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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>महाकवि टैगोर ने क्या कहा?

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महाकवि टैगोर के साथ एक बार रेल में यात्रा कर रहे थे मौलाना सय्यद सुलैमान नदवी, इस्लाम के इतिहासकार, इन दोनों दोनों महान विद्वानों को एक साथ देख कर किसी व्यक्ति ने कुछ यूं प्रश्न कर दिया कि

आज इस्लाम इतनी तेज़ी से क्यों नहीं फैल रहा है जितनी तेज़ी से मुहम्मद सल्ल० और पहले युग में फैला – सय्यद साहिब ने टैगोर से इस प्रश्न का उत्तर देने की प्रार्थना की।

तब टैगोर ने बताया कि “तब सत्य धर्म की अच्छाइयों और भलाइयों को जानने के लिए लोगों को पुस्तकालयों का रुख़ नहीं करना पड़ता था, वह हर मुसलमान के जीवन ही में विधमान था।”

क्या भारत के मुसलमान गुरु देव की बात पर ध्यान देंने ?

जी हाँ। आज सब से बड़ी बाधा हमारे देशवासियों के लिए कुछ मुसलमानों के घृणित कर्तव्य हैं । आज वह अपने ही धर्म इस्लाम का इस कारण विरोध कर रहे हैं कि वह मुसलमानों को उसके अनुसार चलते हुए नहीं देखते।


“एक मुस्लमान को चाहिए कि वो कुरान का मुताला (अध्ययन) रोज़ करे. उसे इससे भी ज्यादा ज़रूरी है कुरान के मायने जानना इसलिए वो रोज़ मायने भी पढ़े|”


प्रस्तुति: सलीम खान

Filed under: इस्लाम

2 Responses

  1. 'उदय' says:

    >… कहाँ क्या लिखा है, किसने क्या कहा, यह महत्वपूर्ण नहीं है महत्वपूर्ण है तो व्यवहार महत्वपूर्ण है।

  2. >… कहाँ क्या लिखा है, किसने क्या कहा, यह महत्वपूर्ण नहीं है महत्वपूर्ण है तो व्यवहार महत्वपूर्ण है।

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