स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़

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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>ईश्वर एक है…

>हम इस दुनिया में रहते हैं, सभी इन्सान हैं. ये दुनिया, चाँद, सितारे, सूरज, पेड़, पहाड़, असमान वगैरह वगैरह…….. हम कुछ पूछेंगे और आप जवाब दीजिये–

क्या इस दुनिया को बनने वाला एक से ज़्यादा है?
इन्सान को बनने वाला, दुनिया बनाने वाला, चाँद, सूरज, सितारे बनाने वाला क्या अलग अलग है?
अगर नहीं,
तो ये कहना और दिल से मानना कि- दुनिया को बनाने वाला सिर्फ़ और सिर्फ़ एक है बिल्कुल सही है. हम सब एक ही ईश्वर/अल्लाह के द्वारा है, और उसी के लिए हैं. एक भ्रम मैं दूर करना चाहता हूँ- मेरे उक्त कथन का मतलब यह बिल्कुल भी नहीं कि सब कुछ ईश्वर है, नहीं बल्कि सब कुछ ईश्वर का है, ईश्वर से है। वह निर्गुण होते हुए भी सभी गुणों से सुसज्जित है, उसे किसी की आवश्यकता नहीं, उसकी सबको आवश्यकता है.

उसने समय समय पर इस दुनियाँ में अपने संदेष्टा भेजे, कभी कहीं तो कभी कहीं. हमें उन संदेष्टाओं में से ज्यादातर के बारे में बिल्कुल भी पता नहीं. जो कुछ मौजूद है उसके अनुसार मोहम्मद (ईश्वर की उन पर कृपा हो) ईश्वर के अन्तिम संदेष्टा थे और उनके बाद अब कोई भी ईश्वर का संदेश ले कर कोई नहीं आएगा.
मोहम्मद (ईश्वर की उन पर कृपा हो) अरब देश में पैदा हुए थे और वहां से उन्होंने ईश्वर का संदेश लोगों तक पहुँचाया, संदेश वही जो ईश्वर के पहले संदेष्टा आदम (अलैहिस्सलाम) का था, संदेश उनके बाद के संदेष्टाओं का था जिनमे से प्रमुख रूप से थे- इब्राहीम (अलैहिसलाम), इस्माईल (अलैहिसलाम), नुह (अलैहिसलाम), इसा (अलैहिसलाम) और अन्य. .. जारी

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Filed under: ईश्वर

21 Responses

  1. the pink orchid कहते हैं:

    >Ji aapne kitni sundar baat kahi.. shayad ye baat jaante hum sab hain par maanta koi bhi nahi.. ye vichaar humaare sath baantne ke liye dhanyawaad .

  2. Harsh pandey कहते हैं:

    >aap ki yah post achchi lagi nice blog too

  3. Harsh कहते हैं:

    >aap ki yah post achchi lagi nice blog too

  4. Harkirat Haqeer कहते हैं:

    >Blog ki duniaa me aapka swagat hai…isi tarah apne vichar rakhte rahen….!!

  5. हरकीरत ' हीर' कहते हैं:

    >Blog ki duniaa me aapka swagat hai…isi tarah apne vichar rakhte rahen….!!

  6. manu कहते हैं:

    >WAAH SALIM BHAI,,,KHOOB KAHAA HAI…..AUR AAP JO APNE BACHPAN WAALI TAMAATAR WALI BAAT KAH KAR AAYE HAI…..USNE MUJHE BHI APNE BACHPANE MEIN PAHUNCHAA DIYA……..BAS HAMAARE AAPKE KHYAAL…MUHBBAT PAR AAKER NAHI MILTE,,,,BAAKI AAP KIBAATEIN KHOOOB LAGI….

  7. manu कहते हैं:

    >WAAH SALIM BHAI,,,KHOOB KAHAA HAI…..AUR AAP JO APNE BACHPAN WAALI TAMAATAR WALI BAAT KAH KAR AAYE HAI…..USNE MUJHE BHI APNE BACHPANE MEIN PAHUNCHAA DIYA……..BAS HAMAARE AAPKE KHYAAL…MUHBBAT PAR AAKER NAHI MILTE,,,,BAAKI AAP KIBAATEIN KHOOOB LAGI….

  8. mehek कहते हैं:

    >bahut sahi kaha aur bahut khubsurat tarike se,bahut achhe vichar aur sundar blog,hamari kavita”aadat’ on rangkarmi blog par tipani ka shukran aur tippani rupi kavita bhibahut achhi rahi,khuda kare yuhi aapka blog barkat se bhara ho.

  9. mehek कहते हैं:

    >bahut sahi kaha aur bahut khubsurat tarike se,bahut achhe vichar aur sundar blog,hamari kavita"aadat' on rangkarmi blog par tipani ka shukran aur tippani rupi kavita bhibahut achhi rahi,khuda kare yuhi aapka blog barkat se bhara ho.

  10. सलीम ख़ान कहते हैं:

    >हरकीरत जी, आपका बहुत बहुत शुक्रिया !

  11. >मनु भाई, सबसे पहले तो मेरे ब्लॉग पे आने का शुक्रन और टिप्पडी करने का धन्यवाद | मनु जी, मोहब्बत ज़िन्दगी में सिर्फ़ एकबार होती है और इन्सान को या इन्सान बना देती या हैवान (मोहब्बत की नज़र में, न की सभी मायने में) | वो सुना है न आपने:”दिल ऐसा किसी ने मेरा तोड़ा, अमानुस बना के छोड़ा |”बहार-हाल एक गुजारिश है, आप इस स्वच्छ संदेश पर आते रहिएगा और साथ ही साथ मेरे दुसरे ब्लॉग “ज़िन्दगी की आरजू” पर भी | पुनः कोटि कोटि धन्यवाद |

  12. सलीम ख़ान कहते हैं:

    >मनु भाई, सबसे पहले तो मेरे ब्लॉग पे आने का शुक्रन और टिप्पडी करने का धन्यवाद | मनु जी, मोहब्बत ज़िन्दगी में सिर्फ़ एकबार होती है और इन्सान को या इन्सान बना देती या हैवान (मोहब्बत की नज़र में, न की सभी मायने में) | वो सुना है न आपने:"दिल ऐसा किसी ने मेरा तोड़ा, अमानुस बना के छोड़ा |"बहार-हाल एक गुजारिश है, आप इस स्वच्छ संदेश पर आते रहिएगा और साथ ही साथ मेरे दुसरे ब्लॉग "ज़िन्दगी की आरजू" पर भी | पुनः कोटि कोटि धन्यवाद |

  13. >महक जी, आपका ब्लॉग पढ़ा, अबहुत अच्छा लगा, हमारी मुलाकातों का (ब्लाग्स पे) सिलसिला यूँ ही चले, ये दुआ है मेरी |ईश्वर/अल्लाह से यही दुआ है कि हम सभी इन्सान को, खास कर हम सब भारतीयों को एक-जुट रहने की तौफीक अता फरमाए | हम एक ही उपास्य की उपासना करें और अपने मूल धर्म ग्रन्थों का अध्ययन करें ना कि बाद में इंसानों के द्वारा बनाये गए काल्पनिक धर्म ग्रन्थों का |आमीन !

  14. सलीम ख़ान कहते हैं:

    >महक जी, आपका ब्लॉग पढ़ा, अबहुत अच्छा लगा, हमारी मुलाकातों का (ब्लाग्स पे) सिलसिला यूँ ही चले, ये दुआ है मेरी |ईश्वर/अल्लाह से यही दुआ है कि हम सभी इन्सान को, खास कर हम सब भारतीयों को एक-जुट रहने की तौफीक अता फरमाए | हम एक ही उपास्य की उपासना करें और अपने मूल धर्म ग्रन्थों का अध्ययन करें ना कि बाद में इंसानों के द्वारा बनाये गए काल्पनिक धर्म ग्रन्थों का |आमीन !

  15. manu कहते हैं:

    >dear, agar insaan hi hai …to aur kyaa insaan banaayegi………aur haiwaan banaayegi …to kyaaaa muhabbat hui.?ye to un ke hi kaam hote hain…jo aaaye din apni chaandni ke chehre ko tezaab se nahlate hain….. mujhe jahaan bhi pyaar mein galat fahmi lagti hai…main wahin pahunch jataa hoon……..door karne..

  16. manu कहते हैं:

    >dear, agar insaan hi hai …to aur kyaa insaan banaayegi………aur haiwaan banaayegi …to kyaaaa muhabbat hui.?ye to un ke hi kaam hote hain…jo aaaye din apni chaandni ke chehre ko tezaab se nahlate hain….. mujhe jahaan bhi pyaar mein galat fahmi lagti hai…main wahin pahunch jataa hoon……..door karne..

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