स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़

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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>गोधरा की सच्ची कहानी, एक पत्रकार की ज़ुबानी (Truth about the Godhra Train Incident)

>

पाठकों और ब्लोगर बन्धुवों ! मैं आज एक ऐसे पत्र को आप तक पहुँचाने जा रहा हूँ जो कि एक पत्रकार ने लिखा था. उसने अपने पत्र में गोधरा में हुए काण्ड का सच बयान किया है. मैं उस पत्र में लिखित अंश और विश्लेषण को आप तक पहुँचाना चाहता हूँ.

साबरमती एक्सप्रेस में जो दु:खदायक काण्ड हुआ वह क्या था? और उस दिन क्या क्या घटित हुआ? कितनी सच्चाई हमारी मिडिया ने दिखाई, कितना सच छान कर झूठ का लबेदा ओढे हम तक पहुंचा? आईये एक पत्रकार की ज़ुबानी सुनते हैं….. (Mr. Anil Soni and Neelam Soni (reporter of Gujarat Samachar) Soni’s mobile number: 0-9825038152.Resident number 02672 (code) 43153)

साबरमती एक्सप्रेस का दुखदाई कांड सुबह ७:३० पर गोधरा स्टेशन के एक किलोमीटर दूर हुआ, की सच्चाई मैं आप तक पहुँचाना चाहता हूँ. साबरमती एक्सप्रेस की बोगी नंबर S-6 और दो दूसरी बोगियों में विश्व हिन्दू परिषद् (VHP) के कार-सेवक यात्रा कर रहे थे. दुखदाई कांड की असल वजह ये कार-सेवक ही थे, जो उन बोगियों में सफ़र कर रहे थे. जो कहानी आप तक पहुंचाई गयी है वह सच्चाई से कोसों दूर हैं, असल कहानी जो कि सच है वह अलग ही है.

यह वास्तविकता शुरू होती है गोधरा से ७०-७५ किलोमीटर दूर दाहोद नामक स्टेशन से. समय था ५:३०-६:०० ऍएम्, ट्रेन दाहोद स्टेशन पहुंचती है. ये कार-सेवक उस स्टेशन पर चाय-नाश्ता करने के उद्देश्य से टी-स्टाल पर जाते हैं. किसी बात पर कार-सेवकों और टी-स्टाल के बीच विवाद हो गया और उन कार-सेवकों ने दूकान में तोड़-फोड़ कर दी. फिर वे अपने बोगी में वापस चले गए… इस वाकिये की एक एन-सी.आर. दूकान मालिक ने स्थानीय पुलिस में भी की थी.

अब ट्रेन गोधरा स्टेशन पर पहुंचती है और समय हो रहा होता है ७:००-७:१५ AM. वहां सभी के सभी कार-सेवक ट्रेन से उतर कर स्टेशन पर एक छोटे से चाय की स्टाल पर जा कर स्नैक्स आदि लेते हैं; उस स्टाल को एक बुढा मुसलमान व्यक्ति चला रहा होता है. उस दूकान में एक छोटा लड़का भी हेल्पर बतौर काम कर रहा था. कार-सेवकों ने जानबूझ कर मुसलमान दूकानदार से बहसबाजी शुरू कर दी और बहस करते करते ही उसे पीट डाला. उन कार-सेवकों ने उस बूढे मुसलमान की दाढ़ी भी पकड़ कर खींची और उसे मारा. वे कार-सेवक जोर जोर से एक नारा भी दे रहे थे

मंदिर का निर्माण करो, बाबर की औलाद को बाहर करो
बाबर की औलाद से उनका मुराद मुसलमान ही थे.

शोर-शराबा सुन कर उस बूढे की सोलह साल की एक लड़की वहां पर आ गयी और अपने बाप को बचाने की नाकाम कोशिश करने लगी. वह उन ज़ालिम कार-सेवकों से दया की भीख मांग रही थी और कह रही थी कि उसके बाप को छोड़ दीजिये, जिसको वे कार-सेवक अभी भी मार रहे.

उन ज़ालिमों ने उस बूढे को तो छोड़ दिया लेकिन उस लड़की को पकड़ लिया और अपने बोगी (S-6) में ले गए और अन्दर से दरवाज़ा बंद कर लिया. उस लड़की को अपने साथ ज़बरदस्ती क्यूँ ले गए थे; यह बताने की आवश्यकता नहीं है.

उधर बुढा उनसे अपनी बेटी को छोड़ देने की गुहार लगा रहा था. लेकिन उसकी एक न चली. अब ट्रेन धीमे धीमे आगे बढ़ना शुरू हो गयी लेकिन ट्रेन के रफ़्तार पकड़ने से पहले ही वह बुढा मुसलमान दूकानदार ट्रेन की आखिरी बोगी (गार्ड के पहले वाली) में चढ़ जाता है और ट्रेन की चेन को पुल कर देता है. अब ट्रेन पूरी तरह से रुक जाती है और यह सब करते करते गोधरा स्टेशन लगभग एक १ किलोमीटर पीछे हो चुका होता है.

तभी २ नव-युवक वहां आ जाते हैं माज़रा समझ कर खिड़की के बाहर से उन कार-सेवकों से उस लड़की को छोड़ देने के लिए कहते हैं. शोर-शराबा काफी बढ़ चुका होता है बोगी के आस-पास लोग इक्कट्ठे हो जाते हैं; उस भीड़ में कुछ लड़के और औरतें भी होती हैं जो बाहर से ही उन कार-सेवकों से उस लड़की को छोड़ने का दबाव बनाने लगते हैं. भीड़ काफी गुस्से में होती जा रही थी और लड़की को वापस कर देने की मांग अब गुस्से में तब्दील होती जा रही थी.

लेकिन बजाये लड़की को वापस देने के, वे ज़ालिम (VHP) के कार-सेवक लोगों ने बोगी की खिड़कियाँ ही बंद कर दीं. यह क्रिया भीड़ के गुस्से में आग में घी का सा काम किया और उस भीड में से कुछ लोगों ने बोगी पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया.

बोगी संख्या एस छह (S-6) के दोनों तरफ की बोगियों में भी कार सेवक थे. उन कार-सेवकों के पास भी बैनर थे जिसमें लम्बे लम्बे डंडे लगे थे. वे कार-सेवक अपने बैनर्स और डंडों के साथ लड़की को बचाने आई भीड़ पर ही पिल पड़े और बैनर के डंडों से भीड़ पर हमला बोल दिया. अब भीड़ का गुस्सा पूरी तरह से अनियंत्रित हो चुका था. भीड़ में से ही कुछ लोगों ने पास के ही एक गैराज से (garages Signal Fadia) से डीज़ल और पेट्रोल आदि ले आये और बोगी को जलाने लगे.

जैसा कि कथित रिपोर्ट में यह कहा गया कि पेट्रोल आदि को प्री-प्लांड पेट्रोल पम्प से लाया गया; बिलकुल ही बे-बुनियाद है. यह प्रतिक्रिया अचानक भीड़ ने की न कि पहले से प्लान करके. भीड़ लड़की को छुडाने की कोशिश कर रही थी लेकिन कार-सेवक उग्र से उग्रतर होते जा रहे थे. वे (स्वभावत: वैसा ही करने लगे जैसा कि वे अयोध्या में कर चुके थे) जानते थे कि यह हिन्दुस्तान है यहाँ केवल जय श्री राम कह कर जो आतंक फैलाया जा सकता है वह गोली बंदूक से भी ज़्यादा भयानक
होता है.

यह घटना सुनकर वहां के स्थानीय वीएचपी (VHP) कार्यकर्ताओं ने उस गैराज में (Signal Fadia) में आग लगा दी और पास के ही एक इलाके ‘शेहरा भगाड़’ (गोधरा का ही एक स्थान) में स्थित एक मस्जिद को भी जला डाला.

देर से पहुंची पुलिस को सच कहानी का पता तो नहीं चल सका लेकिन भीड़ द्वारा जलाई गयी सरकारी बोगी को साक्षात् देख पुलिस का गुस्सा स्थानीय लोगों पर उतारा और पुलिस ने स्थानीय लोगों को गिरफ़्तार कर लिया.
पुलिस अपना पल्ला झाड़ने के तहत गोधरा के मेयर श्री अहमद हुसैन कलोता को इस घटना का ज़िम्मेदार ठहरा दिया. श्री अहमद हुसैन भारतीय कांग्रेस के मेंबर भी है उर एक वकील भी.

यह पूरी जानकारी वहीँ के स्थानीय लोगों और विश्वसनीय लोगों से बातचीत पर आधारित भी है. मैं इस स्रोत के मुख्य पात्र श्री अनिल सोनी जी (मोब. 0-9825038152. घर का नंबर 02672 ‘कोड’ 43153, ऑफिस नंबर : 43152,) का शुक्गुज़ार हूँ जिन्होंने इस पूरी घटना का सच्चा वृतांत
पहुँचाया.

(वी एच पी (विश्व हिन्दू परिषद्) ने फिर ऐसा चक्र रचा कि देश को १०० साल से भी ज़्यादा पीछे धकेल दिया. मैं यह कहने से कोई गुरेज़ नहीं करता हूँ कि भारत में वी एच पी (विश्व हिन्दू परिषद्) या संघ या बजरंज दल या भाजपा आदि धुर-कट्टरपंथी ताक़तों ने एक बार नहीं कई बार देश को साम्प्रदायिकता की आग में धकेला है और उसकी रोटी सेंकी है. ऐस नहीं है कि जिसकी रोटी इन्होने सेंकी उन्हें कोई फायेदा पहुंचा हो, वे केवल देश की उन भोली भाली जनता का ब्रेन वश कर देते हैं जो अंध-विश्वास और आस्था के लिए कुछ भी कर देती है. क्या इन शैतानों के इस कृत्य को कोई रोक सकता है और इनके इस कृत्य की सज़ा तो केवल उन मासूम लोगों को ही भुगतनी पड़ती है जिनका
उससे कोई लेना देना भी नहीं है.)

क्या ऐसा ही होता रहेगा कभी अयोध्या, कभी गोधरा कभी गुजरात……..आखिर कब तक !!!??

?

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Filed under: गोधरा, साम्प्रदायिकता, साम्प्रदायिकता का निवारण, हिन्दुत्व

46 Responses

  1. Suresh Chiplunkar कहते हैं:

    >लालू द्वारा गठित आयोग तथा गुजरात सरकार द्वारा गठित नानावटी आयोग में इस घटनाक्रम का कोई ज़िक्र है? क्या उपरोक्त दोनों पत्रकारों ने इन आयोगों में इस प्रकार के बयान दिये हैं, जो कि लिखे गये हैं। यदि हैं तो कृपया उसका लिंक उपलब्ध करवायें। यदि नहीं तो फ़िर क्या इसे अखबारी सनसनी बेचने का एक हथियार माना जाये? मुझे लगता है कि आयोगों की रिपोर्ट देखना भी ज़रूरी है, तभी सच-झूठ का पता चल सकेगा… पत्रकार तो तिल का ताड़ बनाने में माहिर होते हैं… यदि यह पत्र आपके पास हो तो इसकी स्कैन कॉपी करके अपने ब्लाग पर डालें…।

  2. Suresh Chiplunkar कहते हैं:

    >लालू द्वारा गठित आयोग तथा गुजरात सरकार द्वारा गठित नानावटी आयोग में इस घटनाक्रम का कोई ज़िक्र है? क्या उपरोक्त दोनों पत्रकारों ने इन आयोगों में इस प्रकार के बयान दिये हैं, जो कि लिखे गये हैं। यदि हैं तो कृपया उसका लिंक उपलब्ध करवायें। यदि नहीं तो फ़िर क्या इसे अखबारी सनसनी बेचने का एक हथियार माना जाये? मुझे लगता है कि आयोगों की रिपोर्ट देखना भी ज़रूरी है, तभी सच-झूठ का पता चल सकेगा… पत्रकार तो तिल का ताड़ बनाने में माहिर होते हैं… यदि यह पत्र आपके पास हो तो इसकी स्कैन कॉपी करके अपने ब्लाग पर डालें…।

  3. खुर्शीद अहमद कहते हैं:

    >सलीम भाई सब ही जानते हैं कि गोधरा में आतंक तो इन्ही संघी आतंकियों ने फैलाया था. और उसका फ़ायदा उठाया गुजरात की भाजपा सरकार ने. मुझे तो इस बात पर अफ़सोस और हैरानी होती है कि जो लोग कल अँगरेज़ के मुखबिर थे वो ही आज देशभक्ति का प्रमाणपत्र बनते फिर रहे हैं.

  4. khursheed कहते हैं:

    >सलीम भाई सब ही जानते हैं कि गोधरा में आतंक तो इन्ही संघी आतंकियों ने फैलाया था. और उसका फ़ायदा उठाया गुजरात की भाजपा सरकार ने. मुझे तो इस बात पर अफ़सोस और हैरानी होती है कि जो लोग कल अँगरेज़ के मुखबिर थे वो ही आज देशभक्ति का प्रमाणपत्र बनते फिर रहे हैं.

  5. Ratan Singh Shekhawat कहते हैं:

    >वाह क्या खूब मनगढ़ंत कहानी लिखी है

  6. Ratan Singh Shekhawat कहते हैं:

    >वाह क्या खूब मनगढ़ंत कहानी लिखी है

  7. सलीम ख़ान कहते हैं:

    >असल कहानी क्या है शेखावत बाबू.ज़रा बतातें चलें

  8. >असल कहानी क्या है शेखावत बाबू.ज़रा बतातें चलें

  9. पी.सी.गोदियाल कहते हैं:

    >अरे खुर्शीद भाई, कल से आज तक में इतना बदलाव ? पत्रकार की कहानी तो आपको सच लग गई मगर कल आपने ए एस आई की रिपोर्ट को झूठा करार दिया था ! सब अपनी सुबिधा के हिसाब से चलाते हो ? जहां आपके फायदे की बात हो, वहाँ सब सच और बाकी सब झूट ? और हां कल आपने चिपलून भाई के लेख पर एक और उपदेश दिया था कि इस तरह की फिजूल की बाते न करके हमें हिन्दुओ और मुसलमानों के बीच सद्भाव नाधाने का कम करना चाहिए !! तनिक ज़रा अपने इन विरादर को भी समझाइये कि जिस तरह की फालतू की बाते ये यहाँ कर रहे है उससे यह सद्भाव बढेगा नहीं और दरार पड़ेगी इसमें !

  10. पी.सी.गोदियाल कहते हैं:

    >अरे खुर्शीद भाई, कल से आज तक में इतना बदलाव ? पत्रकार की कहानी तो आपको सच लग गई मगर कल आपने ए एस आई की रिपोर्ट को झूठा करार दिया था ! सब अपनी सुबिधा के हिसाब से चलाते हो ? जहां आपके फायदे की बात हो, वहाँ सब सच और बाकी सब झूट ? और हां कल आपने चिपलून भाई के लेख पर एक और उपदेश दिया था कि इस तरह की फिजूल की बाते न करके हमें हिन्दुओ और मुसलमानों के बीच सद्भाव नाधाने का कम करना चाहिए !! तनिक ज़रा अपने इन विरादर को भी समझाइये कि जिस तरह की फालतू की बाते ये यहाँ कर रहे है उससे यह सद्भाव बढेगा नहीं और दरार पड़ेगी इसमें !

  11. haal-ahwaal कहते हैं:

    >to apka kehna hai k fasad ki jad kul milakar hindu hi huwe? musalman to bechare ladki ko bachaa rahe the jo VHP ke logo ke kabje me thi. jab unhone aag lagaa di to fir ladki kaha gayee? bachi ya wo bhi jal gayee? jab train rok li gayee thi to ladki ko chhudane ke liye police kyo nahi bulayee gayee? musalmano ne kya soch ke kanoon hath me liya?? ke har jagah ki tarah yaha bhi bach jayenge aur kuchh nahi hoga??? lage sare-aam insaf karne??? agar aap musalmano ke gusse ka sahi maante hain to baaki shikayat kyo???? sach kahe to hume iss kahani par yakeen nahi aata.

  12. haal-ahwaal कहते हैं:

    >to apka kehna hai k fasad ki jad kul milakar hindu hi huwe? musalman to bechare ladki ko bachaa rahe the jo VHP ke logo ke kabje me thi. jab unhone aag lagaa di to fir ladki kaha gayee? bachi ya wo bhi jal gayee? jab train rok li gayee thi to ladki ko chhudane ke liye police kyo nahi bulayee gayee? musalmano ne kya soch ke kanoon hath me liya?? ke har jagah ki tarah yaha bhi bach jayenge aur kuchh nahi hoga??? lage sare-aam insaf karne??? agar aap musalmano ke gusse ka sahi maante hain to baaki shikayat kyo???? sach kahe to hume iss kahani par yakeen nahi aata.

  13. संजय बेंगाणी कहते हैं:

    >बहुत सुन्दर, मगर नई बात नहीं, बहुत बार सुनाई जा चुकी है. फिर कहानी घड़ने की जरूरत ही कहाँ है? हिन्दु है ही जल मरने लायक…अफसोस न करें, अगर मुसलमानों ने जला भी दिया तो कोई क्या कर लेगा?

  14. संजय बेंगाणी कहते हैं:

    >बहुत सुन्दर, मगर नई बात नहीं, बहुत बार सुनाई जा चुकी है. फिर कहानी घड़ने की जरूरत ही कहाँ है? हिन्दु है ही जल मरने लायक…अफसोस न करें, अगर मुसलमानों ने जला भी दिया तो कोई क्या कर लेगा?

  15. मिहिरभोज कहते हैं:

    >अच्छी हांकते हो ….रामसे ब्रदर्स की फिल्मों मैं ट्राई करना चाहिये…

  16. मिहिरभोज कहते हैं:

    >अच्छी हांकते हो ….रामसे ब्रदर्स की फिल्मों मैं ट्राई करना चाहिये…

  17. सलीम ख़ान कहते हैं:

    >मैंने देखा है बहुत से ब्लॉग पर यूँ ही कही गयी बात पर कथित राष्ट्रवादी ब्लोगर्स खूब हाँ हाँ हूँ हूँ करते हैं…………भले चाहे उन बातों में की सत्यता हो या न हो..बगैर हवाले से की गयी बात की कोई सत्यता नहीं हो सकती…….मगर मैंने आज तक एक भी ऐसा लेख नहीं लिखा जो बिना हवाले के हो…………… मगर वही कथित राष्ट्रवादी (हाँ , भाई हम जो आतंकवादी ठहरे) अपने कान बंद कर लेते हैं………………क्यूंकि वे पूर्वाग्रह से ग्रसित जो ठहरे

  18. >मैंने देखा है बहुत से ब्लॉग पर यूँ ही कही गयी बात पर कथित राष्ट्रवादी ब्लोगर्स खूब हाँ हाँ हूँ हूँ करते हैं…………भले चाहे उन बातों में की सत्यता हो या न हो..बगैर हवाले से की गयी बात की कोई सत्यता नहीं हो सकती…….मगर मैंने आज तक एक भी ऐसा लेख नहीं लिखा जो बिना हवाले के हो…………… मगर वही कथित राष्ट्रवादी (हाँ , भाई हम जो आतंकवादी ठहरे) अपने कान बंद कर लेते हैं………………क्यूंकि वे पूर्वाग्रह से ग्रसित जो ठहरे

  19. दिवाकर मणि कहते हैं:

    >पाठकों और मियां सलीम, मेरे निम्न दो आलेखों को पढ़ें:-१) धर्मनिरपेक्षता के पाखंडी वाहक :- http://diwakarmani.blogspot.com/2007/11/blog-post_17.html२) अंदाज ए बयां : सिमी के पूर्व अध्यक्ष शाहिर बद्र फलाही :- http://diwakarmani.blogspot.com/2008/12/blog-post.html

  20. दिवाकर मणि कहते हैं:

    >पाठकों और मियां सलीम, मेरे निम्न दो आलेखों को पढ़ें:-१) धर्मनिरपेक्षता के पाखंडी वाहक :- http://diwakarmani.blogspot.com/2007/11/blog-post_17.html२) अंदाज ए बयां : सिमी के पूर्व अध्यक्ष शाहिर बद्र फलाही :- http://diwakarmani.blogspot.com/2008/12/blog-post.html

  21. gopalramani कहते हैं:

    >jab apne khud ko hi swayambhu tareeke se "hindustan ki awaz"khud ko hi ghosit kar rakha hai to bolne ki gunjaish kaha bachati hai.

  22. gopal कहते हैं:

    >jab apne khud ko hi swayambhu tareeke se "hindustan ki awaz"khud ko hi ghosit kar rakha hai to bolne ki gunjaish kaha bachati hai.

  23. Sneha कहते हैं:

    >सलीम मियाँ,आ गये नई कहानी ले कर. इस्लाम का क्या हुआ, उसकी बात नहीं करोगे? सूअर, मीट? अब सात साल बाद जाकर गोधरा याद आ रहा है. सच में सलीम जी, सरकार को जिस सच्चाई को पता लगाने में पाँच-छै: साल लग गये आपने तो बस कुछ ही मिनटों में बयाँ कर दी.दरअसल सच्चाई यह थी कि जिस लडकी की आप बात कर रहे हैं उसका नाम सोफियाबानो था. उसने झूठा बयान दिया था. उसने अपने बयान में बताय था कि एक कार सेवक ने उसका हाथ पकडा था लेकिन उसके शोर मचाने के बाद कार सेवक ने उसका हाथ छोड दिया. इस घटना के समय वहाँ बहुत से लोग मौजूद थे. रेलवे के बहुत से अफसर और कर्मचारी भी वहाँ मौजूद थे. लेकिन किसी ने भी इसकी पुष्ठी नहीं की. और ना ही सोफिया बानो ने इस घटना की शिकायत पुलिस या रेलवे के किसी कर्मचारी से की. इसका कारण उसने बताया था कि वो बहुत डर गयी थी. हालांकि उसने कभी भी नहीं कुबुला की उसे ट्रेन के कोच में ले जाया गया था या कोई फिर उसके साथ कोई जोर जबरदस्ती की गयी थी जैसा की आपने लिखा है.हो सकता है सोफिया बानो सच कह रही हो और उसके साथ छेडछाड की गयी हो लेकिन उसे कोच में लेजाने वाली कहानी आपने केवल हिन्दू और मुस्लमानों को भडकाने के लिये लिखी है.असल में गोधरा काँड एक सोची समझी साजिश थी. जिसक खाका अमन गैस्ट हाऊस में नन्नुमियाँ, मौल्वी उमरजी, रज्जाक कुरकुर, सलीम उर्फ सलीमयुसुफ सत्तार, सलीम पानवाला व अन्य ने तैयार किया गया था. नन्नुमियाँ ने गैस्ट हाऊस में सबसे पहले रज्जाक व सलीम आदि से बात की, कि जैसे मुस्लिम संगठन कश्मीर में सरकार से लड रहे हैं हमें भी ऐसा ही कुछ यहाँ भी करना चाहिये. तब सभी लोगों ने साबरमती एक्सप्रैस जिसमें कार सेवक आ रहे थे उसमें आग लगाने का निर्णय किया. तब रात में उन्होंने कालाभाई के पैट्रोल पम्प से पैट्रोल लिया और गैस्ट हाऊस में जाकर सो गये. उनके एक साथी सलीम जर्दा ने इस गलत कार्य में साथ देने के लिये मना किया तो उसकी पिटाई की गई और जान की सलामती के बदले चुप रहने की हिदायत दी.सुबह बजे रज्जाक, ज़बीर, इरफान पटालिया, इरफान, शौकत लाल ने पैट्रोल एक छोटे टैम्पो में रखा और गोधरा के केबिन A, जहाँ बोगी को जलाया था, उसके पास पहुँच गये. सुबह इन सभी ने ट्रेन को (चेन खींच कर) जबरन रोककर उस पर स्थानीय मुसलमानों की सहायता से पहले पत्थरों से हमला किया और बाद में कोच न. 6 व 7 के बीच के कैनवस को काटकर बोगी न. 6 में घुसे. वहाँ इन्होंने पैट्रोल डाल कर पूरी बोगी जला दी.इस शर्मनाक साजिश के तहत रज्जाक, ज़बीर, इरफान पटालिया, इरफान, शौकत लाल आदि ने 59 लोगों को जिंदा जला दिया गया. इनमें 27 महिलाएं और 10 बच्चे शामिल थे.पूरी सच्चाई यहाँ पढी जा सकती है – http://www.rediff.com/news/2008/sep/27godhra.pdfसलीम जी, आप भी एक सोची समझी साजिश के तहत कभी हिन्दूओं में कमी निकाल कर, कभी गीता में जेहाद, कभी कुछ – कभी कुछ, कभी गोधरा तो कभी बटाला हाऊस की फर्जी कहानीयाँ लिख कर केवल हिन्दू-मुस्लमानों को भडकाने का काम कर रहे हैं.सीधे-साधे लोगों को उल्लू बनाना छोडो.अगर आपके पास इतने सबूत हैं तो क्यों नहीं एक याचिका दाखिल करते हो कोर्ट में. मिडिया में जाओ उन लोगों को लेकर. या ये सब केवल इंटरनैट पर सनसनी फैलाने और आने वाली नस्लों में ज़हर घोलने के लिये ही है. वैसे आपकी दूरदर्शिता की तारिफ करनी पडेगी. आप तो एक तीर से दो निशाने लगाते हैं. हिन्दूओं और हिन्दुस्तान की झंड भी करते हो और मुस्लिम समाज में वाही-वाही भी लूट रहे हो.हिन्दुस्तान की आवज बनते हो कभी हिन्दुस्तान में फैली – गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी, बढती जनसंख्या, स्वास्थय सेवाएं आदि के बारे में विचार या कभी चिंतन करो. केवल इस्लाम और जेहाद का शोर मचाने से कोई लाभ नहीं होने वाला. सलीम जी ध्यान रखो कि आपके हिसाब से यदि हम सभी को अल्लाह ने ही बनाया है तो उसने जैसा बनाय है हमें वैसे ही एक दूसरे को कुबुलना होगा. हम सब जानते हैं की जब इंसान इस धरती पर आया था तो कोई धर्म नहीं था. इंसान ने अपने हिसाब और सुविधा के लिये धर्म बनाए हैं. जैन, बौद्ध, सिख धर्म के उदाहरण हमारे सामने हैं.मेरे कहने का निष्कर्ष यह है सलीम जी कि अपने धर्म का प्रचार करना है तो करो लेकिन दूसरे धर्मों का आदर करो. और धर्म के नाम पर लोगों को भडकाना छोड दो.

  24. Sneha कहते हैं:

    >सलीम मियाँ,आ गये नई कहानी ले कर. इस्लाम का क्या हुआ, उसकी बात नहीं करोगे? सूअर, मीट? अब सात साल बाद जाकर गोधरा याद आ रहा है. सच में सलीम जी, सरकार को जिस सच्चाई को पता लगाने में पाँच-छै: साल लग गये आपने तो बस कुछ ही मिनटों में बयाँ कर दी.दरअसल सच्चाई यह थी कि जिस लडकी की आप बात कर रहे हैं उसका नाम सोफियाबानो था. उसने झूठा बयान दिया था. उसने अपने बयान में बताय था कि एक कार सेवक ने उसका हाथ पकडा था लेकिन उसके शोर मचाने के बाद कार सेवक ने उसका हाथ छोड दिया. इस घटना के समय वहाँ बहुत से लोग मौजूद थे. रेलवे के बहुत से अफसर और कर्मचारी भी वहाँ मौजूद थे. लेकिन किसी ने भी इसकी पुष्ठी नहीं की. और ना ही सोफिया बानो ने इस घटना की शिकायत पुलिस या रेलवे के किसी कर्मचारी से की. इसका कारण उसने बताया था कि वो बहुत डर गयी थी. हालांकि उसने कभी भी नहीं कुबुला की उसे ट्रेन के कोच में ले जाया गया था या कोई फिर उसके साथ कोई जोर जबरदस्ती की गयी थी जैसा की आपने लिखा है.हो सकता है सोफिया बानो सच कह रही हो और उसके साथ छेडछाड की गयी हो लेकिन उसे कोच में लेजाने वाली कहानी आपने केवल हिन्दू और मुस्लमानों को भडकाने के लिये लिखी है.असल में गोधरा काँड एक सोची समझी साजिश थी. जिसक खाका अमन गैस्ट हाऊस में नन्नुमियाँ, मौल्वी उमरजी, रज्जाक कुरकुर, सलीम उर्फ सलीमयुसुफ सत्तार, सलीम पानवाला व अन्य ने तैयार किया गया था. नन्नुमियाँ ने गैस्ट हाऊस में सबसे पहले रज्जाक व सलीम आदि से बात की, कि जैसे मुस्लिम संगठन कश्मीर में सरकार से लड रहे हैं हमें भी ऐसा ही कुछ यहाँ भी करना चाहिये. तब सभी लोगों ने साबरमती एक्सप्रैस जिसमें कार सेवक आ रहे थे उसमें आग लगाने का निर्णय किया. तब रात में उन्होंने कालाभाई के पैट्रोल पम्प से पैट्रोल लिया और गैस्ट हाऊस में जाकर सो गये. उनके एक साथी सलीम जर्दा ने इस गलत कार्य में साथ देने के लिये मना किया तो उसकी पिटाई की गई और जान की सलामती के बदले चुप रहने की हिदायत दी.सुबह बजे रज्जाक, ज़बीर, इरफान पटालिया, इरफान, शौकत लाल ने पैट्रोल एक छोटे टैम्पो में रखा और गोधरा के केबिन A, जहाँ बोगी को जलाया था, उसके पास पहुँच गये. सुबह इन सभी ने ट्रेन को (चेन खींच कर) जबरन रोककर उस पर स्थानीय मुसलमानों की सहायता से पहले पत्थरों से हमला किया और बाद में कोच न. 6 व 7 के बीच के कैनवस को काटकर बोगी न. 6 में घुसे. वहाँ इन्होंने पैट्रोल डाल कर पूरी बोगी जला दी.इस शर्मनाक साजिश के तहत रज्जाक, ज़बीर, इरफान पटालिया, इरफान, शौकत लाल आदि ने 59 लोगों को जिंदा जला दिया गया. इनमें 27 महिलाएं और 10 बच्चे शामिल थे.पूरी सच्चाई यहाँ पढी जा सकती है – http://www.rediff.com/news/2008/sep/27godhra.pdfसलीम जी, आप भी एक सोची समझी साजिश के तहत कभी हिन्दूओं में कमी निकाल कर, कभी गीता में जेहाद, कभी कुछ – कभी कुछ, कभी गोधरा तो कभी बटाला हाऊस की फर्जी कहानीयाँ लिख कर केवल हिन्दू-मुस्लमानों को भडकाने का काम कर रहे हैं.सीधे-साधे लोगों को उल्लू बनाना छोडो.अगर आपके पास इतने सबूत हैं तो क्यों नहीं एक याचिका दाखिल करते हो कोर्ट में. मिडिया में जाओ उन लोगों को लेकर. या ये सब केवल इंटरनैट पर सनसनी फैलाने और आने वाली नस्लों में ज़हर घोलने के लिये ही है. वैसे आपकी दूरदर्शिता की तारिफ करनी पडेगी. आप तो एक तीर से दो निशाने लगाते हैं. हिन्दूओं और हिन्दुस्तान की झंड भी करते हो और मुस्लिम समाज में वाही-वाही भी लूट रहे हो.हिन्दुस्तान की आवज बनते हो कभी हिन्दुस्तान में फैली – गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी, बढती जनसंख्या, स्वास्थय सेवाएं आदि के बारे में विचार या कभी चिंतन करो. केवल इस्लाम और जेहाद का शोर मचाने से कोई लाभ नहीं होने वाला. सलीम जी ध्यान रखो कि आपके हिसाब से यदि हम सभी को अल्लाह ने ही बनाया है तो उसने जैसा बनाय है हमें वैसे ही एक दूसरे को कुबुलना होगा. हम सब जानते हैं की जब इंसान इस धरती पर आया था तो कोई धर्म नहीं था. इंसान ने अपने हिसाब और सुविधा के लिये धर्म बनाए हैं. जैन, बौद्ध, सिख धर्म के उदाहरण हमारे सामने हैं.मेरे कहने का निष्कर्ष यह है सलीम जी कि अपने धर्म का प्रचार करना है तो करो लेकिन दूसरे धर्मों का आदर करो. और धर्म के नाम पर लोगों को भडकाना छोड दो.

  25. parimal कहते हैं:

    >Godhra ki baat kar rahe ho baache jo bahut poorani baat hai.Mumbai ki baat kyon nahi karte ?????tumse kuch swaal kiye the maine abhi tak jawab nahi aaya hai kyun ????mr.स्वच्छ हिन्दुस्तान जी,मुझे सिर्फ इतना ही बताइए क्या बम्बई में इतने लोगों की हत्या आपके कसाब भाई और उनके साथियों ने जो किये हैं क्या वो कुरान या इस्लाम के हिसाब से सही हुआ है ?आप स्वच्छ हिन्दुस्तान की कल्पना क्या सारे हिन्दुओं को मार कर या सबको इस्लाम में परिवर्तित कर के कर रहे हैं?क्या इस्लाम में अपने काम से काम रखो नाम को कोई बात कही गई है ?क्या इस्लाम में अपनी ही नारियों के साथ दुर्व्योहार मत करो लिखा हुआ है ?क्यों बम्बई की ९५% तस्कर मुसलमान है क्या इस्लाम इसकी इज्जाज़त देता है ? और क्या वो सारे तस्कर मुसलमान है… अगर नहीं तो आप इसके लिए क्या कर रहे हैं ?क्या daud इब्राहीम मुसलमान है ?क्या ओसामा बिन लादेन अच्छा मुसलमान है ?क्या आप तालेबान के पक्ष में हैं ?किसे परवाह है कि क़यामत का दिन कब आएगा जब अब तक नहीं आया तो कब आएगा और आएगा भी तो पहले उनका हिसाब होगा जो हमसे पहले गए हैं ….स्वच्छ साहब हमारी बारी तो बहुत बाद में आएगी…हम आज और कल जीने कि बात कर रहे हैं…. हर दिन जीने कि बात ….और आप हर बात को कुरान और वेद से ना जोड़ा करें..हम जान गए हैं कि आपने बहुत ज्यादा अध्ययन किया है लेकिन शायद हम उतना अध्ययन नहीं करना चाहते हैं..अब आपकी बारी है हमारी बात समझने की, आप धर्म पुस्तकों की गूढ़ता से बाहर निकालिए और रोज़मर्रा की ज़िन्दगी से जुड़िये जहाँ इस्लाम के नाम पर मानव बम भेज दिए जाते हैं वो भी 'हूरों' के लिए, दुनिया में आपको तकलीफ हो जाती है हूरों को देख कर उन्ही हूरों के लिए आप दूसरों की जाँ लेते हैं शर्म आनी चाहिए आप लोगों को ऐसी दोगली बातों को मानने के लिए…क्या इस्लाम सिर्फ पायजामा एडी के नीचे आ जाने से या दाढी कटवा लेने से बेईज्ज़त हो जाता है..क्या इस्लाम के नाम पर प्रगति को रोकना बुरा नहीं है और उस पर क़यामत ये के उन्ही ताकिनिकियो का इस्तेमाल करना तबाही मचाने के लिए दोगला पाना नहीं है…कसाब की फोटो देखिये कितना मॉडर्न कपडे पहने हुए है. मॉडर्न मशीन सब कुछ माडर्न लेकिन तालेबान अभी भी एडी के नीचे पायजामा आने पर कोडे लगाने को बैठा हुआ है..अरे कुछ तो दीमाग लगाओ यार…हर वक्त इस्लाम का पुन्गा लेकर बैठे रहते हो…क्यों ??

  26. parimal कहते हैं:

    >mr.स्वच्छ हिन्दुस्तान जी,मैंने कुछ बहुत ही साधारण से प्रश्न पूछे थे आपसे, जिनका जवाब आपने अभी तक नहीं दिया…..वेद-पुराण, कुरान के इतने बड़े ज्ञाता हैं आप तो मेरे कुछ तुच्छ प्रश्नों के उत्तर की अपेक्षा थी आपसे….जो मेरे ऊपर के कमेन्ट में है…एक बात और आपने कभी ये भी सुना होगा 'जियो और जीने दो' तो थोडा बहुत इसपर भी अमल कीजिये…दूसरों पर आक्षेप करने से पहले और दूसरे धर्मों की नुक्ता-चीनी करने से पहले अच्छा होगा कि आप ये देखें कि आप क्या कर रहे हैं…चलिए मान लेते हैं कि हिन्दुओं में मूर्ती-पूजा है जो आपको अजीब सी लगती है…….लेकिन किसी कि जान लेने से ज्यादा बुरी बात नहीं हो सकती है…….कम से कम हमारे देवी-देवता ये नहीं कहते कि अगर कोई उन्हें नहीं मानता तो उसे जीने का ही हक नहीं है……. यह किसी भी दृष्टि से सर्वोपरि हैं……और आपकी कोई भी दलील बेकार है…इस्लाम में फोटो तक खिंचवाना वर्जित है ..आप किस हिसाब से हीरो नुमा फोटो खिंचवा कर हर जगह डाल रहे हैं..अपनी सहूलियत के हिसाब से धर्म को तोड़-मरोड़ तो आप लोग करते ही हैं……फिर दुनिया में शांति और अमन के लिए क्यों नहीं करते……मूर्ति-पूजा के आप इतने खिलाफ हैं और ये भूल जाते हैं कि आपके अपने धर्म-स्थल के अन्दर क्या है……कहते हैं वहां भी किसी ज़माने में मुर्तिया ही थी और आज भी शिव-लिंग नुमा काला पत्थर ही है…….और लोग बदलते ही रहे हैं समय के साथ-साथ… जितने भी मुग़ल बादशाह थे सबने अपनी तस्वीरें बनवायीं…..शाहजहाँ, अकबर……आज भी देखने को मिल जाएँगी किसी मुसियम में……… तो क्या वो मुसलमान नहीं थे ? बादशाह अकबर ने तो मंदिर भी बनवा रखा था महल के अन्दर ही ……तो क्या वो मुसलमान नहीं थे….?अब देखिये ओसामा बिन लादेन हर दूसरे दिन अपनी विडियो रिलीज़ करता है….. काबुल से उसे क्या कहेंगे …वो मुसलमान है या नहीं ? और वो मरे तो सीधा जन्नत ही जाएगा न ? तो जब अल्लाह मियां इतना एडजस्ट कर रहे हैं तो आप लोग क्यों नहीं कर पा रहे हैं……बताइयेगा ……..मूर्तियों का चलन क्यों हुआ यह भी बता दूँ ……शून्य में ध्यान को एकाग्र करना मुश्किल होता है इसलिए आम लोगों को एक आकार दिया गया जिससे लोग अपने मन के अन्दर एक छवि लायें और ध्यान लगावें. जो समय के साथ-साथ बदलती गई…और हिन्दू धर्म कि सबसे अच्छी बात भी यही है…….हम हर उस चीज़ को सम्मान देते हैं जिससे हमें कुछ भी मिलता हो……फिर चाहे वो नदी हो पहाड़ हो ,सूरज हो या गाय हो…..यह कमजोरी नहीं दर्शाती है यह दर्शाती है विनम्रता…..लेकिन आप कैसे समझेंगे इसे यह आपके वश की बात नहीं….हाथ में अगर बन्दूक हो तो गोली चलाना बहुत आसन काम होता है…तारीफ तब है कि आप दोषी को भी माफ़ करें…बगैर गोली चलाये आ जाएँ लेकिन यह नहीं है आपकी नियत आप तो ढूंढ़-ढूंढ़ कर निर्दोषों का खत्म करेंगे क्यों क्योंकि आपको हुर्रें चाहियें….छोटे छोटे बच्चों को ऐसी घटिया सोचों से भर देना और उनसे उनकी ज़िन्दगी छीन लेना धर्म के नाम पर …..सोच कर ही वितृष्णा होती है…….उसपर से ये दावा करना कि हम सर्वोपरि हैं…….दिमागी दिवालियापन है और कुछ नहीं…..मेरे कई बहुत घनिष्ठ मित्र मुसलमान हैं जिनकी सोच बहुत ही अलग है आपसे…….उनकी सोच और हमारी सोच में रत्ती भर भी फर्क नहीं है ……हम एक-दूसरे का बहुत ही ज्यादा आदर करते हैं….लेकिन आपको जब भी पढ़ा, लगा आपको किसी मानसिक चिकित्सालय कि आवश्यकता है……देखिये अपनी सेहत पर ध्यान दें अगर यही हाल रहा तो एक दिन ज़रूर आप वहीँ नज़र आयेंगे और फिर आपको जन्नत तो पता नहीं नसीब होगा या नहीं ज़हन्नुम ज़रूर मिल जायेगा और वो भी यहीं, इसी जहान में…..स्वच्छ हिन्दुस्तान को एक शब्द कि तरह प्रयोग में न लायें अगर आप सच-मुच दिल से चाहते हैं तो अपने काम से काम रखें किसी पर कुछ भी लादने की कोशिश न करें……हर व्यक्ति अपने धर्म और कर्म के व्योरा का खुद ही जिम्मेवार होता है और उन्हें ही रहने दें…..बेस्ट ऑफ़ लक्क

  27. parimal कहते हैं:

    >Godhra ki baat kar rahe ho baache jo bahut poorani baat hai.Mumbai ki baat kyon nahi karte ?????tumse kuch swaal kiye the maine abhi tak jawab nahi aaya hai kyun ????mr.स्वच्छ हिन्दुस्तान जी,मुझे सिर्फ इतना ही बताइए क्या बम्बई में इतने लोगों की हत्या आपके कसाब भाई और उनके साथियों ने जो किये हैं क्या वो कुरान या इस्लाम के हिसाब से सही हुआ है ?आप स्वच्छ हिन्दुस्तान की कल्पना क्या सारे हिन्दुओं को मार कर या सबको इस्लाम में परिवर्तित कर के कर रहे हैं?क्या इस्लाम में अपने काम से काम रखो नाम को कोई बात कही गई है ?क्या इस्लाम में अपनी ही नारियों के साथ दुर्व्योहार मत करो लिखा हुआ है ?क्यों बम्बई की ९५% तस्कर मुसलमान है क्या इस्लाम इसकी इज्जाज़त देता है ? और क्या वो सारे तस्कर मुसलमान है… अगर नहीं तो आप इसके लिए क्या कर रहे हैं ?क्या daud इब्राहीम मुसलमान है ?क्या ओसामा बिन लादेन अच्छा मुसलमान है ?क्या आप तालेबान के पक्ष में हैं ?किसे परवाह है कि क़यामत का दिन कब आएगा जब अब तक नहीं आया तो कब आएगा और आएगा भी तो पहले उनका हिसाब होगा जो हमसे पहले गए हैं ….स्वच्छ साहब हमारी बारी तो बहुत बाद में आएगी…हम आज और कल जीने कि बात कर रहे हैं…. हर दिन जीने कि बात ….और आप हर बात को कुरान और वेद से ना जोड़ा करें..हम जान गए हैं कि आपने बहुत ज्यादा अध्ययन किया है लेकिन शायद हम उतना अध्ययन नहीं करना चाहते हैं..अब आपकी बारी है हमारी बात समझने की, आप धर्म पुस्तकों की गूढ़ता से बाहर निकालिए और रोज़मर्रा की ज़िन्दगी से जुड़िये जहाँ इस्लाम के नाम पर मानव बम भेज दिए जाते हैं वो भी 'हूरों' के लिए, दुनिया में आपको तकलीफ हो जाती है हूरों को देख कर उन्ही हूरों के लिए आप दूसरों की जाँ लेते हैं शर्म आनी चाहिए आप लोगों को ऐसी दोगली बातों को मानने के लिए…क्या इस्लाम सिर्फ पायजामा एडी के नीचे आ जाने से या दाढी कटवा लेने से बेईज्ज़त हो जाता है..क्या इस्लाम के नाम पर प्रगति को रोकना बुरा नहीं है और उस पर क़यामत ये के उन्ही ताकिनिकियो का इस्तेमाल करना तबाही मचाने के लिए दोगला पाना नहीं है…कसाब की फोटो देखिये कितना मॉडर्न कपडे पहने हुए है. मॉडर्न मशीन सब कुछ माडर्न लेकिन तालेबान अभी भी एडी के नीचे पायजामा आने पर कोडे लगाने को बैठा हुआ है..अरे कुछ तो दीमाग लगाओ यार…हर वक्त इस्लाम का पुन्गा लेकर बैठे रहते हो…क्यों ??

  28. parimal कहते हैं:

    >mr.स्वच्छ हिन्दुस्तान जी,मैंने कुछ बहुत ही साधारण से प्रश्न पूछे थे आपसे, जिनका जवाब आपने अभी तक नहीं दिया…..वेद-पुराण, कुरान के इतने बड़े ज्ञाता हैं आप तो मेरे कुछ तुच्छ प्रश्नों के उत्तर की अपेक्षा थी आपसे….जो मेरे ऊपर के कमेन्ट में है…एक बात और आपने कभी ये भी सुना होगा 'जियो और जीने दो' तो थोडा बहुत इसपर भी अमल कीजिये…दूसरों पर आक्षेप करने से पहले और दूसरे धर्मों की नुक्ता-चीनी करने से पहले अच्छा होगा कि आप ये देखें कि आप क्या कर रहे हैं…चलिए मान लेते हैं कि हिन्दुओं में मूर्ती-पूजा है जो आपको अजीब सी लगती है…….लेकिन किसी कि जान लेने से ज्यादा बुरी बात नहीं हो सकती है…….कम से कम हमारे देवी-देवता ये नहीं कहते कि अगर कोई उन्हें नहीं मानता तो उसे जीने का ही हक नहीं है……. यह किसी भी दृष्टि से सर्वोपरि हैं……और आपकी कोई भी दलील बेकार है…इस्लाम में फोटो तक खिंचवाना वर्जित है ..आप किस हिसाब से हीरो नुमा फोटो खिंचवा कर हर जगह डाल रहे हैं..अपनी सहूलियत के हिसाब से धर्म को तोड़-मरोड़ तो आप लोग करते ही हैं……फिर दुनिया में शांति और अमन के लिए क्यों नहीं करते……मूर्ति-पूजा के आप इतने खिलाफ हैं और ये भूल जाते हैं कि आपके अपने धर्म-स्थल के अन्दर क्या है……कहते हैं वहां भी किसी ज़माने में मुर्तिया ही थी और आज भी शिव-लिंग नुमा काला पत्थर ही है…….और लोग बदलते ही रहे हैं समय के साथ-साथ… जितने भी मुग़ल बादशाह थे सबने अपनी तस्वीरें बनवायीं…..शाहजहाँ, अकबर……आज भी देखने को मिल जाएँगी किसी मुसियम में……… तो क्या वो मुसलमान नहीं थे ? बादशाह अकबर ने तो मंदिर भी बनवा रखा था महल के अन्दर ही ……तो क्या वो मुसलमान नहीं थे….?अब देखिये ओसामा बिन लादेन हर दूसरे दिन अपनी विडियो रिलीज़ करता है….. काबुल से उसे क्या कहेंगे …वो मुसलमान है या नहीं ? और वो मरे तो सीधा जन्नत ही जाएगा न ? तो जब अल्लाह मियां इतना एडजस्ट कर रहे हैं तो आप लोग क्यों नहीं कर पा रहे हैं……बताइयेगा ……..मूर्तियों का चलन क्यों हुआ यह भी बता दूँ ……शून्य में ध्यान को एकाग्र करना मुश्किल होता है इसलिए आम लोगों को एक आकार दिया गया जिससे लोग अपने मन के अन्दर एक छवि लायें और ध्यान लगावें. जो समय के साथ-साथ बदलती गई…और हिन्दू धर्म कि सबसे अच्छी बात भी यही है…….हम हर उस चीज़ को सम्मान देते हैं जिससे हमें कुछ भी मिलता हो……फिर चाहे वो नदी हो पहाड़ हो ,सूरज हो या गाय हो…..यह कमजोरी नहीं दर्शाती है यह दर्शाती है विनम्रता…..लेकिन आप कैसे समझेंगे इसे यह आपके वश की बात नहीं….हाथ में अगर बन्दूक हो तो गोली चलाना बहुत आसन काम होता है…तारीफ तब है कि आप दोषी को भी माफ़ करें…बगैर गोली चलाये आ जाएँ लेकिन यह नहीं है आपकी नियत आप तो ढूंढ़-ढूंढ़ कर निर्दोषों का खत्म करेंगे क्यों क्योंकि आपको हुर्रें चाहियें….छोटे छोटे बच्चों को ऐसी घटिया सोचों से भर देना और उनसे उनकी ज़िन्दगी छीन लेना धर्म के नाम पर …..सोच कर ही वितृष्णा होती है…….उसपर से ये दावा करना कि हम सर्वोपरि हैं…….दिमागी दिवालियापन है और कुछ नहीं…..मेरे कई बहुत घनिष्ठ मित्र मुसलमान हैं जिनकी सोच बहुत ही अलग है आपसे…….उनकी सोच और हमारी सोच में रत्ती भर भी फर्क नहीं है ……हम एक-दूसरे का बहुत ही ज्यादा आदर करते हैं….लेकिन आपको जब भी पढ़ा, लगा आपको किसी मानसिक चिकित्सालय कि आवश्यकता है……देखिये अपनी सेहत पर ध्यान दें अगर यही हाल रहा तो एक दिन ज़रूर आप वहीँ नज़र आयेंगे और फिर आपको जन्नत तो पता नहीं नसीब होगा या नहीं ज़हन्नुम ज़रूर मिल जायेगा और वो भी यहीं, इसी जहान में…..स्वच्छ हिन्दुस्तान को एक शब्द कि तरह प्रयोग में न लायें अगर आप सच-मुच दिल से चाहते हैं तो अपने काम से काम रखें किसी पर कुछ भी लादने की कोशिश न करें……हर व्यक्ति अपने धर्म और कर्म के व्योरा का खुद ही जिम्मेवार होता है और उन्हें ही रहने दें…..बेस्ट ऑफ़ लक्क

  29. khursheed कहते हैं:

    >jab chot par ungali rakhi to chilla uthe

  30. प्रवीण शाह कहते हैं:

    >…सलीम भाई,गोधरा में क्या हुआ और उसके बाद क्या हुआ गुजरात में…सत्य शायद कभी भी सामने नहीं आयेगा…क्योंकि दोनों पक्ष अपनी सुविधा से सत्य गढ़ने में माहिर हैं…याद होगा कितनी बार बयान बदले जाहिरा शेख ने…तंग आकर अदालत को उसे सजा देनी पड़ी…यह तय है कि गल्तियां सभी से हुई…ऐसी बातों को भूलना ही अच्छा है…"छोड़ो कल कि बातें, कल की बात पुरानी… नये दौर की आओ मिलकर… लिखें नई कहानी… हम हिन्दोस्तानी…हम हिन्दोस्तानी…"

  31. प्रवीण शाह कहते हैं:

    >…सलीम भाई,गोधरा में क्या हुआ और उसके बाद क्या हुआ गुजरात में…सत्य शायद कभी भी सामने नहीं आयेगा…क्योंकि दोनों पक्ष अपनी सुविधा से सत्य गढ़ने में माहिर हैं…याद होगा कितनी बार बयान बदले जाहिरा शेख ने…तंग आकर अदालत को उसे सजा देनी पड़ी…यह तय है कि गल्तियां सभी से हुई…ऐसी बातों को भूलना ही अच्छा है…"छोड़ो कल कि बातें, कल की बात पुरानी… नये दौर की आओ मिलकर… लिखें नई कहानी… हम हिन्दोस्तानी…हम हिन्दोस्तानी…"

  32. >मेरा असल पैगाम और मक़सद यही है…किआओ उस बात की तरफ़ जो हममें और तुममें यकसां (समान) हैं….

  33. >…और मैंने ब्लॉग के शीर्ष पर ही यह लिख रखा है कि कभी भी किसी धर्म के अनुनायीयों को देख कर उस धर्म को विश्लेषित न करो…बल्कि उस धर्म के असल स्रोतों के ज़रिये… उसे समझो…अगर ऐसा सभी ने किया तो वह दिन दूर नहीं कि हम समझ जायेंगे कि हम सभी एक ही ईश्वर के बनाये हुए हैं…

  34. सलीम ख़ान कहते हैं:

    >मेरा असल पैगाम और मक़सद यही है…किआओ उस बात की तरफ़ जो हममें और तुममें यकसां (समान) हैं….

  35. सलीम ख़ान कहते हैं:

    >…और मैंने ब्लॉग के शीर्ष पर ही यह लिख रखा है कि कभी भी किसी धर्म के अनुनायीयों को देख कर उस धर्म को विश्लेषित न करो…बल्कि उस धर्म के असल स्रोतों के ज़रिये… उसे समझो…अगर ऐसा सभी ने किया तो वह दिन दूर नहीं कि हम समझ जायेंगे कि हम सभी एक ही ईश्वर के बनाये हुए हैं…

  36. Suresh Chiplunkar कहते हैं:

    >आप सभी लोग सलीम मियाँ की बात नहीं समझ पा रहे, उनका कहना है कि जिस पत्रकार की यह तथाकथित चिठ्ठी है, सिर्फ़ वही हरिश्चन्द्र का सत्य है। बाकी सभी रिपोर्टें, रेडिफ़ की रिपोर्ट, दो-दो आयोगों की रिपोर्ट, विभिन्न अखबारों के समाचार या तो झूठे हैं या फ़िर साम्प्रदायिक… 🙂 और सलीम मियाँ, बार-बार एक ही बात दोहराते हो… "…मेरा असल पैगाम और मक़सद यही है…कि आओ उस बात की तरफ़ जो हममें और तुममें यकसां (समान) हैं…." आपके अनुसार जब बात "यकसां" ही है तो आप ही "इधर" आ जाईये ना… 🙂 लोगों को "उधर" काहे बुलाते हैं…

  37. Suresh Chiplunkar कहते हैं:

    >आप सभी लोग सलीम मियाँ की बात नहीं समझ पा रहे, उनका कहना है कि जिस पत्रकार की यह तथाकथित चिठ्ठी है, सिर्फ़ वही हरिश्चन्द्र का सत्य है। बाकी सभी रिपोर्टें, रेडिफ़ की रिपोर्ट, दो-दो आयोगों की रिपोर्ट, विभिन्न अखबारों के समाचार या तो झूठे हैं या फ़िर साम्प्रदायिक… 🙂 और सलीम मियाँ, बार-बार एक ही बात दोहराते हो… "…मेरा असल पैगाम और मक़सद यही है…कि आओ उस बात की तरफ़ जो हममें और तुममें यकसां (समान) हैं…." आपके अनुसार जब बात "यकसां" ही है तो आप ही "इधर" आ जाईये ना… 🙂 लोगों को "उधर" काहे बुलाते हैं…

  38. सलीम ख़ान कहते हैं:

    >सुरेश भाई मैं इधर या उधर नहीं बुला रहा हूँ….मैं कह रहा हूँ कि "आओ उस बात की तरफ़ जो हममें और तुममें यकसां (समान) हैं" और वह समान बात क्या है!!!!!!!!!!????????भगवान् एक ही है, दूसरा नहीं है. नहीं है, नहीं है, ज़रा भी नहीं है…अर्थात "एकम् ब्रह्म द्वितीयो नास्ति. नेह्न्ये नास्ति, नास्ति किंचन"बस इतना ही सन्देश सभी तक पहुँचने के मैंने अपना ब्लॉग बनाया है…..

  39. >सुरेश भाई मैं इधर या उधर नहीं बुला रहा हूँ….मैं कह रहा हूँ कि "आओ उस बात की तरफ़ जो हममें और तुममें यकसां (समान) हैं" और वह समान बात क्या है!!!!!!!!!!????????भगवान् एक ही है, दूसरा नहीं है. नहीं है, नहीं है, ज़रा भी नहीं है…अर्थात "एकम् ब्रह्म द्वितीयो नास्ति. नेह्न्ये नास्ति, नास्ति किंचन"बस इतना ही सन्देश सभी तक पहुँचने के मैंने अपना ब्लॉग बनाया है…..

  40. >सलीम मियां आप तो झूठ को सच बनाने मैं लालू यादव से भी आगे निकल गए | तथ्य परक बाते करो भाई | वैसे भी आपके ब्लॉग पे सैकडों प्रश्न डाले हमने पर आप तो उसका जवाब दिए बिना ही एक दूसरा पोस्ट ली आते हो और वो भी बस इस्लाम … के प्रचार … के लिए ही | एक और खबर सुनाता हूँ , शायद आपने सुनी नहीं होगी : फाँसी से पहले बलात्कार, इस्लामिक ईरान में ऐसा होता है.. विश्वास नहीं हो तो पढ़ लें इधर : http://www.tarakash.com/200908285049/Society/iran-rape-before-execution.html

  41. >सलीम मियां आप तो झूठ को सच बनाने मैं लालू यादव से भी आगे निकल गए | तथ्य परक बाते करो भाई | वैसे भी आपके ब्लॉग पे सैकडों प्रश्न डाले हमने पर आप तो उसका जवाब दिए बिना ही एक दूसरा पोस्ट ली आते हो और वो भी बस इस्लाम … के प्रचार … के लिए ही | एक और खबर सुनाता हूँ , शायद आपने सुनी नहीं होगी : फाँसी से पहले बलात्कार, इस्लामिक ईरान में ऐसा होता है.. विश्वास नहीं हो तो पढ़ लें इधर : http://www.tarakash.com/200908285049/Society/iran-rape-before-execution.html

  42. >सलीम मियां जब आप ये मानते हो की भगवन एक है | तो फिर अल्लाह और राम भी एक ही हैं | हम तो अल्लाह हो …. बोलने को तैयार हैं आप भी एक बार ही सही जय श्री राम बोल दो | सब झंझट ही ख़तम है | जब हमें अल्लाह हो… कहने मैं कोई तकलीफ नहीं फिर आपको जय श्री राम कहने मैं क्या प्रॉब्लम है ?

  43. >सलीम मियां जब आप ये मानते हो की भगवन एक है | तो फिर अल्लाह और राम भी एक ही हैं | हम तो अल्लाह हो …. बोलने को तैयार हैं आप भी एक बार ही सही जय श्री राम बोल दो | सब झंझट ही ख़तम है | जब हमें अल्लाह हो… कहने मैं कोई तकलीफ नहीं फिर आपको जय श्री राम कहने मैं क्या प्रॉब्लम है ?

  44. सुनील दत्त कहते हैं:

    >सच्चाई जाननी है तो जरा हमारे दो लेख सांप्रदायिक दंगे जिम्मेदार कौन व आतंकवाद पर सेकुलर गिरोह की भ्रमित सोच जरूर पढें।हम सिर्फ ितना ही कहेंगे कि जो आग आप लगा रहे हो शायद आपको उसके अन्जाम की कल्पना तक नहीं।अगर अनजाने में कर रहे तो छोड़ दो झूठ फैलाकर आग लगाना और अगर जानबूझ कर रहे हो तो समझ लो आप जैसे लोग ही इस्लाम का नाम बदनाम कर रहे हो।

  45. सुनील दत्त कहते हैं:

    >सच्चाई जाननी है तो जरा हमारे दो लेख सांप्रदायिक दंगे जिम्मेदार कौन व आतंकवाद पर सेकुलर गिरोह की भ्रमित सोच जरूर पढें।हम सिर्फ ितना ही कहेंगे कि जो आग आप लगा रहे हो शायद आपको उसके अन्जाम की कल्पना तक नहीं।अगर अनजाने में कर रहे तो छोड़ दो झूठ फैलाकर आग लगाना और अगर जानबूझ कर रहे हो तो समझ लो आप जैसे लोग ही इस्लाम का नाम बदनाम कर रहे हो।

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