स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़

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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>"ब्लोगवाणी" पर सलीम खान (स्वच्छ सन्देश) की भविष्यवाणी

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ब्लोगवाणी ने कभी नहीं कहा कि वह बंद होने जा रही है, उन्होंने अपने यु आर एल पर वो सन्देश क्यूँ लिखा यह जनाब गुप्ता जी (ब्लोगवाणी के मालिक) या ब्लोगवाणी प्रभंधन ही बेहतर जानता होगा. लेकिन इससे एक बात साफ़ हो गयी कि हिंदी चिट्ठालेखक कितने हलके दर्जे के हैं जो लकीर के फ़कीर होकर बस ब्लोगवाणी, ब्लोगवाणी और ब्लोगवाणी पर ही चिल्लाते गए और बिना ढंग से पढ़े यह निष्कर्ष निकाल लिया कि यह बंद हो गया. मैंने कल जब ब्लोगवाणी खोली तो मुझे भी बहुत बड़ा झटका महसूस हुआ, मैंने फ़ौरन ही मोहम्मद उमर कैरानवी जी (मुख्य सलाहकार, हमारी अन्जुमन) को फ़ोन मिलाया और इस बाबत इत्तिला दी उन्होंने भी ओपन किया और मुझे बताया इसमें कहीं ऐसा सन्देश नहीं लिखा है कि ब्लोगवाणी बंद हो जायेगी. मैंने भी उसे पढा तो पाया कि ब्लोगवाणी बंद नहीं होगी और मैंने हमारी अन्जुमन (विश्व का प्रथम एवं एकमात्र हिंदी इस्लामिक कम्युनिटी ब्लॉग) पर एक ब्लोगर के द्वारा की गयी टिपण्णी के जवाब में ही कह दिया था कि ब्लोगवाणी फिर से बहुत जल्द ही शुरू हो जायेगी. और तो और उस ब्लोगर ने वहां आकर यह भी आरोप लगाया कि कुछ खास लोग (उसका इशारा मेरी तरफ, मोहम्मद उमर कैरानवी जी की तरफ और फिरदौस खान के तरफ था) बहुत खुश होंगे क्यूंकि ब्लोगवाणी बंद हो गयी. कितनी घिनौनी और ओछी सोच थी उसकी. यहीं नहीं उसने कई ब्लॉग पर जाकर हम लोगों को बेवजह बदनाम करने की कोशिश भी की. ख़ैर, अब ब्लोगवाणी पुनः शुरू हो गयी है और शयेद अपडेशन आदि की वजह से २४ घंटे तक उसे बंद रखा गया होगा. आप सबको ब्लोगवाणी के पुनः शुरू होने पर ढेरों बधाइयां…
और यह भी मैं बता दूँ कि ब्लोगवाणी का दुबारा शुरू होने पर ज्यादा खुश न हों क्यूंकि ब्लोगवाणी का दुबारा प्रकट होना अस्थाई है (देखें यहाँ) और एक दो महीने में यह अपने नए अवतार के साथ दोबारा आएगी (और सख्ती के साथ, नियमों के साथ).

सलीम खान

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>लखनऊ के ब्लॉगर ज़ाकिर अली "रजनीश" रचित पुस्तक "हिन्दी में पटकथा लेखन" का विमोचन आज

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उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ द्वारा हिन्दी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में दिनांक 14 सितम्बर 2009 को शाम 4.00 बजे संस्थान के निदेशक डा0 सुधाकर अदीब द्वारा ब्लॉगर ज़ाकिर अली “रजनीश” की पुस्तक “हिन्दी में पटकथा लेखन” का विमोचन। आप सादर आमंत्रित हैं।

आपको जानकर प्रसन्नता होगी कि लखनऊ पुस्तक मेला में दिनांक 14 सितम्बर 2009 को उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के निदेशक डा0 सुधाकर अदीब ब्लॉगर ज़ाकिर अली “रजनीश” की पुस्तक “हिन्दी में पटकथा लेखन” का विमोचन शाम 4.00 बजे करेंगे। यह पुस्तक वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ द्वारा संयुक्त रूप से प्रकाशित की गयी है।

हिन्दी संस्थान द्वारा प्रदत्त फेलोशिप के अन्तर्गत लिखी गयी यह शोध परक पुस्तक फिल्म एवं टीवी लेखन की प्रक्रियाओं से सम्बंधित है।

यदि आप लखनऊ के निवासी हैं और किताबों अथवा स्क्रिप्ट राइटिंग के शौकीन हैं, तो आप दिनांक 15 सितम्बर 2009 को मोती महल लॉन, लखनऊ में आयोजित पुस्तक मेला में शाम 6.30 बजे सादर आमंत्रित हैं। आपकी गरिमामयी उपस्थिति नाचीज़ का हौसला बढ़ाने में सहायक होगी।

“स्वच्छ सन्देश:हिन्दोस्तान की आवाज़” आपकी उपस्थिति के लिए प्रतीक्षारत है.

-सलीम खान
स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़
लखनऊ, उत्तर प्रदेश

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>9/11: वर्ल्ड ट्रेड सेंटर का गिराया जाना, अमेरिका का ‘Inside Job’ था, ये तो मीडिया क्रियेशन है जो मुसलमानों को बदनाम करता है.

>मैं पीस टीवी देख रहा था. प्रोग्राम था… इज़हारे हक और इज़हारे हक की इस नशिस्त (एपिसोड) में जो शीर्षक था…वह था… “जिहाद और दहशतगर्दी – इस्लाम के पसमंज़र में“, जिसे लखनऊ में ही आयोजित किया गया था. उस प्रोग्राम में जब सवालात और जवाबात का सेशन शुरू हुआ तो औरतों में से एक मुसलमान ख्वातीन ने डॉ जाकिर साहब से पूछा:

डॉ साहब, मुझे ये बताईये कि ग्यारह सितम्बर दो हज़ार एक (9/11) को जो ट्विन टावर गिराया गया वो जिहाद था या नहीं और अगर था तो क्या यह सही जिहाद था? क्यूंकि मेरा बेटा भी एक आईआईटीएन है और वह वहां मौजूद था और जब हमने यह सुना तो मेरी तो रूह ही काँप गयी थी. मुझे यह बताईये डॉ साहब कि जिन्होंने ने यह सब किया सही किया या नहीं?

मैंने टीवी पर नज़रें गड़ा दीं क्यूंकि यह एक अहम् सवाल था और मेरे लिए इस सवाल का जवाब जानना बहुत ज़रूरी था. उस ख्वातीन की तरह मुझे भी यह जानना ज़रूरी था क्यूंकि मुझसे भी कई लोगों ने इसी तरह का सवाल किया था यहाँ तक कि कई ब्लॉगरों ने मेरी पोस्ट पर यह सवाल दागे या इससे मिलते जुलते. मैं डॉ जाकिर नाइक साहब ने जो जवाब दिया और विश्लेषण इस पोस्ट के ज़रिये आप तक पहुंचाना चाहता हूँ.

इस सवाल के जवाब से पहले हमें यह जानना बहुत ज़रूरी है कि जिहाद कहते किसे हैं और जिहाद किस-किस क़िस्म का होता है? हालाँकि मैंने जिहाद का शाब्दिक अर्थ और परिभाषा अपने पिछले पोस्ट में व्यक्त कर दी थी. मैं उसे यहाँ पर दोहराना चाहूँगा कि जिहाद क्या है?

जिहाद शब्द का इस्तेमाल वर्तमान काल में जिस अर्थ में लिया जा रहा है, आजकल इस्लाम के बारे में फैली गलत-फहमियों में से एक है. बल्कि यों कहें कि जिहाद के बारे में गलत-फहमी केवल नॉन-मुस्लिम में ही नहीं है बल्कि मुस्लिम में भी है. जिहाद को नॉन-मुस्लिम और मुस्लिम दोनों ही यह समझते हैं कि किसी मुसलमान के द्वारा लड़ी गयी लडाई, वह चाहे किसी मक़सद के लिए हो, वह गलत मक़सद हो या सही, जिहाद कहलाता है.
जिहाद एक अरबी भाषा का शब्द है जो ‘जहादा’ ‘jahada’ शब्द से बना है जिसका मायने होता है ‘मेहनत करना’ ‘जद्दोजहद करना’ ‘संघर्ष करना’ अंग्रेजी में इस कहेंगे to strive or to struggle. मिसाल के तौर पर ‘अगर एक छात्र उत्तीर्ण होने के लिए मेहनत करता है, तो वह जिहाद कर रहा है.’ अरबी भाषा के शब्द जिहाद का एक अर्थ ‘अपनी नफ़्स से संघर्ष करना’ भी है. अपने समाज को बेहतर बनाने के लिए मेहनत करने को भी जिहाद कहते हैं और यह अपने अंतर एक अर्थ और समेटे है जिसका अर्थ होता है कि ‘आत्म रक्षा के लिए संघर्ष’ या चढाई हो जाने या अत्याचार होने पर रण-भूमि में चढाई करने वाले या अत्याचार के विरुद्ध लड़ना.
जिहाद धर्म-युद्ध नहीं
लेकिन जिहाद को ‘पवित्र युद्ध’ holy war नाम पश्चिम जगत और इस्लाम विरोधी मिडिया ने दिया जो कि बिलकुल ही गलत परिभाषा है। जैसा कि हम देख चुके है कि जिहाद एक अरबी शब्द है उसके मायने क्या है.

इस्लामिक नज़रिए में जब हम कुर’आन और हदीस का अध्ययन करते हैं तो पता चलता है कि ‘जिहाद’ मुख्यतया दो प्रकार का हो सकता है;
एक “फ़ी-सबिलिल्लाह” अर्थात अल्लाह की राह में (अच्छाई की राह में) और दूसरा “फ़ी-सबीशैतान” अर्थात शैतान की राह में (बुराई की राह में).

अगर हम देखते हैं कि जो ट्विन टावर गिराया गया वह कौन सा जिहाद था तो साफ़ पता चलता है कि यह फ़ी-सबीशैतान था.

जिहाद का अर्थ जद्दो जहद होता है तो वर्ल्ड ट्रेड सेण्टर गिराना भी ऐसा नहीं है कि हंसी खेल था यह तो बहुत ही जद्दो-जहद का काम रहा होगा यानि यह बहुत बड़े जिहाद का काम था लेकिन “फ़ी-सबिशैतान” बुराई की राह में था.

पश्चिमी मीडिया कहती है कि प्रमुख संदिग्ध ओसामा बिन लादेन है. वही पश्चिम के लोग जो शहीदे-आज़म भगत सिंह को भी आतंकवादी कहते थे. ओसामा बिन लादेन ने अगर ऐसा किया है तो यह ग़लत है, लेकिन आज तक यह सिद्ध नहीं हो पाया केवल प्राइम सस्पेक्ट ओसामा बिन लादेन, प्राइम सस्पेक्ट ओसामा बिन लादेन…

मान लें, बहस के तौर पर कि ओसामा बिन लादेन ने ऐसा किया भी है… तो एक इंसान की करी गयी ग़लती की वजह से बुश की अमेरिकी सेना ने लाखों लोगों को मौत की नींद सुला दिया. अफगानिस्तान जैसे गरीब देश पर उसने लाखों बेगुनाहों पर बम गिराए. इस तरह से तो बुश तो दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी है.

हमें मालूम है कि सद्दाम हुसैन एक मुसलमान था, मुसलमान होने के बावजूद उसने कुछ लोगों को ग़लत तरीक़े से मार डाला था. लेकिन उस पर तरह तरह के इल्जाम लगा कर कि उसके पास जैविक हथियार हैं; ये है; वो है. और इराक़ पर बुश ने बम बरसाए.

खुद बुश ने सी एन एन पर कहा था कि “मैंने वहां सेना भेजी”. आप खुद सोचिये जिस कृत्य को यूएन ने इजाज़त नहीं दी, उसके खिलाफ़ जाकर बुश और अमेरिकी सेना ने क्या सही किया? अगर आतंक का यही नजरिया है तो मेरे हिसाब से बुश दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी है.

यही नहीं अमेरिका की तीन बड़ी मैगजीनों ने यह साबित किया था कि ट्विन टावर पर जो हमला किया गया वह बाहरी हमला नहीं बल्कि अमेरिका का अपना इनसाइड जॉब था.

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>नारी का व्यापक अपमान और भारतीय नपुंसकता Modern Global Women Culture and India

>लेख के मुख्य बिंदु: 

  • उजाले और चकाचौंध के भीतर खौफ़नाक अँधेरे
  • नारी का व्यापक अपमान
  • यौन शोषण (Sexual Exploitation)
  • यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment)
  • यौन-अपराध
  • औरतों पर पारिवारिक यौन अत्याचार
  • कन्या भ्रूण-हत्या (Female Foeticide)
  • कन्या वध (Female Infanticide)
  • सहमती यौन-क्रिया (Fornication)
  • समाधान: ‘स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़’ की पहल

आधुनिक वैश्विय सभ्यता में प्राचीन काल में नारी की दशा एवम् स्तिथियों की प्रतिक्रिया के फलस्वरूप नारी की गतिशीलता अतिवादी के हत्थे चढ़ गयी. नारी को आज़ादी दी गयी, तो बिलकुल ही आजाद कर दिया गया. पुरुष से समानता दी गयी तो उसे पुरुष ही बना दिया गया. पुरुषों के कर्तव्यों का बोझ भी उस पर डाल दिया गया. उसे अधिकार बहुत दिए गए मगर उसका नारीत्व छीन कर. इस सबके बीच उसे सौभ्ग्य्वाश कुछ अच्छे अवसर भी मिले. अब यह कहा जा सकता है की पिछले डेढ़ सदी में औरत ने बहुत कुछ पाया है, बहुत तरक्की की है, बहुत सशक्त हुई है. उसे बहुत सारे अधिकार प्राप्त हुए हैं. कौमों और राष्ट्रों के उत्थान में उसका बहुत बड़ा योगदान रहा है जो आज देख कर आसानी से पता चलता है.

लेकिन यह सिक्के का केवल एक पहलू है जो बेशक बहुत अच्छा, चमकीला और संतोषजनक है. लेकिन जिस तरह सिक्के के दुसरे पहलू को देखे बिना यह फ़ैसला नहीं किया जा सकता है कि वह खरा है या खोटा. हमें औरत के हैसियत के बारे में कोई फ़ैसला करना भी उसी वक़्त ठीक होगा जब हम उसका दूसरा रुख़ भी ठीक से, गंभीरता से, ईमानदारी से देखें. अगर ऐसा नहीं किया और दूसरा पहलू देखे बिना कोई फ़ैसला कर लिया जाये तो नुक्सान का दायरा ख़ुद औरत से शुरू होकर समाज, व्यवस्था और पूरे विश्व तक पहुँच जायेगा.

आईये देखें सिक्के का दूसरा पहलू…

उजाले और चकाचौंध के भीतर खौफ़नाक अँधेरे
नारी जाति के वर्तमान उपलब्धियां- शिक्षा, उन्नति, आज़ादी, प्रगति और आर्थिक व राजनैतिक सशक्तिकरण आदि यक़ीनन संतोषजनक, गर्वपूर्ण, प्रशंसनीय और सराहनीय है. लेकिन नारी स्वयं देखे कि इन उपलब्धियों के एवज़ में नारी ने अपनी अस्मिता, मर्यादा, गौरव, गरिमा, सम्मान व नैतिकता के सुनहरे और मूल्यवान सिक्कों से कितनी बड़ी कीमत चुकाई है. जो कुछ कितना कुछ उसने पाया उसके बदले में उसने कितना गंवाया है. नई तहजीब की जिस राह पर वह बड़े जोश और ख़रोश से चल पड़ी- बल्कि दौड़ पड़ी है- उस पर कितने कांटे, कितने विषैले और हिंसक जीव-जंतु, कितने गड्ढे, कितने दलदल, कितने खतरे, कितने लूटेरे, कितने राहजन और कितने धूर्त मौजूद हैं.

आईये देखते हैं कि आधुनिक सभ्यता ने नारी को क्या क्या दिया

व्यापक अपमान

  • समाचार पत्रों, पत्रिकाओं में रोज़ाना औरतों के नंगे, अध्-नंगे, बल्कि पूरे नंगे जिस्म का अपमानजनक प्रकाशन.
  • सौन्दर्य-प्रतियोगिता… अब तो विशेष अंग प्रतियोगिता भी… तथा
  • फैशन शो/ रैंप शो के कैट-वाक् में अश्लीलता का प्रदर्शन और टीवी चैनल द्वारा ग्लोबली प्रसारण
  • कारपोरेट बिज़नेस और सामान्य व्यापारियों/उत्पादकों द्वारा संचालित विज्ञापन प्रणाली में औरत का बिकाऊ नारीत्व.
  • सिनेमा टीवी के परदों पर करोडों-अरबों लोगों को औरत की अभद्र मुद्राओं में परोसे जाने वाले चल-चित्र, दिन-प्रतिदिन और रात-दिन.
  • इन्टरनेट पर पॉर्नसाइट्स. लाखों वेब-पृष्ठों पे औरत के ‘इस्तेमाल’ के घिनावने और बेहूदा चित्र
  • फ्रेंडशिप क्लब्स, फ़ोन सर्विस द्वारा दोस्ती.

यौन शोषण (Sexual Exploitation)

  • देह व्यापार, गेस्ट हाउसों, सितारा होटलों में अपनी ‘सेवाएँ’ अर्पित करने वाली संपन्न व अल्ट्रामाडर्न कॉलगर्ल्स.
  • रेड लाइट एरियाज़ में अपनी सामाजिक बेटीओं-बहनों की ख़रीद-फ़रोख्त. वेश्यालयों को समाज और क़ानून या प्रशासन की ओर से मंजूरी.
  • सेक्स-वर्कर, सेक्स-ट्रेड, सेक्स-इंडस्ट्री जैसे आधुनिक नामों से नारी-शोषण तंत्र की इज्ज़त-अफ़ज़ाई व सम्मानिकरण.
  • नाईट क्लब और डिस्कोथेक में औरतों और युवतियों के वस्त्रहीन अश्लील डांस, इसके छोटे रूप में सामाजिक संगठनों के रंगरंज कार्यक्रमों में लड़कियों के द्वारा रंगा-रंग कार्यक्रम को ‘नृत्य-साधना’ का नाम देकर हौसला-अफ़ज़ाई.
  • हाई-सोसाईटी गर्ल्स, बार-गर्ल्स के रूप में नारी यौवन व सौंदय्र की शर्मनाक दुर्गति.

यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment)

  • फब्तियों की बेशुमार घटनाएँ.
  • छेड़खानी की असंख्य घटनाएँ, जिनकी रिपोर्ट नहीं होती. देश में सिर्फ दो वर्षों में (2005-06) 36,617 घटनाएँ.
  • कार्य-स्थल पर यौन उत्पीड़न. (Women unsafe at work place)
  • सड़कों, गलियों, बाज़ारों, दफ़्तरों, अस्पतालों, चलती कारों, दौड़ती बसों आदि में औरत असुरक्षित. (Women unsafe in the city)
  • ऑफिस में नौकरी बहाल रहने के लिए या प्रमोशन के लिए बॉस द्वारा महिला कर्मचारी का यौन शोषण
  • टीचर या ट्यूटर द्वारा छात्राओं का यौन उत्पीड़न.
  • नर्सिंग होम/अस्पतालों में मरीज़ महिलाओं का यौन-उत्पीड़न.

यौन-अपराध

  • बलात्कार- दो वर्ष की बच्ची से लेकर अस्सी साल की वृद्धा से- ऐसा नैतिक अपराध, जिसकी ख़बर अख़बारों में पढ़कर किसी के कानों में जूं तक नहीं रेंगती.मानों किसी गाड़ी से कुचल कर कोई चुहिया मर गयी हो.
  • ‘सामूहिक बलात्-दुष्कर्म’ इतने आम हो गएँ हैं की समाज ने ऐसी दुर्घटनाओं की ख़बर पढ़-सुन कर बेहिसी और बेफ़िक्री का खुद को आदि बना लिया है.
  • युवतियों, बालिकाओं, किशोरियों का अपहरण, उनके साथ हवास्नाक ज़्यादती, सामूहिक ज्यात्दी और हत्या भी…
  • सिर्फ़ दो वर्षों (2005-06) आबुरेज़ी (बलात्कार) की 35,195 वाक़ियात. अनरिपोर्टेड घटनाएँ शायेद दस गुना ज़्यादा हों.
  • सेक्स-माफिया द्वारा औरतों के बड़े-बड़े संगठित कारोबार. यहाँ तक कि विधवा आश्रम की विधवा भी सुरक्षित नहीं.
  • विवाहित स्त्रियों का पराये मर्द से सम्बन्ध (Extra Marital Relations) इससे जुड़े अन्य अपराध हत्याएं और परिवार का टूटना-बिखरना आदि.

औरतों पर पारिवारिक यौन अत्याचार (कुटुम्बकीय व्यभिचार) व अन्य ज्यातादियाँ

  • बाप-बेटी, बहन-भाई के पवित्र रिश्ते भी अपमानित.
  • आंकडों के अनुसार बलात-दुष्कर्म में लगभग पचास प्रतिशत निकट सम्बन्धी मुल्व्वस (Incest).
  • दहेज़-सम्बन्धी अत्याचार व उत्पीड़न. जलने, हत्या कर देने आत्म-हत्या पर मजबूर कर देने, सताने, बदसुलूकी करने, मानसिक यातना देने की बेशुम्मार घटनाएँ. कई बहनों का एक साथ सामूहिक आत्महत्या दहेज़ के दानव की देन है.

कन्या भ्रूण-हत्या (Female Foeticide) और कन्या वध (Female Infanticide)

  • बच्ची का क़त्ल उसके पैदा होने से पहले माँ के पेट में ही. कारण: दहेज़ व विवाह का क्रूर और निर्दयी शोषण-तंत्र.
  • पूर्वी भारत में एक इलाके में यह रिवाज़ है कि अगर लड़की पैदा हुई तो पहले से तयशुदा ‘फीस’ के एवज़ में दाई उसकी गर्दन मरोड़ देगी और घूरे में दबा आएगी. कारण: वही दहेज़ व विवाह का क्रूर और निर्दयी शोषण-तंत्र और शादी के नाकाबिले बर्दाश्त खर्चे.
  • कन्या वध के इस रिवाज़ के प्रति नारी-सम्मान के ध्वजावाहकों की उदासीनता.

सहमती यौन-क्रिया (Fornication)

  • अविवाहित रूप से नारी-पुरुष के बीच पति-पत्नी का सम्बन्ध (Live-in-Relation) पाश्चात्य सभ्यता का ताज़ा तोह्फ़ा. स्त्री का सम्मानपूर्ण ‘अपमान’.
  • स्त्री के नैतिक अस्तित्व के इस विघटन में न क़ानून को कुछ लेना देना, न ही नारी जाति के शुभ चिंतकों का कुछ लेना देना, न पूर्वी सभ्यता के गुण-गायकों का कुछ लेना देना, और न ही नारी स्वतंत्रता आन्दोलन के लोगों का कुछ लेना देना.
  • सहमती यौन-क्रिया (Fornication) की अनैतिकता को मानव-अधिकार (Human Right) नामक ‘नैतिकता का मक़ाम हासिल.

समाधान:

नारी के मूल अस्तित्व के बचाव में ‘स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़’ की इस पहल में आईये, हम सब साथ हो और समाधान की ओर अग्रसर हों.

नारी कि उपरोक्त दशा हमें सोचने पर मजबूर करती है और आत्म-ग्लानी होती है कि हम मूक-दर्शक बने बैठे हैं. यह ग्लानिपूर्ण दुखद चर्चा हमारे भारतीय समाज और आधुनिक तहज़ीब को अपनी अक्ल से तौलने के लिए तो है ही साथ ही नारी को स्वयं यह चुनना होगा कि गरीमा पूर्ण जीवन जीना है या जिल्लत से.

नारी जाति की उपरोक्त दयनीय, शोचनीय, दर्दनाक व भयावह स्थिति के किसी सफल समाधान तथा मौजूदा संस्कृति सभ्यता की मूलभूत कमजोरियों के निवारण पर गंभीरता, सूझबूझ और इमानदारी के साथ सोच-विचार और अमल करने के आव्हान के भूमिका-स्वरुप है.

लेकिन इस आव्हान से पहले संक्षेप में यह देखते चले कि नारी दुर्गति, नारी-अपमान, नारी-शोषण के समाधान अब तक किये जा रहे हैं वे क्या हैं? मौजूदा भौतिकवादी, विलास्वादी, सेकुलर (धर्म-उदासीन व ईश्वर विमुख) जीवन-व्यवस्था ने उन्हें सफल होने दिया है या असफल. क्या वास्तव में इस तहज़ीब के मूल-तत्वों में इतना दम, सामर्थ्य व सक्षमता है कि चमकते उजालों और रंग-बिरंगी तेज़ रोशनियों की बारीक परतों में लिपटे गहरे, भयावह, व्यापक और जालिम अंधेरों से नारी जाति को मुक्त करा सकें???

आईये आज हम नारी को उसका वास्तविक सम्मान दिलाने की क़सम खाएं!

सलीम खान

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>क्या आप ‘ब्लोगवाणी’ का इतिहास जानते हैं? (The History of Blogvani)

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हिंदी ब्लॉग का एग्रिगेटर” ब्लोगवाणी.
यह एक ऐसी वेबसाइट है; जिसे शायेद ही कोई ब्लॉगर रोज़ न देखता हो. हर हिंदी ब्लॉगर की दिनचर्या की शुरुआत ही ब्लोगवाणी से होती है. ब्लोगवाणी का इतिहास जानने से पहले हम ब्लोगवाणी की कुछ विशेषताओं को जान लें. जैसे ही हम यह वेबसाइट खोलते हैं हमें हिंदी ब्लॉग जगत के उन सभी ब्लोग्स के लेखों उन पर की जा रही टिप्पणियों और सबसे ज्यादा पसंद किये गए लेखों, सबसे ज्यादा पढ़े गए लेखों और सबसे ज्यादा प्राप्त टिप्पणियों के लेखों का एक खाका सामने आ जाता है. ब्लोगवाणी पर सभी हिंदी ब्लॉग का ब्यौरा हो यह ज़रूरी नहीं क्यूंकि ब्लोगवाणी पर उसी ब्लॉग की सुचना या जानकारी मिल सकेगी जो इस वेबसाइट पर रजिस्टर कर चुकें हों. और रजिस्टर किये गए ब्लॉग के लिए भी ब्लोगवाणी ने विशेष पृष्ट की व्यवस्था कर रखी है, जिस पर उस विशेष ब्लॉग के सभी लेखो का विवरण, उनपर की गयी टिपण्णी और पसंद किये गए चटके का भी ज़िक्र होता है. आप ब्लोगवाणी पर सन्दर्भ या श्रेणियों के आधार पर भी लेखों को खोज सकते हैं, इसमें कुल 25 श्रेणियां दी गयी हैं जैसे- कविता, तकनीक, धर्म-आध्यात्म आदि. ब्लोगवाणी की सुविधा में अगर कहीं भी कोई भी दिक्क़त आ रही हो तो उसकी शिकायत के लिए इस वेबसाइट पर सबसे नीचे दाहिने तरफ़ ब्लोगवाणी संपर्क की भी व्यवस्था है. शिकायत मेल करने के कुछ ही घंटों में आपका समाधान आपने दिए गए मेल एड्रेस पर पोस्ट हो जायेगा.

तो यह रही ब्लोगवाणी की मुख्तसर सी विशेषताएं.
 
ब्लोगवाणी का इतिहास:

ब्लोगवाणी वेबसाइट (http://www.blogvani.com/) को जून 2007 में पब्लिक सॉफ्टवेर लाइब्रेरी इंडिया प्रा. लि. (Public Software Library India Pvt Ltd), नई दिल्ली द्वारा लॉन्च किया गया था, जिसके मालिक है श्री मैथिली सरन गुप्ता जी है और वह वह कंपनी के सीईओ है. इसी कंपनी ने सन 2009 में एक और वेबसाइट लॉच की जिसका नाम आस्ट्रोबिक्स.कॉम है. इसमें आप वैदिक अस्ट्रोलोजी सम्बंधित उत्पादन खरीद सकते हैं.

दर असल पब्लिक सॉफ्टवेर लाइब्रेरी इंडिया प्रा. लि. (Public Software  Library India Pvt Ltd) की शुरुआत सन 1998 में की गयी थी जो फ्रीवेअर और शेयरवेअर सॉफ्टवेर की सी डी बना के बेचती थी. इसको पब्लिक सॉफ्ट इंडिया नाम से ज़्यादा जाना जाता है. श्री मैथिलि सरन गुप्ता जी इस कंपनी को बनाने से पहले एक बैंकर थे. सन १९९८ से २००१ तक इस कंपनी ने खूब तरक्की की और मार्केट में कई तरह के शेयरवेअर और कई भारतीय भाषाओँ के फॉण्ट सॉफ्टवेअर को लॉन्च किया. कंपनी की यह पॉलिसी है कि कम कीमत में लोगों को यह प्रोडक्टस मुहैय्या कराये जा सकें.

सन २००१ में इस कंपनी ने हिंदीपैड लॉच किया जो कि देवनागरी को आसानी से टाइप कर सकने में सक्षम था. भविष्यफल बताने के लिए कंपनी ने होरोस्कोप एक्स्प्लोरर लॉच किया. इस सॉफ्टवेअर के ज़रिये वैदिक आस्ट्रोलोजी रिपोर्ट को भारतीय भाषाओँ में प्राप्त जा सकता है. यही एक ऐसा प्रोडक्ट है जो सबसे ज़्यादा फेमस और बिकाऊ है. सन 2006 में लगभग 10 भारतीय भाषाओँ में वैदिक आस्ट्रोलोजी को लॉच किया जा चुका है. सन 2006 की शुरुआत में पब्लिक सॉफ्ट इंडिया ने लैंग्वेज लर्निंग क्षत्र में पदार्पण किया और कैफे इंग्लिश कि शुरुआत की. यही नहीं कंपनी ने अकाउन्टिंग सॉफ्टवेअर भी लॉच कर रखे हैं.
 पब्लिक सॉफ्टवेअर इंडिया की मुख्य वेबसाइट है आईटीबिक्स.कॉम जिसके तहत ये अपने सारे प्रोडक्ट की मार्केटिंग करते हैं.


कुछ प्रमुख सॉफ्टवेअर की सूचि:

  • होरोस्कोप एक्स्प्लोरर
  • करेक्ट अकाउन्टिंग सॉफ्टवेअर
  • कैफे इंग्लिश
  • मुहुर्त एक्स्प्लोरर (Electional Vedic Astrology)
  • प्रश्न कुंडली (Horary Vedic Astrology)
  • लाल किताब एक्स्प्लोरर
  • डेली आस्ट्रोलोजी एक्स्प्लोरर
  • टेलीफोन इंग्लिश
 तो ये थी ब्लोगवाणी और उससे सम्बंधित जानकारी. साथ ही आपने जाना कि इस कपंनी और कितने प्रोडक्ट हैं. अगर आप इस कंपनी से संपर्क करना चाहते हैं तो नीचे दिए गए पते पर संपर्क कर सकते हैं:

Public Software Library India Pvt Ltd

76/2, Ist Floor, Isckon Temple Road,

Garhi, East of Kailash New Delhi-110065, India
Ph: 91-11-26486288/89, Email: itbix@itbix.com

प्रस्तुति: सलीम खान

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>हाँ….मैं, सलीम खान हिन्दू हूँ!

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‘हिंदू’ शब्द की परिभाषा

भारत वर्ष में रह कर अगर हम कहें की हिंदू शब्द की परिभाषा क्या हो सकती है? हिंदू शब्द के उद्भव का इतिहास क्या है? आख़िर क्या है हिंदू? तो यह एक अजीब सा सवाल होगा
लेकिन यह एक सवाल ही है कि जिस हिन्दू शब्द का इस्तेमाल वर्तमान में जिस अर्थ के लिए किया जा रहा है क्या वह सही है ?

मैंने पीस टीवी पर डॉ ज़ाकिर नाइक का एक स्पीच देखा, उन्होंने किस तरह से हिंदू शब्द की व्याख्या की मुझे कुछ कुछ समझ में आ गया मगर पुरी संतुष्टि के लिए मैंने अंतरजाल पर कई वेबसाइट पर इस शब्द को खोजा तो पाया हाँ डॉ ज़ाकिर नाइक वाकई सही कह रहे हैं. हिंदू शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई, कब हुई और किसके द्वारा हुई? इन सवालों के जवाब में ही हिंदू शब्द की परिभाषा निहित है

यह बहुत ही मजेदार बात होगी अगर आप ये जानेंगे कि हिंदू शब्द न ही द्रविडियन न ही संस्कृत भाषा का शब्द है. इस तरह से यह हिन्दी भाषा का शब्द तो बिल्कुल भी नही हुआ. मैं आप को बता दूँ यह शब्द हमारे भारतवर्ष में 17वीं शताब्दी तक इस्तेमाल में नही था. अगर हम वास्तविक रूप से हिंदू शब्द की परिभाषा करें तो कह सकते है कि भारतीय (उपमहाद्वीप) में रहने वाले सभी हिंदू है चाहे वो किसी धर्म के हों. हिंदू शब्द धर्म निरपेक्ष शब्द है यह किसी धर्म से सम्बंधित नही है बल्कि यह एक भौगोलिक शब्द है. हिंदू शब्द संस्कृत भाषा के शब्द सिन्धु का ग़लत उच्चारण का नतीजा है जो कई हज़ार साल पहले पर्सियन वालों ने इस्तेमाल किया था. उनके उच्चारण में ‘स’ अक्षर का उच्चारण ‘ह’ होता था

हाँ….मैं, सलीम खान हिन्दू हूँ !!!
हिंदू शब्द अपने आप में एक भौगोलिक पहचान लिए हुए है, यह सिन्धु नदी के पार रहने वाले लोगों के लिए इस्तेमाल किया गया था या शायेद इन्दुस नदी से घिरे स्थल पर रहने वालों के लिए इस्तेमाल किया गया था। बहुत से इतिहासविद्दों का मानना है कि ‘हिंदू’ शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम अरब्स द्वारा प्रयोग किया गया था मगर कुछ इतिहासविद्दों का यह भी मानना है कि यह पारसी थे जिन्होंने हिमालय के उत्तर पश्चिम रस्ते से भारत में आकर वहां के बाशिंदों के लिए इस्तेमाल किया था।

धर्म और ग्रन्थ के शब्दकोष के वोल्यूम # 6,सन्दर्भ # 699 के अनुसार हिंदू शब्द का प्रादुर्भाव/प्रयोग भारतीय साहित्य या ग्रन्थों में मुसलमानों के भारत आने के बाद हुआ था

भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘द डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया’ में पेज नम्बर 74 और 75 पर लिखा है कि “the word Hindu can be earliest traced to a source a tantrik in 8th century and it was used initially to describe the people, it was never used to describe religion…” पंडित जवाहरलाल नेहरू के मुताबिक हिंदू शब्द तो बहुत बाद में प्रयोग में लाया गया। हिन्दुज्म शब्द कि उत्पत्ति हिंदू शब्द से हुई और यह शब्द सर्वप्रथम 19वीं सदी में अंग्रेज़ी साहित्कारों द्वारा यहाँ के बाशिंदों के धार्मिक विश्वास हेतु प्रयोग में लाया गया।

नई शब्दकोष ब्रिटानिका के अनुसार, जिसके वोल्यूम# 20 सन्दर्भ # 581 में लिखा है कि भारत के बाशिंदों के धार्मिक विश्वास हेतु (ईसाई, जो धर्म परिवर्तन करके बने को छोड़ कर) हिन्दुज्म शब्द सर्वप्रथम अंग्रेज़ी साहित्यकारों द्वारा सन् 1830 में इस्ल्तेमल किया गया था

इसी कारण भारत के कई विद्वानों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि हिन्दुज्म शब्द के इस्तेमाल को धर्म के लिए प्रयोग करने के बजाये इसे सनातन या वैदिक धर्म कहना चाहिए. स्वामी विवेकानंद जैसे महान व्यक्ति का कहना है कि “यह वेदंटिस्ट धर्म” होना चाहिए.

इस प्रकार भारतवर्ष में रहने वाले सभी बाशिंदे हिन्दू हैं, भौगोलिक रूप से! चाहे वो मैं हूँ या कोई अन्य.

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लेख सन्दर्भ

सलीम खान