स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़

Icon

सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>ईश्वर एक है, एक है, एक है !

>

ईश्वर है तो देखाई क्यों नहीं देता?

ईश्वर कोई हमारे और आप के जैसे नहीं कि जिसे मानव का देख लेना सम्भव हो, वह तो सम्पूर्ण संसार का रचयिता और पालनकर्ता है, उसके सम्बन्ध में कल्पना भी नहीं की जा सकती कि वह देखाई दे। बल्कि जो देखाई दे वह तो सीमित हो गया और ईश्वर की महिमा असीमित है। अन्तिम ग्रन्थ क़ुरआन में बताया गया है कि मूसा नामक एक संदेष्टा (ईश्वर की उन पर दया हो) ने जब ईश्वर से प्रार्थना किया कि “हे ईश्वर हमें अपना रूप देखा दीजिए” तो उत्तर आया कि तुम हमें देख नहीं सकते परन्तु तुम इस पहाड़ पर देखो यदि वह अपने स्थान पर स्थित रहा तो तेरे लिए हमे देखना सम्भव है। जब ईश्वर ने अपना प्रकाश प्रकट किया तो पड़ार टूकड़े टूकड़े हो गया और मूसा बेहोश हो कर गिर पड़े।(सूरः आराफ 143) मानव अपनी सीमित बुद्धि से जब सोचता है तो समझने लगता है कि ईश्वर कोई मानव के समान है जो देखाई देना चाहिए।
यह तो एक रहा! फिर संसार में विभिन्न चीज़ें हैं जो देखाई नहीं देतीं पर इंसान को उनके वजूद पर पूरा विश्वास होता है।
एक व्यक्ति जब तक बात करता होता है हमें उसके अन्दर आत्मा के वजूद का पूरा विश्वास होता है लेकिन जब ही वह धरती पर गिर जाता है,आवाज़ बन्द हो जाती है और शरीर ढीला पड़ जाता है तो हमें उसके अन्दर से आत्मा के निकल जाने का पूरा विश्वास हो जाता है हालाँकि हमने उसके अन्दर से आत्मा को निकलते हुए देखा नहीं।
जब हम घर में बिजली की स्विच आन करते हैं तो पूरा घर प्रकाशमान हो जाता है और हमें घर में प्रकाश के वजूद का पूरा विश्वास हो जाता है फिर जब उसी स्विच को आफ करते हैं तो प्रकाश चला जाता है हालाँकि हमने उसे आते और जाते हुए अपनी आँखों से नहीं देखा।
उसी प्रकार जब हवा बहती है तो हम उसे देखते नहीं पर उसका अनुभव करके उसके बहने पर पूरा विश्वास प्राप्त कर लेते हैं।
तो जिस प्रकार आत्मा, बिजली और हवा के वजूद पर उसे देखे बिना हमारा पूरा विश्वास होता है उसी प्रकार ईश्वर के वजूद की निशानियाँ पृथ्वी और आकाश स्वयं मानव के अन्दर स्पष्ट रूप में विधमान है और संसार का कण कण ईश्वर का परिचय कराता है क्योंकि किसी चीज़ का वजूद बनाने वाले की माँग करता है, अब आप कल्पना कीजिए कि यह धरती, यह आकाश, यह नदी, यह पहाड़, यह पशु और यह पक्षी क्या यह सब एक ईश्वर के वजूद हेतु प्रमाण नहीं? प्रति दिन सूर्य निकलता है और अपने निश्चित समय पर डूबता है, स्वयं इनसान का एक एक अंग अपना अपना काम कर रहा है यदि अपना काम करना बन्द कर दे तो इनसान का वजूद ही स्माप्त हो जाए। यह सारे तथ्य इस बात के प्रमाण हैं कि ईश्वर है पर उसे देखना इनसान के बस की बात नहीं।
जब हम ईश्वर के अस्तित्व पर विश्वास कर लेते हैं तो हमें यह भी मानना पड़ेगा कि ईश्वर यदि है तो वह एक है अनेक नहीं। क्योंकि हम अपने दैनिक जीवन में देखते हैं कि एक देश का दो प्रधान मंत्री नहीं होता, एक स्कूल का दो अध्यक्ष नहीं होता, एक सेना का दो कमानडर नहीं होता, एक घर का दो गारजियन नहीं होता। यदि हुआ तो क्या आप समझते हैं कि नियम ठीक ठाक से चल सकेगा? अब आप कल्पना कीजिए कि इतनी बड़ी सृष्टि का प्रबंध एक से ज्यादा ईश्वर से कैसे चल सकता है?
क़रआन जो ईश्वाणी है जो सम्पूर्ण संसार के मार्गदर्शन हेतू अवतरित हुआ है उसने अपने अवतरित काल में मानव को चुनौती दी कि यदि किसी को क़ुरआन के ईश्वाणी होने में संदेह है या वह समझता हो कि मुहम्मद सल्ल0 ने इसकी रचना की है हालांकि वह न पढना जानते हैं न लिखना तो तुम में बड़े बड़े विद्वान पाए जाते हैं ( इस जैसी एक सूरः (छोटा अध्याय) ही बनाकर देखाओ और ईश्वर के सिवा पूरे संसार को अपनी सहायता के लिए बुला लो यदि तुम सच्चे हो)
(सूरः बक़रा 23)
लेकिन इतिहास गवाह है कि चौदह सौ साल से आज तक संसार के बसने वाले इसके समान एक श्लोक भी पेश न कर सके हैं और कोई भी आज तक प्रमाण न दे सका कि यह ईश्वर की वाणी नहीं है।
इस पवित्र ग्रन्थ में हमें ईश्वर ने यह प्रमाण दिया है कि (यदि धरती और आकाश में अनेक पूज्य होते तो खराबी और फसाद मच जाता) बात बिल्कुल स्पष्ट है कि यदि संसार में दो ईश्वर होते तो संसार का नियम नष्ट भ्रष्ट हो जाता, एक कहता कि आज बारिश होगी तो दूसरा कहता कि आज बारिश नहीं होगी।एक राम दास को किसी पद कर आसीन करना चाहता तो दूसरा चाहता कि राम दास उस पद पर आसीन न हो ।
यदि देवी देवता का यह अधिकार सत्य होता तथा वह ईश्वर के कार्यों में शरीक भी होते तो कभी ऐसा होता कि एक दास ने पूजा अर्चना कर के वर्षा के देवता से अपने बात स्वीकार करा ली, तो बड़े मालिक की ओर से आदेश आता कि आज बारिश नहीं होगी। फिर नीचे वाले हड़ताल कर देते ।

अगर दो ख़ुदा होते संसार में
तो दोनों बला होते संसार में
ईधर एक कहता कि मेरी सुनो
ईधर एक कहता कि मियाँ चुप रहो।

स्वयं आप कल्पना कीजिए कि यदि दो ड्राईवर एक गाड़ी पर बैठा दिया जाए तो गाड़ी अवश्य एक्सिडेन्ट कर जाएगी। ईसी लिए मानना पड़ेगा कि इस संसार का सृष्टिकर्ता केवल एक है।

हाँ ईश्वर है… और 100 प्रतिशत है।

यदि हम कहें कि ईश्वर नहीं है तो हमें स्वयं को कहना होगा कि हम भी नहीं हैं, यदि हम हैं तो हमारा कोई बनाने वाला अवश्य होना चाहिए क्योंकि कोई भी चीज़ बिना बनाए नहीं बनती,और न ही वह स्वयं बनती है
मैं अभी कम्प्यूटर पर लिख रहा हूं, यदि मैं कहूं कि कम्प्यूटर को किसी ने नहीं बनाया, स्वयं बन कर हमारे सामने आ गया है तो आप हमें पागल कहेंगे।
उसी प्रकार यदि मैं आपसे कहूं कि एक कम्पनी है जिसका न कोई मालिक है, न कोई इन्जीनियर, न मिस्त्री । सारी पम्पनी आप से आप बन गई, सारी मशीनें स्वंय बन गईं, खूद सारे पूर्ज़े अपनी अपनी जगह लग गए और स्वयं ही अजीब अजीब चीज़े बन बन कर निकल रही हैं, सच बताईए यदि में यह बात आप से कहूं तो क्या आप मेरी बात पर विश्वास करेंगे ? क्यों ? इस लिए कि ऐसा हो ही नहीं सकता कि बिना बनाए कम्पनी या कम्प्यूटर बन जाए।

अब हमें उत्तर दीजिए कि क्या यह संसार तथा धरती और आकाश का यह ज़बरदस्त कारख़ाना जो आपके सामने चल रहा है, जिसमें चाँद, सूरज और बड़े बड़े नक्षत्र घड़ी के पुर्ज़ों के समान चल रहे हैं क्या यह बिना बनाए बन गए?
स्वयं हम तुच्छ वीर्य थे, नौ महीना की अवधि में विभिन्न परिस्थितियों से गुज़र कर अत्यंत तंग स्थान से निकले,हमारे लिए माँ के स्तन में दूध उत्पन्न हो गया,कुछ समय के बाद हमें बुद्धि ज्ञान प्रदान किया गया, हमारा फिंगर प्रिंट सब से अलग अलग रखा गया, इन सब परिस्थितियों में माँ का भी हस्तक्षेप न रहा, क्योंकि हर माँ की इच्छा होती है कि होने वाला बच्चा गोरा हो लेकिन काला हो जाता है, लड़का हो लेकिन लड़की हो जाती है। अब सोचिए कि जब कोई चीज़ बिना बनाए नहीं बना करती जैसा कि आप भी मान रहे हैं तथा यह भी स्पष्ट हो गया कि उस में माँ का भी हस्तक्षेप नहीं होता तो अब सोचें कि क्या हम बिना बनाए बन गए ???????
कभी हम संकट में फंसते हैं तो हमारा सर प्राकृतिक रूप में ऊपर की ओर उठने लगता है शायद आपको भी इसका अनुभव होगा—ऐसा क्यों होता है ? इसलिए कि ईश्वर की कल्पना मानव के हृदय में पाई जाती है, पर अधिकांश लोग अपने ईश्वर को पहचान नहीं रहे हैं।
फलसफी बास्काल कहता है “ईश्वर को छोड़ कर कोई चीज़ हमारी प्यास बुझा नहीं सकती” शातोबरीन लिखता है “ईश्वर के इनकार की साहस मानव के अतिरिक्त किसी ने नहीं की”
लायतीह यहाँ तक कहता है कि “जो शब्द सृष्टा का इनकार करे उसके प्रयोग करने वाले के होंट आग में जलाए जाने योग्य हैं”
इस्लाम के सम्बन्ध में सब से बड़ा संदेह जो लोगों में पाया जाता हैं यह है कि इस्लाम एक नया धर्म है जिसे सब से पहले मुहम्मद साहिब ने सातवीं शताब्दी में मानव के समक्ष प्रस्तुत किया-
हालांकि यह बात सत्य के बिल्कुल विरोद्ध है, मुहम्मद सल्ल0 अवश्य सातवीं शताब्दी में पैदा हुए परन्तु उन्होंने इस्लाम की स्थापना नहीं किया बल्कि उसी संदेश की ओर लोगों को आमंत्रित किया जो सारे संदेष्टाओं के संदेशों का सार रहा।
ईश्वर ने मानव को पैदा किया तो एसा नहीं है कि उसने उनका मार्गदर्शन न किया जिस प्रकार कोई कम्पनी जब कोई सामान तैयार करती हैं तो उसके प्रयोग का नियम भी बताती है उसी प्रकार ईश्वर ने मानव का संसार में बसाया तो अपने बसाने के उद्देश्य ने अवगत करने के लिए हर युग में मानव ही में से कुछ पवित्र लोगों का चयन किया ताकि वह मानव मार्गदर्शन कर सकें परन्तु सब से अन्त में ईश्वर ने मुहम्मद सल्ल0 को भेजा।
अब आप पूछ सकते हैं कि मुहम्मद सल्ल0 ने किस चीज़ की ओर बुलाया ? तो इसका उत्तर यह है कि उन्होंने मानव को यह ईश्वरीय संदेश पहुंचाया कि
(1) ईश्वर केवल एक है केवल उसी ईश्वर की पूजा होनी चाहिए उसके अतिरिक्त कोई शक्ति लाभ अथवा हान का अधिकार नहीं रखती
(2) सारे मानव एक ही ईश्वर की रचना हैं क्योंकि उनकी रचना एक ही माता पिता से हुई अर्थात आदि पुरुष जिनसको कुछ लोग मनु कहते हैं और सतरोपा कहते हैं तो कुछ लोग आदम और हव्वा, वह प्रथम मनुष्य ने जो धरती पर बसाए गए, उनका जो धर्म था उसी को हम इस्लाम अथवा सनातन धर्म कहते हैं ।
(3) मुहम्मद सल्ल0 ने शताब्दियों से मन में बैठी हुई जातिवाद का खण्डन किया जो लोगों के हृदय में बैठ चुका था और प्रत्येक मनुष्य को समान क़रार दिया।
और जब मुहम्मद सल्ल0 ने वही संदेश दिया जो संदेश हर युग में संदेष्टा देते रहे थे। इस लिए इस्लाम को नया धर्म कहना ग़लत होगा।
फिर यह भी याद रखें कि इस्लाम में 6 बोतों पर विश्वास रखने का आदेश दिया गया है जिस पर सारे मुसलमानों का विश्वास रखना आवश्यक है। उसे हम ईमान के स्तम्भ कहते हैं यदि कोई मुसलमान उनमें से किसी एक का इनकार कर देता है तो वह इस्लाम की सीमा से निकल जाएगा उनमें से एक है ईश्वर के भेजे हुए संदेष्टाओं पर विश्वास करना – अर्थात इस बात पर विश्वास करना कि ईश्वर ने हर युग तथा देश में मानव मार्गदर्शन हेतु संदेष्टाओं को भेजा जिन्होंने मानव को एक ईश्वर की पूजा की ओर बोलाया और मूर्ति जूजा से दूर रखा, पर उनका संदेश उन्हीं की जाति तक सीमित होता था क्योंकि मानव ने इतनी प्रगति न की थी तथा एक देश का दूसरे देशों से सम्बन्ध नहीं था।
जब सातवी शताब्दी में मानव बुद्धि प्रगति कर गई और एक देश का दूसरे देशों से सम्बन्ध बढ़ने लगा को ईश्वर ने अलग अलग हर देश में संदेश भेजने के नियम को समाप्त करते हुए विश्वनायक का चयन किया।
वह विश्व नायक कौन हैं इस सम्बन्ध में आप जानना चाहते हैं तो आपको डा0 वेद प्रकाश उपाध्याय की पुस्तक कल्की अवतार और मुहम्मद सल्ल0 तथा डा0 एम ए श्री वास्तव की पुस्तक ( मुहम्मद सल0 और भारतीय धर्म ग्रन्थ) का अध्ययन करना होगा जिसमें इन महान विद्वानों ने सत्य को स्वीकार करते हुए हिन्दुओं को आमंत्रन दिया है कि हिन्दू धर्म में जिस कल्कि अवतार तथा नराशंस के आने की प्रतीक्षा हो रही है वह सातवीं शताब्दी में आ गए और वही मुहम्मद सल्ल0 हैं । डॉ ज़ाकिर नायक के उन पुस्तकों को पढ़े जिन्होंने एक क्रन्तिकारी क़दम उठाते हुए सभी धर्मों ख़ासकर के हिन्दुज़्म और इस्लाम के बीच यकसानियत (समानताओं) के बारे में बहुत बड़े पैमाने पर लिखा है.
अंततः ईश्वर ने अन्तिम संदेष्टा मुहम्मद सल्ल0 को सम्पूर्ण मानव जाति का मार्गदर्शक बना कर भेजा, आप पर अन्तिम ग्रन्थ क़ुरआन अवतरित किया जिसका संदेश सम्पूर्ण मानव जाति के लिए है ।
मुहम्मद सल्ल0 ने कभी यह दावा नहीं किया कि वह कोई नया धर्म लेकर आए हैं, वही इस्लाम जिसकी शिक्षा आदि पुरुष आदम (मनू ) ने दिया था उसी को पूर्ण करने के लिए मुहम्मद सल्ल0 भेजे गए। आज मानव का कल्याण इस्लाम धर्म ही में है क्यों कि इस्लाम उन्हीं का है, क़ुरआन उन्हीं का है तथा मुहम्मद सल्ल0 उन्हीं के लिए आए हैं। लेकिन अज्ञानता का बुरा हो कि लोग आज उन्हीं का विरोद्ध कर रहे हैं जो उनके कल्याण हेतु भेजे गए। मैं इस बात को भी स्वीकार करता हूँ कि ग़लती हमारी हैं कि हम हिन्दू मुस्लिम भारत में शताब्दियों से रह रहे हैं पर हमने सत्य को आप से छुपाए रखा। और ज्ञात है कि यदि इनसान किसी चीज़ की सत्यता को नहीं जानता है तो उसका विरोद्ध करता ही है। अतः आप से निवेदन है कि मेरी बातों पर विशाल हृदय से निष्पक्ष हो कर चिंतन मनन करेंगे। तथा इस्लाम का अध्ययन आरम्भ करें।

Filed under: ईश्वर

22 Responses

  1. shama says:

    >Aapne behad achha likha hai….ek hindustaneeke tadapke saath…dardke saath…sachhaeeke saath…aseem khushee huee aapke khayalaat jaanke…Aapka swagat hai aur mere blogpe nimantran detee hun kuchh khaas padhneke liye…haliya hue hamlonke baad 3 articles likhe the…chand kavitaye, jo pehle likhee gayee theen lekin phir ekbaar post kar dee..Lekh:1) Pyarki Raah Dikha Duniyaako..”( Ye Gujraatme hue qaumee fasadonke baad likha tha.2)”Meree Aawaz suno…!”3)Ye jazba salamat rahe…4)Had hai !3 kavitayen, ekhee sheershak tale hain:”Ek Hindustaneekee Lalkaar, Phir Ekbaar”Aasha hai aap padhenge aur comment karenge.Maine haalheeme film making kaa course kiya. Ab ek documentary banane jaa rahee hun jo,” Jateeywaad, Aatankwaad tatha Hamaree suraksha yantrana”, in muddonke tehet. Bohot abhyaspoorn aur interviews pe adharit ye gambheer aur behad samvedansheel wishay hai. Lekin isme kiseekebhi nakaratmak comment ko include nahee karungi…bohot negativity ho chukee, bohot ho gaye ek doosarepe ilzaam…waqt hai apne girebaan me jhank neka…

  2. shama says:

    >Aapne behad achha likha hai….ek hindustaneeke tadapke saath…dardke saath…sachhaeeke saath…aseem khushee huee aapke khayalaat jaanke…Aapka swagat hai aur mere blogpe nimantran detee hun kuchh khaas padhneke liye…haliya hue hamlonke baad 3 articles likhe the…chand kavitaye, jo pehle likhee gayee theen lekin phir ekbaar post kar dee..Lekh:1) Pyarki Raah Dikha Duniyaako.."( Ye Gujraatme hue qaumee fasadonke baad likha tha.2)"Meree Aawaz suno…!"3)Ye jazba salamat rahe…4)Had hai !3 kavitayen, ekhee sheershak tale hain:"Ek Hindustaneekee Lalkaar, Phir Ekbaar"Aasha hai aap padhenge aur comment karenge.Maine haalheeme film making kaa course kiya. Ab ek documentary banane jaa rahee hun jo," Jateeywaad, Aatankwaad tatha Hamaree suraksha yantrana", in muddonke tehet. Bohot abhyaspoorn aur interviews pe adharit ye gambheer aur behad samvedansheel wishay hai. Lekin isme kiseekebhi nakaratmak comment ko include nahee karungi…bohot negativity ho chukee, bohot ho gaye ek doosarepe ilzaam…waqt hai apne girebaan me jhank neka…

  3. >हिंदी लिखाडि़यों की दुनिया में आपका स्वागत। खूब लिखे। अच्छा लिखे। हजारों शुभकामंनाएंविषय अच्छा हैं। इस्लाम के बारे में यहां आकर जानने आैर समझने का मौका भी मिलेगा।

  4. >हिंदी लिखाडि़यों की दुनिया में आपका स्वागत। खूब लिखे। अच्छा लिखे। हजारों शुभकामंनाएंविषय अच्छा हैं। इस्लाम के बारे में यहां आकर जानने आैर समझने का मौका भी मिलेगा।

  5. islam says:

    >भाई आपने एकेश्वरवाद को बेहतर ढंग से समझाने की कोशिश की हैवेद में भी लिखा है– नाताश्य प्रतिमा अस्ति -उसकी कोई प्रतिमा नहीं है एकं ब्रह्म दितीय नास्ति –नास्ति नास्ति किंचन नास्ति–ब्रह्म एक ही है दूसरा नही है नही है नही है ज़रा भी नही है

  6. islam says:

    >भाई आपने एकेश्वरवाद को बेहतर ढंग से समझाने की कोशिश की हैवेद में भी लिखा है– नाताश्य प्रतिमा अस्ति -उसकी कोई प्रतिमा नहीं है एकं ब्रह्म दितीय नास्ति –नास्ति नास्ति किंचन नास्ति–ब्रह्म एक ही है दूसरा नही है नही है नही है ज़रा भी नही है

  7. islam says:

    >भाई आपने एकेश्वरवाद को बेहतर ढंग से समझाने की कोशिश की हैवेद में भी लिखा है– नाताश्य प्रतिमा अस्ति -उसकी कोई प्रतिमा नहीं है एकं ब्रह्म दितीय नास्ति –नास्ति नास्ति किंचन नास्ति–ब्रह्म एक ही है दूसरा नही है नही है नही है ज़रा भी नही है

  8. islam says:

    >भाई आपने एकेश्वरवाद को बेहतर ढंग से समझाने की कोशिश की हैवेद में भी लिखा है– नाताश्य प्रतिमा अस्ति -उसकी कोई प्रतिमा नहीं है एकं ब्रह्म दितीय नास्ति –नास्ति नास्ति किंचन नास्ति–ब्रह्म एक ही है दूसरा नही है नही है नही है ज़रा भी नही है

  9. >बहुत सुंदर…आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

  10. >बहुत सुंदर…आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

  11. >ब्लाग जगत में सुंदर लेखन के साथ आपका स्वागत है। जिंदगी के किसी मोड़ पर कोई सच्चा साथी मिले, तो खुशी होती है। आपको भी इस विशाल सागर में आपकी भावनाओं को समझने वाले मित्र मिलेंगे। शुभकामनाएं।

  12. >ब्लाग जगत में सुंदर लेखन के साथ आपका स्वागत है। जिंदगी के किसी मोड़ पर कोई सच्चा साथी मिले, तो खुशी होती है। आपको भी इस विशाल सागर में आपकी भावनाओं को समझने वाले मित्र मिलेंगे। शुभकामनाएं।

  13. >नमस्कार आप सही लिखे है हमारे ब्लोग पर सादर आमन्त्रित है.

  14. >नमस्कार आप सही लिखे है हमारे ब्लोग पर सादर आमन्त्रित है.

  15. krishh says:

    >आप हिन्दी में लिखते हैं. अच्छा लगता है. मेरी शुभकामनाऐं आपके साथ हैं

  16. krishh says:

    >आप हिन्दी में लिखते हैं. अच्छा लगता है. मेरी शुभकामनाऐं आपके साथ हैं

  17. >bahut jabardast logic diye hain aap ne..maaan gaye!badiya lekh…koi maaney ya na maney main to manti hun..is duniya ko chalaane wala ek hi hai.

  18. >bahut jabardast logic diye hain aap ne..maaan gaye!badiya lekh…koi maaney ya na maney main to manti hun..is duniya ko chalaane wala ek hi hai.

  19. RAJ says:

    >I have doubt on some views :1. First thing is on what behalf you are saying that Manu and satrupa were first on the earth to start human generation.In sanatan dharm before 5000 yrs. ago when our only written philosophy was Vedas It is mentioned that there were Many Persons involved in the starting of earth.(Not only two)Vedas were not written by anyone they were given by God to four Rishis by internal inspiration.2. You have mentioned “Kalki Avtar”that is also not a sanatan dharm philosophy .This philosophy is given by brahmins to give a direction that someone will come to help and revoke our Culture and humanity.According to Kalki Avtar phenomena a child with some different looking will take birth in a brahmins family in the last round of Kaliyug….then according to you Pagambar was also a brahminIf this story is true.If the Kuran’s rules are given by god then why in todays world the 100% rule follower(Talibans) are the biggest sufferer in todays scenario and a big threat to humanity.They never like any religion to live cooperatively with them.I think you should rethink on your views some are totally wrong.Try to give comment without any favourism.

  20. RAJ says:

    >I have doubt on some views :1. First thing is on what behalf you are saying that Manu and satrupa were first on the earth to start human generation.In sanatan dharm before 5000 yrs. ago when our only written philosophy was Vedas It is mentioned that there were Many Persons involved in the starting of earth.(Not only two)Vedas were not written by anyone they were given by God to four Rishis by internal inspiration.2. You have mentioned "Kalki Avtar"that is also not a sanatan dharm philosophy .This philosophy is given by brahmins to give a direction that someone will come to help and revoke our Culture and humanity.According to Kalki Avtar phenomena a child with some different looking will take birth in a brahmins family in the last round of Kaliyug….then according to you Pagambar was also a brahminIf this story is true.If the Kuran's rules are given by god then why in todays world the 100% rule follower(Talibans) are the biggest sufferer in todays scenario and a big threat to humanity.They never like any religion to live cooperatively with them.I think you should rethink on your views some are totally wrong.Try to give comment without any favourism.

  21. >सही कहा आप ने , ईश्वर एक ही है पर उस के नाम अनेक है , फिर भी लोग क्यों कहते है की मेरे ईश्वर का नाम ही सही है और तेरे का गलत , हमारी संस्कृति मे भी कहा है की हर रास्ता ईश्वर तक ही जाता है उस का नाम आप कुछ भी ले .

  22. >सही कहा आप ने , ईश्वर एक ही है पर उस के नाम अनेक है , फिर भी लोग क्यों कहते है की मेरे ईश्वर का नाम ही सही है और तेरे का गलत , हमारी संस्कृति मे भी कहा है की हर रास्ता ईश्वर तक ही जाता है उस का नाम आप कुछ भी ले .

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: