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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>मोहल्ला (ब्लॉग) मेरी टी.आर.पी. के टुकड़े खा रहा है: सलीम खान (Mohalla, Avinash ban Saleem since last 3 months for growing TRP)

>

जी हाँ, सही सुना आपने! मुद्दे की बात करने से पहले मैं कुछ उसूलों और अधिकारों की बात कहना चाहता हूँ. हम सब भारत देश में रहते हैं और भारत देश का संविधान यह हमें पूरी तरह से आज़ादी देता है कि हम किसी भी धर्म को मान सकते हैं, उसे स्वीकार सकते हैं और उसका प्रचार-प्रसार भी कर सकते हैं. धर्म सम्बंधित आज़ादी हमारे मौलिक अधिकारों में से एक है.
अविनाश बाबू के ब्लॉग यानि मोहल्ला को मैंने इसी वर्ष जून के महीने में ज्वाइन किया था. और केवल मेरी दो ही पोस्ट के बाद ही उस कुंठित व्यक्ति ने मुझे बैन कर दिया. जानना चाहेंगे मेरी उन दो पोस्टों में ऐया कुछ भी नहीं था जो किसी समाज या धर्म के खिलाफ हो, बल्कि एक सुधारात्मक लेख लिखा था मैंने.
अब देखिये मोहल्ला के फ्रंट पृष्ठ पर किस तरह का नोटिस बोर्ड लगा रहा है इस अल्लाह के बन्दे ने.

यह नोटिस नया नहीं है, यह पिछले तीन महीने से यहीं पर लगा है. अब देखिये पिछले तीन महीने यानि जून, जुलाई और अगस्त में इसके ब्लॉग की पोस्टों (लेखों) में हुआ इज़ाफा. (May-11, June-95, July-132, Aug-118 )
तो इससे ये साबित हुआ कि जैसे ही इसने यानि अविनाश ने मुझे यानि सलीम खान को मोहल्ला से बाहर किया, इसका सीधा फ़ायेदा इसको मिल गया. वैसे ये फंडा कोई नया नहीं है, पूरी मीडिया ही मुसलामानों और इस्लाम को लगातार इसी तरह बदनाम कर रही है. आपने मेरे वो दो पोस्ट ज़रूर देख लिए होंगे और अब स्वयं विश्लेषित कीजिये कि आखिर उन पोस्ट में ऐसा कुछ था जो अविनाश की नफ़रत इस क़दर भड़की कि आज तीन महीने हो गए शांत नहीं हो पाई.

 
हालाँकि मोहल्ला अगर कम्युनल या धार्मिक या सांप्रदायिक लेखों के खिलाफ़ वाकए है तो यह बात भी सर्वथा झूठ ही है क्यूंकि अगर आप मोहल्ला के लेखों का गहन अध्ययन करेंगे तो कई ऐसी पोस्ट आपको मिल जायेंगी जो सांप्रदायिक ही हैं और भड़काऊ भी (जबकि मेरे लेख सुधारात्मक ही होते हैं).

नीचे चटका लगा कर आप मोहल्ला के चंद साम्प्रदायिक लेखों का अध्ययन ही कर लें.(Please see the communal post of mohalla)

अविनाश के मुखौटे को उतारने के लिए यह एक ही सवाल काफ़ी है कि आपने अपने ब्लॉग का नाम रखा है मोहल्ला और ऊपर से स्वतंत्र आमंत्रण का लिंक भी दे रखा है, और अगर कोई धार्मिक या सुधारात्मक लेख लिखता है तो उस पर आप उसे बैन कर रहे हो. यानि दोगलेपन की हद !

हाँ! ये हो सकता है कि आप मेरे लेख पर स्वस्थ बहस कर लो, मगर इतना तो बूता है नहीं और न ही इतना उसके पास वक़्त है क्यूंकि वह तो व्यस्त है मोहल्ला LIVE में, मोहल्ला लाइव में व्यस्तता के कारण मोहल्ला को प्रापर वक़्त ना सकने की वजह से उसने ये शिगूफा छोडा और चैन से अपना काम करता रहा.

हालाँकि मैंने उस …ने से यह रेकुएस्ट भी करी कि भई, मेरी आई डी बहाल कर दे, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया, क्यूँ करता उसे जो मेरे टुकड़े खाने थे; टी आर पी के…

एक जनाब ‘फसादी‘ ने तो मोहल्ला के मुखिया के इस क़दम के खिलाफ़ अपील भी कि (यहाँ चटका लगा कर देख लें) लेकिन उस ज़ालिम ने तब पर भी कोई क़दम नहीं उठाया. अगर आप गूगल पर सर्च करेंगे (सलीम मोहल्ला) तो आपको पहले पहल ही यह पोस्ट मिल जायेगी कि बन्दा कितना कुंठित है.

अगर आप गूगल में यह (क्या सलीम खान को मोहल्ले से) सर्च करेंगे तो पाएंगे कि फसादी ने क्या अपील की थी.

अगर आप गूगल में (मेरी आई डी) या (मेरी आई डी बहाल की जाये) टाईप करके सर्च करेंगे तो आपको सच्चाई का पता लग जायेगा.,…..



मैं आपको गूगल की सेवा लेने के लिए इस इस लिए कह रहा हूँ क्यूंकि उसने मेरी तमाम पोस्ट डिलीट कर रखी हैं. गूगल पे तो आपको केवल अवशेष ही मिलंगे; सुबूत बतौर.

धर्म मोहब्बत सिखाता है, नफ़रत नहीं. लेकिन अविनाश जैसे मरदूद को यह समझ नहीं आएगा.

लेख ख़त्म करने से पहले मैं अविनाश बाबू को चेतावनी देता हूँ कि उस गलीज़ ब्लॉग से वह नोटिस हटा लें और भविष्य में ऐसी नीच हरक़त बंद कर दें.

Filed under: मोहल्ला

26 Responses

  1. >इस बात का तो सारा ब्लागजगत गवाह है कि वाकई में आपके लेख सुधारात्मक ही होते हैं….:)

  2. >इस बात का तो सारा ब्लागजगत गवाह है कि वाकई में आपके लेख सुधारात्मक ही होते हैं….:)

  3. >आपकी TRP???? (मजाक कर रहे हैं क्या?)आप उस बदनाम मोहल्ले पर गये थे उसे "सेकुलर" समझकर… कि वहाँ से आप अधिक पाठक बटोर लायेंगे, और अपने कुतर्क वहाँ भी फ़ैला देंगे, हम तो आपको पहले से ही समझ गये थे, मोहल्ला को आपको जानने में दो लेख का वक्त लगा, अब आपका दाँव, आप पर ही उलटा पड़ गया है, फ़िर कैसी शिकायत? आपके आने से बहुत पहले ही हम मोहल्ला के लेखों की लानत-मलामत करते रहे हैं…

  4. >आपकी TRP???? (मजाक कर रहे हैं क्या?)आप उस बदनाम मोहल्ले पर गये थे उसे "सेकुलर" समझकर… कि वहाँ से आप अधिक पाठक बटोर लायेंगे, और अपने कुतर्क वहाँ भी फ़ैला देंगे, हम तो आपको पहले से ही समझ गये थे, मोहल्ला को आपको जानने में दो लेख का वक्त लगा, अब आपका दाँव, आप पर ही उलटा पड़ गया है, फ़िर कैसी शिकायत? आपके आने से बहुत पहले ही हम मोहल्ला के लेखों की लानत-मलामत करते रहे हैं…

  5. >सच कहा जी….वर्ना तो हमने मोहल्ले का नाम कभी सुना भी नहीं था..और आपका तो जब से पैदा हुए तभी से …..इससे ज्यादा क्या कहूं….आप क्यों चिंता कर रहे है..आपने भी तो एक मोहल्ला बसाया हुआ ही है…टिप्पणी सिर्फ़ इसलिये कि ..क्योंकि विषय धार्मिक नहीं था…

  6. >सच कहा जी….वर्ना तो हमने मोहल्ले का नाम कभी सुना भी नहीं था..और आपका तो जब से पैदा हुए तभी से …..इससे ज्यादा क्या कहूं….आप क्यों चिंता कर रहे है..आपने भी तो एक मोहल्ला बसाया हुआ ही है…टिप्पणी सिर्फ़ इसलिये कि ..क्योंकि विषय धार्मिक नहीं था…

  7. >TRP हा हा हा …. अरे भाई एक कहावत है बेईज्जती उसी की होती है जिसने समाज में इज्जत कमाई होती है।

  8. >TRP हा हा हा …. अरे भाई एक कहावत है बेईज्जती उसी की होती है जिसने समाज में इज्जत कमाई होती है।

  9. >…सलीम के विचारों से कई मामलों में असहमति बनाये रखते हुऐ भी इस बार मैं पूरी तरह सलीम खान के साथ हूँ, एक लोक तंत्र हैं हम ,सबको अपनी बात रखने की पूरी आजादी है, उतनी ही आजादी आपको है असहमत होने की या किसी के लिखे को नजरअंदाज करने की…फिर नेट तो पूरी तरह लोकतांत्रिक होना चाहिये…खतरनाक प्रवृत्ति है यह सूचना क्रांति, लोकतंत्र,हिन्दी बलोगिंग और हम सबके भविष्य के लिये…इसी ब्लॉग को देखिये टिप्पणियां कई बार अमर्यादित और लेखक(सलीम) के धर्म और आराध्य के प्रति गाली गलौज से भरी हैं…पर सलीम ने तो नहीं मिटाया उनको…उम्मीद है हम सब की सद बुद्धि जगेगी…

  10. >…सलीम के विचारों से कई मामलों में असहमति बनाये रखते हुऐ भी इस बार मैं पूरी तरह सलीम खान के साथ हूँ, एक लोक तंत्र हैं हम ,सबको अपनी बात रखने की पूरी आजादी है, उतनी ही आजादी आपको है असहमत होने की या किसी के लिखे को नजरअंदाज करने की…फिर नेट तो पूरी तरह लोकतांत्रिक होना चाहिये…खतरनाक प्रवृत्ति है यह सूचना क्रांति, लोकतंत्र,हिन्दी बलोगिंग और हम सबके भविष्य के लिये…इसी ब्लॉग को देखिये टिप्पणियां कई बार अमर्यादित और लेखक(सलीम) के धर्म और आराध्य के प्रति गाली गलौज से भरी हैं…पर सलीम ने तो नहीं मिटाया उनको…उम्मीद है हम सब की सद बुद्धि जगेगी…

  11. flare says:

    >लोकतंत्र ……… ?? ओह वही जो साउदी में है ? या इरान में ? या ईजिप्ट में ? या पाकिस्तान में ……….. ??ओह …….. ये भाई साहब तो सेकुलर है ?? ……… सही है ?? ……. अच्छा ये जयचंद के रिश्तेदार है ? सलीम भाई ……. अरे ये तो धर्म प्रचारक है किसी आईडिया, साइंस या आर्ट से इनका लेना देना नहीं है ………… इनको बस यही साबित करने का ठेका मिला है की इसलाम अकेला धर्म है भाकी बेकार है …………… इनके सारे लेखो का मूल यही है ………………. और आगे के लेखो का भी यही रहेगा …………. इनके खुद के विचार कुछ नहीं है ………….

  12. flare says:

    >लोकतंत्र ……… ?? ओह वही जो साउदी में है ? या इरान में ? या ईजिप्ट में ? या पाकिस्तान में ……….. ??ओह …….. ये भाई साहब तो सेकुलर है ?? ……… सही है ?? ……. अच्छा ये जयचंद के रिश्तेदार है ? सलीम भाई ……. अरे ये तो धर्म प्रचारक है किसी आईडिया, साइंस या आर्ट से इनका लेना देना नहीं है ………… इनको बस यही साबित करने का ठेका मिला है की इसलाम अकेला धर्म है भाकी बेकार है …………… इनके सारे लेखो का मूल यही है ………………. और आगे के लेखो का भी यही रहेगा …………. इनके खुद के विचार कुछ नहीं है ………….

  13. >कमाल है ! अब इस्लामी बावलों की कमाई ( TRP ) शर्मनिरपेक्षों ( मोहल्ले ) द्वारा लूटी जा रही है |

  14. >कमाल है ! अब इस्लामी बावलों की कमाई ( TRP ) शर्मनिरपेक्षों ( मोहल्ले ) द्वारा लूटी जा रही है |

  15. haal-ahwaal says:

    >MOHALLE ne sahi pehchana.mai to kehta hu ki saleem, tumhara blog yakeenan SAAMPRADAYIK hai aur isse mohalle se to kya, pure desh me bann kar diya jana chahiye.tum logo ko bewakoof banana chahte ho. jiss tarah ke article tum likhte ho, wo to majahabi bhaichara kisi surat me nahi badha sakte. tum bhed ki khaal me bhediye ho. tum-me aur seema paar aatanki taiyar karnewalo me koyee farak nahi, jo musalmano ko ulte-seedhe paath padhate hai.tumhara maksad yahi jaan padta hai ki dusre par kichad uchhalkar shohrat hasil ki jaye. tumhare jaise logo se hi tumhare aslo dharm ke ghatuyapan ka pata chal jata hai.

  16. haal-ahwaal says:

    >MOHALLE ne sahi pehchana.mai to kehta hu ki saleem, tumhara blog yakeenan SAAMPRADAYIK hai aur isse mohalle se to kya, pure desh me bann kar diya jana chahiye.tum logo ko bewakoof banana chahte ho. jiss tarah ke article tum likhte ho, wo to majahabi bhaichara kisi surat me nahi badha sakte. tum bhed ki khaal me bhediye ho. tum-me aur seema paar aatanki taiyar karnewalo me koyee farak nahi, jo musalmano ko ulte-seedhe paath padhate hai.tumhara maksad yahi jaan padta hai ki dusre par kichad uchhalkar shohrat hasil ki jaye. tumhare jaise logo se hi tumhare aslo dharm ke ghatuyapan ka pata chal jata hai.

  17. >बूता है तो बैन कर दो… हिम्मत है तो बैन कर दो… मैं इस्लाम का प्रचार प्रसार कर रहा हूँ… तो खल रहा है…वहीँ तोगडिया, संघ भाजपा या सुरेश चिपलूनकर क्या कर रहें है….???है बूता…. बैन कर दो… हिम्मत है तो बैन कर दो… मैं डंके की चोट पर इस्लाम का प्रचार और प्रसार कर रहा हूँ, क्यूंकि हमारे देश का संविधान हमें यह मौलिक अधिकार देता है कि कोई भी किसी भी धर्म को अपना सकता है, उसका प्रचार कर सकता है और प्रसार कर सकता है…अपनी मानसिकता को सुधारो…

  18. >बूता है तो बैन कर दो… हिम्मत है तो बैन कर दो… मैं इस्लाम का प्रचार प्रसार कर रहा हूँ… तो खल रहा है…वहीँ तोगडिया, संघ भाजपा या सुरेश चिपलूनकर क्या कर रहें है….???है बूता…. बैन कर दो… हिम्मत है तो बैन कर दो… मैं डंके की चोट पर इस्लाम का प्रचार और प्रसार कर रहा हूँ, क्यूंकि हमारे देश का संविधान हमें यह मौलिक अधिकार देता है कि कोई भी किसी भी धर्म को अपना सकता है, उसका प्रचार कर सकता है और प्रसार कर सकता है…अपनी मानसिकता को सुधारो…

  19. >खान साहब ये और किया कर सकते हैं, जब आपको इस मोहल्‍ले से निकाला गया था तब मैंने सोचा था कि चलूं और इस मोहल्‍ले की हर दर व दीवार को अन्तिम अवतार अर्थात उष्‍टारोही के ऊँट के कदमों से रोन्‍द दूं लेकिन मैंने तब देखा था यह इस काबिल नहीं है कि इसे ऐसी इज्‍जत बख्‍शी जाये, इस मोहले की इज्‍जत हो के ना हो भाई अपनी तो ब्लाग जगत में इज्‍जत है यह दुनिया जाने है, कोई भूले से पूछे तो मैं बताना शुरू करूंsignature:मुहम्मद सल्ल. कल्कि व अंतिम अवतार और बैद्ध् मैत्रे, अंतिम ऋषि (इसाई) यहूदीयों के भी आखरी संदेष्‍टा? या यह big Game against Islam है? antimawtar.blogspot.com (Rank-1 Blog) छ अल्लाह के चैलेंज सहित अनेक इस्‍लामिक पुस्‍तकेंislaminhindi.blogspot.com (Rank-2 Blog)

  20. >खान साहब ये और किया कर सकते हैं, जब आपको इस मोहल्‍ले से निकाला गया था तब मैंने सोचा था कि चलूं और इस मोहल्‍ले की हर दर व दीवार को अन्तिम अवतार अर्थात उष्‍टारोही के ऊँट के कदमों से रोन्‍द दूं लेकिन मैंने तब देखा था यह इस काबिल नहीं है कि इसे ऐसी इज्‍जत बख्‍शी जाये, इस मोहले की इज्‍जत हो के ना हो भाई अपनी तो ब्लाग जगत में इज्‍जत है यह दुनिया जाने है, कोई भूले से पूछे तो मैं बताना शुरू करूंsignature:मुहम्मद सल्ल. कल्कि व अंतिम अवतार और बैद्ध् मैत्रे, अंतिम ऋषि (इसाई) यहूदीयों के भी आखरी संदेष्‍टा? या यह big Game against Islam है? antimawtar.blogspot.com (Rank-1 Blog) छ अल्लाह के चैलेंज सहित अनेक इस्‍लामिक पुस्‍तकेंislaminhindi.blogspot.com (Rank-2 Blog)

  21. >वन्‍दना करो उस ईशवर की जिसने सारी सृष्टि बनाई, माता-पिता की वन्‍दना से क्‍या पाओगे? उनकी सेवा करो, आदर करो वन्‍दना केवल ईश्‍वर की, इस मोहल्‍ला या उस मोहल्‍ला में अपमान या TRP की चिंता ना करो वहाँ की चिंता करो जहाँ कोई मौहल्‍ला नही होगा केवल हमारा सत्‍य कर्म हमारे साथ जायेगा,वही हमारा बेडा पार करेगा,वन्‍दे ईश्‍वरम

  22. >वन्‍दना करो उस ईशवर की जिसने सारी सृष्टि बनाई, माता-पिता की वन्‍दना से क्‍या पाओगे? उनकी सेवा करो, आदर करो वन्‍दना केवल ईश्‍वर की, इस मोहल्‍ला या उस मोहल्‍ला में अपमान या TRP की चिंता ना करो वहाँ की चिंता करो जहाँ कोई मौहल्‍ला नही होगा केवल हमारा सत्‍य कर्म हमारे साथ जायेगा,वही हमारा बेडा पार करेगा,वन्‍दे ईश्‍वरम

  23. haal-ahwaal says:

    >@saleem,tum ISLAM ka prachar nahi kar rahe, nafarat faila rahe ho. do majhabo ke beech. tum waqt-waqt par apne asli rang me aa jaate ho. koshish to bahut karte ho imandar dikhne ki, lekin aakhir me tumhara doglapan ujagar ho hi jaata hai. sach baat kah di to boukhla gaye?? lage misal dene inki-unki??? tum apne stand par sahi hote to kabhi unn logo ka naam nahi lete. lekin tumhare mann me khot hai isliye dusro ke kiye ki aad me apne ko chhipane ki koshish kar rahe ho. ye tumhari kamjori hai ki tumhe iss tarah se (nafarat ke raste) apne islam ka prachar karna pad raha hai. tum ginate to bahut ho islam ki achchha-iyan, lekin unme se kisi par chalte to nahi dikh-te.maine dekha hai, tumhare paas kisi bhi reader ke uthaye sawalo'n ka jawab nahi hota. ISLAM ke baare me main nahi jaanta, lekin tumhara nazariya behad tang hai. aur jo tum kah rahe ho na ki ISLAM ka prachar kar rahe ho, to wo galat hai. tum islam ke bahane apne prachar kar rahe ho. apni tasweero se itna lagav??? ye kisi sachche musalman ki nishani nahi.

  24. haal-ahwaal says:

    >@saleem,tum ISLAM ka prachar nahi kar rahe, nafarat faila rahe ho. do majhabo ke beech. tum waqt-waqt par apne asli rang me aa jaate ho. koshish to bahut karte ho imandar dikhne ki, lekin aakhir me tumhara doglapan ujagar ho hi jaata hai. sach baat kah di to boukhla gaye?? lage misal dene inki-unki??? tum apne stand par sahi hote to kabhi unn logo ka naam nahi lete. lekin tumhare mann me khot hai isliye dusro ke kiye ki aad me apne ko chhipane ki koshish kar rahe ho. ye tumhari kamjori hai ki tumhe iss tarah se (nafarat ke raste) apne islam ka prachar karna pad raha hai. tum ginate to bahut ho islam ki achchha-iyan, lekin unme se kisi par chalte to nahi dikh-te.maine dekha hai, tumhare paas kisi bhi reader ke uthaye sawalo'n ka jawab nahi hota. ISLAM ke baare me main nahi jaanta, lekin tumhara nazariya behad tang hai. aur jo tum kah rahe ho na ki ISLAM ka prachar kar rahe ho, to wo galat hai. tum islam ke bahane apne prachar kar rahe ho. apni tasweero se itna lagav??? ye kisi sachche musalman ki nishani nahi.

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