स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़

Icon

सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>हिन्दू धर्म के दो नकारात्मक स्वभाव: जाति प्रथा व महिलाओं का अवमुल्यन Part-1

>

जाति प्रथा:

(लेख संकलनकर्ता: सलीम खान)
हिन्दू धर्म का सबसे बड़ा नकारात्मक स्वभाव है जाति प्रथा. जाति प्रथा हिन्दू धर्म के अनुनाईयों में नस नस में बसा है और इसकी जड़ें इस क़दर अपनी पैठ बना चुकी हैं कि इसका समाधान अपने भारतवर्ष में सन 1949 में भारतीय सरकार पारित क़ानून भी न कर सका. यह अपने अति-प्रभाव से भारत ही नहीं दुनिया के लगभग सभी हिन्दू को जकड़े हुआ है. हालाँकि यह लेख पढ़ते समय आपको कुछ ऐसे नाम ज़रूर याद आ रहे होंगे जो जाति प्रथा के विरुद्ध होंगे और वर्तमान के कुछ लोगों के नाम भी याद आ रहे होंगे जो अपनी जात की परवाह न करते हुए इसके विरुद्ध कार्य किये. मैं आपको बता दूं आपका सोचना जायज़ है और सही भी, लेकिन इस का प्रतिशत इतना कम है कि शून्य के नीचे आता है अर्थात नगण्य. हमारे हिन्दू समाज में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य व शुद्र तो चार मुख्य जाति हैं ही, इनमें भी कई शाखाएं हैं. आज भी अगर कोई एक जात का लड़का या लड़की किसी दुसरे जात के लड़का या लड़की से शादी वगैरह कर लेता है तो इसका अंजाम जान लेने से लेकर जान देने तक आ जाता है, और इस तरह की खबरें हम आये दिन अखबार या टीवी पर ज़रूर पढ़ते या सुनते होंगे.

भारत का प्रत्येक हिन्दू हजारों जाति (communities/sub-communities) से सम्बद्ध है. जाति मुख्यतया चार वर्णों में विभक्त है और इसके पांचवें समूह को “अस्पृश्य” (untouchables) कहते हैं. परंपरागत रूप से हम यह कह सकते हैं कि किसी की जाति का आधार उसके कर्म से होता है, जो वह करता है. साधारणतया विवाह केवल अपनी ही जाति में किया जाता है. हिन्दू धर्म में धार्मिक किताबों के माध्यम से यह क़ानून है कि कोई एक जाति का व्यक्ति दुसरे जाति के व्यक्ति के साथ न तो खा सकता है, न पी सकता है, न उठ सकता है और न ही बैठ सकता है, यही नहीं धुम्रपान भी नहीं कर सकता है. वर्तमान स्वरूप में कोई हिन्दू केवल एक बार ही अपनी जाति को बदल सकता है अर्थात अगर किसी ने ऐसा कृत्य किया तो वह अपनी मूल जाति में वापस नहीं आ सकता है. लेकिन 500 ईसा पूर्व से 500 ईसवीं तक ऐसा बिल्कुल भी नहीं था. उस काल में जो जिस जाति के मान-बाप से जन्म लेता था उसी जाति में उसकी मृत्यु भी होती थी अर्थात उस वक़्त जाति परिवर्तन की कोई गुंजाईश नहीं थी.

Investindia.com के अनुसार,
“The caste system splits up society into a multitude of little communities, for every caste, and almost every local unit of a caste, has its own peculiar customs and internal regulations.”

ऋग्वेद, जो कि सबसे पुराना वैदिक ग्रन्थ है के अनुसार कुल चार वर्ण हैं जो कि निम्न हैं-
1. ब्राह्मण (पुरोहित, पढ़ा लिखा तबका)
2. क्षत्रिय (शासक, सैनिक)
3. वैश्य (किसान, व्यापारी)
4. शुद्र (नौकर, जो साफ़ सुथरे काम करते थे)

जैसा कि मैंने पहले ही बताया है कि चार वर्ण के अलावा एक पाचवां समूह था. इस पांचवें समूह जिसे हम दलित कहते है, इस वर्ण व्यवस्था का अंग ही नहीं था और 1980 के पहले ये हरिजन कहलाते थे. ये दलित अर्थात हरिजन लोग गंदे कामों को करवाने के लिए नियुक्त थे- जैसे मैला ढोने आदि. यह समूह चारो वर्णों के द्वारा अछूत समझे जाते थे. ऐसा नहीं है कि “थे” मतलब “है” नहीं है बल्कि यह अभी तक “है” ही है. आज भी पहले की तरह भारत के कुछ जगहों पर अगर किसी (दलित) अछूत की छाया दीगर जाति के लोग पर पड़ जाये तो वह अशुद्ध हो जाता है. जाति तंत्र का प्रभाव ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी गहन पैठ बनाये हुए है. हालाँकि शहरी क्षेत्रों में इसकी पैठ कम है. भारत में दलित व पिछडी जातियों के हित के लिए कई क़ानून भी बने हैं, लेकिन समस्या जस की तस ही है. समस्या का कोई समाधान ना होने के कारण ही अधिकतर दलित बहुत तेजी से हिन्दू धर्म छोड़ रहे हैं और इस्लाम (जिसका मूल ही शांति और समानता है) और ईसाई और बौद्ध धर्म अपनाते जा रहे हैं. दिल्ली में 4 नवम्बर 2001 को एक मिलियन पिछडी जाति और दलित लोगों ने एक साथ बौद्ध धर्म कुबूला.

गौस्फेल ऑफ़ एशिया के अनुसार, “दलित यह महसूस करते हैं कि “अगर उन्हें पिछले 3000 साल की गुलामी और दस्ता से मुक्ति पानी है तो उन्हें हिन्दू धर्म त्यागना होगा और दीगर धर्म जिसमें बराबरी का व्यवहार होता हो, को अपनाना होगा.”

जाति व्यवस्था के कारण ही भारत वर्ष में जाति संघर्ष होता है और बहुतों की जानें जाती हैं.

Filed under: Uncategorized

46 Responses

  1. >इसके विपरीत इस्लाम ने वसुधैव कुटुम्बकम (आलमी भाईचारे) पर अमलीजामा पहनाया. और अमीर-गरीब, गुलाम-मालिक, हाकिम-मह्कूक, काले-गोरे, नाटे-लम्बे में कोई भेद नहीं रखा. सब एक साथ, एक ही समय पर एक ही जगह पर नमाज़ पढ़ते हैं और सबसे बड़ी बात एक ही तरफ मुहं करके, एक ही तरह से नमाज़ पढ़ते हैं. उससे बड़ी बात पुरे विश्व स्तर पर 'हज' के महीने में एक जैसा लाब्स पहन कर दुनिया के मुख्तलिफ़ (विभिन्न) देशो के लोग चाहे वो अमेरिका के हों, अरब के हों, भारत के हो, पकिस्तान के हों, कनाडा के हों, अफ्रीका के हो या किसी भी देश के हो, एक जैसा ही कार्य करते हैं पुरे हज के दौरान…..इस्लाम ने बराबरी को बढावा दिया है…इस्लाम ने गुलामी को ख़त्म किया और गुलामी दुनिया के दुसरे मुल्कों में जहाँ इस्लाम नहीं था अब जाकर उन्नीसवी शताब्दी में ख़त्म हुई, गाँधी जी ने भी गुलामी और रंग-भेद का विरोध किया और नेल्सन मंडेला ने भी…

  2. >इसके विपरीत इस्लाम ने वसुधैव कुटुम्बकम (आलमी भाईचारे) पर अमलीजामा पहनाया. और अमीर-गरीब, गुलाम-मालिक, हाकिम-मह्कूक, काले-गोरे, नाटे-लम्बे में कोई भेद नहीं रखा. सब एक साथ, एक ही समय पर एक ही जगह पर नमाज़ पढ़ते हैं और सबसे बड़ी बात एक ही तरफ मुहं करके, एक ही तरह से नमाज़ पढ़ते हैं. उससे बड़ी बात पुरे विश्व स्तर पर 'हज' के महीने में एक जैसा लाब्स पहन कर दुनिया के मुख्तलिफ़ (विभिन्न) देशो के लोग चाहे वो अमेरिका के हों, अरब के हों, भारत के हो, पकिस्तान के हों, कनाडा के हों, अफ्रीका के हो या किसी भी देश के हो, एक जैसा ही कार्य करते हैं पुरे हज के दौरान…..इस्लाम ने बराबरी को बढावा दिया है…इस्लाम ने गुलामी को ख़त्म किया और गुलामी दुनिया के दुसरे मुल्कों में जहाँ इस्लाम नहीं था अब जाकर उन्नीसवी शताब्दी में ख़त्म हुई, गाँधी जी ने भी गुलामी और रंग-भेद का विरोध किया और नेल्सन मंडेला ने भी…

  3. >हमारे यहाँ एक कहावत है कि अपनी तो ठीक से धोई नहीं जाती और मिंयाँ चले है दूसरो की धोने ! जैसा कि मैंने पहले भी कहा कि मेरा ब्लोगर दोस्तों से अनुरोध है कि इन जनाव की उल-जुलूल बातो को ज्यादा अहमियत नहीं दे तो बेहतर होगा ! सीधा सा सवाल है मेरा कि अगर इनका धर्म इतना ही महान है तो उसे बार-बार यहाँ-तहां चरित्र प्रमाण-पत्र लेने की जरुरत क्यों महसूस होती है ? भारत के अधिसंख्यक मुसलमान यहीं के धर्मान्तरित लोग है , विशेष रूप से सूद्र जाति से ! भारत में लोगों की संख्या बहुत कम है, जो अपना संबंध उन पूर्वजो से जोड़ते हैं जो अरब तुर्की , इरानी या अफगानिस्तान से यहाँ आए थे । ये लोग अशरफ कहलाते थे और अपने को यहाँ के मुसलमानों से बड़ा मानते हैं जो स्थानीय है ऐसे मुसलमानों को अज्लाफ़ कहा जाता है सैयद , पठन, शेख, मुग़ल आदि अशरफ कहे जाते हैं अंसारी, धुनिया लोहार बढ़ाई जैसे मुस्लमान जो अपने को राजपूतों और जातों की संतान मानते हैं, अन्य धर्म परिवर्तित मुसलमानों से श्रेष्ठ मानते हैं.कहीं न कहीं जाति प्रथा अपनी सभी बुराइयों के साथ इनमें भी विद्यमान है !पिछले साल दिसम्बर में मुंबई में मेरी एक मुसलमान मित्र से बात हो रही थी और बातो ही बातो में जब २६/११ का जिक्र आया तो उन जनाव का सीधा जबाब था कि ये जो नीच हरकते ये लोग करते है वे लोग ज्यादातर छोटी जाति के मुसलमान होते है ! तो ये है एक उच्च जाति के मुसलमान का तर्क ! और ये जनाव है कि दूसरो की खामिया गिनाने चले है ! और हां ज़रा अपनी मुसलमान औरतो को हिन्दू औरतो से इमानदारी से तुलना करने की कोशिश करना ! हिन्दू महिलाये मुस्लिम महिलावो के मुकाबले कंही बेहतर स्थिति में है ! करोलबाग के चाट वाले के पास कभी खड़े होकर देखना, बेचारी को एक गोलगप्पा खाने में कितनी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है ! पहले अपना घर दूरात करो फिर दूसरो पर पत्थर फेंको !

  4. >हमारे यहाँ एक कहावत है कि अपनी तो ठीक से धोई नहीं जाती और मिंयाँ चले है दूसरो की धोने ! जैसा कि मैंने पहले भी कहा कि मेरा ब्लोगर दोस्तों से अनुरोध है कि इन जनाव की उल-जुलूल बातो को ज्यादा अहमियत नहीं दे तो बेहतर होगा ! सीधा सा सवाल है मेरा कि अगर इनका धर्म इतना ही महान है तो उसे बार-बार यहाँ-तहां चरित्र प्रमाण-पत्र लेने की जरुरत क्यों महसूस होती है ? भारत के अधिसंख्यक मुसलमान यहीं के धर्मान्तरित लोग है , विशेष रूप से सूद्र जाति से ! भारत में लोगों की संख्या बहुत कम है, जो अपना संबंध उन पूर्वजो से जोड़ते हैं जो अरब तुर्की , इरानी या अफगानिस्तान से यहाँ आए थे । ये लोग अशरफ कहलाते थे और अपने को यहाँ के मुसलमानों से बड़ा मानते हैं जो स्थानीय है ऐसे मुसलमानों को अज्लाफ़ कहा जाता है सैयद , पठन, शेख, मुग़ल आदि अशरफ कहे जाते हैं अंसारी, धुनिया लोहार बढ़ाई जैसे मुस्लमान जो अपने को राजपूतों और जातों की संतान मानते हैं, अन्य धर्म परिवर्तित मुसलमानों से श्रेष्ठ मानते हैं.कहीं न कहीं जाति प्रथा अपनी सभी बुराइयों के साथ इनमें भी विद्यमान है !पिछले साल दिसम्बर में मुंबई में मेरी एक मुसलमान मित्र से बात हो रही थी और बातो ही बातो में जब २६/११ का जिक्र आया तो उन जनाव का सीधा जबाब था कि ये जो नीच हरकते ये लोग करते है वे लोग ज्यादातर छोटी जाति के मुसलमान होते है ! तो ये है एक उच्च जाति के मुसलमान का तर्क ! और ये जनाव है कि दूसरो की खामिया गिनाने चले है ! और हां ज़रा अपनी मुसलमान औरतो को हिन्दू औरतो से इमानदारी से तुलना करने की कोशिश करना ! हिन्दू महिलाये मुस्लिम महिलावो के मुकाबले कंही बेहतर स्थिति में है ! करोलबाग के चाट वाले के पास कभी खड़े होकर देखना, बेचारी को एक गोलगप्पा खाने में कितनी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है ! पहले अपना घर दूरात करो फिर दूसरो पर पत्थर फेंको !

  5. >गोदियाल साहब आप भी कहाँ "बीन" बजाने आ गये? जिस ब्लॉग लेखक को मोहल्ला जैसे कथित सेकुलर(?) ब्लॉग से ही बाहर किया जा चुका हो, उसकी क्रेडिबिलिटी और निष्पक्षता कितनी है, यह खुद ही सोचने की बात है…।

  6. >गोदियाल साहब आप भी कहाँ "बीन" बजाने आ गये? जिस ब्लॉग लेखक को मोहल्ला जैसे कथित सेकुलर(?) ब्लॉग से ही बाहर किया जा चुका हो, उसकी क्रेडिबिलिटी और निष्पक्षता कितनी है, यह खुद ही सोचने की बात है…।

  7. >सोच रहाँ हूँ इनके ब्लॉग पर आ कर केवल बीन ही बजाया करुँ क्या पता कभी न कभी ये भैंस भी नाचे ………. यदि ना ही सही तो मेरी बीन का रियाज़ तो कर ही रहा हूँ ………….तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..

  8. >सोच रहाँ हूँ इनके ब्लॉग पर आ कर केवल बीन ही बजाया करुँ क्या पता कभी न कभी ये भैंस भी नाचे ………. यदि ना ही सही तो मेरी बीन का रियाज़ तो कर ही रहा हूँ ………….तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..

  9. mythbuster says:

    >सलीम भाई,पहली बार आपके ब्लॉग पर आया, लगभग सभी पोस्ट पढीं, एक बात जरूर कहना चाहूंगा कि आप अपनी सोच का दायरा बढ़ाओ.मैं एक डॉक्टर हूँ, अक्सर ऐसा होता है कि अनपढ़ मरीज मेरे लाख समझाने पर भी अपने रोग के बारे में नहीं समझ पाता क्योंकि जो मैं बता रहा होता हूं वह उसकी सोच के दायरे के बाहर होता है.अगर आप अपने दिमाग को खुला रखें,पूर्वाग्रहों से दूर रहें, तर्क का प्रयोग करें तथा निष्कर्ष निकालें तो जो सत्य निकलेगा वह ये है."ईश्वर जैसी कोई चीज दुनिया में नहीं है.तमाम धर्म,उपासना पद्धतियां,धर्म ग्रन्थ,परंपरायें आदि अपने अपने समय के चालाक इन्सानों के दिमाग की उपज हैं.इनमें से कुछ ने अपने लिखे/कहे की सर्वमान्यता के लिये या तो यह कहा कि वो ईश्वर के दूत हैं या यह कहा कि जो उन्होंने कहा या लिखा है वो ईश्वर ने उनके दिमाग में उतारा है ताकि उन्हें कोई चुनौती न मिले.बहरहाल जो कुछ भी ये महानुभाव बोल या लिख गये आज के युग के हमारे ज्ञान के प्रकाश में वह सब अप्रासंगिक हो गया है."to sum it all up "THERE IS DEFINITELY NO GOD,SO STOP ARGUING AND GET ON WITH LIFE AS IT UNFOLDS." remember you get only one life therefore i suggest you live it to the fullest.As for me I enjoy my whiskey, sausages(pork), ham(beef)& paneer too.LONG LIVE RELIGION,MAY THE IGNORANCE LIVE LONGER THAN THAT.Cheers!!!

  10. mythbuster says:

    >सलीम भाई,पहली बार आपके ब्लॉग पर आया, लगभग सभी पोस्ट पढीं, एक बात जरूर कहना चाहूंगा कि आप अपनी सोच का दायरा बढ़ाओ.मैं एक डॉक्टर हूँ, अक्सर ऐसा होता है कि अनपढ़ मरीज मेरे लाख समझाने पर भी अपने रोग के बारे में नहीं समझ पाता क्योंकि जो मैं बता रहा होता हूं वह उसकी सोच के दायरे के बाहर होता है.अगर आप अपने दिमाग को खुला रखें,पूर्वाग्रहों से दूर रहें, तर्क का प्रयोग करें तथा निष्कर्ष निकालें तो जो सत्य निकलेगा वह ये है."ईश्वर जैसी कोई चीज दुनिया में नहीं है.तमाम धर्म,उपासना पद्धतियां,धर्म ग्रन्थ,परंपरायें आदि अपने अपने समय के चालाक इन्सानों के दिमाग की उपज हैं.इनमें से कुछ ने अपने लिखे/कहे की सर्वमान्यता के लिये या तो यह कहा कि वो ईश्वर के दूत हैं या यह कहा कि जो उन्होंने कहा या लिखा है वो ईश्वर ने उनके दिमाग में उतारा है ताकि उन्हें कोई चुनौती न मिले.बहरहाल जो कुछ भी ये महानुभाव बोल या लिख गये आज के युग के हमारे ज्ञान के प्रकाश में वह सब अप्रासंगिक हो गया है."to sum it all up "THERE IS DEFINITELY NO GOD,SO STOP ARGUING AND GET ON WITH LIFE AS IT UNFOLDS." remember you get only one life therefore i suggest you live it to the fullest.As for me I enjoy my whiskey, sausages(pork), ham(beef)& paneer too.LONG LIVE RELIGION,MAY THE IGNORANCE LIVE LONGER THAN THAT.Cheers!!!

  11. >खुद गंदगी में पड़े रह कर औरों के घरों की मुहिम चलाने से कोई लाभ नहीं है। अच्छा हो हम अपना अपना घर साफ करें। क्या जातिवाद मुसलमानों में नहीं है? रक्षाबंधन पर शुभकामनाएँ! विश्व-भ्रातृत्व विजयी हो!

  12. >खुद गंदगी में पड़े रह कर औरों के घरों की मुहिम चलाने से कोई लाभ नहीं है। अच्छा हो हम अपना अपना घर साफ करें। क्या जातिवाद मुसलमानों में नहीं है? रक्षाबंधन पर शुभकामनाएँ! विश्व-भ्रातृत्व विजयी हो!

  13. >औरतों की आज़ादी का कथित राष्ट्रवादी समाज या पश्चिमी समाज दावा एक ढोंग है, जिनके सहारे वो उनके शरीर का शोषण करते हैं, उनकी आत्मा को गंदा करते हैं और उनके मान सम्मान को उनसे वंचित रखते हैं. पश्चिमी समाज दावा करता है की उसने औरतों को ऊपर उठाया. इसके विपरीत उन्होंने उनको रखैल और समाज की तितलियों का स्थान दिया है, जो केवल जिस्मफरोशियों और काम इच्छुओं के हांथों का एक खिलौना है जो कला और संस्कृति के रंग बिरंगे परदे के पीछे छिपे हुए हैं. हालाँकि यह पहले हमारे हिन्दू समाज में नहीं था क्यूंकि वे अपनी संस्कृति और वेदों को मानते थे और ईश्वर को एक मानते थे, लेकिन आजकल हालाँकि वे दिल से मानते हैं की ईश्वर एक है और पश्चिम समाज का हमला हमारे भारतीय समाज को तार-तार करने पर तुला हुआ है, और वे इससे आहात भी हैं मगर इससे भी ऊपर उनके मन में यह बात कुछ फिरकापरस्त राजनैतिक पार्टियों आदि ने इतना भर दिन है कि वे केवल और केवल मुसलमानों से खिलाफ ही रहेंगे…. और यह सबको पता है कि पश्चिम समाज इस्लाम का सबसे बड़ा दुश्मन है और इसीलिए वे पता नहीं क्यूँ…. या यूँ ही इस्लाम और मुसलमान के दुश्मन बने बैठे हैं….मेरा यह लेख लिखने का मकसद किसी हिन्दू भाई के दिल को चोट पहुँचाना नहीं हैं…और अगर ऐसा हो रहा है अतो मैं अग्रिम क्षमा चाहता हूँ….मैंने तो यह बताने की कोशिश की कि समाज में जो कुछ है वह सही है या गलत?? अगर गलत है तो उसका समाधान क्या होना चाहिए…और कुछ लोग कहते हैं कि यह सब बातें आज के समाज में ठीक नहीं बैठती हैं… आधुनिकता की दुहाई देकर उन सभी सत्य बातों को यहाँ तक कि ईश्वर के अस्तित्व को ही नकार देते हैं तो मैं उनसे पूछना चाहता हूँ कि…….क्रमशः

  14. >औरतों की आज़ादी का कथित राष्ट्रवादी समाज या पश्चिमी समाज दावा एक ढोंग है, जिनके सहारे वो उनके शरीर का शोषण करते हैं, उनकी आत्मा को गंदा करते हैं और उनके मान सम्मान को उनसे वंचित रखते हैं. पश्चिमी समाज दावा करता है की उसने औरतों को ऊपर उठाया. इसके विपरीत उन्होंने उनको रखैल और समाज की तितलियों का स्थान दिया है, जो केवल जिस्मफरोशियों और काम इच्छुओं के हांथों का एक खिलौना है जो कला और संस्कृति के रंग बिरंगे परदे के पीछे छिपे हुए हैं. हालाँकि यह पहले हमारे हिन्दू समाज में नहीं था क्यूंकि वे अपनी संस्कृति और वेदों को मानते थे और ईश्वर को एक मानते थे, लेकिन आजकल हालाँकि वे दिल से मानते हैं की ईश्वर एक है और पश्चिम समाज का हमला हमारे भारतीय समाज को तार-तार करने पर तुला हुआ है, और वे इससे आहात भी हैं मगर इससे भी ऊपर उनके मन में यह बात कुछ फिरकापरस्त राजनैतिक पार्टियों आदि ने इतना भर दिन है कि वे केवल और केवल मुसलमानों से खिलाफ ही रहेंगे…. और यह सबको पता है कि पश्चिम समाज इस्लाम का सबसे बड़ा दुश्मन है और इसीलिए वे पता नहीं क्यूँ…. या यूँ ही इस्लाम और मुसलमान के दुश्मन बने बैठे हैं….मेरा यह लेख लिखने का मकसद किसी हिन्दू भाई के दिल को चोट पहुँचाना नहीं हैं…और अगर ऐसा हो रहा है अतो मैं अग्रिम क्षमा चाहता हूँ….मैंने तो यह बताने की कोशिश की कि समाज में जो कुछ है वह सही है या गलत?? अगर गलत है तो उसका समाधान क्या होना चाहिए…और कुछ लोग कहते हैं कि यह सब बातें आज के समाज में ठीक नहीं बैठती हैं… आधुनिकता की दुहाई देकर उन सभी सत्य बातों को यहाँ तक कि ईश्वर के अस्तित्व को ही नकार देते हैं तो मैं उनसे पूछना चाहता हूँ कि…….क्रमशः

  15. >ईश्वर से बढ़ कर कोई नहीं है ! माँ और बाप भी नहीं !! गुरु या उस्ताद भी नहीं!!!क्यूंकि अगर यह सत्य होता तो कहानी कुछ और होती…. मैं बताना चाहता हूँ कि "हम सब एक तुच्छ वीर्य थे, नौ महीना की अवधि में विभिन्न परिस्थितियों से गुज़र कर अत्यंत तंग स्थान से निकले, हमारे लिए माँ के स्तन में स्वतः दूध उत्पन्न हो गया, कुछ समय के बाद हमें बुद्धि ज्ञान प्रदान किया गया, हमारा फिंगर प्रिंट सब से अलग अलग रखा गया, इन सब परिस्थितियों में माँ का भी हस्तक्षेप न रहा, क्योंकि हर माँ की इच्छा होती है कि होने वाला बच्चा गोरा हो लेकिन काला हो जाता है, लड़का हो लेकिन लड़की हो जाती है।" अब सोचिए कि जब कोई चीज़ बिना बनाए नहीं बना करती जैसा कि आप भी मानते होंगे तथा यह भी स्पष्ट हो गया कि उस में माँ का भी हस्तक्षेप नहीं होता है तो अब सोचें कि क्या हम बिना बनाए बन गए ???कभी हम संकट में फंसते हैं तो हमारा सर प्राकृतिक रूप में ऊपर की ओर उठने लगता है शायद आपको भी इसका अनुभव होगा—ऐसा क्यों होता है ? इसलिए कि ईश्वर की कल्पना मानव के हृदय में पाई जाती है, पर अधिकांश लोग अपने ईश्वर को पहचान नहीं रहे हैं।

  16. >ईश्वर से बढ़ कर कोई नहीं है ! माँ और बाप भी नहीं !! गुरु या उस्ताद भी नहीं!!!क्यूंकि अगर यह सत्य होता तो कहानी कुछ और होती…. मैं बताना चाहता हूँ कि "हम सब एक तुच्छ वीर्य थे, नौ महीना की अवधि में विभिन्न परिस्थितियों से गुज़र कर अत्यंत तंग स्थान से निकले, हमारे लिए माँ के स्तन में स्वतः दूध उत्पन्न हो गया, कुछ समय के बाद हमें बुद्धि ज्ञान प्रदान किया गया, हमारा फिंगर प्रिंट सब से अलग अलग रखा गया, इन सब परिस्थितियों में माँ का भी हस्तक्षेप न रहा, क्योंकि हर माँ की इच्छा होती है कि होने वाला बच्चा गोरा हो लेकिन काला हो जाता है, लड़का हो लेकिन लड़की हो जाती है।" अब सोचिए कि जब कोई चीज़ बिना बनाए नहीं बना करती जैसा कि आप भी मानते होंगे तथा यह भी स्पष्ट हो गया कि उस में माँ का भी हस्तक्षेप नहीं होता है तो अब सोचें कि क्या हम बिना बनाए बन गए ???कभी हम संकट में फंसते हैं तो हमारा सर प्राकृतिक रूप में ऊपर की ओर उठने लगता है शायद आपको भी इसका अनुभव होगा—ऐसा क्यों होता है ? इसलिए कि ईश्वर की कल्पना मानव के हृदय में पाई जाती है, पर अधिकांश लोग अपने ईश्वर को पहचान नहीं रहे हैं।

  17. mythbuster says:

    >How life forms came into existence?(remember human beings are one species among the millions of living species) To know the answer study the THEORY OF ORGANIC EVOLUTION.Also remember this theory has been tested number of times in controlled laboratory conditions.

  18. mythbuster says:

    >How life forms came into existence?(remember human beings are one species among the millions of living species) To know the answer study the THEORY OF ORGANIC EVOLUTION.Also remember this theory has been tested number of times in controlled laboratory conditions.

  19. mythbuster says:

    >Dear Salim,I checked your profile also, it appears that you are from a non science background hence your arguments are very weak,any offspring gets its traits from both the father & mother,remember god plays no role in reproduction.If a white man fathers a child with a white female, child will invariably be white ditto for a black couple.कभी हम संकट में फंसते हैं तो हमारा सर प्राकृतिक रूप में ऊपर की ओर उठने लगता है शायद आपको भी इसका अनुभव होगा—ऐसा क्यों होता है ? very funny, from where you got this funny thought,generally people try to shrink their body/ try to hide in face of apparent danger.And who says that god is up above because as you say there is only one god & in that case god cannot be simultaneously up above a person at north pole & another person at south pole as both these positions are 180* apart.

  20. mythbuster says:

    >Dear Salim,I checked your profile also, it appears that you are from a non science background hence your arguments are very weak,any offspring gets its traits from both the father & mother,remember god plays no role in reproduction.If a white man fathers a child with a white female, child will invariably be white ditto for a black couple.कभी हम संकट में फंसते हैं तो हमारा सर प्राकृतिक रूप में ऊपर की ओर उठने लगता है शायद आपको भी इसका अनुभव होगा—ऐसा क्यों होता है ? very funny, from where you got this funny thought,generally people try to shrink their body/ try to hide in face of apparent danger.And who says that god is up above because as you say there is only one god & in that case god cannot be simultaneously up above a person at north pole & another person at south pole as both these positions are 180* apart.

  21. >@ mythbuster जी, राखी के दिन बहिनों से बचकर सलीम खान के घर में डेरा डाल के बैठ गये, यहाँ हिन्‍दी ब्लाग में अपनी इंग्लिशा दानी का रौब मार रहे हो, सलीम साहब के गुरू डाक्‍टर नायक के पास जाओ irf.net पर, ईश्‍वर को नकारने वाले डाक्टर साहब मेरे घर आओ मेहमान नवाजी के लिये मैंने छ 'अल्‍लाह के चैलेंज' के केपसूल और 'अन्तिम अवतार' नाम के 3 इं‍जकशन रख रखे हैं, जो तुम्‍हें यकीन दिलाने के लिये अधिक रहेंगे कि ईश्‍वर है अथवा नहीं, भाइयों डाक्‍टर साहब ना आये तो इन्‍हे जबरदस्ती भेजना, किया पता आगरा का केस हो? अन्यथा में आगरा प्रसिद्ध् डाक्‍टर काशिफ आरिफ को यहीं भेजूगा? यह तो हमारी तुम्हारी धार्मिक बातचीत का दुशमन है, इस वार्तालाप से इसके धर्म को हाणि हो रही होगी,देखो किया कहते हैं ये: ''बहरहाल जो कुछ भी ये महानुभाव बोल या लिख गये आज के युग के हमारे ज्ञान के प्रकाश में वह सब अप्रासंगिक हो गया है." मैं डाक्‍टर साहब की तरह नास्तिक नहीं, बहिन्‍ा और बेटी भी रखता हूँ इसलिये मैं राखी पर्व का सम्‍मान करते हुये सभी बहिनों को राखी की बधाई देता हूँsignature:अगर कमेंटस पसंद आये तो प्रेम अथवा नफरत में मुझे सहयोग दें:मुहम्मद सल्ल. कल्कि व अंतिम अवतार और बैद्ध् मैत्रे, अंतिम ऋषि (इसाई) यहूदीयों के भी आखरी संदेष्‍टा antimawtar.blogspot.com (Rank-1 Blog) इस्लामिक पुस्तकों के अतिरिक्‍त छ अल्लाह के चैलेंज islaminhindi.blogspot.com (Rank-2 Blog)

  22. >@ mythbuster जी, राखी के दिन बहिनों से बचकर सलीम खान के घर में डेरा डाल के बैठ गये, यहाँ हिन्‍दी ब्लाग में अपनी इंग्लिशा दानी का रौब मार रहे हो, सलीम साहब के गुरू डाक्‍टर नायक के पास जाओ irf.net पर, ईश्‍वर को नकारने वाले डाक्टर साहब मेरे घर आओ मेहमान नवाजी के लिये मैंने छ 'अल्‍लाह के चैलेंज' के केपसूल और 'अन्तिम अवतार' नाम के 3 इं‍जकशन रख रखे हैं, जो तुम्‍हें यकीन दिलाने के लिये अधिक रहेंगे कि ईश्‍वर है अथवा नहीं, भाइयों डाक्‍टर साहब ना आये तो इन्‍हे जबरदस्ती भेजना, किया पता आगरा का केस हो? अन्यथा में आगरा प्रसिद्ध् डाक्‍टर काशिफ आरिफ को यहीं भेजूगा? यह तो हमारी तुम्हारी धार्मिक बातचीत का दुशमन है, इस वार्तालाप से इसके धर्म को हाणि हो रही होगी,देखो किया कहते हैं ये: ''बहरहाल जो कुछ भी ये महानुभाव बोल या लिख गये आज के युग के हमारे ज्ञान के प्रकाश में वह सब अप्रासंगिक हो गया है." मैं डाक्‍टर साहब की तरह नास्तिक नहीं, बहिन्‍ा और बेटी भी रखता हूँ इसलिये मैं राखी पर्व का सम्‍मान करते हुये सभी बहिनों को राखी की बधाई देता हूँsignature:अगर कमेंटस पसंद आये तो प्रेम अथवा नफरत में मुझे सहयोग दें:मुहम्मद सल्ल. कल्कि व अंतिम अवतार और बैद्ध् मैत्रे, अंतिम ऋषि (इसाई) यहूदीयों के भी आखरी संदेष्‍टा antimawtar.blogspot.com (Rank-1 Blog) इस्लामिक पुस्तकों के अतिरिक्‍त छ अल्लाह के चैलेंज islaminhindi.blogspot.com (Rank-2 Blog)

  23. Sneha says:

    >सलीम जी,आप एक अनपढ से भी गये गुजरे हो. काफी समझाने के बाद अनपढ को बात समझ आ जाती है. लेकिन आपको नहीं आ रही. कुंए के मेंढक की कहानी पता है ना आपको जो अपने कुँए को दुनिया से बडा समझता था. क्योंकि उसने दुनिया देखी ही नहीं थी.और एक कहावत है कि – बढाई दुसरे ही करें तभी अच्छा लगता है. अपने गाल नहीं बजाने चाहिये और अपने मुँह मिंया मिठ्ठु नहीं बनना चाहिये.और एक बात बताती हूँ – आप इस धर्म के खेल में चीटिंग मत किजीये. खेलीये इस खेल को जिसका धर्म अच्छा होगा लोग उसकी तरफ अपने आप खिंचे चले आयेंगे.और रही बात हिंदु धर्म में महिलाओं के अवमूल्यन की. तो सुनो -… जब तालिबानियों ने स्वात घाटी में शरीयत कानून लागू किया था तो वहाँ रह रहे मुस्लिम लोगों की चूलें हिल गईं. टि.वी. में तुमने देखा ही होगा कि बुर्के (चलता फिरता टैंट हाऊस) में लिपटी महिलाओं के हिप्स पर कैसे कोडे बरसाये जा रहे थे. वैसे वो सब शरीयत के कानून के हिसाब से ही होगा. और वो कहीं ना कहीं आपकी कुरआन में भी लिखा होगा.तालीबानीयों ने लडकीयों के स्कूल तोड दिये गये. लडकीयों की शिक्षा पर प्रतिबंध लगा दिया. और उन अक्लबंद मुसलमानों ने महिलाओं का ईलाज केवल महिलायें ही करेंगी की शर्त रखी. अरे मुर्खों जब महिलायों की शिक्षा पर ही प्रतिबंध लगा दिया तो वो डाक्टर कैसे बनेंगी. काफी ईज्जत है इस्लाम में महिलाओं की.सलीम, यदि ये दुनिया तुम्हारी शरीयत और कुरआन के हिसाब से ही चलती तो केवल कुछ सालों में ही इसका वजूद मिट चुका होता. तुम अपने को मुसलमान कहते हो और दूसरे के धर्म को बुरा-भला कहते हो यही सब तुम्हारी कुरआन में लिखा है.दरअसल तुम्हें लगता है कि मैं तो मुसलमान बन कर फंस गया तो क्यों ना दूसरों को भी फंसायें. क्योंकि तुमने यदि धर्म परिवर्तन किया तो शायद तुम्हारी कौम के लोग तुम्हें निपटा देंगे.हिन्दू धर्म की धार्मिक पुस्तकों में ना तो कभी हिंदु शब्द प्रयोग किया है और ना ही किसी धर्म को बुरा बताया गया है.तुम अपने आप को हिन्दुस्तान की आवाज कहते हो – ये बताओ कि तुम हिन्दुस्तान में मुसलमान करने क्या आये थे. हिन्दुस्तान को लूटने. इसके बारे में तुम्हारा कुरआन क्या कहता है?वैसे हमारा मुँह ना ही खुलवाओ तो अच्छा है. नजरें झुका कर भी चलना मुहाल हो जायेगा.

  24. Sneha says:

    >सलीम जी,आप एक अनपढ से भी गये गुजरे हो. काफी समझाने के बाद अनपढ को बात समझ आ जाती है. लेकिन आपको नहीं आ रही. कुंए के मेंढक की कहानी पता है ना आपको जो अपने कुँए को दुनिया से बडा समझता था. क्योंकि उसने दुनिया देखी ही नहीं थी.और एक कहावत है कि – बढाई दुसरे ही करें तभी अच्छा लगता है. अपने गाल नहीं बजाने चाहिये और अपने मुँह मिंया मिठ्ठु नहीं बनना चाहिये.और एक बात बताती हूँ – आप इस धर्म के खेल में चीटिंग मत किजीये. खेलीये इस खेल को जिसका धर्म अच्छा होगा लोग उसकी तरफ अपने आप खिंचे चले आयेंगे.और रही बात हिंदु धर्म में महिलाओं के अवमूल्यन की. तो सुनो -… जब तालिबानियों ने स्वात घाटी में शरीयत कानून लागू किया था तो वहाँ रह रहे मुस्लिम लोगों की चूलें हिल गईं. टि.वी. में तुमने देखा ही होगा कि बुर्के (चलता फिरता टैंट हाऊस) में लिपटी महिलाओं के हिप्स पर कैसे कोडे बरसाये जा रहे थे. वैसे वो सब शरीयत के कानून के हिसाब से ही होगा. और वो कहीं ना कहीं आपकी कुरआन में भी लिखा होगा.तालीबानीयों ने लडकीयों के स्कूल तोड दिये गये. लडकीयों की शिक्षा पर प्रतिबंध लगा दिया. और उन अक्लबंद मुसलमानों ने महिलाओं का ईलाज केवल महिलायें ही करेंगी की शर्त रखी. अरे मुर्खों जब महिलायों की शिक्षा पर ही प्रतिबंध लगा दिया तो वो डाक्टर कैसे बनेंगी. काफी ईज्जत है इस्लाम में महिलाओं की.सलीम, यदि ये दुनिया तुम्हारी शरीयत और कुरआन के हिसाब से ही चलती तो केवल कुछ सालों में ही इसका वजूद मिट चुका होता. तुम अपने को मुसलमान कहते हो और दूसरे के धर्म को बुरा-भला कहते हो यही सब तुम्हारी कुरआन में लिखा है.दरअसल तुम्हें लगता है कि मैं तो मुसलमान बन कर फंस गया तो क्यों ना दूसरों को भी फंसायें. क्योंकि तुमने यदि धर्म परिवर्तन किया तो शायद तुम्हारी कौम के लोग तुम्हें निपटा देंगे.हिन्दू धर्म की धार्मिक पुस्तकों में ना तो कभी हिंदु शब्द प्रयोग किया है और ना ही किसी धर्म को बुरा बताया गया है.तुम अपने आप को हिन्दुस्तान की आवाज कहते हो – ये बताओ कि तुम हिन्दुस्तान में मुसलमान करने क्या आये थे. हिन्दुस्तान को लूटने. इसके बारे में तुम्हारा कुरआन क्या कहता है?वैसे हमारा मुँह ना ही खुलवाओ तो अच्छा है. नजरें झुका कर भी चलना मुहाल हो जायेगा.

  25. >jo kuchh bhi aap TV aadi par dehkte padhte ho. wah sab paschim prayojit hai… ye islam ke dhur-virodhi hai aur media par inhi ka prabhutv hai…. maslan sare TV chaneel aur zyadatar akhbaar paschim ke media partners se haanth milaye baithen… jaise Dainik Jagran yahoo se….to asaliyat jaanane ke liye aapko unke asali srot par jana hoga… internet par yah bahut aasaan hai aajkal

  26. >jo kuchh bhi aap TV aadi par dehkte padhte ho. wah sab paschim prayojit hai… ye islam ke dhur-virodhi hai aur media par inhi ka prabhutv hai…. maslan sare TV chaneel aur zyadatar akhbaar paschim ke media partners se haanth milaye baithen… jaise Dainik Jagran yahoo se….to asaliyat jaanane ke liye aapko unke asali srot par jana hoga… internet par yah bahut aasaan hai aajkal

  27. >सलीम तुम किस जाती प्रथा की बात करते हो , बताना जरा क्या तुम्हारे धर्म मे ये नही है। पहले घर की गन्दगी साफ कर लो फिर दुसरो की साफ करने की कोशिश करना। और तुम महिलाओं के अवमुल्यन की बात ना ही करो तो अच्छा होगा, चले हो महिलाओ की बात करने जरा सर्वे उठा के देख लेना तुम्हे पता चल जायेगा कि किस धर्म मे महिलाओं का अवमुल्यन हो रहा है। और ये भी बतना चाहुगां की प्रमाण वे देने की कोशिश करते है जिन्हे लगता है की वे गलत है, जब तुम्हारा धर्म इतना हि महान है तो बार-बार ये प्रमाणीत करने की क्या कोशिश करते रहते हो। ब्लोग पे ये फालतु की बात लिखना बन्दं कर दो। तुम लोग महिलाओं के अवमुल्यन की बात करते हो, याद है सानिया मिर्जा हाँ हाँ सानिया मिर्जा (टेनिस प्लेयर) जिसको तुम्हारे धर्म वालो ने कहा था की अगर स्कर्ट पहन के खेलोगी तो तुम्हारे खिलाफ हम फतवा जारि करदेगें तब सानिया ने क्या कहा था भुल गये क्या, कोई बात नही मै याद दिला देता हुं" उसने कहा था कि आप लोग फतवा जारि कारिये मै हिन्दु धर्म अपना लुगीं",। इससे पता तो तुम्हे चल हि गया होगा की महिलाओं का अवमुल्यन कहाँ हो रहा है।

  28. >सलीम तुम किस जाती प्रथा की बात करते हो , बताना जरा क्या तुम्हारे धर्म मे ये नही है। पहले घर की गन्दगी साफ कर लो फिर दुसरो की साफ करने की कोशिश करना। और तुम महिलाओं के अवमुल्यन की बात ना ही करो तो अच्छा होगा, चले हो महिलाओ की बात करने जरा सर्वे उठा के देख लेना तुम्हे पता चल जायेगा कि किस धर्म मे महिलाओं का अवमुल्यन हो रहा है। और ये भी बतना चाहुगां की प्रमाण वे देने की कोशिश करते है जिन्हे लगता है की वे गलत है, जब तुम्हारा धर्म इतना हि महान है तो बार-बार ये प्रमाणीत करने की क्या कोशिश करते रहते हो। ब्लोग पे ये फालतु की बात लिखना बन्दं कर दो। तुम लोग महिलाओं के अवमुल्यन की बात करते हो, याद है सानिया मिर्जा हाँ हाँ सानिया मिर्जा (टेनिस प्लेयर) जिसको तुम्हारे धर्म वालो ने कहा था की अगर स्कर्ट पहन के खेलोगी तो तुम्हारे खिलाफ हम फतवा जारि करदेगें तब सानिया ने क्या कहा था भुल गये क्या, कोई बात नही मै याद दिला देता हुं" उसने कहा था कि आप लोग फतवा जारि कारिये मै हिन्दु धर्म अपना लुगीं",। इससे पता तो तुम्हे चल हि गया होगा की महिलाओं का अवमुल्यन कहाँ हो रहा है।

  29. Sneha says:

    >वैसे सलीम जी,एक बात है, मेरे पास समय की कमी है अन्यथा आप यहाँ ठहर नहीं पाते. मेरे एक भी सवाल का जवाब आपने किसी भी पोस्ट में नहीं दिया. मेरे सवालों के जवाब में आप बगलें झांकते नजर आये हो. फिजुल की बातें करते हो कि पश्चिम से प्रायजित है और पता नहीं क्या क्या.लुटेरे ही तो थे मुसलमान जो हिन्दुस्तान में आये थे. धार लेने आये थे क्या यहाँ? नहीं. वो यहाँ लूटने आये थे क्योंकि उनके धर्म ने उन्हें यही सिखाया था. इस्लाम के हिसाब से वो सही था.अब तुम धर्म के संदर्भ में कोई और पोस्ट ना ही लिखो तो अच्छा है. वैसे तुम मानोगे तो नहीं.समाज को सुधारने का कार्य अपने परिवार से ही शुरू होता है. इसलिये आप दूसरों को नसीहत देने से बाज आयें.मेनें एक मुसलमान दोस्त से पूछा कि तुम्हारे यहाँ औरतें मस्जिद में नमाज पढने क्यों नहीं जाती. तो उसने खिसीयाते हुए जो जवाब दिया वो शायद यहाँ लिखना बेशर्मी होगा.तुम्हें शर्म आनी चाहिये.अब दो कोई फिजुल का बेसिर पैर का तर्क. वैसे दवा बिमार को खानी चाहिये. और तुम दवाई खाने के बजाय दूसरों को खाने की नसीहत दे रहे हो. वैसे दवाई की विश्वसनीयता की जाँच भी करने योग्य कार्य है.समझ में आया या फिर अभी भी वही कुरआन, जाति, धर्म, हिन्दू इनके चंगुल में ही फँसे हो?

  30. Sneha says:

    >वैसे सलीम जी,एक बात है, मेरे पास समय की कमी है अन्यथा आप यहाँ ठहर नहीं पाते. मेरे एक भी सवाल का जवाब आपने किसी भी पोस्ट में नहीं दिया. मेरे सवालों के जवाब में आप बगलें झांकते नजर आये हो. फिजुल की बातें करते हो कि पश्चिम से प्रायजित है और पता नहीं क्या क्या.लुटेरे ही तो थे मुसलमान जो हिन्दुस्तान में आये थे. धार लेने आये थे क्या यहाँ? नहीं. वो यहाँ लूटने आये थे क्योंकि उनके धर्म ने उन्हें यही सिखाया था. इस्लाम के हिसाब से वो सही था.अब तुम धर्म के संदर्भ में कोई और पोस्ट ना ही लिखो तो अच्छा है. वैसे तुम मानोगे तो नहीं.समाज को सुधारने का कार्य अपने परिवार से ही शुरू होता है. इसलिये आप दूसरों को नसीहत देने से बाज आयें.मेनें एक मुसलमान दोस्त से पूछा कि तुम्हारे यहाँ औरतें मस्जिद में नमाज पढने क्यों नहीं जाती. तो उसने खिसीयाते हुए जो जवाब दिया वो शायद यहाँ लिखना बेशर्मी होगा.तुम्हें शर्म आनी चाहिये.अब दो कोई फिजुल का बेसिर पैर का तर्क. वैसे दवा बिमार को खानी चाहिये. और तुम दवाई खाने के बजाय दूसरों को खाने की नसीहत दे रहे हो. वैसे दवाई की विश्वसनीयता की जाँच भी करने योग्य कार्य है.समझ में आया या फिर अभी भी वही कुरआन, जाति, धर्म, हिन्दू इनके चंगुल में ही फँसे हो?

  31. mythbuster says:

    >प्रिय कैरानवी,मैंने एक सत्य कहा अब मुझे क्या पता था आप को इतना कड़वा लगेगा, पर इतना याद रखें तर्क का जवाब तर्क ही है गाली नहीं. क्या मैंने कहीं लिखा है कि मैं परिवार में यकीन नहीं रखता.मुझे हिन्दी टाइप नहीं आती और LIPIKAAR से टाइप करने में बहुत समय लगता है.roman mein hindi tumko chalegi kya?ek baar phir socho ki jyaada nahi 15000-20000 saal pehle aadmi to tha par na koi language thi na koi lipi,na koi dharm ya mazhab aur na hi koi ishwar.yeh sab cheezen aadmi ke dimaag ki hi upaj hain.aur nastik hona koi gunaah nahi badi himmat chahiye iske liye jo dakiyanooson aur lakeer ke fakiron ke pas nahi hoti.

  32. mythbuster says:

    >प्रिय कैरानवी,मैंने एक सत्य कहा अब मुझे क्या पता था आप को इतना कड़वा लगेगा, पर इतना याद रखें तर्क का जवाब तर्क ही है गाली नहीं. क्या मैंने कहीं लिखा है कि मैं परिवार में यकीन नहीं रखता.मुझे हिन्दी टाइप नहीं आती और LIPIKAAR से टाइप करने में बहुत समय लगता है.roman mein hindi tumko chalegi kya?ek baar phir socho ki jyaada nahi 15000-20000 saal pehle aadmi to tha par na koi language thi na koi lipi,na koi dharm ya mazhab aur na hi koi ishwar.yeh sab cheezen aadmi ke dimaag ki hi upaj hain.aur nastik hona koi gunaah nahi badi himmat chahiye iske liye jo dakiyanooson aur lakeer ke fakiron ke pas nahi hoti.

  33. >@ पाठक गणसलीम खान ठीक कह रहे भाई , सभी न्यूज़ चैनल पश्चिम प्रायोजित हैं …………..वैसे ही जैसे इनका ब्लॉग अरब देशों और मुहम्मद साहब के द्वारा प्रायोजित हैं |क्योंं सलीम मियां ठीक कहाँ न मैंने …………..बीन बजाना बंद नहीं करूंगा तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..(भाई कुश से धुनें उधार ली हुई हैं )

  34. >@ पाठक गणसलीम खान ठीक कह रहे भाई , सभी न्यूज़ चैनल पश्चिम प्रायोजित हैं …………..वैसे ही जैसे इनका ब्लॉग अरब देशों और मुहम्मद साहब के द्वारा प्रायोजित हैं |क्योंं सलीम मियां ठीक कहाँ न मैंने …………..बीन बजाना बंद नहीं करूंगा तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..तू रु.. रु रु.. रु रु रु रु..(भाई कुश से धुनें उधार ली हुई हैं )

  35. >slam Respects Women as Equals@ सलीम भाई केवल एक नज़र इस लेख पर भी डाल ले …………….The Myth: The Qur’an places men and women on equal foundation before Allah. Each person is judged according to his or her own deeds. Women have equal rights under Islamic law. The Truth: Merely stating that individuals will be judged as such by Allah does not mean that they have equal rights and roles, or that they are judged by the same standards.There is no ambiguity in the Qur’an, the life of Muhammad, or Islamic law as to the inferiority of women to men, despite the efforts of modern-day apologists to salvage Western-style feminism from scraps and fragments of verses that have historically held no such progressive interpretation.After military conquests, Muhammad would dole out captured women as war prizes to his men. In at least one case, he advocated that they be raped in front of their husbands. Captured women were made into sex slaves by the very men who killed their husbands and brothers. There are four Qur’anic verses in which "Allah" makes clear that a Muslim master has full sexual access to his female slaves, yet there is not one that prohibits rape.The Qur’an gives Muslim men permission to beat their wives for disobedience. It plainly says that husbands are “a degree above” wives. The Hadith says that women are intellectually inferior, and that they comprise the majority of Hell’s occupants.Under Islamic law, a man may divorce his wife at the drop of a hat. If he does this twice, then wishes to remarry her, she must first have sex with another man. Men are exempt from such degradations.Muslim women are not free to marry whomever they please, as are Muslim men. Their husband may also bring other wives (and slaves) into the marriage bed. And she must be be sexually available to him at any time (as a field ready to be “tilled,” according to the holy book of Islam).Muslim women do not inherit property in equal portions to males. Their testimony in court is considered to be worth only half that of a man’s. Unlike a man, she must cover her head – and often her face.If a woman wants to prove that she was raped, then there must be four male witnesses to corroborate her account. Otherwise she can be jailed or stoned to death for confessing to “adultery.”Given all of this, it is quite a stretch to say that men and women have “equality under Islam” based on obscure theological analogies or comparisons. This is an entirely new ploy that may be designed for modern tastes, but is in sharp disagreement with the reality of Islamic law and history.वाकई इस्लाम ने महिलाओं को सामान अधिकार दियें हैं ………..मान गए भाई इस्लाम में महिलाओं की बड़ी इज्जत होती हैं ………….. इससे बड़ी क्या होगी …………………………………🙂

  36. >slam Respects Women as Equals@ सलीम भाई केवल एक नज़र इस लेख पर भी डाल ले …………….The Myth: The Qur’an places men and women on equal foundation before Allah. Each person is judged according to his or her own deeds. Women have equal rights under Islamic law. The Truth: Merely stating that individuals will be judged as such by Allah does not mean that they have equal rights and roles, or that they are judged by the same standards.There is no ambiguity in the Qur’an, the life of Muhammad, or Islamic law as to the inferiority of women to men, despite the efforts of modern-day apologists to salvage Western-style feminism from scraps and fragments of verses that have historically held no such progressive interpretation.After military conquests, Muhammad would dole out captured women as war prizes to his men. In at least one case, he advocated that they be raped in front of their husbands. Captured women were made into sex slaves by the very men who killed their husbands and brothers. There are four Qur’anic verses in which "Allah" makes clear that a Muslim master has full sexual access to his female slaves, yet there is not one that prohibits rape.The Qur’an gives Muslim men permission to beat their wives for disobedience. It plainly says that husbands are “a degree above” wives. The Hadith says that women are intellectually inferior, and that they comprise the majority of Hell’s occupants.Under Islamic law, a man may divorce his wife at the drop of a hat. If he does this twice, then wishes to remarry her, she must first have sex with another man. Men are exempt from such degradations.Muslim women are not free to marry whomever they please, as are Muslim men. Their husband may also bring other wives (and slaves) into the marriage bed. And she must be be sexually available to him at any time (as a field ready to be “tilled,” according to the holy book of Islam).Muslim women do not inherit property in equal portions to males. Their testimony in court is considered to be worth only half that of a man’s. Unlike a man, she must cover her head – and often her face.If a woman wants to prove that she was raped, then there must be four male witnesses to corroborate her account. Otherwise she can be jailed or stoned to death for confessing to “adultery.”Given all of this, it is quite a stretch to say that men and women have “equality under Islam” based on obscure theological analogies or comparisons. This is an entirely new ploy that may be designed for modern tastes, but is in sharp disagreement with the reality of Islamic law and history.वाकई इस्लाम ने महिलाओं को सामान अधिकार दियें हैं ………..मान गए भाई इस्लाम में महिलाओं की बड़ी इज्जत होती हैं ………….. इससे बड़ी क्या होगी …………………………………🙂

  37. >इस्लाम की और अद्भुत खूबियाँ जो और किसी धर्मो में नहीं हैं जाननी हो तो निचे दिए गए लिंक पर क्लिक करे…………..click here रोजेदारों का प्रवेश वर्जित है ……………आखिर सच्चाई एक न एक दिन सामने आ ही जाती है |🙂

  38. >इस्लाम की और अद्भुत खूबियाँ जो और किसी धर्मो में नहीं हैं जाननी हो तो निचे दिए गए लिंक पर क्लिक करे…………..click here रोजेदारों का प्रवेश वर्जित है ……………आखिर सच्चाई एक न एक दिन सामने आ ही जाती है |🙂

  39. >@Sneha…यह घोर निकृष्ट सोच है कि भारत का हिन्दू शक और हूणों को विदेशी और आक्रांता नहीं कहता है और न आर्यों को ही जिन्होंने 60 हजार अनार्यों का कत्लेआम किया था। शक, हूण, कुषान तीनों ही बाहरी हत्यारे आक्रांता थे पर वे भारत में बस गये। इन आक्रांताओं और मुगलों में क्या अंतर है फिर मुगलों को आक्रांता कहना कितनी बेइमानी की बात है। सच बात तो यह है कि मुगलों ने तो कोई कत्लेआम भी नहीं किया। अकबर ने तो सर्वधर्म समभाव की भावना से प्रेरित होकर दीन ए इलाही चलाया था। औरंगजेब जिस प्रकार बदनाम किया जाता है वह घृणा भाव के कारण बदनाम किया जाता है वरना अनेक हिन्दू उसके दरबार में उच्च पदों पर थे। अनेक मंदिरों के लिए उसने शाही खजाने से धन दिया था। उसे 'जजिया कर' के लिए बदनाम किया जाता है पर जजिया तो उसने मुसलमानों पर भी लगाया था। औरंगजेब ने कोई मंदिर नहीं तुड़वाया बल्कि अनेक उदाहरण ऐसे भी मिल जायेंगे जहां स्वयं हिन्दू राजाओं द्वारा मंदिरों को ध्वस्त कराया गया था। कश्मीर के राजा हर्ष ने तो अनेक मूर्तियों को तुड़वाया था। मौर्य शासकों ने तो तमाम हिन्दू मूर्तियों को पिघला कर सिक्कों के लिए धातु इकट्ठी करायी थी। खोजने पर नये तथ्य प्रकट हुए हैं कि भारत का इतिहास अंग्रेजों ने कम और हिन्दू लेखकों ने अधिक झूठे तथ्य घुसेड़ कर साम्प्रदायिक बनाया है और मुसलमानों के प्रति विषवमन किया है। विशम्भर नाथ पांडे पूर्व राज्यपाल उड़ीसा ने लिखा कि वे जब टीपू सुल्तान पर शोध कर रहे थे तो एक छात्रा के पास पुस्तक देखी, जिसमें लिखा था कि टीपू सुल्तान ने तीन हजार ब्राह्मणों को बलात इस्लाम धर्म कुबूल करने को विवश किया था और तीन हजार ब्राह्मणों ने आत्महत्या कर ली थी। यह लेख एक हिन्दू लेखक पंडित हरप्रसाद शास्त्री का लिखा हुआ था। विशम्भर दयाल पांडे ने पं. हर प्रसाद से लिख कर पूछा कि यह कहां पर लिखा है तो हर प्रसाद ने कहा कि यह मैसूर के गजट में लिखा है पर गजट देखा गया, तो गजट में यह तथ्य कहीं नहीं पाया गया। इस प्रकार हिन्दू लेखकों ने मुसलमान बादशाहों के बारे में वैमनश्यतावश बहुत कुछ झूठ लिखा है। यही औरंगजेब के बारे में भी है। टीपू के बारे में तो यह प्रसिद्ध है कि उसका सेनापति ब्राह्मण था, वह 150 मंदिरों को प्रतिवर्ष अनुदान देता था, और श्रृंगेरी के जगतगुरु को बहुत मान्यता देता था। इससे साबित होता है कि इतिहास जानबूझ कर अंग्रेज लेखकों ने नहीं हिन्दू लेखकों ने ही झूठ लिखा है।

  40. >@Sneha…यह घोर निकृष्ट सोच है कि भारत का हिन्दू शक और हूणों को विदेशी और आक्रांता नहीं कहता है और न आर्यों को ही जिन्होंने 60 हजार अनार्यों का कत्लेआम किया था। शक, हूण, कुषान तीनों ही बाहरी हत्यारे आक्रांता थे पर वे भारत में बस गये। इन आक्रांताओं और मुगलों में क्या अंतर है फिर मुगलों को आक्रांता कहना कितनी बेइमानी की बात है। सच बात तो यह है कि मुगलों ने तो कोई कत्लेआम भी नहीं किया। अकबर ने तो सर्वधर्म समभाव की भावना से प्रेरित होकर दीन ए इलाही चलाया था। औरंगजेब जिस प्रकार बदनाम किया जाता है वह घृणा भाव के कारण बदनाम किया जाता है वरना अनेक हिन्दू उसके दरबार में उच्च पदों पर थे। अनेक मंदिरों के लिए उसने शाही खजाने से धन दिया था। उसे 'जजिया कर' के लिए बदनाम किया जाता है पर जजिया तो उसने मुसलमानों पर भी लगाया था। औरंगजेब ने कोई मंदिर नहीं तुड़वाया बल्कि अनेक उदाहरण ऐसे भी मिल जायेंगे जहां स्वयं हिन्दू राजाओं द्वारा मंदिरों को ध्वस्त कराया गया था। कश्मीर के राजा हर्ष ने तो अनेक मूर्तियों को तुड़वाया था। मौर्य शासकों ने तो तमाम हिन्दू मूर्तियों को पिघला कर सिक्कों के लिए धातु इकट्ठी करायी थी। खोजने पर नये तथ्य प्रकट हुए हैं कि भारत का इतिहास अंग्रेजों ने कम और हिन्दू लेखकों ने अधिक झूठे तथ्य घुसेड़ कर साम्प्रदायिक बनाया है और मुसलमानों के प्रति विषवमन किया है। विशम्भर नाथ पांडे पूर्व राज्यपाल उड़ीसा ने लिखा कि वे जब टीपू सुल्तान पर शोध कर रहे थे तो एक छात्रा के पास पुस्तक देखी, जिसमें लिखा था कि टीपू सुल्तान ने तीन हजार ब्राह्मणों को बलात इस्लाम धर्म कुबूल करने को विवश किया था और तीन हजार ब्राह्मणों ने आत्महत्या कर ली थी। यह लेख एक हिन्दू लेखक पंडित हरप्रसाद शास्त्री का लिखा हुआ था। विशम्भर दयाल पांडे ने पं. हर प्रसाद से लिख कर पूछा कि यह कहां पर लिखा है तो हर प्रसाद ने कहा कि यह मैसूर के गजट में लिखा है पर गजट देखा गया, तो गजट में यह तथ्य कहीं नहीं पाया गया। इस प्रकार हिन्दू लेखकों ने मुसलमान बादशाहों के बारे में वैमनश्यतावश बहुत कुछ झूठ लिखा है। यही औरंगजेब के बारे में भी है। टीपू के बारे में तो यह प्रसिद्ध है कि उसका सेनापति ब्राह्मण था, वह 150 मंदिरों को प्रतिवर्ष अनुदान देता था, और श्रृंगेरी के जगतगुरु को बहुत मान्यता देता था। इससे साबित होता है कि इतिहास जानबूझ कर अंग्रेज लेखकों ने नहीं हिन्दू लेखकों ने ही झूठ लिखा है।

  41. haal-ahwaal says:

    >shikwa allah se khakim badahan hai mujhko…..allama iqbaal ka likha aur nusrat fateh ali khan ka gaaya suna hai ki nahi aapne?????na suna ho to kahiye bhijwa du aapko???

  42. haal-ahwaal says:

    >shikwa allah se khakim badahan hai mujhko…..allama iqbaal ka likha aur nusrat fateh ali khan ka gaaya suna hai ki nahi aapne?????na suna ho to kahiye bhijwa du aapko???

  43. neeshoo says:

    >प्रिय सलीम मैंने आपकी दोनों पोस्टें पढ़ी । एक युवा नागरिक की जोशीली और प्रमाणिक तथ्तपूर्ण बातें बहुत हद तक सत्यता के करीब लगी । परन्तु दोस्त मैं आपको जिस हद तक समझ पाया हूँ उससे एक बात तो पक्की है कि आप ने काफी कुछ किताबों और लेखों का गहनता से अध्य्यन किया है । आप केवल आंकडें पर ही ज्यादा ध्यान देते हैं । परन्तु सामाजिक बदलाव को जरा भी स्वीकार नहीं करना चाहते हैं । आप वर्तमान में हो रहे बदलाव को भी स्वीकार करें । और साथ किसी बुराई को यदि जाति , धर्म , देश या समाज से परे हट कर देखें तो यह बहुत ही खुशी वाली बात होगी । मैं धर्म के बंधन को नहीं मानता साथ किसी धर्म से जुड़ी हुई बुराई को दूर करने का प्रयास करता हूँ । चाहे वो किसी भी समाज से हो । भारत में आपको भी पता है कि जाति प्रथा और दहेज जैसी समस्या का बढ़ाव तेजी से आगे बढ़ रहा है । और नारी की दशा से हम सभी वाकिफ है । जो कि आज भी बेहतर तो नहीं ही कही जा सकती है । तो यहां मैं इस समस्या को किसी धर्म से न जोड़ते हुए देखता हूँ । आपने जो भी प्रश्न किये वह जायज हैं पर धर्म को बीच में लाकर कहीं न कहीं संकुचित मानसिकता के शिकार भी लगते हैं । दोस्त मैं आपकी बुराई न कर रहा हूँ मेरा अभिप्राय मात्र हम सभी युवाओं से एक नयी सोच को आगे बढ़ाना होना चाहिए ।मुझे इस बात का दुख है कि लोगों को मात्र आलोचना करना ही आता है । किसी भी प्रयास के लिए कदम न बढ़ाना ही शायद बेहतर समझते होगें । धन्यवाद

  44. neeshoo says:

    >प्रिय सलीम मैंने आपकी दोनों पोस्टें पढ़ी । एक युवा नागरिक की जोशीली और प्रमाणिक तथ्तपूर्ण बातें बहुत हद तक सत्यता के करीब लगी । परन्तु दोस्त मैं आपको जिस हद तक समझ पाया हूँ उससे एक बात तो पक्की है कि आप ने काफी कुछ किताबों और लेखों का गहनता से अध्य्यन किया है । आप केवल आंकडें पर ही ज्यादा ध्यान देते हैं । परन्तु सामाजिक बदलाव को जरा भी स्वीकार नहीं करना चाहते हैं । आप वर्तमान में हो रहे बदलाव को भी स्वीकार करें । और साथ किसी बुराई को यदि जाति , धर्म , देश या समाज से परे हट कर देखें तो यह बहुत ही खुशी वाली बात होगी । मैं धर्म के बंधन को नहीं मानता साथ किसी धर्म से जुड़ी हुई बुराई को दूर करने का प्रयास करता हूँ । चाहे वो किसी भी समाज से हो । भारत में आपको भी पता है कि जाति प्रथा और दहेज जैसी समस्या का बढ़ाव तेजी से आगे बढ़ रहा है । और नारी की दशा से हम सभी वाकिफ है । जो कि आज भी बेहतर तो नहीं ही कही जा सकती है । तो यहां मैं इस समस्या को किसी धर्म से न जोड़ते हुए देखता हूँ । आपने जो भी प्रश्न किये वह जायज हैं पर धर्म को बीच में लाकर कहीं न कहीं संकुचित मानसिकता के शिकार भी लगते हैं । दोस्त मैं आपकी बुराई न कर रहा हूँ मेरा अभिप्राय मात्र हम सभी युवाओं से एक नयी सोच को आगे बढ़ाना होना चाहिए ।मुझे इस बात का दुख है कि लोगों को मात्र आलोचना करना ही आता है । किसी भी प्रयास के लिए कदम न बढ़ाना ही शायद बेहतर समझते होगें । धन्यवाद

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: