स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़

Icon

सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>इस्लामिक बैंकिंग प्रणाली भारत के हित में: RBI निदेशक Islamic Banking System is better for India

>

RBI के भूतपूर्व निदेशक का कहना है कि “बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 में बदलाव किये बिना ही भारत में इस्लामिक बैंकिंग प्रणाली लागू की जा सकती है. अल्पाधिकार प्राप्त लोगों के लिए एवम् अधिकारहीन और हाशिये के लोगों के लिए इस्लामिक बैंकिंग प्रणाली वरदान साबित होगी.”
भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व निदेशक जनाब अब्दुल हसीब मुंबई में जमाते-इस्लामी हिंदी के तत्वाधान में आयोजित एक सेमीनार ‘Global Financial Crisis and Islamic Economic System’ / ‘विश्वव्यापी वित्तीय संकट और इस्लामी आर्थिक प्रणाली‘ में संबोधित कर रहे थे. भारत में इस्लामी आर्थिक प्रणाली की वक़ालत में उनका कहना था कि “रघुराम राजन कमिटी ने आर्थिक सेक्टर में सुधार हेतु जो तथ्य दिए उसमें इस्लामिक बैंकिंग प्रणाली ही सबसे उपयुक्त बताई है. भारत के आर्थिक क्षेत्र में सुधार हेतु इस्लामिक बैंकिंग प्रणाली को लागू करना सबसे बेहतर और कारगर काम होगा.” उन्होंने इस्लामिक बैंकिंग प्रणाली और ब्याज रहित बैंकिंग प्रणाली में भी जानकारी और कहा कि दुनिया के बहुत से देश यह ब्याज रहित बैंकिंग प्रणाली अपना चुके हैं और वह कारगर भी है. नयी सदी में जबकि दुनिया में मंदी का दौर चल रहा है और सभी आर्थिक विपत्तियों से जूझ रहे हैं, इसके लिए ज़रूरि है कि इसका हल सोचा जाये.

इस्लामिक बैंकिंग और आर्थिक प्रणाली की ख़ूबी यह है कि वह अप्रभावित है और उससे भी बड़ी विशेषता है कि वह ‘केयरिंग और शेयरिंग’, पारदर्शी एवम् इंसानी सिद्धांत और उसूलों के क़रीब है.”, इस्लामिक बैंकिंग की राष्ट्रीय कमिटी के संयोजक जनाब अब्दुर-रकीब ने टिपण्णी करी, “जबकि जापान, फ्रांस, इंग्लैंड और दीगर मुल्क़ अरबों डॉलर के व्यापार के लिए आर्थिक उदारीकरण को अपनाकर स्वागत कर रहें हैं तो हम क्यूँ नहीं कर सकते”, उन्होंने आगे तर्क दिया.

उन्होंने यह भी सफाई दी कि जिन लोगों के मन में यह है कि यह आर्थिक प्रणाली केवल मुस्लिम के लिए है तो यह गलत है क्यूंकि यह प्रणाली पुरे विश्वस्तर पर कामयाब है और भारत के लिए भी इंशा-अल्लाह होगी. इस्लामिक बैंकिंग और आर्थिक प्रणाली पूरे इंसानियत के हित में है.

अपारदर्शिता और ब्याज ने आर्थिक विपत्तियों को और अधिक बढावा दिया है, जिसके चलते अरबों डॉलर का नुकसान हो चुका है.”, डॉ. शरीक़ निसार (अर्थशास्त्री व इस्लामिक बैंकिंग प्रणाली के ज्ञाता) ने विश्लेषित किया. उन्होंने इस्लामिक बैंकिंग प्रणाली के अंगों व प्रोडक्ट्स को बताते हुए कहा कि इनमें मुख्यतया मुदाराभा (speculation), कर्द-ए-हसना (Interest Free Loan), इजारा (Leasing) आदि हैं. लोगों को वैकल्पिक आर्थिक प्रणाली का अध्ययन करना चाहिए ताकी वे जान सकें कि यह मौजूदा बैंकिंग प्रणाली से बेहतर है

इस सेमीनार में मौलाना रियाज़ अहमद खान (उपाध्यक्ष, जमात-ए-इस्लामी हिंद, महाराष्ट्र), डॉ. रहमतुल्लाह (अर्थशास्त्री), जे. ऍफ़ पाटिल (हेड ऑफ़ इकनॉमिक डिपार्टमेन्ट, कोल्हापुर यूनिवर्सिटी) भी शरीक हुए और अपने विचार प्रस्तुत किये.

-Saleem Khan

Filed under: इस्लाम, इस्लामिक बैंकिंग प्रणाली

20 Responses

  1. >सलीम साहेब, आप हरफनमौला हैं. विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, अर्थशास्त्र, समाज-शास्त्र, वेद-शास्त्र, कुरआन, आन, बान, शान, खान-पान, परिधान, उठान, बैठान, मचान, दीवान,….आपको सबका ज्ञान है आपके पास. हमारे बीच हैं, इसका एहसान हिंदी ब्लागिंग को मानना पड़ेगा एकदिन.अब मोहम्मद साहेब आते होंगे…अरे आप गलत समझ बैठे. वे अब कैसे आयेंगे? मैं कैरानवी की बात कर रहा हूँ. आपके आधे चूतियापे को वे पूरा करेंगे…क्या कहा? कैसे?…वही अल्ल, बल्ल, सल्ल…ऐसा ही कुछ लिखते हैं न वे.

  2. Santosh says:

    >सलीम साहेब, आप हरफनमौला हैं. विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, अर्थशास्त्र, समाज-शास्त्र, वेद-शास्त्र, कुरआन, आन, बान, शान, खान-पान, परिधान, उठान, बैठान, मचान, दीवान,….आपको सबका ज्ञान है आपके पास. हमारे बीच हैं, इसका एहसान हिंदी ब्लागिंग को मानना पड़ेगा एकदिन.अब मोहम्मद साहेब आते होंगे…अरे आप गलत समझ बैठे. वे अब कैसे आयेंगे? मैं कैरानवी की बात कर रहा हूँ. आपके आधे चूतियापे को वे पूरा करेंगे…क्या कहा? कैसे?…वही अल्ल, बल्ल, सल्ल…ऐसा ही कुछ लिखते हैं न वे.

  3. >mujhe aap logon kii aalochnaon se bhi kuchh na kuchh sikhne ko milta hai. misaal ke taur par santosh bhai saheb jo ki mujhe aisa lagta hai unhe yah zaroorat nahi ki unhen islam ke bare men bataya jaye… balki unhe hindu darshan ke bare mne bhi ABCD se shuru karke batana padega…t chaliye santosh bhai aap ko main batata hoon, ved ka brahm sutr…"ekam brahma dwitiyo nasti, nehmye naasti…."

  4. >mujhe aap logon kii aalochnaon se bhi kuchh na kuchh sikhne ko milta hai. misaal ke taur par santosh bhai saheb jo ki mujhe aisa lagta hai unhe yah zaroorat nahi ki unhen islam ke bare men bataya jaye… balki unhe hindu darshan ke bare mne bhi ABCD se shuru karke batana padega…t chaliye santosh bhai aap ko main batata hoon, ved ka brahm sutr…"ekam brahma dwitiyo nasti, nehmye naasti…."

  5. >मुझे आप लोगों की आलोचनाओं से भी कुछ न कुछ सीखने को मिलता है. मिसाल के तौर पर संतोष भाई साहेब जो कि मुझे ऐसा लगता है उन्हें यह ज़रुरत नहीं कि अभी उन्हें इस्लाम के बारे में बताया जाये .. बल्कि उन्हें हिन्दू दर्शन के बारे में भी ABCD से शुरू करके बताना पड़ेगा…तो चलिए संतोष भाई आप को मैं बताता हूँ, वेद का ब्रह्म सूत्र …"एकं ब्रह्म द्वितीयो नास्ति, नेह्म्ये नास्ति…."अर्थात ईश्वर एक ही है, दूसरा नहीं है. नहीं है, नहीं है, ज़रा भी नहीं है…..बकिया अगले दिन…वन्दे-ईश्वरम

  6. >मुझे आप लोगों की आलोचनाओं से भी कुछ न कुछ सीखने को मिलता है. मिसाल के तौर पर संतोष भाई साहेब जो कि मुझे ऐसा लगता है उन्हें यह ज़रुरत नहीं कि अभी उन्हें इस्लाम के बारे में बताया जाये .. बल्कि उन्हें हिन्दू दर्शन के बारे में भी ABCD से शुरू करके बताना पड़ेगा…तो चलिए संतोष भाई आप को मैं बताता हूँ, वेद का ब्रह्म सूत्र …"एकं ब्रह्म द्वितीयो नास्ति, नेह्म्ये नास्ति…."अर्थात ईश्वर एक ही है, दूसरा नहीं है. नहीं है, नहीं है, ज़रा भी नहीं है…..बकिया अगले दिन…वन्दे-ईश्वरम

  7. >दर्शन बहुत बड़ी बात है. दर्शन का ज्ञान नाक की सीध में चलकर नहीं पाया जा सकता. आप नाक की सीध में चलते हैं और दर्शन के बारे में लेक्चर देते हैं. ऐसा न करें.दुनियाँ की सारी आर्थिक समस्याओं का समाधान आप इस्लामिक बैंकिंग में खोजेंगे तो कैसे चलेगा जी? अगर अल्पाधिकार और हाशिये के लोगों की समस्याओं का समाधान केवल इस्लामिक बैंकिंग में है तो ऐसा क्यों है कि अफ्रीका के मुस्लिम देशों से लेकर पकिस्तान और बांग्लादेश में हाशिये के लोगों की हालत खराब है. बैकिंग की कितनी जानकारी है आपको? ब्याज-रहित बैंकिंग प्रणाली क्या है? ब्याज-रहित बैंकिंग प्रणाली क्यों अपनाई जाती है? किन हालातों में अपनाई जाती है? आपको इसका कुछ ज्ञान है? इस्लामिक बैंकिंग में बैंक से लिए गए ऋण कहाँ-कहाँ, किन धंधों में लगाये जा सकते हैं, इसका ज्ञान है आपको? इस्लामिक बैंकों से लिए गए ऋण को रेगुलेट करने का काम अगर बैंक करेगा तो फिर विकास का क्या होगा जी? आपको क्या लगता है? अरब देशों में इस्लामिक बैंकिंग प्रणाली चलती है? जिन मुस्लिम देशों ने विकास किया है, वहां क्या विकास इस्लामिक बैंकिंग के जरिये से हुआ है? जिस विषय की जानकारी नहीं है, उसके बारे में लेक्चर क्यों देते हैं?

  8. Santosh says:

    >दर्शन बहुत बड़ी बात है. दर्शन का ज्ञान नाक की सीध में चलकर नहीं पाया जा सकता. आप नाक की सीध में चलते हैं और दर्शन के बारे में लेक्चर देते हैं. ऐसा न करें.दुनियाँ की सारी आर्थिक समस्याओं का समाधान आप इस्लामिक बैंकिंग में खोजेंगे तो कैसे चलेगा जी? अगर अल्पाधिकार और हाशिये के लोगों की समस्याओं का समाधान केवल इस्लामिक बैंकिंग में है तो ऐसा क्यों है कि अफ्रीका के मुस्लिम देशों से लेकर पकिस्तान और बांग्लादेश में हाशिये के लोगों की हालत खराब है. बैकिंग की कितनी जानकारी है आपको? ब्याज-रहित बैंकिंग प्रणाली क्या है? ब्याज-रहित बैंकिंग प्रणाली क्यों अपनाई जाती है? किन हालातों में अपनाई जाती है? आपको इसका कुछ ज्ञान है? इस्लामिक बैंकिंग में बैंक से लिए गए ऋण कहाँ-कहाँ, किन धंधों में लगाये जा सकते हैं, इसका ज्ञान है आपको? इस्लामिक बैंकों से लिए गए ऋण को रेगुलेट करने का काम अगर बैंक करेगा तो फिर विकास का क्या होगा जी? आपको क्या लगता है? अरब देशों में इस्लामिक बैंकिंग प्रणाली चलती है? जिन मुस्लिम देशों ने विकास किया है, वहां क्या विकास इस्लामिक बैंकिंग के जरिये से हुआ है? जिस विषय की जानकारी नहीं है, उसके बारे में लेक्चर क्यों देते हैं?

  9. >सलीम जी,सबसे पहले तो आपको बधाई । क्‍यो ? क्‍योंकि :- एक ही विषय पर इतने एकरुपता से लगातार अपने विचार रखते जाने के लिए। दूसरे अपना ब्‍लॉग का नाम “स्‍वच्‍छ संदेश- हिंदोस्‍तां की आवाज” रखने के लिए। जबकि वस्‍तुत: इसका नाम “इस्‍लामिक संदेश: भारत के दयालु हिंदुओं” के लिए होना चाहिए था। तीसरा यह कि आप भारत में पैदा हुए मुसलमान हैं यदि अरब में पैदा हुए हिंदु (क्‍या ऐसा हो सकता है) होते तो ऐसे विचारों के लिए आपका सर कलम कर दिया जाता। चौथे इसलिए कि जैसे आप यहां हिंदु धर्म के बारे में भेदों (वर्ण सम्‍प्रदाय की बात करते हैं) में महारत दिखाते हैं वैसी महारत शिया, सुन्‍नी, अहमदिया आदि के बारे में और अब तक लखनऊ में इन शिया सुन्नियों के दंगों के बारे कहीं दिखाई नहीं दी। पांचवे इसलिए कि यदि आप इस सनातन धर्म को थोडा बहुत ही जान पाते तो जान सकते कि दया, मानवता,विश्‍व बंधुत्‍व जैसे गुण क्‍या होते हैं और क्‍यों हिंदुओं ने बिना आतताई होते हुए, बिना चंगेज खान और औरंगजेब पैदा किए अपने अस्तित्‍व को बचाए रखा बल्कि दुनिया के सबसे बडे धर्मों में से एक रहा। क्‍यों हिंदु धर्म दुनिया के सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है और क्‍यों इस बरगद रुपी धर्म में से असंख्‍य धर्मों की शाखाएं फैलीं। सारी बधाइयों के बाद मैं आपसे सिर्फ इतना और कहना चाहता हूँ कि उर्वरता और महानता वह होती है जो अपने आसपास के पेडों और घास को पनपाने में सहायक हो, किसी ऐसे दूसरे धर्म की तरह नहीं कि पूरा का पूरा इलाका बंजर रेगिस्‍तान हो जाए, जहां दूर दूर तक एक दरख्‍त भी (अर्थात दूसरा धर्म) न हो। उम्‍मीद है कि आगे आप जो भी लेख लिखेंगें इन आखिरी पंक्तियों को याद रखेगें।

  10. >सलीम जी,सबसे पहले तो आपको बधाई । क्‍यो ? क्‍योंकि :- एक ही विषय पर इतने एकरुपता से लगातार अपने विचार रखते जाने के लिए। दूसरे अपना ब्‍लॉग का नाम “स्‍वच्‍छ संदेश- हिंदोस्‍तां की आवाज” रखने के लिए। जबकि वस्‍तुत: इसका नाम “इस्‍लामिक संदेश: भारत के दयालु हिंदुओं” के लिए होना चाहिए था। तीसरा यह कि आप भारत में पैदा हुए मुसलमान हैं यदि अरब में पैदा हुए हिंदु (क्‍या ऐसा हो सकता है) होते तो ऐसे विचारों के लिए आपका सर कलम कर दिया जाता। चौथे इसलिए कि जैसे आप यहां हिंदु धर्म के बारे में भेदों (वर्ण सम्‍प्रदाय की बात करते हैं) में महारत दिखाते हैं वैसी महारत शिया, सुन्‍नी, अहमदिया आदि के बारे में और अब तक लखनऊ में इन शिया सुन्नियों के दंगों के बारे कहीं दिखाई नहीं दी। पांचवे इसलिए कि यदि आप इस सनातन धर्म को थोडा बहुत ही जान पाते तो जान सकते कि दया, मानवता,विश्‍व बंधुत्‍व जैसे गुण क्‍या होते हैं और क्‍यों हिंदुओं ने बिना आतताई होते हुए, बिना चंगेज खान और औरंगजेब पैदा किए अपने अस्तित्‍व को बचाए रखा बल्कि दुनिया के सबसे बडे धर्मों में से एक रहा। क्‍यों हिंदु धर्म दुनिया के सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है और क्‍यों इस बरगद रुपी धर्म में से असंख्‍य धर्मों की शाखाएं फैलीं। सारी बधाइयों के बाद मैं आपसे सिर्फ इतना और कहना चाहता हूँ कि उर्वरता और महानता वह होती है जो अपने आसपास के पेडों और घास को पनपाने में सहायक हो, किसी ऐसे दूसरे धर्म की तरह नहीं कि पूरा का पूरा इलाका बंजर रेगिस्‍तान हो जाए, जहां दूर दूर तक एक दरख्‍त भी (अर्थात दूसरा धर्म) न हो। उम्‍मीद है कि आगे आप जो भी लेख लिखेंगें इन आखिरी पंक्तियों को याद रखेगें।

  11. >सही कह रहे हो सलीम मियाँ ,आखिर रिजर्व बैंक के निदेशक साहब भी तो इस्लाम की ही खाते हैं ……….रिज़र्व बैंक से रिटायर हुए तो चले अपने बिरादरों ( रोजेदारों ) की धुन में बेसुरा तानपुरा छेड़ने | बाकी तो कोई भाव देगा नहीं , क्यों है ना ?

  12. >सही कह रहे हो सलीम मियाँ ,आखिर रिजर्व बैंक के निदेशक साहब भी तो इस्लाम की ही खाते हैं ……….रिज़र्व बैंक से रिटायर हुए तो चले अपने बिरादरों ( रोजेदारों ) की धुन में बेसुरा तानपुरा छेड़ने | बाकी तो कोई भाव देगा नहीं , क्यों है ना ?

  13. >आश्चर्य है कि 'अल्लाह' को बैंक के बारे में भी जानकारी थी। किन्तु दुनिया में तो सब जगह गैर-इस्लामिक बैंकिंग व्यवस्था चल रही है; अल्लाह के पास इतनी भी ताकत नहीं की इसको अपने इच्छानुसार चला सके! लानत है ऐसे अल्लाह पर !

  14. >आश्चर्य है कि 'अल्लाह' को बैंक के बारे में भी जानकारी थी। किन्तु दुनिया में तो सब जगह गैर-इस्लामिक बैंकिंग व्यवस्था चल रही है; अल्लाह के पास इतनी भी ताकत नहीं की इसको अपने इच्छानुसार चला सके! लानत है ऐसे अल्लाह पर !

  15. >शाबाश, ज़रा वह तावीज गंडे भी लटकालो जिससे कई भूत प्रेत भाग जायेंगे, भाई दो तरफ से बैटिंग होती रहेगी, इ तो बैठे बैठे रन गिन्‍ते रहेंगे, हा हा, मैंने तो ऐसा शाट मारा है इनको गेंद ही नहीं मिलेगी, किसी को शंका हो तो देख लो जा के Rank-2 वाले ब्लाग पर, गेंद मिल जाये तो बैटिंग से सन्‍यास लेलूंगा,जाने से आस्‍था डगमगा जायेगी तो यहीं लेलो थोडा परिचयसनातन धर्म के अध्‍ययन हेतु वेद– कुरआन पर अ‍ाधारित famous-हिन्‍दी book-ab-bhi-na-jage-to''जिस पुस्‍तक ने उर्दू जगत में तहलका मचा दिया और लाखों भारतीय मुसलमानों को अपने हिन्‍दू भाईयों एवं सनातन धर्म के प्रति अपने द़ष्टिकोण को बदलने पर मजूर कर दिया था उसका यह हिन्‍दी रूपान्‍तर है, महान सन्‍त एवं विद्वान मौलाना आचार्य शम्‍स नवेद उस्‍मानी के ध‍ार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन पर आधारति पुस्‍तक के लेखक हैं, धार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन के जाने माने लेखक और स्वर्गीय सन्‍त के प्रिय शिष्‍य एस. अब्‍दुल्लाह तारिक, स्वर्गीय मौलाना ही के एक योग्‍य शिष्‍य जावेद अन्‍जुम (प्रवक्‍ता अर्थ शास्त्र) के हाथों पुस्तक के अनुवाद द्वारा यह संभव हो सका है कि अनुवाद में मूल पुस्‍तक के असल भाव का प्रतिबिम्‍ब उतर आए इस्लाम की ज्‍योति में मूल सनातन धर्म के भीतर झांकाने का सार्थक प्रयास हिन्‍दी प्रेमियों के लिए प्रस्‍तुत है''signature:कमेंटस पसंद आया तो अपने प्रेम अथवा नफरत से सहयोग करें,मुहम्मद सल्ल. कल्कि व अंतिम अवतार और बैद्ध् मैत्रे, अंतिम ऋषि (इसाई) यहूदीयों के भी आखरी संदेष्‍टा antimawtar.blogspot.com (Rank-1 Blog) इस्लामिक पुस्तकों के अतिरिक्‍त छ अल्लाह के चैलेंज islaminhindi.blogspot.com (Rank-2 Blog)

  16. >शाबाश, ज़रा वह तावीज गंडे भी लटकालो जिससे कई भूत प्रेत भाग जायेंगे, भाई दो तरफ से बैटिंग होती रहेगी, इ तो बैठे बैठे रन गिन्‍ते रहेंगे, हा हा, मैंने तो ऐसा शाट मारा है इनको गेंद ही नहीं मिलेगी, किसी को शंका हो तो देख लो जा के Rank-2 वाले ब्लाग पर, गेंद मिल जाये तो बैटिंग से सन्‍यास लेलूंगा,जाने से आस्‍था डगमगा जायेगी तो यहीं लेलो थोडा परिचयसनातन धर्म के अध्‍ययन हेतु वेद– कुरआन पर अ‍ाधारित famous-हिन्‍दी book-ab-bhi-na-jage-to''जिस पुस्‍तक ने उर्दू जगत में तहलका मचा दिया और लाखों भारतीय मुसलमानों को अपने हिन्‍दू भाईयों एवं सनातन धर्म के प्रति अपने द़ष्टिकोण को बदलने पर मजूर कर दिया था उसका यह हिन्‍दी रूपान्‍तर है, महान सन्‍त एवं विद्वान मौलाना आचार्य शम्‍स नवेद उस्‍मानी के ध‍ार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन पर आधारति पुस्‍तक के लेखक हैं, धार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन के जाने माने लेखक और स्वर्गीय सन्‍त के प्रिय शिष्‍य एस. अब्‍दुल्लाह तारिक, स्वर्गीय मौलाना ही के एक योग्‍य शिष्‍य जावेद अन्‍जुम (प्रवक्‍ता अर्थ शास्त्र) के हाथों पुस्तक के अनुवाद द्वारा यह संभव हो सका है कि अनुवाद में मूल पुस्‍तक के असल भाव का प्रतिबिम्‍ब उतर आए इस्लाम की ज्‍योति में मूल सनातन धर्म के भीतर झांकाने का सार्थक प्रयास हिन्‍दी प्रेमियों के लिए प्रस्‍तुत है''signature:कमेंटस पसंद आया तो अपने प्रेम अथवा नफरत से सहयोग करें,मुहम्मद सल्ल. कल्कि व अंतिम अवतार और बैद्ध् मैत्रे, अंतिम ऋषि (इसाई) यहूदीयों के भी आखरी संदेष्‍टा antimawtar.blogspot.com (Rank-1 Blog) इस्लामिक पुस्तकों के अतिरिक्‍त छ अल्लाह के चैलेंज islaminhindi.blogspot.com (Rank-2 Blog)

  17. >मिस्‍टर कोरा नबी, कुरानवी या आप जो भी हैं।मुहम्मद सल्ल. कल्कि व अंतिम अवतार और बैद्ध् मैत्रे, अंतिम ऋषि (इसाई) यहूदीयों के भी आखरी संदेष्‍टाखुशखबरी । खुशखबरी।। घिसे पिटे रेडियों के लिए एक खुशखबरी। आपकी बात से मैं इत्‍तफाक रखता हूं। हूजूरे आली पर इतनी प्‍यारी सोच आप हिंदुस्‍तानियों पे क्‍यों जाया कर रिए हो? जाके थोडी सीख बुश सीनियर को, थोडी सीख बुश जूनियर को और जो बाकी बचे वह बराक हौसेन ओबामा को देना जो मुसलमान पिता की मानी हुई ईसाई संतान है और अभी अभी जिसकी सेनाओं ने बैतुल्‍लाह मसूद को सपरिवार सुर्पुद ए खाक किया है, पता नहीं खुदा उसे (अबे बैतुल्‍लाह को और किसे) जन्‍नत या फिर दोजख नसीब करेगा। जो भी करे पर न तो बुश सीनियर का, न बुश जूनियर का और न बराक ओबामा का बाल बराबर भी नुकसान होगा। क्‍योंकि यह सब भले मानुस ईसाई हैं और खून का बदला खून से लेना जानते हैं। हिंदुस्‍तानियों की तरह नहीं जिनका दिल नर्म और नाजुक होता है और जो सडक छाप लेंडी कुत्‍ते को भी दया भाव के आधार पर रोटी दाल देते हैं भले ही वह सडक छाप लेंडी कुत्‍ता बाद में उनके बच्‍चे को ही मौका मिलने पर काट ले।

  18. >मिस्‍टर कोरा नबी, कुरानवी या आप जो भी हैं।मुहम्मद सल्ल. कल्कि व अंतिम अवतार और बैद्ध् मैत्रे, अंतिम ऋषि (इसाई) यहूदीयों के भी आखरी संदेष्‍टाखुशखबरी । खुशखबरी।। घिसे पिटे रेडियों के लिए एक खुशखबरी। आपकी बात से मैं इत्‍तफाक रखता हूं। हूजूरे आली पर इतनी प्‍यारी सोच आप हिंदुस्‍तानियों पे क्‍यों जाया कर रिए हो? जाके थोडी सीख बुश सीनियर को, थोडी सीख बुश जूनियर को और जो बाकी बचे वह बराक हौसेन ओबामा को देना जो मुसलमान पिता की मानी हुई ईसाई संतान है और अभी अभी जिसकी सेनाओं ने बैतुल्‍लाह मसूद को सपरिवार सुर्पुद ए खाक किया है, पता नहीं खुदा उसे (अबे बैतुल्‍लाह को और किसे) जन्‍नत या फिर दोजख नसीब करेगा। जो भी करे पर न तो बुश सीनियर का, न बुश जूनियर का और न बराक ओबामा का बाल बराबर भी नुकसान होगा। क्‍योंकि यह सब भले मानुस ईसाई हैं और खून का बदला खून से लेना जानते हैं। हिंदुस्‍तानियों की तरह नहीं जिनका दिल नर्म और नाजुक होता है और जो सडक छाप लेंडी कुत्‍ते को भी दया भाव के आधार पर रोटी दाल देते हैं भले ही वह सडक छाप लेंडी कुत्‍ता बाद में उनके बच्‍चे को ही मौका मिलने पर काट ले।

  19. >Khush-Akhlaqi, islam kii dawat dene wale ki aham-tareen khoobi hoti hai. agar samne wala jazbati ho jaye ya galat-bayani kare tab bhi…

  20. >Khush-Akhlaqi, islam kii dawat dene wale ki aham-tareen khoobi hoti hai. agar samne wala jazbati ho jaye ya galat-bayani kare tab bhi…

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: