स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़

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सलीम खान का एक छोटा सा प्रयास

>बंदगी की हद से ज़्यादा तेरा सुरूर था, कैसे बताऊँ मैं तुझको तू मेरा गुरुर था.

>


जो तुम ना थे मेरे सनम
तो क्या थी ये ज़िन्दगी
कुछ भी नहीं

जो तुम नहीं हो, मेरे सनम
तो क्या है ये ज़िन्दगी 
कुछ भी नहीं

बंदगी की हद से ज़्यादा तेरा सुरूर था 
कैसे बताऊँ मैं तुझको तू मेरा गुरुर था

शाम से सुबह तक बस तेरी तलाश है  
तेरे बिना ज़िन्दगी मेरी जिंदा लाश है

तू नही तो ज़िन्दगी कैसी उदास है 
बुझती नही है ये भी कैसी प्यास है  

अक़्स-ऐ- आरज़ू लिए फिरते रहेंगे हम
पल-पल तेरी याद में मरते रहेंगे हम

मरासिम मुस्तकिल न सही, मिजाजे-आशिक़ी रहे
नगमा नहीं साज़ नही न सही तेरी मौसिक़ि रहे


जो तुम ना थे मेरे सनम
तो क्या थी ये ज़िन्दगी
कुछ भी नहीं

जो तुम नहीं हो, मेरे सनम
तो क्या है ये ज़िन्दगी 
कुछ भी नहीं

Filed under: ज़िन्दगी की आरज़ू, सलीम खान

>तेरे सिवा कोई और इन अश्कों के क़ाबिल भी तो नहीं: Saleem Khan

>


हमें भी आरज़ू थी तेरे संग ज़िन्दगी बिताने की
पर ‘आरज़ू’, साथ तेरा हमने पाया भी तो नहीं




माना कि ज़िन्दगी में बहुत बहाने हैं, आंसू बहाने के लिए
पर तुने जैसे रुलाया है, पहले किसी ने रुलाया भी तो नहीं


ऐसा नहीं कि तेरे आने से पहले, हम कभी मुस्कुराये न थे
पर तेरे जाने के बाद वैसे किसी ने हंसाया भी तो नहीं


भटकते रहे इस दुनिया में हमसफ़र की तलाश में
पर तुझ जैसा हमसफ़र फिर दोबारा मिला भी तो नहीं


तेरी यादों की शहादत मेरे अश्क देते हैं ‘ए आरज़ू’
तेरे सिवा कोई और इन अश्कों के क़ाबिल भी तो नहीं

Filed under: ज़िन्दगी की आरज़ू, मेरी ग़ज़ल

>सलीम ख़ान के पत्रकार भाई समीउद्दीन नीलू (यू पी पुलिस द्वारा उत्पीड़ित) को मानवअधिकार आयोग से राहत, यू पी सरकार को ५ लाख मुआवजा देने का निर्देश

>

बचपन से सुना करते थे कि ऊपर वाले के यहाँ देर है अंधेर नहीं ! लेकिन देश के मौजूदा सड़े हुए तंत्र में जिस तरह से आम जनता का भरोसा उठ गया है वह भी एक गंभीर समस्या ही है. समीउद्दीन नीलू उत्तर प्रदेश के लखीमपुर ज़िले में विगत एक दशक से ज़्यादा समय से हिंदी दैनिक समाचार पत्र अमर उजाला में बतौर संवाददाता अपनी सेवा कर रहें हैं. शीर्षकान्तर न हो इसलिए मैं यह बताना चाहूँगा कि कैसे मेरे भाई को यूपी की बल्कि लखीमपुर-खीरी की एस पी ‘पद्मजा’ ने अपने सरकारी पॉवर का दुरुपयोग करते हुए मानवता के क्रूरतम, तंत्र के दुष्टतम कृत्य को मात्र अपने गलत व समाज विरोधी कार्यों को छिपने के उद्देश्य से, जान से मारने की कोशिश (एनकाउन्टर) की और अपने नीचे कार्य करने आले पुलिस वालों की सहायता के ज़रिये उन्हें वन्य जीव अधिनियम के केस में फ़र्ज़ी तरीक़े से जेल भिजवा दिया.

लेकिन कहते हैं कि सांच को आंच नहीं, बस कुछ ऐसा ही हुआ. लखनऊ मंडल और बरेली मंडल में वकीलों, किसानों, मजदूरों, पत्रकारों और हाकरों द्वारा किये गए जन-आन्दोलन के चलते प्रशासन के बालों में जूं रेंगी और उन्हें लगभग 9 दिन जेल में रहने के बाद राहत नसीब हुई. मैं जब उनसे मिलने जेल गया था (मैं जेल ही पहली मर्तबा गया था) वहां कैदियों की हालत देख मेरे तो रोये खडे हो गए. अपने भाई को जेल में इस तरह बंद देख मैं खूब रोया. मेरे सबसे छोटे चाचा जो कि पीलीभीत बार एसोशियेशन के अध्यक्ष है अपने सहयोगी वकीलों के साथ उन्हें देखने आये. इस तरह से उन्हें लगभग 9 दिनों के बाद प्रशासन ने जेल से रिहा करने के निर्देश दे दिए. मामला विधान सभा और विधानं परिषद् में भी उठा….
सम्बंधित खबर यहाँ पढ़ें…

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>आतंकवादियों का जनक, आतंकवादियों का आतंकवादी कौन ??? The Mother Of All Terrorists

>

जानना कहते हैं कि दुनियां भर में कथित रूप से जो आतंकवादी होने का ठप्पा लिए घूम रहे हैं उनका भी बाप कौन है? जानना चाहते हैं कि  आतंकवादियों का जनक, आतंकवादियों का आतंकवादी कौन ??? The Mother Of All Terrorists कौन है? तो इस लेख को ज़रूर पढ़ें !!!





हालाँकि यह लेख अंग्रेजी में है लेकिन मुझे यक़ीन है की यह सभी पाठकों को आसानी से समझ आ जाएगा !!! जल्द ही इसका हिंदी रूपांतरण आप तक मैं पहुंचाऊंगा !!!



The Mother Of All Terrorists
To Be Taken Quite Literally!
For those of you who want “FACTS” and “FIGURES” and have the intellect to judge ‘GOOD’ from ‘EVIL’ and the courage to know and say out the TRUTH….for the rest you should stop here!
Ever since the United States Army massacred 300 Lakotas in 1890, American forces have intervened elsewhere around the globe 100 times. Indeed the United States has sent troops abroad or militarily struck other countries’ territory 216 times since independence from Britain. Since 1945 the United States has intervened in more than 20 countries throughout the world.
Since World War II, the United States actually dropped BOMBS ON 23 COUNTRIES. These include: China 1945-46, Korea1950-53, China 1950-53, Guatemala 1954, Indonesia 1958, Cuba 1959-60, Guatemala 1960, Congo 1964, Peru 1965, Laos1964-73, Vietnam 1961-73, Cambodia 1969-70, Guatemala 1967-69, Grenada 1983, Lebanon 1984, Libya 1986, El Salvador1980s, Nicaragua 1980s, Panama 1989, Iraq 1991-1999, Sudan 1998, Afghanistan 1998, and Yugoslavia 1999.
Post World War II, the United States has also assisted in over 20 different coups throughout the world, and the CIA was responsible for half a dozen assassinations of political heads of state.
The following is a comprehensive summary of the imperialist strategy of the United States over the span of the past century:
Argentina-1890-Troops sent to Buenos Aires to protect business interests.
Chile-1891- Marines sent to Chile and clashed with nationalist rebels.
Haiti-1891-American troops suppress a revolt by Black workers on United States-claimed Navassa Island.
Hawaii-1893-Navy sent to Hawaii to overthrow the independent kingdom-Hawaii annexed by the United States.
Nicaragua-1894-Troops occupied Bluefields, a city on the Caribbean Sea, for a month.
China-1894-95-Navy, Army, and Marines landed during the Sino-Japanese War.
Korea-1894-96-Troops kept in Seoul during the war.
Panama-1895-Army, Navy, and Marines landed in the port city of Corinto.
China-1894-1900-Troops occupied China during the Boxer Rebellion.
Philippines-1898-1910-Navy and Army troops landed after the Philippines fell during the Spanish-American War; 600,000 Filipinos were killed.
Cuba-1898-1902-Troops seized Cuba in the Spanish-American War; the United States still maintains troops at Guantanamo Bay today.
Puerto Rico-1898-present-Troops seized Puerto Rico in the Spanish-American War and still occupy Puerto Rico today.
Nicaragua-1898-Marines landed at the port of San Juan del Sur.
Samoa-1899-Troops landed as a result over the battle for succession to the throne.
Panama-1901-14-Navy supported the revolution when Panama claimed independence from Colombia. American troops have occupied the Canal Zone since 1901 when construction for the canal began.
Honduras-1903-Marines landed to intervene during a revolution.
Dominican Rep-1903-04-Troops landed to protect American interests during a revolution.
Korea-1904-05-Marines landed during the Russo-Japanese War.
Cuba-1906-09-Troops landed during an election.
Nicaragua-1907-Troops landed and a protectorate was set up.
Honduras-1907-Marines landed during Honduras’ war with Nicaragua.
Panama-1908-Marines sent in during Panama’s election.
Nicaragua-1910-Marines landed for a second time in Bluefields and Corinto.
Honduras-1911-Troops sent in to protect American interests during Honduras’ civil war.
China-1911-41-Navy and troops sent to China during continuous flare-ups.
Cuba-1912-Troops sent in to protect American interests in Havana.
Panama-1912-Marines landed during Panama’s election.
Honduras-1912-Troops sent in to protect American interests.
Nicaragua-1912-33-Troops occupied Nicaragua and fought guerrillas during its 20-year civil war.
Mexico-1913-Navy evacuated Americans during revolution.
Dominican Rep-1914-Navy fought with rebels over Santo Domingo.
Mexico-1914-18-Navy and troops sent in to intervene against nationalists.
Haiti-1914-34-Troops occupied Haiti after a revolution and occupied Haiti for 19 years.
Dominican Rep-1916-24-Marines occupied the Dominican Republic for eight years.
Cuba-1917-33-Troops landed and occupied Cuba for 16 years; Cuba became an economic protectorate.
World War I-1917-18-Navy and Army sent to Europe to fight the Axis powers.
Russia-1918-22-Navy and troops sent to eastern Russia after the Bolshevik Revolution; Army made five
landings.
Honduras-1919-Marines sent during Honduras’ national elections.
Guatemala-1920-Troops occupied Guatemala for two weeks during a union strike.
Turkey-1922-Troops fought nationalists in Smyrna.
China-1922-27-Navy and Army troops deployed during a nationalist revolt.
Honduras-1924-25-Troops landed twice during a national election.
Panama-1925-Troops sent in to put down a general strike.
China-1927-34-Marines sent in and stationed for seven years throughout China.
El Salvador-1932-Naval warships deployed during the FMLN revolt under Marti.
World War II-1941-45-Military fought the Axis powers: Japan, Germany, and Italy.
Yugoslavia-1946-Navy deployed off the coast of Yugoslavia in response to the downing of an American
plane.
Uruguay-1947-Bombers deployed as a show of military force.
Greece-1947-49-United States operations insured a victory for the far right in national “elections.”
Germany-1948-Military deployed in response to the Berlin blockade; the Berlin airlift lasts 444 days.
Philippines-1948-54-The CIA directed a civil war against the Filipino Huk revolt.
Puerto Rico-1950-Military helped crush an independence rebellion in Ponce.
Korean War-1951-53-Military sent in during the war.
Iran-1953-The CIA orchestrated the overthrow of democratically elected Mossadegh and restored the Shah to power.
Vietnam-1954-The United States offered weapons to the French in the battle against Ho Chi Minh and the Viet Minh.
Guatemala-1954-The CIA overthrew the democratically elected Arbenz and placed Colonel Armas
in power.
Egypt-1956-Marines deployed to evacuate foreigners after Nasser nationalized the Suez Canal.
Lebanon-1958-Navy supported an Army occupation of Lebanon during its civil war.
Panama-1958-Troops landed after Panamanians demonstrations threatened the Canal Zone.
Vietnam-1950s-75-Vietnam War.
Cuba-1961-The CIA-directed Bay of Pigs invasions failed to overthrow the Castro government.
Cuba-1962-The Navy quarantines Cuba during the Cuban Missile Crisis.
Laos-1962-Military occupied Laos during its civil war against the Pathet Lao guerrillas.
Panama-1964-Troops sent in and Panamanians shot while protesting the United States presence in the
Canal Zone.
Indonesia-1965-The CIA orchestrated a military coup.
Dominican Rep-1965-66-Troops deployed during a national election.
Guatemala-1966-67-Green Berets sent in.
Cambodia-1969-75-Military sent in after the Vietnam War expanded into Cambodia.
Oman-1970-Marines landed to direct a possible invasion into Iran.
Laos-1971-75-Americans carpet-bomb the countryside during Laos’ civil war.
Chile-1973-The CIA orchestrated a coup, killing President Allende who had been popularly elected. The
CIA helped to establish a military regime under General Pinochet.
Cambodia-1975-Twenty-eight Americans killed in an effort to retrieve the crew of the Mayaquez, which had been seized.
Angola-1976-92-The CIA backed South African rebels fighting against Marxist Angola.
Iran-1980-Americans aborted a rescue attempt to liberate 52 hostages seized in the Teheran embassy.
Libya-1981-American fighters shoot down two Libyan fighters.
El Salvador-198-92-The CIA, troops, and advisers aid in El Salvador’s war against the FMLN.
Nicaragua-1981-90-The CIA and NSC directed the Contra War against the Sandinistas.
Lebanon-1982-84-Marines occupied Beirut during Lebanon’s civil war; 241 were killed in the American
barracks and Reagan “redeployed” the troops to the Mediterranean.
Honduras-1983-89-Troops sent in to build bases near the Honduran border.
Grenada-1983-84-American invasion overthrew the Maurice Bishop government.
Iran-1984-American fighters shot down two Iranian planes over the Persian Gulf.
Libya-1986-American fighters hit targets in and around the capital city of Tripoli.
Bolivia-1986-The Army assisted government troops on raids of cocaine areas.
Iran-1987-88-The United States intervened on the side of Iraq during the Iran-Iraq War.
Libya-1989-Navy shot down two more Libyan jets.
Virgin Islands-1989-Troops landed during unrest among Virgin Island peoples.
Philippines-1989-Air Force provided air cover for government during coup.
Panama-1989-90-27,000 Americans landed in overthrow of President Noriega; over 2,000 Panama
civilians were killed.
Liberia-1990-Troops entered Liberia to evacuate foreigners during civil war.
Saudi Arabia-1990-91-American troops sent to Saudi Arabia, which was a staging area in the war against
Iraq.
Kuwait-1991-Troops sent into Kuwait to turn back Saddam Hussein.
Somalia-1992-94-Troops occupied Somalia during civil war.
Bosnia-1993-95-Air Force jets bombed “no-fly zone” during civil war in Yugoslavia.
Haiti-1994-96-American troops and Navy provided a blockade against Haiti’s military government. The CIA restored Aristide to power.
Zaire-1996-97-Marines sent into Rwanda Hutus’ refugee camps in the area where the Congo revolution
began.
Albania-1997-Troops deployed during evacuation of foreigners.
Sudan-1998-American missiles destroyed a pharmaceutical complex where alleged nerve gas
components were manufactured.
Afghanistan-1998-Missiles launched towards alleged Afghan terrorist training camps.
Yugoslavia-1999-Bombings and missile attacks carried out by the United States in conjunction with
NATO in the 11 week war against Milosevic.
Iraq-1998-2001-Missiles launched into Baghdad and other large Iraq cities for four days. American jets
enforced “no-fly zone” and continued to hit Iraqi targets since December 1998.
These*100*instances of American military intervention did not include times when the United States:
(1) Deployed military police overseas;
(2) Mobilized the National Guard;
(3) Sent Navy ships off the coast of numerous countries as a show of strength;
(4) Sent additional troops to areas where Americans were already stationed;
(5) Carried out covert actions where American forces were not under the direct rule of an American command;
(6) Used small hostage rescue units;
(7) Used American pilots to fly foreign planes;
(8) Carried out military training and advisory programs which did not involve direct combat.
U. S. Government Assassination Plots
Following is a list of prominent foreign leaders whose assassination (or planning for same) the United States has been involved in since the end of Second World War. The list does not include several
assassinations in various parts of the world carried out by anti-Castro Cubans employed by CIA and headquartered in the United States:
LIST A: NON MUSLIMS
1949 – KIm Koo, Korean opposition leader
1950’s – CIA/Neo-Nazi hit list of numerous political figures in West Germany
1950’s Chou En-lai, Prime Minister of China, several attempts on his life
1950s (mid) – Claro M. Recto, Philippines opposition leader
1951 – Kim Il Sung, Premiere of North Korea
1955 – Jose’ Antonio Remon, President of Panama
1955 – Jawar Lal Nehru, Prime Minister of India
1959 and 1963 – Norodom Sihanouk, leader of Cambodia
1950s-70s – Jose Figueres, President of Costa Rica, two attempts on his life
1961 – Francois “Papa Doc”Duvalier, leader of Haiti
1961 – Patrice Lumumba , Prime Minister of Congo (Zaire)
1961 – Gen. Rafael Trujillo, leader of Dominican Republic
1963 – Ngo Dinh Diem, President of South Vietnam
1960s – Fidel Castro, President of Cuba, more than15 attempts on his life
1960s – Raul Castro, high official in government of Cuba
1965 – Francisco Caamanao, Dominican Republic opposition leader
1965 – Pierre Ngendandumwe, Prime Minister of Burundi
1965-6 – Charles de Gaulle, President of France
1967 – Che Guevara, Cuban leader
1970 – Salvadore Allende, President of Chile
1970 – General Rene Schneider, Commander-in-Chief of Army, Chile
1970s and 1981 – Gen. Omar Torrijos, leader of Panama
1972 – General Manuel Noriega, Chief of Panama Intelligence
1975 – Mobutu Sese Seko, President of Zaire
1976 – Michael Manley, Prime Minister of Jamaica
1983 – Miguel d’Escoto, Foreign Minister of Nicaragua
1984 – The nine commandantes of the Sandanista National Directorate
1980’s – Dr. Gerald Bull, Canadian Ballistics Scientist assassinated by Mossad in Belgium.
Partial List Of Muslim Leaders Assassinated Or Attempted Assassinations
1950’s Sukarno, President of Indonesia
1957 Gamal Abdul Nasser, President of Egypt
1960 Brigadier General, Abdul Karim Kassem, Leader of Iraq
1980-86 Muammar Qaddafi, Leader of Libya, several plots and attempts upon his life
1982 Ayatullah Khomeini, Leader of Iran
1983 General Ahmed Dlimi, Moroccan army Commander
1985 Sheikh Mohammed Hussein Fadllallah, Lebanese Shiite Leader (80 people killed in that attempt)
1991 Saddam Hussein, Leader of Iraq
Reference: Blum, William, “KILLING HOPE – U.S. Military and CIA Interventions Since World War II,” Appendix III U.S. Government Assassination Plots, page 453, Common Courage Press, Monroe, Maine 1995. ISBN 1-56751-052-3 Very likely Victims :
April 4, 1979 – Zulfiqar Ali Bhutto, Leader of Pakistan, for pursuing making of Nuclear Bomb.
August, 1988. General Ziaul Haq, Military Leader of Pakistan.
1995 – Murtaza Bhutto, Son of ZUlfiqar Ali Bhutto, Anti-American would-be Leader – Pakistan.
March 25, 1975 – King Faisal of Saudi Arabia through his Nephew, Saudi Arabia for imposing 1973 Oil Embargo.
August 24, 1999. Mullah Mohammad Omar, in Kandhar, Afghanistan.
|“À”List Of Known Assassination Plots
1950’s Sukarno, President of Indonesia
1957 Gamal Abdul Nasser, President
2001 Since early this year more than 40 Palestinian leaders assassinated through surrogate

sources : www.missionislam.com
—आपका सलीम ख़ान  

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>सलीम ख़ान तुम ‘जेहादी’ लगते हो, अपनी दाढ़ी -मूंछ मुंडवा लो !

>

हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम
वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता ||
जी हाँ, कुछ ऐसी ही कैफ़ियत हुई जब मुझे ये शब्द अपने बचपन के दोस्त के मुहं से सुना कि सलीम “तुम अपनी दाढ़ी मुंडवा लो क्यूंकि ऐसे में तुम जेहादी लगते हो” !
पिछले बरस तक मैं क्लीन शेव रहता था और पिछले कुछ महीने से मैंने दाढ़ी और मूंछे रख ली हैं. ब्लोगर बन्धुवों को बताने की आवश्यकता नहीं है क्यूंकि मैंने वह फ़ोटो अपनी प्रोफ़ाइल में कई महीनों से लगा रखी है.
दरअसल मैं आप सबको बता दूं कि पिछले हफ़्ते मैं अपने गाँव गया हुआ था. वहा गन्ने की खेती का काम करवाना था. मैं जब भी अपने गाँव जाता हूँ, अपने दोस्त “साहब सिंह” से सबसे पहले मिलता हूँ. हम दोनों जब मैं गाँव में होता हूँ तो ज़्यादातर साथ ही अपना वक़्त गुज़ारते हैं. और उसके मुहं से यह शब्द सुन कर मुझे बहुत आश्चर्य हुआ कि भारत के नॉन-मुस्लिम्स के ज़ेहन में किस क़दर भरा जा चुका है कि मुसलमान द्वारा किया जा रहा कोई भी अनिवार्य या गैर अनिवार्य धार्मिक कृत्य भी लोगों को नकारात्मक सोचने पर मजबूर कर रहा है. आखिर इसकी वजह क्या है? क्यूँ एक आम हिन्दू या नॉन-मुस्लिम इस तरह के कुत्सित विचार को अपने ज़ेहन में पाल रखा है जो सत्य के बिलकुल भी क़रीब नहीं है.
मैंने उससे पूछा -साहब, यह बताओ कि तुम्हें इस तरह का विचार कैसे आया कि दाढ़ी जेहादी ही बढ़ाते हैं??? और जेहाद का मतलब तुम्हे पता है क्या होता है ??? क्या दाढ़ी आशा राम बापू के नहीं है??? क्या दाढ़ी बाबा रामदेव के ने नहीं बढ़ा रखी है??? क्या आपके घर में यह पोस्टर (मैंने एक पोस्टर को इंगित करते हुए पूछा) में शिव जी के दाढ़ी नहीं है???
वह सकते में आ गया दर असल वह इस तरह के सवालों की बौछार से घबरा गया. वह और उसी जैसे अन्य सामान्य हिन्दू अपने मोहल्ले में आपस में ही सामान्य से और आधारविहीन तर्कों को पूछकर खुश होते रहते हैं और उन्हें मुझ जैसा कोई नहीं मिलता??? घबराईये नहीं, मैंने अपने दोस्त से सिर्फ सवाल ही पूछा था!!! और वह उत्तर विहीन हो गया!!!
फिर मैंने उसे सबसे पहले तो जेहाद का अर्थ बताया (पाठकगण  यहाँ पर चटका लगा कर जेहाद का अर्थ व परिभाषा जान सकते हैं और यह भी जान सकते हैं कि जेहाद का आदेश केवल कुर-आन में ही नहीं बल्कि भागवत गीता में भी लिखा है) फिर मुस्लिम को दाढ़ी क्यूँ रखना चाहिए यह बताया जो कि इस प्रकार है:
पहले मैं आपको बता दूं कि दाढ़ी रखने के बारे में कई तरह की मान्यताये है और उसके मुताल्लिक़ अलग अलग तरह के फतवे !!
आमतौर से इस्लाम ने किसी काम को करने अथवा नहीं करने की दृष्टि से पाँच भागों में बांटा है
(1) फ़र्ज़ अर्थात अनिवार्य(2) मुस्तहब अर्थात पसन्दीदा (3) मुबाह अर्थात जिसकी अनुमति हो (4) मकरूह अर्थात घृणित, नापसन्दीदा (5) ‘हराम अर्थात निषेध
वक़्त की कमीं के चलते कुल मिला कर दाढ़ी के लिए जो निर्देश हैं वह इस तरह हैं कि कोई मुसलमान अगर दाढ़ी नहीं रखता तो वह मकरूह है अर्थात न ही दाढ़ी न रखने की इजाज़त है और न ही दाढ़ी मुंडाना हराम है.
और चूंकि दाढ़ी हमारे प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद (सल्ल०) रखते थे और वह पसंद भी करते थे इसलिए हम बतौर सुन्नत (वह कार्य करना जो रसूल (सल्ल०) किया करते थे) दाढ़ी मुंडाते नहीं हैं और हम मुसलमानों को चाहिए कि दाढ़ी रखे…
क्या आपको मैं जेहादी लगता हूँ????? सोच समझ के जवाब दीजिएगा????

Filed under: स्वच्छ सन्देश

>देश जिनमें अधिकतम मुसलमान रहते हैं !!! (मुसलमान जनसंख्या)

>

मैं पिछले कई हफ़्तों से इंटरनेट और ब्लोगिंग से थोड़ा दूर-दूर सा था. लेकिन कहते हैं न नशा किसी भी चीज़ का हो वह कभी ख़त्म नहीं होता है, शायेद अंत तक ! और नशे पर लाख अपनी व्यस्तताओं के चलते उस पर थोड़ा बहुत क़ाबू पा लें, लाख चाहे आप अपनी इन्द्रियों पर अंकुश लगा लें, वह कुछ समय उपरान्त परिवर्तन की बयार में आपके समीप आ खड़ा होता है. बस कुछ इसी तरह का नशा है, ब्लोगिंग का !! कहते हैं न “दूरियां इस क़दर हुई कि फ़ासले मिट से गए” दूरियां जितनी ख़त्म हुई हैं, दरअसल उतनी ही बढ़ी भी हैं।
तो आज मैं आपको कुछ बेहद सामान्य लेकिन बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी देना चाहता हूँ. मैं आपक्को बताऊंगा कि दुनियां के किस देश में अधिकतम मुसलमान रहते हैं. ये तो सभी जानते हैं कि दुनियां में किसी भी अरब देश से ज़्यादा यानि सबसे ज़्यादा मुसलमान इंडोनेशिया में रहते हैं जिनकी तादात है: 19,52,72,000 (उन्नीस करोड़ बावन लाख बहत्तर हज़ार)
आईये टॉप 10 देश के बारे में जान लें जहाँ सर्वाधिक मुस्लिम रहते हैं:  
पाकिस्तान 16,08,29,450
भारत 15,45,00,000
बंग्लादेश 12,96,81,509
तुर्की 7,27,50,000
मिस्र 6,95,60,000
ईरान 6,88,05,000
नाइजीरिया 6,57,50,000
चीन 3,91,11,000
इथियोपिया 3,60,32,160
आपने ये आंकड़े देखे ! आपको कुछ समझ आया, अगर नहीं तो मैं बता दूं कि अगर भारतपाकिस्तान और बांग्लादेश जुदा न होते तो आज सबसे ज़्यादा मुस्लिम हिन्दोस्तान में ही होते अर्थात भारत ही दुनियां का वह देश होता जहाँ सर्वाधिक मुस्लिम जनसँख्या होती!!!
आंकड़ों को अगर और विस्तृत रूप से देखें तो पाएंगे कि भारत पकिस्तान और बांग्लादेश की कुल जनसँख्या लगभग 44 करोड़ से ज़्यादा होती है!!!
हाज़िर होऊंगा कुछ इसी तरह की जानकारी के साथ… तब तक के लिए
अल्लाह हाफिज़ !!!
— सलीम ख़ान  

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>’हिंदू’ शब्द की परिभाषा

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भारत वर्ष में रह कर अगर हम कहें की हिंदू शब्द की परिभाषा क्या हो सकती है? हिंदू शब्द के उद्भव का इतिहास क्या है? आख़िर क्या है हिंदू? तो यह एक अजीब सा सवाल होगा
लेकिन यह एक सवाल ही है कि जिस हिन्दू शब्द का इस्तेमाल वर्तमान में जिस अर्थ के लिए किया जा रहा है क्या वह सही है ?
मैंने पीस टीवी पर डॉ ज़ाकिर नाइक का एक स्पीच देखा, उन्होंने किस तरह से हिंदू शब्द की व्याख्या की मुझे कुछ कुछ समझ में आ गया मगर पुरी संतुष्टि के लिए मैंने अंतरजाल पर कई वेबसाइट पर इस शब्द को खोजा तो पाया हाँ डॉ ज़ाकिर नाइक वाकई सही कह रहे हैं. हिंदू शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई, कब हुई और किसके द्वारा हुई? इन सवालों के जवाब में ही हिंदू शब्द की परिभाषा निहित है
यह बहुत ही मजेदार बात होगी अगर आप ये जानेंगे कि हिंदू शब्द न ही द्रविडियन न ही संस्कृत भाषा का शब्द है. इस तरह से यह हिन्दी भाषा का शब्द तो बिल्कुल भी नही हुआ. मैं आप को बता दूँ यह शब्द हमारे भारतवर्ष में 17वीं शताब्दी तक इस्तेमाल में नही था. अगर हम वास्तविक रूप से हिंदू शब्द की परिभाषा करें तो कह सकते है कि भारतीय (उपमहाद्वीप) में रहने वाले सभी हिंदू है चाहे वो किसी धर्म के हों. हिंदू शब्द धर्म निरपेक्ष शब्द है यह किसी धर्म से सम्बंधित नही है बल्कि यह एक भौगोलिक शब्द है. हिंदू शब्द संस्कृत भाषा के शब्द सिन्धु का ग़लत उच्चारण का नतीजा है जो कई हज़ार साल पहले पर्सियन वालों ने इस्तेमाल किया था. उनके उच्चारण में ‘स’ अक्षर का उच्चारण ‘ह’ होता था

हाँ….मैं, सलीम खान हिन्दू हूँ !!!
हिंदू शब्द अपने आप में एक भौगोलिक पहचान लिए हुए है, यह सिन्धु नदी के पार रहने वाले लोगों के लिए इस्तेमाल किया गया था या शायेद इन्दुस नदी से घिरे स्थल पर रहने वालों के लिए इस्तेमाल किया गया था। बहुत से इतिहासविद्दों का मानना है कि ‘हिंदू’ शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम अरब्स द्वारा प्रयोग किया गया था मगर कुछ इतिहासविद्दों का यह भी मानना है कि यह पारसी थे जिन्होंने हिमालय के उत्तर पश्चिम रस्ते से भारत में आकर वहां के बाशिंदों के लिए इस्तेमाल किया था।

धर्म और ग्रन्थ के शब्दकोष के वोल्यूम # 6,सन्दर्भ # 699 के अनुसार हिंदू शब्द का प्रादुर्भाव/प्रयोग भारतीय साहित्य या ग्रन्थों में मुसलमानों के भारत आने के बाद हुआ था

भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘द डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया’ में पेज नम्बर 74 और 75 पर लिखा है कि “the word Hindu can be earliest traced to a source a tantrik in 8th century and it was used initially to describe the people, it was never used to describe religion…” पंडित जवाहरलाल नेहरू के मुताबिक हिंदू शब्द तो बहुत बाद में प्रयोग में लाया गया। हिन्दुज्म शब्द कि उत्पत्ति हिंदू शब्द से हुई और यह शब्द सर्वप्रथम 19वीं सदी में अंग्रेज़ी साहित्कारों द्वारा यहाँ के बाशिंदों के धार्मिक विश्वास हेतु प्रयोग में लाया गया।

नई शब्दकोष ब्रिटानिका के अनुसार, जिसके वोल्यूम# 20 सन्दर्भ # 581 में लिखा है कि भारत के बाशिंदों के धार्मिक विश्वास हेतु (ईसाई, जो धर्म परिवर्तन करके बने को छोड़ कर) हिन्दुज्म शब्द सर्वप्रथम अंग्रेज़ी साहित्यकारों द्वारा सन् 1830 में इस्ल्तेमल किया गया था

इसी कारण भारत के कई विद्वानों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि हिन्दुज्म शब्द के इस्तेमाल को धर्म के लिए प्रयोग करने के बजाये इसे सनातन या वैदिक धर्म कहना चाहिए. स्वामी विवेकानंद जैसे महान व्यक्ति का कहना है कि “यह वेदंटिस्ट धर्म” होना चाहिए.

इस प्रकार भारतवर्ष में रहने वाले सभी बाशिंदे हिन्दू हैं, भौगोलिक रूप से! चाहे वो मैं हूँ या कोई अन्य.

विवेकानन्द

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>स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़ and स्वच्छ सन्देश: विज्ञान की आवाज़

>नए वर्ष की शुभकामनाओं के साथ मैं सहर्ष आप सभी ब्लागर बन्धुवों को यह सूचित करना चाहता हूँ कि मैंने एक नए ब्लॉग को शुरू किया है जो कि विज्ञान विषयक रहेगा! ब्लॉग  का  नाम है:

यहाँ चटका लगा कर आप नए ब्लोग पर पहुँच सकते हैं  !

आप सबके स्नेह का आकांक्षी !

सलीम ख़ान
9838659380

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>आधुनिक सशक्तिकृत नारी नारीत्व के पैमाने पर मुग़लकालीन तवायफ़ों से भी निचले दर्ज़े तक पहुँच चुकी है!

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वर्तमान में हमारे भारतीय समाज में जो पश्चिमीकरण का अन्धानुकरण हो रहा है वह नक्सलवाद से भी बड़ा ख़तरा है. पश्चिम में नारी सशक्तिकरण के लुभावने नारे के पीछे उसकी क्या गत हो चुकी है वह किसी से छिपी नहीं है. हम यह अच्छी तरह जानते हैं की पश्चिम में वेश्यावृत्ति, खुले तौर पर सेक्स का समर्थन, लीव इन रिलेशनशिप वगैरह वगैरह आधुनिक सशक्तिकृत नारी का वह काला सच है जिसके पैरों तले उसकी अस्मिता की पूर्णतया ‘वाट’ लग चुकी है. यह मेरा आरोप नहीं है कि आधुनिक सशक्तिकृत नारी नारीत्व के पैमाने पर मुग़लकालीन तवायफ़ों से भी नीचले दर्जे तक पहुँच चुकी है, बल्कि नारी जाति के प्रति अफ़सोस है कि उसे क्या चुनना है अपना नारीत्व जिसके लिए ईश्वर ने उसे बनाया है या फ़िर आधुनिकता के वह पैमाने जिसमें उसका नारीत्व चीथड़े चीथड़े होता जा रहा है. इसमें पुरुष की भी कम ग़लती नहीं है. वह स्वयं इस दुर्गति के लिए उतना ही ज़िम्मेदार है जितनी कि नारी क्यूंकि दोनों को यह सोचना पड़ेगा क्या वर्तमान पश्चिमी तहज़ीब में वह दम है जो समाज में प्राकृतिक नियमों के प्रति इमानदारी का दावा कर सके और उसे बरक़रार रख सके.

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पश्चिमी समाज औरतों को ऊपर उठाने का झूठा दावा करता है औरतों की आज़ादी का पश्चिमी दावा एक ढोंग है, जिनके सहारे वो उनके शरीर का शोषण करते हैं, उनकी आत्मा को गंदा करते हैं और उनके मान सम्मान को उनसे वंचित रखते हैं पश्चिमी समाज दावा करता है की उसने औरतों को ऊपर उठाया इसके विपरीत उन्होंने उनको रखैल और समाज की तितलियों का स्थान दिया है, जो केवल जिस्मफरोशियों और काम इच्छुओं के हांथों का एक खिलौना है जो कला और संस्कृति के रंग बिरंगे परदे के पीछे छिपे हुए हैं

नारी सशक्तिकरण का अगर यही मतलब है कि वह कम से कमतर कपडे पहने तो यह तय मानिये कि छेड़छाड़ और बलात्कार की घटनाओं पर लगाम लगाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होगा. हम सब जानते हैं कि अमेरिका में बलात्कार की दर सबसे ज़्यादा है.
आधुनिक वैश्विय सभ्यता में प्राचीन काल में नारी की दशा एवम् स्तिथियों की प्रतिक्रिया के फलस्वरूप नारी की गतिशीलता अतिवादी के हत्थे चढ़ गयी. नारी को आज़ादी दी गयी, तो बिलकुल ही आजाद कर दिया गया. पुरुष से समानता दी गयी तो उसे पुरुष ही बना दिया गया. पुरुषों के कर्तव्यों का बोझ भी उस पर डाल दिया गया. उसे अधिकार बहुत दिए गए मगर उसका नारीत्व छीन कर. इस सबके बीच उसे सौभ्ग्य्वाश कुछ अच्छे अवसर भी मिले. अब यह कहा जा सकता है की पिछले डेढ़ सदी में औरत ने बहुत कुछ पाया है, बहुत तरक्की की है, बहुत सशक्त हुई है. उसे बहुत सारे अधिकार प्राप्त हुए हैं. कौमों और राष्ट्रों के उत्थान में उसका बहुत बड़ा योगदान रहा है जो आज देख कर आसानी से पता चलता है.
लेकिन यह सिक्के का केवल एक पहलू है जो बेशक बहुत अच्छा, चमकीला और संतोषजनक है. लेकिन जिस तरह सिक्के के दुसरे पहलू को देखे बिना यह फ़ैसला नहीं किया जा सकता है कि वह खरा है या खोटा. हमें औरत के हैसियत के बारे में कोई फ़ैसला करना भी उसी वक़्त ठीक होगा जब हम उसका दूसरा रुख़ भी ठीक से, गंभीरता से, ईमानदारी से देखें. अगर ऐसा नहीं किया और दूसरा पहलू देखे बिना कोई फ़ैसला कर लिया जाये तो नुक्सान का दायरा ख़ुद औरत से शुरू होकर समाज, व्यवस्था और पूरे विश्व तक पहुँच जायेगा.
आईये देखें सिक्के का दूसरा पहलू…
उजाले और चकाचौंध के भीतर खौफ़नाक अँधेरे
नारी जाति के वर्तमान उपलब्धियां- शिक्षा, उन्नति, आज़ादी, प्रगति और आर्थिक व राजनैतिक सशक्तिकरण आदि यक़ीनन संतोषजनक, गर्वपूर्ण, प्रशंसनीय और सराहनीय है. लेकिन नारी स्वयं देखे कि इन उपलब्धियों के एवज़ में नारी ने अपनी अस्मिता, मर्यादा, गौरव, गरिमा, सम्मान व नैतिकता के सुनहरे और मूल्यवान सिक्कों से कितनी बड़ी कीमत चुकाई है. जो कुछ कितना कुछ उसने पाया उसके बदले में उसने कितना गंवाया है. नई तहजीब की जिस राह पर वह बड़े जोश और ख़रोश से चल पड़ी- बल्कि दौड़ पड़ी है- उस पर कितने कांटे, कितने विषैले और हिंसक जीव-जंतु, कितने गड्ढे, कितने दलदल, कितने खतरे, कितने लूटेरे, कितने राहजन और कितने धूर्त मौजूद हैं.
व्यापक अपमान
  • समाचार पत्रों, पत्रिकाओं में रोज़ाना औरतों के नंगे, अध्-नंगे, बल्कि पूरे नंगे जिस्म का अपमानजनक प्रकाशन

  • सौन्दर्य-प्रतियोगिता… अब तो विशेष अंग प्रतियोगिता भी… तथा 

  • फैशन शो/ रैंप शो के कैट-वाक् में अश्लीलता का प्रदर्शन और टीवी चैनल द्वारा ग्लोबली प्रसारण  

  • कारपोरेट बिज़नेस और सामान्य व्यापारियों/उत्पादकों द्वारा संचालित विज्ञापन प्रणाली में औरत का बिकाऊ नारीत्व

  • सिनेमा टीवी के परदों पर करोडों-अरबों लोगों को औरत की अभद्र मुद्राओं में परोसे जाने वाले चल-चित्र, दिन-प्रतिदिन और रात-दिन

  • इन्टरनेट पर पॉर्नसाइट्स. लाखों वेब-पृष्ठों पे औरत के ‘इस्तेमाल’ के घिनावने और बेहूदा चित्र 

  • फ्रेंडशिप क्लब्स, फ़ोन सर्विस द्वारा दोस्ती.

यौन शोषण (Sexual Exploitation)
  • देह व्यापार, गेस्ट हाउसों, सितारा होटलों में अपनी ‘सेवाएँ’ अर्पित करने वाली संपन्न व अल्ट्रामाडर्न कॉलगर्ल्स.

  • रेड लाइट एरियाज़ में अपनी सामाजिक बेटीओं-बहनों की ख़रीद-फ़रोख्त. वेश्यालयों को समाज और क़ानून या प्रशासन की ओर से मंजूरी

  • सेक्स-वर्कर, सेक्स-ट्रेड, सेक्स-इंडस्ट्री जैसे आधुनिक नामों से नारी-शोषण तंत्र की इज्ज़त-अफ़ज़ाई व सम्मानिकरण

  • नाईट क्लब और डिस्कोथेक में औरतों और युवतियों के वस्त्रहीन अश्लील डांस, इसके छोटे रूप में सामाजिक संगठनों के रंगरंज कार्यक्रमों में लड़कियों के द्वारा रंगा-रंग कार्यक्रम को ‘नृत्य-साधना’ का नाम देकर हौसला-अफ़ज़ाई

  • हाई-सोसाईटी गर्ल्स, बार-गर्ल्स के रूप में नारी यौवन व सौंदय्र की शर्मनाक दुर्गति.

यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment)
  • फब्तियों की बेशुमार घटनाएँ.

  • छेड़खानी की असंख्य घटनाएँ, जिनकी रिपोर्ट नहीं होती. देश में सिर्फ दो वर्षों में (2005-06) 36,617 घटनाएँ. 

  • कार्य-स्थल पर यौन उत्पीड़न. (Women unsafe at work place) 

  • सड़कों, गलियों, बाज़ारों, दफ़्तरों, अस्पतालों, चलती कारों, दौड़ती बसों आदि में औरत असुरक्षित. (Women unsafe in the city) 

  • ऑफिस में नौकरी बहाल रहने के लिए या प्रमोशन के लिए बॉस द्वारा महिला कर्मचारी का यौन शोषण 

  • टीचर या ट्यूटर द्वारा छात्राओं का यौन उत्पीड़न. 

  • नर्सिंग होम/अस्पतालों में मरीज़ महिलाओं का यौन-उत्पीड़न.

यौन-अपराध
  • बलात्कार- दो वर्ष की बच्ची से लेकर अस्सी साल की वृद्धा से- ऐसा नैतिक अपराध, जिसकी ख़बर अख़बारों में पढ़कर किसी के कानों में जूं तक नहीं रेंगती.मानों किसी गाड़ी से कुचल कर कोई चुहिया मर गयी हो.

  • ‘सामूहिक बलात्-दुष्कर्म’ इतने आम हो गएँ हैं की समाज ने ऐसी दुर्घटनाओं की ख़बर पढ़-सुन कर बेहिसी और बेफ़िक्री का खुद को आदि बना लिया है. 

  • युवतियों, बालिकाओं, किशोरियों का अपहरण, उनके साथ हवास्नाक ज़्यादती, सामूहिक ज्यात्दी और हत्या भी… 

  • सिर्फ़ दो वर्षों (2005-06) आबुरेज़ी (बलात्कार) की 35,195 वाक़ियात. अनरिपोर्टेड घटनाएँ शायेद दस गुना ज़्यादा हों. 

  • सेक्स-माफिया द्वारा औरतों के बड़े-बड़े संगठित कारोबार. यहाँ तक कि विधवा आश्रम की विधवा भी सुरक्षित नहीं. 

  • विवाहित स्त्रियों का पराये मर्द से सम्बन्ध (Extra Marital Relations) इससे जुड़े अन्य अपराध हत्याएं और परिवार का टूटना-बिखरना आदि.

औरतों पर पारिवारिक यौन अत्याचार (कुटुम्बकीय व्यभिचार) व अन्य ज्यातादियाँ
  • बाप-बेटी, बहन-भाई के पवित्र रिश्ते भी अपमानित.

  • आंकडों के अनुसार बलात-दुष्कर्म में लगभग पचास प्रतिशत निकट सम्बन्धी मुल्व्वस (Incest).

  • दहेज़-सम्बन्धी अत्याचार व उत्पीड़न. जलने, हत्या कर देने आत्म-हत्या पर मजबूर कर देने, सताने, बदसुलूकी करने, मानसिक यातना देने की बेशुम्मार घटनाएँ. कई बहनों का एक साथ सामूहिक आत्महत्या दहेज़ के दानव की देन है.

कन्या भ्रूण-हत्या (Female Foeticide) और कन्या वध (Female Infanticide)
  • बच्ची का क़त्ल उसके पैदा होने से पहले माँ के पेट में ही. कारण: दहेज़ व विवाह का क्रूर और निर्दयी शोषण-तंत्र. 

  • पूर्वी भारत में एक इलाके में यह रिवाज़ है कि अगर लड़की पैदा हुई तो पहले से तयशुदा ‘फीस’ के एवज़ में दाई उसकी गर्दन मरोड़ देगी और घूरे में दबा आएगी. कारण: वही दहेज़ व विवाह का क्रूर और निर्दयी शोषण-तंत्र और शादी के नाकाबिले बर्दाश्त खर्चे. कन्या वध के इस रिवाज़ के प्रति नारी-सम्मान के ध्वजावाहकों की उदासीनता.

सहमती यौन-क्रिया (Fornication)
  • अविवाहित रूप से नारी-पुरुष के बीच पति-पत्नी का सम्बन्ध (Live-in-Relation) पाश्चात्य सभ्यता का ताज़ा तोह्फ़ा. स्त्री का सम्मानपूर्ण ‘अपमान’

  • स्त्री के नैतिक अस्तित्व के इस विघटन में न क़ानून को कुछ लेना देना, न ही नारी जाति के शुभ चिंतकों का कुछ लेना देना, न पूर्वी सभ्यता के गुण-गायकों का कुछ लेना देना, और न ही नारी स्वतंत्रता आन्दोलन के लोगों का कुछ लेना देना. 

  • सहमती यौन-क्रिया (Fornication) की अनैतिकता को मानव-अधिकार (Human Right) नामक ‘नैतिकता का मक़ाम हासिल.

  • कंडोम इस्तेमाल करो और जो जी में आये करो बस आअवश्य्क्त है आपसी सहमती की. बस ! 

नारी कि उपरोक्त दशा हमें सोचने पर मजबूर करती है और आत्म-ग्लानी होती है कि हम मूक-दर्शक बने बैठे हैं. यह ग्लानिपूर्ण दुखद चर्चा हमारे भारतीय समाज और आधुनिक तहज़ीब को अपनी अक्ल से तौलने के लिए तो है ही साथ ही नारी को स्वयं यह चुनना होगा कि गरीमा पूर्ण जीवन जीना है या जिल्लत से.
नारी जाति की उपरोक्त दयनीय, शोचनीय, दर्दनाक व भयावह स्थिति के किसी सफल समाधान तथा मौजूदा संस्कृति सभ्यता की मूलभूत कमजोरियों के निवारण पर गंभीरता, सूझबूझ और इमानदारी के साथ सोच-विचार और अमल करने के आव्हान के भूमिका-स्वरुप है.
पहले संक्षेप में यह देखते चले कि नारी दुर्गति, नारी-अपमान, नारी-शोषण के समाधान अब तक किये जा रहे हैं वे क्या हैं? मौजूदा भौतिकवादी, विलास्वादी, सेकुलर (धर्म-उदासीन व ईश्वर विमुख) जीवन-व्यवस्था ने उन्हें सफल होने दिया है या असफल.
क्या वास्तव में इस तहज़ीब के मूल-तत्वों में इतना दम, सामर्थ्य व सक्षमता है कि चमकते उजालों और रंग-बिरंगी तेज़ रोशनियों की बारीक परतों में लिपटे गहरे, भयावह, व्यापक और जालिम अंधेरों से नारी जाति को मुक्त करा सकें???
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चलते-चलते
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आईये हम सब नए साल के मौक़े पर नारी के नारीत्व की रक्षा के प्रति वचनवद्ध होकर उसकी इज्ज़त और आबरू की हिफाज़त की क़सम खाएं ! आप सबको नया साल 2010 बहुत बहुत मुबारक हो!  
सलीम ख़ान

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>HINDI BLOGGING TIPS: न केवल पाठक, न टिपण्णी- पोस्ट वही जो ‘प्रारंभ से अंत तक’ पाठक को पढने पर मजबूर कर दे! और टिपण्णी करने पर भी! आईये जाने कैसे?

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जी हाँ, पोस्ट की असल ख़ूबी तो यही है कि उसे पाठक शुरू से आखिर तक पढ़ डाले और पाठक इतना सम्मोहित हो जाये कि वह जब तक पूरा का पूरा पढ़ न ले, उसे चैन न आये और क्या ही खूब हो कि पाठक आदि से अंत तक उसे पढ़ भी ले और टिपण्णी करने पर मजबूर हो जाये.

ब्लोगिंग वर्तमान में अंतर्जाल पर सबसे जयादा पसंद किया जाने वाला एक संवाद-स्थल है, यही नहीं इसके माध्यम से वे लोग जयादा लाभान्वित हो रहे हैं जो लेखक, रचनाकार आदि बनने के सपने तो देखते हैं और लिखते भी हैं लेकिन उनको प्रकाशित करवाने में उन्हें लाले आ जाते हैं. ब्लोगिंग ने प्रकाशन के पारंपरिक माध्यम के एकाधिकार  में सेंध सी लगा दी है.
ज़्यादातर होता यूँ है कि ब्लोगर बंधू चिट्ठे पर जाते है और पोस्ट ओपन भी करते हैं लेकिन उस पोस्ट को पढ़ते नहीं है और सिर्फ शीर्षक पढ़ कर ही अपनी टिपण्णी कर देते हैं या अगर यूँ कहें कि पाठक अक्सर केवल अपनी टिपण्णी करने ही चिट्ठे पर आते है तो अतिश्योक्ति न होगी. वहीँ दूसरी ओर कुछ ब्लोगर की जमात ऐसी भी है कि वे पढ़ते तो है मगर उस पर टिपण्णी करने से कतराते हैं. भले ही वह पोस्ट उन्हें पसंद आ रही हो या नहीं.

अब सवाल ऐसा है कि कोई ऐसा क्या किया जाये कि जो पाठक को पूरा का पूरा पढ़े और वह यहाँ तक सम्मोहित हो जाये कि टिपण्णी करे बिना उसे चैन न आये. तो जनाब आपको बस नीचे लिखे टिप्स पर कुछ ध्यान देना है;

शीर्षक ऐसा कि पाठक को खींच लायें

अर्थात शीर्षक ऐसा हो कि प्रथम दृष्टया में ही पाठक को उसे पोस्ट तक खींच लाये. आप जो कुछ भी लिखना चाहते है उसका शीर्षक इतना सशक्त हो कि पाठक की नज़र उस पर पड़ते ही उस क्लिक करने पर मजबूर कर दे. ज़रूरी नहीं कि पोस्ट लिखने से पहले ही शीर्षक का नामकरण किया जाये. अगर आपको लेख लिखने से पहले शीर्षक समझ नहीं आ रहा तो कोई चिंता की बात नहीं है, आप पूरा लेख लिखने के बाद भी शीर्षक बना सकते हैं बल्कि पूरा लेख लिखने के बाद तो शीर्षक और भी सशक्त बनाया जा सकता है.

लेखांश सशक्त व सन्दर्भ के आसपास ही हो

लेखांश हमेशा सन्दर्भ के आसपास हो और शीर्षक से मेल खाता हुआ क्यूंकि अगर ऐसा न हुआ तो पाठक आयेंगे ज़रूर लेकिन वे पढ़े बिना ही चले जायेंगे क्यूंकि शीर्षक से सम्बंधित लेखांश उन्हें नहीं मिल पाता है. तो यह ध्यान भी देना बहुत ज़रूरी है कि लेखांश सशक्त व सन्दर्भ और शीर्षक के आसपास ही हो.
अपनी भाषा-शैली में सरलता रखे
हम ब्लोगर अंतरजाल पर ही लिख सकते हैं और अंतरजाल पर हर क़िस्म के पाठक आते है; कुछ भाषा के ज्ञानी भी होते हैं तो कुछ जो भाषा की गहनता से लगभग अनजान रहते हैं. हमें अपनी भाषा और शैली को इस तरह से बना कर रखना होगा जिससे हम ज़्यादा से ज़्यादा पाठक तक अपनी पहुँच बना सकें. आपको बड़े-बड़े व्याकरण के शब्दों से परहेज़ करते हुए सरल शब्दों को प्रयोग करना चाहिए जिससे कि हर क़िस्म के पाठक आसानी से पढ़ सकें और समझ सकें. भाषा शैली में सरलता इसलिए भी ज़्यादा महत्व रखती है क्यूंकि हमें अत्यधिक पाठक तक अपनी पकड़ बनानी होती है.
वाक्य और पैराग्राफ़ छोटे हों
अंतरजाल सर्फ़ करते वक़्त पाठक ज़्यादा समय तक एक ही विषयवस्तु पर नहीं टिकते इसलिए चाहिए कि लिखते समय आपके लेख में वाक्य और पैराग्राफ़ छोटे और मुद्दे पर ही केन्द्रित हों. पाठकों का ध्यान आकर्षण करने के लिए इसके अलावा आप बुलेटेड पॉइंट का प्रयोग कर सकते हैं.
अपना लेख संवादी बनायें
चूँकि हम ब्लॉग में जो कुछ लिखते हैं उसके जवाब में हमें टिप्पणियों की भी दरकार होती है बल्कि अधिकांशतः लेखक तो मात्र टिप्पणियों के लिए ही लिखते हैं. इसलिए हमें अपने लेख को संवाद-योग्य बनाना चाहिए ताकि पाठक पढ़ते ही संवाद स्थापित करने को उत्सुक हो जाए.
लेखन में अपने व्यक्तित्व को समाहित करें
कोशिश करें कि लेख में व्यक्तिगत अनुभव की झलक दिखाई पढ़े. आपके वे अनुभव जो लेख से सम्बंधित हो अवश्य अंकित करें. इसके लिए आप प्रयोगात्मक चुटकुले प्रयोग करें जिससे पाठक पढ़ते वक़्त खुश हो जाएँ. पाठक को लगे कि लेखक ने वास्तविकता के साथ लिखा है.
हालाँकि उपरोक्त सभी टिप्स ज़रूरी नहीं कि एक ही लेख में समाहित कर लिए जाएँ, यह निर्भर करता है कि आप क्या लिखा रहें है!
आज के लिए बस इतना ही!! फ़िर हाज़िर होऊंगा कुछ नया लेकर!!!
आपका
सलीम ख़ान
मोबाइल::: 9838659380
वार्तालाप का समय सुबह १०:०० बजे से पहले और शाम ६:०० बजे के बाद

दिनांक 21/12/2009, दिन सोमवार समय 11: 00 को साईंस ब्लोगर्स एसोसियेशन पर मेरा पहला लेख पढ़ना न भूलें! धन्यवाद !!

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लेख सन्दर्भ

सलीम खान