स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़

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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>कहाँ तलाशूँ तुझे

>

दू तलक गूंजते हैं यहाँ सन्नाटे रात भर,
दिन के शोर ओ शराबे में भी होता हूँ मैं तन्हाँ.
दिल की आवाज़ भी सुन लो, सुन लो मेरी आरज़ू,
कहाँ तलाशूँ तुझे मैं, तुम हो कहाँ, मैं हूँ कहाँ?

Filed under: स्वच्छसन्देश

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