स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़

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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>तीन तलाक़, काम खल्लास ! वाह रे इस्लाम धर्म !! Women rights in Islam

>


इस्लाम धर्म में विवाह के पवित्र बंधन से, जन्म-जन्मान्तर के बंधन से और औरतों से कितना छलावा किया गया है, इसकी एक बानगी है ‘केवल और केवल मर्दों के ही द्वारा तलाक़ देना और तीन तलाक़ देकर औरतों पर ज़ुल्म करना. क्या यह सही है? इस्लाम में तलाक़ के मुताल्लिक़ अधिकार केवल मर्दों को ही क्यूँ हासिल हैं औरतों को क्यूँ नहीं? अगर एक औरत अपने शौहर से तलाक़ लेना चाहे तो उसका इस्लाम में कोई प्राविधान है भी या नहीं? आखिर इस्लाम में औरतों को इतनी पाबन्दी क्यूँ है? जब आदमी चार शादी कर सकता है तो औरत क्यूँ नहीं? औरतों का इस्लामी क़ानून अथवा शरियः में कितना हुकूक़, कितना अधिकार प्राप्त है?

कुछ इसी तरह के सवालात अक़्सर हमारे गैर-मुस्लिम भाईयों के ज़हन में आता रहता है और जब वे हम मुसलमानों से इसके बारे में सुकून-बख्श या सही जवाब नहीं दे पाते हैं, उसकी वजह है कि हमें खुद ये नहीं मालूम है कि अल्लाह सुबहान व त-आला अपनी आखिरी और मुक़म्मल किताब में इसके मुताल्लिक़ क्या आदेश देता है.

आईये उपर्लिखित सवालों के जवाब कुरान और हदीस की रौशनी में क्या हैं.

अल्हम्दुलिल्लाह ! अल्लाह सुबहान व त-आला ने अपने बन्दों के ले लिए उनके रहन-सहन के मुताल्लिक़ अपनी आखिरी और मुक़म्मल किताब अल-कुरआन में कई जगह अच्छी तरह से ताक़ीद कर चुका है.

अल्लाह सुबहान व त-आला फ़रमाते हैं, सुरह अन-निसा, सुरह ४, श्लोक संख्या १ में:

ऐ लोगों अपने रब से डर रखो जिसने तुमको एक जीव से पैदा किया और उसी जाति का उसके लिए एक जोड़ा पैदा किया और उन दोनों से बहुत से पुरुष और स्त्रियाँ फैला दीं. अल्लाह का डर रखो (अर्थात गुनाह से बचो) जिसका वास्ता देकर तुम एक दुसरे के सामने रखते हो अपनी मांगे रखते हो…”

अल्लाह सुबहान व-ताला फरमाता है, सुरह अर-रूम में, श्लोक संख्या २१ में:

और उसने तुम दोनों के मध्य प्रेम और दुआ का संचार किया

अल्लाह सुबहान व-ताला फरमाता है, सुरह अल-आराफ़, सुरह ७, श्लोक संख्या 189:

वही है जिसने तुम्हें अकेली जान पैदा किया और उसी की जाति से उसका जोड़ा बनाया ताकि उसकी ओर प्रवृत्त होकर शांति और चैन प्राप्त कर सके फ़िर जब उसने उसको ढांक लिया तो उसने एक हल्का सा बोझ उठा लिया; फ़िर वह उसे लिए हुए चलती फिरती रही फ़िर जब वह बोझिल हो गयी तो दोनों ने अल्लाह -अपने रब को पुकारा “यदि तुने हमें भला चंगा बच्चा दिया तो निश्चय ही हम तेरे कृतग्य होंगे

आगे लिखा है:

वे तुम्हारा परिधान (लिबास) हैं और तुम उनका परिधान हो” अर्थात तुम दोनों (शौहर और बीवी) एक दुसरे का लिबास हो.

क्यूँ न हम सब इसके बारे में विस्तृत रूप से समझ लें कि इस्लाम में तलाक़ और उसके बाद की पूरी प्रक्रिया क्या है?

अल-कुरआन में सुरह अत-तलाक़, सुरह ६५ में तलाक़ के बारे में लिखा है (यहाँ चटका लगायें)

तलाक़ चाहे आप एक बार कहो या तीन बार या चाहे जितनी बार कहो, तलाक़ हो जाती है.

अगर आपने तलाक़ दिया (चाहे एक बार या तीन बार) तो वह एक तलाक़ ही मानी जायेगी अर्थात पहली तलाक़ और फिर उसके ३ मासिक धर्म तक आप उसे हाथ नहीं लगा सकते हैं. चौथे महीने में आप उसे फिर से रुज़ू कर सकते हैं.

इसी तरह से आप फ़िर से पति-पत्नी की तरह रह सकते हैं.

अगर आपने फ़िर तलाक़ दिया (चाहे एक बार या तीन बार) तो वह एक तलाक़ ही मानी जायेगी अर्थात दूसरी तलाक़ और फिर उसके ३ मासिक धर्म तक आप उसे हाथ नहीं लगा सकते हैं. चौथे महीने में आप उसे फिर से रुज़ू कर सकते हैं.

इसी तरह से आप फ़िर से पति-पत्नी की तरह रह सकते हैं.

अगर आपने फ़िर तलाक़ दिया (चाहे एक बार या तीन बार) तो वह एक तलाक़ ही मानी जायेगी अर्थात तीसरी तलाक़…. अब आप की उससे पूरी और पूरी तीन तलाकें वाक़ेय हो गयीं. अब वो आपकी पत्नी नहीं रही. क्यूंकि यह बच्चों का खेल नहीं कि आप तलाक़ पे तलाक़ दिए जाएँ और फ़िर रुज़ू करते जाएँ. अल्लाह ने तलाक़ देने की मियाद तीन रखी है.

एक सवाल और है कि यदि किसी ने अपनी बीवी को तलाक़ दिया अर्थात पहली तलाक़ और चौथे महीने के बाद भी उसे रुज़ू नहीं किया तो उसका निकाह अवैध माना जायेगा. फ़िर अगर वे आपस में रहना चाहें तो उनको दोबारा निकाह (marriage) करना होगा और दोबारा निकाहनामा (maariage-agreement) पर दस्तखत करना होगा और दोबारा मेहर (जो भी तय हो) अदा करना पड़ेगा.

यह प्रक्रिया भी ठीक उसी तरह से होगी जैसे तलाक़ के बाद चौथे महीने में रुज़ू करने में थी. अर्थात आप निकाह करने की प्रकिया भी केवल तीन बार तक ही है. क्यूंकि यह बच्चों का खेल नहीं कि आप तलाक़ पे तलाक़ दिए जाएँ, और निकाह पे निकाह कियें जाएँ और फ़िर रुज़ू करते जाएँ. अल्लाह ने तलाक़ और निकाह देने की मियाद तीन रखी है.

अल्लाह सुबहान व-ताला को सख्त नापसंद है तलाक़, क्यूंकि चूँकि अल्लाह सुबहान व-ताला अपने बन्दों से आसानी चाहता सख्ती नहीं (यहाँ पढें) इसलिए उसने तलाक़ का तरीक़ा भी हमें बतला दिया.

अगले भाग में पढ़े… क्या औरत भी तलाक़ ले सकती है?

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Filed under: इस्लाम और नारी के अधिकार, नारी

12 Responses

  1. >किसी को थप्पड़ मारो और कहो कि हमारे यहाँ तो वह हराम है। तो उस हराम को रोकने का प्रयत्न किया जाना चाहिए। यदि न रुके तो परंपराओं को बदलने का साहस दिखाना चाहिए। बहुत से मुस्लिम देशों ने एकाधिक विवाहों को गैरकानूनी करार दिया है। हिन्दुस्तानी मुसलमानों को उस से परहेज क्यों है? और स्त्रियाँ को बुरे से बुरे खाबिंद से भी छुटकारे के अधिकार से वंचित क्यों हैं। तलाक का अधिकार एक तरफा नहीं होना चाहिए। इस से क्या यह स्पष्ट नहीं कि स्त्रियों को इस्लामी कानून का मौजूदा इंटरप्रिटेशन इंसान ही नहीं मानता, और मानता है तो दूसरे दर्जे का।

  2. >किसी को थप्पड़ मारो और कहो कि हमारे यहाँ तो वह हराम है। तो उस हराम को रोकने का प्रयत्न किया जाना चाहिए। यदि न रुके तो परंपराओं को बदलने का साहस दिखाना चाहिए। बहुत से मुस्लिम देशों ने एकाधिक विवाहों को गैरकानूनी करार दिया है। हिन्दुस्तानी मुसलमानों को उस से परहेज क्यों है? और स्त्रियाँ को बुरे से बुरे खाबिंद से भी छुटकारे के अधिकार से वंचित क्यों हैं। तलाक का अधिकार एक तरफा नहीं होना चाहिए। इस से क्या यह स्पष्ट नहीं कि स्त्रियों को इस्लामी कानून का मौजूदा इंटरप्रिटेशन इंसान ही नहीं मानता, और मानता है तो दूसरे दर्जे का।

  3. सलीम ख़ान कहते हैं:

    >इस्लाम में यह प्राविधान है कि औरत भी तलाक़ ले सकती है और उसका भी ज़िक्र कुरआन में है… मैं यही अगले लेख में दर्शाने जा रहा हूँ….वैसे आप पाठक गणों के पास इस्लाम में औरतों के अधिकार सम्बन्धि, तलाक़ सम्बन्धी कोई सवाल पूछना हो तो आप टिपण्णी द्वारा अवश्य पूछ सकते हैं….

  4. >इस्लाम में यह प्राविधान है कि औरत भी तलाक़ ले सकती है और उसका भी ज़िक्र कुरआन में है… मैं यही अगले लेख में दर्शाने जा रहा हूँ….वैसे आप पाठक गणों के पास इस्लाम में औरतों के अधिकार सम्बन्धि, तलाक़ सम्बन्धी कोई सवाल पूछना हो तो आप टिपण्णी द्वारा अवश्य पूछ सकते हैं….

  5. mythbuster कहते हैं:

    >सलीम भाई,जानकारी का शुक्रिया.जरा यह भी बतायें कि तलाक देते समय मर्द को वजह बतानी पढ़ती है या नहीं क्योंकि बिना किसी जायज वजह के तलाक तो औरत से नाइन्साफी है.

  6. mythbuster कहते हैं:

    >सलीम भाई,जानकारी का शुक्रिया.जरा यह भी बतायें कि तलाक देते समय मर्द को वजह बतानी पढ़ती है या नहीं क्योंकि बिना किसी जायज वजह के तलाक तो औरत से नाइन्साफी है.

  7. TUMHARI KHOJ ME कहते हैं:

    >भाई सलीम, आपके कुछ लेख पढे (हांलाकि सारे पढने की कोशिश की पर जल्दि ही समझ आ गया कि किसी में भी कोई नयापन नहीं है) और यह भी समझ आया कि जहां आपके मतलब की बात होगी वहां कुरआन का सहारा ले लोगे, नहीं तो मदद के लिए वेद पुराण तो हैं हीं। इसी तरह अगर कहीं कहोगे कि कुरआन में फलाने किस्‍म के तलाक की मनाही है तो अगली पोस्‍ट में लिख दोगे कि कुरआन ने वहां पर मना करने के बारे में बताया है पर आदेश नहीं दिया है। किसमें क्‍या लिखा है उसका राग मत अलापिए। क्‍या लाखों करोडो औरतों में से उन 50 का नाम दे पाने की कुव्‍वत है आपमें जिन्‍होंने अपने मुसलमान खाविन्‍दों से तलाक लिया है? यदि हां तो आगे बढिए वर्ना इसी तरह के फालतू राग अलापते रहिए। लिखे होने और वास्‍‍तविकता में होने में बहुत फर्क होता है। लिखा हुआ है आदमी बनिए पर गुण अगर राक्षस के हों तो ऐसा लिखे होने का सलीम भाई कोई फायदा नहीं है। खासतौर पर तब जबकि बहुसंख्‍यक धर्मावलम्‍बी राक्षसी गुणों को ज्‍यादा मानते हों। दुनिया में छाया हुआ आंतकवाद, जाहिलपन, जलालत, औरतों के साथ आमनवीय व्‍यवहार, स्‍कूलों का तोडा जाना, इस्‍लामिक राष्‍ट्रों में अन्‍य धर्मावलंबियों पर हो रहे अत्‍याचार इसके कुछ उदाहरण मात्र हैं। और सबसे बडी कमी यह है कि आप जैसे पढे लिखे लोग इन कमियों को दूर करने की जगह हिंदू धर्म की कमियों की तरफ इशारा करते हैं। आप जैसे पढे लिखे मुसलमानों से बेहतर मैं एक अनपढ मुसलमान‍ रिक्‍शेवाले को मानता हूं जिसके दिमाग में इस तरह की घटिया खुराफात नहीं चल रही होती है और अक्‍सर वे बेचारे धर्मनिरपेक्ष होते हुए भी आप जैसे लोगों के झांसे में आ जाते हैं । अपने ज्ञान को विस्‍तार दीजिए नहीं तो इसी कठमुल्‍ले पन के साथ आप पता नहीं कितने गरीब रिक्‍शेवालों को ज्ञान की रोशनी की जगह हाथ में पत्‍थर थमा देंगें। हां आपकी प्रोफाइल देखी इसमें अपने शौक के बारे में लिखा है कि शौक गजलों का है और लिखते इस्‍लाम पर हो अरे भाई यह गैर इस्‍लामी काम तो आप फ्री में ही कर रहे हो। शाहरुख खान को आप मुसलमान ही नहीं मानते क्‍योंकि वह इसी प्रकार के गैर इस्‍लामी काम करता है। सलमान खान गणपति बप्‍पा मोरया करके जब भगवान गणेश की आरती करता है तो वह काफिर हो जाता है और अबदुल्‍ला अडियार जब इसलाम अपनाता है तो वह आपके लिए गर्व की बात हो जाती है। सलीम भाई इस देश में हजारो विदेशी आते हैं और हिंदू धर्म और जीवन पद्वति को अपनाते हैं पर उन सभी के फोटो हिंदू लोग नहीं दिखाते हैं क्‍योंकि धर्म को मानना और न मानना एक व्‍यक्तिगत सोच है, व्‍यक्तिगत दर्शन है। न कोई धर्म छोटा है और न बडा। बडी और छोटी तो आदमी की सोच है। यह हर हिंदु की खासियत है, गुण धर्म है कि वह दयालु हो और सह्रदय हो। अगर नहीं होता तो यह उसकी व्‍यक्तिगत कमी है और ऐसे हिंदू की तारीफ नहीं की जाती, उसकी गलत बातों को सही ठहराने की कोशिश नहीं की जाती। अब यह आपके ऊपर है कि आप अपनी छोटी और संकुचित सोच को कितना विस्‍त़त कर पाते हैं। चलते चलते एक बात और पूछता चलूं । आपने अपने आप को भारतीय मुसलमान भी लिखा है। क्‍या थोडा डिटेल में बताओगे कि भारतीय मुसलमान, पाकिस्‍तानी मुसलमान या सऊदी मुसलमान में मोटे मोटे चार पांच फरक क्‍या है।

  8. TUMHARI KHOJ ME कहते हैं:

    >भाई सलीम, आपके कुछ लेख पढे (हांलाकि सारे पढने की कोशिश की पर जल्दि ही समझ आ गया कि किसी में भी कोई नयापन नहीं है) और यह भी समझ आया कि जहां आपके मतलब की बात होगी वहां कुरआन का सहारा ले लोगे, नहीं तो मदद के लिए वेद पुराण तो हैं हीं। इसी तरह अगर कहीं कहोगे कि कुरआन में फलाने किस्‍म के तलाक की मनाही है तो अगली पोस्‍ट में लिख दोगे कि कुरआन ने वहां पर मना करने के बारे में बताया है पर आदेश नहीं दिया है। किसमें क्‍या लिखा है उसका राग मत अलापिए। क्‍या लाखों करोडो औरतों में से उन 50 का नाम दे पाने की कुव्‍वत है आपमें जिन्‍होंने अपने मुसलमान खाविन्‍दों से तलाक लिया है? यदि हां तो आगे बढिए वर्ना इसी तरह के फालतू राग अलापते रहिए। लिखे होने और वास्‍‍तविकता में होने में बहुत फर्क होता है। लिखा हुआ है आदमी बनिए पर गुण अगर राक्षस के हों तो ऐसा लिखे होने का सलीम भाई कोई फायदा नहीं है। खासतौर पर तब जबकि बहुसंख्‍यक धर्मावलम्‍बी राक्षसी गुणों को ज्‍यादा मानते हों। दुनिया में छाया हुआ आंतकवाद, जाहिलपन, जलालत, औरतों के साथ आमनवीय व्‍यवहार, स्‍कूलों का तोडा जाना, इस्‍लामिक राष्‍ट्रों में अन्‍य धर्मावलंबियों पर हो रहे अत्‍याचार इसके कुछ उदाहरण मात्र हैं। और सबसे बडी कमी यह है कि आप जैसे पढे लिखे लोग इन कमियों को दूर करने की जगह हिंदू धर्म की कमियों की तरफ इशारा करते हैं। आप जैसे पढे लिखे मुसलमानों से बेहतर मैं एक अनपढ मुसलमान‍ रिक्‍शेवाले को मानता हूं जिसके दिमाग में इस तरह की घटिया खुराफात नहीं चल रही होती है और अक्‍सर वे बेचारे धर्मनिरपेक्ष होते हुए भी आप जैसे लोगों के झांसे में आ जाते हैं । अपने ज्ञान को विस्‍तार दीजिए नहीं तो इसी कठमुल्‍ले पन के साथ आप पता नहीं कितने गरीब रिक्‍शेवालों को ज्ञान की रोशनी की जगह हाथ में पत्‍थर थमा देंगें। हां आपकी प्रोफाइल देखी इसमें अपने शौक के बारे में लिखा है कि शौक गजलों का है और लिखते इस्‍लाम पर हो अरे भाई यह गैर इस्‍लामी काम तो आप फ्री में ही कर रहे हो। शाहरुख खान को आप मुसलमान ही नहीं मानते क्‍योंकि वह इसी प्रकार के गैर इस्‍लामी काम करता है। सलमान खान गणपति बप्‍पा मोरया करके जब भगवान गणेश की आरती करता है तो वह काफिर हो जाता है और अबदुल्‍ला अडियार जब इसलाम अपनाता है तो वह आपके लिए गर्व की बात हो जाती है। सलीम भाई इस देश में हजारो विदेशी आते हैं और हिंदू धर्म और जीवन पद्वति को अपनाते हैं पर उन सभी के फोटो हिंदू लोग नहीं दिखाते हैं क्‍योंकि धर्म को मानना और न मानना एक व्‍यक्तिगत सोच है, व्‍यक्तिगत दर्शन है। न कोई धर्म छोटा है और न बडा। बडी और छोटी तो आदमी की सोच है। यह हर हिंदु की खासियत है, गुण धर्म है कि वह दयालु हो और सह्रदय हो। अगर नहीं होता तो यह उसकी व्‍यक्तिगत कमी है और ऐसे हिंदू की तारीफ नहीं की जाती, उसकी गलत बातों को सही ठहराने की कोशिश नहीं की जाती। अब यह आपके ऊपर है कि आप अपनी छोटी और संकुचित सोच को कितना विस्‍त़त कर पाते हैं। चलते चलते एक बात और पूछता चलूं । आपने अपने आप को भारतीय मुसलमान भी लिखा है। क्‍या थोडा डिटेल में बताओगे कि भारतीय मुसलमान, पाकिस्‍तानी मुसलमान या सऊदी मुसलमान में मोटे मोटे चार पांच फरक क्‍या है।

  9. Mohammed Umar Kairanvi कहते हैं:

    >खान साहब कहदो 50 नाम तो हम मुस्लिम महिलाओं के भी नहीं जानते, तलाक लेने वालियों के तो किया खा के जानेंगे, परदा पर्दा परदाः बीच में पडा हुआ है, स्वयं ये हिन्‍दू 50 महिलाओं के नाम बतादें, शाहरूख खान की हिन्‍दू बीवी गोरी एक नाम हम बता देते हैं, 49 यह बतायें, हां अगर इस्लाम में आने वाली 80 प्रतिष्ठित महिलाओं के नाम जानना चाहें तो पढ लें पुस्‍तक 'हमें खुदा कैसे मिला' प्रस्तुत पुस्तक एक संग्रह है 80 ऐसी औरतों की कहानियों का जो अधिकांश यूरोप और अमेरिका से संबंध रखती हैं। इन सौभाग्यशाली महिलाओं को वास्तव में सच्चाई की तलाश थी और उन्हों ने गहन अध्ययन, सोच-विचार और संतुष्टि के बाद इस्लाम ग्रहण किया। इस्लाम स्वीकारने के बाद आज़माइशों और संकटों ने इनका रास्ता रोकने की कोशिश की, मगर ये साहसी महिलायें पहाड़ के समान अपने फैसले पर जमी रहीं।islaminhindi.blogspot.com

  10. Mohammed Umar Kairanvi कहते हैं:

    >खान साहब कहदो 50 नाम तो हम मुस्लिम महिलाओं के भी नहीं जानते, तलाक लेने वालियों के तो किया खा के जानेंगे, परदा पर्दा परदाः बीच में पडा हुआ है, स्वयं ये हिन्‍दू 50 महिलाओं के नाम बतादें, शाहरूख खान की हिन्‍दू बीवी गोरी एक नाम हम बता देते हैं, 49 यह बतायें, हां अगर इस्लाम में आने वाली 80 प्रतिष्ठित महिलाओं के नाम जानना चाहें तो पढ लें पुस्‍तक 'हमें खुदा कैसे मिला' प्रस्तुत पुस्तक एक संग्रह है 80 ऐसी औरतों की कहानियों का जो अधिकांश यूरोप और अमेरिका से संबंध रखती हैं। इन सौभाग्यशाली महिलाओं को वास्तव में सच्चाई की तलाश थी और उन्हों ने गहन अध्ययन, सोच-विचार और संतुष्टि के बाद इस्लाम ग्रहण किया। इस्लाम स्वीकारने के बाद आज़माइशों और संकटों ने इनका रास्ता रोकने की कोशिश की, मगर ये साहसी महिलायें पहाड़ के समान अपने फैसले पर जमी रहीं।islaminhindi.blogspot.com

  11. Mohammed Umar Kairanvi कहते हैं:

    >इस्लामिक ग्रंथ का नाम कुरआन और xकुरानx दो प्रकार से प्रयोग कर रहे हो, कई बार कमेंटस कर चुका कितनी बार कहने पर आप मान जाओगे, ताकि मैं उतनी बार का पालन कर सकूं, अगर विजेट से हिन्‍दी लिखते हो तो qur'an टाइप करने पर कुर'आन शब्‍द बन जायेगा ऐसे भी ठीक रहेगा, दूसरी बात शीर्ष टिप्‍पणिकार का विजेट लगाओ लाभदायक है इस ब्लाग हेतु,सबूतःकुरान और हदीस की रौशनी में क्या हैं.अल्हम्दुलिल्लाह ! अल्लाह सुबहान व त-आला ने अपने बन्दों के ले लिए उनके रहन-सहन के मुताल्लिक़ अपनी आखिरी और मुक़म्मल किताब अल-कुरआन

  12. Mohammed Umar Kairanvi कहते हैं:

    >इस्लामिक ग्रंथ का नाम कुरआन और xकुरानx दो प्रकार से प्रयोग कर रहे हो, कई बार कमेंटस कर चुका कितनी बार कहने पर आप मान जाओगे, ताकि मैं उतनी बार का पालन कर सकूं, अगर विजेट से हिन्‍दी लिखते हो तो qur'an टाइप करने पर कुर'आन शब्‍द बन जायेगा ऐसे भी ठीक रहेगा, दूसरी बात शीर्ष टिप्‍पणिकार का विजेट लगाओ लाभदायक है इस ब्लाग हेतु,सबूतःकुरान और हदीस की रौशनी में क्या हैं.अल्हम्दुलिल्लाह ! अल्लाह सुबहान व त-आला ने अपने बन्दों के ले लिए उनके रहन-सहन के मुताल्लिक़ अपनी आखिरी और मुक़म्मल किताब अल-कुरआन

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