स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़

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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>बलात्कारियों को मौत की सज़ा! (Death Sentence to Repist)

>

इस्लामी क़ानून में बलात्कार की सज़ा मौत है

बहुत से लोग इसे निर्दयता कह कर इस दंड पर आश्चर्य प्रकट करते हैं कुछ का तो कहना है कि इस्लाम एक जंगली धर्म है मैंने उन जैसे कई व्यक्तियों से एक सवाल पूछा था – सीधा और सरल कोई आपकी माँ या बहन के साथ बलात्कार करता है और आपको न्यायधीश बना दिया जाये और बलात्कारी को सामने लाया जाये तो उस दोषी को आप कौन सी सज़ा सुनाएँगे ? मुझे प्रत्येक से एक ही जवाब सुनने को मिला- उसे मृत्यु दंड दिया जाये कुछ ने कहा कि उसे कष्ट दे दे कर मारना चाहिए मेरा अगला प्रश्न था अगर कोई व्यक्ति आपकी माँ, पत्नी अथवा बहन के साथ बलात्कार करता है तो आप उसे मृत्यु दंड देना चाहते हैं लेकिन यही घटना किसी और कि माँ, पत्नी या बहन के साथ होती है तो आप कहते हैं मृत्युदंड देना जंगलीपन है इस स्तिथि में यह दोहरा मापदंड क्यूँ?



पश्चिमी समाज औरतों को ऊपर उठाने का झूठा दावा करता है

औरतों की आज़ादी का पश्चिमी दावा एक ढोंग है, जिनके सहारे वो उनके शरीर का शोषण करते हैं, उनकी आत्मा को गंदा करते हैं और उनके मान सम्मान को उनसे वंचित रखते हैं पश्चिमी समाज दावा करता है की उसने औरतों को ऊपर उठाया इसके विपरीत उन्होंने उनको रखैल और समाज की तितलियों का स्थान दिया है, जो केवल जिस्मफरोशियों और काम इच्छुओं के हांथों का एक खिलौना है जो कला और संस्कृति के रंग बिरंगे परदे के पीछे छिपे हुए हैं



अमेरिका में बलात्कार की दर सबसे ज़्यादा है

अमेरिका को दुनियाँ का सबसे उन्नत देश समझा जाता है सन 1990 ई. की FBI रिपोर्ट से पता चलता है कि अमेरिका में उस साल 1,02555 बलात्कार की घटनाएँ दर्ज की गयी रिपोर्ट में यह बात भी बताई गयी है कि इस तरह की कुल घटनाओं में से केवल 16 प्रतिशत ही प्रकाश में आ पाई हैं इस प्रकार 1990 ई. की बलात्कार की घटना का सही अंदाज़ा लगाने के लिए उपरोक्त संख्या को 6.25 गुना करके जो योग सामने आता है वह है 6,40,968 इस पूरी संख्या को 365 दिनों में बनता जाये तो प्रतिदिन के लिहाज से 1756 संख्या सामने आती है

एक दूसरी रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में प्रतिदिन 1900 घटनाएँ पेश आती हैं

Nationl Crime Victimization Survey Bureau of Justice Statistics (U.S. of Justice) के अनुसार 1996 में 3,07000 घटनाएँ दर्ज हुईं लेकिन सही घटनाओं की केवल 31 प्रतिशत ही घटनाएँ दर्ज हुईं इस प्रकार 3,07000x 3,226 = 9,90,322 बलात्कार की घटनाएँ सन 1996 में हुईं ज़रा विचार करें हर 32 सेकंड में एक बलात्कार होता है

ऐसा लगता है कि अमेरिकी बलात्कारी बड़े निडर है

FBI की 1990 की रिपोर्ट यह बताती है कि बलात्कार की घटनाओं में केवल 10 प्रतिशत बलात्कारी ही गिरफ्तार किया जा सके हैं जो कुल संख्या का 1.6 प्रतिशत है बलात्कारियों में से 50 प्रतिशत को मुकदमें से पहले ही रिहा कर दिया गया इसका मतलब यह हुआ कि केवल 0.8 प्रतिशत बलात्कारियों के विरुद्ध ही मुकदमा चलाया जा सका

दुसरे शब्दों में अगर एक व्यक्ति 125 बार बलात्कार की घटनाओं में लिप्त हो तो केवल एक बार ही उसे सज़ा दी जाने की संभावना हैं बहुत से लोग इसे अच्छा जुआ समझेंगे रिपोर्ट से यह भी अंदाज़ा होता है की सज़ा दिए जाने वालों में से केवल 50 प्रतिशत लोगों को एक साल से कम की सज़ा दी गयी है हालाँकि अमेरिकी कानून के मुताबिक सात साल की सज़ा होनी चाहिए उन लोगों के सम्बन्ध में जो पहली बार सज़ा के दोषी पाए जातें हैं, जज़ नरम पद जाते हैं

ज़रा विचार करें एक व्यक्ति 125 बार बलात्कार करता है लेकिन उसके विरुद्ध मुकदमा चलने का अवसर केवल एक बार ही आता है और फिर पचास प्रतिशत लोगों को जज़ की नरमी का फायेदा मिल जाता है और एक साल से भी कम मुद्दत की सज़ा किसी ऐसे बलात्कारी को मिल पाती है जिस पर यह अपराध सिद्ध हो चूका हो

बलात्कार की सज़ा मौत: लाल कृष्ण आडवानी

हालाँकि मैं श्री लाल कृष्ण आडवानी जी की अन्य नीतियों और विचार से बिलकुल भी सहमत नहीं हूँ लेकिन मैं सहमत हूँ लाल कृष्ण आडवानी के इस विचार से कि बलात्कारियों को सज़ा-ए-मौत देनी चाहिए उन्होंने यह मांग उठाई थी कि बलात्कारी को मृत्युदंड दिया जाना चाहिए सम्बंधित खबर पढें…


इस्लामी कानून निश्चित रूप से बलात्कार की दर घटाएगा
स्वाभाविक रूप से ज्यों ही इस्लामिक कानून लागू किया जायेगा तो इसका परिणाम निश्चित रूप से सकारात्मक होगा अगर इस्लामिक कानून संसार के किसी भी हिस्से में लागू किया जाये चाहे अमेरिका हो या यूरोप, ऑस्ट्रेलिया हो या भारत, समाज में शांति आएगी

सलीम खान
संरक्षक
स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़
लखनऊ व पीलीभीत, उत्तर प्रदेश

Filed under: बलात्कारियों को मौत

42 Responses

  1. >बहुत खूब, वैसे बलात्कारियों को सरे आम तड़पा तड़पा कर सार्वजनिक रूप से मौत की सज़ा देनी चाहिए जिससे हमारे समाज में अमन क़ायम हो सके. बलात्कार ही नहीं सभी जुर्म की सज़ा मौत होनी चाहिए, जो इंसानियत को तार तार करती हों. अभी आडवानी जी ने इसे स्वीकार किया है इंशा अल्लाह कल इस्लामिक शरियत को सारे देश में लोग मान्यता देने लगे.

  2. >बहुत खूब, वैसे बलात्कारियों को सरे आम तड़पा तड़पा कर सार्वजनिक रूप से मौत की सज़ा देनी चाहिए जिससे हमारे समाज में अमन क़ायम हो सके. बलात्कार ही नहीं सभी जुर्म की सज़ा मौत होनी चाहिए, जो इंसानियत को तार तार करती हों. अभी आडवानी जी ने इसे स्वीकार किया है इंशा अल्लाह कल इस्लामिक शरियत को सारे देश में लोग मान्यता देने लगे.

  3. >सही कहा आपने कि "ज्यों ही इस्लामिक कानून लागू किया जायेगा तो इसका परिणाम निश्चित रूप से सकारात्मक होगा अगर इस्लामिक कानून संसार के किसी भी हिस्से में लागू किया जाये चाहे अमेरिका हो या यूरोप, ऑस्ट्रेलिया हो या भारत, समाज में शांति आएगी"

  4. >सही कहा आपने कि "ज्यों ही इस्लामिक कानून लागू किया जायेगा तो इसका परिणाम निश्चित रूप से सकारात्मक होगा अगर इस्लामिक कानून संसार के किसी भी हिस्से में लागू किया जाये चाहे अमेरिका हो या यूरोप, ऑस्ट्रेलिया हो या भारत, समाज में शांति आएगी"

  5. safat alam says:

    >बिल्कुल सही लिखा है आपने । जी हाँ! इस्लाम का तो यह एक नियम है जिन जिन नियमों पर लोग विशाल-हृदय से मनन करेंगे अवश्य उसे प्रकृति के बिल्कुल अनुकुल पाएंगे। और ऐसा क्यों न हो जबकि यह नियम उस ईश्वर (अल्लाह) का उतारा हुआ है जो सम्पूर्ण संसार का सृष्टिकर्ता,पालनपर्ता तथा अन्यदाता है।

  6. >बिल्कुल सही लिखा है आपने । जी हाँ! इस्लाम का तो यह एक नियम है जिन जिन नियमों पर लोग विशाल-हृदय से मनन करेंगे अवश्य उसे प्रकृति के बिल्कुल अनुकुल पाएंगे। और ऐसा क्यों न हो जबकि यह नियम उस ईश्वर (अल्लाह) का उतारा हुआ है जो सम्पूर्ण संसार का सृष्टिकर्ता,पालनपर्ता तथा अन्यदाता है।

  7. >हाँ, आप सभी मुस्लिम इसके लिये मिलकर मांग उठायें कि इस देश में जब हमारे कई कानून और परम्पराएं शरीयत के अनुसार ही चलती हैं तो देश भर में जितने भी मुसलमान अपराधी हैं उन्हें शरीयत और इस्लाम के अनुसार ही सजा दी जाये। भाई ऐसा कैसे हो सकता है कि शादी और तलाक के मामले में शरीयत की चले और दण्ड के मामले में भारतीय संहिता की? है ना…। जब एक बार मुसलमान बलात्कारी को मौत की सजा और मुस्लिम चोर के हाथ कटना शुरु हो जायेंगे तो अन्य समाज भी पहल करेंगे…🙂 कहिये कब शुरु करते हैं…

  8. >हाँ, आप सभी मुस्लिम इसके लिये मिलकर मांग उठायें कि इस देश में जब हमारे कई कानून और परम्पराएं शरीयत के अनुसार ही चलती हैं तो देश भर में जितने भी मुसलमान अपराधी हैं उन्हें शरीयत और इस्लाम के अनुसार ही सजा दी जाये। भाई ऐसा कैसे हो सकता है कि शादी और तलाक के मामले में शरीयत की चले और दण्ड के मामले में भारतीय संहिता की? है ना…। जब एक बार मुसलमान बलात्कारी को मौत की सजा और मुस्लिम चोर के हाथ कटना शुरु हो जायेंगे तो अन्य समाज भी पहल करेंगे…🙂 कहिये कब शुरु करते हैं…

  9. >सुरेश, तुम्हारी इतनी छोटी सोच पर बड़ा आर्श्चय हो रहा है. बलात्कारी में मुस्लिम या नॉन-मुस्लिम कहाँ से आ गया. और रही बात शादी या तलाक़ में इस्लामी शरियत के लागु होने के तो यह आतंरिक सामाजिक मसला होता है क्यूँ कि यह उस समाज या वर्ग के अन्दर ही घटित होता है जबकि आपराधिक कृत्य तो कोई भी किसी से कर सकता है. जैसे मुस्लिम हिन्दू का क़त्ल कर सकता है और हिन्दू मुस्लिम का. यहाँ व्यावाहरिक रूप से ऐसा नहीं हो सकता. मेरा तो मानना है कि इस्लामी शरियत जहाँ भी लागू होगी वहां शांति ही आएगी. उदहारण स्वरुप आप देख सकते हो कि जितने भी मुस्लिम देश है उनमें आप पाएंगे कि अपराध का स्तर अमेरिका या भारत से बहुत कम है बल्कि वहां अमन और शांति ही है.

  10. >सुरेश, तुम्हारी इतनी छोटी सोच पर बड़ा आर्श्चय हो रहा है. बलात्कारी में मुस्लिम या नॉन-मुस्लिम कहाँ से आ गया. और रही बात शादी या तलाक़ में इस्लामी शरियत के लागु होने के तो यह आतंरिक सामाजिक मसला होता है क्यूँ कि यह उस समाज या वर्ग के अन्दर ही घटित होता है जबकि आपराधिक कृत्य तो कोई भी किसी से कर सकता है. जैसे मुस्लिम हिन्दू का क़त्ल कर सकता है और हिन्दू मुस्लिम का. यहाँ व्यावाहरिक रूप से ऐसा नहीं हो सकता. मेरा तो मानना है कि इस्लामी शरियत जहाँ भी लागू होगी वहां शांति ही आएगी. उदहारण स्वरुप आप देख सकते हो कि जितने भी मुस्लिम देश है उनमें आप पाएंगे कि अपराध का स्तर अमेरिका या भारत से बहुत कम है बल्कि वहां अमन और शांति ही है.

  11. >अच्छा तुम्हारी सोच बड़ी ही सही , लेकिन अब ऐसी मांग तो कर ही सकते हो कि जो भी मुसलमान इस घृणित काम में लिप्त पाया जायेगा उसपर यह सजा अमल में लायी जायेगी अगर इससे हिन्दुस्तानी मुस्लिम अपराधियों का प्रतिशत में कमी आती है तो फिर संविधान में भी जगह दी जाये , इसकी मांग हम करेंगे ||🙂😦😛😀 :$😉

  12. >अच्छा तुम्हारी सोच बड़ी ही सही , लेकिन अब ऐसी मांग तो कर ही सकते हो कि जो भी मुसलमान इस घृणित काम में लिप्त पाया जायेगा उसपर यह सजा अमल में लायी जायेगी अगर इससे हिन्दुस्तानी मुस्लिम अपराधियों का प्रतिशत में कमी आती है तो फिर संविधान में भी जगह दी जाये , इसकी मांग हम करेंगे ||🙂😦😛😀 :$😉

  13. >सलीम भाई, आपका पूरा ब्‍लॉग ही Muslim Vs Non Muslim है इसलिए आपका ऊपर यह कमेंट अपने आप में बहुत बडा विरोधाभास है कि यह issue Muslim और Non Muslim का कहां से हो गया। दूसरी बात यह है कि यदि आप अपने ज्ञान को समृद्व करेंगें (कहने का मतलब यह कि कुछ और भी पढेंगें और अपने कुंए से बाहर निकलेंगे) तो पाएगें कि अपराधियों के हाथ पैर काटने और Physical torture देने की वकालत सदियों से चली आ रही है और यह शरीयत की खोज नहीं है। जैसे जैसे आदमी सभ्‍य होता गया उसने अपराधियों से निबटने के लिए बेहतर विकल्‍प सोचे और हैवानियत के तरीके कम किए। क्‍या आप यह समझते हैं कि यह सलीम खान तय करेगा कि बिना मुकदमा चलाए, बिना अभियोग सिद्व किए, चौराहे पर किसी भी व्‍यक्ति को बलात्‍कारी मान कर पत्‍थर बरसा कर मार डाला जाए। इंसाफ कहता है कि इंसान की आपराधिक मनोवृति को समाप्‍त करिए। अपने आस पास के लोगों को बेहतर इंसान बनाने की जरुरत है न कि पत्‍थर मार कर मार डाल कर कर खुद ही चीफ जस्टिस बनने की मंशा की। और रही उन देशों के उदाहरण की बात जो आपने अपने लेख में दिए हैं तो उनके अंदर की गंदगी आपने स्‍वीकार करने की जरुरत ही नहीं समझी। जहां के शेख अपनी अइयाशियों के लिए सारी दुनिया में बदनाम हैं, जिन देशों में औरत को सिर्फ उपभोग की वस्‍तु समझा जाता है, जहां चार चार निकाह किए जाते हैं, जहां घरेलू नौकरानियों के नाम पर भारत, पाकिस्‍तान और बंगलादेशी नारियों के साथ हर प्रकार के घिनौने कार्य किए जाते हैं आप उन्‍हें अच्‍छा देश बताने की हिमाकत कर रहे हैं। और केवल नारियों के साथ ही क्‍यों, आपके दिए उदाहरणों के देश तो मानवता के साथ खेल रहे हैं। सबसे ज्‍यादा बम धमाके इन्‍हीं देशों में होते हैं। सबसे ज्‍यादा अपराधी इन्‍हीं देशों में हैं। सबसे ज्‍यादा आंतकवादी इन्‍हीं देशों में हैं। सबसे ज्‍यादा हत्‍याएं इन्‍हीं देशों में होती हैं।

  14. >सलीम भाई, आपका पूरा ब्‍लॉग ही Muslim Vs Non Muslim है इसलिए आपका ऊपर यह कमेंट अपने आप में बहुत बडा विरोधाभास है कि यह issue Muslim और Non Muslim का कहां से हो गया। दूसरी बात यह है कि यदि आप अपने ज्ञान को समृद्व करेंगें (कहने का मतलब यह कि कुछ और भी पढेंगें और अपने कुंए से बाहर निकलेंगे) तो पाएगें कि अपराधियों के हाथ पैर काटने और Physical torture देने की वकालत सदियों से चली आ रही है और यह शरीयत की खोज नहीं है। जैसे जैसे आदमी सभ्‍य होता गया उसने अपराधियों से निबटने के लिए बेहतर विकल्‍प सोचे और हैवानियत के तरीके कम किए। क्‍या आप यह समझते हैं कि यह सलीम खान तय करेगा कि बिना मुकदमा चलाए, बिना अभियोग सिद्व किए, चौराहे पर किसी भी व्‍यक्ति को बलात्‍कारी मान कर पत्‍थर बरसा कर मार डाला जाए। इंसाफ कहता है कि इंसान की आपराधिक मनोवृति को समाप्‍त करिए। अपने आस पास के लोगों को बेहतर इंसान बनाने की जरुरत है न कि पत्‍थर मार कर मार डाल कर कर खुद ही चीफ जस्टिस बनने की मंशा की। और रही उन देशों के उदाहरण की बात जो आपने अपने लेख में दिए हैं तो उनके अंदर की गंदगी आपने स्‍वीकार करने की जरुरत ही नहीं समझी। जहां के शेख अपनी अइयाशियों के लिए सारी दुनिया में बदनाम हैं, जिन देशों में औरत को सिर्फ उपभोग की वस्‍तु समझा जाता है, जहां चार चार निकाह किए जाते हैं, जहां घरेलू नौकरानियों के नाम पर भारत, पाकिस्‍तान और बंगलादेशी नारियों के साथ हर प्रकार के घिनौने कार्य किए जाते हैं आप उन्‍हें अच्‍छा देश बताने की हिमाकत कर रहे हैं। और केवल नारियों के साथ ही क्‍यों, आपके दिए उदाहरणों के देश तो मानवता के साथ खेल रहे हैं। सबसे ज्‍यादा बम धमाके इन्‍हीं देशों में होते हैं। सबसे ज्‍यादा अपराधी इन्‍हीं देशों में हैं। सबसे ज्‍यादा आंतकवादी इन्‍हीं देशों में हैं। सबसे ज्‍यादा हत्‍याएं इन्‍हीं देशों में होती हैं।

  15. kash says:

    >सही कहा स्वाट घाटी मे अब काफ़ि शांती है

  16. >सही कहा स्वाट घाटी मे अब काफ़ि शांती है

  17. Anonymous says:

    >बलात्कारी की सज़ा मौत हो और इसकी वकालत आडवानी (पी एम् इन वेटिंग?) भी कर रहें हैं इससे अच्छी और क्या बात हो सकती है. SWAT GHATI MEN AB NAHIN TAB SHANTI THI JAB AMERIKI NAHIN THE WAHAN.

  18. Anonymous says:

    >बलात्कारी की सज़ा मौत हो और इसकी वकालत आडवानी (पी एम् इन वेटिंग?) भी कर रहें हैं इससे अच्छी और क्या बात हो सकती है. SWAT GHATI MEN AB NAHIN TAB SHANTI THI JAB AMERIKI NAHIN THE WAHAN.

  19. kash says:

    >"ज्यों ही इस्लामिक कानून लागू किया जायेगा तो इसका परिणाम निश्चित रूप से सकारात्मक होगा अगर इस्लामिक कानून संसार के किसी भी हिस्से में लागू किया जाये चाहे अमेरिका हो या यूरोप, ऑस्ट्रेलिया हो या भारत, समाज में शांति आएगी"अभी आडवानी जी ने इसे स्वीकार किया है इंशा अल्लाह कल इस्लामिक शरियत को सारे देश में लोग मान्यता देने लगे.वैसे भी स्वात मे शरीयत लागू हुई है आप वहां जा सकते है बस भारत को स्वात मे परवर्तीत मत करो हमे चैन से जिने दो गरुन्ध्वज भाई आप कहाँ चले गये बीन तो बजाओ

  20. >"ज्यों ही इस्लामिक कानून लागू किया जायेगा तो इसका परिणाम निश्चित रूप से सकारात्मक होगा अगर इस्लामिक कानून संसार के किसी भी हिस्से में लागू किया जाये चाहे अमेरिका हो या यूरोप, ऑस्ट्रेलिया हो या भारत, समाज में शांति आएगी"अभी आडवानी जी ने इसे स्वीकार किया है इंशा अल्लाह कल इस्लामिक शरियत को सारे देश में लोग मान्यता देने लगे.वैसे भी स्वात मे शरीयत लागू हुई है आप वहां जा सकते है बस भारत को स्वात मे परवर्तीत मत करो हमे चैन से जिने दो गरुन्ध्वज भाई आप कहाँ चले गये बीन तो बजाओ

  21. >चलो भई, जैसा कि वरुण ने कहा कि मेरी सोच छोटी ही सही…। उज्जैन में जैन समाज ने एक अनुकरणीय पहल की कि मृत्यु भोज नहीं दिया जाये्गा और मन्दिरों में लड़के-लड़कियों दोनों के लिये भड़काऊ परिधान प्रतिबन्धित किये जायेंगे, इनसे प्रेरणा लेकर दूसरे समाजों में भी यह मांग उठने लगी है… इसीलिये इस छोटी सोच से आपको एक सुझाव दिया कि आप अपने मुस्लिम समाज और मंचों से यह मांग़ ऊठायें कि भारत की सभी जेलों में बन्द मुस्लिम बलात्कारियों को मृत्युदण्ड दिया जाये, और अबू सलेम सरीखे अपराधी के हाथ काटे जायें या अब्दुल करीम तेलगी की आँखें फ़ोड़ी जायें… फ़िर हम भी आपका अनुसरण करने की कोशिश करेंगे और मांग करेंगे कि हिन्दू बलात्कारियों के साथ भी ऐसा ही किया जाये्…। भई आप स्वच्छता के प्रहरी हैं, एक पहल तो कीजिये, आपका समाज जागेगा तो हमारा भी जाग जायेगा…। अनुसरण तो ऐसे ही होता है ना… बार-बार कहते हो हमारी तरफ़ आओ, मुस्लिम बलात्कारियों के विरुद्ध एक मुहिम तो छेड़ो, एक उदाहरण पेश करो, लोग खुद-ब-खुद उधर आयेंगे, जिधर "यकसां" होगा…🙂🙂 हम तो क्या हैं छोटी सोच वाले हैं, बड़ा सोचने वाले ही कुछ करें इस बारे में…

  22. >चलो भई, जैसा कि वरुण ने कहा कि मेरी सोच छोटी ही सही…। उज्जैन में जैन समाज ने एक अनुकरणीय पहल की कि मृत्यु भोज नहीं दिया जाये्गा और मन्दिरों में लड़के-लड़कियों दोनों के लिये भड़काऊ परिधान प्रतिबन्धित किये जायेंगे, इनसे प्रेरणा लेकर दूसरे समाजों में भी यह मांग उठने लगी है… इसीलिये इस छोटी सोच से आपको एक सुझाव दिया कि आप अपने मुस्लिम समाज और मंचों से यह मांग़ ऊठायें कि भारत की सभी जेलों में बन्द मुस्लिम बलात्कारियों को मृत्युदण्ड दिया जाये, और अबू सलेम सरीखे अपराधी के हाथ काटे जायें या अब्दुल करीम तेलगी की आँखें फ़ोड़ी जायें… फ़िर हम भी आपका अनुसरण करने की कोशिश करेंगे और मांग करेंगे कि हिन्दू बलात्कारियों के साथ भी ऐसा ही किया जाये्…। भई आप स्वच्छता के प्रहरी हैं, एक पहल तो कीजिये, आपका समाज जागेगा तो हमारा भी जाग जायेगा…। अनुसरण तो ऐसे ही होता है ना… बार-बार कहते हो हमारी तरफ़ आओ, मुस्लिम बलात्कारियों के विरुद्ध एक मुहिम तो छेड़ो, एक उदाहरण पेश करो, लोग खुद-ब-खुद उधर आयेंगे, जिधर "यकसां" होगा…🙂🙂 हम तो क्या हैं छोटी सोच वाले हैं, बड़ा सोचने वाले ही कुछ करें इस बारे में…

  23. kash says:

    >@ sajid khan आछि बात है सुरेशजीके वजह्से नॉनवेजसे डाल रोटी पर आ गये खुले दिमागसे सोचोगे तो बहूत जल्दी व्हेज़ीटेरीयन बन जाओगे

  24. >@ sajid khan आछि बात है सुरेशजीके वजह्से नॉनवेजसे डाल रोटी पर आ गये खुले दिमागसे सोचोगे तो बहूत जल्दी व्हेज़ीटेरीयन बन जाओगे

  25. >शरीयत के क़ानून उस वक़्त के लिए भले ही सही रहे हों, लेकिन मुझे नहीं लगता कि आज वे सही कहे जा सकते हैं। क्या किसी को सार्वजनिक तौर पर कोड़े मारना सही है? या चोरी करने पर किसी के हाथ काट देना सही है? अगर आप धर्म की बजाय तर्क के हिसाब से सोचें, तो मेरे ख़्याल से आज के क़ानूनों को ज़्यादा बेहतर पाएंगे।

  26. >शरीयत के क़ानून उस वक़्त के लिए भले ही सही रहे हों, लेकिन मुझे नहीं लगता कि आज वे सही कहे जा सकते हैं। क्या किसी को सार्वजनिक तौर पर कोड़े मारना सही है? या चोरी करने पर किसी के हाथ काट देना सही है? अगर आप धर्म की बजाय तर्क के हिसाब से सोचें, तो मेरे ख़्याल से आज के क़ानूनों को ज़्यादा बेहतर पाएंगे।

  27. sajid khan says:

    >@kash bhai bahoot jaldi ghabra jaate hohum aur aap jaise kitne aaye aur chale gaye phir bhi.HINDU&MUSLIM dharm wahi ka wahi hai.BHAGWAAN hum sabhi logo ko nek hidayat de AAMEEN

  28. sajid khan says:

    >@kash bhai bahoot jaldi ghabra jaate hohum aur aap jaise kitne aaye aur chale gaye phir bhi.HINDU&MUSLIM dharm wahi ka wahi hai.BHAGWAAN hum sabhi logo ko nek hidayat de AAMEEN

  29. kash says:

    >@ sajid khan५०% सही मुस्लिम धर्म वही का वही है और हिंदू धर्म बहूत आगे जा चुका हैं

  30. >@ sajid khan५०% सही मुस्लिम धर्म वही का वही है और हिंदू धर्म बहूत आगे जा चुका हैं

  31. kash says:

    >@ sajid khan आप भी आगे जा साकते है बस धर्म के पिच्छे लगनेसे अcचे ग्यान & विग्यान के पीचे लागोजिंदगी सुधार जायेगी

  32. >@ sajid khan आप भी आगे जा साकते है बस धर्म के पिच्छे लगनेसे अcचे ग्यान & विग्यान के पीचे लागोजिंदगी सुधार जायेगी

  33. >मेरे प्रस्ताव (या सुझाव) का जवाब अभी तक सलीम या साजिद ने नहीं दिया है…🙂 कि क्या वे मुस्लिम समाज में इस बात की पहल करेंगे कि जितने भी मुस्लिम अपराधी है उन्हें शरीयत के मुताबिक सजा मिले? सीधा सा सवाल है भाई, सीधा जवाब दो ना… (इसमें तो वेद-कुरान पढ़ने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी)

  34. >मेरे प्रस्ताव (या सुझाव) का जवाब अभी तक सलीम या साजिद ने नहीं दिया है…🙂 कि क्या वे मुस्लिम समाज में इस बात की पहल करेंगे कि जितने भी मुस्लिम अपराधी है उन्हें शरीयत के मुताबिक सजा मिले? सीधा सा सवाल है भाई, सीधा जवाब दो ना… (इसमें तो वेद-कुरान पढ़ने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी)

  35. sajid khan says:

    >suresh bhayya ki jai ho ab ki baar BJP ki goverment pakka.(lage raho munna bhai)@kashBHAGWAAN aap sab ki aur humari dua kubul kareAAMEEN

  36. sajid khan says:

    >suresh bhayya ki jai ho ab ki baar BJP ki goverment pakka.(lage raho munna bhai)@kashBHAGWAAN aap sab ki aur humari dua kubul kareAAMEEN

  37. rohit says:

    >सुरेश दा यह लोग क्या जाने की सनातन धर्म क्यों महान है यह तो अभी सनातन धर्म के आयेज बच्चे ही है इनकी उम्र मात्र १७०० साल है और फिर मैं यह पूछता हूँ की अगर जो खुदा खुदा इतना यह सलीम चिल्ला रहा है मेरी इतनी सी बात का जवाब दे दे की अगर इनका अल्लाह इतना ही ताकतवर है तो कटे हुए माफी चाहूँगा ख़तने किए हुए मुसलमान ही पैदा क्यों नही करता क्यों एक हिंदू बच्चे को पैदा करता है जिसे यह कठमुल्ले ख़तना कर के मुसलमान बना देते है

  38. rohit says:

    >सुरेश दा यह लोग क्या जाने की सनातन धर्म क्यों महान है यह तो अभी सनातन धर्म के आयेज बच्चे ही है इनकी उम्र मात्र १७०० साल है और फिर मैं यह पूछता हूँ की अगर जो खुदा खुदा इतना यह सलीम चिल्ला रहा है मेरी इतनी सी बात का जवाब दे दे की अगर इनका अल्लाह इतना ही ताकतवर है तो कटे हुए माफी चाहूँगा ख़तने किए हुए मुसलमान ही पैदा क्यों नही करता क्यों एक हिंदू बच्चे को पैदा करता है जिसे यह कठमुल्ले ख़तना कर के मुसलमान बना देते है

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