स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़

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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>मिडिया भी मुसलमानों को उत्पीडित करता है…

>

इसलाम बेशक सबसे अच्छा धर्म है और मुसलमान एक अच्छे अमनपसंद लोग हैं लेकिन असल बात यह है कि आज मिडिया की नकेल पश्चिम वालों के हाथों में है, जो इसलाम से भयभीत है| मिडिया बराबर इसलाम और मुसलमान के विरुद्ध बातें प्रकाशित और प्रचारित करता है| वह या तो इसलाम और मुसलमान के विरुद्ध ग़लत सूचनाएं उपलब्ध करता/कराता है और इसलाम से सम्बंधित ग़लत सलत उद्वरण देता है या फिर किसी बात को जो मौजूद हो ग़लत दिशा देता है या उछलता है| अगर कहीं बम फटने की कोई घटना होती है तो बगैर किसी बगैर किसी प्रमाण के मुसलमान को दोषी मान लिया जाता है और उसे इसलाम से जोड़ दिया जाता है| समाचार पत्रों में बड़ी बड़ी सुर्खियों में उसे प्रकाशित किया जाता है | फिर आगे चल कर पता चलता है कि इस घटना के पीछे किसी मुसलमान के बजाये किसी गैर मुस्लिम का हाथ था तो इस खबर को पहले वाला महत्व नहीं दिया जाता और छोटी सी खबर दे दी जाती है |

इसी तरह की एक ख़बर मैंने अमर उजाला अख़बार में पढ़ी जो मेरे ही शहर लखनऊ की है. ख़बर थी बड़े मंगल वाले दिन की. लखनऊ यूनिवर्सिटी के सामने लगभग सड़क पर ही एक हनुमान मंदिर और उसकी देखा-देखी आस-पास कई और भी मंदिर बन गये है जिसकी वजह से मंगलवार को काफी भीड़ होती है और सुरक्षा के नाम पर कुछ सिपाही या ट्रेफिक वाले भी मौजूद रहते हैं. दो लड़के जो कि व्यापारी थे, कपडे बेचते थे, दोपहर में कुछ प्रसाद या खाने की मंशा से मंदिर में गए और प्रसाद आदि खाया. अचानक उन्हें पुलिस वालों ने पकड़ लिया और गिरफ्तार कर लिया.
पुलिस ने उन दोनों युवकों को जो मुसलमान थे को जेल भेजने का पूरा बंदोबस्त कर लिया था और हवालात में डाल दिया. अगले दिन अख़बार में पहले पृष्ठ पर मुख्य रूप से खबर छापी. 
आप खुद देखिये…


बाद में उन्हें जब पता चला कि युवक निर्दोष हैं तो उन्हें पुलिस 4 दिन की हवालात की सज़ा और यातना के बाद छोड़ दिया. उन युवकों को छोड़ने की ख़बर अख़बार के मुख्य पृष्ठ तो छोड़िये सप्लीमेंटरी माई सिटी में तीसरे पेज पर बेहद छोटी और निष्प्रभावी छापी गयी.

आप खुद देखिये…  

आपकी प्रतिक्रियाओं का स्वागत है.

प्रस्तुति- सलीम खान

Filed under: मुसलमान

4 Responses

  1. >बहुत ही अच्छा विश्लेषण. मुझे खबर में दिलचस्पी नहीं है, लेकिन आपने जो विश्लेषण किया है उससे भारतीय मिडिया का कथित सेकुलरिज्म मुखौटा उतार दिया है. प्रभाकरन की मौत की खबर भी अमर उजाला में काफी नीचे छपी थी आज. लेकिन मैंने पहले कई बार देखा है कि अगर कहीं कोई मुसलमान पकड़ा जाता है भले ही वो निर्दोष हो, अख़बार के फ्रंट पेज पर छपता है.

  2. >बहुत ही अच्छा विश्लेषण. मुझे खबर में दिलचस्पी नहीं है, लेकिन आपने जो विश्लेषण किया है उससे भारतीय मिडिया का कथित सेकुलरिज्म मुखौटा उतार दिया है. प्रभाकरन की मौत की खबर भी अमर उजाला में काफी नीचे छपी थी आज. लेकिन मैंने पहले कई बार देखा है कि अगर कहीं कोई मुसलमान पकड़ा जाता है भले ही वो निर्दोष हो, अख़बार के फ्रंट पेज पर छपता है.

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