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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के पोते आचार्य संजय द्विवेदी ने अपनाया इस्लाम बन गए अहमद पंडित

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आचार्य संजय द्विवेदी ने अपनाया इस्लाम बन गए अहमद पंडित

काशी विद्यापीठ से आचार्य की डिग्री ले चुके संजय द्विवेदी ने इस्लाम कुबूल किया.

कांग्रेस पार्टी के आला नेता और पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के पोते आचार्य संजय द्विवेदी को आखिर इस्लाम में ऐसा क्या खास लगा?
आचार्य संजय पंद्रह साल की उम्र में ही बिरला ग्रुप के मंदिरों के मुख्य पुजारी बन गए थे और वे आल इंडिया ब्राह्मण असोसिअशन के अध्यक्ष भी थे .

-सलीम खान

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61 Responses

  1. >हमारे यहाँ भी एक "माजूल हसन" नाम से मुस्लिम शख्स हैं, जो कि अच्छे खासे करोडपति बिजनेसमैन व्यक्ति हैं। लगभग 2-3 साल पहले वो माजूल हसन से "मनजीत कुमार" बन गए हैं। नियम से मन्दिर जाते हैं। ओर तो ओर हर साल पूरा श्रावण मास वो घर से नंगे पाँव मन्दिर में भोले बाबा को स्नान कराने जाते हैं। मैं भी यही सोच सोच के परेशान हूँ कि आखिर उन्हे हिन्दु धर्म में ऎसा क्या खास लगा?

  2. >हमारे यहाँ भी एक "माजूल हसन" नाम से मुस्लिम शख्स हैं, जो कि अच्छे खासे करोडपति बिजनेसमैन व्यक्ति हैं। लगभग 2-3 साल पहले वो माजूल हसन से "मनजीत कुमार" बन गए हैं। नियम से मन्दिर जाते हैं। ओर तो ओर हर साल पूरा श्रावण मास वो घर से नंगे पाँव मन्दिर में भोले बाबा को स्नान कराने जाते हैं। मैं भी यही सोच सोच के परेशान हूँ कि आखिर उन्हे हिन्दु धर्म में ऎसा क्या खास लगा?

  3. >वैसे एक बात तो सच है कि आज ये सचमुच में अहमक पंडित बन चुके हैं:)

  4. >वैसे एक बात तो सच है कि आज ये सचमुच में अहमक पंडित बन चुके हैं:)

  5. >सलीम जी आपका ये पोस्ट आपकी अंदरूनी कहानी कह देता है | आपने लिखा है की वो आचार्य थे , अमेरिका मैं कम से कम १० लोगों को मैंने देखा है जो बराबर ISKCON आते हैं और इस्लाम का त्याग कर चुके हैं |

  6. >सलीम जी आपका ये पोस्ट आपकी अंदरूनी कहानी कह देता है | आपने लिखा है की वो आचार्य थे , अमेरिका मैं कम से कम १० लोगों को मैंने देखा है जो बराबर ISKCON आते हैं और इस्लाम का त्याग कर चुके हैं |

  7. Amigo says:

    >Puro de coraçãoHá que ser puro, puro de coração.Purifica teus pensamentos, conduzindo-os,um a um, ao que resplandece em ti.Purifica teus hábitos, teus vícios, presenteando tua jornada com a tua determinação, com a tua coragem, com a tua confiança.Purifica os ares que te rondam, esclarece tuas confusões.Deixa clarear todas as manhãs do mundo em teu ser.Acompanha o nascer do sol, a luz no horizonte e dignifica o que chamas de amor.A paz é presente e te é disponível.Não coloques em dúvida o que o teu Criadorjá esclareceu para ti. QUE VC TENHA UM LINDO E MARAVILHOS0 DIA De Antonio http://noticiasjornaistv.blogspot.com/http://curiosidadesdoplantaterra.blogs.sapo.pt/

  8. Antonio says:

    >Puro de coraçãoHá que ser puro, puro de coração.Purifica teus pensamentos, conduzindo-os,um a um, ao que resplandece em ti.Purifica teus hábitos, teus vícios, presenteando tua jornada com a tua determinação, com a tua coragem, com a tua confiança.Purifica os ares que te rondam, esclarece tuas confusões.Deixa clarear todas as manhãs do mundo em teu ser.Acompanha o nascer do sol, a luz no horizonte e dignifica o que chamas de amor.A paz é presente e te é disponível.Não coloques em dúvida o que o teu Criadorjá esclareceu para ti. QUE VC TENHA UM LINDO E MARAVILHOS0 DIA De Antonio http://noticiasjornaistv.blogspot.com/http://curiosidadesdoplantaterra.blogs.sapo.pt/

  9. >hamen janna chahiye ke hamare dharmon se islam dharam men kiyon ja rahe hen,,, khas tuar maheelayen kiyon ja rahi hen,,tabhi ham ise rok payenge… dharmon ke tulnaatmak adhyan ke liye ek kitab ham bhi liye bethe hen,विश्‍व की 80 नव मुस्लिम महिलाओं के इस्‍लाम क़बूल करने की ईमान अफरोज़ daastanen- only 1,039 KBislaminhindi.blogspot.com

  10. >hamen janna chahiye ke hamare dharmon se islam dharam men kiyon ja rahe hen,,, khas tuar maheelayen kiyon ja rahi hen,,tabhi ham ise rok payenge… dharmon ke tulnaatmak adhyan ke liye ek kitab ham bhi liye bethe hen,विश्‍व की 80 नव मुस्लिम महिलाओं के इस्‍लाम क़बूल करने की ईमान अफरोज़ daastanen- only 1,039 KBislaminhindi.blogspot.com

  11. >अरे मैं भी एक फुरकान अली को जानता हूँ , जो कल तक जेहाद – जेहाद रट रहे थे अब काशी गए है जल चढाने , कह रहे थे पूर्वजों ( जो की हिन्दू ही थे के श्राप के कारण ही बरकत नहीं हो पा रही, शायद हमारी शुद्धि की ज़रूरत है ) के मार्ग पर चलते हुए भजन कुमार बन गए ||और मैंने भी बहुत से मुल्लों की शुद्धी अपने देख – रेख में करवाई है , और कितने ही आलिमों – फाजिलों को मुफ्त में ज्ञान दिया है |(( इच्छुक इ – मेल कर सकते हैं )) |

  12. >अरे मैं भी एक फुरकान अली को जानता हूँ , जो कल तक जेहाद – जेहाद रट रहे थे अब काशी गए है जल चढाने , कह रहे थे पूर्वजों ( जो की हिन्दू ही थे के श्राप के कारण ही बरकत नहीं हो पा रही, शायद हमारी शुद्धि की ज़रूरत है ) के मार्ग पर चलते हुए भजन कुमार बन गए ||और मैंने भी बहुत से मुल्लों की शुद्धी अपने देख – रेख में करवाई है , और कितने ही आलिमों – फाजिलों को मुफ्त में ज्ञान दिया है |(( इच्छुक इ – मेल कर सकते हैं )) |

  13. >देखिये मेरा लेख करने का मक़सद ये नहीं कि आपके लिए ये ज़रूरी ही है कि आप यूँ ही कुछ भी बोल दें… मैंने लिखा और सत्य लिखा और तथ्य और सबूत के साथ साथ ही बौधिक रूप से इंसानियत के तकाज़े में लिखा… अगर आपके पास भी तथ्य और सबूत के साथ ऐसा है तो बताईये मुझे.मैं इस्लाम धर्म छोड़ दूंगा, अगर कोई यह साबित कर दे कि कुरान में एक भी, मात्र एक भी गलती है. और यह साबित कर दे अल्लाह अर्थात ईश्वर एक नहीं है और मुहम्मद (ईश्वर की उन पर शांति हो) ईश्वर के अंतिम ऋषि (संदेष्ठा) नहीं है.

  14. >देखिये मेरा लेख करने का मक़सद ये नहीं कि आपके लिए ये ज़रूरी ही है कि आप यूँ ही कुछ भी बोल दें… मैंने लिखा और सत्य लिखा और तथ्य और सबूत के साथ साथ ही बौधिक रूप से इंसानियत के तकाज़े में लिखा… अगर आपके पास भी तथ्य और सबूत के साथ ऐसा है तो बताईये मुझे.मैं इस्लाम धर्म छोड़ दूंगा, अगर कोई यह साबित कर दे कि कुरान में एक भी, मात्र एक भी गलती है. और यह साबित कर दे अल्लाह अर्थात ईश्वर एक नहीं है और मुहम्मद (ईश्वर की उन पर शांति हो) ईश्वर के अंतिम ऋषि (संदेष्ठा) नहीं है.

  15. >शीघ्र ही मेरा अगला लेख पढ़े "जिहाद का वर्णन भगवत गीता में भी"

  16. >शीघ्र ही मेरा अगला लेख पढ़े "जिहाद का वर्णन भगवत गीता में भी"

  17. >जिहाद का मायने क्या है? क्या जिहाद का ज़िक्र कुरआन में ही है या दुसरे धर्मों की किताबों में भी है? क्या श्री कृष्ण ने भी जिहाद करने का हुक़्म दिया है या नहीं? क्या किसी एक ही काम के दो संबोधन देना उचित है अर्थात शहीद भगत सिंह को अँगरेज़ आतंकवादी कहते हैं और हम देशभक्त? आखिर कौन सही है? साध्वी प्रज्ञा को सीबीआई आतंकवादी कहती है! क्या वह वाकई आतंकवादी है? ओसामा बिन लादेन को अँगरेज़ आतंवादी कहते हैं ! क्या वह वाकई आतंकवादी है? इन सभी सवालों का जवाब हैं, मेरा अगला पोस्ट!!"जिहाद का वर्णन भगवत गीता में भी"

  18. >जिहाद का मायने क्या है? क्या जिहाद का ज़िक्र कुरआन में ही है या दुसरे धर्मों की किताबों में भी है? क्या श्री कृष्ण ने भी जिहाद करने का हुक़्म दिया है या नहीं? क्या किसी एक ही काम के दो संबोधन देना उचित है अर्थात शहीद भगत सिंह को अँगरेज़ आतंकवादी कहते हैं और हम देशभक्त? आखिर कौन सही है? साध्वी प्रज्ञा को सीबीआई आतंकवादी कहती है! क्या वह वाकई आतंकवादी है? ओसामा बिन लादेन को अँगरेज़ आतंवादी कहते हैं ! क्या वह वाकई आतंकवादी है? इन सभी सवालों का जवाब हैं, मेरा अगला पोस्ट!!"जिहाद का वर्णन भगवत गीता में भी"

  19. >DEAR SALIM,I'M AGAIN HERE, AND CONGRATULATION FOR ONE MORE PROPOGANDA TO CLAIM YOUR RELIGION SUPERIOR. I'M SORRY TO SAY THAT YOU EVEN DOESN'T KNOW THAT MR. NARAYAN DATT TIWARI IS A BECHULAR, HOW COME SANJAY DIVEDI BECOME HIS GRAND SON ????????AND IF SANJAY DIVEDI CLAIMS THAT HE IS A GRAND SON OF NARAYAN DATT TIWARI THEN I WOULD LIKE TO SAY THAT HE WAS FIT FOR TO CONVERT.

  20. >DEAR SALIM,I'M AGAIN HERE, AND CONGRATULATION FOR ONE MORE PROPOGANDA TO CLAIM YOUR RELIGION SUPERIOR. I'M SORRY TO SAY THAT YOU EVEN DOESN'T KNOW THAT MR. NARAYAN DATT TIWARI IS A BECHULAR, HOW COME SANJAY DIVEDI BECOME HIS GRAND SON ????????AND IF SANJAY DIVEDI CLAIMS THAT HE IS A GRAND SON OF NARAYAN DATT TIWARI THEN I WOULD LIKE TO SAY THAT HE WAS FIT FOR TO CONVERT.

  21. >GODIYAL SAHAB PLIZ SEE THIS LINKhttp://en.wikipedia.org/wiki/List_of_converts_to_Islam#From_Hinduism

  22. >अरे वाह सलीम साहब इन्हें बतादो हम प्रतिष्ठित लोंगों की बात करते हैं, गली मुहलों की बात करेंगे तो नींदें उड जायेगी, पढो आनलाइन उपलब्ध मन्री डाक्‍टर प्रोफेसर महिलायें कैसे आई इस्लाम की तरफ,विश्‍व की 80 नव मुस्लिम महिलाओं के इस्‍लाम क़बूल करने की ईमान अफरोज़ daastanen- only 1,039 KBislaminhindi.blogspot.comपढ लो अन्यथा बहुत जल्द अंतिम अवतार की आंधी तुम्हें जगायेगी,antimawtar.blogspot.com

  23. >अरे वाह सलीम साहब इन्हें बतादो हम प्रतिष्ठित लोंगों की बात करते हैं, गली मुहलों की बात करेंगे तो नींदें उड जायेगी, पढो आनलाइन उपलब्ध मन्री डाक्‍टर प्रोफेसर महिलायें कैसे आई इस्लाम की तरफ,विश्‍व की 80 नव मुस्लिम महिलाओं के इस्‍लाम क़बूल करने की ईमान अफरोज़ daastanen- only 1,039 KBislaminhindi.blogspot.comपढ लो अन्यथा बहुत जल्द अंतिम अवतार की आंधी तुम्हें जगायेगी,antimawtar.blogspot.com

  24. >इसीलिये कह रहा हूँ सलीम मिंया कि किसी के लिखे हुए पर मत जाइये, जो सामने है उसे पहचानिये ! As far as I know Mr. tiwari is a bechelor/unmarried. If you remember last time there was an eppisode/case of his fake son Rohit Shekhar, grandson of former union minister Sher Singh. Shekhar claimed he was born out of a relationship between Tiwari and his mother Ujjwala Singh who is also associated with Congress party. That time also news was there that N.D. Tiwari is an unmarried person.

  25. >इसीलिये कह रहा हूँ सलीम मिंया कि किसी के लिखे हुए पर मत जाइये, जो सामने है उसे पहचानिये ! As far as I know Mr. tiwari is a bechelor/unmarried. If you remember last time there was an eppisode/case of his fake son Rohit Shekhar, grandson of former union minister Sher Singh. Shekhar claimed he was born out of a relationship between Tiwari and his mother Ujjwala Singh who is also associated with Congress party. That time also news was there that N.D. Tiwari is an unmarried person.

  26. >सत्य इन्सान का धरोहर होता है जब इन्सान इसकी विशाल ह्रदय से खोज करता है तो वह उसे पा लेता है अहमद पंडित के साथ भी ऐसा ही हुआ। इस्लाम विश्व धर्म है और इसी की छाया में पारलोकिक और सांसारिक जीवन की सफलता है। बस जरूरत है इसे जानने की।

  27. safat alam says:

    >सत्य इन्सान का धरोहर होता है जब इन्सान इसकी विशाल ह्रदय से खोज करता है तो वह उसे पा लेता है अहमद पंडित के साथ भी ऐसा ही हुआ। इस्लाम विश्व धर्म है और इसी की छाया में पारलोकिक और सांसारिक जीवन की सफलता है। बस जरूरत है इसे जानने की।

  28. >नारायण दत्त ने अभी तक शादी नहीं की है…….. किसी अविवाहित इन्सान का पोता कैसे हो सकता है? नाजायज़ औलाद? तब तो वह इस्लाम के ही लायक है😉

  29. >नारायण दत्त ने अभी तक शादी नहीं की है…….. किसी अविवाहित इन्सान का पोता कैसे हो सकता है? नाजायज़ औलाद? तब तो वह इस्लाम के ही लायक है😉

  30. >As far as the political influence of his family is concerned, his grand father is the current chief minister of Uttaranchal, N.D. Tiwari. His mother Shri Kamla Devi has served as education minister of Uttar Pradesh for over 9 years.

  31. >As far as the political influence of his family is concerned, his grand father is the current chief minister of Uttaranchal, N.D. Tiwari. His mother Shri Kamla Devi has served as education minister of Uttar Pradesh for over 9 years.

  32. >What is important about this person is he is a well educated person in Hindu Dharma/Vedas. He attained the status of "Acharya", The highest degree in the teaching of Hindu Vedas / dharma. There is no other degree above it. In the speech he mentioned that after that he could become one of the head of the4 peets (Like kanchi sankaracharya). At the age of 15 he as appointed as head priest of Birla group of temples and also president of All India Brahmin's Association. As far as the political influence of his family is concerned, his grand father is the current chief minister of Uttaranchal, N.D. Tiwari. His mother Shri Kamla Devi has served as education minister of Uttar Pradesh for over 9 years. In the event he spoke in great detail about his life and his journey towards Islam. The full video is available at http://www.urduaudio.com (language Hindi). What turned him toward Islam, Because of which he lost so many things in this world. (He told in the meeting that if he goes for a marriage as a priest, his fees will be around 51/- lakhs, yes 51 lakhs., such was his level among Hindus.) Now he is living the life of an ordinary Muslim. But nonetheless he has taken up the mission of spreading Islam. Currently he is President, Al Hidayah, Hyderabad. What initiated his journey to the truth? It is nothing but a strictobservation of prayer by a fellow Muslim student at the school. (Ahmed Pandit used to attend regular school for a brief time to give the board exams). The school in which he was studying was a very strict one with rules. If anybody comes late for example for 5 minutes he will receive 5 beats. The fellow Muslim student called Imran used to be late for about 20 minutes in the afternoon and used to receive 20 beats daily. When Ahmed Pandit enquired the teachers about this they told him that " He is a Muslim, he goes to prayer and always comes late, He will never improve. Taking pity on him Ahmed pundit asked him "why don't you pray to your God after returning from School or why don't you do that early at least. Imran replied "Excuse me Panditji, You are controlling your God, you keep him at house, office etc. and offer pooja at your convenient. For us we are controlled by God, if I don't offer prayer at the established time, I will be punished in the next world. The punishment, of this world is nothing for me compared to the punishment of the next world. Ahmed Pandit said that this set a spark on him, which ultimately led him to Islam. He said on one occasion he visited Imran's house, there he saw Imran's father praying. (Imran's father was not a common man. He was chief justice of Bhopal. Ahmed Pandit said that despite his position where he can easily amass his wealth by bribery, that man led a simple life, staying in an ordinary one bedroom flat. He was also conducting Dars-E-Quran to his collegues, advocates and other professionals at his home) The conversation between them went on like this. Just keep in your mind that Ahmed Pandit was admitted to the Hindu university at the age of 4 and he was not much exposed to the outside world, hence he knew nothing about Islam.. Ahmed Pandit: " Uncle if you don't mind can I ask one question?" Imran's father: " Go ahead son." Ahmed Pandit: "What type of yoga you were doing?" Imran's father: "I was not doing any yoga, I was praying to God."

  33. >Ahmed Pandit: " Don't make fun of me uncle, if you are praying to God, where is the God, there is nothing in front of you, it is just the wall. We used to pray in front of God, who is colorful and well decorated" At this point Imran's father said nothing he asked Ahmed Pandit, "do you know Hindi well?", Ahmed Pandit replied that he is proficient in Hindi and Sanskrit. Imran's father went inside his house and returned with a copy of Quran with Hindi translation. He handed it over to Ahmed Pandit and told him to go through it.After the exams are over, Ahmed Pandit returned to his "Gurukul" and he said there is a private area which are only reserved for the student there. No one can enter there without permission. There he took his time and went through Quran.He said While going through Quran many bell rang within him. He came across many words which were exactly matching the Vedas he learned, specially the word "Mohamed, Ahamed". (He said that while teaching the Vedas his teachers said that Ahamed in the Veda refer to Krishna, a clear lie…) He said the words of Imran "The punishment of this world is nothing in front of the punishment of the next world" keep on repeating in his mind. He decided to escape from the Gurukul and become a Muslim, which he ultimately did. He talked in length the details of his becoming Muslim and the turmoil he underwent. Giving further details here will make this mail more lengthy. Full details are available in the audio and video format (in Hindi) at http://www.urduaudio.com. If anybody wants more from me (if they don't understand Hindi) InshaAllah I will write again as second part. He also noted that if Muslims are filled with the likes of Imran and his father, The whole world will be filled with Muslims. Remember he was in such a position where every VIPs and VVIPs will visit him to get his blessing. He bared it all for the sake of Islam. Now he is in a mission of inviting Hindu brothers towards Islam. Pray to Allah in this Ramadan to give him success in his mission and make his life easy in this world and to grand him high position in the Paradise. Coincidently this event was held on 20th of Ramadan and he told that he became Muslim on the same day (20th of Ramadan) in Mumbai. Also let us try to invite others to Islam not only by our saying but also by our doing, We have a good example in Imran and his father.

  34. >What is important about this person is he is a well educated person in Hindu Dharma/Vedas. He attained the status of "Acharya", The highest degree in the teaching of Hindu Vedas / dharma. There is no other degree above it. In the speech he mentioned that after that he could become one of the head of the4 peets (Like kanchi sankaracharya). At the age of 15 he as appointed as head priest of Birla group of temples and also president of All India Brahmin's Association. As far as the political influence of his family is concerned, his grand father is the current chief minister of Uttaranchal, N.D. Tiwari. His mother Shri Kamla Devi has served as education minister of Uttar Pradesh for over 9 years. In the event he spoke in great detail about his life and his journey towards Islam. The full video is available at http://www.urduaudio.com (language Hindi). What turned him toward Islam, Because of which he lost so many things in this world. (He told in the meeting that if he goes for a marriage as a priest, his fees will be around 51/- lakhs, yes 51 lakhs., such was his level among Hindus.) Now he is living the life of an ordinary Muslim. But nonetheless he has taken up the mission of spreading Islam. Currently he is President, Al Hidayah, Hyderabad. What initiated his journey to the truth? It is nothing but a strictobservation of prayer by a fellow Muslim student at the school. (Ahmed Pandit used to attend regular school for a brief time to give the board exams). The school in which he was studying was a very strict one with rules. If anybody comes late for example for 5 minutes he will receive 5 beats. The fellow Muslim student called Imran used to be late for about 20 minutes in the afternoon and used to receive 20 beats daily. When Ahmed Pandit enquired the teachers about this they told him that " He is a Muslim, he goes to prayer and always comes late, He will never improve. Taking pity on him Ahmed pundit asked him "why don't you pray to your God after returning from School or why don't you do that early at least. Imran replied "Excuse me Panditji, You are controlling your God, you keep him at house, office etc. and offer pooja at your convenient. For us we are controlled by God, if I don't offer prayer at the established time, I will be punished in the next world. The punishment, of this world is nothing for me compared to the punishment of the next world. Ahmed Pandit said that this set a spark on him, which ultimately led him to Islam. He said on one occasion he visited Imran's house, there he saw Imran's father praying. (Imran's father was not a common man. He was chief justice of Bhopal. Ahmed Pandit said that despite his position where he can easily amass his wealth by bribery, that man led a simple life, staying in an ordinary one bedroom flat. He was also conducting Dars-E-Quran to his collegues, advocates and other professionals at his home) The conversation between them went on like this. Just keep in your mind that Ahmed Pandit was admitted to the Hindu university at the age of 4 and he was not much exposed to the outside world, hence he knew nothing about Islam.. Ahmed Pandit: " Uncle if you don't mind can I ask one question?" Imran's father: " Go ahead son." Ahmed Pandit: "What type of yoga you were doing?" Imran's father: "I was not doing any yoga, I was praying to God."

  35. >Ahmed Pandit: " Don't make fun of me uncle, if you are praying to God, where is the God, there is nothing in front of you, it is just the wall. We used to pray in front of God, who is colorful and well decorated" At this point Imran's father said nothing he asked Ahmed Pandit, "do you know Hindi well?", Ahmed Pandit replied that he is proficient in Hindi and Sanskrit. Imran's father went inside his house and returned with a copy of Quran with Hindi translation. He handed it over to Ahmed Pandit and told him to go through it.After the exams are over, Ahmed Pandit returned to his "Gurukul" and he said there is a private area which are only reserved for the student there. No one can enter there without permission. There he took his time and went through Quran.He said While going through Quran many bell rang within him. He came across many words which were exactly matching the Vedas he learned, specially the word "Mohamed, Ahamed". (He said that while teaching the Vedas his teachers said that Ahamed in the Veda refer to Krishna, a clear lie…) He said the words of Imran "The punishment of this world is nothing in front of the punishment of the next world" keep on repeating in his mind. He decided to escape from the Gurukul and become a Muslim, which he ultimately did. He talked in length the details of his becoming Muslim and the turmoil he underwent. Giving further details here will make this mail more lengthy. Full details are available in the audio and video format (in Hindi) at http://www.urduaudio.com. If anybody wants more from me (if they don't understand Hindi) InshaAllah I will write again as second part. He also noted that if Muslims are filled with the likes of Imran and his father, The whole world will be filled with Muslims. Remember he was in such a position where every VIPs and VVIPs will visit him to get his blessing. He bared it all for the sake of Islam. Now he is in a mission of inviting Hindu brothers towards Islam. Pray to Allah in this Ramadan to give him success in his mission and make his life easy in this world and to grand him high position in the Paradise. Coincidently this event was held on 20th of Ramadan and he told that he became Muslim on the same day (20th of Ramadan) in Mumbai. Also let us try to invite others to Islam not only by our saying but also by our doing, We have a good example in Imran and his father.

  36. >If Sanjay Dwivedi has become Ahmed, why he remained Pandit? and how does ISLAM accept a pandit, a title or degree or social status or caste, which a karmkandi hindu (brahmin) can only enjoy????

  37. >If Sanjay Dwivedi has become Ahmed, why he remained Pandit? and how does ISLAM accept a pandit, a title or degree or social status or caste, which a karmkandi hindu (brahmin) can only enjoy????

  38. >mera.tera.uska.blog साहिब! इस्लाम दिल के विश्वास का नाम है, जो व्यक्ति दिल से यह स्वीकार कर लेता है की अल्लाह के अतिरिक्त कोई सत्य पूज्य नहीं और मोहम्मद (सल्०) अल्लाह के अंतिम संदेशवाहक हैं तो वह मुस्लिम बन जाता है चाहे उसका नाम कुछ भी रहे . हाँ यदि उसके नाम में बहुदेववाद की झलक पाई जा रही हो तो ऐसे नाम को बदलना ज़रूरी होता है – इस्लाम यही है न कि एक इश्वर कि पूजा करो, मोहम्मद (सल्०) को भग्वान नहीं बल्कि मार्गदर्शक मानो , सारे मनुष्य को समान समझो, आदि

  39. safat alam says:

    >mera.tera.uska.blog साहिब! इस्लाम दिल के विश्वास का नाम है, जो व्यक्ति दिल से यह स्वीकार कर लेता है की अल्लाह के अतिरिक्त कोई सत्य पूज्य नहीं और मोहम्मद (सल्०) अल्लाह के अंतिम संदेशवाहक हैं तो वह मुस्लिम बन जाता है चाहे उसका नाम कुछ भी रहे . हाँ यदि उसके नाम में बहुदेववाद की झलक पाई जा रही हो तो ऐसे नाम को बदलना ज़रूरी होता है – इस्लाम यही है न कि एक इश्वर कि पूजा करो, मोहम्मद (सल्०) को भग्वान नहीं बल्कि मार्गदर्शक मानो , सारे मनुष्य को समान समझो, आदि

  40. >सलीम साहब, कुछ भी अनाप शनाप लिखते रहते हैं आप. दुष्प्रचार की भी एक हद होती है. नारायण दत्त तिवारी इस वक़्त आंध्र प्रदेश के गवर्नर हैं. वह अविवाहित हैं और उनका परिवार (भाई – भतीजे) नैनीताल के पास बलुती गाँव में रहते हैं. आपको पता होना चाहिए कि "तिवारी" का भाई-भतीजा , पोता "द्विवेदी" नहीं हो सकता. एक और वेबसाइट (जहाँ से आपने यह विडियो उठाया है) पर नारायण दत्त तिवारी को हिमाचल प्रदेश का पूर्व मुख्यमंत्री बताया गया है.हिन्दुओं में जात-पात एक बड़ी समस्या है और ब्राहमणों में तो गोत्र और जाति की भूल-भूलैया को समझ पाना तो अत्यंत ही दुरूह है. इस विषय में मेरे पिताजी एक किस्सा सुनाया करते हैं -गाँव में एक पंडित की बारात जानी थी. न्योते गए लोगों में एक अहीर भी था. उसका एक मुस्लिम मित्र था. अहीर ने मुस्लिम मित्र से बारात में चलने को कहा. मुस्लिम मित्र ने पहचान लिए जाने की आशंका जताई. इस पर अहीर ने कहा कि कोई जात पूछे तो "पांडे" बता देना, तुम्हें कौन पहचानता है. मुस्लिम आश्वस्त हुआ और बारात में चल पड़ा. लड़की वालों के घर पहुँचने पर जब खाने की पंगत बैठी तो मुस्लिम मित्र भी अहीर के साथ बैठ गया. परोसने वाले को हाव-भाव से कुछ शक हुआ तो उसने पूछा " कौन जात हो"."पांडे", मुस्लिम मित्र ने जवाब दिया."कौन पांडे हो", परसैया ने फिर पूछा.मुस्लिम चकरा गया. वह मुंह ताकने लगा."अरे भैया कौन पांडे हो, ………." परसैया ने एक सांस में सारी उपजातियां गिना दी.मुस्लिम मित्र के मुंह से बेसाख्ता निकल पड़ा " या अल्लाह! पांडे में भी पांडे".जिस अहमद पंडित को आप विकिपीडिया और इन्टरनेट से उठाकर लाये हैं वह आपके दुष्प्रचार का एक हथकंडा मात्र है. बिरला ग्रुप ने आज तक १५ वर्ष के किसी बालक को अपने यहाँ पुजारी नियुक्त नहीं किया है. जनाब कुछ अक्ल से काम लें और इस दुष्प्रचार को बंद करें. मत भूलें कि आपके स्वयं के पूर्वज हिन्दू ही थे और उन्होंने इसलाम ख़ुशी से नहीं बल्कि तलवार की नोक पर कबूल किया था. धर्म बदलने से आस्थाएँ जरूर बदल जाती हैं लेकिन समझधारी का स्तर इतना गिर जाता है यह पहली बार ही देख रहा हूँ.

  41. >सलीम साहब, कुछ भी अनाप शनाप लिखते रहते हैं आप. दुष्प्रचार की भी एक हद होती है. नारायण दत्त तिवारी इस वक़्त आंध्र प्रदेश के गवर्नर हैं. वह अविवाहित हैं और उनका परिवार (भाई – भतीजे) नैनीताल के पास बलुती गाँव में रहते हैं. आपको पता होना चाहिए कि "तिवारी" का भाई-भतीजा , पोता "द्विवेदी" नहीं हो सकता. एक और वेबसाइट (जहाँ से आपने यह विडियो उठाया है) पर नारायण दत्त तिवारी को हिमाचल प्रदेश का पूर्व मुख्यमंत्री बताया गया है.हिन्दुओं में जात-पात एक बड़ी समस्या है और ब्राहमणों में तो गोत्र और जाति की भूल-भूलैया को समझ पाना तो अत्यंत ही दुरूह है. इस विषय में मेरे पिताजी एक किस्सा सुनाया करते हैं -गाँव में एक पंडित की बारात जानी थी. न्योते गए लोगों में एक अहीर भी था. उसका एक मुस्लिम मित्र था. अहीर ने मुस्लिम मित्र से बारात में चलने को कहा. मुस्लिम मित्र ने पहचान लिए जाने की आशंका जताई. इस पर अहीर ने कहा कि कोई जात पूछे तो "पांडे" बता देना, तुम्हें कौन पहचानता है. मुस्लिम आश्वस्त हुआ और बारात में चल पड़ा. लड़की वालों के घर पहुँचने पर जब खाने की पंगत बैठी तो मुस्लिम मित्र भी अहीर के साथ बैठ गया. परोसने वाले को हाव-भाव से कुछ शक हुआ तो उसने पूछा " कौन जात हो"."पांडे", मुस्लिम मित्र ने जवाब दिया."कौन पांडे हो", परसैया ने फिर पूछा.मुस्लिम चकरा गया. वह मुंह ताकने लगा."अरे भैया कौन पांडे हो, ………." परसैया ने एक सांस में सारी उपजातियां गिना दी.मुस्लिम मित्र के मुंह से बेसाख्ता निकल पड़ा " या अल्लाह! पांडे में भी पांडे".जिस अहमद पंडित को आप विकिपीडिया और इन्टरनेट से उठाकर लाये हैं वह आपके दुष्प्रचार का एक हथकंडा मात्र है. बिरला ग्रुप ने आज तक १५ वर्ष के किसी बालक को अपने यहाँ पुजारी नियुक्त नहीं किया है. जनाब कुछ अक्ल से काम लें और इस दुष्प्रचार को बंद करें. मत भूलें कि आपके स्वयं के पूर्वज हिन्दू ही थे और उन्होंने इसलाम ख़ुशी से नहीं बल्कि तलवार की नोक पर कबूल किया था. धर्म बदलने से आस्थाएँ जरूर बदल जाती हैं लेकिन समझधारी का स्तर इतना गिर जाता है यह पहली बार ही देख रहा हूँ.

  42. >@निशाचर, पहले आप ढंग से अध्ययन कर लें और आपको मैं चैलेन्ज करता हूँ कि इस्लाम की एक भी बात को आप गलत सिद्ध कर दें तो मैं इस्लाम धर्म छोड़ दूंगा…

  43. >@निशाचर, पहले आप ढंग से अध्ययन कर लें और आपको मैं चैलेन्ज करता हूँ कि इस्लाम की एक भी बात को आप गलत सिद्ध कर दें तो मैं इस्लाम धर्म छोड़ दूंगा…

  44. >सलीम, यही मैं आपसे भी कह रहा था कि झूठ लिखने से पहले उसे अच्छी तरह जाँच लिया करें. जहाँ तक इसलाम को गलत साबित करने की बात है मेरी ऐसी कोई भी इच्छा नहीं है. लेकिन किताबें आसमान से किस तरह उतरती हैं यह समझ से परे है. वैसे स्वामी दयानंद सरस्वती की "सत्यार्थ प्रकाश" शायद आपकी इच्छा पूरी कर सके. पढियेगा जरूर.

  45. >सलीम, यही मैं आपसे भी कह रहा था कि झूठ लिखने से पहले उसे अच्छी तरह जाँच लिया करें. जहाँ तक इसलाम को गलत साबित करने की बात है मेरी ऐसी कोई भी इच्छा नहीं है. लेकिन किताबें आसमान से किस तरह उतरती हैं यह समझ से परे है. वैसे स्वामी दयानंद सरस्वती की "सत्यार्थ प्रकाश" शायद आपकी इच्छा पूरी कर सके. पढियेगा जरूर.

  46. >स्वामी दयानंद सरस्वती की ने कहा था, ऐ, हिन्दुओं ! एक ईश्वर की पूजा करो! क्या यह सही नहीं कि आप 'सत्यार्थ प्रकाश' का हवाला दें और उस पर अमल न करें…मैं सत्यार्थ प्रकाश में ही सिद्ध कर दूंगा कि स्वामी दयानंद सरस्वती की ने जो कहना चाह उसका अर्थ से अनर्थ हो गया.

  47. >स्वामी दयानंद सरस्वती की ने कहा था, ऐ, हिन्दुओं ! एक ईश्वर की पूजा करो! क्या यह सही नहीं कि आप 'सत्यार्थ प्रकाश' का हवाला दें और उस पर अमल न करें…मैं सत्यार्थ प्रकाश में ही सिद्ध कर दूंगा कि स्वामी दयानंद सरस्वती की ने जो कहना चाह उसका अर्थ से अनर्थ हो गया.

  48. >अरे भाई सलीम खान जबरी काहे अपनी बात को ठेलने पर तुले हो , निशाचर जी ने कहा है कि किताबें आसमान से उतरने के मामले में प्रकाश डालने हेतु सत्यार्थ प्रकाश का उपयोग करिए |आप जैसा कुतर्की और झूठा दुष्प्रचार नहीं कर रहे है वो , और रही बात एक ईश्वर की आराधना करने की तो " सबमें रब दीखता है यारा मैं क्या करूँ " ये बात तुमको समझ नहीं आएगी क्योंकि कम -अकली की खतरनाक बीमारी लग ही चुकी है ||सत्यमेव जयते ||

  49. >अरे भाई सलीम खान जबरी काहे अपनी बात को ठेलने पर तुले हो , निशाचर जी ने कहा है कि किताबें आसमान से उतरने के मामले में प्रकाश डालने हेतु सत्यार्थ प्रकाश का उपयोग करिए |आप जैसा कुतर्की और झूठा दुष्प्रचार नहीं कर रहे है वो , और रही बात एक ईश्वर की आराधना करने की तो " सबमें रब दीखता है यारा मैं क्या करूँ " ये बात तुमको समझ नहीं आएगी क्योंकि कम -अकली की खतरनाक बीमारी लग ही चुकी है ||सत्यमेव जयते ||

  50. >सलीम, मेरे लिए ईश्वर एक सर्वशक्तिमान, निराकार सत्ता है जो केवल मनुष्य के कर्मों से ही उसके प्रति अपना रूख तय करती है. यह संसार एक संतुलन पर चलता है (विज्ञान भी यही कहता है). संतुलन बिगड़ने पर प्रकृति उसे पुनः संतुलित करने हेतु प्रयास करती है. इससे सृजन भी होता है और विनाश भी. प्रकृति को संतुलित रखिये शेष उस सर्वशक्तिमान पर छोड़ दीजिये. दिन भर उसका नाम जपते रहने से न तो वह प्रसन्न होगा न ही रूष्ट. आपके कर्म ही आपकी नियति तै करेंगे. शायद "सत्यार्थ प्रकाश" भी कुछ -कुछ यही कहता है.आप धर्म को छोड़ने और छुड़वाने पर इतना तुले रहते हैं मुझे इस पर ऐतराज है. आप धर्म का प्रचार इस अंदाज में करते हैं गोया आप कोई जीवन बीमा पॉलिसी बेच रहें हों. इसके बजाये कुछ सार्थक लिखे जिससे समाज और देश को कुछ सकारात्मक प्राप्त हो.

  51. >सलीम, मेरे लिए ईश्वर एक सर्वशक्तिमान, निराकार सत्ता है जो केवल मनुष्य के कर्मों से ही उसके प्रति अपना रूख तय करती है. यह संसार एक संतुलन पर चलता है (विज्ञान भी यही कहता है). संतुलन बिगड़ने पर प्रकृति उसे पुनः संतुलित करने हेतु प्रयास करती है. इससे सृजन भी होता है और विनाश भी. प्रकृति को संतुलित रखिये शेष उस सर्वशक्तिमान पर छोड़ दीजिये. दिन भर उसका नाम जपते रहने से न तो वह प्रसन्न होगा न ही रूष्ट. आपके कर्म ही आपकी नियति तै करेंगे. शायद "सत्यार्थ प्रकाश" भी कुछ -कुछ यही कहता है.आप धर्म को छोड़ने और छुड़वाने पर इतना तुले रहते हैं मुझे इस पर ऐतराज है. आप धर्म का प्रचार इस अंदाज में करते हैं गोया आप कोई जीवन बीमा पॉलिसी बेच रहें हों. इसके बजाये कुछ सार्थक लिखे जिससे समाज और देश को कुछ सकारात्मक प्राप्त हो.

  52. >मैंने तो कभी ऐसा नहीं कहा कि आप पाना धर्म बदल लें, हाँ यह ज़रूर कहता हूँ कि कम-से-कम अपनी धर्म की प्रमुक किताबोब को तो पढें…सत्य अपने आप समझ आ जायेगा…वेदों को पढें, पुराणों को पढें और पढें कुरआन को, बाइबल को….

  53. >मैंने तो कभी ऐसा नहीं कहा कि आप पाना धर्म बदल लें, हाँ यह ज़रूर कहता हूँ कि कम-से-कम अपनी धर्म की प्रमुक किताबोब को तो पढें…सत्य अपने आप समझ आ जायेगा…वेदों को पढें, पुराणों को पढें और पढें कुरआन को, बाइबल को….

  54. Shah Nawaz says:

    >पी.सी. गोदियाल एवं निशाचर जी, नारायण दत्त तिवारी का विवाह डॉ. सुशीला सनवाल के साथ सन 1954 में हुआ था. अधिक जानकारी के लिए निम्नलिखित सूत्र देखें:http://en.wikipedia.org/wiki/Narayan_Dutt_Tiwari#Early_Careerधन्यवाद!

  55. Shah Nawaz says:

    >पी.सी. गोदियाल एवं निशाचर जी, नारायण दत्त तिवारी का विवाह डॉ. सुशीला सनवाल के साथ सन 1954 में हुआ था. अधिक जानकारी के लिए निम्नलिखित सूत्र देखें:http://en.wikipedia.org/wiki/Narayan_Dutt_Tiwari#Early_Careerधन्यवाद!

  56. vivek says:

    >Chutiyo "Tiwari" ka pota "Dwivedi" nahi ho sakta hai aur islaam duniya ka sabse ganda mazhab hai zahil ka chalaya hua zahilo ke liya

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