स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़

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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>क्या वर्ल्ड ट्रेड सेंटर को गिराए जाने वाला जिहाद सही था!!!??? Types of Jihad

>मैं पीस टीवी देख रहा था. प्रोग्राम था… इज़हारे हक और इज़हारे हक की इस नशिस्त (एपिसोड) में जो शीर्षक था…वह था… “जिहाद और दहशतगर्दी – इस्लाम के पसमंज़र में“, जिसे लखनऊ में ही आयोजित किया गया था. उस प्रोग्राम में जब सवालात और जवाबात का सेशन शुरू हुआ तो औरतों में से एक मुसलमान ख्वातीन ने डॉ जाकिर साहब से पूछा:

डॉ साहब, मुझे ये बताईये कि ग्यारह सितम्बर दो हज़ार एक (9/11) को जो ट्विन टावर गिराया गया वो जिहाद था या नहीं और अगर था तो क्या यह सही जिहाद था? क्यूंकि मेरा बेटा भी एक आईआईटीएन है और वह वहां मौजूद था और जब हमने यह सुना तो मेरी तो रूह ही काँप गयी थी. मुझे यह बताईये डॉ साहब कि जिन्होंने ने यह सब किया सही किया या नहीं?

मैंने टीवी पर नज़रें गड़ा दीं क्यूंकि यह एक अहम् सवाल था और मेरे लिए इस सवाल का जवाब जानना बहुत ज़रूरी था. उस ख्वातीन की तरह मुझे भी यह जानना ज़रूरी था क्यूंकि मुझसे भी कई लोगों ने इसी तरह का सवाल किया था यहाँ तक कि कई ब्लॉगरों ने मेरी पोस्ट पर यह सवाल दागे या इससे मिलते जुलते. मैं डॉ जाकिर नाइक साहब ने जो जवाब दिया और विश्लेषण इस पोस्ट के ज़रिये आप तक पहुंचाना चाहता हूँ.

इस सवाल के जवाब से पहले हमें यह जानना बहुत ज़रूरी है कि जिहाद कहते किसे हैं और जिहाद किस-किस क़िस्म का होता है? हालाँकि मैंने जिहाद का शाब्दिक अर्थ और परिभाषा अपने पिछले पोस्ट में व्यक्त कर दी थी. मैं उसे यहाँ पर दोहराना चाहूँगा कि जिहाद क्या है?

जिहाद शब्द का इस्तेमाल वर्तमान काल में जिस अर्थ में लिया जा रहा है, आजकल इस्लाम के बारे में फैली गलत-फहमियों में से एक है. बल्कि यों कहें कि जिहाद के बारे में गलत-फहमी केवल नॉन-मुस्लिम में ही नहीं है बल्कि मुस्लिम में भी है. जिहाद को नॉन-मुस्लिम और मुस्लिम दोनों ही यह समझते हैं कि किसी मुसलमान के द्वारा लड़ी गयी लडाई, वह चाहे किसी मक़सद के लिए हो, वह गलत मक़सद हो या सही, जिहाद कहलाता है.
जिहाद एक अरबी भाषा का शब्द है जो ‘जहादा’ ‘jahada’ शब्द से बना है जिसका मायने होता है ‘मेहनत करना’ ‘जद्दोजहद करना’ ‘संघर्ष करना’ अंग्रेजी में इस कहेंगे to strive or to struggle. मिसाल के तौर पर ‘अगर एक छात्र उत्तीर्ण होने के लिए मेहनत करता है, तो वह जिहाद कर रहा है.’ अरबी भाषा के शब्द जिहाद का एक अर्थ ‘अपनी नफ़्स से संघर्ष करना’ भी है. अपने समाज को बेहतर बनाने के लिए मेहनत करने को भी जिहाद कहते हैं और यह अपने अंतर एक अर्थ और समेटे है जिसका अर्थ होता है कि ‘आत्म रक्षा के लिए संघर्ष’ या चढाई हो जाने या अत्याचार होने पर रण-भूमि में चढाई करने वाले या अत्याचार के विरुद्ध लड़ना.
जिहाद धर्म-युद्ध नहीं
लेकिन जिहाद को ‘पवित्र युद्ध’ holy war नाम पश्चिम जगत और इस्लाम विरोधी मिडिया ने दिया जो कि बिलकुल ही गलत परिभाषा है। जैसा कि हम देख चुके है कि जिहाद एक अरबी शब्द है उसके मायने क्या है.

इस्लामिक नज़रिए में जब हम कुर’आन और हदीस का अध्ययन करते हैं तो पता चलता है कि ‘जिहाद’ मुख्यतया दो प्रकार का हो सकता है;
एक “फ़ी-सबिलिल्लाह” अर्थात अल्लाह की राह में (अच्छाई की राह में) और दूसरा “फ़ी-सबीशैतान” अर्थात शैतान की राह में (बुराई की राह में).

अगर हम देखते हैं कि जो ट्विन टावर गिराया गया वह कौन सा जिहाद था तो साफ़ पता चलता है कि यह फ़ी-सबीशैतान था.

जिहाद का अर्थ जद्दो जहद होता है तो वर्ल्ड ट्रेड सेण्टर गिराना भी ऐसा नहीं है कि हंसी खेल था यह तो बहुत ही जद्दो-जहद का काम रहा होगा यानि यह बहुत बड़े जिहाद का काम था लेकिन “फ़ी-सबिशैतान” बुराई की राह में था.

पश्चिमी मीडिया कहती है कि प्रमुख संदिग्ध ओसामा बिन लादेन है. वही पश्चिम के लोग जो शहीदे-आज़म भगत सिंह को भी आतंकवादी कहते थे. ओसामा बिन लादेन ने अगर ऐसा किया है तो यह ग़लत है, लेकिन आज तक यह सिद्ध नहीं हो पाया केवल प्राइम सस्पेक्ट ओसामा बिन लादेन, प्राइम सस्पेक्ट ओसामा बिन लादेन…

मान लें, बहस के तौर पर कि ओसामा बिन लादेन ने ऐसा किया भी है… तो एक इंसान की करी गयी ग़लती की वजह से बुश की अमेरिकी सेना ने लाखों लोगों को मौत की नींद सुला दिया. अफगानिस्तान जैसे गरीब देश पर उसने लाखों बेगुनाहों पर बम गिराए. इस तरह से तो बुश तो दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी है.

हमें मालूम है कि सद्दाम हुसैन एक मुसलमान था, मुसलमान होने के बावजूद उसने कुछ लोगों को ग़लत तरीक़े से मार डाला था. लेकिन उस पर तरह तरह के इल्जाम लगा कर कि उसके पास जैविक हथियार हैं; ये है; वो है. और इराक़ पर बुश ने बम बरसाए.

खुद बुश ने सी एन एन पर कहा था कि “मैंने वहां सेना भेजी”. आप खुद सोचिये जिस कृत्य को यूएन ने इजाज़त नहीं दी, उसके खिलाफ़ जाकर बुश और अमेरिकी सेना ने क्या सही किया? अगर आतंक का यही नजरिया है तो मेरे हिसाब से बुश दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी है.

यही नहीं अमेरिका की तीन बड़ी मैगजीनों ने यह साबित किया था कि ट्विन टावर पर जो हमला किया गया वह बाहरी हमला नहीं बल्कि अमेरिका का अपना इनसाइड जॉब था.

Filed under: जिहाद, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर

16 Responses

  1. flare says:

    >"बुश तो दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी है." हा हा ………. तो जाओ न मर आओ बुश को ……..?? या जाकिर नै़क वाली मेअनिंग समझा आओ उसको |इसलाम नाम का धर्म क्या है में बताता हूँ | ये कांसेप्ट लिया गया यहूदी और क्रिस्टियन धर्म से और एक नया पंथ बनाया गया जिसमें multi-लेवल मार्केटिंग (amway – type) जोड़ा गया फिर दूसरो देशो पे अटैक कर के वह लोगो को मार के ब्रेन-वश किया गया, इतना सताया गया की मानव बम बन जाये | फिर कहा गया बे-हिसाब आबादी बढायो, ताकि हर देश इतनी गरीबी में रहे के हमारा धर्म कभी वापस न जाये (गरीब ही धर्म ज्यादा मानता है – सभी अरबी अमेरिका रिटर्न होते है) | और जिन जगह से ये धर्म फैला वहा खुद उन्होंने आबादी कम रक्खी और मजे में रह रहे है | इन्ही देशो में इन देशो में भारतीय मुस्लिम्मो के बारे में ऐसी इमेज है :……………….. " जो एक धर्म न का न हो सका, वो दूसरे का क्या होगा " ………………………..

  2. flare says:

    >"बुश तो दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी है." हा हा ………. तो जाओ न मर आओ बुश को ……..?? या जाकिर नै़क वाली मेअनिंग समझा आओ उसको |इसलाम नाम का धर्म क्या है में बताता हूँ | ये कांसेप्ट लिया गया यहूदी और क्रिस्टियन धर्म से और एक नया पंथ बनाया गया जिसमें multi-लेवल मार्केटिंग (amway – type) जोड़ा गया फिर दूसरो देशो पे अटैक कर के वह लोगो को मार के ब्रेन-वश किया गया, इतना सताया गया की मानव बम बन जाये | फिर कहा गया बे-हिसाब आबादी बढायो, ताकि हर देश इतनी गरीबी में रहे के हमारा धर्म कभी वापस न जाये (गरीब ही धर्म ज्यादा मानता है – सभी अरबी अमेरिका रिटर्न होते है) | और जिन जगह से ये धर्म फैला वहा खुद उन्होंने आबादी कम रक्खी और मजे में रह रहे है | इन्ही देशो में इन देशो में भारतीय मुस्लिम्मो के बारे में ऐसी इमेज है :……………….. " जो एक धर्म न का न हो सका, वो दूसरे का क्या होगा " ………………………..

  3. Sneha says:

    >बुश दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी है या नहीं ये तो आप ही बेहतर जानते होंगे. लेकिन ये जो लोग भारत में रोज मारे जा रहे हैं क्या वो भी आतंकवादी हैं… हाँ मुझे पता है कि आपके लिये तो ये जिहाद… बेगुनाहों को मारना जेहाद हैऔरतों को मारना जेहाद हैबच्चों को मारना जेहाद है… एक गरीब आदमी घर से निकलता है और उसे पता ही नहीं की वो शाम को घर वापिस आयेगा या फिर किसी बस, ट्रेन या बाजार में एक लावारिस लाश बनकर पडा होगा… तुम इसे जेहाद कहते होलाखों लोगों को मारने वाले आंतकवादीयों की तुम तरफदारी करते हो, उन्हें सही ठहराते हो. सलीम जी, एक बात का जवाब देना कि हिन्दुस्तान में तुम जेहाद करते हो, पश्चिमी देशों में तुम जेहाद करते हो. लेकिन उन मुस्लिम देशों में कौन सा जेहाद है जहाँ तुम्हारे अपने ही मुस्लिम भाई हैं. करीब हर रोज पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान, ईराक और ना जाने कितने ही इस्लामिक देशों में रोज बम फटते हैं इतने हमले होते हैं वहाँ क्या समस्या है. असल में आदत पड गई है… मजा आने लगा है लोगों को मारने में… जेहाद के नाम पर किये गये हमलों का सच:26 फरवरी 1993 – वर्ड ट्रेड सेंटर, न्यू यार्क पर बम से हमला 6 लोग मरे. 13 मार्च 1993 – मुम्बई बम काँड 250 व्यक्तियों की मौत और 700 घायल. 24 दिसम्बर 1994 – Air France की फ्लाईट न. 8969 को आर्मड इस्लामिक ग्रुप, अलजिरीया ने हाईजैक किया 3 यात्रीयों की मौत.25 जून 1996 – खोबर टावर पर बम से हमला 20 मरे, 37 घायल. 14 फरवरी 1998. कोयम्बटूर, तमिल नाडू में 13 बमों से हमला 46 मरे और 200 घायल7 अगस्त 1998 – यू.एस ऐम्बैसी तनज़ानीया व किनीया मे बम से हमला 224 मरे और 4000 से ज्यादा घायल11 सैप्टमबर 2001 – वर्ड ट्रैड सैंटर और पैंटागन पर चार विमान द्वारा 19 मुस्लिम हाईजैकर्स ने हमला किया 3000 से ज्यादा की मौत.13 दिसम्बर 2001 – भारतीय संसद पर जैश-ए-मौहम्मद व ल्श्कर-ए-तैयाबा का आत्मघाती हमला 7 मरे और 12 घायल. 3 मार्च 2002 – इस्राईल में एक आत्मघाती हमले में 29 मरे और 133 घायल.7 मई 2002 – अलजिरीया में बम से हमला 49 मरे 117 घायल. 24 सैप्टमबर 2002 – गुजरात में अकक्षरधाम मंदिर में श्र्द्धालूओं पर अंधाधुंध फायरिंग 31 मरे 86 घायल.12 अक्तुबर 2002 – बालि के नाईट क्लब में हमला 202 मरे और 300 घायल16 मई 2004 – कैसबलैन्का में हमला 33 लोगों की मौत.11 मई 2004 – स्पेन में कई बमों से हमला 191 मरे 1460 घायल.3 सैप्टैमबर 2004 बेसलन स्कूल होस्टेज केस में 344 लोग मरे जिनमें 186 बच्चे थे. 4 फरवरी 2005 – नाईजिरीया में मुस्लिम आतंकवादियों ने क्रिश्चियन सुमदाय के लोगो पर हमला किया जिसमें 36 लोग मारे गये.7 जुलाई 2005 – लंदन बम ब्लास्ट में 53 लोग मरे और 700 से ज्यादा घायल.23 जुलाई 2005 – इजिप्ट के एक रिसोर्ट में हमला 64 लोगों की मौत.29 अक्तुबर 2005 – दिवाली से दो दिन पहले दिल्ली में बम ब्लास्ट 60 से ज्यादा मरे और 180 घायल.9 नवम्बर 2005 – जौर्डन में आत्मघाती हमला 60 मरे 115 घायल.7 मार्च 2006 – वाराणासी के हिन्दू मंदिर – संकट मोचन व रेलवे स्टेशन में लश्कर-ए-तैयबा द्वारा बम ब्लास्ट 28 मरे और 100 से ज्यादा घायल. 11 जुलाई 2006. मुम्बई ट्रेन बम धमाकों में 209 लोग मरे और 700 से ज्यादा घायल.26 जुलाई 2008. अहमदाबाद 49 मरे 160 घायल. 26 नवमबर 2008. मुमबई में 10 पाकिस्तानी आतंकवादीयों द्वारा हमला 174 लोगों की जानें गईं और कई घायल. अजमल कसाब जिंदा पकडा गया.लिखते-लिखते मेरे हाथ दर्द कर गये सलीम जी लेकिन ये लिस्ट खत्म नहीं हो रही.इन सब की जिहाद भी जरा ज्स्टीफाई करो.

  4. Sneha says:

    >बुश दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी है या नहीं ये तो आप ही बेहतर जानते होंगे. लेकिन ये जो लोग भारत में रोज मारे जा रहे हैं क्या वो भी आतंकवादी हैं… हाँ मुझे पता है कि आपके लिये तो ये जिहाद… बेगुनाहों को मारना जेहाद हैऔरतों को मारना जेहाद हैबच्चों को मारना जेहाद है… एक गरीब आदमी घर से निकलता है और उसे पता ही नहीं की वो शाम को घर वापिस आयेगा या फिर किसी बस, ट्रेन या बाजार में एक लावारिस लाश बनकर पडा होगा… तुम इसे जेहाद कहते होलाखों लोगों को मारने वाले आंतकवादीयों की तुम तरफदारी करते हो, उन्हें सही ठहराते हो. सलीम जी, एक बात का जवाब देना कि हिन्दुस्तान में तुम जेहाद करते हो, पश्चिमी देशों में तुम जेहाद करते हो. लेकिन उन मुस्लिम देशों में कौन सा जेहाद है जहाँ तुम्हारे अपने ही मुस्लिम भाई हैं. करीब हर रोज पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान, ईराक और ना जाने कितने ही इस्लामिक देशों में रोज बम फटते हैं इतने हमले होते हैं वहाँ क्या समस्या है. असल में आदत पड गई है… मजा आने लगा है लोगों को मारने में… जेहाद के नाम पर किये गये हमलों का सच:26 फरवरी 1993 – वर्ड ट्रेड सेंटर, न्यू यार्क पर बम से हमला 6 लोग मरे. 13 मार्च 1993 – मुम्बई बम काँड 250 व्यक्तियों की मौत और 700 घायल. 24 दिसम्बर 1994 – Air France की फ्लाईट न. 8969 को आर्मड इस्लामिक ग्रुप, अलजिरीया ने हाईजैक किया 3 यात्रीयों की मौत.25 जून 1996 – खोबर टावर पर बम से हमला 20 मरे, 37 घायल. 14 फरवरी 1998. कोयम्बटूर, तमिल नाडू में 13 बमों से हमला 46 मरे और 200 घायल7 अगस्त 1998 – यू.एस ऐम्बैसी तनज़ानीया व किनीया मे बम से हमला 224 मरे और 4000 से ज्यादा घायल11 सैप्टमबर 2001 – वर्ड ट्रैड सैंटर और पैंटागन पर चार विमान द्वारा 19 मुस्लिम हाईजैकर्स ने हमला किया 3000 से ज्यादा की मौत.13 दिसम्बर 2001 – भारतीय संसद पर जैश-ए-मौहम्मद व ल्श्कर-ए-तैयाबा का आत्मघाती हमला 7 मरे और 12 घायल. 3 मार्च 2002 – इस्राईल में एक आत्मघाती हमले में 29 मरे और 133 घायल.7 मई 2002 – अलजिरीया में बम से हमला 49 मरे 117 घायल. 24 सैप्टमबर 2002 – गुजरात में अकक्षरधाम मंदिर में श्र्द्धालूओं पर अंधाधुंध फायरिंग 31 मरे 86 घायल.12 अक्तुबर 2002 – बालि के नाईट क्लब में हमला 202 मरे और 300 घायल16 मई 2004 – कैसबलैन्का में हमला 33 लोगों की मौत.11 मई 2004 – स्पेन में कई बमों से हमला 191 मरे 1460 घायल.3 सैप्टैमबर 2004 बेसलन स्कूल होस्टेज केस में 344 लोग मरे जिनमें 186 बच्चे थे. 4 फरवरी 2005 – नाईजिरीया में मुस्लिम आतंकवादियों ने क्रिश्चियन सुमदाय के लोगो पर हमला किया जिसमें 36 लोग मारे गये.7 जुलाई 2005 – लंदन बम ब्लास्ट में 53 लोग मरे और 700 से ज्यादा घायल.23 जुलाई 2005 – इजिप्ट के एक रिसोर्ट में हमला 64 लोगों की मौत.29 अक्तुबर 2005 – दिवाली से दो दिन पहले दिल्ली में बम ब्लास्ट 60 से ज्यादा मरे और 180 घायल.9 नवम्बर 2005 – जौर्डन में आत्मघाती हमला 60 मरे 115 घायल.7 मार्च 2006 – वाराणासी के हिन्दू मंदिर – संकट मोचन व रेलवे स्टेशन में लश्कर-ए-तैयबा द्वारा बम ब्लास्ट 28 मरे और 100 से ज्यादा घायल. 11 जुलाई 2006. मुम्बई ट्रेन बम धमाकों में 209 लोग मरे और 700 से ज्यादा घायल.26 जुलाई 2008. अहमदाबाद 49 मरे 160 घायल. 26 नवमबर 2008. मुमबई में 10 पाकिस्तानी आतंकवादीयों द्वारा हमला 174 लोगों की जानें गईं और कई घायल. अजमल कसाब जिंदा पकडा गया.लिखते-लिखते मेरे हाथ दर्द कर गये सलीम जी लेकिन ये लिस्ट खत्म नहीं हो रही.इन सब की जिहाद भी जरा ज्स्टीफाई करो.

  5. >इतने लोगा मारे गये यह पढकर अफसोस होता है, इसलाम तो एक बेगुनाह के मारने की इजाजत नहीं देता, यह उन लोगों की अज्ञानता होगी, अल्‍लाह उन्‍हें हिदायत दे, खान भाई हाजिरी लगाने आगया, इस रमजनान के महीने अधिकतर मुसलमानों की तरह पूरे दिन भूखा रह कर अर्थात रोजे रख्‍कर गरीबों की भूख से पतिचित हो रहा हूं , इसलिये नेट पर कम आता हूं, वह कहते हैं ना भूखे पेट भजन नहीं होत,signature:मुहम्मद सल्ल. सर्वधर्म के अंतिम अवतार? या यह Big gamge against Islam है?antimawtar.blogspot.com (Rank-1 Blog)इस्लामिक पुस्तकों के अतिरिक्‍त छ अल्लाह के चैलेंज islaminhindi.blogspot.com (Rank-2 Blog)

  6. >इतने लोगा मारे गये यह पढकर अफसोस होता है, इसलाम तो एक बेगुनाह के मारने की इजाजत नहीं देता, यह उन लोगों की अज्ञानता होगी, अल्‍लाह उन्‍हें हिदायत दे, खान भाई हाजिरी लगाने आगया, इस रमजनान के महीने अधिकतर मुसलमानों की तरह पूरे दिन भूखा रह कर अर्थात रोजे रख्‍कर गरीबों की भूख से पतिचित हो रहा हूं , इसलिये नेट पर कम आता हूं, वह कहते हैं ना भूखे पेट भजन नहीं होत,signature:मुहम्मद सल्ल. सर्वधर्म के अंतिम अवतार? या यह Big gamge against Islam है?antimawtar.blogspot.com (Rank-1 Blog)इस्लामिक पुस्तकों के अतिरिक्‍त छ अल्लाह के चैलेंज islaminhindi.blogspot.com (Rank-2 Blog)

  7. >सलीम खान जी, कहीं आपका अपना वजूद भी तो मीडिया की "क्रिएशन" नहीं है…………

  8. >सलीम खान जी, कहीं आपका अपना वजूद भी तो मीडिया की "क्रिएशन" नहीं है…………

  9. >भाई सलीम, तर्क और तार्किकता का तो हर जगह दावा करते रहते हो, और जब तुम्हारे ही ब्लॉग पर स्नेहा ने प्रश्नों की झड़ी लगा दी तो लगे बगलें झांकने !! और जब कुछ नहीं सूझा तो "media ki creation" कह कर पल्ला झाड़ रहे हो?? भई मियां सलीम और कैरानवी, बहुत दिनों से इतस्ततः ब्लॉगों पर आता-जाता रहा हूं, लेकिन तुम दोनों ऐसे पहले ब्लॉगर हो, जो दिमाग (यदि ईश्वर ने बख्शा हो..) को ताक पर रख कर बेसिर-पैर की हांकते है…कम से कम रमजान के इस पवित्र महीने में ईश्वर (जिसे तुम अल्लाह नाम से नवाजते हो) से अपने लिए "थोड़ी सी तार्किक बुद्धि" तो मांग लो…..

  10. >भाई सलीम, तर्क और तार्किकता का तो हर जगह दावा करते रहते हो, और जब तुम्हारे ही ब्लॉग पर स्नेहा ने प्रश्नों की झड़ी लगा दी तो लगे बगलें झांकने !! और जब कुछ नहीं सूझा तो "media ki creation" कह कर पल्ला झाड़ रहे हो?? भई मियां सलीम और कैरानवी, बहुत दिनों से इतस्ततः ब्लॉगों पर आता-जाता रहा हूं, लेकिन तुम दोनों ऐसे पहले ब्लॉगर हो, जो दिमाग (यदि ईश्वर ने बख्शा हो..) को ताक पर रख कर बेसिर-पैर की हांकते है…कम से कम रमजान के इस पवित्र महीने में ईश्वर (जिसे तुम अल्लाह नाम से नवाजते हो) से अपने लिए "थोड़ी सी तार्किक बुद्धि" तो मांग लो…..

  11. >SALEEM BHAITV KO DEKH KAR AAP LOG YE SAMJH NE LAG JATO HO KI ISLAM YAHI HAI OR JO BAAT Dr SAAB.KAH RAHE HAI VO BILKUL THIK HAI. KYA KABHI AAP NE GHAR OR COMPUTER SE BAHAR NIKAL KAR UN BASTIYON KA DORA KIYA HAI JAHAN PAR MUSLIM NARAK KI ZINDGI JEE RAHE HAI.KYA KABHI UN KO SAMJHANE KI KOSHIS KI HAI.KI ITNI BADI AABADI KO SAHI KHANA ,TALLIM,ACHHI SEHAT,KAHAN SE AYGI.MERE BHAI MASLA HINDU YA MUSLIM KA NAHI HAI MASLA EK HI HAI INSAN KA.AAP KE SAUDI ARAB MEIN HINDUSTANI MUSALMAAN KO KUTTE KI NAZAR SAY DEKHA JATA HAI.VO LOG ROZ NAI TARRKI KAR RAHE HAI OR HUM LOG HINDU-MUSLIM KE FAR MEIN PADE HAI. AAP APNE KAM KO JAMEEN PAR AKE KARE TOE BEHTAR PARINAM MIL SAKENGE. KABHI MOKA MILE TO MAHATMA GHANDHI KE BAARE MAIN JARUR PADNA OR UNKI TULNA OR VICHAR GHANDHI JI JARUR MILANA.AAP KI SOCH MEIN IJAFA HOGA KHUDA HAFIZNEERAJ KUMAR

  12. >SALEEM BHAITV KO DEKH KAR AAP LOG YE SAMJH NE LAG JATO HO KI ISLAM YAHI HAI OR JO BAAT Dr SAAB.KAH RAHE HAI VO BILKUL THIK HAI. KYA KABHI AAP NE GHAR OR COMPUTER SE BAHAR NIKAL KAR UN BASTIYON KA DORA KIYA HAI JAHAN PAR MUSLIM NARAK KI ZINDGI JEE RAHE HAI.KYA KABHI UN KO SAMJHANE KI KOSHIS KI HAI.KI ITNI BADI AABADI KO SAHI KHANA ,TALLIM,ACHHI SEHAT,KAHAN SE AYGI.MERE BHAI MASLA HINDU YA MUSLIM KA NAHI HAI MASLA EK HI HAI INSAN KA.AAP KE SAUDI ARAB MEIN HINDUSTANI MUSALMAAN KO KUTTE KI NAZAR SAY DEKHA JATA HAI.VO LOG ROZ NAI TARRKI KAR RAHE HAI OR HUM LOG HINDU-MUSLIM KE FAR MEIN PADE HAI. AAP APNE KAM KO JAMEEN PAR AKE KARE TOE BEHTAR PARINAM MIL SAKENGE. KABHI MOKA MILE TO MAHATMA GHANDHI KE BAARE MAIN JARUR PADNA OR UNKI TULNA OR VICHAR GHANDHI JI JARUR MILANA.AAP KI SOCH MEIN IJAFA HOGA KHUDA HAFIZNEERAJ KUMAR

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