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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>अंतिम अवतार के दावेदार (List of antim -awtar)

>

आज तक अंतिम या कलियुग का अवतार होने का दावा अनेक व्यक्तियों ने किया है। ऐसे अवतार के दावेदारों में से कुछ का उल्लेख निम्नलिखित है।
1. प्रथम उल्लेख में एक निष्कलंकी दल नाम में एक संस्था है। इसके संस्थापक बालमुकुन्दजी कहे जाते हैं। वह भारत के निवासी हैं, उनके अनुयायी उनके अवतार होने की प्रतिक्षा में हैं।

2. ठाकुर दयानन्द का ‘‘अरूणा चल मिशन’’ यह मिशन आसाम राज्य के सिलचर नामक स्थान में 1909 में स्थापित किया गया था। उन्होंने स्वयं तो अवतार होने का दावा नहीं किया किन्तु अनुयायी गणों ने माना, वह मिशन आज भी चल रहा है।

3. मात आनन्दमयी – इनको हजारों लोग आदि शक्ति जगदम्बा का अवतार मानते हैं।

4. मध्य प्रदेश वर्धा के सत्य समाज के संचालक स्वामी सत्य भक्त जी अवतार बन गये थे।

5. ब्रह्मकुमारियों के दादा गुरू-दादा लेखराज जिनका पूर्व नाम खूब चंद्रकृपलानी था। 1937 में आम मण्डली नाम की संस्था की स्थापना की। उन्होंने स्वयं ही ब्रह्मा विष्णु आदि होने का दावा किय था।

6. कृष्णानन्द जी दादा धुनी वाले ने अपने आपको शंकर जी का अवतार कहा था।

7. स्वामी प्रणवानन्द जी भी अवतार बन बैठे थे।

8. हंसावतार – इनके समन्ध में इनके प्रचारकों का कहना है कि जो त्रोता में राम, द्वापर में कृष्ण, वही भगवान अब हंसावतर है। (कल्कि पुराण भूमिका से)

अन्य और दावा करने वाले



9. आनन्द मार्ग करने वाले



10. अखिल ब्रह्माण्ड पति



11. सत् संघ आश्रम श्री अनुकूल चंद्र ठाकुर
 
थोड़ा आगे देखें तो-



12. सीता राम ओंकार नाथ,



13. श्री राम कृष्ण परमहंस देव ठाकुर।



14. श्री लोक नाथ ब्रह्मचारी।



15. बालक ब्रह्मचारी, आदि को लेकर अवतार मानते थे।
 
16. ऐतिहासिक रूप से समाज में प्रेम-भक्ति का जो विचार लाया था उनका नाम श्री कृष्ण चैतन्य था, आज तक वैष्णव सम्प्रदाय उनके ही कलियुग का अवतार मानता है। इनका पूर्व नाम निमाइमिश्र, पिता जगन्नाथ मिश्र, माता शची देवी, जन्म स्थान बंगाल के नदीया जिले में।
 
वर्तमान समय में नकली अवतारों की संख्या बहुत है।
 
नकली अवतार का दावा करने वाले केवल कलि युग में ही नहीं द्वापर युग में भी अवतार का दावा करनेवाले भी थे(देखें भागवत पु. – 10/66/अ.)
 
अंतिम अवतार का दावा पेश करने में एक व्यक्ति बड़ी जोर शोर के साथ खड़ा हुआ वह मुसलमान घराने में पैदा हुआ उनका परिचय: वह पंजाब के गुरूदास पुर, जिला कादियां का मिर्जा गोलाम अहमद है। आश्चर्य की बात तो यह है कि बहुत से हिन्दू-मुसलमान उसको अवतार मानने लगे हैं।
 
ऊपर कहे गये तमाम दावेदार झूठे अवतार हैं, यह कहने के लिए विचार का प्रयोजन नहीं है।



इसी विषय पर अगला भाग पढ़े- (जिसमे विभिन्न धर्मों के धर्म ग्रन्थों में अंतिम अवतार के के बारे में क्या बताया गया है, का विश्लेषण)

Source: अंतिम अवतार Blog,  अंतिम अवतार परिचय- महाराज विकाशानन्‍द

Filed under: अंतिम अवतार

40 Responses

  1. flare says:

    >और आप सत्य के पुजारी ……………. | क्या फर्क पड़ता है अगर वो अवतार होने का दावा करते है ?कितनी बार भगवन आये और गए ……. लेकिन सारे लोगो का उधार नहीं कर पाए ……… कुछ लोग अपनी ही हाकते है इसका उनको पूरा हक है आपकी और मेरी तरह ……..

  2. flare says:

    >और आप सत्य के पुजारी ……………. | क्या फर्क पड़ता है अगर वो अवतार होने का दावा करते है ?कितनी बार भगवन आये और गए ……. लेकिन सारे लोगो का उधार नहीं कर पाए ……… कुछ लोग अपनी ही हाकते है इसका उनको पूरा हक है आपकी और मेरी तरह ……..

  3. >हमें तो आप भी कोई अवतार ही दिखाई देते हैं..:)

  4. >हमें तो आप भी कोई अवतार ही दिखाई देते हैं..:)

  5. >सच्चे nabi/अवतार के बारे में लिखना भूल गए?विचार करें कि हज़रत मुहम्‍मद सल्‍ल. ईसाई, बोद्ध् , हिन्‍दू, प्राणनाथी सम्‍प्रदाय, जैन और मूसा (यहूदी) धर्म के भी अवतार हैं? या यह BIG GAME AGAINST ISLAM है?http://antimawtar.blogspot.com/

  6. >सच्चे nabi/अवतार के बारे में लिखना भूल गए?विचार करें कि हज़रत मुहम्‍मद सल्‍ल. ईसाई, बोद्ध् , हिन्‍दू, प्राणनाथी सम्‍प्रदाय, जैन और मूसा (यहूदी) धर्म के भी अवतार हैं? या यह BIG GAME AGAINST ISLAM है?http://antimawtar.blogspot.com/

  7. >इसमें एक प्रमुख नाम तो छूट ही गया है – मोहम्मद उन्होने ने भी कहा था – , " 'अल्लाह' ने मुझे सब कुछ बता दिया है और इस धरती को 'ठीक' करने का 'ठेका' दे दिया है। आज से जो मेरी बात नहीं मानेगा उसकी खैर नहीं।" अन्तर केवल इतना है कि उपरोक्त सभी लोग लोगों को शान्तिपूर्ण ढ़ंग से मूरख बना रहे हैं और मोहम्मद ने यही काम अशान्तिपूर्वक किया। जीवन भर निरीह लोगों के कत्ल में जी-जान से जुड़े रहे।

  8. >इसमें एक प्रमुख नाम तो छूट ही गया है – मोहम्मद उन्होने ने भी कहा था – , " 'अल्लाह' ने मुझे सब कुछ बता दिया है और इस धरती को 'ठीक' करने का 'ठेका' दे दिया है। आज से जो मेरी बात नहीं मानेगा उसकी खैर नहीं।" अन्तर केवल इतना है कि उपरोक्त सभी लोग लोगों को शान्तिपूर्ण ढ़ंग से मूरख बना रहे हैं और मोहम्मद ने यही काम अशान्तिपूर्वक किया। जीवन भर निरीह लोगों के कत्ल में जी-जान से जुड़े रहे।

  9. >Anunad Singh, I think you don't know a single thing about Vedas and how can I expect that you know about Qur'an. Agar aap ek baar bhi VED ya Qur'aan ko Padh loge to samajh jaoge…

  10. >Anunad Singh, I think you don't know a single thing about Vedas and how can I expect that you know about Qur'an. Agar aap ek baar bhi VED ya Qur'aan ko Padh loge to samajh jaoge…

  11. >हो सकते हैं कई अवतार, भई हम तो मिट्टी, पत्थर, पेड़ को भी भगवान और अवतार मानकर पूजते हैं, सबको कहते हैं कि जो आपको पसन्द हो आप अपनाओ… हमें कोई ऐतराज़ नहीं। लेकिन "कुछ लोग" कहते हैं कि मेरा अवतार ही सही है बाकी सब बेकार, मेरी पुस्तक ही सही है बाकी सब बकवास…🙂 इस दुनिया में "अन्तिम" कुछ भी नहीं होता, शायद यह समझने में अभी कुछ लोगों को काफ़ी वक्त लगेगा…🙂

  12. >हो सकते हैं कई अवतार, भई हम तो मिट्टी, पत्थर, पेड़ को भी भगवान और अवतार मानकर पूजते हैं, सबको कहते हैं कि जो आपको पसन्द हो आप अपनाओ… हमें कोई ऐतराज़ नहीं। लेकिन "कुछ लोग" कहते हैं कि मेरा अवतार ही सही है बाकी सब बेकार, मेरी पुस्तक ही सही है बाकी सब बकवास…🙂 इस दुनिया में "अन्तिम" कुछ भी नहीं होता, शायद यह समझने में अभी कुछ लोगों को काफ़ी वक्त लगेगा…🙂

  13. >सुरेश बाबू, शायेद आपने अपने ही धर्म की पुस्तकों को नहीं पढ़ा, चलिए मैं एक झलक दिखला ही देता हूँ.(वैसे विस्तृत रूप से पढने के लिए आप मेरा लेख पढें 'हिन्दू धर्म में ईश्वर की परिकल्पना और स्रोत)ख़ैर,यजुर्वेद, अध्याय 40, श्लोक 9:"अन्धात्मा प्रविशन्ति ये अस्संभुती मुपस्ते" अर्थात "वे अन्धकार में हैं और गुनाहगार हैं, जो प्राकृतिक वस्तुओं को पूजते हैं"*प्राकृतिक वस्तुएं-सूरज, चाँद, ज़मीन, पेड़, जानवर आदि.आगे लिखा है; "वे और भी ज्यादा गुनाहगार हैं और अन्धकार में हैं जिन्होंने सांसारिक वस्तुओं को पूजा"*सांसारिक वस्तुएं- जिन्हें मनुष्य खुद बनता हैं. जैसे टेबल, मेज़, तराशा हुआ पत्थर आदि.

  14. >सुरेश बाबू, शायेद आपने अपने ही धर्म की पुस्तकों को नहीं पढ़ा, चलिए मैं एक झलक दिखला ही देता हूँ.(वैसे विस्तृत रूप से पढने के लिए आप मेरा लेख पढें 'हिन्दू धर्म में ईश्वर की परिकल्पना और स्रोत)ख़ैर,यजुर्वेद, अध्याय 40, श्लोक 9:"अन्धात्मा प्रविशन्ति ये अस्संभुती मुपस्ते" अर्थात "वे अन्धकार में हैं और गुनाहगार हैं, जो प्राकृतिक वस्तुओं को पूजते हैं"*प्राकृतिक वस्तुएं-सूरज, चाँद, ज़मीन, पेड़, जानवर आदि.आगे लिखा है; "वे और भी ज्यादा गुनाहगार हैं और अन्धकार में हैं जिन्होंने सांसारिक वस्तुओं को पूजा"*सांसारिक वस्तुएं- जिन्हें मनुष्य खुद बनता हैं. जैसे टेबल, मेज़, तराशा हुआ पत्थर आदि.

  15. >@अनुवाद सिंह आप मुहम्‍मद सल्‍ल. को जहाँ ऐसे अपशब्‍द में लिखोगे तो लाल जी का लेख उसके लिये मुझे प्रस्‍तुत करना पडता है, जो इस्लाम और मुहम्‍मद पर भरपूर प्रकाश डालता है, राजेन्द्र नारायण लाल अपनी पुस्तक ‘इस्लाम एक स्वयं सिद्ध ईश्वरीय जीवन व्यवस्था‘ में लेख ‘इस्लाम की विशेषताऐं’ में लिखते हैं- (1) इस्लाम की सबसे प्रधान विशेषता उसका विशुद्ध एकेश्वरवाद है। हिन्दू धर्म के ईश्वर-कृत वेदों का एकेश्वरवाद कालान्तर से बहुदेववाद में खोया तो नहीं तथापि बहुदेववाद और अवतारवाद के बाद ईश्वर को मुख्य से गौण बना दिया गया है। इसी प्रकार ईसाइयों की त्रिमूर्ति अर्थात ईश्वर, पुत्र और आत्मा की कल्पना ने हिन्दुओं के अवतारवाद के समान ईसाई धर्म में भी ईश्वर मुख्य न रहकर गौण हो गयां इसके विपरीत इस्लाम के एकेश्वरवाद में न किसी प्रकार का परिवर्तन हुआ और न विकार उत्पन्न हुआ। इसकी नींव इतनी सुदृढ़ है कि इसमें मिश्रण का प्रवेश असंभव है। इसका कारण इस्लाम का यह आधारभूत कलिमा है- ‘‘मैं स्वीकार करता हूँ कि ईश्वर के अतिरिक्त कोई पूज्य और उपास्य नहीं और मुहम्मद ईश्वर के दास और उसके दूत हैं। मुहम्मद साहब को ईश्वर ने कुरआन में अधिकतर ‘अब्द’ कहा है जिसका अर्थ आज्ञाकारी दास है, अतएव ईश्वर का दास न ईश्वर का अवतार हो सकता है और न उपास्य हो सकता है।(2) इस्लाम ने मदिरा को हर प्रकार के पापों की जननी कहा है। अतः इस्लाम में केवल नैतिकता के आधार पर मदिरापान निषेघ नहीं है अपितु घोर दंडनीय अपराध भी है। अर्थात कोड़े की सज़ा। इस्लाम में सिदधंततः ताड़ी, भंग आदि सभी मादक वस्तुएँ निषिद्ध है। जबकि हिन्दू धर्म में इसकी मनाही भी है और नहीं भी है। विष्णु के उपासक मदिरा को वर्जित मानते हैं और काली के उपासक धार्मिक, शिव जैसे देवता को भंग-धतुरा का सेवनकर्ता बताया जाता है तथा शैव भी भंग, गाँजा आद का सेवन करते हैं।(3) ज़कात अर्थात अनिवार्य दान। यह श्रेय केवल इस्लाम को प्राप्त है कि उसके पाँच आधारभूत कृत्यों-नमाज़ (उपासना) , रोज़ा (ब्रत) हज (काबा की तीर्थ की यात्रा), में एक मुख्य कृत्य ज़कात भी है। इस दान को प्राप्त करने के पात्रों में निर्धन भी हैं और ऐसे कर्जदार भी हैं ‘जो कर्ज़ अदा करने में असमर्थ हों या इतना धन न रखते हों कि कोई कारोबार कर सकें। नियमित रूप से धनवानों के धन में इस्लाम ने मूलतः धनहीनों का अधिकार है उनके लिए यह आवश्यक नहीं है कि वे ज़कात लेने के वास्ते भिक्षुक बनकर धनवानों के पास जाएँ। यह शासन का कर्तव्य है कि वह धनवानों से ज़कात वसूल करे और उसके अधिकारियों को दे। धनहीनों का ऐसा आदर किसी धर्म में नहीं है।(4) इस्लाम में हर प्रकार का जुआ निषिद्ध है जबकि हिन्दू धर्म में दीपावली में जुआ खेलना धार्मिक कार्य है। ईसाई। धर्म में भी जुआ पर कोई प्रतिबन्ध नहीं है।(5) सूद (ब्याज) एक ऐसा व्यवहार है जो धनवानों को और धनवान तथा धनहीनों को और धनहीन बना देता है। समाज को इस पतन से सुरक्षित रखने के लिए किसी धर्म ने सूद पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगाई है। इस्लाम ही ऐसा धर्म है जिसने सूद को अति वर्जित ठहराया है। सूद को निषिद्ध घोषित करते हुए क़ुरआन में बाकी सूद को छोड देने की आज्ञा दी गई है और न छोडने पर ईश्वर और उसके संदेष्टा से युद्ध् की धमकी दी गई है। (कुरआन 2 : 279) (6) इस्लाम ही को यह श्रेय भी प्राप्त है कि उसने धार्मिक रूप से रिश्वत (घूस) को निषिद्ध् ठहराया है (कुरआन 2:188) हज़रत मुहम्मद साहब ने रिश्वत देनेवाले और लेनेवाले दोनों पर खुदा की लानत भेजी है।(7) इस्लाम ही ने सबसे प्रथम स्त्रियों को सम्पति का अधिकार प्रदान किया, उसने मृतक की सम्पति में भी स्त्रियों को भाग दिया। हिन्दू धर्म में विधवा स्त्री के पुनर्विवाह का नियम नहीं है, इतना ही नहीं मृत पति के शव के साथ विधवा का जीवित जलाने की प्रथा थी। जो नहीं जलाई जाती थी वह न अच्छा भोजन कर सकती थी, न अच्छा वस्त्र पहन सकती थी और न शुभ कार्यों में भाग ले सकती थी। वह सर्वथा तिरस्कृत हो जाती थी, उसका जीवन भारस्वरूप हो जाता था। इस्लाम में विधवा के लिए कोई कठोर नियम नहीं है। पति की मृत्यू के चार महीने दस दिन बाद वह अपना विवाह कर सकती है।(8) इस्लाम ही ने अनिर्वा परिस्थिति में स्त्रियों को पति त्याग का अधिकार प्रदान किया है, हिन्दू धर्म में स्त्री को यह अधिकार नहीं है। हमारे देश में संविधान द्वारा अब स्त्रियों को अनेक अधिकार मिले हैं।

  16. >(9) यह इस्लाम ही है जिसने किसी स्त्री के सतीत्व पर लांछना लगाने वाले के लिए चार साक्ष्य उपस्थित करना अनिवार्य ठहराया है और यदि वह चार उपस्थित न कर सके तो उसके लिए अस्सी कोडों की सज़ा नियत की है। इस संदर्भ में श्री रामचन्द्र और हज़रत मुहम्मद साहब का आचरण विचारणीय है। मुहम्मद साहब की पत्नी सुश्री आइशा के सतीत्व पर लांछना लगाई गई थी जो मिथ्या सिद्ध हुई, श्रीमति आइशा निर्दोष सिद्ध हुई। परन्तु रामचन्द्र जी ने केवल संशय के कारण श्रीमती सीता देवी का परित्याग कर दिया जबकि वे अग्नि परीक्षा द्वारा अपना सतीत्व सिद्ध कर चुकी थीं। यदि पुरूष रामचंद्र जी के इस आचार का अनुसरण करने लगें तो कितनी निर्दाष सिद्ध् की जीवन नष्ट हो जाए। स्त्रियों को इस्लाम का कृतज्ञ होना चाहिए कि उसने निर्दोष स्त्रियों पर दोषारोपण को वैधानिक अपराध ठहराया।(10) इस्लाम ही है जिसे कम नापने और कम तौलने को वैधानिक अपराध के साथ धार्मिक पाप भी ठहराया और बताया कि परलोक में भी इसकी पूछ होगी।(11) इस्लाम ने अनाथों के सम्पत्तिहरण को धार्मिक पाप ठहराया है। (कुरआनः 4:10, 4:127) (12) इस्लाम कहता है कि यदि तुम ईश्वर से प्रेम करते हो तो उसकी सृष्टि से प्रेम करो।(13) इस्लाम कहता है कि ईश्वर उससे प्रेम करता है जो उसके बन्दों के साथ अधिक से अधिक भलाई करता है।(14) इस्लाम कहता है कि जो प्राणियों पर दया करता है, ईश्वर उसपर दया करता है।(15) दया ईमान की निशानी है। जिसमें दया नहीं उसमें ईमान नहीं।(16) किसी का ईमान पूर्ण नहीं हो सकता जब तक कि वह अपने साथी को अपने समान न समझे।(17) इस्लाम के अनुसार इस्लामी राज्य कुफ्र (अधर्म) को सहन कर सकता है, परन्तु अत्याचार और अन्याय को सहन नहीं कर सकता।(18) इस्लाम कहता है कि जिसका पडोसी उसकी बुराई से सुरक्षित न हो वह ईमान नहीं लाया।(19) जो व्यक्ति किसी व्यक्ति की एक बालिश्त भूमि भी अनधिकार रूप से लेगा वह क़ियामत के दिन सात तह तक पृथ्वी में धॅसा दिया जाएगा।(20) इस्लाम में जो समता और बंधुत्व है वह संसार के किसी धर्म में नहीं है। हिन्दू धर्म में हरिजन घृणित और अपमानित माने जाते हैं। इस भावना के विरूद्ध 2500 वर्ष पूर्व महात्मा बुदद्ध ने आवाज़ उठाई और तब से अब तक अनेक सुधारकों ने इस भावना को बदलने का प्रयास किया। आधुनिक काल में महात्मा गाँधी ने अथक प्रयास किया किन्तु वे भी हिन्दुओं की इस भावना को बदलने में सफल नहीं हो सके। इसी प्रकार ईसाइयों भी गोरे-काले का भेद है। गोरों का गिरजाघर अलग और कालों का गिरजाघर अलग होता है। गोरों के गिरजाघर में काले उपासना के लिए प्रवेश नहीं कर सकते। दक्षिणी अफ्रीका में इस युग में भी गोर ईसाई का नारा व्याप्त है और राष्टसंघ का नियंत्रण है। इस भेद-भाव को इस्लाम ने ऐसा जड से मिटाया कि इसी दक्षिणी अफ्रीका में ही एक जुलू के मुसलमान होते ही उसे मुस्लिम समाज में समानता प्राप्त हो जाती है, जबकि ईसाई होने पर ईसाई समाज में उसको यह पद प्राप्त नहीं होता। गाँधी जी ने इस्लाम की इस प्रेरक शक्ति के प्रति हार्दिद उदगार व्यक्त किया है।।''हम आभारी हैं मधुर संदेश संगम के जिन्होंने इस लेख को ‘इस्लाम की विशेषताऐं’ नामक पुस्तिका में छापा।

  17. >@अनुवाद सिंह आप मुहम्‍मद सल्‍ल. को जहाँ ऐसे अपशब्‍द में लिखोगे तो लाल जी का लेख उसके लिये मुझे प्रस्‍तुत करना पडता है, जो इस्लाम और मुहम्‍मद पर भरपूर प्रकाश डालता है, राजेन्द्र नारायण लाल अपनी पुस्तक ‘इस्लाम एक स्वयं सिद्ध ईश्वरीय जीवन व्यवस्था‘ में लेख ‘इस्लाम की विशेषताऐं’ में लिखते हैं- (1) इस्लाम की सबसे प्रधान विशेषता उसका विशुद्ध एकेश्वरवाद है। हिन्दू धर्म के ईश्वर-कृत वेदों का एकेश्वरवाद कालान्तर से बहुदेववाद में खोया तो नहीं तथापि बहुदेववाद और अवतारवाद के बाद ईश्वर को मुख्य से गौण बना दिया गया है। इसी प्रकार ईसाइयों की त्रिमूर्ति अर्थात ईश्वर, पुत्र और आत्मा की कल्पना ने हिन्दुओं के अवतारवाद के समान ईसाई धर्म में भी ईश्वर मुख्य न रहकर गौण हो गयां इसके विपरीत इस्लाम के एकेश्वरवाद में न किसी प्रकार का परिवर्तन हुआ और न विकार उत्पन्न हुआ। इसकी नींव इतनी सुदृढ़ है कि इसमें मिश्रण का प्रवेश असंभव है। इसका कारण इस्लाम का यह आधारभूत कलिमा है- ‘‘मैं स्वीकार करता हूँ कि ईश्वर के अतिरिक्त कोई पूज्य और उपास्य नहीं और मुहम्मद ईश्वर के दास और उसके दूत हैं। मुहम्मद साहब को ईश्वर ने कुरआन में अधिकतर ‘अब्द’ कहा है जिसका अर्थ आज्ञाकारी दास है, अतएव ईश्वर का दास न ईश्वर का अवतार हो सकता है और न उपास्य हो सकता है।(2) इस्लाम ने मदिरा को हर प्रकार के पापों की जननी कहा है। अतः इस्लाम में केवल नैतिकता के आधार पर मदिरापान निषेघ नहीं है अपितु घोर दंडनीय अपराध भी है। अर्थात कोड़े की सज़ा। इस्लाम में सिदधंततः ताड़ी, भंग आदि सभी मादक वस्तुएँ निषिद्ध है। जबकि हिन्दू धर्म में इसकी मनाही भी है और नहीं भी है। विष्णु के उपासक मदिरा को वर्जित मानते हैं और काली के उपासक धार्मिक, शिव जैसे देवता को भंग-धतुरा का सेवनकर्ता बताया जाता है तथा शैव भी भंग, गाँजा आद का सेवन करते हैं।(3) ज़कात अर्थात अनिवार्य दान। यह श्रेय केवल इस्लाम को प्राप्त है कि उसके पाँच आधारभूत कृत्यों-नमाज़ (उपासना) , रोज़ा (ब्रत) हज (काबा की तीर्थ की यात्रा), में एक मुख्य कृत्य ज़कात भी है। इस दान को प्राप्त करने के पात्रों में निर्धन भी हैं और ऐसे कर्जदार भी हैं ‘जो कर्ज़ अदा करने में असमर्थ हों या इतना धन न रखते हों कि कोई कारोबार कर सकें। नियमित रूप से धनवानों के धन में इस्लाम ने मूलतः धनहीनों का अधिकार है उनके लिए यह आवश्यक नहीं है कि वे ज़कात लेने के वास्ते भिक्षुक बनकर धनवानों के पास जाएँ। यह शासन का कर्तव्य है कि वह धनवानों से ज़कात वसूल करे और उसके अधिकारियों को दे। धनहीनों का ऐसा आदर किसी धर्म में नहीं है।(4) इस्लाम में हर प्रकार का जुआ निषिद्ध है जबकि हिन्दू धर्म में दीपावली में जुआ खेलना धार्मिक कार्य है। ईसाई। धर्म में भी जुआ पर कोई प्रतिबन्ध नहीं है।(5) सूद (ब्याज) एक ऐसा व्यवहार है जो धनवानों को और धनवान तथा धनहीनों को और धनहीन बना देता है। समाज को इस पतन से सुरक्षित रखने के लिए किसी धर्म ने सूद पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगाई है। इस्लाम ही ऐसा धर्म है जिसने सूद को अति वर्जित ठहराया है। सूद को निषिद्ध घोषित करते हुए क़ुरआन में बाकी सूद को छोड देने की आज्ञा दी गई है और न छोडने पर ईश्वर और उसके संदेष्टा से युद्ध् की धमकी दी गई है। (कुरआन 2 : 279) (6) इस्लाम ही को यह श्रेय भी प्राप्त है कि उसने धार्मिक रूप से रिश्वत (घूस) को निषिद्ध् ठहराया है (कुरआन 2:188) हज़रत मुहम्मद साहब ने रिश्वत देनेवाले और लेनेवाले दोनों पर खुदा की लानत भेजी है।(7) इस्लाम ही ने सबसे प्रथम स्त्रियों को सम्पति का अधिकार प्रदान किया, उसने मृतक की सम्पति में भी स्त्रियों को भाग दिया। हिन्दू धर्म में विधवा स्त्री के पुनर्विवाह का नियम नहीं है, इतना ही नहीं मृत पति के शव के साथ विधवा का जीवित जलाने की प्रथा थी। जो नहीं जलाई जाती थी वह न अच्छा भोजन कर सकती थी, न अच्छा वस्त्र पहन सकती थी और न शुभ कार्यों में भाग ले सकती थी। वह सर्वथा तिरस्कृत हो जाती थी, उसका जीवन भारस्वरूप हो जाता था। इस्लाम में विधवा के लिए कोई कठोर नियम नहीं है। पति की मृत्यू के चार महीने दस दिन बाद वह अपना विवाह कर सकती है।(8) इस्लाम ही ने अनिर्वा परिस्थिति में स्त्रियों को पति त्याग का अधिकार प्रदान किया है, हिन्दू धर्म में स्त्री को यह अधिकार नहीं है। हमारे देश में संविधान द्वारा अब स्त्रियों को अनेक अधिकार मिले हैं।

  18. >(9) यह इस्लाम ही है जिसने किसी स्त्री के सतीत्व पर लांछना लगाने वाले के लिए चार साक्ष्य उपस्थित करना अनिवार्य ठहराया है और यदि वह चार उपस्थित न कर सके तो उसके लिए अस्सी कोडों की सज़ा नियत की है। इस संदर्भ में श्री रामचन्द्र और हज़रत मुहम्मद साहब का आचरण विचारणीय है। मुहम्मद साहब की पत्नी सुश्री आइशा के सतीत्व पर लांछना लगाई गई थी जो मिथ्या सिद्ध हुई, श्रीमति आइशा निर्दोष सिद्ध हुई। परन्तु रामचन्द्र जी ने केवल संशय के कारण श्रीमती सीता देवी का परित्याग कर दिया जबकि वे अग्नि परीक्षा द्वारा अपना सतीत्व सिद्ध कर चुकी थीं। यदि पुरूष रामचंद्र जी के इस आचार का अनुसरण करने लगें तो कितनी निर्दाष सिद्ध् की जीवन नष्ट हो जाए। स्त्रियों को इस्लाम का कृतज्ञ होना चाहिए कि उसने निर्दोष स्त्रियों पर दोषारोपण को वैधानिक अपराध ठहराया।(10) इस्लाम ही है जिसे कम नापने और कम तौलने को वैधानिक अपराध के साथ धार्मिक पाप भी ठहराया और बताया कि परलोक में भी इसकी पूछ होगी।(11) इस्लाम ने अनाथों के सम्पत्तिहरण को धार्मिक पाप ठहराया है। (कुरआनः 4:10, 4:127) (12) इस्लाम कहता है कि यदि तुम ईश्वर से प्रेम करते हो तो उसकी सृष्टि से प्रेम करो।(13) इस्लाम कहता है कि ईश्वर उससे प्रेम करता है जो उसके बन्दों के साथ अधिक से अधिक भलाई करता है।(14) इस्लाम कहता है कि जो प्राणियों पर दया करता है, ईश्वर उसपर दया करता है।(15) दया ईमान की निशानी है। जिसमें दया नहीं उसमें ईमान नहीं।(16) किसी का ईमान पूर्ण नहीं हो सकता जब तक कि वह अपने साथी को अपने समान न समझे।(17) इस्लाम के अनुसार इस्लामी राज्य कुफ्र (अधर्म) को सहन कर सकता है, परन्तु अत्याचार और अन्याय को सहन नहीं कर सकता।(18) इस्लाम कहता है कि जिसका पडोसी उसकी बुराई से सुरक्षित न हो वह ईमान नहीं लाया।(19) जो व्यक्ति किसी व्यक्ति की एक बालिश्त भूमि भी अनधिकार रूप से लेगा वह क़ियामत के दिन सात तह तक पृथ्वी में धॅसा दिया जाएगा।(20) इस्लाम में जो समता और बंधुत्व है वह संसार के किसी धर्म में नहीं है। हिन्दू धर्म में हरिजन घृणित और अपमानित माने जाते हैं। इस भावना के विरूद्ध 2500 वर्ष पूर्व महात्मा बुदद्ध ने आवाज़ उठाई और तब से अब तक अनेक सुधारकों ने इस भावना को बदलने का प्रयास किया। आधुनिक काल में महात्मा गाँधी ने अथक प्रयास किया किन्तु वे भी हिन्दुओं की इस भावना को बदलने में सफल नहीं हो सके। इसी प्रकार ईसाइयों भी गोरे-काले का भेद है। गोरों का गिरजाघर अलग और कालों का गिरजाघर अलग होता है। गोरों के गिरजाघर में काले उपासना के लिए प्रवेश नहीं कर सकते। दक्षिणी अफ्रीका में इस युग में भी गोर ईसाई का नारा व्याप्त है और राष्टसंघ का नियंत्रण है। इस भेद-भाव को इस्लाम ने ऐसा जड से मिटाया कि इसी दक्षिणी अफ्रीका में ही एक जुलू के मुसलमान होते ही उसे मुस्लिम समाज में समानता प्राप्त हो जाती है, जबकि ईसाई होने पर ईसाई समाज में उसको यह पद प्राप्त नहीं होता। गाँधी जी ने इस्लाम की इस प्रेरक शक्ति के प्रति हार्दिद उदगार व्यक्त किया है।।''हम आभारी हैं मधुर संदेश संगम के जिन्होंने इस लेख को ‘इस्लाम की विशेषताऐं’ नामक पुस्तिका में छापा।

  19. >@suresh Chiplunkar जहाँ प्रथम होगा वहाँ अंतिम भी तो होगा, आप कहते हो अंतिम कुछ भी नहीं, एक तो शब्‍द ही है अन्तिम, दूसरे क्‍या आपके नाम में अन्तिम शब्द र नहीं है, किया अन्तिम मुगल बादशाह को नहीं जानते या केवल औरंगजेब तक ही जानते हो, अन्तिम अंग्रेज शासक नहीं जानते, अपने अपनी गुजरे हुये मित्र के साथ अंतिम दिन याद नहीं, कल अंतिम कमेंटस किसे दिया था वह याद नहीं, हमें कुछ भी समय नहीं लगेगा आप समझाओ तो यह फलफसफा कि अन्तिम इस दुनिया में कुछ नहीं होता, अगर दुनिया अन्तिम कुछ नहीं है तो वह है आपकी विचारधारा इसके अतिरिक्‍त बताओ,

  20. >@suresh Chiplunkar जहाँ प्रथम होगा वहाँ अंतिम भी तो होगा, आप कहते हो अंतिम कुछ भी नहीं, एक तो शब्‍द ही है अन्तिम, दूसरे क्‍या आपके नाम में अन्तिम शब्द र नहीं है, किया अन्तिम मुगल बादशाह को नहीं जानते या केवल औरंगजेब तक ही जानते हो, अन्तिम अंग्रेज शासक नहीं जानते, अपने अपनी गुजरे हुये मित्र के साथ अंतिम दिन याद नहीं, कल अंतिम कमेंटस किसे दिया था वह याद नहीं, हमें कुछ भी समय नहीं लगेगा आप समझाओ तो यह फलफसफा कि अन्तिम इस दुनिया में कुछ नहीं होता, अगर दुनिया अन्तिम कुछ नहीं है तो वह है आपकी विचारधारा इसके अतिरिक्‍त बताओ,

  21. >खान साहब अब रोजे के कारण मुझे भूख लगने लगी है, यह कुप्रचारी तो मुर्गा लिये बैठे होंगे, आप संभाल लेना और वह राकेश सिंह भी यहाँ पधारेंगे उनसे कहना आपका बहाई धर्म पर जवाब मिल गया जिससे हमें पता चल गया कि आपको उनकी कोई चिंता नहीं आखिर दिल्‍ली को इतना खूबसूरत लोटस मन्दिर दिया है उन्‍होंने अगर वह एक दो लाख हिन्‍दुओं को बहाई बनालें तो किया बिगड जायेगा, दूसरी बात उनसे यह पूछकर रखना कि 'अंतिम अवतार' पर किताब लिखने वाले श्रीवास्‍तव जी मुसलमान होगये हैं यह बात उन्‍होंने एक कमेंट में बताई थी परन्‍तु उनका नया शुभ नाम नहीं बताया था, वह अज्ञातवास में हैं इस लिये मुझे भी नहीं पता चल रहा है, कृपया जल्‍द नाम भी बतादें हम सभी अहसानमन्‍द होंगे

  22. >खान साहब अब रोजे के कारण मुझे भूख लगने लगी है, यह कुप्रचारी तो मुर्गा लिये बैठे होंगे, आप संभाल लेना और वह राकेश सिंह भी यहाँ पधारेंगे उनसे कहना आपका बहाई धर्म पर जवाब मिल गया जिससे हमें पता चल गया कि आपको उनकी कोई चिंता नहीं आखिर दिल्‍ली को इतना खूबसूरत लोटस मन्दिर दिया है उन्‍होंने अगर वह एक दो लाख हिन्‍दुओं को बहाई बनालें तो किया बिगड जायेगा, दूसरी बात उनसे यह पूछकर रखना कि 'अंतिम अवतार' पर किताब लिखने वाले श्रीवास्‍तव जी मुसलमान होगये हैं यह बात उन्‍होंने एक कमेंट में बताई थी परन्‍तु उनका नया शुभ नाम नहीं बताया था, वह अज्ञातवास में हैं इस लिये मुझे भी नहीं पता चल रहा है, कृपया जल्‍द नाम भी बतादें हम सभी अहसानमन्‍द होंगे

  23. >जाते जाते बतादूं एक लेख आपके लिये anilpusadkar ब्लाग पर लिखा गया है, वह कमेंटस पब्लिश नहीं कर रहे, आप भी देख लो यह है,''चाचा ने चुटकुला सुनाया भतीजे, भांजे वाह-वाह किये जा रहे हैं, खान को तो आने दो, हम इस पूरे महीने भूख से परिचित होते हैं, इसलिये देर सवेर हो जाती है, मैं भेजता हूँ उसको, उससे सवाल है वही जवाब देगा, अपन से होता तो अब तक ब्लागवाणी ने टाप से गायब भी कर दिया होता, तब तक निम्‍नलिखित ब्लागों पर विचार करो, signature:मुहम्मद सल्ल. कल्कि व अंतिम अवतार और बैद्ध् मैत्रे, अंतिम ऋषि (इसाई) यहूदीयों के भी आखरी संदेष्‍टा? या यह big Game against Islam है? antimawtar.blogspot.com (Rank-1 Blog) छ अल्लाह के चैलेंज सहित अनेक इस्‍लामिक पुस्‍तकेंislaminhindi.blogspot.com (Rank-2 Blog)

  24. >जाते जाते बतादूं एक लेख आपके लिये anilpusadkar ब्लाग पर लिखा गया है, वह कमेंटस पब्लिश नहीं कर रहे, आप भी देख लो यह है,''चाचा ने चुटकुला सुनाया भतीजे, भांजे वाह-वाह किये जा रहे हैं, खान को तो आने दो, हम इस पूरे महीने भूख से परिचित होते हैं, इसलिये देर सवेर हो जाती है, मैं भेजता हूँ उसको, उससे सवाल है वही जवाब देगा, अपन से होता तो अब तक ब्लागवाणी ने टाप से गायब भी कर दिया होता, तब तक निम्‍नलिखित ब्लागों पर विचार करो, signature:मुहम्मद सल्ल. कल्कि व अंतिम अवतार और बैद्ध् मैत्रे, अंतिम ऋषि (इसाई) यहूदीयों के भी आखरी संदेष्‍टा? या यह big Game against Islam है? antimawtar.blogspot.com (Rank-1 Blog) छ अल्लाह के चैलेंज सहित अनेक इस्‍लामिक पुस्‍तकेंislaminhindi.blogspot.com (Rank-2 Blog)

  25. >कैरन्वी भिया,क्या 'अल्लाह की किताब' को पढ़ते-पढ़ते थक गये और उसमें किसी विद्वत-गोष्ठी में उद्धृत करने लायक पाँच आयतें भी नहीं मिलीं? कब से मांग कर रहा हूँ कि काम की चीज लिखो।

  26. >कैरन्वी भिया,क्या 'अल्लाह की किताब' को पढ़ते-पढ़ते थक गये और उसमें किसी विद्वत-गोष्ठी में उद्धृत करने लायक पाँच आयतें भी नहीं मिलीं? कब से मांग कर रहा हूँ कि काम की चीज लिखो।

  27. >तुम्हें सब मिलेगा, सवाल का जवाब. लेकिन क्या है कि अनुनाद अगर तुम्हारे बजाये बड़के भैया अरे सॉरी सुरेश बाबू ने कहा होता तो… वजह तुम्हारा न गाँव का पता, न कोई ठिकाना, न ही प्रोफाइल में कोई फोटो….. कुछ ऐसा ही हुआ जैसे पश्चिमी लोग कहते है कि आतंकवाद का कोई चेहरा नहीं.. . न उसे देखा जा सकता है न दिखया जा सकता है…वैसे ही तो पहले अपना लो प्रोफाइल को अपग्रेड करो फिर पूछना… मैंने देखा है कि कई कथित राष्ट्रवादी लोग ने बहुत सारी फेक आई डी बना रखी है…

  28. >तुम्हें सब मिलेगा, सवाल का जवाब. लेकिन क्या है कि अनुनाद अगर तुम्हारे बजाये बड़के भैया अरे सॉरी सुरेश बाबू ने कहा होता तो… वजह तुम्हारा न गाँव का पता, न कोई ठिकाना, न ही प्रोफाइल में कोई फोटो….. कुछ ऐसा ही हुआ जैसे पश्चिमी लोग कहते है कि आतंकवाद का कोई चेहरा नहीं.. . न उसे देखा जा सकता है न दिखया जा सकता है…वैसे ही तो पहले अपना लो प्रोफाइल को अपग्रेड करो फिर पूछना… मैंने देखा है कि कई कथित राष्ट्रवादी लोग ने बहुत सारी फेक आई डी बना रखी है…

  29. >छोड़ो भी यार, तुम्हें बहाना भी बनाना नहीं आता ! तुम्ही तो कह रहे थे कि मुहम्मद कह गये हैं कि फोटो-वोटो मत देखना; अपना 'काम' करते रहना।

  30. >छोड़ो भी यार, तुम्हें बहाना भी बनाना नहीं आता ! तुम्ही तो कह रहे थे कि मुहम्मद कह गये हैं कि फोटो-वोटो मत देखना; अपना 'काम' करते रहना।

  31. >भाई कैरानवी जी,1) "अन्तिम" से मेरा मतलब यह था कि हमेशा दुनिया में कुछ न कुछ नया होता रहा है, होता रहेगा। जो आज है, कल नहीं रहेगा इसलिये किसी चीज को "अन्तिम" मान लेना ठीक नहीं है, कई अवतार आये और चले गये, नये अवतार भी आयेंगे,,, अन्तिम कोई नहीं है… 2) आपने इतने भारी-भरकम इस्लामी फ़लसफ़ों की झड़ी लगा दी, भाई ऐसे फ़लसफ़े तो हर धर्म में होते हैं, सवाल है कि इसे मानते कितने लोग हैं? मैं भी जानता हूं और आप भी जानते हैं कि हिन्दू-मुस्लिम सभी धर्मों में इन 20 उसूलों को मानने वाले 5% भी नहीं होंगे… होते तो दुनिया की ये हालत न होती। (इसी बहाने लगे हाथों आपने दूसरे धर्मों की आलोचना भी कर ली)

  32. >भाई कैरानवी जी,1) "अन्तिम" से मेरा मतलब यह था कि हमेशा दुनिया में कुछ न कुछ नया होता रहा है, होता रहेगा। जो आज है, कल नहीं रहेगा इसलिये किसी चीज को "अन्तिम" मान लेना ठीक नहीं है, कई अवतार आये और चले गये, नये अवतार भी आयेंगे,,, अन्तिम कोई नहीं है… 2) आपने इतने भारी-भरकम इस्लामी फ़लसफ़ों की झड़ी लगा दी, भाई ऐसे फ़लसफ़े तो हर धर्म में होते हैं, सवाल है कि इसे मानते कितने लोग हैं? मैं भी जानता हूं और आप भी जानते हैं कि हिन्दू-मुस्लिम सभी धर्मों में इन 20 उसूलों को मानने वाले 5% भी नहीं होंगे… होते तो दुनिया की ये हालत न होती। (इसी बहाने लगे हाथों आपने दूसरे धर्मों की आलोचना भी कर ली)

  33. >अन्तिम टिप्पणी में मैं केवल यह कहूंगा कि हमारे प्रत्येक गैरमुस्लिम भाई अन्तिम अवतार से सम्बन्धित भविष्यवाणियों को डा0 वेद प्रकाश उपाध्याय की पुस्तक की सहायता से पढ़ लें। स्वयं पता चल जाएगा कि हम जिन अन्तिम अवतार की प्रतीक्षा कर रहे हैं वह अनेक नहीं बल्कि एक है और वही मुहम्मद सल्ल0 हैं। आप सब लोग बुद्धि विवेक के मालिक हैं … ज़िद न करें… अध्ययन का कष्ट करें..

  34. safat alam says:

    >अन्तिम टिप्पणी में मैं केवल यह कहूंगा कि हमारे प्रत्येक गैरमुस्लिम भाई अन्तिम अवतार से सम्बन्धित भविष्यवाणियों को डा0 वेद प्रकाश उपाध्याय की पुस्तक की सहायता से पढ़ लें। स्वयं पता चल जाएगा कि हम जिन अन्तिम अवतार की प्रतीक्षा कर रहे हैं वह अनेक नहीं बल्कि एक है और वही मुहम्मद सल्ल0 हैं। आप सब लोग बुद्धि विवेक के मालिक हैं … ज़िद न करें… अध्ययन का कष्ट करें..

  35. >सलीम साहब, जरा एक नजर इस समाचार "कभी कव्वाल था, अब भजन गाते हैं रोजन अली" नामक समाचार पर भी डाल लें. लिंक नीचे दिया जा रहा है- http://khabar.ndtv.com/2009/09/02161338/Rojan-Ali.html

  36. >सलीम साहब, जरा एक नजर इस समाचार "कभी कव्वाल था, अब भजन गाते हैं रोजन अली" नामक समाचार पर भी डाल लें. लिंक नीचे दिया जा रहा है- http://khabar.ndtv.com/2009/09/02161338/Rojan-Ali.html

  37. mythbuster says:

    >***कुरान में साफ़ तौर पर लिखा है १- ईश्वर एक है। २-उसको किसी की आवश्यकता नहीं पड़ती। ३- उसके पास माता पिता नहीं। ४- न उसके पास सन्तान है। ५- उसकी पूजा में उसका कोई भागीदार नहीं।(क़ुरआन : सूरः अल-इख़लास)अगर आप किसी भी चीज़, व्यक्ति आदि से ईश्वर के जैसा होने की कल्पना करते हैं वह चीज़ य व्यक्ति ईश्वर नहीं हो सकती ना ही उसकी छवि अपने मस्तिष्क में बना सकते हैं | वेदों में लिखा है – "ना तस्य प्रतिमा अस्ति" उसकी कोई मूर्ति नहीं हो सकती | इधर हम जानते है कि रजनीश एक इन्सान थे, उनका एक सिर था, दो हाँथ, दो पैर और बड़ी सी दाढ़ी भी | कल्पना कीजिये कि कोई कहे, "ईश्वर हज़ार गुना शक्तिशाली है अर्नाल्ड श्वार्ज़नेग्गेर के मुकाबले”| अर्नाल्ड श्वार्ज़नेग्गेर जैसा कि आप जानते है दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यक्तियों में से एक है| वह मिस्टर यूनिवर्स के खिताब से नवाज़ा गया था| अगर आप किसी भी चीज़, व्यक्ति आदि से ईश्वर के जैसा होने की कल्पना करते हैं वह चीज़ य व्यक्ति ईश्वर नहीं हो सकती चाहे उसे सौ गुना हज़ार गुना ज्यादा कहके क्यूँ ना कहा जाये य चेह कोई कितना भी बलशाली क्यूँ ना हो, उसकी तुलना करके आप ईश्वर की कल्पना नहीं कर सकते, ना ही उसकी छवि अपने मस्तिष्क में बना सकते हैं | भले चाहे वह खली, दारा सिंह य किंग कोंग क्यूँ ना हो| “कहो: है ईश्वर एक और अनुपम।है ईश्वर सनातन, हमेशा से हमेशा तक जीने वाला।उस्की न कोई औलाद है न वह खुद किसी की औलाद है।और उस जैसा कोई और नहीं॥”(कुरान, सूरत ११२, आयते १ – ४) सलीम भाई,ऊपर जो भी लिखा है वह मैंने तुम्हारे ब्लॉग के पेजों से ही कापी-पेस्ट किया है।अब किस मुंह से आप कहोगे कि हजरत मोहम्मद साहब ही कल्कि अवतार हैं?

  38. mythbuster says:

    >***कुरान में साफ़ तौर पर लिखा है १- ईश्वर एक है। २-उसको किसी की आवश्यकता नहीं पड़ती। ३- उसके पास माता पिता नहीं। ४- न उसके पास सन्तान है। ५- उसकी पूजा में उसका कोई भागीदार नहीं।(क़ुरआन : सूरः अल-इख़लास)अगर आप किसी भी चीज़, व्यक्ति आदि से ईश्वर के जैसा होने की कल्पना करते हैं वह चीज़ य व्यक्ति ईश्वर नहीं हो सकती ना ही उसकी छवि अपने मस्तिष्क में बना सकते हैं | वेदों में लिखा है – "ना तस्य प्रतिमा अस्ति" उसकी कोई मूर्ति नहीं हो सकती | इधर हम जानते है कि रजनीश एक इन्सान थे, उनका एक सिर था, दो हाँथ, दो पैर और बड़ी सी दाढ़ी भी | कल्पना कीजिये कि कोई कहे, "ईश्वर हज़ार गुना शक्तिशाली है अर्नाल्ड श्वार्ज़नेग्गेर के मुकाबले”| अर्नाल्ड श्वार्ज़नेग्गेर जैसा कि आप जानते है दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यक्तियों में से एक है| वह मिस्टर यूनिवर्स के खिताब से नवाज़ा गया था| अगर आप किसी भी चीज़, व्यक्ति आदि से ईश्वर के जैसा होने की कल्पना करते हैं वह चीज़ य व्यक्ति ईश्वर नहीं हो सकती चाहे उसे सौ गुना हज़ार गुना ज्यादा कहके क्यूँ ना कहा जाये य चेह कोई कितना भी बलशाली क्यूँ ना हो, उसकी तुलना करके आप ईश्वर की कल्पना नहीं कर सकते, ना ही उसकी छवि अपने मस्तिष्क में बना सकते हैं | भले चाहे वह खली, दारा सिंह य किंग कोंग क्यूँ ना हो| “कहो: है ईश्वर एक और अनुपम।है ईश्वर सनातन, हमेशा से हमेशा तक जीने वाला।उस्की न कोई औलाद है न वह खुद किसी की औलाद है।और उस जैसा कोई और नहीं॥”(कुरान, सूरत ११२, आयते १ – ४) सलीम भाई,ऊपर जो भी लिखा है वह मैंने तुम्हारे ब्लॉग के पेजों से ही कापी-पेस्ट किया है।अब किस मुंह से आप कहोगे कि हजरत मोहम्मद साहब ही कल्कि अवतार हैं?

  39. Anonymous says:

    >dost Iswere ko Na to murtiyo ki pooja karke praapat kiya ja sakata hai balki Jin murtiyo ki hum pooja karta hai wa sabhi iswere ka sakar roop hai pur iswere ko manav apane hi bheeter dehkar praapat kar sakata hai Iswer Manav ka hi bhetter aatama ka Roop mai virajmaan hai. kabeer na bhi kha hai ki Iswere manav ka bheeter hi hai. aur manav jeevan ka main aim mokse ki prapti karna hai jo murji ko puja karne se nahi praapat ho sakta hai. murti ki pooja karka kawal hum apani needs ko Iswere tak bhaj sakta hai. aur wo needs Iswere thawara puri bhi ki jaati hai.

  40. Anonymous says:

    >dost Iswere ko Na to murtiyo ki pooja karke praapat kiya ja sakata hai balki Jin murtiyo ki hum pooja karta hai wa sabhi iswere ka sakar roop hai pur iswere ko manav apane hi bheeter dehkar praapat kar sakata hai Iswer Manav ka hi bhetter aatama ka Roop mai virajmaan hai. kabeer na bhi kha hai ki Iswere manav ka bheeter hi hai. aur manav jeevan ka main aim mokse ki prapti karna hai jo murji ko puja karne se nahi praapat ho sakta hai. murti ki pooja karka kawal hum apani needs ko Iswere tak bhaj sakta hai. aur wo needs Iswere thawara puri bhi ki jaati hai.

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