स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़

Icon

सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>एक प्रार्थना है, अनुरोध है, गुज़ारिश है साम्प्रदायिकता के सदस्यों से

>




यह एक प्रार्थना है, अनुरोध है, गुज़ारिश है साम्प्रदायिकता के सदस्यों से !

क्योंकि मैं भी एक भारतीय हूँ। भारत की धरती से प्यार करता हूं, इस पावन धरती की स्वतंत्रता में अपने पूवर्जों के बलिदान हमें याद हैं। फिर इतिहास ने यह भी देखा है कि हमने अपने देश में शताब्दियों से अनेकता में एकता का प्रदर्शन किया है। हर धर्म एवं पथ के मानने वाले शान्ति के साथ इस धरती पर रहते आ रहे हैं। इस नाते मैं अपनी भावना जो दिल की गहराई से निकली हुई है साम्प्रदायिकता के सदस्यों के नाम पेश करना चाहता हूं


आपने मुम्बई में रहने वाले यूपी बिहार के लोगों को मुम्बई से निकालने की योजना बनाई, पूना के लोहगाँव के मुसलमानों को आपने जन्म-भूमि से निकलने पर विवश किया। औऱ अब एक नया शोशा यह छोडा है कि मुसलमान हिन्दुओं को काफिर कहना छोड़ दें और भारत को दारुल हर्ब भी न कहें|

प्रिय बन्धुओ! मैं यही समझता हूं कि आपको मानवता से प्यार है। इस नाते आपने शत्रुता में यह बात न कही होगी, शायद यह आपत्ती अज्ञानता के कारण है। अतः यदि आपने ऐसा बयान अज्ञानता के कारण दिया है तो इसका निवारण किए देता हूं।

हिन्दुस्तान दारुल हर्ब नहीं

जहां तक भारत को दारुल हर्ब कहने की बात है तो कोई मुसलमान अथवा इस्लामी विद्बान हिन्दुस्तान को दारुल हर्ब नहीं कहते। सब से पहले दारुल हर्ब क्या है इसे समझ लें।

दारुल हर्ब वह धरती है जहां मुसलमानों के लिए धार्मिक किसी प्रकार का काम करना वर्जित हो। वहां हर समय मुसलमान अपने जान तथा सम्पत्ति के सम्बन्ध में चिंतित हों। और ऐसा मुसलमानों के लिए भारत में नहीं है।”
दूसरी बात यह कि दारुल हर्ब को अर्थ युद्ध करने का स्थान नहीं। बल्कि जैसा कि मैंने कहा कि वह देश जहां गैर-मुस्लिम मुसलमानों पर अत्याचार कर रहे हों, और मुसलमानों को वहाँ कोई शक्ति प्राप्त न हो। इस अर्थ को सामने रखें और स्वंय सोच कर देखें कि मुलममानों के लिए भारत आखिर दारुल- हर्ब कैसे होगा? यही कारण है कि जब मेडिया में यह चर्चा आम हुई लो मुस्लिम समितियों की ओर से फतवा भी आया कि हिन्दुस्तान दारुल-हर्ब नहीं। जैसे दारुल-उलूम देवबंद तथा विभिन्न मुस्लिम विद्वानों ने बयान दिया कि हिन्दुस्तान दारुल हर्ब नहीं और न कभी हो सकता है

ग़ैर मुस्लिमों को काफिर कहना

जहां तक ग़ैर मुस्लिमों को काफिर कहने की बात है तो यह याद रखें कि कोई भी मुलमनान किसी गैर-मुस्लिम को काफिर नहीं कहता। बल्कि काफिर कह कर पुकारने से मुहम्मद सल्ल0 ने मना किया है

दूसरी बात यह कि काफिर का अर्थ क्या होता है? उस पर भी ग़ौर करके देख लीजिए काफिर अरबी शब्द है जिसका हिन्दी अनुवाद करें को होगा (अमुस्लिल, अथावा गैर-मुस्लिम) अग्रेज़ी अनुवाद करें तो होगा (Non Muslim) अब आप ही बताएं कि एक व्यक्ति या तो मुस्लिम होगा अथवा गैर-मुस्लिम, तीसरी कोई संज्ञा नहीं। यदी कोई गैर-मुस्लिम होना पसंद न करता हो तो वह मुस्लिम बन जाए। समस्या का समाधान बस इसी में है।

इस सम्बन्ध में लीजिए डा0 ज़ाकिर नाइक का उत्तर भी पढ़ लीजिए

काफिर अरबी भाषा का शब्द है जो कुफ्र से निकला है इस शब्द का अर्थ है छुपाना, इनकार करना और रद्द करना अर्थात ऐसा व्यक्ति जो इस्लामी आस्था का इनकार करे अथवा उसे रद्द कर दे उसे इस्लाम में काफिर कहा जाता है। दूसरे शब्दों में जो व्यक्ति इस्लाम के ईश्वरीय कल्पना का इनकार कर दे वह काफिर कहलाएगा। यदि हमें इस शब्द का अंग्रेज़ी में अनुवाद करना होगा तो कहूंगा Non Muslim अर्थात जो व्यक्ति इस्लाम को स्वीकार नहीं करता वह Non Muslim है और अरबी में कहा जाएगा कि वह काफिर है- अतः यदि आप यह मुतालबा करते हैं कि Non Muslim को काफिर न कहा जाए तो यह किस प्रकार सम्भव होगा ? यदि कोई गैर मुस्लिम यह मुतालबा करे कि मुझे काफिर न कहा जाए अर्थात ग़ैर मुस्लिम न कहा जाए तो मैं यही कह सकता हूँ कि श्रीमान! आप इस्लाम स्वीकार कर लें तो स्वयं आपको ग़ैर-मुस्लिम अर्थात काफिर कहना छोड़ दूंगा क्योंकि काफिर और ग़ैर-मुस्लिम में कोई अतंर तो है नहीं, यह तो सीधा सीधा शब्द का अरबी अनुवाद Non Muslim है और बस।

-प्रस्तुति: सलीम खान

Filed under: Uncategorized

54 Responses

  1. >मेरे ख्याल से काफ़िर का माने हुआ जो इश्वर में विश्वास न रखता हो, भले ही किसी भी धर्म का हो. दुनिया के सारे नास्तिक काफ़िर हो गए जो खुदा इश्वर में यकीन नहीं रखते."क़यामत है कि होवे मुद्दई का हमसफ़र गालिब, वो काफ़िर जो खुदा को भी न सौंपा जाए है मुझसे""खुदा के वास्ते पर्दा न काबे से उठा जालिम, कहीं ऐसा न हो यां भी वही काफ़िर सनम निकले"अब गालिब के कहने का तात्पर्य गैर मुस्लिम से तो जाहिर है नहीं है, जो खुदा में यकीन नहीं रखता उससे है. खुदा जिसको कोई इश्वर कहता है कोई गोड कोई कुछ और. इसलिए बिना जाने बगैर किसी को काफ़िर कहना गलत है, कमल हसन जो धर्म में यकीन नहीं रखते उनको काफ़िर कह सकते हैं, बाकियों को नहीं. नास्तिक=काफ़िर.

  2. >मेरे ख्याल से काफ़िर का माने हुआ जो इश्वर में विश्वास न रखता हो, भले ही किसी भी धर्म का हो. दुनिया के सारे नास्तिक काफ़िर हो गए जो खुदा इश्वर में यकीन नहीं रखते."क़यामत है कि होवे मुद्दई का हमसफ़र गालिब, वो काफ़िर जो खुदा को भी न सौंपा जाए है मुझसे""खुदा के वास्ते पर्दा न काबे से उठा जालिम, कहीं ऐसा न हो यां भी वही काफ़िर सनम निकले"अब गालिब के कहने का तात्पर्य गैर मुस्लिम से तो जाहिर है नहीं है, जो खुदा में यकीन नहीं रखता उससे है. खुदा जिसको कोई इश्वर कहता है कोई गोड कोई कुछ और. इसलिए बिना जाने बगैर किसी को काफ़िर कहना गलत है, कमल हसन जो धर्म में यकीन नहीं रखते उनको काफ़िर कह सकते हैं, बाकियों को नहीं. नास्तिक=काफ़िर.

  3. >Verses from the Koran:VIII/12: When thy Lord inspired the angels (saying:) I am with you. So make those who believe stand firm. I will throw fear into the hearts of those who disbelieve. Then smite the necks and smite of them each finger.Here one can clearly see that the Quran is openly saying to the muslims to give a torturous death to those who are non-believers of the Islamic faith.XCVIII/6: Lo! those who disbelieve, among the people of the Scripture and idolaters, will abide in fire of hell. They are the worst of created beings.From the above passage you can clearly see that according to Mohammed, Allah has reserved a special place for non- mulsims–HELL!IX/5: Then when the sacred months have passed, slay the idolaters wherever ye find them, and take them (captive), and besiege them, and prepare for them each ambush. But if they repent and establish worship and pay the poor- due, then leave their way free. Lo! Allah is Forgiving, Merciful.This verse tells us that muslims are free to convert non-muslims by force and brutality. If unsuccessful in doing so, they are free to kill.IX/73: Oh Prophet! Strive against the disbelievers and the hypocrites! Be harsh with them. Their ultimate abode is hell, a hapless journey's end.LXIX/30-37: (It will be said)Take him and fetter him and expose him to hell fire. And then insert him in a chain whereof the length is seventy cubits. Lo! he used not to believe in Allah the tremendous, and urged not on the feeding of the wretched. Therefore hath he no lover hear this day nor any food save filth which none but sinners eat.Here we get a description of how to punish Non Muslims. This is in practice even today in Islamic countries. In fact, the Sikh Gurus and their families were tortured by muslims as prescribed in the Quran. For example, Sikh guru Tegh Bahadur on refusing to accept Islam, was brought to the prison in a cage like he was a wild animal. Three of his disciples were murdered in front of him. One of them was Bhai Mati Das. He was sawed alive. The other was wrapped up in cotton and burnt alive. Bhai Dyala, the third one, was boiled alive. Guru Tegh Bahadur himself was brutally tortured and killed in a similar fashion. We see further support of these types of torments in the verses below.XLIV/43-50: LO! the tree of Zaqqum (The tree that grows in the heart of hell bearing fruits like devil's heads) – the food of the sinner. Like molten brass, it seetheth in their bellies as the seething of boiling water. (And it will be said): Take him and drag him to the midst of hell, then pour upon his head the torment of boiling water. Saying: TASTE! LO! thou wast forsooth the mighty, the noble! Lo! this is that whereof ye used to doubt.IX/123: O ye who believe! Fight those of the disbelievers who are near to you and let them find harshness in you and know that Allah is with those who keep their duty (unto Him).IV/144: O Ye who believe! choose not disbelievers for your friends in place of believers. Would you give Allah a clear warrant against you ?This verse clarifies the fact that a true Muslim can never be a friend of a person of another faith. People who believe otherwise are under delusion.IX/29: Fight those who do not profess the true faith (Islam) till they pay the jiziya (poll tax) with the hand of humility.

  4. >Verses from the Koran:VIII/12: When thy Lord inspired the angels (saying:) I am with you. So make those who believe stand firm. I will throw fear into the hearts of those who disbelieve. Then smite the necks and smite of them each finger.Here one can clearly see that the Quran is openly saying to the muslims to give a torturous death to those who are non-believers of the Islamic faith.XCVIII/6: Lo! those who disbelieve, among the people of the Scripture and idolaters, will abide in fire of hell. They are the worst of created beings.From the above passage you can clearly see that according to Mohammed, Allah has reserved a special place for non- mulsims–HELL!IX/5: Then when the sacred months have passed, slay the idolaters wherever ye find them, and take them (captive), and besiege them, and prepare for them each ambush. But if they repent and establish worship and pay the poor- due, then leave their way free. Lo! Allah is Forgiving, Merciful.This verse tells us that muslims are free to convert non-muslims by force and brutality. If unsuccessful in doing so, they are free to kill.IX/73: Oh Prophet! Strive against the disbelievers and the hypocrites! Be harsh with them. Their ultimate abode is hell, a hapless journey's end.LXIX/30-37: (It will be said)Take him and fetter him and expose him to hell fire. And then insert him in a chain whereof the length is seventy cubits. Lo! he used not to believe in Allah the tremendous, and urged not on the feeding of the wretched. Therefore hath he no lover hear this day nor any food save filth which none but sinners eat.Here we get a description of how to punish Non Muslims. This is in practice even today in Islamic countries. In fact, the Sikh Gurus and their families were tortured by muslims as prescribed in the Quran. For example, Sikh guru Tegh Bahadur on refusing to accept Islam, was brought to the prison in a cage like he was a wild animal. Three of his disciples were murdered in front of him. One of them was Bhai Mati Das. He was sawed alive. The other was wrapped up in cotton and burnt alive. Bhai Dyala, the third one, was boiled alive. Guru Tegh Bahadur himself was brutally tortured and killed in a similar fashion. We see further support of these types of torments in the verses below.XLIV/43-50: LO! the tree of Zaqqum (The tree that grows in the heart of hell bearing fruits like devil's heads) – the food of the sinner. Like molten brass, it seetheth in their bellies as the seething of boiling water. (And it will be said): Take him and drag him to the midst of hell, then pour upon his head the torment of boiling water. Saying: TASTE! LO! thou wast forsooth the mighty, the noble! Lo! this is that whereof ye used to doubt.IX/123: O ye who believe! Fight those of the disbelievers who are near to you and let them find harshness in you and know that Allah is with those who keep their duty (unto Him).IV/144: O Ye who believe! choose not disbelievers for your friends in place of believers. Would you give Allah a clear warrant against you ?This verse clarifies the fact that a true Muslim can never be a friend of a person of another faith. People who believe otherwise are under delusion.IX/29: Fight those who do not profess the true faith (Islam) till they pay the jiziya (poll tax) with the hand of humility.

  5. >This verse in Quran gave birth to the law that all non muslims living in an Islamic state have to pay the jiziya or poll tax for the privilege of being there. These people are called zimmis and are allowed to live and work in the Islamic lands under the following 20 disabilities: (one has to wonder if apartheid was derived from this) 1. They are not to build any new places of worship. 2. They are not to repair any old places of worship which have been destroyed by the muslims. 3. They are not to prevent muslim travellers from staying in their places of worship. 4. They are to entertain for 3 days any Muslim who wants to stay in their homes and for a longer period if the muslim falls ill. 5. They are not to harbor any hostility or give aid and comfort to hostile elements. 6. They are not to prevent any one of them from getting converted to Islam. 7. They have to show respect to every Muslim. 8. They have to allow Muslims to participate in their private meetings. 9. They are not to dress like muslims. 10. They are not to name themselves with Muslim names. 11. They are not to ride on horses with saddle and bridle. 12. They are not to possess arms. 13. They are not to wear signet or seals on their fingers. 14. They are not to sell or drink liquor openly 15. They are to wear a distinctive dress which shows their inferior status and separates them from Muslims. 16. They are not to propagate their custom and usages among the muslims. 17. They are not to build their houses in the neighbourhood of muslims. 18. They are not to bring their dead near the graveyards of the muslims. 19. They are not to observe their religious practices publicly or mourn their dead loudly. 20. They are not to buy muslim slaves.

  6. >Here again I have stated another handful of facts which expose the true nature of Islam. Any logical person by now should have realized that Islam is meant for the lowest of the low. The followers of Islam are mindless tyrannical demons who know nothing better than killing and torturing people in the name of Allah. And they do this because a pervert named Mohammed, among other things, promised his followers 72 Houris (Beautiful Virgin Women) and virility of 100 men in 'Jannat' (Heaven). This is very puzzling–why virility of 100 men and only 72 houris? Why not 100 houris? The answer is very simple–the prophet Mohammed promises these "pious" muslims that they will also be given 28 young boys in addition to the 72 houris for their sexual pleasure.

  7. >This verse in Quran gave birth to the law that all non muslims living in an Islamic state have to pay the jiziya or poll tax for the privilege of being there. These people are called zimmis and are allowed to live and work in the Islamic lands under the following 20 disabilities: (one has to wonder if apartheid was derived from this) 1. They are not to build any new places of worship. 2. They are not to repair any old places of worship which have been destroyed by the muslims. 3. They are not to prevent muslim travellers from staying in their places of worship. 4. They are to entertain for 3 days any Muslim who wants to stay in their homes and for a longer period if the muslim falls ill. 5. They are not to harbor any hostility or give aid and comfort to hostile elements. 6. They are not to prevent any one of them from getting converted to Islam. 7. They have to show respect to every Muslim. 8. They have to allow Muslims to participate in their private meetings. 9. They are not to dress like muslims. 10. They are not to name themselves with Muslim names. 11. They are not to ride on horses with saddle and bridle. 12. They are not to possess arms. 13. They are not to wear signet or seals on their fingers. 14. They are not to sell or drink liquor openly 15. They are to wear a distinctive dress which shows their inferior status and separates them from Muslims. 16. They are not to propagate their custom and usages among the muslims. 17. They are not to build their houses in the neighbourhood of muslims. 18. They are not to bring their dead near the graveyards of the muslims. 19. They are not to observe their religious practices publicly or mourn their dead loudly. 20. They are not to buy muslim slaves.

  8. >Here again I have stated another handful of facts which expose the true nature of Islam. Any logical person by now should have realized that Islam is meant for the lowest of the low. The followers of Islam are mindless tyrannical demons who know nothing better than killing and torturing people in the name of Allah. And they do this because a pervert named Mohammed, among other things, promised his followers 72 Houris (Beautiful Virgin Women) and virility of 100 men in 'Jannat' (Heaven). This is very puzzling–why virility of 100 men and only 72 houris? Why not 100 houris? The answer is very simple–the prophet Mohammed promises these "pious" muslims that they will also be given 28 young boys in addition to the 72 houris for their sexual pleasure.

  9. बवाल says:

    >प्यारे सलीम मियाँ,ऐसे ही मीठे लहजे पर चलिएगा तो मोहब्ब्त पाइएगा वरना तो नफ़रतों के काटों से हमारा लहू तो वैसे भी छलछला रहा है। इस्लाम लादने की चीज़ नहीं वो तो अपने आप ही दिलों में खिलने वाला गुल है। वो कमज़ोर तो है नहीं। यदि सल्लाहो अलैहे वसल्लम पर यक़ीन रखते हैं आप, तो फिर वबाल पैदा करने वाले अल्फ़ाज़ों से बचते हुए अदब से बात रखें, जैसे अबकी दफ़ा रखी। फिर देखिए अपने मक्सद को कितना क़रीब पाते हैं। अलैहिस्सलाम की शान काएम रहे इसी दुआ के साथ..हमेशा आपका—बवाल

  10. बवाल says:

    >प्यारे सलीम मियाँ,ऐसे ही मीठे लहजे पर चलिएगा तो मोहब्ब्त पाइएगा वरना तो नफ़रतों के काटों से हमारा लहू तो वैसे भी छलछला रहा है। इस्लाम लादने की चीज़ नहीं वो तो अपने आप ही दिलों में खिलने वाला गुल है। वो कमज़ोर तो है नहीं। यदि सल्लाहो अलैहे वसल्लम पर यक़ीन रखते हैं आप, तो फिर वबाल पैदा करने वाले अल्फ़ाज़ों से बचते हुए अदब से बात रखें, जैसे अबकी दफ़ा रखी। फिर देखिए अपने मक्सद को कितना क़रीब पाते हैं। अलैहिस्सलाम की शान काएम रहे इसी दुआ के साथ..हमेशा आपका—बवाल

  11. >प्यार बांटते चलो रे,भाई प्यार बांट्ते चलो,क्या हिंदू,क्या मुसलमां,हम सब है भाई-भाई।

  12. >प्यार बांटते चलो रे,भाई प्यार बांट्ते चलो,क्या हिंदू,क्या मुसलमां,हम सब है भाई-भाई।

  13. >Bhai Saleem Khan, bahut khushi hui aapse milke aur vichar padhke kai samantayen lageen, aapke lekh me sach me ek ajeeb si sachchai ki mahak hai. main bhi 1 saal hamare is tahzeeb ke shahar me guzar chuka hoon. aise hi Hindostan ko dunia ka agrani rashtra banane me lage rahen. ek chhoti si guzarish hai, thoda sa passence rakhen, chhoton ki galtiyan unki nasamjhi samajh kar aur badon ki galtiyan unka baat ko na samajh pana jaan kar maaf karen. aap samajh rahe honge ki mera ishara kahan hai.shesh kushal. aapka bhaiDipak 'Mashal'

  14. >Bhai Saleem Khan, bahut khushi hui aapse milke aur vichar padhke kai samantayen lageen, aapke lekh me sach me ek ajeeb si sachchai ki mahak hai. main bhi 1 saal hamare is tahzeeb ke shahar me guzar chuka hoon. aise hi Hindostan ko dunia ka agrani rashtra banane me lage rahen. ek chhoti si guzarish hai, thoda sa passence rakhen, chhoton ki galtiyan unki nasamjhi samajh kar aur badon ki galtiyan unka baat ko na samajh pana jaan kar maaf karen. aap samajh rahe honge ki mera ishara kahan hai.shesh kushal. aapka bhaiDipak 'Mashal'

  15. >इसलाम को मानाने से इनकार करने वाले के साथ क्या सुलूक होना चाहिए या तो इन आयातों में स्पष्ट है. फिर झूठ कितना भी बोल लो. इनकार करने वाले को फिर कुछ भी कह लो काफिर, दिम्मी, मुशरिक या और कुछ, इसलाम का उनके प्रति क्रूरता का रवैया थोड़े बदलेगा —–

  16. >इसलाम को मानाने से इनकार करने वाले के साथ क्या सुलूक होना चाहिए या तो इन आयातों में स्पष्ट है. फिर झूठ कितना भी बोल लो. इनकार करने वाले को फिर कुछ भी कह लो काफिर, दिम्मी, मुशरिक या और कुछ, इसलाम का उनके प्रति क्रूरता का रवैया थोड़े बदलेगा —–

  17. >@ सलीम खान तुमने लिखा है दूसरे शब्दों में जो व्यक्ति इस्लाम के ईश्वरीय कल्पना का इनकार कर दे वह काफिर कहलाएगा | जाओ मैं इनकार करता हूँ इस्लाम की धमकाने और डराने वाली चैलेन्ज नबीस ईश्वरीय कल्पना से | अब नगाड़ा ले कर काफिर – काफिर चिल्लाते रहो देखता हूँ क्या बिगाड़ लोगे ? || " सत्यमेव जयते " ||🙂😦😛😀 :$😉

  18. >@ सलीम खान तुमने लिखा है दूसरे शब्दों में जो व्यक्ति इस्लाम के ईश्वरीय कल्पना का इनकार कर दे वह काफिर कहलाएगा | जाओ मैं इनकार करता हूँ इस्लाम की धमकाने और डराने वाली चैलेन्ज नबीस ईश्वरीय कल्पना से | अब नगाड़ा ले कर काफिर – काफिर चिल्लाते रहो देखता हूँ क्या बिगाड़ लोगे ? || " सत्यमेव जयते " ||🙂😦😛😀 :$😉

  19. >सलीम भाई, आपका यह नया लेख आने से पहले ही मैंने लिखा था कि आपका पूरा ब्‍लॉग ही Muslim Vs Non Muslim है पर अब आपने Non Muslim की एक पुरानी संज्ञा को नए तरीके से परिभाषित किया है। आपके दिए तर्जुमे से यह साफ हो जाता है कि सारे Non Muslim काफिर हैं। पर दिक्‍कत यही है कि आप इसे काफिर के न‍जरिए से देखते हो जबकि Non Muslim वस्‍तुत: या तो यहूदी हैं, या ईसाई या हिंदू या किसी और धर्म को मानने वाले या फिर किसी भी धर्म को न मानने वाले। पर आपमें हर चीज को काले या सफेद चश्‍मे से ही देखने की इजाजत है इसलिए तरन्‍नुम के दूसरे रंग आपको नजर ही नहीं आते। यही वजह है कि मुझे आप जैसे लोगों पर गुस्‍सा नहीं आता, दया आती है। क्‍योंकि जिस दिन आपका ज्ञान परिपक्‍व होगा, जिस दिन आपकी सोच बडी हो जाएगी उस दिन दूसरे धर्मों को Muslim Versus Non Muslim के न‍जरिए से भी देखना छोड दोगे पर तब तक तो हमें तुम्‍हारा यही रुप झेलना है।

  20. >सलीम भाई, आपका यह नया लेख आने से पहले ही मैंने लिखा था कि आपका पूरा ब्‍लॉग ही Muslim Vs Non Muslim है पर अब आपने Non Muslim की एक पुरानी संज्ञा को नए तरीके से परिभाषित किया है। आपके दिए तर्जुमे से यह साफ हो जाता है कि सारे Non Muslim काफिर हैं। पर दिक्‍कत यही है कि आप इसे काफिर के न‍जरिए से देखते हो जबकि Non Muslim वस्‍तुत: या तो यहूदी हैं, या ईसाई या हिंदू या किसी और धर्म को मानने वाले या फिर किसी भी धर्म को न मानने वाले। पर आपमें हर चीज को काले या सफेद चश्‍मे से ही देखने की इजाजत है इसलिए तरन्‍नुम के दूसरे रंग आपको नजर ही नहीं आते। यही वजह है कि मुझे आप जैसे लोगों पर गुस्‍सा नहीं आता, दया आती है। क्‍योंकि जिस दिन आपका ज्ञान परिपक्‍व होगा, जिस दिन आपकी सोच बडी हो जाएगी उस दिन दूसरे धर्मों को Muslim Versus Non Muslim के न‍जरिए से भी देखना छोड दोगे पर तब तक तो हमें तुम्‍हारा यही रुप झेलना है।

  21. >कुर-आन की जिन आयतों का का यह जिक्र कर रहे हैं वह आउट ऑफ़ कांटेक्स्ट हैं, अगर सन्दर्भ में उसके पहले और बाद की आयतों को आप पढेंगे तो पाएंगे कि वास्तविक सन्दर्भ क्या है. ये और इन जैसे और लोग जैसे अरुण शुरी जैसे लोग आयत को पूरी तरह से पेश न करके आधा अधुरा पेश करते या उस एक आयत के बाद या पहले की आयात से सीधे छलाँग लगा कर फिर उस आयत पर नहीं जाते है जहाँ उनकी बीमारी का हल.है.

  22. >कुर-आन को मुक़म्मल तौर पर पढने पर आपको पसमंज़र समझ आएगा कोई भी इंसान अगर ज़रा बुद्धि रखता होगा तो उसे समझ आ जायेगा कि इन जनाब (जो मुहं बाए हुए हैं) और इन जैसे और लोग जैसे अरुण शुरी एक आयत से छलाग लगा कर बीच की आयतों को छोड़ते हुए दूसरी आयातों पर पहुँच जाते हैं क्यूंकि बीच कि आयातों में अरुण शुरी जैसे लोगों की बीमारी का हल है. हकीक़तन यह उन आयातों को पढ़ते भी नहीं है बस कॉपी पेस्ट करके अपनी पूर्वाग्रह की आदत को और मज़बूत करते हैं.

  23. >कुर-आन की जिन आयतों का का यह जिक्र कर रहे हैं वह आउट ऑफ़ कांटेक्स्ट हैं, अगर सन्दर्भ में उसके पहले और बाद की आयतों को आप पढेंगे तो पाएंगे कि वास्तविक सन्दर्भ क्या है. ये और इन जैसे और लोग जैसे अरुण शुरी जैसे लोग आयत को पूरी तरह से पेश न करके आधा अधुरा पेश करते या उस एक आयत के बाद या पहले की आयात से सीधे छलाँग लगा कर फिर उस आयत पर नहीं जाते है जहाँ उनकी बीमारी का हल.है.

  24. >कुर-आन को मुक़म्मल तौर पर पढने पर आपको पसमंज़र समझ आएगा कोई भी इंसान अगर ज़रा बुद्धि रखता होगा तो उसे समझ आ जायेगा कि इन जनाब (जो मुहं बाए हुए हैं) और इन जैसे और लोग जैसे अरुण शुरी एक आयत से छलाग लगा कर बीच की आयतों को छोड़ते हुए दूसरी आयातों पर पहुँच जाते हैं क्यूंकि बीच कि आयातों में अरुण शुरी जैसे लोगों की बीमारी का हल है. हकीक़तन यह उन आयातों को पढ़ते भी नहीं है बस कॉपी पेस्ट करके अपनी पूर्वाग्रह की आदत को और मज़बूत करते हैं.

  25. >बवाल जी ने सही कहा, बात को सख्ती से न कहते हुए सॉफ्ट तरीक़े से कहने रखने में कई फायदे हैं. सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि आप सोनिया गाँधी जी एक सबक ले. भाई लोग ने उनकी नाक में दम कर रखा था, विदेशी विदेशी कह कर. लेकिन अब उनका मुद्दा फुस्स हो गया. विरोधी तो विरोध ही करते हैं.

  26. >बवाल जी ने सही कहा, बात को सख्ती से न कहते हुए सॉफ्ट तरीक़े से कहने रखने में कई फायदे हैं. सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि आप सोनिया गाँधी जी एक सबक ले. भाई लोग ने उनकी नाक में दम कर रखा था, विदेशी विदेशी कह कर. लेकिन अब उनका मुद्दा फुस्स हो गया. विरोधी तो विरोध ही करते हैं.

  27. >चश्मा तो मैंने भी पहना है लेकिन पूर्वाग्रह का नहीं.मैं देखता हूँ तुम में से अक्सर आवेशित होकर ही टिपण्णी करते हो. जबकि हक़ीक़त को समझने के बजाये, उतावले हो जाते हो. ऐसा करना आखों और सेहत दोनों के लिए नुकसानदायक है.पूर्वाग्रह क्या चीज़ है ये जान लीजिये, बस एक बार अपने वेद पढ़ लीजिये.

  28. >चश्मा तो मैंने भी पहना है लेकिन पूर्वाग्रह का नहीं.मैं देखता हूँ तुम में से अक्सर आवेशित होकर ही टिपण्णी करते हो. जबकि हक़ीक़त को समझने के बजाये, उतावले हो जाते हो. ऐसा करना आखों और सेहत दोनों के लिए नुकसानदायक है.पूर्वाग्रह क्या चीज़ है ये जान लीजिये, बस एक बार अपने वेद पढ़ लीजिये.

  29. >@Varun Kumar Jaiswal आपने कहा ,जाओ मैं इनकार करता हूँ इस्लाम की धमकाने और डराने वाली चैलेन्ज नबीस ईश्वरीय कल्पना से.अगर तुम एक भी ऐसी आयत पेश करो जो तुम्हें धमकाने वाली मिले. मैं चैलेन्ज के साथ कहता हूँ कि ऐसी एक भी आयत नहीं जो तुम्हे आतार्किक लगे और अगर ऐसा है तो मुझे बताओ मैं उसका प्रोपर जवाब देता हूँ.

  30. >@Varun Kumar Jaiswal आपने कहा ,जाओ मैं इनकार करता हूँ इस्लाम की धमकाने और डराने वाली चैलेन्ज नबीस ईश्वरीय कल्पना से.अगर तुम एक भी ऐसी आयत पेश करो जो तुम्हें धमकाने वाली मिले. मैं चैलेन्ज के साथ कहता हूँ कि ऐसी एक भी आयत नहीं जो तुम्हे आतार्किक लगे और अगर ऐसा है तो मुझे बताओ मैं उसका प्रोपर जवाब देता हूँ.

  31. >दीपक जी, आपने अपनी बात जिस तरह से पेश की उसका शुक्रिया. आपका विचार बहुत अच्छा है. वैसे मैं जो कुछ भी लिखता हूँ उसका सीधा मक़सद है हिन्दोस्तान की दो बड़ी क़ौम को एक ही छत के नीचे लाने का एक प्रयास भर है. मैं समाज के इन दोनों तबकों की उन ग़लतफ़हमियों और बुराईयों को भी दूर करने के लेख लिखता हूँ, लेकिन बाज़ लोग सन्दर्भ से अलग हटा देते हैं और उसे समझ नहीं पाते. मेरा कहना है कि जब सच्चाई सामने आ जाये तो उसे स्वीकार कर लेना चाहिए.

  32. >दीपक जी, आपने अपनी बात जिस तरह से पेश की उसका शुक्रिया. आपका विचार बहुत अच्छा है. वैसे मैं जो कुछ भी लिखता हूँ उसका सीधा मक़सद है हिन्दोस्तान की दो बड़ी क़ौम को एक ही छत के नीचे लाने का एक प्रयास भर है. मैं समाज के इन दोनों तबकों की उन ग़लतफ़हमियों और बुराईयों को भी दूर करने के लेख लिखता हूँ, लेकिन बाज़ लोग सन्दर्भ से अलग हटा देते हैं और उसे समझ नहीं पाते. मेरा कहना है कि जब सच्चाई सामने आ जाये तो उसे स्वीकार कर लेना चाहिए.

  33. kash says:

    >@ salim khan"मेरा कहना है कि जब सच्चाई सामने आ जाये तो उसे स्वीकार कर लेना चाहिए"यह आपका केहेना बिलकुल साही है हार चीज़ को कुतर्क कह्कर नाकारना गलत बात है जिससे आप बाज नहीं आते सुधार जाओ और समज जाओ

  34. >@ salim khan"मेरा कहना है कि जब सच्चाई सामने आ जाये तो उसे स्वीकार कर लेना चाहिए"यह आपका केहेना बिलकुल साही है हार चीज़ को कुतर्क कह्कर नाकारना गलत बात है जिससे आप बाज नहीं आते सुधार जाओ और समज जाओ

  35. >सलीम साहब एक नया कुप्रचारी आप की शान में गुस्‍ताखी कर रहा था, मैंने निम्‍न कमेंटस किये है, तुम्‍हारा सम्‍मान मैंने बनाये रखा तुम मेरा वहां बनाये रखना, समझ गये होंगे मैं क्‍या कहना चाहता हूंhttp://darvaar.blogspot.com/2009/10/blog-post_05.htmlकमेंटस न. 1Mohammed Umar Kairanvi ने कहा…@ कुप्रचारियों – सबको भगौडे बनादो, हम नहीं करेंगे इस प्रकार से तुम्‍हारा बहिष्‍कार,, कुप्रचार करो हमें पाओगे, वेसे तुम 3 दूनी 5 के बहिष्‍कार से होगा क्‍या, गूगल सिंह हमारी सहायता को है ना, गूगल में लिखो अंतिम अवतार, अन्तिम चाहे ऐसे लिख लो फिर देखो ऐसे ढूंडने वालों को गूगल कहां का रास्‍ता दिखाता है, जय हो गूगल की, मुर्दाबाद भगौडों कीकमेंटस न. 2 Mohammed Umar Kairanvi ने कहा…13 कमेंटस के बाद आया मैं, 13 को पैदा हुआ, सुना है 13 का अंक बहुत अशुभ होता, मैं 13 को जन्‍म लिया, जिस कुप्रचारी के ब्लाग पर नजर डाली उसके शुभ दिन गये, आज मैं तुझे 13 बार यह कमेंटस दूंगा, अगर तुमने मेरे कमेंटस डिलिट किया तो इतना पेट भर दूंगा कमेंटस से कि सारे कुप्रचारियों को बुला लेना सफाई करने लिये जब भी स्‍वच्‍छ नहीं होपायेगा तेरा दरबार, इन्‍शाअल्‍लाह (अगर अल्‍लाह ने चाहा तो)signature:विचार करें कि मुहम्मद सल्ल. कल्कि व अंतिम अवतार और बैद्ध मैत्रे, अंतिम ऋषि (इसाई) यहूदीयों के भी आखरी संदेष्‍टा? हैं या यह big Game against Islam है? antimawtar.blogspot.com (Rank-1 Blog) 6 अल्‍लाह के चैलेंज सहित अनेक इस्‍लामिक पुस्‍तकेंislaminhindi.blogspot.com (Rank-2 Blog)

  36. >सलीम साहब एक नया कुप्रचारी आप की शान में गुस्‍ताखी कर रहा था, मैंने निम्‍न कमेंटस किये है, तुम्‍हारा सम्‍मान मैंने बनाये रखा तुम मेरा वहां बनाये रखना, समझ गये होंगे मैं क्‍या कहना चाहता हूंhttp://darvaar.blogspot.com/2009/10/blog-post_05.htmlकमेंटस न. 1Mohammed Umar Kairanvi ने कहा…@ कुप्रचारियों – सबको भगौडे बनादो, हम नहीं करेंगे इस प्रकार से तुम्‍हारा बहिष्‍कार,, कुप्रचार करो हमें पाओगे, वेसे तुम 3 दूनी 5 के बहिष्‍कार से होगा क्‍या, गूगल सिंह हमारी सहायता को है ना, गूगल में लिखो अंतिम अवतार, अन्तिम चाहे ऐसे लिख लो फिर देखो ऐसे ढूंडने वालों को गूगल कहां का रास्‍ता दिखाता है, जय हो गूगल की, मुर्दाबाद भगौडों कीकमेंटस न. 2 Mohammed Umar Kairanvi ने कहा…13 कमेंटस के बाद आया मैं, 13 को पैदा हुआ, सुना है 13 का अंक बहुत अशुभ होता, मैं 13 को जन्‍म लिया, जिस कुप्रचारी के ब्लाग पर नजर डाली उसके शुभ दिन गये, आज मैं तुझे 13 बार यह कमेंटस दूंगा, अगर तुमने मेरे कमेंटस डिलिट किया तो इतना पेट भर दूंगा कमेंटस से कि सारे कुप्रचारियों को बुला लेना सफाई करने लिये जब भी स्‍वच्‍छ नहीं होपायेगा तेरा दरबार, इन्‍शाअल्‍लाह (अगर अल्‍लाह ने चाहा तो)signature:विचार करें कि मुहम्मद सल्ल. कल्कि व अंतिम अवतार और बैद्ध मैत्रे, अंतिम ऋषि (इसाई) यहूदीयों के भी आखरी संदेष्‍टा? हैं या यह big Game against Islam है? antimawtar.blogspot.com (Rank-1 Blog) 6 अल्‍लाह के चैलेंज सहित अनेक इस्‍लामिक पुस्‍तकेंislaminhindi.blogspot.com (Rank-2 Blog)

  37. kash says:

    >@ salim khanये कौन भाई चिल्लम-चिल्ली करते फिरते है ये किस बजह से इतने परेशन है कोई मुझे उनकी बॅतो का मतलब बतैइये

  38. >@ salim khanये कौन भाई चिल्लम-चिल्ली करते फिरते है ये किस बजह से इतने परेशन है कोई मुझे उनकी बॅतो का मतलब बतैइये

  39. >गूगल कंपनी का मालिक लैरी पेज भी एक यहूदी है …. हा हा हा हा

  40. >गूगल कंपनी का मालिक लैरी पेज भी एक यहूदी है …. हा हा हा हा

  41. >@ मेरी जान AB तुम कब जानोगे कि AB से आगे CD होता है यह भी यहूदियों को कैरानवी सिखायेगा, गूगल के आगे शब्‍द सिंह का अर्थ समझो, मैं तेरी बात समझ रहा हूं,जानता हूं इस लिये तो अपने प्रचार के नये तरीके निकालता हूं, मैंने ब्लागस में अपने‍ लिंक बिखेरे हैं कोई 1000 के लगभग और यह दिखाता है 131 यह कैसे होता है, हर तरफ अन्‍याय इससे फिलहाल ब्लागजगत में कैरानवी जैसा सियाना ही टकरा सकता है, तुम तो मुझे कह ही चुके 'दानिशमंद'

  42. >@ मेरी जान AB तुम कब जानोगे कि AB से आगे CD होता है यह भी यहूदियों को कैरानवी सिखायेगा, गूगल के आगे शब्‍द सिंह का अर्थ समझो, मैं तेरी बात समझ रहा हूं,जानता हूं इस लिये तो अपने प्रचार के नये तरीके निकालता हूं, मैंने ब्लागस में अपने‍ लिंक बिखेरे हैं कोई 1000 के लगभग और यह दिखाता है 131 यह कैसे होता है, हर तरफ अन्‍याय इससे फिलहाल ब्लागजगत में कैरानवी जैसा सियाना ही टकरा सकता है, तुम तो मुझे कह ही चुके 'दानिशमंद'

  43. >उपर में कुछ हिन्दु भाइयों ने टिप्पणी की और आपित्त व्यक्त की। उनमें में से एक सज्जन ने पवित्र कुरआन के निम्नाकित आयत को पेश किया।IX/5: Then when the sacred months have passed, slay the idolaters wherever ye find them, and take them (captive), and besiege them, and prepare for them each ambush. But if they repent and establish worship and pay the poor- due, then leave their way free. Lo! Allah is Forgiving, Merciful.This verse tells us that muslims are free to convert non-muslims by force and brutality. If unsuccessful in doing so, they are free to kill.हिन्दु भाइयों की यही तो सबसे बड़ी खामी है कि समझने चले हैं इस्लाम को और पढ़ते हैं अरुण शौरी की किताब। भला अरुण शौरी क्या जाने इस्लाम की बारिकियों को। उपर दी गइ कुरान की आयत संदर्भ में नहीं हैं। जिसने भी यह टिप्पणी की है उसे मेरी सलाह है कि वह पहले एक से चार तक की आयतों को पढ़े और उसके बाद छठे आयत को पढ़े। तब उसे समझ आ जाएगा कि इस्लाम कितना विनम्र कितना दयालू मजहब है। अल्लाह आपको हिदायत दे।

  44. >उपर में कुछ हिन्दु भाइयों ने टिप्पणी की और आपित्त व्यक्त की। उनमें में से एक सज्जन ने पवित्र कुरआन के निम्नाकित आयत को पेश किया।IX/5: Then when the sacred months have passed, slay the idolaters wherever ye find them, and take them (captive), and besiege them, and prepare for them each ambush. But if they repent and establish worship and pay the poor- due, then leave their way free. Lo! Allah is Forgiving, Merciful.This verse tells us that muslims are free to convert non-muslims by force and brutality. If unsuccessful in doing so, they are free to kill.हिन्दु भाइयों की यही तो सबसे बड़ी खामी है कि समझने चले हैं इस्लाम को और पढ़ते हैं अरुण शौरी की किताब। भला अरुण शौरी क्या जाने इस्लाम की बारिकियों को। उपर दी गइ कुरान की आयत संदर्भ में नहीं हैं। जिसने भी यह टिप्पणी की है उसे मेरी सलाह है कि वह पहले एक से चार तक की आयतों को पढ़े और उसके बाद छठे आयत को पढ़े। तब उसे समझ आ जाएगा कि इस्लाम कितना विनम्र कितना दयालू मजहब है। अल्लाह आपको हिदायत दे।

  45. >@ शकील साहब यह हिन्‍दू भाई नहीं यहूदी भाई है, नीचे का कमेंटस में उसे ही कर रहा था कि आपका कमेंटस आगया, कुरआन शब्‍द इस ब्लाग में उपर विजेट में देख लो कैसे लिखा जाता है, ऐसे नहीं XकुरानX@ ऐ यहूदी केवल AB तक जानने वाले, तू पहले कैरानवी को जरूर जानता होगा, जिसने ईसाईयों को टक्‍कर दी, कलम से मुंह से, तलवार से, फिर एक अरब में मदरसा खोल के, क्‍या तुझे दूसरे कैरानवी में उसकी झलक नहीं दिखाई देती, नही देती तो अपने ब्लाग में झांक आ मैंने 5 भाषाओं में तुझे जवाब दिया है, यह ब्लागगिंग का रिकार्ड भी होगा, तुम तो जरूर जातने होंगे, बताना है कि है या नहीं विश्‍व रिकार्ड,तुम्‍हारी बकवासःकुरान की इन आयातों की व्याख्या करें:——— (3)डायरेक्‍ट लिंक तुम्‍हारे सवाल पर मेरा जवाब

  46. >@ शकील साहब यह हिन्‍दू भाई नहीं यहूदी भाई है, नीचे का कमेंटस में उसे ही कर रहा था कि आपका कमेंटस आगया, कुरआन शब्‍द इस ब्लाग में उपर विजेट में देख लो कैसे लिखा जाता है, ऐसे नहीं XकुरानX@ ऐ यहूदी केवल AB तक जानने वाले, तू पहले कैरानवी को जरूर जानता होगा, जिसने ईसाईयों को टक्‍कर दी, कलम से मुंह से, तलवार से, फिर एक अरब में मदरसा खोल के, क्‍या तुझे दूसरे कैरानवी में उसकी झलक नहीं दिखाई देती, नही देती तो अपने ब्लाग में झांक आ मैंने 5 भाषाओं में तुझे जवाब दिया है, यह ब्लागगिंग का रिकार्ड भी होगा, तुम तो जरूर जातने होंगे, बताना है कि है या नहीं विश्‍व रिकार्ड,तुम्‍हारी बकवासःकुरान की इन आयातों की व्याख्या करें:——— (3)डायरेक्‍ट लिंक तुम्‍हारे सवाल पर मेरा जवाब

  47. >http://mypoemsmyemotions.blogspot.com/2009/10/blog-post_06.htmlsalim bhai , ek kavita is blogger bhai ne likhi hai jarur padhna shyad kuchh nya soch sako ?स्वच्छता का दम भरते होज़रा बताओ फिर क्योंएक पिता की दो संतानअगर दो माँ से हैंतो आपस मे कैसेऔर क्यों विवाहकरती हैंमौन ना रहोकहो की हम यहाँइस हिन्दुस्तान मेइसीलिये रहते हैंक्युकी हम यहाँसुरक्षित हैंसंरक्षित हैंकानून यहाँ केएक होते हुए भीहमारी तरफ हीझुके हुए हैंकहीं और जायगेतो कैसे इतनाप्रचार प्रसार कर पायेगेबस हिन्दुस्तान मे ही ये होता हैंसलीम को यहाँ सलीम भाईनारज़गी मे भी कोई सुरेश कहता हैंतुम भाई हो हमारे तो भाई बन कर रहोहम रामायण पढेतुम कुरान पढोताकि हम तुम कहीं ऊपर जाएतो राम और अल्लाह सेनज़र तो मिला पायेऐसा ना हो कीपैगम्बर की बात फैलाते फैलातेतुम उनकी शिक्षा ही भूल जाओहम को हमारी संस्कृति ने यही समझया हैंजो घर आता हैंचार दिन रहे तो मेहमान होता हैंऔर रुक ही जाएतो घर का ही कहलाता हैंघर के हो तो घर के बन कर रहोहम तुम से रामायण नहीं पढ़वाते हैंतुम हम से कुरान मत पढ़वाओधार्मिक ग्रन्थ हैं दोनोंपर अगर किताब समझ कर पढ़ सकेकुछ तुम सीख सकोकुछ हम सीख सकेतो घर अपने आप साफ़ रहेगाऔर स्वच्छ हिन्दुस्तान नेम प्लेट कीउस घर को कोई जरुरत नहीं होगी ।

  48. >http://mypoemsmyemotions.blogspot.com/2009/10/blog-post_06.htmlsalim bhai , ek kavita is blogger bhai ne likhi hai jarur padhna shyad kuchh nya soch sako ?स्वच्छता का दम भरते होज़रा बताओ फिर क्योंएक पिता की दो संतानअगर दो माँ से हैंतो आपस मे कैसेऔर क्यों विवाहकरती हैंमौन ना रहोकहो की हम यहाँइस हिन्दुस्तान मेइसीलिये रहते हैंक्युकी हम यहाँसुरक्षित हैंसंरक्षित हैंकानून यहाँ केएक होते हुए भीहमारी तरफ हीझुके हुए हैंकहीं और जायगेतो कैसे इतनाप्रचार प्रसार कर पायेगेबस हिन्दुस्तान मे ही ये होता हैंसलीम को यहाँ सलीम भाईनारज़गी मे भी कोई सुरेश कहता हैंतुम भाई हो हमारे तो भाई बन कर रहोहम रामायण पढेतुम कुरान पढोताकि हम तुम कहीं ऊपर जाएतो राम और अल्लाह सेनज़र तो मिला पायेऐसा ना हो कीपैगम्बर की बात फैलाते फैलातेतुम उनकी शिक्षा ही भूल जाओहम को हमारी संस्कृति ने यही समझया हैंजो घर आता हैंचार दिन रहे तो मेहमान होता हैंऔर रुक ही जाएतो घर का ही कहलाता हैंघर के हो तो घर के बन कर रहोहम तुम से रामायण नहीं पढ़वाते हैंतुम हम से कुरान मत पढ़वाओधार्मिक ग्रन्थ हैं दोनोंपर अगर किताब समझ कर पढ़ सकेकुछ तुम सीख सकोकुछ हम सीख सकेतो घर अपने आप साफ़ रहेगाऔर स्वच्छ हिन्दुस्तान नेम प्लेट कीउस घर को कोई जरुरत नहीं होगी ।

  49. kash says:

    >@ Jayram " viplav "कवी तो वही केहेलाता है जो किसिभी चीज़ पर कविता करे और कभी कभी नाचीज़(नाचीज़ का मतलब सलीम खान मत समझना) पर भी कविता करे

  50. >@ Jayram " viplav "कवी तो वही केहेलाता है जो किसिभी चीज़ पर कविता करे और कभी कभी नाचीज़(नाचीज़ का मतलब सलीम खान मत समझना) पर भी कविता करे

  51. >रंजीशें नफ़रत है दहशत क्यूँ यहाँ, तू दिलों में प्यार भर दे ऐ खुदा. नेक-कर और सीधे रस्ते पे चला, अम्न का सूरज नया कोई उगा. हमारी रचना क्यों हुई ? हम धरती पर क्यों आए ? हमें कहाँ जाना है ? क्या सब धर्म बराबर है ? क्या ईश्वर अवतार लेता है ? मुक्ति कहाँ है ? कल्कि अवतार कौन हैं ? हमारा वास्तविक धर्म क्या था ? आज ईश्वर (अल्लाह) को मानते तो सब हैं परन्तु पहचानते बहुत कम लोग हैं…तो आईये हिन्दोस्तान की दो बड़ी क़ौमों को एक साथ एक ही छत ले नीचे लाने का प्रयास किया जाये…आपके सहयोग का आकांक्षीसलीम खान

  52. >रंजीशें नफ़रत है दहशत क्यूँ यहाँ, तू दिलों में प्यार भर दे ऐ खुदा. नेक-कर और सीधे रस्ते पे चला, अम्न का सूरज नया कोई उगा. हमारी रचना क्यों हुई ? हम धरती पर क्यों आए ? हमें कहाँ जाना है ? क्या सब धर्म बराबर है ? क्या ईश्वर अवतार लेता है ? मुक्ति कहाँ है ? कल्कि अवतार कौन हैं ? हमारा वास्तविक धर्म क्या था ? आज ईश्वर (अल्लाह) को मानते तो सब हैं परन्तु पहचानते बहुत कम लोग हैं…तो आईये हिन्दोस्तान की दो बड़ी क़ौमों को एक साथ एक ही छत ले नीचे लाने का प्रयास किया जाये…आपके सहयोग का आकांक्षीसलीम खान

  53. Anonymous says:

    >@ salim khanपाकिस्तान भी एईसही करता है एक बाजूसे दोस्तिका हात बढते है और दुसरे बाजूसे बॉम्ब फोडते है और आपभी उसिकेजैसे एक बाजूसे एक छत के निचे बुलाते हो और एक बाजूसे हिंदुओको गरियाते होजय हो सलीम खान की जय हो जय होजय होजय होजय होजय हो

  54. Anonymous says:

    >@ salim khanपाकिस्तान भी एईसही करता है एक बाजूसे दोस्तिका हात बढते है और दुसरे बाजूसे बॉम्ब फोडते है और आपभी उसिकेजैसे एक बाजूसे एक छत के निचे बुलाते हो और एक बाजूसे हिंदुओको गरियाते होजय हो सलीम खान की जय हो जय होजय होजय होजय होजय हो

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: