स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़

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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>मुसलमान धोखेबाज़ होते हैं (Muslims are insidious) !!!???

>


मैंने हिंदुस्तान के दर्द (blog) पर देखा एक जनाब अपने दर्द का इज़हार कर रहे थे, एक नहीं दो नहीं अनेक पोस्ट एक साथ करके यानि जैसे जैसे दर्द उठा उन्होंने बयां कर दिया, दर्द होना भी चाहिए लेकिन उनका एक दर्द बड़ा ही ख़तरनाक उठा जिस पर मुझे यहाँ अपनी बात रखने पर मजबूर कर दिया | बात उन महाशय की नहीं है, मेरे से इससे पहले कई लोगों ने यही सवाल पूछा था |

सबसे पहले तो मैं एक बात कहना चाहूँगा कि आतंकियों का कोई धर्म या मज़हब नहीं होता.| वो सब के सब किसी न किसी राजनैतिक पार्टियों के लिए काम करते हैं| जैसे भारत में भी है और पकिस्तान में भी है, ये सब जानते हैं|


तो मैं बात कर कर रहा था उन महाशय की एक टिपण्णी की जिसमे उन्होंने लिखा कि मुस्लिम धोखेबाज़ होते हैं | गलती उनकी नहीं है दर असल उन्होंने भी चन्द लोगों की तरह गलती कर बैठी ठीक उसी तरह जैसे एक नयी नवेली ब्रांड न्यू कार को एक अनाडी ड्राईवर चलाये और एक्सीडेंट कर बैठे और लोग दोष दे कार को, ड्राईवर की करतूत पर| अरे! कार को ड्राईवर से मत तौलिये |


इन्ही महाशय की तरह मुझसे एक जनाब ने मुझसे पूछा कि सलीम एक बात बताओ “अगर इसलाम दुनिया का सबसे अच्छा धर्म है तो आखिर बहुत से मुसलमान बेईमान, बेभरोसा क्यूँ हैं और अधिकतर मुसलमान रुढिवादी और आतंकवादी क्यूँ होते है? क्यूँ वो धोखेबाज़ और रिश्वतखोरी और घूसखोरी में लिप्त हैं?

मैं उन सबका जवाब देता हूँ बिन्दुवार- (कि मुस्लिम धोखेबाज़ होते हैं!?)


(1) मिडिया इसलाम की ग़लत तस्वीर पेश करता है-

(क) इसलाम बेशक सबसे अच्छा धर्म है लेकिन असल बात यह है कि आज मिडिया की नकेल पश्चिम वालों के हाथों में है, जो इसलाम से भयभीत है| मिडिया बराबर इसलाम के विरुद्ध बातें प्रकाशित और प्रचारित करता है| वह या तो इसलाम के विरुद्ध ग़लत सूचनाएं उपलब्ध करता/कराता है और इसलाम से सम्बंधित ग़लत सलत उद्वरण देता है या फिर किसी बात को जो मौजूद हो ग़लत दिशा देता है या उछलता है|

(ख) अगर कहीं बम फटने की कोई घटना होती है तो बगैर किसी बगैर किसी प्रमाण के मसलमान को दोषी मान लिया जाता है और उसे इसलाम से जोड़ दिया जाता है | समाचार पत्रों में बड़ी बड़ी सुर्खियों में उसे प्रकाशित किया जाता है | फिर आगे चल कर पता चलता है कि इस घटना के पीछे किसी मुसलमान के बजाये किसी गैर मुस्लिम का हाथ था तो इस खबर को पहले वाला महत्व नहीं दिया जाता और छोटी सी खबर दे दी जाती है | (जैसा कि तौक़ीर के मामले मिडिया ने किया था)

(ग) अगर कोई 50 साल का मुसलमान व्यक्ति 15 साल की मुसलमान लड़की से उसकी इजाज़त और मर्ज़ी से शादी करता है तो यह खबर अख़बार के पहले पन्ने पर प्रमुखता से प्रकाशित की जाती है लेकिन अगर को 50 साल का गैर-मुस्लिम व्यक्ति 6 साल की लड़की के साथ बलात्कार करता है तो इसकी खबर को अखबार के अन्दर के पन्ने में संछिप्त कालम में जगह मिलती है (यहाँ पढें मेरा लेख)| प्रतिदिन अमेरिका में 2713 बलात्कार की घटनाये होती हैं और अपने भारत में हर आधे घंटे में एक औरत बलात्कार का शिकार होती है लेकिन वे खबरों में नहीं आती है या कम प्रमुखता से प्रकाशित होती हैं| अमेरिका में ऐसा इसलिए होता है क्यूंकि यह चीज़ें उनकी जीवनचर्या में शामिल हो गयी है |

(2) काली भेंडें (ग़लत लोग) हर समुदाय में मौजूद हैं-

मैं जानता हूँ कि कुछ मुसलमान बेईमान हैं और भरोसे लायक नहीं है | वे धोखाधडी आदि कर लेते हैं| लेकिन असल बात यह है कि मिडिया इस बात को इस तरह पेश करता है कि सिर्फ मुसलमान ही हैं जो इस प्रकार की गतिविधियों में लिप्त हैं | हर समुदाय के अन्दर कुछ बुरे लोग होते है और हो सकते है| इन कुछ लोगों की वजह से उस धर्म को या उस पूरी कौम को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है जिसके वह अनुनायी है या जिससे वह सम्बद्ध हैं|

(3) कुल मिलाकर मुसलमान सबसे अच्छे हैं-


मुसलमानों में बुरे लोगों की मौजूदगी होने के बावजूद मुसलमान सबसे कुल मिलाकर सबसे अच्छे लोग हैं | मुसलमान ही वह समुदाय है जिसमें शराब पीने वालों की संख्या सबसे कम है और शराब ना पीने वालों की संख्या सबसे ज्यादा | मुसलमान कुल मिला कर दुनिया में सबसे ज्यादा धन-दौलत गरीबों और भलाई के कामों में खर्च करते हैं | भारतीय मुस्लिम हर साल लगभग बारह हज़ार करोड़ (रु. १२,०००,०००,०००/-) खर्च करते हैं| सुशीलता, शर्म व हया, सादगी और शिष्टाचार, मानवीय मूल्यों और और नैतिकता के मामले में मुसलमान दूसरो के मुक़ाबले में बहुत बढ़ कर हैं|

(4) कार को ड्राईवर से मत तौलिये-

अगर आपको किसी नवीनतम मॉडल की कार के बारे में यह अंदाजा लगाना हो कि वह कितनी अच्छी है और फिर एक ऐसा शख्स जो कार चलने की विधि से परिचित ना हो लेकिन वह कार चलाना चाहे तो आप किसको दोष देंगे कार को या ड्राईवर को | स्पष्ट है इसके लिए ड्राईवर को ही दोषी ठहराया जायेगा | इस बात का पता लगाने के लिए कि कार कितनी अच्छी है, कोई भी बुद्धिमान व्यक्ति उस के ड्राईवर को नहीं देखता है बल्कि उस कार की खूबियों को देखता है| उसकी रफ्तार क्या है? ईंधन की खपत कैसी है? सुरक्षात्मक उपायों से सम्बंधित क्या कुछ मौजूद है? वगैरह| अगर हम इस बात को स्वीकार भी कर लें कि मुस्लमान बुरे होते हैं, तब भी हमें इस्लाम को उसके मानने वालों के आधार पर नहीं तुलना चाहिए या परखना चाहिए | अगर आप सहीं मायनों में इस्लाम की क्षमता को जानने और परखने की ख़ूबी रखते हैं तो आप उसके उचित और प्रामादिक स्रोतों (कुरान और हदीसों) को सामने रखना होगा |


(5) इस्लाम को उसके सही अनुनायी पैगम्बर हज़रत मुहम्मद (सल्ल०) के द्वारा जाँचिये और परखिये-
अगर आप व्यावहारिक रूप से जानना चाहते है कि कार कितनी अच्छी है तो उसको चलने पर एक माहिर ड्राईवर को नियुक्त कीजिये| इसी तरह सबसे बेहतर और इस्लाम पर अमल करने के लिहाज़ से सबसे अच्छा नमूना जिसके द्वारा आप इस्लाम की असल ख़ूबी को महसूस कर सकते हैं– पैगम्बर हज़रत मुहम्मद (सल्ल०) हैं |

बहुत से ईमानदार और निष्पक्ष गैर मुस्लिम इतिहासकारों ने भी इस बात का साफ़ साफ़ उल्लेख किया है पैगम्बर सल्ल० सबसे अच्छे इन्सान थे| माइकल एच हार्ट जिसने इतिहास के सौ महत्वपूर्ण प्रभावशाली लोगपुस्तक लिखी है, उसने इन महान व्यक्तियों में सबसे पहला स्थान पैगम्बर हज़रत मुहम्मद (सल्ल०) को दिया है|एक इस्लाम का आलोचक ऐसा कर रहा है. गैर-मुस्लिमों द्वारा पैगम्बर हज़रत मुहम्मद (सल्ल०) को श्रद्धांजलि प्रस्तुत करने के इस प्रकार के अनेक नमूने है – जैसे थॉमस कार्लाईल, ला मार्टिन आदि|

सलीम खान

संरक्षक (स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़) लखनऊ व पीलीभीत, यूपी

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20 Responses

  1. >धोखेबाज धोखे भी देते हैं बिना धोयेऔर बाज भी होते हैं अपनी धूर्तता में खोयेवे इंसान नहीं होते होते हैं वे हैवान।

  2. >हर कोई अपने धर्म को सब से अच्छा बताता है। यह आप का मानना है कि इस्लाम सब से अच्छा धर्म है। दूसरे धर्मावलंबी इस बात को कतई मानने को तैयार न होंगे। हमें अपने धर्म को श्रेष्ठ मानने का पूरा अधिकार है। लेकिन दूसरे व्यक्ति के विश्वासों का आदर करना भी उतना ही जरूरी है।

  3. >आपने एक बहुत पुराना गीत सुना होगा " हिन्दु बनेगा ना मुसलमान बनेगा ,इंसान की औलाद है इंसान बनेगा " बस यही सच है बाकि सब व्यर्थ है

  4. >so baat ki ek baat yeh bhi keh dete ki,aise non-muslims ke 20 sawalon ke jawab dr. zakir nayak ki kitab islaminhindi.blogspot.compar padh Lo.mubark ho janab herat men daal diya,,masha allah

  5. >सलीम भाई, द्विवेदी जी की बात को आगे बढ़ाईये और इस बात पर एक पोस्ट कीजिये कि क्या मुस्लिम धर्म, दूसरे धर्मों को पूर्ण आदर-सम्मान देता है? धर्म परिवर्तन अक्सर हिन्दू से ईसाई या हिन्दू से मुस्लिम होता है (अधिकांशतः लालच या डर से) तो विश्व में सर्वाधिक जनसंख्या होने के बावजूद ईसाईयों और मुस्लिमों को अन्य धर्मों से धर्म-परिवर्तन करवाने की आवश्यकता क्यों पड़ती है? ऐसा क्यों होता है कि जहाँ भी मुस्लिम बहुसंख्यक होते हैं, वहाँ अल्पसंख्यकों को उतने अधिकार नहीं मिलते जितने भारत में अल्पसंख्यकों को मिले हुए हैं? मुस्लिम बहुल देशों में से अधिकतर में "परिपक्व लोकतन्त्र" नहीं है ऐसा क्यों है? सवाल तो बहुत हैं भाई…

  6. >suresh bhai, insha allah hamari abki next post isi ke jawaab men hi hogi. sarsari taur par main bata doon ki islam dharm dusre dharmon ka aadar karta hai, iski pusti main quran kii un ayaton (shlokon) ke zariye se dunga saath hi agar baat lok tatr kii hai to islam ne hi duniyan men loktantr ka ijad kiya, main yah bhi siddh kar dunga. aurसर्वाधिक जनसंख्या होने के बावजूद ईसाईयों और मुस्लिमों को अन्य धर्मों से धर्म-परिवर्तन करवाने की आवश्यकता क्यों पड़ती है?ke jawaab bhi jawab yun hai ki hame Allah kii rtaraf se yah baat farz (aniwary) kar di hai ki prtyek muslim ko chahiye ki waha dawat de, gair muslims ko. (agar kisi muslim ka padosi non-muslim hai aur uski maut bhi non-muslim rahte ho gai to akhirat ke din Allah us non-muslim se puchhega ki tumne mere bataye raste ko kyun nahin mana. to uska jawaab hoga ki mujhe kisi men bataya hi nahin ya mujhe mere muslim padosi ne bataya hi nagin. tab Allah us non-muslim ko jahannam (narak) men dal dega… isi tarah Allah puchhega muslim se tumhen saty ka gyan hone par bhi kyun nahin use apne padosi ko batayaa to us muslim ke paas koi jawaab nahin hoga…aur wah bhi narak men daal diya jayega)…

  7. >मुसलमान धोखेबाज़ होते हैं (Muslims are insidious) !!!??? खुलेआम इस तरह ढिंढोरा पीटने की जरुरत क्यों आन पडी जनाव ?

  8. >आदमी के धोखेबाज होने या न होने में धर्म का नहीं परिवेश का हाथ होता है,जो कोई भी अपने धर्म को सबसे अच्छा बताता है वह यह विचार करे कि यदि उसका जन्म किसी दूसरे धर्म में हुआ होता तो क्या वह उसे छोड़कर वही धर्म अपना लिया होता जिसका अनुयायी वह अब है ?या फ़िर वह अगले जन्म में अपने वर्तमान धर्म का ही अनुयायी होगा ?

  9. >मुसलमान धोखेबाज़ होते हैं (Muslims are insidious) !!!??? सच ही तो कहा है आपने……….

  10. >कुरान में लिखा है कि "आओ उस बात की तरफ जो हममें और तुममें यकसां (समान) है."और समान बात क्या है वह बात है "ईश्वर एक है"वेदों में भी लिखा है "एकम अविद्वित्यम" (एक ही है दूसरा नहीं है)और"एकं ब्रह्म द्वितीयो नास्ति. नास्ति, नास्ति नेह्न्ये नास्ति." (ब्रह्म एक ही है दूसरा नहीं है. नहीं है, नहीं है ज़रा भी नहीं है.)इसके अलावा वेदों में कई बार ज़िक्र है कि मुहम्मद (ईश्वर की उन पर शांति हो) आयेंगे और उनका ज़िक्र वेदों में नाराशंश और कल्कि नाम से हुआ है. यकीन ना हो तो खुद पढ़ कर देख लें आप…- सलीम खान स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़

  11. >@विवेक भाई, अगर आप वेदों और दीगर दूसरी किताबों का मुताला (अध्ययन) करेंगे तो पाएंगे कि पुनर्जन्म का कहीं भी कोई ज़िक्र नहीं है. चूँकि वेद हिन्दू धर्म में सबसे ज़्यादा मान्य व पुरानी किताब है जिसे हिन्दू भी ईश्वर द्वारा लिखित बताते हैं, अब अगर कोई दूसरी किताब वेद के खिलाफ़ जायेगी तो मुझे कुछ अध्ययन करना ही पड़ेगा. और कुरान के ज़रिये भी हमें मालूम होता है कि पुनर्जन्म का कहीं भी कोई ज़िक्र नहीं है. अगर कहीं हो तो बताईयेगा…

  12. varsha says:

    >(क) इसलाम बेशक सबसे अच्छा धर्म है…ये फ़ैसला सुनाने से पहले आप क्या इस बात पर गौर करना चाहेंगे की इस्लाम धर्म में एक स्त्री को किस हद तक मानव अधिकारों से वंचित रखा गया है। आप पूछिए किसी स्त्री से की उसे यदि अवसर मिलता तो वो किस धर्म में जन्म लेना पसंद करती। हो सकता है मैं थोडी ग़लत होऊं लेकिन पूरी ग़लत तो नहीं। हर धर्म की कुछ अच्छइयां होती हें और कुछ बुराइयां। किसी मामले में आपका धर्म सबसे अच्छा हो सकता है लेकिन हर मामले में नही। जब तक आप दूसरे धर्मों की इज्ज़त करना नहीं जानेगे, मैं समझूंगी की आपके धर्म ने आपको कुछ नही सिखाया।

  13. Meenu Khare says:

    >agar kisi muslim ka padosi non-muslim hai aur uski maut bhi non-muslim rahte ho gai to akhirat ke din Allah us non-muslim se puchhega ki tumne mere bataye raste ko kyun nahin mana. to uska jawaab hoga ki mujhe kisi men bataya hi nahin ya mujhe mere muslim padosi ne bataya hi nagin. tab Allah us non-muslim ko jahannam (narak) men dal dega…आश्चर्यजनक बात !!! सारे गैर मुसलमान नर्क में ही जाएँगे !!! क्या बात है !!! सलीम जी हर व्यक्ति के लिए अपना धर्म सबसे अच्छा होता है. यह आप का मानना है कि इस्लाम सब से अच्छा धर्म है पर दूसरे धर्मों की सबसे ज़्यादा तौहीन किस धर्म ने की है, सबसे ज़्यादा मन्दिर किसने तोडे, निर्दोषों का सबसे ज़्यादा खून किसने बहाया, क्या इस पर भी प्रकाश डालेंगे कभी? जब तक आप दूसरे धर्मों की इज्ज़त करना नहीं जानेगे, मैं समझूंगी की आपके धर्म ने आपको कुछ नही सिखाया।

  14. >मैंने कभी नहीं कहा कि दूसरो का धर्म नीचा है. दूसरी बात;इस्लाम के बारे में प्रचार किया जाता है कि वह दूसरे धर्मस्थलों को खसाने की सलाह देता है। कुरान कहता है * ''यदि अल्लाह ने कुछ लोगों को दूसरों के द्वारा नहीं रोका होता तो मंदिर और गिरजाघर जिनमें अल्लाह का ही नाम लिया जाता है नष्ट कर दिये गये होते।'' (कुरान-22:40)। यह उदाहरण स्पष्ट करता है कि कुरान मंदिर और गिरजाघर सबको आदर देता है। इसलिए मंदिरों को मुसलमानों द्वारा ढहाने की इजाजत नहीं देता है। इस्लाम के बारे में प्रचार किया जाता है कि वह यह शिक्षा देता है कि जो इस्लाम का बंदा नहीं उसको कत्ल कर दो, किन्तु यह भी झूठ है। कुरान कहता है किसी पर ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है जो चाहे वैसा धर्म अपनाये। कुरान कहता है * ''हर कौम के लिए एक मसीहा है न्याय उसी के द्वारा निपटाया जाता है।'' (कुरान-10-47)। कुरान हर धर्म पैगम्बर अवतार को बराबर मानता है। इस प्रकार कुरान की शिक्षाएं किसी धर्म या किसी धर्म के अवतार के विरुद्ध नहीं हैं।

  15. Third Eye says:

    >salim bhi apki sabse achchhi bat to ye lagi ki kam se kam app hamare vichar to janna chahte ho.mai to apse bas ek sawal ka javab chahta hoon. islam sabse achchha dharm hai to fir musalman sabse jyada mans(meet)kyo khate hai.kya ye krurta(violence).kya islam anya jeevo ko pranheen manta hai.

  16. >अगर तुम मानते हो इस्लाम इस देश में बड़ी कॉम है तो मुसलमानों से कहो खुद को अल्पसंख्यक कहना बंद करे !!मुसलमान पहले तो इस्लाम के नाम पर अलग देश मांग चुके है अब सारे मांग नाजायज़ है ,जिसे सब इस्लाम के मुताबिक चाहिए वो जाए पाकिस्तान जा के बस जाए ,वहा सब सरियत के मुताबिक मिलेगा !!!या फिर एक काम करो …शरियत के मुताबिक चार शादी का हक़ चाहिए तुम्हे , और वन्दे मातरम भी तुम्हे गवारा नहीं तो सज़ा वाले मामले में क्यों शरियत की मांग नहीं करते हो क्यों नहीं कहते हो जो मुसलमान चोरी करते पकडा जाए उसके दोनों हाथ कलाई से काट दो ??? ,साउदी वाला कानून मांगो अपने लिए अगर तुम दोगले नहीं हो तो ??? नसबंदी तुम्हे मंज़ूर नहीं अल्लाह ने कहा है "तागैयल खल्द उलाह " यानी अल्लाह की बनावट से छेड़ छाड़ नहीं करनी चाहिए,तो बवासीर और हार्निया का ओपरेशन,बाईपास सर्जरी और सिजेरियन डेलेवेरी क्यों करवाते हो ?यानि फ़ायदा जहा होगा तुम्हारा वहा सिर्फ बाप को बाप बोलोगे ,जहा नुकसान होता दिखे तुंरत पडोसी का हाथ थाम कर पापा पापा बोल के झूलने लगोगे !ज़ाकिर फर्जी है! इस विडियो में देखो सूअर खाने वालो के डिजाइन के कपडे पहने है और तो और देखो पैंट भी एड्हियो तक लम्बी है मै शुरू से कह रहा हूँ के वो ईमान का मुकम्मल है ही नहीं आज अंग्रेजी कपडे पहने दिख रहा है ज़रूर गोस्त भी अंग्रेजो वाले खाता होगा,छुप कर ज़रूर हरकत भी वही करता होगा

  17. Anonymous says:

    >Umda soch ! aap app jaise krantikari vichar valon ki hame zaroorat hai. par isi bat ko aise kaise kaha jaye ki bina dil dukhaye we ise samjhe aur amal karen . kisi bhi kaum me sab ek jaise nahi hote isi liye aap kisi galti par galti walon ko hi len sari kaum ko nahi . par vichar aapke sachmuch krantikari hain. aap aur mahana bana sakte hai agar is matter ko aisa bana kar kahane me safal ho jayen ki kisi ko chot bhi na lage aur wah aapse sahmat hokar galti sudharne ko taioyaar ho jaye hanste hue bye s k _ gwalior@rediffmail.com

  18. >सब मूर्खता के बातें हो रहीं हैं , धर्म तो जड़ वस्तु है वह अच्छा बुरा कैसे हो सकता है, जीवित वस्तु ''आदमी '' ही अच्छा -बुरा व सब बुराइयों -भलाइयों का कारण होता है | अपने आप को देखो , मन दर्पण में |

  19. yashpal says:

    >एक से एक मदरचोद भरे है यहाँ हा हा चूतिये की औलादें , मरोगे एक दिन सुअरो की औलादों , थोड़े दिन ठहर तेरा ब्लॉग बंद हो जाने वाला है मेरा दोस्त है टेक्सास मे ब्लोगिंग प्लैटफ़ार्म मे वह भी कट्टर हिन्दू है तेरे जीमेल को भी ब्लॉक कर देगा तेरे पीछे तो हमेशा नजर रखूँगा चूतिये ! लंदूर की औलाद कटुए ! साले सुअरो की औलाद

  20. yashpal says:

    >सभी धोखेबाज होते है, शाहरुख खान है जो पाकिस्तानी एजेंट लंडूर भड़वा सूअर का जना ! कटुआ आमिर खान सलमान खान मे सिर्फ एक ही मुसलमान देशभक्त को जानता हूँ अब्दुल कलाम साहब को बाकी सभी सूअर है

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