स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़

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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>स्त्री एक से अधिक पति क्यूँ नहीं रख सकती? More then one husband, why not?

>एक और सवाल जो हमारे नॉन-मुस्लिम भाईयों के ज़ेहन में हमेशा से आता रहता है और वो अक्सर ये पूछते हैं कि इस्लाम में मर्दों को तो एक से ज़्यादा विवाह करने का, एक से ज़्यादा बीवियां रखने की अनुमति तो है, मगर औरतो को क्यूँ नहीं यह छुट मिली कि वह भी एक से ज़्यादा विवाह कर सके, एक से ज़्यादा मर्दों को रख सके? इस्लाम में औरतों को बहुविवाह की अनुमति क्यूँ नहीं है?


वे तो इसे कभी-कभी महिला-सशक्तिकरण से जोड़ने से भी नहीं चूकते और हवाला देते हैं पश्चिमी समाज का और कहते हैं कि देखों वहां औरतों को कितनी छूट मिली है. अरे जनाब ! औरतों की आज़ादी का पश्चिमी दावा एक ढोंग है, जिनके सहारे वो उनके शरीर का शोषण करते हैं, उनकी आत्मा को गंदा करते हैं और उनके मान सम्मान को उनसे वंचित रखते हैं | पश्चिमी समाज दावा करता है की उसने औरतों को ऊपर उठाया | इसके विपरीत उन्होंने उनको रखैल और समाज की तितलियों का स्थान दिया है, जो केवल जिस्मफरोशियों और काम इच्छुओं के हांथों का एक खिलौना है जो कला और संस्कृति के रंग बिरंगे परदे के पीछे छिपे हुए हैं. इसके विपरीत इस्लाम ने औरतों को इज्ज़त दी, यहाँ तक की उसे जायदाद में भी हिस्सेदार बनाया. आप बता सकते हैं किस धर्म किस किताब में औरतों को जायदाद में हिस्सा देना लिखा है? इस्लाम ने औरतों को वही दर्जा दिया है जिसकी वे वास्तव में मुस्तहक़ हैं.

सबसे पहले मैं आपको पूरे यकीन के साथ बताना चाहता हूँ कि इस्लाम न्याय और समानता से परिपूर्ण समाज की हिमायत करता है और इस्लामी समाज इसी (न्याय और समानता) पर आधारित है| ईश्वर/अल्लाह ने स्त्री और पुरुष दोनों को समानरूप से बनाया है लेकिन अलग अलग क्षमताएं और जिम्मेदारियां रक्खी हैं| स्त्री और पुरुष मानसिक और शारीरिक रूप से भिन्न हैं, और उनकी समाज और घर में रोल और जिम्मेदारियाँ अलग अलग हैं| स्त्री और पुरुष दोनों ही इस्लाम में समान हैं लेकिन एक जैसे नहीं.

मैं कुछ बातें और बताना चाहता हूँ जिससे कि यह स्पष्ट हो जाये कि औरतों को एक ज़्यादा पति रखना क्यूँ जाएज़ नहीं है और वर्जित क्यूँ है ?

1- अगर एक मर्द के पास एक से अधिक पत्नियाँ हों तो ऐसे विवाह से जन्मे बच्चे के माँ-बाप का पता आसानी से लग सकता है लेकिन वहीँ अगर एक औरत के पास एक से ज़्यादा पति हों तो केवल माँ का पता चलेगा, बाप का नहीं. इस्लाम माँ-बाप की पहचान को बहुत ज़्यादा महत्त्व देता है | मनोचिकित्सक कहते है कि ऐसे बच्चे मानसिक आघात और पागलपन के शिकार हो जाते है जो जो अपने माँ-बाप विशेष कर अपने बाप का नाम नहीं जानते| अक्सर उनका बचपन ख़ुशी से खली होता है| इसी कारण तवायफों (वेश्याओं) के बच्चो का बचपन अक्सर स्वस्थ नहीं होता|

यदि ऐसे विवाह से जन्मे बच्चे का किसी स्कूल में अड्मिशन कराया जाय और उसकी माँ से उस बच्चे के बाप का नाम पूछा जाय तो माँ को दो या उससे अधिक नाम बताने पड़ेंगे.

2- मर्दों में कुदरती तौर पर औरतों के मुकाबले बहु-विवाह की क्षमता ज़्यादा होती है.

3- समाज विज्ञान के अनुसार एक से ज़्यादा बीवी रखने वाले पुरुष एक पति के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वाह करना आसान होता है जबकि उसी जगह पर अनेक शौहर रखने वाली औरत के लिए एक पत्नी के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वाह करना संभव नहीं है, विशेषकर मासिकधर्म के समय जबकि एक स्त्री तीव्र मानसिक और व्यावहारिक परिवर्तन से गुज़रती है.

4- एक से ज़्यादा पति वाली औरत के एक ही समय में कई यौन साझी होंगे जिसकी वजह से उनमे यौन सम्बन्धी रोगों में ग्रस्त होने की आशंका अधिक होंगी और यह रोग उसके पतियों को भी लग सकता है चाहे उसके सभी पति उस स्त्री के अन्य किसी स्त्री के साथ यौन समंध से मुक्त हों. यह स्थिति कई पत्नियाँ रखने वाले पुरुष के साथ घटित नहीं होती है.

हालाँकि आजकल की साइंस ने डीएनए इजाद कर लिया है जिसके ज़रिये से बहुत कुछ पता चल सकता है. लेकिन यह इजाद अभी आया है पहले नहीं था और दूसरी बात, क्या यह इतना ही आसान सी प्रक्रिया है जिसके ज़रिये आम इंसान इस टेक्नोलोजी का इस्तेमाल कर सके???

औरतों को बहु-विवाह की मुमानियत का यह इस्लामी कानून निश्चित रूप से समाज में शान्ति लाएगा.
स्वाभाविक रूप से ज्यों ही इस्लामिक कानून लागू किया जायेगा तो इसका परिणाम निश्चित रूप से सकारात्मक होगा | अगर इस्लामिक कानून संसार के किसी भी हिस्से में लागू किया जाये चाहे अमेरिका हो या यूरोप, ऑस्ट्रेलिया हो या भारत, समाज में शांति आएगी.

यही वजह है कि अल्लाह तबारक़-व-तआला ने अपनी अंतिम किताब में यह साफ़-तौर पर आदेश दिया है कि औरत बहु-विवाह नहीं कर सकती.

इस मुद्दे के मुताल्लिक़ आपके अन्य सवालों का भी स्वागत है.

– सलीम खान
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Filed under: इस्लाम और नारी के अधिकार, नारी

62 Responses

  1. शंकर फुलारा कहते हैं:

    >aajkal ye baaten fijul hain jab jamana aaj badal gaya hai to iska fayada kya hai aaj koyi bhi ek se adhik bibi rakhna nahin chahta. jo ,chahta hai vo is jamane me anfit hai,fir aajke jamane me mahilaon ki aabadi bhi to kam ho gayi hai. mere khyal se aapne puri jaan kari ya to di nahi ya aap jante nahi ,vaise mujhe itna gyan nahin hai par maine ek baar padha tha ki jab ye kanun ya pratha bani thi tab yuddh adhik huaa karte the jisse aurten vidhva ho jaati thi purushon ki sankhya kam ho jaati thi to samaj me vybhichaar na faile isliye kam bache purusho ko kayi aurten rakhne ki manya parmpara ban gayi jisse purusho me bhi jhagde aadi na hon.aaj hindu badal gaya hai ye parampara pahle hinduon me bhi thi.

  2. शंकर फुलारा कहते हैं:

    >aajkal ye baaten fijul hain jab jamana aaj badal gaya hai to iska fayada kya hai aaj koyi bhi ek se adhik bibi rakhna nahin chahta. jo ,chahta hai vo is jamane me anfit hai,fir aajke jamane me mahilaon ki aabadi bhi to kam ho gayi hai. mere khyal se aapne puri jaan kari ya to di nahi ya aap jante nahi ,vaise mujhe itna gyan nahin hai par maine ek baar padha tha ki jab ye kanun ya pratha bani thi tab yuddh adhik huaa karte the jisse aurten vidhva ho jaati thi purushon ki sankhya kam ho jaati thi to samaj me vybhichaar na faile isliye kam bache purusho ko kayi aurten rakhne ki manya parmpara ban gayi jisse purusho me bhi jhagde aadi na hon.aaj hindu badal gaya hai ye parampara pahle hinduon me bhi thi.

  3. >औरतों की जनसँख्या भारत में कम इसलिए हो रही है क्यूंकि यहाँ कन्या भ्रूण हत्या अपने चरम-दुष्टता पर पहुँच चुकी है. रही बात युनिवर्सल रूप की तो यहाँ चटका लगायें http://wiki.answers.com/Q/Are_there_more_women_in_the_world_than_men और http://askville.amazon.com/men-women-world/AnswerViewer.do?requestId=4898063 पर

  4. सलीम ख़ान कहते हैं:

    >औरतों की जनसँख्या भारत में कम इसलिए हो रही है क्यूंकि यहाँ कन्या भ्रूण हत्या अपने चरम-दुष्टता पर पहुँच चुकी है. रही बात युनिवर्सल रूप की तो यहाँ चटका लगायें http://wiki.answers.com/Q/Are_there_more_women_in_the_world_than_men और http://askville.amazon.com/men-women-world/AnswerViewer.do?requestId=4898063 पर

  5. Sneha कहते हैं:

    >"अगर इस्लामिक कानून संसार के किसी भी हिस्से में लागू किया जाये चाहे अमेरिका …"जी हाँ आप सही कह रहे हैं, पाकिस्तान में भी शांति है, अफगानिस्तान में भी शांति है, ईराक में भी शांति है, ईरान में भी शांति है.

  6. Sneha कहते हैं:

    >"अगर इस्लामिक कानून संसार के किसी भी हिस्से में लागू किया जाये चाहे अमेरिका …"जी हाँ आप सही कह रहे हैं, पाकिस्तान में भी शांति है, अफगानिस्तान में भी शांति है, ईराक में भी शांति है, ईरान में भी शांति है.

  7. अनुनाद सिंह कहते हैं:

    >आपसे अपेक्षा है कि अपने लेखों में "आधुनिक तर्कशास्त्र" के अनुसार तर्क करें; कुरानी तर्कशास्त्र से नहीं।

  8. अनुनाद सिंह कहते हैं:

    >आपसे अपेक्षा है कि अपने लेखों में "आधुनिक तर्कशास्त्र" के अनुसार तर्क करें; कुरानी तर्कशास्त्र से नहीं।

  9. Suresh Chiplunkar कहते हैं:

    >स्नेहा जी… आपकी बात पर – जोर से हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा, बांग्लादेश, सोमालिया, सूडान भी जोड़ लीजिये मेरी तरफ़ से… हर देश में शान्ति ही शान्ति, तरक्की, अमन, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधायें, खुशहाली आदि है।

  10. Suresh Chiplunkar कहते हैं:

    >स्नेहा जी… आपकी बात पर – जोर से हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा, बांग्लादेश, सोमालिया, सूडान भी जोड़ लीजिये मेरी तरफ़ से… हर देश में शान्ति ही शान्ति, तरक्की, अमन, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधायें, खुशहाली आदि है।

  11. Varun Kumar Jaiswal कहते हैं:

    >कुरानी बकवासों का पूरा मंच तैयार करने में जाकिर नाइक से कोई कमी रह गयी थी , अतः अब आप औजार ले कर पिल पड़े |१४०० वर्षों में इस्लाम ने औरतों को वो ज़लालत भरी जिन्दगी दी है कि अगर तुम औरत होते तो अपनी बदकिस्मती और कमजोरी का रोना भी न रो सकते थे | वैसे तुम्हारे इन दकियानुसी बकवासों को आम लोगों ने कब का आइना दिखा दिया है , कुछ समय में अल्लाह के बन्दे भी इनसे तौबा कर ही लेंगे |

  12. Varun Kumar Jaiswal कहते हैं:

    >कुरानी बकवासों का पूरा मंच तैयार करने में जाकिर नाइक से कोई कमी रह गयी थी , अतः अब आप औजार ले कर पिल पड़े |१४०० वर्षों में इस्लाम ने औरतों को वो ज़लालत भरी जिन्दगी दी है कि अगर तुम औरत होते तो अपनी बदकिस्मती और कमजोरी का रोना भी न रो सकते थे | वैसे तुम्हारे इन दकियानुसी बकवासों को आम लोगों ने कब का आइना दिखा दिया है , कुछ समय में अल्लाह के बन्दे भी इनसे तौबा कर ही लेंगे |

  13. Mohammed Umar Kairanvi कहते हैं:

    >अपना सलीम खान तो हीरो (नायक) बन गया, 'सच बोलना मना है' मैं बहुत सारा झूठ बोला गया है, ज़रा देख आओ मैं थोडा व्यसत्‍ा हूँ, मैं यहाँ जो लिंक छोडता हूँ किया उससे आपको आपत्त्ति है तो वहाँ लिखिये,link he:''ज़रा देखिये तो इन बेशर्म ब्लोग्गरों को कहीं भी घुसे आते हैं ….''http://janokti.blogspot.com/2009/07/blog-post_1543.html?showComment=1248933769832#c8584075211847740999@चिचलूनकर जी पर मेरी हा हा हा हा हा हा हा हा हा गिनते जाओ 55 देशों के बारे हा हा करके दिखाओ, कभी मैं बताउंगा तुम्हें विश्‍व सबसे अमन वाला देश किनका है, किस मुस्लिम देश में केवल पैसों का खर्च करना सिखाया जाता है ना कि कमाना, और फिर रो लेना यह जानकर किसका विश्‍व में एक भी देश नहीं है, मैं इस बात पर नहीं हंसता बस आप रो लो,@ स्नेहा का ब्लाग देख नहीं पाया, फिर उनके लेख और चित्र देखकर वेसा ही सम्मान मिलेगा,इन्शा अल्लाह—–इस्लामिक पुस्तकों के अतिरिक्‍त छ अल्लाह के चैलेंज islaminhindi.blogspot.com (Rank-2 Blog) कल्कि व अंतिम अवतार और बैद्ध् मैत्रे, अंतिम ऋषि (इसाई) यहूदीयों के भी आखरी संदेष्‍टा मुहम्मद सल्ल.antimawtar.blogspot.com (Rank-1 Blog)

  14. Mohammed Umar Kairanvi कहते हैं:

    >अपना सलीम खान तो हीरो (नायक) बन गया, 'सच बोलना मना है' मैं बहुत सारा झूठ बोला गया है, ज़रा देख आओ मैं थोडा व्यसत्‍ा हूँ, मैं यहाँ जो लिंक छोडता हूँ किया उससे आपको आपत्त्ति है तो वहाँ लिखिये,link he:''ज़रा देखिये तो इन बेशर्म ब्लोग्गरों को कहीं भी घुसे आते हैं ….''http://janokti.blogspot.com/2009/07/blog-post_1543.html?showComment=1248933769832#c8584075211847740999@चिचलूनकर जी पर मेरी हा हा हा हा हा हा हा हा हा गिनते जाओ 55 देशों के बारे हा हा करके दिखाओ, कभी मैं बताउंगा तुम्हें विश्‍व सबसे अमन वाला देश किनका है, किस मुस्लिम देश में केवल पैसों का खर्च करना सिखाया जाता है ना कि कमाना, और फिर रो लेना यह जानकर किसका विश्‍व में एक भी देश नहीं है, मैं इस बात पर नहीं हंसता बस आप रो लो,@ स्नेहा का ब्लाग देख नहीं पाया, फिर उनके लेख और चित्र देखकर वेसा ही सम्मान मिलेगा,इन्शा अल्लाह—–इस्लामिक पुस्तकों के अतिरिक्‍त छ अल्लाह के चैलेंज islaminhindi.blogspot.com (Rank-2 Blog) कल्कि व अंतिम अवतार और बैद्ध् मैत्रे, अंतिम ऋषि (इसाई) यहूदीयों के भी आखरी संदेष्‍टा मुहम्मद सल्ल.antimawtar.blogspot.com (Rank-1 Blog)

  15. रंजन कहते हैं:

    >आपको तर्कों का जबाब लिखा है.. 1- अगर एक मर्द के पास एक से अधिक पत्नियाँ हों तो ऐसे विवाह से जन्मे बच्चे के माँ-बाप का पता आसानी से लग सकता है लेकिन वहीँ अगर एक औरत के पास एक से ज़्यादा पति हों तो केवल माँ का पता चलेगा, बाप का नहीं. इस्लाम माँ-बाप की पहचान को बहुत ज़्यादा महत्त्व देता है | मनोचिकित्सक कहते है कि ऐसे बच्चे मानसिक आघात और पागलपन के शिकार हो जाते है जो जो अपने माँ-बाप विशेष कर अपने बाप का नाम नहीं जानते| अक्सर उनका बचपन ख़ुशी से खली होता है| इसी कारण तवायफों (वेश्याओं) के बच्चो का बचपन अक्सर स्वस्थ नहीं होता| यदि ऐसे विवाह से जन्मे बच्चे का किसी स्कूल में अड्मिशन कराया जाय और उसकी माँ से उस बच्चे के बाप का नाम पूछा जाय तो माँ को दो या उससे अधिक नाम बताने पड़ेंगे. जैसा आपने खुद कहा है कि पहले एसा नही संभब था पर अब है.. और जो दो पति रख सकते है वो टेस्ट करबा कर पता भी कर सकते है… ये दलील बेकार है..2- मर्दों में कुदरती तौर पर औरतों के मुकाबले बहु-विवाह की क्षमता ज़्यादा होती है. विज्ञान के आधार पर बेबुनुयाद है.. बल्कि उल्टा होता है..3- समाज विज्ञान के अनुसार एक से ज़्यादा बीवी रखने वाले पुरुष एक पति के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वाह करना आसान होता है जबकि उसी जगह पर अनेक शौहर रखने वाली औरत के लिए एक पत्नी के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वाह करना संभव नहीं है, विशेषकर मासिकधर्म के समय जबकि एक स्त्री तीव्र मानसिक और व्यावहारिक परिवर्तन से गुज़रती है. एक से ज्यादा पति होने से उसे ज्यादा समर्थन मिलेगा.. ये तो पक्ष में तर्क है… 4- एक से ज़्यादा पति वाली औरत के एक ही समय में कई यौन साझी होंगे जिसकी वजह से उनमे यौन सम्बन्धी रोगों में ग्रस्त होने की आशंका अधिक होंगी और यह रोग उसके पतियों को भी लग सकता है चाहे उसके सभी पति उस स्त्री के अन्य किसी स्त्री के साथ यौन समंध से मुक्त हों. यह स्थिति कई पत्नियाँ रखने वाले पुरुष के साथ घटित नहीं होती है. ये बात पुरुषों पर भी लागु होती है.. आपसे अनुरोध है एसे तर्कों के किसी गल्त बात (बहुत पत्नि या बहु पति) को जायज नहीं ठहरा सकते और bias को बढ़ाबा नहीं दे सकते.. समझदारी इसमें है कि अगर कहीं गल्त लिखा है तो उसे मानो और वक्त जरुरत के हिसाब से ढालो..

  16. रंजन कहते हैं:

    >आपको तर्कों का जबाब लिखा है.. 1- अगर एक मर्द के पास एक से अधिक पत्नियाँ हों तो ऐसे विवाह से जन्मे बच्चे के माँ-बाप का पता आसानी से लग सकता है लेकिन वहीँ अगर एक औरत के पास एक से ज़्यादा पति हों तो केवल माँ का पता चलेगा, बाप का नहीं. इस्लाम माँ-बाप की पहचान को बहुत ज़्यादा महत्त्व देता है | मनोचिकित्सक कहते है कि ऐसे बच्चे मानसिक आघात और पागलपन के शिकार हो जाते है जो जो अपने माँ-बाप विशेष कर अपने बाप का नाम नहीं जानते| अक्सर उनका बचपन ख़ुशी से खली होता है| इसी कारण तवायफों (वेश्याओं) के बच्चो का बचपन अक्सर स्वस्थ नहीं होता| यदि ऐसे विवाह से जन्मे बच्चे का किसी स्कूल में अड्मिशन कराया जाय और उसकी माँ से उस बच्चे के बाप का नाम पूछा जाय तो माँ को दो या उससे अधिक नाम बताने पड़ेंगे. जैसा आपने खुद कहा है कि पहले एसा नही संभब था पर अब है.. और जो दो पति रख सकते है वो टेस्ट करबा कर पता भी कर सकते है… ये दलील बेकार है..2- मर्दों में कुदरती तौर पर औरतों के मुकाबले बहु-विवाह की क्षमता ज़्यादा होती है. विज्ञान के आधार पर बेबुनुयाद है.. बल्कि उल्टा होता है..3- समाज विज्ञान के अनुसार एक से ज़्यादा बीवी रखने वाले पुरुष एक पति के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वाह करना आसान होता है जबकि उसी जगह पर अनेक शौहर रखने वाली औरत के लिए एक पत्नी के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वाह करना संभव नहीं है, विशेषकर मासिकधर्म के समय जबकि एक स्त्री तीव्र मानसिक और व्यावहारिक परिवर्तन से गुज़रती है. एक से ज्यादा पति होने से उसे ज्यादा समर्थन मिलेगा.. ये तो पक्ष में तर्क है… 4- एक से ज़्यादा पति वाली औरत के एक ही समय में कई यौन साझी होंगे जिसकी वजह से उनमे यौन सम्बन्धी रोगों में ग्रस्त होने की आशंका अधिक होंगी और यह रोग उसके पतियों को भी लग सकता है चाहे उसके सभी पति उस स्त्री के अन्य किसी स्त्री के साथ यौन समंध से मुक्त हों. यह स्थिति कई पत्नियाँ रखने वाले पुरुष के साथ घटित नहीं होती है. ये बात पुरुषों पर भी लागु होती है.. आपसे अनुरोध है एसे तर्कों के किसी गल्त बात (बहुत पत्नि या बहु पति) को जायज नहीं ठहरा सकते और bias को बढ़ाबा नहीं दे सकते.. समझदारी इसमें है कि अगर कहीं गल्त लिखा है तो उसे मानो और वक्त जरुरत के हिसाब से ढालो..

  17. Suresh Chiplunkar कहते हैं:

    >मैंने सोचा था कि कैरानवी साहब राहुल गाँधी, कांग्रेस, गरीबी-महंगाई पर कुछ लिखेंगे, लेकिन वे तो अभी भी वहीं अटके हुए हैं…

  18. Suresh Chiplunkar कहते हैं:

    >मैंने सोचा था कि कैरानवी साहब राहुल गाँधी, कांग्रेस, गरीबी-महंगाई पर कुछ लिखेंगे, लेकिन वे तो अभी भी वहीं अटके हुए हैं…

  19. Varun Kumar Jaiswal कहते हैं:

    >ये कैरानवी लगता है सठिया गया है , सलीम तुम तो सुलझे हुए लगते हो , तुम्हारे कई आलेख उम्दा भी हैं और जैसा की तुम्हारा ब्लॉग है स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़ तो क्यों नहीं हिन्दोस्तान के मसलों पर केन्द्रित रहते हो , ये कूड़ा परोसेगे तो इसी तरह के विवाद जन्म लेंगे |जरा बता दो इस कैरानवी को कि अल्लाह जो की सर्वशक्तिमान है किसी को चैलेन्ज नहीं देगा , अरे कोई अपनी ही रचना की खुद से आजमाइश करे तो अल्लाह नहीं है |और जब तुम अवतारों में विश्वास नहीं रखते तो कल्कि की तरफदारी क्यों ?वैसे भी हम हिन्दुस्तानी जबरी किसी को नहीं मानते चाहे वो कोई हो ||उम्मीद है कि तुम समझोगे , लेकिन इस कैरानवी को तो जहन्नुम में ही समझाना पड़ेगा असल में औकात तो है नहीं तर्क कि दुनिया में आने की ||

  20. Varun Kumar Jaiswal कहते हैं:

    >ये कैरानवी लगता है सठिया गया है , सलीम तुम तो सुलझे हुए लगते हो , तुम्हारे कई आलेख उम्दा भी हैं और जैसा की तुम्हारा ब्लॉग है स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़ तो क्यों नहीं हिन्दोस्तान के मसलों पर केन्द्रित रहते हो , ये कूड़ा परोसेगे तो इसी तरह के विवाद जन्म लेंगे |जरा बता दो इस कैरानवी को कि अल्लाह जो की सर्वशक्तिमान है किसी को चैलेन्ज नहीं देगा , अरे कोई अपनी ही रचना की खुद से आजमाइश करे तो अल्लाह नहीं है |और जब तुम अवतारों में विश्वास नहीं रखते तो कल्कि की तरफदारी क्यों ?वैसे भी हम हिन्दुस्तानी जबरी किसी को नहीं मानते चाहे वो कोई हो ||उम्मीद है कि तुम समझोगे , लेकिन इस कैरानवी को तो जहन्नुम में ही समझाना पड़ेगा असल में औकात तो है नहीं तर्क कि दुनिया में आने की ||

  21. Varun Kumar Jaiswal कहते हैं:

    >कुरानी बकवासों का मामला – कैरानवी Rank – 2 निहायत ही घटिया अवतारवादी तर्क का मामला – कैरानवी Rank – 1 जल्दी पहुचें कोई और आगे न निकल जाये ||

  22. Varun Kumar Jaiswal कहते हैं:

    >कुरानी बकवासों का मामला – कैरानवी Rank – 2 निहायत ही घटिया अवतारवादी तर्क का मामला – कैरानवी Rank – 1 जल्दी पहुचें कोई और आगे न निकल जाये ||

  23. पी.सी.गोदियाल कहते हैं:

    >Dear Bloggers,Finally I reached to this conclusion, why we people are giving so much attention to all this useless things of this person ? As I suggested him it will be better for him to write all his this kinda craps in Urdu so that his muslim breathren can get enlighted from his vast knowledge.

  24. पी.सी.गोदियाल कहते हैं:

    >Dear Bloggers,Finally I reached to this conclusion, why we people are giving so much attention to all this useless things of this person ? As I suggested him it will be better for him to write all his this kinda craps in Urdu so that his muslim breathren can get enlighted from his vast knowledge.

  25. >दुनिया के कई देशों में बहुत शान्ति है, भारत, पकिस्तान से भी ज़्यादा जहाँ इस्लामिक क़ानून लागु है.और वेदों, पुराणों व् बाइबल एवं और भी कई किताबें इस बात की तस्दीक़ कर चुकी हैं कि कल्कि अवतार आएगा और नराशंश ऋषि आएगा, बाइबल में मोहम्मद (स.अ.व.) के आने की भविष्यवाणी है. पढिये तो ज़रा आप लोग या यूँ ही तर्क (कुतर्क) से अपना मन बहलाएँगे. मेरे लेख का यह मक़सद नहीं कि मैं लिख रहा हूँ तो आप सब उसे नकारात्मक लें बल्कि शुद्ध मन से उस पर विचार कर अपने मोक्ष का रास्ता आसान कर लें.

  26. सलीम ख़ान कहते हैं:

    >दुनिया के कई देशों में बहुत शान्ति है, भारत, पकिस्तान से भी ज़्यादा जहाँ इस्लामिक क़ानून लागु है.और वेदों, पुराणों व् बाइबल एवं और भी कई किताबें इस बात की तस्दीक़ कर चुकी हैं कि कल्कि अवतार आएगा और नराशंश ऋषि आएगा, बाइबल में मोहम्मद (स.अ.व.) के आने की भविष्यवाणी है. पढिये तो ज़रा आप लोग या यूँ ही तर्क (कुतर्क) से अपना मन बहलाएँगे. मेरे लेख का यह मक़सद नहीं कि मैं लिख रहा हूँ तो आप सब उसे नकारात्मक लें बल्कि शुद्ध मन से उस पर विचार कर अपने मोक्ष का रास्ता आसान कर लें.

  27. >आप लोगों के मन में इस्लाम के प्रति जो भी नाराज़गी है, उसे सवाल की शक्ल देकर मुझे मेल करें… इंशा अल्लाह ऐसा कोई सवाल नहीं होगा जिसे मैं जवाब न दे सकूँ…swachchhsandesh@gmail.com अथवा saleemlko@gmail.com पर

  28. सलीम ख़ान कहते हैं:

    >आप लोगों के मन में इस्लाम के प्रति जो भी नाराज़गी है, उसे सवाल की शक्ल देकर मुझे मेल करें… इंशा अल्लाह ऐसा कोई सवाल नहीं होगा जिसे मैं जवाब न दे सकूँ…swachchhsandesh@gmail.com अथवा saleemlko@gmail.com पर

  29. निशाचर कहते हैं:

    >मनुष्य आज पृथ्वी पर बसने वाले हर जीव पर भारी है तो केवल इसलिए कि उसके पास बुद्धि है. उसका इस्तेमाल कीजिये और केवल किताबी कीडा मत बनिए फिर चाहे वह किताब आसमान से उतरी हो या किसी ने कलम से गोदी हो. दिमाग इसलिए पाया है कि अच्छी बातों को ग्रहण करते चलो और बुराई को छोड़ते चलो. किताब में भले ही सब अच्छा ही लिखा हो लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है. बेहतर होगा पहले जाजिम धुल लें फिर मेहमानों को न्योता दें.

  30. निशाचर कहते हैं:

    >मनुष्य आज पृथ्वी पर बसने वाले हर जीव पर भारी है तो केवल इसलिए कि उसके पास बुद्धि है. उसका इस्तेमाल कीजिये और केवल किताबी कीडा मत बनिए फिर चाहे वह किताब आसमान से उतरी हो या किसी ने कलम से गोदी हो. दिमाग इसलिए पाया है कि अच्छी बातों को ग्रहण करते चलो और बुराई को छोड़ते चलो. किताब में भले ही सब अच्छा ही लिखा हो लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है. बेहतर होगा पहले जाजिम धुल लें फिर मेहमानों को न्योता दें.

  31. kshama कहते हैं:

    >इतनी बहस देखी यहाँ ,कि , अभी कुछ टिप्पणी करनेका मन नही है …इतना ज़रूर कहूँगी कि , किसी भी मुल्क के क़ानून हर नागरिक के लिए एक जैसे होने चाहियें …इंसानी फितरत दुनियामे एक जैसी है ..इसीलिये क़ुदरत के क़ानून एक जैसे हैं …किसी जाती पाती से इंसानों में भेद नही आते …वो तो बनाये जाते हैं ..राजीव गांधी ये बात अमल में ला सकते थे, लेकिन, रीढकी हड्डी बेहद कमज़ोर थी…! और सत्ता का लालच…! मरने से पहले एक काम तो अच्छा कर जाते…! ना reservation हटाया न, uniform civil code लाये…!

  32. kshama कहते हैं:

    >इतनी बहस देखी यहाँ ,कि , अभी कुछ टिप्पणी करनेका मन नही है …इतना ज़रूर कहूँगी कि , किसी भी मुल्क के क़ानून हर नागरिक के लिए एक जैसे होने चाहियें …इंसानी फितरत दुनियामे एक जैसी है ..इसीलिये क़ुदरत के क़ानून एक जैसे हैं …किसी जाती पाती से इंसानों में भेद नही आते …वो तो बनाये जाते हैं ..राजीव गांधी ये बात अमल में ला सकते थे, लेकिन, रीढकी हड्डी बेहद कमज़ोर थी…! और सत्ता का लालच…! मरने से पहले एक काम तो अच्छा कर जाते…! ना reservation हटाया न, uniform civil code लाये…!

  33. >सलीम भाई, आपने जो लिखा मैं जानता हूं बहुत मेहनत करके लिखा है…लेकिन मैं ज़्यादती तौर पर किसी के भी एक ज़्यादा पति या पत्नी रखने पर सहमत नही हूं क्यौकी कुरआन में साफ़ ज़िक्र है की "तुम एक से ज़्यादा बीवियां रख सकते हो जो एक वक्त में चार से ज़्यादा न हो लेकिन तुम्हें उन सब में हर हाल में इन्साफ़ करना होगा…किसी में भी कोई फ़र्क ना होने पाये…जितना वक्त एक को दो उतना वक्त ही दुसरे को दो…जो कपडा एक को दो..वही कपडा दुसरे को दो……किसी में भी बाल बराबर का फ़र्क नही होने पाये…इस लिहाज़ से मुझे तो नही लगता की कोई मुस्लमान इन शर्तों पर पुरा उतर सकें..

  34. >सलीम भाई, आपने जो लिखा मैं जानता हूं बहुत मेहनत करके लिखा है…लेकिन मैं ज़्यादती तौर पर किसी के भी एक ज़्यादा पति या पत्नी रखने पर सहमत नही हूं क्यौकी कुरआन में साफ़ ज़िक्र है की "तुम एक से ज़्यादा बीवियां रख सकते हो जो एक वक्त में चार से ज़्यादा न हो लेकिन तुम्हें उन सब में हर हाल में इन्साफ़ करना होगा…किसी में भी कोई फ़र्क ना होने पाये…जितना वक्त एक को दो उतना वक्त ही दुसरे को दो…जो कपडा एक को दो..वही कपडा दुसरे को दो……किसी में भी बाल बराबर का फ़र्क नही होने पाये…इस लिहाज़ से मुझे तो नही लगता की कोई मुस्लमान इन शर्तों पर पुरा उतर सकें..

  35. >@ वरून जी,आप ज़ाकिर नाईक जी की बात को कुरआनी बकवास करार दे रहे हो….तो मैं आपको चैलेन्ज करता हूं की आप उनकी किसी बात को बकवास साबित कर दो या कुरआन की किसी आयत को जिसमें इन्सान की पैदाइश का ज़िक्र है या स्पेस का ज़िक्र है या किसी और दुनियावी बात का ज़िक्र है जो दुनिया में होता हो या मौजुद हो…उसे आप बकवास या गलत साबित करके दिखा दीजिये….और अपनी गीता या किसी और ग्रन्थ की बात को सही साबित कर दीजिये…तो मैं इस्लाम को छोड दुंगामेरा नाम काशिफ़ आरिफ़ है और मैं अपनी बात से कभी पीछे नही हटता….इसी वजह से मैं लोग मुझे जानते है….

  36. >@ वरून जी,आप ज़ाकिर नाईक जी की बात को कुरआनी बकवास करार दे रहे हो….तो मैं आपको चैलेन्ज करता हूं की आप उनकी किसी बात को बकवास साबित कर दो या कुरआन की किसी आयत को जिसमें इन्सान की पैदाइश का ज़िक्र है या स्पेस का ज़िक्र है या किसी और दुनियावी बात का ज़िक्र है जो दुनिया में होता हो या मौजुद हो…उसे आप बकवास या गलत साबित करके दिखा दीजिये….और अपनी गीता या किसी और ग्रन्थ की बात को सही साबित कर दीजिये…तो मैं इस्लाम को छोड दुंगामेरा नाम काशिफ़ आरिफ़ है और मैं अपनी बात से कभी पीछे नही हटता….इसी वजह से मैं लोग मुझे जानते है….

  37. >@ वरुन जी, रही बात औरत को ज़लालत भरी ज़िन्दगी की तो इस्लाम में औरत के लिये जो हुक्म है वो उसके फ़ायदे के लिये है…. १. दुनिया के किसी धर्म की किताब में औरत को जायदाद में हिस्सा नही दिया गया।२. किसी भी धर्म की किताब में औरत को विधवा होने के बाद शादी की इज़ाज़त नही है लेकिन इस्लाम में साफ़ लिखा है की औरत अपने शौहर की मौत के बाद "इद्द्त" (Recovery Period) में ४ महीने १० दिन बैठेगी….इस वक्त में वो घर से बाहर नही निकलेगी और सिर्फ़ अपने घरवालों से मिलेगी और बात करेगी…….इस वक्त के पुरा होने के फ़ौरन बाद वो शादी कर सकती है…..यहां तक की कोई मर्द उससे शादी करने को इच्छुक हो तो वो इद्द्त में ही उसके पास संदेश पहुंचा दे

  38. >@ वरुन जी, रही बात औरत को ज़लालत भरी ज़िन्दगी की तो इस्लाम में औरत के लिये जो हुक्म है वो उसके फ़ायदे के लिये है…. १. दुनिया के किसी धर्म की किताब में औरत को जायदाद में हिस्सा नही दिया गया।२. किसी भी धर्म की किताब में औरत को विधवा होने के बाद शादी की इज़ाज़त नही है लेकिन इस्लाम में साफ़ लिखा है की औरत अपने शौहर की मौत के बाद "इद्द्त" (Recovery Period) में ४ महीने १० दिन बैठेगी….इस वक्त में वो घर से बाहर नही निकलेगी और सिर्फ़ अपने घरवालों से मिलेगी और बात करेगी…….इस वक्त के पुरा होने के फ़ौरन बाद वो शादी कर सकती है…..यहां तक की कोई मर्द उससे शादी करने को इच्छुक हो तो वो इद्द्त में ही उसके पास संदेश पहुंचा दे

  39. सैयद | Syed कहते हैं:

    >वाह सलीम साहब, आप तो फेमस हो गए…. क्या धांसू पोस्ट लिखी है….. पर एक बात कहना चाहता हूँ… आपने बहुपत्नी के समर्थन में जो तर्क दिए है वह निहायत ही गैरवाजिब और वाहियात है….. मुझे नहीं लगता की ऐसा कोई ज़िक्र कहीं भी है…..बेशक इस्लाम में बहुपत्नी को समर्थन था, पर वो १५ सौ साल पहले की हकीकत थी….. जो उस समय की सामजिक ढांचे पर आधारित था…. और जितना मैंने पढ़ा है और समझा है उसके अनुसार मुस्लिम को एक से अधिक पत्नी रखने की इजाज़त सिर्फ इन हालात में थी…अगर किसी बेबस औरत का शौहर किसी युद्ध में या किसी और वजह से ख़त्म हो चुका हो और पुरुष उसकी देख रेख करने की नीयत से उससे निकाह करे. उस काल में औरतों की संख्या पुरुषों के अनुपात में अधिक थी.और ऐसा करने के लिए उसे अपनी पहली बीवी से इजाज़त लेनी भी वाजिब थी. आपने जो तर्क दियें हैं…. उससे आप अपनी और इस्लाम की फजीहत ही करवा रहें हैं……बहुत सी ऐसी बातें हैं जो उस काल और परिवेश में बिलकुल जायज़ थी…. लेकिन उन चीजों को हमें आज के परिवेश के अनुसार ढालना चाहिए…… बहुत सी बातें आज भी उतनी ही सही है जितनी उस काल में थी…….मैं आप जितना पढ़ा लिखा नहीं हूँ….. हो सकता है कुछ गलत कह गया हूँ… माफ़ी का तलबगार हूँ.

  40. सैयद | Syed कहते हैं:

    >वाह सलीम साहब, आप तो फेमस हो गए…. क्या धांसू पोस्ट लिखी है….. पर एक बात कहना चाहता हूँ… आपने बहुपत्नी के समर्थन में जो तर्क दिए है वह निहायत ही गैरवाजिब और वाहियात है….. मुझे नहीं लगता की ऐसा कोई ज़िक्र कहीं भी है…..बेशक इस्लाम में बहुपत्नी को समर्थन था, पर वो १५ सौ साल पहले की हकीकत थी….. जो उस समय की सामजिक ढांचे पर आधारित था…. और जितना मैंने पढ़ा है और समझा है उसके अनुसार मुस्लिम को एक से अधिक पत्नी रखने की इजाज़त सिर्फ इन हालात में थी…अगर किसी बेबस औरत का शौहर किसी युद्ध में या किसी और वजह से ख़त्म हो चुका हो और पुरुष उसकी देख रेख करने की नीयत से उससे निकाह करे. उस काल में औरतों की संख्या पुरुषों के अनुपात में अधिक थी.और ऐसा करने के लिए उसे अपनी पहली बीवी से इजाज़त लेनी भी वाजिब थी. आपने जो तर्क दियें हैं…. उससे आप अपनी और इस्लाम की फजीहत ही करवा रहें हैं……बहुत सी ऐसी बातें हैं जो उस काल और परिवेश में बिलकुल जायज़ थी…. लेकिन उन चीजों को हमें आज के परिवेश के अनुसार ढालना चाहिए…… बहुत सी बातें आज भी उतनी ही सही है जितनी उस काल में थी…….मैं आप जितना पढ़ा लिखा नहीं हूँ….. हो सकता है कुछ गलत कह गया हूँ… माफ़ी का तलबगार हूँ.

  41. Varun Kumar Jaiswal कहते हैं:

    >अरे काशिफ आरिफ भी इस ओखल में सर देने चले आये अगर तर्कों की बात की जाये तो एक बात बताओ कि क्या गोबर में तर्क रूपी घी डालने से वो हलवा बन जाता है ? नहीं न तो फिर कुरानी बकवासों को छद्म तर्कों के सहारे भोली – भली आम जनता के सामने रखने से जाकिर नाईक और वो सनकी मोहम्मद उमर कैरानवी कोई वैज्ञानिक विवेचना तो कर नहीं रहा है |और वो जो गोबर परोस रहा है वो तुम सब हलवा समझ खा रहे हो , खाते रहो और खुश रहो , लेकिन याद रखना वो है तो गोबर ही ||और हाँ याद रखना पचने में समस्या हो तो मैं कई चिकित्सकों को जानता हूँ ||

  42. Varun Kumar Jaiswal कहते हैं:

    >अरे काशिफ आरिफ भी इस ओखल में सर देने चले आये अगर तर्कों की बात की जाये तो एक बात बताओ कि क्या गोबर में तर्क रूपी घी डालने से वो हलवा बन जाता है ? नहीं न तो फिर कुरानी बकवासों को छद्म तर्कों के सहारे भोली – भली आम जनता के सामने रखने से जाकिर नाईक और वो सनकी मोहम्मद उमर कैरानवी कोई वैज्ञानिक विवेचना तो कर नहीं रहा है |और वो जो गोबर परोस रहा है वो तुम सब हलवा समझ खा रहे हो , खाते रहो और खुश रहो , लेकिन याद रखना वो है तो गोबर ही ||और हाँ याद रखना पचने में समस्या हो तो मैं कई चिकित्सकों को जानता हूँ ||

  43. Sneha कहते हैं:

    >काशिफ़ आरिफ़,गीता के उपदेशों को सिद्ध करने की जरूरत नहीं है.तुम हर दिन इसे खुद ही सिद्ध करते हो.गीता में एक बात कही गयी है – "हे मानव-तुम कर्म करो!"काशिफ बताओ, क्या तुम इस बात को नहीं मानते? तुम रोज अपने कर्म नहीं करते. कोई दूसरा तुम्हें खिला देगा क्या?तुम बस इसे सिद्ध करो उसे सिद्ध करो के चक्कर में ही पडे रहना. भगवान ने तुम्हें जीवन दिया है इसे जियो और दूसरों को भी जीने दो. जो तुम्हें खुद पसंद है उस पसंद को दूसरों पर थोपना छोड दो. इतिहास गवाह है आज तक जितने भी युद्ध व लडाईयाँ हुई हैं वो सभी अपनी बात मनवाने के लिये ही होई हैं.अगर अपनी बात मनवानी ही हैं तो ऐसी बातें मनवाओ जिससे इस समाज को कुछ फायदा हो. लोग टीबी, पोलियो, एड्स, मलेरिया इत्यादि बीमारीयों से ग्रस्त हैं. उनकी सेवा करो. सबसे बडी पूजा मानव-सेवा है. लोग भूख से मर रहे हैं और तुम बातें सिद्ध करवाने में लगे हो.

  44. Sneha कहते हैं:

    >काशिफ़ आरिफ़,गीता के उपदेशों को सिद्ध करने की जरूरत नहीं है.तुम हर दिन इसे खुद ही सिद्ध करते हो.गीता में एक बात कही गयी है – "हे मानव-तुम कर्म करो!"काशिफ बताओ, क्या तुम इस बात को नहीं मानते? तुम रोज अपने कर्म नहीं करते. कोई दूसरा तुम्हें खिला देगा क्या?तुम बस इसे सिद्ध करो उसे सिद्ध करो के चक्कर में ही पडे रहना. भगवान ने तुम्हें जीवन दिया है इसे जियो और दूसरों को भी जीने दो. जो तुम्हें खुद पसंद है उस पसंद को दूसरों पर थोपना छोड दो. इतिहास गवाह है आज तक जितने भी युद्ध व लडाईयाँ हुई हैं वो सभी अपनी बात मनवाने के लिये ही होई हैं.अगर अपनी बात मनवानी ही हैं तो ऐसी बातें मनवाओ जिससे इस समाज को कुछ फायदा हो. लोग टीबी, पोलियो, एड्स, मलेरिया इत्यादि बीमारीयों से ग्रस्त हैं. उनकी सेवा करो. सबसे बडी पूजा मानव-सेवा है. लोग भूख से मर रहे हैं और तुम बातें सिद्ध करवाने में लगे हो.

  45. Pankaj Upadhyay कहते हैं:

    >Kabhee inke baare mein padhta hoon aur kabhi aapko dekhta hoon. http://pupadhyay.blogspot.com/2009/07/blog-post_1848.htmldukhad hai aur sachhai bhi ki aap jaise log bhi hain is samaaj mein.. 😦

  46. >Kabhee inke baare mein padhta hoon aur kabhi aapko dekhta hoon. http://pupadhyay.blogspot.com/2009/07/blog-post_1848.htmldukhad hai aur sachhai bhi ki aap jaise log bhi hain is samaaj mein.. 😦

  47. >शीघ्र ही मेरा अगला लेख पढ़े "जिहाद का वर्णन भगवत गीता में भी"

  48. सलीम ख़ान कहते हैं:

    >शीघ्र ही मेरा अगला लेख पढ़े "जिहाद का वर्णन भगवत गीता में भी"

  49. >जिहाद का मायने क्या है? क्या जिहाद का ज़िक्र कुरआन में ही है या दुसरे धर्मों की किताबों में भी है? क्या श्री कृष्ण ने भी जिहाद करने का हुक़्म दिया है या नहीं? क्या किसी एक ही काम के दो संबोधन देना उचित है अर्थात शहीद भगत सिंह को अँगरेज़ आतंकवादी कहते हैं और हम देशभक्त? आखिर कौन सही है? साध्वी प्रज्ञा को सीबीआई आतंकवादी कहती है! क्या वह वाकई आतंकवादी है? ओसामा बिन लादेन को अँगरेज़ आतंवादी कहते हैं ! क्या वह वाकई आतंकवादी है? इन सभी सवालों का जवाब हैं, मेरा अगला पोस्ट!!"जिहाद का वर्णन भगवत गीता में भी"

  50. सलीम ख़ान कहते हैं:

    >जिहाद का मायने क्या है? क्या जिहाद का ज़िक्र कुरआन में ही है या दुसरे धर्मों की किताबों में भी है? क्या श्री कृष्ण ने भी जिहाद करने का हुक़्म दिया है या नहीं? क्या किसी एक ही काम के दो संबोधन देना उचित है अर्थात शहीद भगत सिंह को अँगरेज़ आतंकवादी कहते हैं और हम देशभक्त? आखिर कौन सही है? साध्वी प्रज्ञा को सीबीआई आतंकवादी कहती है! क्या वह वाकई आतंकवादी है? ओसामा बिन लादेन को अँगरेज़ आतंवादी कहते हैं ! क्या वह वाकई आतंकवादी है? इन सभी सवालों का जवाब हैं, मेरा अगला पोस्ट!!"जिहाद का वर्णन भगवत गीता में भी"

  51. varun कहते हैं:

    >aisi hi ladai me tumhe achchi khasi comment mil gai bhai. ab to khush.mera to sabhi bahi bahno se nivedan hai ki ladai jagda mat karo. vo pahle ka jamana tha jab mahabharat me Draupadi ke panch aur sita maiya ke panch pati hote the. tab kahan DNA hua karta tha? tabhi ham bhi un sab ko aaj bhi pujte hai ki nahi?vo to hamare bhagvan hai.fir nahak ladai kyo???

  52. varun कहते हैं:

    >aisi hi ladai me tumhe achchi khasi comment mil gai bhai. ab to khush.mera to sabhi bahi bahno se nivedan hai ki ladai jagda mat karo. vo pahle ka jamana tha jab mahabharat me Draupadi ke panch aur sita maiya ke panch pati hote the. tab kahan DNA hua karta tha? tabhi ham bhi un sab ko aaj bhi pujte hai ki nahi?vo to hamare bhagvan hai.fir nahak ladai kyo???

  53. rajan कहते हैं:

    >Ek sayed ke alawa aur koi bhi baat ko samajh nahi paya hai

  54. rajan कहते हैं:

    >Ek sayed ke alawa aur koi bhi baat ko samajh nahi paya hai

  55. rajan कहते हैं:

    >Are sayed bhai apaatkaal ke liye ki gai ek vyavastha ko mardo ne apna haq samajh liya shukra hai ab muslim mard bhi samajhne lage hai

  56. rajan कहते हैं:

    >Are sayed bhai apaatkaal ke liye ki gai ek vyavastha ko mardo ne apna haq samajh liya shukra hai ab muslim mard bhi samajhne lage hai

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