स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़

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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>मुसलमान बताएं कि एक से अधिक पत्नी रखने की अनुमति क्यों है? (Why more then one wives in Islam)

>कहते हैं कि मुसलमान चार शादियाँ करते हैं? सच ही है! लेकिन चार शादी और तलाक़ के मसले पर नॉन-मुस्लिम्स मुसलामानों से सवाल पूछते रहते है और मुसलमान इसका कोई जवाब नहीं दे पते. वजह क्यूंकि उन्हें खुद ही इसके बारे में ठीक से पता नहीं.


मैं आपको बता दूं दुनिया में वाहिद (single) ऐसी किताब है कुरआन जिसमें लिखा है और इसके मानने वालों (मुसलमानों) को यह निर्देश भी दिया गया है कि केवल एक से शादी करो. “marry only one”

इसके अलावा कोई ऐसी धार्मिक किताब नहीं जो उनके मानने वालों को यह निर्देश देती नहीं है. हमें मालूम है कि हिन्दू धर्म में भी ऐसी कोई किताब नहीं जो इसके मुताल्लिक़ कोई फैसला करती हो. बाइबल में ऐसे मुद्दे पर नहीं लिखा है कि आपको इसके मुताल्लिक़ क्या करने चाहिए.

हम जानते हैं कि दशरथ के कई बीवियां थीं. इसी तरह और भी बहुत से हिन्दू लोग थे इतिहास पढने पर पता चलता है कि उनकी एक से ज़्यादा बीवियां थीं. आपको पता है श्रीकृष्ण की कितनी बीवियां थीं…. दो…चार…दस….सौ….हज़ार…!!! श्रीकृष्ण की सोलह हज़ार एक सौ आठ बीवियां थी…. १६,१०८

अगर उनके इतनी बीवियां हो सकती हैं तो हमारी चार क्यूँ नहीं…!!!???

हिन्दू धर्म में एक से ज़्यादा बीवियां रखने पर यह पाबन्दी नहीं है आप कितनी बीवियां रख सकते हैं. ऐसा कहीं भी नहीं लिखा है कि आप सिर्फ एक से ही शादी करोगे.. एक से ज़्यादा और कितनी भी (कोई गिनती नहीं) बीवी रखने पर कोई पाबन्दी नहीं. ये तो भारत देश के कानून ने HUF एक्ट में इसकी मुमानियत करी है सन १९५१ में… हिन्दू धर्म कि किसी भी किताब में ऐसा कहीं भी नहीं लिखा है. खैर, मैं अब अपने मुद्दे पर आता हूँ कि क्यूँ मुसलमान (या कोई भी) एक से ज़्यादा बीवी रख सकता है?

आईये इस विषय पर बिन्दुवार चर्चा करते हैं-

बहु-विवाह की परिभाषा-इसका अर्थ है ऐसी व्यवस्था जिसके अनुसार व्यक्ति के एक से अधिक पत्नी या पति हों। बहु-विवाह दो प्रकार के होते हैं-

१. एक पुरूष द्वारा एक से अधिक पत्नी रखना। २. एक स्त्री द्वारा एक से अधिक पति रखना । (मैं इस विषय पर भी शीघ्र ही लिखूंगा)

इस्लाम में इस बात की इजाजत है कि एक पुरूष एक सीमा तक एक से अधिक पत्नी रख सकता है जबकि स्त्री के लिए इसकी इजाजत नहीं है कि वह एक से अधिक पति रखे।

. पवित्र कुरआन ही संसार की धार्मिक पुस्तकों में एकमात्र पुस्तक है जो कहती है ‘केवल एक औरत से विवाह करो।

संसार में कुरआन ही ऐसी एकमात्र धार्मिक पुस्तक है जिसमें यह बात कही गई है कि ‘केवल एक (औरत) से विवाह करो।’ दूसरी कोई धार्मिक पुस्तक ऐसी नहीं जो केवल एक औरत से विवाह का निर्देश देती हो। किसी भी धार्मिक पुस्तक में हम पत्नियों की संख्या पर कोई पाबन्दी नहीं पाते चाहे ‘वेद, ‘रामायण, ‘गीता, हो या ‘तलमुद व ‘बाइबल। इन पुस्तकों के अनुसार एक व्यक्ति अपनी इच्छा के अनुसार जितनी चाहे पत्नी रख सकता है।

बाद में हिन्दुओं और ईसाई पादरियों ने पत्नियों की संख्या सीमित करके केवल एक कर दी। हम देखते हैं कि बहुत से हिन्दू धार्मिक व्यक्तियों के पास, जैसा कि उनकी धार्मिक पुस्तकों में वर्णन है, अनेक पत्नियाँ थीं। राम के पिता राजा दशरथ के एक से अधिक पत्नियाँ थीं, इसी प्रकार कृष्ण जी के भी अनेक पत्नियाँ थीं। प्राचीन काल में ईसाइयों को उनकी इच्छा के अनुसार पत्नियाँ रखने की इजाज़त थी, क्योंकि बाइबल पत्नियों की संख्या पर कोई सीमा नहीं लगाती। मात्र कुछ सदी पहले गिरजा ने पत्नियों की सीमा कम करके एक कर दी। यहूदी धर्म में भी बहु-विवाह की इजाजत है। तलमूद कानून के अनुसार इब्राहीम की तीन पत्नियाँ थीं और सुलैमान की सैकड़ों पत्नियाँ थीं। इनमें बहु-विवाह का रिवाज चलता रहा और उस समय बंद हुआ जब रब्बी गर्शोम बिन यहूदा (९६० ई.-१०३० ई.) ने इसके खिलाफ हुक्म जारी किया। मुसलमान देशों में रहने वाले यहूदियों के पुर्तगाल समुदाय में यह रिवाज १९५० ई. तक प्रचलित रहा और अन्तत: इसराईल के चीफ रब्बी ने एक से अधिक पत्नी रखने पर पाबंदी लगा दी।

२. मुसलमानों की अपेक्षा हिन्दू अधिक पत्नियाँ रखते हैं सन १९७५ र्ई. में प्रकाशित ‘इस्लाम में औरत का स्थान कमेटी की रिपोर्ट में पृष्ठ संख्या ६६, ६७ में बताया गया है कि १९५१ ई. और १९६१ ई. के मध्य हिन्दुओं में बहु-विवाह ५.०६ प्रतिशत था जबकि मुसलमानों में केवल ४.३१ प्रतिशत था।

भारतीय कानून में केवल मुसलमानों को ही एक से अधिक पत्नी रखने की अनुमति है और गैर-मुस्लिमों के लिए एक से अधिक पत्नी रखना भारत में गैर कानूनी है। इसके बावजूद हिन्दुओं के पास मुसलमानों की तुलना में अधिक पत्नियां होती हैं। भूतकाल में हिन्दुओं पर भी इसकी कोई पाबंदी नहीं थी। कई पत्नियां रखने की उन्हें अनुमति थी। ऐसा सन १९५४ ई. में हुआ जब हिन्दू विवाह कानून लागू किया गया जिसके अंतर्गत हिन्दुओं को बहु-विवाह की अनुमति नहीं रही और इसको गैर-कानूनी करार दिया गया। यह भारतीय कानून है जो हिन्दुओं पर एक से अधिक पत्नी रखने पर पाबंदी लगाता है, न कि हिन्दू धार्मिक ग्रंथ। अब आइए इस पर चर्चा करते हैं कि इस्लाम एक पुरूष को बहु-विवाह की अनुमति क्यों देता है?

३. पवित्र कुरआन सीमित बहु-विवाह की अनुमति देता है जैसा कि पहले बयान किया जा चुका है कि पवित्र कुरआन ही एकमात्र धार्मिक पुस्तक है जो निर्देश देती है कि ‘केवल एक (औरत) से विवाह करो’ कुरआन में है- ”अपनी पसंद की औरत से विवाह करो दो, तीन अथवा चार, परन्तु यदि तुम्हें आशंका हो कि तुम उनके मध्य समान न्याय नहीं कर सकते तो तुम केवल एक (औरत) से विवाह करो”(·कुरआन, ४:३)

कुरआन के अवतरित होने से पूर्व बहु-विवाह की कोई सीमा नही थी। बहुत से लोग बड़ी संख्या में पत्नियाँ रखते थे और कुछ के पास तो सैकड़ों पत्नियाँ होती थीं। इस्लाम ने अधिक से अधिक चार पत्नियों की सीमा निर्धारित कर दी। इस्लाम किसी व्यक्ति को दो, तीन अथवा चार औरतों से इस शर्त पर विवाह करने की इजाज़त देता है, जब वह उनमें बराबर का इंसाफ करने में समर्थ हो। कुरआन के इसी अध्याय अर्थात सूरा निसा आयत १२९ में कहा गया है : ”तुम स्त्रियों (पत्नियों) के मध्य न्याय करने में कदापि समर्थ न होगे।” (कुरआन, ४:१२९)

कुरआन से मालूम हुआ कि बहु-विवाह कोई आदेश नहीं बल्कि एक अपवाद है। बहुत से लोगों को भ्रम है कि एक मुसलमान पुरूष के लिए एक से अधिक पत्नियाँ रखना अनिवार्य है.

आमतौर से इस्लाम ने किसी काम को करने अथवा नहीं करने की दृष्टि से पाँच भागों में बांटा है-

(A) फ़र्ज़ अर्थात अनिवार्य (B) मुस्तहब अर्थात पसन्दीदा (C) मुबाह अर्थात जिसकी अनुमति हो (D) मकरूह अर्थात घृणित, नापसन्दीदा (E) ‘हराम अर्थात निषेध

बहु-विवाह मुबाह के अन्तर्गत आता है जिसकी इजाज़त और अनुमति है, आदेश नहीं है। अर्थात यह नहीं कहा जा सकता कि एक मुसलमान जिसकी दो, तीन अथवा चार पत्नियाँ हों, वह उस मुसलमान से अच्छा है जिसकी केवल एक पत्नी हो.

४. औरतों की औसत आयु पुरूषों से अधिक होती है प्राकृतिक रूप से औरत एवं पुरूष लगभग एक ही अनुपात में जन्म लेते हैं। बच्चों की अपेक्षा बच्चियों में रोगों से लडऩे की क्षमता अधिक होती है। शिशुओं के इलाज के दौरान लड़कों की मृत्यु ज्य़ादा होती है। युद्ध के दौरान स्त्रियों की अपेक्षा पुरूष अधिक मरते हैं। दुर्घटनाओं एवं रोगों में भी यही तथ्य प्रकट होता है। स्त्रियों की औसत आयु पुरूषों से अधिक होती है इसीलिए हम देखते हैं कि विश्व में विधवाओं की संख्या विधुरों से अधिक है.

५. भारत में पुरूषों की आबादी औरतों से अधिक है जिसका कारण है मादा गर्भपात और भ्रूण हत्या भारत उन देशों में से एक है जहाँ औरतों की आबदी पुरूषों से कम है। इसका असल कारण यह है कि भारत में कन्या भ्रूण-हत्या की अधिकता है और भारत में प्रतिवर्ष दस लाख मादा गर्भपात कराए जाते हैं। यदि इस घृणित कार्य को रोक दिया जाए तो भारत में भी स्त्रियों की संख्या पुरूषों से अधिक होगी.

६. पूरे विश्व में स्त्रियों की संख्या पुरूषों से अधिक हैअमेरिका में स्त्रियों की संख्या पुरूषों से अठत्तर लाख ज्य़ादा है। केवल न्यूयार्क में ही उनकी संख्या पुरूषों से दस लाख बढ़ी हुई है और जहाँ पुरूषों की एक तिहाई संख्या सोडोमीज (पुरूषमैथुन) है ओर पूरे अमेरिका राज्य में उनकी कुल संख्या दो करोड़ पचास लाख है। इससे प्रकट होता है कि ये लोग औरतों से विवाह के इच्छुक नहीं हैं। ग्रेट ब्रिटेन में स्त्रियों की आबादी पुरूषों से चालीस लाख ज्य़ादा है। जर्मनी में पचास लाख और रूस में नब्बे लाख से आगे है। केवल खुदा ही जानता है कि पूरे विश्व में स्त्रियों की संख्या पुरूषों से कितनी अधिक है।

७. प्रत्येक व्यक्ति को केवल एक पत्नी रखने की सीमा व्यावहारिक नहीं है यदि हर व्यक्ति एक औरत से विवाह करता है तब भी अमेरिकी राज्य में तीन करोड़ औरतें अविवाहित रह जाएंगी (यह मानते हुए कि इस देश में सोडोमीज की संख्या ढाई करोड़ है)। इसी प्रकार ग्रेट ब्रिटेन में चालीस लाख से अधिक औरतें अविवाहित रह जाएंगी। औरतों की यह संख्या पचास लाख जर्मनी में और नब्बे लाख रूस में होगी, जो पति पाने से वंचित रहेंगी। यदि मान लिया जाए कि अमेरिका की उन अविवाहितों में से एक हमारी बहन हो या आपकी बहन हो तो इस स्थिति में सामान्यत: उस·के सामने केवल दो विकल्प होंगे। एक तो यह कि वह किसी ऐसे पुरूष से विवाह कर ले जिसकी पहले से पत्नी मौजूद है। अगर वह ऐसा नहीं करती है तो इसकी पूरी आशंका होगी कि वह गलत रास्ते पर चली जाए। सभी शरीफ लोग पहले विकल्प को प्राथमिकता देना पसंद करेंगे.

पश्चिमी समाज में यह रिवाज आम है कि एक व्यक्ति पत्नी तो एक रखता है और साथ-साथ उसके बहुत-सी औरतों से यौन संबंध होते हैं। जिसके कारण औरत एक असुरक्षित और अपमानित जीवन व्यतीत करती है। वही समाज किसी व्यक्ति को एक से अधिक पत्नी के साथ स्वीकार नहीं कर सकता, जिससे औरत समाज में सम्मान और आदर के साथ एक सुरक्षित जीवन व्यतीत कर सके। और भी अनेक कारण हैं जिनके चलते इस्लाम सीमित बहु-विवाह की अनुमति देता है परन्तु मूल कारण यह है कि इस्लाम एक औरत का सम्मान और उसकी इ़ज्ज़त बाकी रखना चाहता है।

सलीम खान

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54 Responses

  1. >देख लो जब भी ढंग से प्रस्‍तुत करोगे बोलती बंद मिलेगी, समझ गये ना किनकी बोलती बंद है, बडे नालायक हैं मैं समझता था मुझे बार बार ज्ञानी लोगों से इनके जवाब लेने जाना पडेगा, मगर मेरी सोच गलत साबित करदी, यह तो स्वयं को भी नहीं जानते,खेर अच्छी पोस्ट की बधाई

  2. >देख लो जब भी ढंग से प्रस्‍तुत करोगे बोलती बंद मिलेगी, समझ गये ना किनकी बोलती बंद है, बडे नालायक हैं मैं समझता था मुझे बार बार ज्ञानी लोगों से इनके जवाब लेने जाना पडेगा, मगर मेरी सोच गलत साबित करदी, यह तो स्वयं को भी नहीं जानते,खेर अच्छी पोस्ट की बधाई

  3. >उर्दू में लिखो मिंया, हिंदी में नहीं पढ़ पायेंगे आपके मुस्लिम विरादर ! Pakistan’s population to double by 2050: UN (उसके बाद रहेंगे कहाँ, इंडिया में घुसपैठ !!!!)KARACHI: Pakistan’s population is growing so incredibly fast that despite decades of family planning efforts, in 40 years it will be the fourth largest country on Earth, a United Nations report said.United Nations Population Division said Pakistan will overtake Brazil and Indonesia by 2050 to rank fourth in world population, almost doubling to 335 million from its current 180 million.‘For a country with the resources of Pakistan that’s enormous. How can Pakistan support a population that size with jobs, education, health care? It can’t do so right now with the population it has,’ said Daniel Baker, who heads UN Family Planning Association in Pakistan.Pakistan currently ranks sixth behind China, India, the United States, Indonesia and Brazil. On achieving independence in 1947, the country had 37 million people and was ranked 15th in the world.In little than 60 years it has multiplied nearly five times, and now has a population growth rate of 2.2 per cent per year, according to UN population data.The rapid population growth poses potentially disastrous consequences.Fifty-seven per cent of Pakistan’s population is between 15 and 64, and 41 per cent are under 15. Only four per cent are over 65. Pakistan is now experiencing its largest ever youth bulge. — APP

  4. >उर्दू में लिखो मिंया, हिंदी में नहीं पढ़ पायेंगे आपके मुस्लिम विरादर ! Pakistan’s population to double by 2050: UN (उसके बाद रहेंगे कहाँ, इंडिया में घुसपैठ !!!!)KARACHI: Pakistan’s population is growing so incredibly fast that despite decades of family planning efforts, in 40 years it will be the fourth largest country on Earth, a United Nations report said.United Nations Population Division said Pakistan will overtake Brazil and Indonesia by 2050 to rank fourth in world population, almost doubling to 335 million from its current 180 million.‘For a country with the resources of Pakistan that’s enormous. How can Pakistan support a population that size with jobs, education, health care? It can’t do so right now with the population it has,’ said Daniel Baker, who heads UN Family Planning Association in Pakistan.Pakistan currently ranks sixth behind China, India, the United States, Indonesia and Brazil. On achieving independence in 1947, the country had 37 million people and was ranked 15th in the world.In little than 60 years it has multiplied nearly five times, and now has a population growth rate of 2.2 per cent per year, according to UN population data.The rapid population growth poses potentially disastrous consequences.Fifty-seven per cent of Pakistan’s population is between 15 and 64, and 41 per cent are under 15. Only four per cent are over 65. Pakistan is now experiencing its largest ever youth bulge. — APP

  5. >इस्लाम सींमित मात्रा में बहुविवाह की स्वीकृति देता है जो अपवाद है। लेकिन मुसलमानों ने इसे अपना अधिकार और औरतों के निर्मम शोषण का औजार बना दिया। हिन्दू और ईसाई धर्म बहु पत्नित्व से एक पत्नित्व की ओर आगे बढ़े। अब आप ही बताएँ किस ने प्रगति की?

  6. >इस्लाम सींमित मात्रा में बहुविवाह की स्वीकृति देता है जो अपवाद है। लेकिन मुसलमानों ने इसे अपना अधिकार और औरतों के निर्मम शोषण का औजार बना दिया। हिन्दू और ईसाई धर्म बहु पत्नित्व से एक पत्नित्व की ओर आगे बढ़े। अब आप ही बताएँ किस ने प्रगति की?

  7. >कमाल है भई, इतनी सी उम्र में आपने सारे धर्मों के सभी ग्रंथों का अध्ययन भी कर लिया, और यह भी जान लिया कि किस धर्मग्रन्थ में क्या लिखा है, और क्या नहीं लिखा? जब आप इतने ज्ञानी हैं तो फ़िर बहस करना ही बेकार है… (लगता है कि आप ज़ाकिर नाईक की पुस्तकों और व्याख्यानों से काफ़ी प्रभावित हैं)🙂 बहरहाल, लगे रहिये…

  8. >कमाल है भई, इतनी सी उम्र में आपने सारे धर्मों के सभी ग्रंथों का अध्ययन भी कर लिया, और यह भी जान लिया कि किस धर्मग्रन्थ में क्या लिखा है, और क्या नहीं लिखा? जब आप इतने ज्ञानी हैं तो फ़िर बहस करना ही बेकार है… (लगता है कि आप ज़ाकिर नाईक की पुस्तकों और व्याख्यानों से काफ़ी प्रभावित हैं)🙂 बहरहाल, लगे रहिये…

  9. >कई प्रश्न अनुत्तरित रह गये-१) जब मुसलमान कुरान के एके-एक अक्षर को मानने और मनवाने की दुहाई देते हैं तो एक-पत्नी के आदेश के विरुद्ध क्यों हैं?२) यदि उपरोक्त बात कुरान में है तो भारतीय संविधान ने उनको चार-चार बीबियाँ रखने की छूट क्यों दे रखी है?३) दुनिया के सारे धर्म समय और परिस्थितियों के साथ बदलने के लिये खुले दिमाग से सोचते और अमल करते हैं; मुसलमान क्यों सातवीं-आठवीं शताब्दी की बातों से चिपके रहना चाहते हैं?

  10. >कई प्रश्न अनुत्तरित रह गये-१) जब मुसलमान कुरान के एके-एक अक्षर को मानने और मनवाने की दुहाई देते हैं तो एक-पत्नी के आदेश के विरुद्ध क्यों हैं?२) यदि उपरोक्त बात कुरान में है तो भारतीय संविधान ने उनको चार-चार बीबियाँ रखने की छूट क्यों दे रखी है?३) दुनिया के सारे धर्म समय और परिस्थितियों के साथ बदलने के लिये खुले दिमाग से सोचते और अमल करते हैं; मुसलमान क्यों सातवीं-आठवीं शताब्दी की बातों से चिपके रहना चाहते हैं?

  11. >@सुरेश चिपलूनकर भाई, मैं ज़ाकिर नाइक साहब की किताबो का भी और अंतरजाल पर कुरआन और वेदों का जितना संभव हो सकता है अध्ययन करता हूँ. यह बातें जो मैं लिखता हूँ वह ठीक वही लिख देता हूँ, हवाले के साथ… कि फलाँ बात फलाँ किताब में है. अब मैं तो जरिया मात्र हूँ लिखने का, सत्य तो यह पहले से ही है… आपको और लोगों को मैं यही कहना चाहता हूँ कि जिद छोडें और सत्य मार्ग पर चलें… ज़रा जवाब दीजिये क्या हम और आप अलग-अलग हैं?

  12. >@सुरेश चिपलूनकर भाई, मैं ज़ाकिर नाइक साहब की किताबो का भी और अंतरजाल पर कुरआन और वेदों का जितना संभव हो सकता है अध्ययन करता हूँ. यह बातें जो मैं लिखता हूँ वह ठीक वही लिख देता हूँ, हवाले के साथ… कि फलाँ बात फलाँ किताब में है. अब मैं तो जरिया मात्र हूँ लिखने का, सत्य तो यह पहले से ही है… आपको और लोगों को मैं यही कहना चाहता हूँ कि जिद छोडें और सत्य मार्ग पर चलें… ज़रा जवाब दीजिये क्या हम और आप अलग-अलग हैं?

  13. >@अनुनाद सिंह जी, वन्दे-ईश्वरम… आपने सवाल किया कि १) जब मुसलमान कुरान के एके-एक अक्षर को मानने और मनवाने की दुहाई देते हैं तो एक-पत्नी के आदेश के विरुद्ध क्यों हैं?देखिये चार पत्नियाँ रखने का आदेश नहीं है, अनुमति है… ठीक उसी तरह एक पत्नी का आदेश कुछ इस तरह है…पढें कुरआन की आयतकुरआन में है- ''अपनी पसंद की औरत से विवाह करो दो, तीन अथवा चार, परन्तु यदि तुम्हें आशंका हो कि तुम उनके मध्य समान न्याय नहीं कर सकते तो तुम केवल एक (औरत) से विवाह करो''(·कुरआन, ४:३)और सही ही तो है… (हालाँकि काली भेडें सभी समुदाय में मौजूद हैं) जो साहिबे- हैसियत (संपन्न) है, उनके लिए एक से ज्यादा बीवी रखना और उनके अख्राजात आदि का वहां करना ज्यादा मुश्किल नहीं हैं… और वो एक से ज्यादा बीवी रखते हैं और उनके साथ न्याय पूर्वक रहते हैं तो इस्मने कोई प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए…२) यदि उपरोक्त बात कुरान में है तो भारतीय संविधान ने उनको चार-चार बीबियाँ रखने की छूट क्यों दे रखी है?भारतीय संविधान में ऐसा होना इस बात का सूचक है कि वे इस्लाम के नियमों अर्थात ईश्वर के नियमों के सामाजिक आदेशों का आदर कर रहें हैं. यह छुट नहीं है, धार्मिक आज़ादी जो कि हमारे संविधान में है के तहत आता है.३) दुनिया के सारे धर्म समय और परिस्थितियों के साथ बदलने के लिये खुले दिमाग से सोचते और अमल करते हैं; मुसलमान क्यों सातवीं-आठवीं शताब्दी की बातों से चिपके रहना चाहते हैं?आपको लग रहा है कि वे खुले दिमाग से सोंच रहें हैं यही वजह है कि बाइबल जो कि इतनी बार एडिट करी गयी है कि अब उसे ईश्वर की पुस्तक होने में सन्देश है क्यूँ क्यूंकि एडिट ईश्वर ने नहीं किया है, बल्कि मनुष्य ने अपने हिसाब से कर लिया है… ठीक उसी तरह से हिन्दू भाईयों ने वेदों और पुराणों को छोड़ समय समय पर एक नयी किताब पकड़ते चले गए और यहाँ तक कि एक मनुष्य के द्वारा एक बहुत पुरानी किताब का अवधी स्वरुप तक को पढना शुरू कर दिया और वेदों और पुरानों को भूल से गए…आपके लिए और सभी ब्लोगेर्स के लिए एक सलाह "आओ उस बात की तरफ जो हम में और तुममें यकसां हों, एक समान हों."

  14. >@अनुनाद सिंह जी, वन्दे-ईश्वरम… आपने सवाल किया कि १) जब मुसलमान कुरान के एके-एक अक्षर को मानने और मनवाने की दुहाई देते हैं तो एक-पत्नी के आदेश के विरुद्ध क्यों हैं?देखिये चार पत्नियाँ रखने का आदेश नहीं है, अनुमति है… ठीक उसी तरह एक पत्नी का आदेश कुछ इस तरह है…पढें कुरआन की आयतकुरआन में है- ''अपनी पसंद की औरत से विवाह करो दो, तीन अथवा चार, परन्तु यदि तुम्हें आशंका हो कि तुम उनके मध्य समान न्याय नहीं कर सकते तो तुम केवल एक (औरत) से विवाह करो''(·कुरआन, ४:३)और सही ही तो है… (हालाँकि काली भेडें सभी समुदाय में मौजूद हैं) जो साहिबे- हैसियत (संपन्न) है, उनके लिए एक से ज्यादा बीवी रखना और उनके अख्राजात आदि का वहां करना ज्यादा मुश्किल नहीं हैं… और वो एक से ज्यादा बीवी रखते हैं और उनके साथ न्याय पूर्वक रहते हैं तो इस्मने कोई प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए…२) यदि उपरोक्त बात कुरान में है तो भारतीय संविधान ने उनको चार-चार बीबियाँ रखने की छूट क्यों दे रखी है?भारतीय संविधान में ऐसा होना इस बात का सूचक है कि वे इस्लाम के नियमों अर्थात ईश्वर के नियमों के सामाजिक आदेशों का आदर कर रहें हैं. यह छुट नहीं है, धार्मिक आज़ादी जो कि हमारे संविधान में है के तहत आता है.३) दुनिया के सारे धर्म समय और परिस्थितियों के साथ बदलने के लिये खुले दिमाग से सोचते और अमल करते हैं; मुसलमान क्यों सातवीं-आठवीं शताब्दी की बातों से चिपके रहना चाहते हैं?आपको लग रहा है कि वे खुले दिमाग से सोंच रहें हैं यही वजह है कि बाइबल जो कि इतनी बार एडिट करी गयी है कि अब उसे ईश्वर की पुस्तक होने में सन्देश है क्यूँ क्यूंकि एडिट ईश्वर ने नहीं किया है, बल्कि मनुष्य ने अपने हिसाब से कर लिया है… ठीक उसी तरह से हिन्दू भाईयों ने वेदों और पुराणों को छोड़ समय समय पर एक नयी किताब पकड़ते चले गए और यहाँ तक कि एक मनुष्य के द्वारा एक बहुत पुरानी किताब का अवधी स्वरुप तक को पढना शुरू कर दिया और वेदों और पुरानों को भूल से गए…आपके लिए और सभी ब्लोगेर्स के लिए एक सलाह "आओ उस बात की तरफ जो हम में और तुममें यकसां हों, एक समान हों."

  15. >जो चीज आपने अब कही है ठीक उसके विपरीत चीज पहले पोस्ट में कह चुके हैं- कौन सी सही है?"मैं आपको बता दूं दुनिया में वाहिद (single) ऐसी किताब है कुरआन जिसमें लिखा है और इसके मानने वालों (मुसलमानों) को यह निर्देश भी दिया गया है कि केवल एक से शादी करो. "marry only one" — ये "वन्ली" शब्द का अर्थ तो आपको पता होगा? दूसरी बात:यदि बाइबल, वेद और कुरान सब अल्लाह की लिखी हुई पुस्तकें हैं तो अल्लाह इतना कन्फ्यूज्ड क्यों है कि अपने 'वचनों' के कई-कई रूप निकालता है?

  16. >जो चीज आपने अब कही है ठीक उसके विपरीत चीज पहले पोस्ट में कह चुके हैं- कौन सी सही है?"मैं आपको बता दूं दुनिया में वाहिद (single) ऐसी किताब है कुरआन जिसमें लिखा है और इसके मानने वालों (मुसलमानों) को यह निर्देश भी दिया गया है कि केवल एक से शादी करो. "marry only one" — ये "वन्ली" शब्द का अर्थ तो आपको पता होगा? दूसरी बात:यदि बाइबल, वेद और कुरान सब अल्लाह की लिखी हुई पुस्तकें हैं तो अल्लाह इतना कन्फ्यूज्ड क्यों है कि अपने 'वचनों' के कई-कई रूप निकालता है?

  17. >@अनुनाद सिंह भाई, वन्दे-ईश्वरमmarry only one का अर्थ विस्तार से जानने के लिए चटका लगायें कुरआन की इस आयत के लिए http://quranhindi.com/p105.htm और http://quranhindi.com/p106.htm पर…. और फिर भी समझ न आये तो मैं आपके लिए एक अलग से पोस्ट बना कर इंशा अल्लाह इस संदेह का निवारण अवश्य कर दूंगा.दूसरा सवाल (और बहुत ही अच्छा सवाल) (यह उन सवालों में से एक सवाल है जो अक्सर नॉन-मुस्लिम पूछते हैं) कि यदि बाइबल, वेद और कुरान सब अल्लाह की लिखी हुई पुस्तकें हैं तो अल्लाह इतना कन्फ्यूज्ड क्यों है कि अपने 'वचनों' के कई-कई रूप निकालता है?इसका एक जवाब सिंपल यह है कि अल्लाह कन्फ्यूज्ड नहीं है बल्कि इंसान कन्फ्यूज्ड है और इन्सान कन्फ्यूज्ड क्यूँ है? क्यूंकि वह अल्लाह अथवा ईश्वर के आदेशों को मानना तो दूर, उसे पढता तक नहीं है…और आपके पूछने का आशय यह है कि "बाइबल, वेद और कुरान सब अल्लाह की लिखी हुई पुस्तकें हैं तो इनमें अलग-अलग बातें क्यूँ हैं?"देखिये ईश्वर अर्थात अल्लाह ने अपनी अंतिम किताब में (कुरआन)लिखा है कि "ऐसा कोई भी समुदाय नहीं जिसमें हमने संदेष्ठा नहीं भेजा, और ऐसा कोई समुदाय नहीं जहाँ हमने उनके लिए किताब नहीं भेजी"वे किताबें उस वक़्त, उस ज़माने के लिए ही सही थी, महदूद थीं उस वक़्त के हिसाब से. लेकिन चूँकि अल्लाह तबारक़-व-त-आला ने कुरआन को केवल अरब्स के लिए ही नहीं, केवल मुसलमानों के लिए ही नहीं बल्कि पूरी इंसानियत के लिए एक मुक़म्मल और आखिरी किताब नाज़िल करी और इसके बाद अब कोई किताब नहीं आएगी.

  18. >@अनुनाद सिंह भाई, वन्दे-ईश्वरमmarry only one का अर्थ विस्तार से जानने के लिए चटका लगायें कुरआन की इस आयत के लिए http://quranhindi.com/p105.htm और http://quranhindi.com/p106.htm पर…. और फिर भी समझ न आये तो मैं आपके लिए एक अलग से पोस्ट बना कर इंशा अल्लाह इस संदेह का निवारण अवश्य कर दूंगा.दूसरा सवाल (और बहुत ही अच्छा सवाल) (यह उन सवालों में से एक सवाल है जो अक्सर नॉन-मुस्लिम पूछते हैं) कि यदि बाइबल, वेद और कुरान सब अल्लाह की लिखी हुई पुस्तकें हैं तो अल्लाह इतना कन्फ्यूज्ड क्यों है कि अपने 'वचनों' के कई-कई रूप निकालता है?इसका एक जवाब सिंपल यह है कि अल्लाह कन्फ्यूज्ड नहीं है बल्कि इंसान कन्फ्यूज्ड है और इन्सान कन्फ्यूज्ड क्यूँ है? क्यूंकि वह अल्लाह अथवा ईश्वर के आदेशों को मानना तो दूर, उसे पढता तक नहीं है…और आपके पूछने का आशय यह है कि "बाइबल, वेद और कुरान सब अल्लाह की लिखी हुई पुस्तकें हैं तो इनमें अलग-अलग बातें क्यूँ हैं?"देखिये ईश्वर अर्थात अल्लाह ने अपनी अंतिम किताब में (कुरआन)लिखा है कि "ऐसा कोई भी समुदाय नहीं जिसमें हमने संदेष्ठा नहीं भेजा, और ऐसा कोई समुदाय नहीं जहाँ हमने उनके लिए किताब नहीं भेजी"वे किताबें उस वक़्त, उस ज़माने के लिए ही सही थी, महदूद थीं उस वक़्त के हिसाब से. लेकिन चूँकि अल्लाह तबारक़-व-त-आला ने कुरआन को केवल अरब्स के लिए ही नहीं, केवल मुसलमानों के लिए ही नहीं बल्कि पूरी इंसानियत के लिए एक मुक़म्मल और आखिरी किताब नाज़िल करी और इसके बाद अब कोई किताब नहीं आएगी.

  19. >ऐसा क्या हो गया कि अल्लाह ने 'अन्तिम किताब' लिख भेजी? पहले ऐसा क्यों नहीं किया था? क्या आप मानते हैं कि अल्लाह अब भी भ्रम की स्थिति में (कान्फ्य्युज्ड) है?यदि खुदा ने कुरान के रूप में अन्तिम सत्य लिख दिया है तो मनुष्यों को दिमाग क्यों दिया?यदि खुदा इतना शक्तिशाली है तो 'मुजाहिदों' की और जिहाद की आवश्यकता क्यों है? क्या अल्लाह दुनिया भर के लोगों को को अपनी इच्छा के अनुसार चला नहीं सकता? यदि खुदा इतना ताकतवर है और उसकी इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता तो आपको कुरान का प्रचार करने की जरूरत क्यों आन पड़ी?

  20. >ऐसा क्या हो गया कि अल्लाह ने 'अन्तिम किताब' लिख भेजी? पहले ऐसा क्यों नहीं किया था? क्या आप मानते हैं कि अल्लाह अब भी भ्रम की स्थिति में (कान्फ्य्युज्ड) है?यदि खुदा ने कुरान के रूप में अन्तिम सत्य लिख दिया है तो मनुष्यों को दिमाग क्यों दिया?यदि खुदा इतना शक्तिशाली है तो 'मुजाहिदों' की और जिहाद की आवश्यकता क्यों है? क्या अल्लाह दुनिया भर के लोगों को को अपनी इच्छा के अनुसार चला नहीं सकता? यदि खुदा इतना ताकतवर है और उसकी इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता तो आपको कुरान का प्रचार करने की जरूरत क्यों आन पड़ी?

  21. >agar kuran me ek hee vivah ka aadesh/ nirdesh hai to md. kathit paigamber ne anek shadiayan karke kya kuran ka makhaul nahee uraya hai? kya usane keval shareerik havas ke lie bahu vivah kiya aur ise bad me kisee tarah justify kar diya gaya? kya yah bhee man liya jay aapke lekh ke aadhar par hee ki bahu vivah karne vale musalman kuran ke nirdeshon kee dhajjee urakar apnee yaun kuntha ko badhava de rahe hain jise aap jaise viduman log fir se kuran ka vasta dekar neeti sammat bana rahe hain? yah bhee ki mahilaon ko bahu pati rakhna ka adhikar kyon nahi hai, kya kuran mardon aur aurton ke lie alag alag najaria rakhata hai? aurton ke parti kuran me yah bhed bhav kyon? yah bhee ki yadi mardon ke lie khas paristhiti me jannat aur hoor ki bat kahee gai hai to unhee sathitiyon me aurton ko hoor ke badle jannat me kaun milega? muaaf kijiaga, ye utsuktayen aapke lekh paddhne se hee utpann hue hain, kirpiya inhen shant karen. aap padhe likhe pratit hote hain islie yah bhee asha karta hoon ki javab aadhunik yug ke anuroop tarkon ke aadhar par denge, madhkaleen rudhivadee mansikta aur firkaparst jannat ke lobh me aakabth dubkar nahee.

  22. >agar kuran me ek hee vivah ka aadesh/ nirdesh hai to md. kathit paigamber ne anek shadiayan karke kya kuran ka makhaul nahee uraya hai? kya usane keval shareerik havas ke lie bahu vivah kiya aur ise bad me kisee tarah justify kar diya gaya? kya yah bhee man liya jay aapke lekh ke aadhar par hee ki bahu vivah karne vale musalman kuran ke nirdeshon kee dhajjee urakar apnee yaun kuntha ko badhava de rahe hain jise aap jaise viduman log fir se kuran ka vasta dekar neeti sammat bana rahe hain? yah bhee ki mahilaon ko bahu pati rakhna ka adhikar kyon nahi hai, kya kuran mardon aur aurton ke lie alag alag najaria rakhata hai? aurton ke parti kuran me yah bhed bhav kyon? yah bhee ki yadi mardon ke lie khas paristhiti me jannat aur hoor ki bat kahee gai hai to unhee sathitiyon me aurton ko hoor ke badle jannat me kaun milega? muaaf kijiaga, ye utsuktayen aapke lekh paddhne se hee utpann hue hain, kirpiya inhen shant karen. aap padhe likhe pratit hote hain islie yah bhee asha karta hoon ki javab aadhunik yug ke anuroop tarkon ke aadhar par denge, madhkaleen rudhivadee mansikta aur firkaparst jannat ke lobh me aakabth dubkar nahee.

  23. >कमाल की बात है .मै तो सोचता था की सन २००९ में रह रहा हूँ …..लोग अपनी तसल्ली ओर सहूलियत के मुताबिक तजुर्मा कर लेते है ….क्यों भाई ..जो नियम सोलहवी शताब्दी में किन्ही ख़ास परिस्थितियों में बने थे ….वे अब भी लागू होगे ..क्या बैलगाडी से यात्रा करते हो इधर उधर से जाने में …..फिर कम्पूटर का प्रयोग ?कभी आंकडा देखा है जनसँख्या का ?इतनी एनर्जी तालीम दिलवाने ओर ऐसे स्कुल खुलवाने में लगाते तो बात भी थी….दुनिया में ओर बहुतेरे गम है मेरे भाई .क्यों पीछे जा रहे हो आगे जाने के.?वैसे क्यों नहीं अगले पचास साल तक औरतो को चार चार मर्द रखने की इजाज़त दे दी जाये….क्या ख्याल है ?

  24. >कमाल की बात है .मै तो सोचता था की सन २००९ में रह रहा हूँ …..लोग अपनी तसल्ली ओर सहूलियत के मुताबिक तजुर्मा कर लेते है ….क्यों भाई ..जो नियम सोलहवी शताब्दी में किन्ही ख़ास परिस्थितियों में बने थे ….वे अब भी लागू होगे ..क्या बैलगाडी से यात्रा करते हो इधर उधर से जाने में …..फिर कम्पूटर का प्रयोग ?कभी आंकडा देखा है जनसँख्या का ?इतनी एनर्जी तालीम दिलवाने ओर ऐसे स्कुल खुलवाने में लगाते तो बात भी थी….दुनिया में ओर बहुतेरे गम है मेरे भाई .क्यों पीछे जा रहे हो आगे जाने के.?वैसे क्यों नहीं अगले पचास साल तक औरतो को चार चार मर्द रखने की इजाज़त दे दी जाये….क्या ख्याल है ?

  25. >अनुनाद भाई, ऐसा लगता है कि सलीम कहना चाहते हैं कि कुरान से पहले जितनी किताबें आईं वे सब बेकार हैं, उन किताबों के मानने वाले बेवकूफ़ हैं, उन किताबों में कूड़ा-कचरा भरा है और सबसे संशोधित रूप कुरान ही है… इसीलिये ये चाहते हैं कि सब लोग सिर्फ़ कुरान ही पढ़ें, बाकी सभी किताबों को फ़ेंक दिया जाये, ताकि विश्व में शान्ति स्थापित हो सके…। क्यों सलीम भाई, मैं सही कह रहा हूँ ना…?

  26. >अनुनाद भाई, ऐसा लगता है कि सलीम कहना चाहते हैं कि कुरान से पहले जितनी किताबें आईं वे सब बेकार हैं, उन किताबों के मानने वाले बेवकूफ़ हैं, उन किताबों में कूड़ा-कचरा भरा है और सबसे संशोधित रूप कुरान ही है… इसीलिये ये चाहते हैं कि सब लोग सिर्फ़ कुरान ही पढ़ें, बाकी सभी किताबों को फ़ेंक दिया जाये, ताकि विश्व में शान्ति स्थापित हो सके…। क्यों सलीम भाई, मैं सही कह रहा हूँ ना…?

  27. >बन्धु,भागने का नाम तर्क नहीं है। यह लिंक, वह लिंक दिखाना भागने का सबसे निकृष्ट तरीका है। जिस प्रश्न का उत्तर मात्र दो-तीन वाक्यों में दिया जा सकता है उसे लिये लिंक बताना कहाँ तक उचित है? वहाँ जाने पर वह भी एक लिंक बता देगा..। इसी का नाम तो तर्कशास्त्र में 'सर्कुलर लॉजिक' है।

  28. >बन्धु,भागने का नाम तर्क नहीं है। यह लिंक, वह लिंक दिखाना भागने का सबसे निकृष्ट तरीका है। जिस प्रश्न का उत्तर मात्र दो-तीन वाक्यों में दिया जा सकता है उसे लिये लिंक बताना कहाँ तक उचित है? वहाँ जाने पर वह भी एक लिंक बता देगा..। इसी का नाम तो तर्कशास्त्र में 'सर्कुलर लॉजिक' है।

  29. >बच्चा समझ के घेर रखा है, ज्ञानियों ने ढंग से पढते नहीं चलते हैं सवाल करने, सुनो इस्लाम दुश्‍मनों, मैं कबसे 19 सवालों के जवाब लिये बैठा इधर आओःhttp://islaminhindi.blogspot.com/2009/03/non-muslims-muslims-answer.htmlअगर बसों, रेलों या किसी सार्वजनिक स्थान पर कोई मुसलमान मिलने पर आप उससे धर्म से संबन्धित प्रश्न करते हो तो डा. जाकिर नायक के यह 20 उत्तर आपके सामान्य बीस प्रश्नों के उत्तर है जिन्हें फरीद बुक डिपू ने शुद्ध हिन्दी और मधुर संदेश संगम, दिल्ली ने आसान हिन्दी और उर्दू में भी छापा है,REPLIES TO THE MOST COMMON QUESTIONS ASKED BY NON-MUSLIMSनाम से धूम मचा चुकी इस किताब का यह फरीद बुक डिपू द्वारा किया गया अनुवाद है:निम्‍नलिखित प्रशनों के आगे क्रमानुसार उत्‍तर हैंप्रश्नः1. इस्लाम में पुरूष को एक से अधिक पत्नियाँ रखने की अनुमति क्यों है?प्रश्नः2. यदि एक पुरूष को एक से अधिक पत्नियाँ करने की अनुमति है तो इस्लाम में स्त्री को एक समय में अधिक पति रखने की अनुमति क्यों नहीं है?प्रश्नः3.‘‘इस्लाम औरतों को पर्दे में रखकर उनका अपमान क्यों करता है?प्रश्नः4. यह कैसे संभव है कि इस्लाम को शांति का धर्म माना जाए क्योंकि यह तो तलवार (युद्ध और रक्तपात) के द्वारा फैला है?प्रश्नः5. अधिकांश मुसलमान रूढ़िवादी और आतंकवादी हैं?प्रश्नः6.पशुओं को मारना एक क्रूरतापूर्ण कृत्य है तो फिर मुसलमान मांसाहारी भोजन क्यों पसन्द करते हैं?प्रश्नः7. मुसलमान पशुओं को ज़िब्ह (हलाल) करते समय निदर्यतापूर्ण ढंग क्यों अपनाते हैं? अर्थात उन्हें यातना देकर धीरे-धीरे मारने का तरीकष, इस पर बहुत लोग आपत्ति करते हैं?प्रश्नः8. विज्ञान हमें बताता है कि मनुष्य जो कुछ खाता है उसका प्रभाव उसकी प्रवृत्ति पर अवश्य पड़ता है, तो फिर इस्लाम अपने अनुयायियों को सामिष आहार की अनुमति क्यों देता है? यद्यपि पशुओं का मांस खाने के कारण मनुष्य हिंसक और क्रूर बन सकता है?प्रश्नः9. यद्यपि इस्लाम में मूर्ति पूजा वर्जित है परन्तु मुसलमान काबे की पूजा क्यों करते हैं? और अपनी नमाज़ों के दौरान उसके सामने क्यों झुकते हैं?प्रश्नः10. मक्का और मदीना के पवित्रा नगरों में ग़ैर मुस्लिमों को प्रवेश की अनुमति क्यों नहीं है?प्रश्नः11. इस्लाम में सुअर का मांस खाना क्यों वर्जित है?प्रश्नः12. इस्लाम में शराब पीने की मनाही क्यों है?प्रश्नः13. क्या कारण है कि इस्लाम में दो स्त्रीयों की गवाही एक पुरुष के समान ठहराई जाती है?प्रश्नः14. इस्लामी कानून के अनुसार विरासत की धन-सम्पत्ति में स्त्री का हिस्सा पुरूष की अपेक्षा आधा क्यों है?प्रश्नः15. क्या पवित्र कुरआन अल्लाह का कलाम (ईष वाक्य) है?उत्तर: नोटः उत्‍तर इंग्लिश में, अफसोस कि अनुवाद ना होसका read http://www.irf.netप्रश्नः16. आप आख़िरत अथवा मृत्योपरांत जीवन की सत्यता कैसे सिद्ध करेंगे?प्रश्नः17. क्या कारण है कि मुसलमान विभिन्न समुदायों और विचाधाराओं में विभाजित हैं?प्रश्नः18. सभी धर्म अपने अनुयायियों को अच्छे कामों की शिक्षा देते हैं तो फिर किसी व्यक्ति को इस्लाम का ही अनुकरण क्यों करना चाहिए? क्या वह किसी अन्य धर्म का अनुकरण नहीं कर सकता?प्रश्नः19. यदि इस्लाम विश्व का श्रेष्ठ धर्म है तो फिर क्या कारण है कि बहुत से मुसलमान बेईमान और विश्वासघाती होते हैं। धोखेबाज़ी, घूसख़ोरी और नशीले पदार्थों के व्यापार जैसे घृणित कामों में लिप्त होते हैं।प्रश्नः20. मुसलमान ग़ैर मुस्लिमों का अपमान करते हुए उन्हें ‘‘काफ़िर’’ क्यों कहते हैं?blogvani yeh comment publish karni ki himmat nahin kar rahi,,men bata doonतुम सब का 'सच बोलना मना है पर प्रतीक्षा हो रही है, जल्द पहुँचोhttp://janokti.blogspot.com/2009/07/blog-post_1543.html

  30. >बच्चा समझ के घेर रखा है, ज्ञानियों ने ढंग से पढते नहीं चलते हैं सवाल करने, सुनो इस्लाम दुश्‍मनों, मैं कबसे 19 सवालों के जवाब लिये बैठा इधर आओःhttp://islaminhindi.blogspot.com/2009/03/non-muslims-muslims-answer.htmlअगर बसों, रेलों या किसी सार्वजनिक स्थान पर कोई मुसलमान मिलने पर आप उससे धर्म से संबन्धित प्रश्न करते हो तो डा. जाकिर नायक के यह 20 उत्तर आपके सामान्य बीस प्रश्नों के उत्तर है जिन्हें फरीद बुक डिपू ने शुद्ध हिन्दी और मधुर संदेश संगम, दिल्ली ने आसान हिन्दी और उर्दू में भी छापा है,REPLIES TO THE MOST COMMON QUESTIONS ASKED BY NON-MUSLIMSनाम से धूम मचा चुकी इस किताब का यह फरीद बुक डिपू द्वारा किया गया अनुवाद है:निम्‍नलिखित प्रशनों के आगे क्रमानुसार उत्‍तर हैंप्रश्नः1. इस्लाम में पुरूष को एक से अधिक पत्नियाँ रखने की अनुमति क्यों है?प्रश्नः2. यदि एक पुरूष को एक से अधिक पत्नियाँ करने की अनुमति है तो इस्लाम में स्त्री को एक समय में अधिक पति रखने की अनुमति क्यों नहीं है?प्रश्नः3.‘‘इस्लाम औरतों को पर्दे में रखकर उनका अपमान क्यों करता है?प्रश्नः4. यह कैसे संभव है कि इस्लाम को शांति का धर्म माना जाए क्योंकि यह तो तलवार (युद्ध और रक्तपात) के द्वारा फैला है?प्रश्नः5. अधिकांश मुसलमान रूढ़िवादी और आतंकवादी हैं?प्रश्नः6.पशुओं को मारना एक क्रूरतापूर्ण कृत्य है तो फिर मुसलमान मांसाहारी भोजन क्यों पसन्द करते हैं?प्रश्नः7. मुसलमान पशुओं को ज़िब्ह (हलाल) करते समय निदर्यतापूर्ण ढंग क्यों अपनाते हैं? अर्थात उन्हें यातना देकर धीरे-धीरे मारने का तरीकष, इस पर बहुत लोग आपत्ति करते हैं?प्रश्नः8. विज्ञान हमें बताता है कि मनुष्य जो कुछ खाता है उसका प्रभाव उसकी प्रवृत्ति पर अवश्य पड़ता है, तो फिर इस्लाम अपने अनुयायियों को सामिष आहार की अनुमति क्यों देता है? यद्यपि पशुओं का मांस खाने के कारण मनुष्य हिंसक और क्रूर बन सकता है?प्रश्नः9. यद्यपि इस्लाम में मूर्ति पूजा वर्जित है परन्तु मुसलमान काबे की पूजा क्यों करते हैं? और अपनी नमाज़ों के दौरान उसके सामने क्यों झुकते हैं?प्रश्नः10. मक्का और मदीना के पवित्रा नगरों में ग़ैर मुस्लिमों को प्रवेश की अनुमति क्यों नहीं है?प्रश्नः11. इस्लाम में सुअर का मांस खाना क्यों वर्जित है?प्रश्नः12. इस्लाम में शराब पीने की मनाही क्यों है?प्रश्नः13. क्या कारण है कि इस्लाम में दो स्त्रीयों की गवाही एक पुरुष के समान ठहराई जाती है?प्रश्नः14. इस्लामी कानून के अनुसार विरासत की धन-सम्पत्ति में स्त्री का हिस्सा पुरूष की अपेक्षा आधा क्यों है?प्रश्नः15. क्या पवित्र कुरआन अल्लाह का कलाम (ईष वाक्य) है?उत्तर: नोटः उत्‍तर इंग्लिश में, अफसोस कि अनुवाद ना होसका read http://www.irf.netप्रश्नः16. आप आख़िरत अथवा मृत्योपरांत जीवन की सत्यता कैसे सिद्ध करेंगे?प्रश्नः17. क्या कारण है कि मुसलमान विभिन्न समुदायों और विचाधाराओं में विभाजित हैं?प्रश्नः18. सभी धर्म अपने अनुयायियों को अच्छे कामों की शिक्षा देते हैं तो फिर किसी व्यक्ति को इस्लाम का ही अनुकरण क्यों करना चाहिए? क्या वह किसी अन्य धर्म का अनुकरण नहीं कर सकता?प्रश्नः19. यदि इस्लाम विश्व का श्रेष्ठ धर्म है तो फिर क्या कारण है कि बहुत से मुसलमान बेईमान और विश्वासघाती होते हैं। धोखेबाज़ी, घूसख़ोरी और नशीले पदार्थों के व्यापार जैसे घृणित कामों में लिप्त होते हैं।प्रश्नः20. मुसलमान ग़ैर मुस्लिमों का अपमान करते हुए उन्हें ‘‘काफ़िर’’ क्यों कहते हैं?blogvani yeh comment publish karni ki himmat nahin kar rahi,,men bata doonतुम सब का 'सच बोलना मना है पर प्रतीक्षा हो रही है, जल्द पहुँचोhttp://janokti.blogspot.com/2009/07/blog-post_1543.html

  31. >अरे मेरे देशवासियों तुम्हारे बहुत से सवालों के जवाब निम्नलिखित छ चैलेंजों में है, अधिकतर को तो मैंने दूसरे ब्लाग मैं भेज दिया जो फिर भी इसी ब्लाग में टिके हैं तो पढो islaminhindi.blogspot.com पर उपलब्ध अल्लाह के चैलेंजchallanges of Allah* अल्‍लाह का चैलेंजः कुरआन में विरोधाभास नहीं* अल्‍लाह का चैलेंजः आसमानी पुस्‍तक केवल चार # 5-7* अल्‍लाह का चैलेंज वैज्ञानिकों को सृष्टि रचना बारे में #4-7* अल्‍लाह का चैलेंज है कि कुरआन में कोई रद्दोबदल नहीं कर सकता। #3-7* खुदाई चैलेंज: यहूदियों (इसराईलियों) को कभी शांति नहीं मिलेगी’’ #2-7

  32. >अरे मेरे देशवासियों तुम्हारे बहुत से सवालों के जवाब निम्नलिखित छ चैलेंजों में है, अधिकतर को तो मैंने दूसरे ब्लाग मैं भेज दिया जो फिर भी इसी ब्लाग में टिके हैं तो पढो islaminhindi.blogspot.com पर उपलब्ध अल्लाह के चैलेंजchallanges of Allah* अल्‍लाह का चैलेंजः कुरआन में विरोधाभास नहीं* अल्‍लाह का चैलेंजः आसमानी पुस्‍तक केवल चार # 5-7* अल्‍लाह का चैलेंज वैज्ञानिकों को सृष्टि रचना बारे में #4-7* अल्‍लाह का चैलेंज है कि कुरआन में कोई रद्दोबदल नहीं कर सकता। #3-7* खुदाई चैलेंज: यहूदियों (इसराईलियों) को कभी शांति नहीं मिलेगी’’ #2-7

  33. >भैया उमर जी,जब आपके अल्लाह की लिखी पुस्तक पढ़कर लोग बुरी तरह भ्रमित हो जाते हैं तो किसी आम आदमी की लिखी पुस्तक में क्या दम है कि वह किसी की जिज्ञासा को शान्त कर दे? अगर आपको कुरान समझ में आयी हो; उसमें मानवता के लिये कोई उपयोगी सदवाक्य लिखा मिला हो; उसमें विरोधाभास नजर न आया हो तो आम जनता के समझ में आने लायक भाषा और तर्क से उसे सबके सामने रखिये। तर्क तो सिर पर चढ़कर बोलता है।

  34. >भैया उमर जी,जब आपके अल्लाह की लिखी पुस्तक पढ़कर लोग बुरी तरह भ्रमित हो जाते हैं तो किसी आम आदमी की लिखी पुस्तक में क्या दम है कि वह किसी की जिज्ञासा को शान्त कर दे? अगर आपको कुरान समझ में आयी हो; उसमें मानवता के लिये कोई उपयोगी सदवाक्य लिखा मिला हो; उसमें विरोधाभास नजर न आया हो तो आम जनता के समझ में आने लायक भाषा और तर्क से उसे सबके सामने रखिये। तर्क तो सिर पर चढ़कर बोलता है।

  35. >@अनुनाद सिंह जी अगर आपको कोई ऐसी बात या नाराज़गी कुरआन में समझ में आई हो तो आप बताएं, मैं उसका माक़ूल जवाब शीघ्र अति शीघ्र दूंगा. वैसे मैं आपको बता दूं कि यह चैलेन्ज है पूरी दुनिया के लोगों से इस्लाम में एक भी गलती बता दो, मैं उसका जवाब दूंगा.

  36. >@अनुनाद सिंह जी अगर आपको कोई ऐसी बात या नाराज़गी कुरआन में समझ में आई हो तो आप बताएं, मैं उसका माक़ूल जवाब शीघ्र अति शीघ्र दूंगा. वैसे मैं आपको बता दूं कि यह चैलेन्ज है पूरी दुनिया के लोगों से इस्लाम में एक भी गलती बता दो, मैं उसका जवाब दूंगा.

  37. >ऐसा है कैराना रत्न जी ( जिनके तर्कों से कै हो जाये ) , जाकिर नाईक के वो बहूदे तर्कों की पुस्तक मैंने पढ़ी भी है और माकूल जवाब भी दे सकता हूँ , लेकिन क्या है की तुम जाहिलों को वो जवाब जब तक समझ में आयेंगे , अपने ही जनाजे की तैयारी कर रहे होगे तुम ||खैर मैं तुम लोगों की तरह धार्मिक बकवासों का पुलिंदा लेकर नहीं बैठ जाता और भी काम है कम-अक्लों ||

  38. >ऐसा है कैराना रत्न जी ( जिनके तर्कों से कै हो जाये ) , जाकिर नाईक के वो बहूदे तर्कों की पुस्तक मैंने पढ़ी भी है और माकूल जवाब भी दे सकता हूँ , लेकिन क्या है की तुम जाहिलों को वो जवाब जब तक समझ में आयेंगे , अपने ही जनाजे की तैयारी कर रहे होगे तुम ||खैर मैं तुम लोगों की तरह धार्मिक बकवासों का पुलिंदा लेकर नहीं बैठ जाता और भी काम है कम-अक्लों ||

  39. >आप तो एक बहुत सरल बात सिद्ध करके बता दीजिये कि कुरान 'एक साधारण दिमाग के साधारण आदमी' द्वारा लिखी पुस्तक नहीं है।

  40. >आप तो एक बहुत सरल बात सिद्ध करके बता दीजिये कि कुरान 'एक साधारण दिमाग के साधारण आदमी' द्वारा लिखी पुस्तक नहीं है।

  41. >शीघ्र ही मेरा अगला लेख पढ़े "जिहाद का वर्णन भगवत गीता में भी"

  42. >शीघ्र ही मेरा अगला लेख पढ़े "जिहाद का वर्णन भगवत गीता में भी"

  43. >जिहाद का मायने क्या है? क्या जिहाद का ज़िक्र कुरआन में ही है या दुसरे धर्मों की किताबों में भी है? क्या श्री कृष्ण ने भी जिहाद करने का हुक़्म दिया है या नहीं? क्या किसी एक ही काम के दो संबोधन देना उचित है अर्थात शहीद भगत सिंह को अँगरेज़ आतंकवादी कहते हैं और हम देशभक्त? आखिर कौन सही है? साध्वी प्रज्ञा को सीबीआई आतंकवादी कहती है! क्या वह वाकई आतंकवादी है? ओसामा बिन लादेन को अँगरेज़ आतंवादी कहते हैं ! क्या वह वाकई आतंकवादी है? इन सभी सवालों का जवाब हैं, मेरा अगला पोस्ट!!"जिहाद का वर्णन भगवत गीता में भी"

  44. >जिहाद का मायने क्या है? क्या जिहाद का ज़िक्र कुरआन में ही है या दुसरे धर्मों की किताबों में भी है? क्या श्री कृष्ण ने भी जिहाद करने का हुक़्म दिया है या नहीं? क्या किसी एक ही काम के दो संबोधन देना उचित है अर्थात शहीद भगत सिंह को अँगरेज़ आतंकवादी कहते हैं और हम देशभक्त? आखिर कौन सही है? साध्वी प्रज्ञा को सीबीआई आतंकवादी कहती है! क्या वह वाकई आतंकवादी है? ओसामा बिन लादेन को अँगरेज़ आतंवादी कहते हैं ! क्या वह वाकई आतंकवादी है? इन सभी सवालों का जवाब हैं, मेरा अगला पोस्ट!!"जिहाद का वर्णन भगवत गीता में भी"

  45. >कुछ भी हो, मेरा सवाल अभी भी अनुत्तरित है। ५+२=७ से यह मतलब नहीं निकलता कि धरती गोल है।

  46. >कुछ भी हो, मेरा सवाल अभी भी अनुत्तरित है। ५+२=७ से यह मतलब नहीं निकलता कि धरती गोल है।

  47. >अनुनाद सिन्ह के तर्क सटीक हैं,जब कुरान अन्तिम किताब है तो दूसरी २० सवालों की किताव क्यो,क्या अहमियत रखती है। ग्यान कभी अन्तिम नहीं होता-तभी रिग्वेद में लिखा है–नेति-नेति, अर्थात यही ग्यान की इति नहीं है। अब क्या व कौन वैग्यानिक व तार्किक है स्वयं-सिद्ध है।

  48. >अनुनाद सिन्ह के तर्क सटीक हैं,जब कुरान अन्तिम किताब है तो दूसरी २० सवालों की किताव क्यो,क्या अहमियत रखती है। ग्यान कभी अन्तिम नहीं होता-तभी रिग्वेद में लिखा है–नेति-नेति, अर्थात यही ग्यान की इति नहीं है। अब क्या व कौन वैग्यानिक व तार्किक है स्वयं-सिद्ध है।

  49. >संदेश-संदेश होता है, स्वच्छ से क्या तात्पर्य है???????? क्या हिन्दुस्तान सिर्फ़ मुसलमानों का है जो आपका इस्लामी संदेश हिन्दुस्तान की आवाज़ है?? कितनी संकुचित सोच है।

  50. >संदेश-संदेश होता है, स्वच्छ से क्या तात्पर्य है???????? क्या हिन्दुस्तान सिर्फ़ मुसलमानों का है जो आपका इस्लामी संदेश हिन्दुस्तान की आवाज़ है?? कितनी संकुचित सोच है।

  51. >@Dr. shyam gupta इस्लामी सन्देश केवल हिन्दोस्तान की आवाज़ ही नहीं है, विश्व की आवाज़ है, विश्व के कर्ताधर्ता की आवाज़ और आदेश है…

  52. >@Dr. shyam gupta इस्लामी सन्देश केवल हिन्दोस्तान की आवाज़ ही नहीं है, विश्व की आवाज़ है, विश्व के कर्ताधर्ता की आवाज़ और आदेश है…

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