स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़

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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>पयामे इंसानियत फोरम (You are invited at Charbagh, Lucknow, Dt. 02 Aug. 09)

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बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

(मैं अति मेहरबान और दयालु अल्लाह के नाम से आरम्भ करता हूँ)

हर प्रकार की हम्द व सना (प्रशंसा व गुणगान) अल्लाह के लिए योग्य है, हम उसी की प्रशंसा करते हैं उसी से मदद मांगते हैं और उसी से क्षमा याचना करते हैं तथा हम अपने नफस की बुराई और अपने बुरे कामों से अल्लाह की पनाह में आते हैं, जिसे अल्लाह तआला हिदायत दे दे उसे कोई पथ्भ्स्थ करनेवाला नहीं, और जिसे गुमराह करदे उसे कोई हिदायत देने वाला नहीं. हम्द व सना के बाद:

हर प्रकार की प्रशंसा अल्लाह के लिए ही योग्य है

सज्जनों!

यदि दिल चीर कर या आंसुओं को बहाकर देश के पर्वतों, वृक्षों और नदियों के ज़रिये हम आपको इस देश की कराह सुनवा सकते तो अवश्य इस कराह को आप तक पहुंचाते. यदि वृक्ष और पशु बोलते तो वे आपको बताते कि इस देश की अंतरात्मा घायल हो चुकी है. उसकी प्रतिष्ठा और ख्याति का बट्टा लगाया जा चुका है और पतन की ओर बढ़ने से वह अग्नि-परीक्षा के एक बड़े खतरे में पढ़ गया है. आज संतों, धर्मानिष्ठों, दार्शनिकों, लेखकों और आचार्यों के मैदान में आने, नफरत की आग बुझाने और प्रेम का दीप जलाने की आवश्यकता है. इस देश की नदियाँ, पर्वत और देश के कण-कण तक आपसे अनुरोध कर रहे हैं कि आप इंसानों का रक्तपात न कीजिये, नफरत के बीज मत बोइये, मासूम बच्चों को अनाथ होने और महिलाओं को विधवा होने से बचाइये. भारत को जिन विभूतियों ने स्वाधीन कराया था, उन्होंने अहिंसा, सद्व्यवाहर और जनतंत्र के पौधों कि सुरक्षा का दायित्य हमें सौंपा था और निर्देश दिया था कि इन पौधों को हाथ न लगाया जाए, किन्तु हम उनकी सुरक्षा में असफल रहे. इसके फलस्वरूप आज हिंसा और टकराओं का दानव हमारे सामने मुंह खोले खडा है. नफरत और हिंसा कि आग हमारी उन समस्त परम्पराओं को जला देने पर तत्पर है, जिनके लिए हम समस्त संसार में विख्यात थे और आदर एवं प्रतिष्ठा की द्रष्टि से देखे जाते थे. हमारी गलतियों ने बाहरी देशों में हमारा सर नीचा कर दिया और हमारी स्थिति यह हो गयी है कि हम मुंह दिखाने योग्य नहीं रह गए हैं.

आज नफरत की इस आग को बुझाइए और याद रखिये! जब यह हिंसा किसी देश या समाज में आ जाती है तो फिर दुसरे धर्म वाले ही नहीं, अपनी ही कौम और धर्म कि जातियां और बिरादरियां, परिवार, मोहल्ले, कमज़ोर और मोहताज़ इंसान, जिनसे लेशमात्र भी विरोध हो, उसका निशाना बनते हैं.

(उक्त सन्देश भारत के एक महान विद्वान् राएबरेली के हज़रत मौलाना अली मियां द्वारा स्थापित पयामे इंसानियत फोरम के एक कार्यक्रम में कहा था)

पयामे इंसानियत फोरम कई वर्षों से इस दिशा में प्रयत्नशील है कि समाज एवं देश में हो रहे नैतिक पतन को दूर करने तथा आपस में प्रेम और भाईचारा पैदा करने के दोए देश के प्रत्येक नागरिक को उसकी ज़िम्मेदारी का एहसास दिलाया जाये कि वह इस दिशा में जागरूक हो और अपना योगदान दे इसके अतिरिक्त समस्त धर्मों के एकता के सूत्रों व शिक्षाओं को परिचित करा कर विभिन्न धर्मोलम्बियों के मध्य पारस्परिक प्रेम, विश्वास व समझ को आगे बढाकर आपसी नफरत और भेद-भाव को दूर किया जाए, तथा इंसानों के अन्दर से निकल चुकी इंसानियत को एक बार पुनः जीवित किया जाये. इसी दिशा में कदम बढाते हुए फोरम द्वारा ०२ अगस्त, २००९ को रवीन्द्रालय, चारबाग, लखनऊ में प्रातः १०.०० बजे से ‘हमारा समाज और फ्मारी जिम्मेदारियां’ विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया है. जिसमे देश के विभिन्न धर्मों व वर्गों के बुद्धिजीवियों तथा इस दिशा में कार्यरत संस्थाओं के पदाधिकारियों को आमंत्रित किया गया है. इसी सन्दर्भ में ‘इस्लाम शांति व मानवता का सन्देश‘ शीर्षक के अर्न्तगत एक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है, जिसका पुरस्कार वितरण समारोह भी इस अवसर पर आयोजित किया जायेगा और विजेताओं को सम्मानित किया जायेगा.

अतः आपसे निवेदन है कि आप इस में उपस्थित होकर उपरोक्त विषय पर बुद्धिजीवियों के विचारों को सुने और एक आदर्श भारतीय समाज बनाने में हमारा सहयोग करें.
अध्यक्षता:
हज़रत मौलाना सय्यद राबे हसनी नदवी (अध्यक्ष, पयामे इंसानियत फोरम)

मुख्य अतिथि:

प्रो. अजायब सिंह बरार (कुलपति, गुरुनानक विश्वविद्यालय, अमृतसर एवं पूर्व कुलपति लखनऊ विश्वविद्यालय)

समय व स्थान:
दिनांक 2 अगस्त 2009, दिन रविवार, समय प्रातः 10 बजे, स्थान रवीन्द्रालय, चारबाग, लखनऊ

प्रमुख वक्ता:
* डॉ. वेद प्रताप वैदिक, वरिष्ठतम पत्रकार
* प्रो. कमाकांत बुधकर, विभागाध्यक्ष, पत्रकारिता विभाग, गुरुकुल कांगडी विश्वविद्यालय, हरिद्वार
* पं. वीरेश्वर उपाध्याय, वरिष्ठ प्रतिनिधि, गायत्री तीर्थ, शांतिकुंज, हरिद्वार
* स्वामी लक्ष्मी शंकराचार्य
* मोहम्मद अदीब, सांसद, राज्यसभा

इस महत्वपूर्ण संगोष्ठी में आपकी उपस्तिथि प्रार्थनीय है.


धन्यवाद
मौलाना सय्यद अब्दुल्लाह हसनी नदवी

सचिव, पयामे इंसानियत फोरम

फ़ोन: 9336101349, 9450642505, 9235888619

नदवा कॉलेज, टैगोर मार्ग,

लखनऊ 226007 यूपी (पी.ओ. बॉक्स नंबर-93)
ईमेल: payameinsaniyat@gmail.com

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2 Responses

  1. khursheed says:

    >Thanks Saleem for this great dawa'. Insha-Allah I'll sure attend the programme.Actually we cannot find the dawati progrmms easily bcoz we (muslim) don't have strong marketing for spreeding the Islam. That we should!This is a good blog.Allah ta-aalaa ham sab kii jaddo-jahad ko qubool farmaye.Aameen.

  2. >Thanks Saleem for this great dawa'. Insha-Allah I'll sure attend the programme.Actually we cannot find the dawati progrmms easily bcoz we (muslim) don't have strong marketing for spreeding the Islam. That we should!This is a good blog.Allah ta-aalaa ham sab kii jaddo-jahad ko qubool farmaye.Aameen.

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