तो उन के बस का भी नहीं है। लेकिन वे चाहें तो इस्लाम की आड़ ले कर की जा रही इन सब कार्यवाहियों के विरोध में एक जुट हो सकते हैं और आवाज उठा सकते हैं। केवल भारत के मुसलमान आवाज लगाएँ तो उस की गूंज इतनी होगी कि दुनियाँ भर का आतंकवाद हिल जाए। पर वे लगाएँ तो। आप चाहें तो इस का शुभारंभ कर सकते हैं। मेरी यह भी मान्यता है कि सब धर्म प्रचारकों को पहले अपने धर्मावलम्बियों को सुधारने का प्रयत्न करना चाहिए और दूसरे धर्मों की आलोचना का काम उन के अपने-अपने धर्मप्रचारकों पर छोड़ देना चाहिए। हमारे खुद के घरों में बहुत कचरा इकट्ठा है। हम स्वच्छता अभियान अपने-अपने घरों से क्यों नहीं आरंभ करें? जब अपने घर का कचरा साफ हो जाए, तो पड़ौसी से कहें कि उसे मदद की जरूरत तो नहीं है? और कोई पड़ौसी आप के घर का कचरा साफ करने में मदद करने आए तो उसे विनम्रता पूर्वक कह दें कि आप की आवश्यकता नहीं है, जब होगी तो आप को तकलीफ दी जाएगी, आप पहले अपने घर का काम तो निपटाएँ।

  6. गंद सन्देश : कब्रिस्तान की आवाज़ says:

    >सिर्फ सात दिनों के लिए टंकी? यानि जैसे की पूरे एक घंटे की भूख हड़ताल! बाप रे! जाना है तो ऐसे जाओ की कभी लौटो न! अब मत लौटना बेवकूफ महामूर्ख! वैसे भी तुम्हे पसंद कौन करता है?

  7. sajid khan says:

    >dinesh ji aap ka lakh lakh sukriya aap ki baat se 100% sahmat.@saleem bhai kya kahte ho agar aap ISLAM ki achaiya baya kare na ki dusre dharmo se compare kare.(example-namaz padh ne ka sahi tareeka,gusul,Azan)aise bahoot si cheeze jo ki hum jaise kuch musalmano ko dhang se pata bhi nahi.pach time ki namaz padhna toh door ki baat hai.aap ka ahsaan hoggameri baat par gaur jarur kareBHAGWAAN hum sab ko tamam buraiyo se bachyeAAMEEN

  8. Anonymous says:

    >वास्तव में सरे फसादों की जड़ ही धर्मो की तुलना करना है.. या तो आप धर्मो से उठ कर बात करो, या फिर दुसरे धर्मो की अच्छी बाते करो.. कोई हक नहीं बनता आप को की किसी दुसरे धर्म की कमिया निकल कर उनकी आस्था को चोंट पौन्चाओ,, या फिर अपने धर्म के बारे में लेख लिखो.. अल्लह आपको सद्बुद्धि दे, और १ हफ्ते में अच्छे विचारो के साथ लोटो

  9. Anonymous says:

    >सौ चुहे खाकर बिल्लि चली हाज को

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: