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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>छोटे वस्त्र: दुर्व्यवहार करने का न्योता !

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आजकल फिल्मों में तो लड़कियां (Actresses) उधम करे ही हुए हैं मगर हमारे लोकल समाज में भी अब छोटे कपडे आम होते जा रहे हैं, मुझे तो ऐसा लगता है कि हर गर्मी में लड़कियां पश्चिमी सभ्यता के नज़दीक और करीब आती जा रही हैं और उनके वस्त्रों में अमेरिका और यूरोप की झलक हर गर्मी में बढती ही जा रही है यानि कम के कमतर और कमेस्ट ! यही नहीं प्राइवेट स्कूल कॉलेज की लड़कियां भी हद से काफी आगे जाती जा रहीं हैं, हालाँकि सरकारी कॉलेज में हाल ही में ड्रेस कोड लागु किया जा चुका है जिसमें जींस टी-शर्ट पहनने पर पाबन्दी लगा दी गयी है, यूपी प्रिंसिपल असोसिएशन की बैठक में यह निर्णय लिया गया है. बैठक में यह भी सुझव दिया गया कि अगर लड़कियां इस तरह की भड़काऊ वस्त्र ना पहने तो छेड़छाड़ में कमी आएगी. अब कॉलेज में तो यह लागू हो जा रहा है लेकिन हमारे आस पास में यह बीमारी कैसे ठीक होगी. हमें नहीं लगता कि यह बीमारी किसी तरह जल्दी ठीक हो पाए लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि अगर हम अपनी ओरिजनल सभ्यता और चलन को अपनाने लगे तो कुछ फायेदा हो सकता है | उन चलन में से एक चलन है- पर्दा !!!

परदे से मुराद इस्लामिक लिबास है जो किसी भी स्त्री की गरीमा को बढ़ाता ही है, घटाता नहीं है…

वैसे मैं आपको एक उदहारण से यह बताने की कोशिश करूँगा कि पर्दा करने वाली लड़की और छोटे वस्त्र वाली लड़की में से कौन दुर्व्यवहार को न्योता देगी !!!


“मान लीजिये समान रूप से सुन्दर दो जुड़वां बहनें सड़क पर चल रही हैं| एक केवल कलाई और चेहरे को छोड़ कर परदे में पूरी तरह ढकी हों दूसरी पश्चिमी वस्त्र मिनी स्कर्ट (छोटा लहंगा) और छोटा सा टॉप पहने हो | एक लफंगा किसी लड़की को छेड़ने के लिए किनारे खडा हो ऐसी स्थिति में वह किस लड़की से छेड़ छाड़ करेगा ? उस लड़की से जो परदे में है या उससे जो मिनी स्कर्ट में है? स्वाभाविक है वह दूसरी लड़की से दुर्व्यवहार करेगा! ऐसे वस्त्र विपरीत लिंग को अप्रत्यक्ष रूप से छेड़छाड़ और दुर्व्यवहार का निमंत्रण देते हैं|’

कुरआन बिलकुल सही कहता है कि पर्दा औरतों के साथ छेड़छाड़ और उत्पीड़न को रोकता है| परदे का औरतों को क्यूँ उपदेश दिया जाता है इसके कारण का पवित्र कुरआन की सुरा अल अहज़ाब में उल्लेख किया गया है –

“ऐ नबी! अपनी पत्नियों, पुत्रियों और ईमानवाली स्त्रियों से कह दो कि वे (जब बाहर जाएँ) तो उपरी वस्त्र से स्वयं को ढांक लें | यह अत्यंत आसान है कि वे इसी प्रकार जानी जाएँ और दुर्व्यवहार से सुरक्षित रहें और अल्लाह तो बड़ा क्षमाकारी और बड़ा ही दयालु है |” (कुरआन 33:59)

पवित्र कुरआन कहता है कि औरतों को परदे का इसलिए उपदेश दिया गया है कि वे पाकदामनी के रूप में देखि जाएँ और पर्दा उनसे दुर्व्यवहार से भी रोकता है|

आगे कुरआन की सुरा निसा में कहा गया है –
“और अल्लाह पर इमान रखने वाली औरतों से कह दो कि वे अपनी नज़रें नीची रखें और अपनी पाकदामनी की सुरक्षा करें और वे अपने बनाव श्रृंगार और आभूषणों को ना दिखाएँ, इसमें कोई आपत्ति नहीं जो सामान्य रूप से नज़र आता है| और उन्हें चाहिए कि वे अपने सीनों पर ओढ़नियाँ ओढ़ लें और अपने पतियों, बापों और बेटों…… के अतिरिक्त किसी के सामने अपने बनाव-श्रृंगार प्रकट न करें |” (कुरआन, 24:31)


आम तौर पर लोग समझते हैं कि इस्लाम में पर्दा केवल स्त्रियों के लिए ही कहा गया है | हालाँकि पवित्र कुरआन में अल्लाह ने औरतों से पहले मर्दों के परदे का वर्णन किया गया है
“ईमानवालों से कह दो कि वे अपनी नज़रें नीची रखें और अपनी पाकदामनी की सुरक्षा करें| यह उनको अधिक पवित्र बनाएगा और अल्लाह खूब परिचित है हर उस कार्य से जो वे करते हैं|” -(कुरआन 24:30)



“उस क्षण जब एक व्यक्ति की नज़र किसी स्त्री पर पड़े तो उसे चाहिए कि वह अपनी नज़र नीची कर ले |”



लेखक: सलीम खान

Filed under: इस्लाम और नारी के अधिकार, नारी

2 Responses

  1. Ravi says:

    >सलीम जी ,आप कब फोटो में दिखायी मर्दों की पोशाक पहनना शुरू कर रहे हैं ?

  2. Ravi says:

    >सलीम जी ,आप कब फोटो में दिखायी मर्दों की पोशाक पहनना शुरू कर रहे हैं ?

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