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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस काटजू ने मुसलमानों से मुआफ़ी मांगी (Justice Katju apologises for “Taliban” remarks on Muslims, withdraws order)

>सुप्रीम कोर्ट जज़ मार्कंडेय काटजू ने पिछले सोमवार (यौमुल इतनैन) को अपने उस बयान पर मुआफ़ी मांगी जिसे उन्होंने ३० मार्च को मुसलमानों के खिलाफ़ दिया था.


सुप्रीम कोर्ट जज़ मार्कंडेय काटजू ने एक बेहद ही शर्मनाक बयान दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि मुसलमान विद्यार्थियों को दाढ़ी रखने की इजाज़त नहीं दी जायेगी क्यूंकि वह (मार्कंडेय काटजू) भारत में तालिबानीकरण नहीं चाहते हैं और दाढ़ी रखे विद्यार्थी भारत में तालिबानीकरण का प्रतीक है.पिछले तीन महीने से उनके दिए गए बयान के कारण देश भर के मुस्लिम्स लीडर्स और धार्मिक इदारों ने बड़े पैमाने पर विरोध किया था. हालाँकि यह ख़बर हमारे मिडिया जगत में काफ़ी छोटे पैमाने पर प्रसारित की थी.

इस ३० मार्च के रिमार्क को वापस लेते समय जस्टिस मार्कंडेय काटजू और आर. वी. रवीन्द्रन ने बीती छह जुलाई को कहा “निश्चित रूप से उस फैसले में हम दोनों में से एक (जस्टिस मार्कंडेय काटजू) ने टिपण्णी की थी हालाँकि उनका (जस्टिस मार्कंडेय काटजू) का इस प्रकार का कोई इंटेंशन नहीं था. फिर भी अगर मुसलमानों का ह्रदय हमारे उस बयान से हुआ है तो वह आप से मुआफ़ी मांगते हैं और इस पुरे मामले में खेद व्यक्त करते हैं.

मुआमला कुछ इस तरह था कि निर्मला कॉन्वेंट हाई स्कूल, विदिशा, मध्य प्रदेश में पढने वाले एक विद्यार्थी (तालिब) मोहम्मद सलीम ने एक याचिका दायर की कि वह दाढ़ी रख कर स्कूल जाना चाहता है. मोहम्मद सलीम की इस याचिका पर जस्टिस काटजू ने कहा कि इस देश में मुसलामनों के लिए कोई मूलभूत अधिकार नहीं है और वह दाढ़ी नहीं रख सकता है.

जस्टिस काटजू ने आगे कहा कि वह ऐसा समझते है कि मुस्लिम स्टुडेंट को इस प्रकार का (दाढ़ी रखने का) कोई अधिकार नहीं है और कोर्ट उसे ऐसा कोई अधिकार नहीं देगा क्यूंकि दाढ़ी रखने के फलस्वरूप देश में तालिबानीकरण का आभास होगा और वह देश में तालिबानीकरण का प्रतिक होगा. कल अगर एक लड़की इसी प्रकार से याचिका दायर करती है और कहती है कि वह स्कूल केवल बुर्का पहन कर जाना चाहती है तो…

“अगर कोई रूल है तो आपको इसे पालन करना पड़ेगा, आप ऐसा नहीं कह सकते कि एपी केवल बुर्का पहनेंगी.” बेंच ने टिपण्णी की.

आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के सचिव जनाब मौलाना मुहम्मद वली रहमानी ने इस प्रकरण पर बहुत कड़े शब्दों में निंदा की. जब २४ जून को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात करने जनाब मौलाना मुहम्मद वली रहमानी के नेत्रित्व में मुस्लिम का एक प्रतिनिधिमंडल गया तब जस्टिस काटजू पर दबाव पड़ा. यही नहीं प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह से मिलने दिग्विजय सिंह, महेश भट्ट, मुफ्ती एजाज़ अरशद क़ासमी और महमूद प्रचा भी गए थे और इस बात पर कदा विरोध किया कि जब देश के न्यायाधीशों की मानसिकता ऐसी है तो पुलिस वालों, सरकारी अफसरों और आम गैर-मुस्लिम की विचारधारा कैसी होगी? प्रधानमंत्री से मिलने के एक दिन पहले यही लोग केन्द्रीय विधि मंत्री वीरप्पा मोइली से मिलने गए थे.

सबसे बड़ी बात या हुई कि छह जुलाई को देश में ऐसा पहली बार हुआ कि सुप्रीम कोर्ट में कोई कुर्सी पर बैठे जज़ ने मुआफ़ी मांगी हो. ३० मार्च के फैसले को कोर्ट ने बदलते हुए कहा कि बेंच ने इस पर दोबारा पुनर्विचार करने के लिए सुनवाई तय करने की निवेदन भी किया.

मोहम्मद सलीम ने कहा कि जिस अंदाज़ में जज़ ने अपनी बात कही उसमें नफरत की बू आ रही थी.

वैसे आप खुद सोचिये अगर एक जज़ की विचारधारा ऐसी है जो देश के सबसे बड़े कोर्ट में बैठा है तो बाकी का कहना ही क्या जबकि जज़ एक बहुत पढ़ा लिखा और ज़हनी इंसान समझा जाता है. इससे यह भी साबित होता है कि इनके ह्रदय में मुसलमानों के प्रति कितनी नफ़रत है.

अभी कुछ दिन पहले लड़कियों स्कूल-कॉलेज में को जींस टीशर्ट पहनने की मुमानियत करी गयी तो सभी लोग कितना चिल्लाये कि यह महिला सशक्तिकरण के खिलाफ़ है लड़किया जो चाहें पहन सकती है. आगे यूपी सरकार ने यह आदेश दे दिया कि लड़कियां जो चाहे पहने स्कूल-कॉलेज में उनको कोई मना नहीं करेगा. अगर लड़कियों को महिला सशक्तिकरण के आड़ में उनके नंगा होने पर आपको ऐतराज़ नहीं तो एक मुसलमान दाढ़ी क्यूँ नहीं रख सकता….???

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4 Responses

  1. >ham donon dadhi munde hen, par ham jante hen ke medicali dadhi rakhne men fayede hen,jese science research se pata chalta he ke dadhi rakhne se jabaade mazboot hote hen..doosre roz saving karne se chehre ki bareek rag ko nuqsan hota he jisse aankhon ki roshni kamzor hoti he.teesre yeh hamen gunahon se bachati he….dadhi wala aisi wesi jagah nahin ja pata is liye.muslman ko moonch bhi nahin rakhn chahiye, kiyone naak ke neeche ke baal gande hote hen,,, jab ham drink karte he to yeh usmen doob jate hen,,,phir kis tarah ki gandgi hamare pet men jati he,sardaron ko school men dadhi moonch ke sath college jane par koi pabandi nahin…yeh hame padhayi se door rakhenge phir anpadh hote huye kiya karenge yeh bhi sab ko pata he.bas bhai dua he ke ham jald dadhi rakh len,,,dua karo sab mil karbhai men is par article likhna chahta tha na likh saka menअंतिम अवतारantimawtar.blogspot.com men masroof tha yeh ek maheene men hi Rank-1 ho chuka tha.allah ke challange wala blog pehle hi Rank-2 heislaminhindi.blogspot.combaqi phir kabhi

  2. >ham donon dadhi munde hen, par ham jante hen ke medicali dadhi rakhne men fayede hen,jese science research se pata chalta he ke dadhi rakhne se jabaade mazboot hote hen..doosre roz saving karne se chehre ki bareek rag ko nuqsan hota he jisse aankhon ki roshni kamzor hoti he.teesre yeh hamen gunahon se bachati he….dadhi wala aisi wesi jagah nahin ja pata is liye.muslman ko moonch bhi nahin rakhn chahiye, kiyone naak ke neeche ke baal gande hote hen,,, jab ham drink karte he to yeh usmen doob jate hen,,,phir kis tarah ki gandgi hamare pet men jati he,sardaron ko school men dadhi moonch ke sath college jane par koi pabandi nahin…yeh hame padhayi se door rakhenge phir anpadh hote huye kiya karenge yeh bhi sab ko pata he.bas bhai dua he ke ham jald dadhi rakh len,,,dua karo sab mil karbhai men is par article likhna chahta tha na likh saka menअंतिम अवतारantimawtar.blogspot.com men masroof tha yeh ek maheene men hi Rank-1 ho chuka tha.allah ke challange wala blog pehle hi Rank-2 heislaminhindi.blogspot.combaqi phir kabhi

  3. >उमर भाई ! आपने सही कहा, इंशा अल्लाह… वैसे आपका नंबर नहीं मिल रहा… मुझे कॉल करें… प्लीज़

  4. >उमर भाई ! आपने सही कहा, इंशा अल्लाह… वैसे आपका नंबर नहीं मिल रहा… मुझे कॉल करें… प्लीज़

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